जैसलमेर का भाटी राजवंश (यादव वंश) राजस्थान का इतिहास का एक प्राचीन और गौरवशाली अध्याय है, जिसकी स्थापना भाटी राजपूतों द्वारा मरुस्थलीय क्षेत्र में की गई थी। इस वंश ने जैसलमेर दुर्ग के निर्माण, व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अध्ययन से पश्चिमी राजस्थान के राजनीतिक एवं सांस्कृतिक विकास की स्पष्ट समझ मिलती है।
जैसलमेर का भाटी राजवंश (यादव वंश)
वंश–परिचय
- जैसलमेर का भाटी राजवंश स्वयं को चन्द्रवंशीय यादव भगवान श्रीकृष्ण का वंशज मानता है
- भाटी / भट्टी यही वंश–नाम है, जो आगे चलकर जैसलमेर के भाटी राजपूतों के रूप में प्रसिद्ध हुआ
भाटी वंश की प्रारम्भिक स्थापना
- भाटी / भट्टी (वंश–संस्थापक)
- काल – लगभग 285 ई.
- ‘भटनेर’ दुर्ग का निर्माण कराया
- (वर्तमान हरियाणा–राजस्थान सीमा क्षेत्र)
मंगलराव भाटी
- काल – लगभग 4वीं–5वीं शताब्दी
- तन्नौट (तनोट) को भाटी वंश की दूसरी राजधानी बनाया
- तनोट दुर्ग का निर्माण ‘केहर’ शिल्पी द्वारा कराया
देवराज भाटी
- काल – लगभग 5वीं शताब्दी
- लोढवा / लोड़वा (लोद्रवा) को पंवार शासकों से छीनकर राजधानी बनाया
रज व गज –
- आगमन काल – 6वीं–7वीं शताब्दी
- मूल क्षेत्र – पंजाब
- निवास – बल्लमाड़ मरु क्षेत्र
- भाटी वंश के प्रवर्तक माने जाते हैं
लोद्रवा शिलालेख –
- तिथि – 1157 ई.
- भाटी राजाओं की वंशावली का उल्लेख
- रज व गज को वंश–प्रवर्तक बताया गया
- रज–गज के बाद पंजाब के शासक क्रम
- शालिवाहन
- बलंद
- भाटी मंगलराव
- मंजसराव
निष्कर्ष –
- भाटी वंश का क्रमिक स्थानांतरण
- पंजाब से जैसलमेर–मरु क्षेत्र की ओर
विजयराज भाटी –
- शासनकाल – लगभग 1165 ई.
- यहीं से भाटियों का अपेक्षाकृत व्यवस्थित इतिहास मिलता है
- धनावा शिलालेख –
- तिथि – 1176 ई.
- उपाधि – महाराजा
- उपाधि – परम भट्टारक
- उपाधि – परमेश्वर
- उपाधि – महाराजाधिराज
- इस काल तक भाटी शक्ति मरुस्थली क्षेत्र में संगठित हो चुकी थी
भोज भाटी –
- काल – 12वीं शताब्दी (उत्तरार्ध)
- विजयराज का पुत्र व उत्तराधिकारी
- ग़ौरियों (घोरियों) से युद्ध
- युद्धभूमि में वीरगति
रावल जैसल –
- शासनकाल – लगभग 1153–1168 ई.
- 1156 ई. में जैसलमेर नगर की स्थापना
- त्रिकूट पर्वत पर जैसलमेर दुर्ग का निर्माण
- राजधानी लोद्रवा से जैसलमेर स्थानांतरित
रावल शालिवाहन –
- काल – 12वीं शताब्दी उत्तरार्ध
- जैसलमेर दुर्ग का निर्माण कार्य पूर्ण कराया
- किला पीले बलुआ पत्थरों से निर्मित करवाया
8वीं–12वीं शताब्दी के मध्य –
- भाटी बस्तियों का विकास काल
- प्रमुख बस्तियाँ
- तनोट
- देवल
- लोद्रवा
- जैसलमेर
- मरुस्थली क्षेत्र में भाटी प्रभुत्व स्थापित
जैसलमेर का किला
- स्थापत्य काल – 12वीं शताब्दी
- तीन प्रमुख साकों (जौहरों) के लिए प्रसिद्ध
- प्रथम साका –
- काल – लगभग 1294 ई.
- शासक – मूलराज – I
- आक्रमणकारी – अलाउद्दीन खिलजी
- जौहर
- द्वितीय साका –
- काल – लगभग 1357 ई.
- आक्रमणकारी – फिरोजशाह तुगलक
- वीर – रावल इंद्र, त्रिलोकसी व अन्य भाटी योद्धा
- जौहर
- तृतीय साका (अर्द्ध साका) –
- काल – लगभग 1550 ई.
- शासक – रावल लूणकरण
- अकबर कालीन संघर्ष
- अमीर अली द्वारा विश्वासघात
- इस साके में जौहर नहीं हुआ
अकबर से संबंध –
- नागौर दरबार
- तिथि – 1570 ई.
- हरराय भाटी ने अकबर की अधीनता स्वीकार की
- इसी अवसर पर हरराय भाटी ने अपनी पुत्री का विवाह अकबर से किया
महारावल अमरसिंह –
- काल – 17वीं शताब्दी
- औरंगज़ेब के समकालीन शासक
- ‘अमरकारा’ नाले का निर्माण कराया
- सिंधु नदी का जल जैसलमेर तक पहुँचाया
महारावल मूलराज द्वितीय –
- शासनकाल – लगभग 1813–1846 ई.
- 12 दिसम्बर 1818 ई.
- अंग्रेजों से संरक्षण संधि कर जैसलमेर को ब्रिटिश संरक्षित रियासत बनाया
स्वतंत्रता आंदोलन से संबंध –
- भारत छोड़ो आंदोलन (1942 ई.)
- जैसलमेर रियासत ने औपचारिक भाग नहीं लिया
सागरमल गोपा –
- जैसलमेर के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, लेखक व पत्रकार
- ब्रिटिश शासन व रियासती अत्याचारों के कट्टर आलोचक
- लेखन को स्वतंत्रता संघर्ष का माध्यम बनाया
- रियासती शासन द्वारा गिरफ्तार
- अमानवीय शारीरिक व मानसिक यातनाएँ दी गईं
- मृत्यु – 3 अप्रैल 1946
- स्थान – जयपुर जेल
- प्रमुख कृतियाँ –
- जैसलमेर राज्य का इतिहास
- राजस्थान में रियासती अत्याचार
- राजपूताने की स्थिति
- मारवाड़ की दुर्दशा
- राजस्थान के शासकों की वास्तविकता
महारावल जवाहर सिंह –
- शासनकाल – 1947–1949 ई.
- भाटी वंश के अंतिम शासक
- जोधपुर के महाराजा हनवंत सिंह के साथ पाकिस्तान में सम्मिलित होने का प्रयास
- 30 मार्च 1949: जैसलमेर रियासत का भारत में विलय
