राजस्थान में मृदा का वर्गीकरण राजस्थान का भूगोल का एक महत्वपूर्ण विषय है, जो राज्य की विविध भौतिक परिस्थितियों के आधार पर मृदाओं के प्रकारों को स्पष्ट करता है। यहाँ की मृदाएँ जलवायु, स्थलाकृति एवं मूल चट्टानों के प्रभाव से भिन्न-भिन्न रूपों में पाई जाती हैं। इन मृदाओं का वर्गीकरण कृषि, भूमि उपयोग तथा संसाधन प्रबंधन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
राजस्थान की प्रमुख मिट्टियाँ: प्रकार, विशेषताएँ और उपयोग
| सामान्य वर्गीकरण(8 प्रकार) | कृषि विभाग द्वारा दिया गया वैज्ञानिक वर्गीकरण (U.S.D.A) (5 प्रकार) | कृषि विभाग द्वारा दिया गया वर्गीकरण (14 प्रकार) |
मिट्टी के प्रकार – सामान्य वर्गीकरण
- राजस्थान की मिट्टी को रंग, संरचना और उर्वरता के आधार पर आठ श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
रेतीली मृदा
- यह पश्चिमी राजस्थान में पाई जाती है।
- यह मृदा जालौर, बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर, जोधपुर, फलौदी, बीकानेर आदि जिलों के अधिकांश क्षेत्रों में पाई जाती है। यह कम उपजाऊ मिट्टी है।
- उच्च तापमान और भौतिक अपक्षय इसके निर्माण के प्रमुख कारक हैं।
- विशेषताएँ–
- यह मृदा वायु द्वारा अपरदित होती है।
- इसमें उर्वरकता कम और क्षारीयता अधिक होती है।
- इसकी जल धारण क्षमता कम होती है।
- कैल्शियम से भरपूर
भूरी रेतीली मृदा
- यह लूनी बेसिन में बलुआ पत्थर से निर्मित है।
- विस्तार – पाली, नागौर, जालौर, सीकर, झुंझुनू
- फॉस्फेट की प्रचुरता
लवणीय मृदा (रेह, कल्लर, खार)
- इस क्षेत्र में अत्यधिक सिंचाई के कारण केशिका क्रिया द्वारा निर्मित
- NaCl की अत्यधिक मात्रा।
- विस्तार – श्री-गंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, अनूपगढ़ – IGNP
- बाडमेर एवं जालौर- नर्मदा नहर
लाल-पीली मृदा
- यह मिट्टी सवाई माधोपुर, सिरोही, राजसमंद, उदयपुर और भीलवाड़ा जिलों के पश्चिमी भागों में पाई जाती है।
- विशेषताएँ–
- यह मिट्टी मूंगफली और कपास की खेती के लिए उपयुक्त है।
- इस मिट्टी में उपजाऊ तत्वों की कमी है।
- यह ग्रेनाइट, शिस्ट और नीस चट्टानों के विघटित पदार्थों से बनी है।
- इसमें कैल्शियम और नाइट्रोजन की कमी है।
- इस मिट्टी का लाल और पीला रंग इसमें मौजूद लौह तत्व के कारण है।
लाल दोमट मृदा
- विस्तार -बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर, चित्तौड़गढ़ के कुछ हिस्से।
- आयरन ऑक्साइड की उपस्थिति के कारण रंग लाल होता है।
मिश्रित लाल – काली मृदा
- प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, झालावाड़, बांसवाड़ा और भीलवाड़ा जिलों के कुछ हिस्से।
- विशेषताएँ–
- मालवा पठार की निकटता के कारण काली मिट्टी का विस्तार हुआ है।
- इसमें कैल्शियम, नाइट्रोजन और फास्फोरस की कमी है लेकिन पर्याप्त मात्रा में पोटाश मौजूद है।
काली मृदा
- यह मिट्टी राज्य के दक्षिण-पूर्वी जिलों कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ में पाई जाती है।
- विशेषताएँ–
- यह दोमट मिट्टी है जिसमें चिकनी मिट्टी की मात्रा अधिक है।
- इस मिट्टी में कैल्शियम और पोटाश पर्याप्त मात्रा में हैं, लेकिन नाइट्रोजन की कमी है।
- यह उपजाऊ मिट्टी गन्ने, धनिया, चावल और सोयाबीन जैसी व्यावसायिक फसलों के उत्पादन हेतु उपयुक्त है।
जलोढ़ मृदा
- यह मिट्टी राज्य के उत्तरी और पूर्वी जिलों गंगानगर, हनुमानगढ़, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, दौसा, जयपुर और टोंक में पाई जाती है।
- विशेषताएँ–
- इसका रंग हल्का भूरा लाल है।
- यह बलुई दोमट मिट्टी है।
- यह उपजाऊ मिट्टी है।
- इसमें कैल्शियम, फास्फोरस, पोटाश और आयरन की मात्रा अधिक होती है लेकिन नाइट्रोजन की कमी होती है।
- यह मिट्टी गेहूं, सरसों, कपास और तंबाकू उगाने के लिए उपयुक्त है।

मिट्टियों का वैज्ञानिक वर्गीकरण
- U.S.D.A दवारा मिट्टी का वैज्ञानिक वर्गीकरण किया गया है, जिसका मुख्य आधार मिट्टी के कणों का आकार माना जाता है। इसे 5 वैज्ञानिक प्रकार की मिट्टियों में विभाजित किया गया है।
- एरिडिसोल
- एंटिसोल
- अल्फिसोल
- इनसेप्टिसोल
- वर्टिसोल
एरिडिसोल
- इस क्षेत्र में शुष्क जलवायु पाई जाती है। जैसलमेर, बीकानेर, बालोतरा, फलौदी, सीकर, चूरू, झुंझुन में विस्तारित।
- इसे पुनः 4 उपसमूहों में विभाजित किया जाता है-
- कैम्बो ऑर्थिडस
- कैल्सि ऑर्थिडस
- पेलि ऑर्थिड्स
- सैलोर्थिड्स
वर्टिसोल
- आद्र व अति-आर्द्र प्रकार की जलवायु।
- कोटा-बूंदी, बारां और झालावाड़ में विस्तारित।
अल्फिसोल
- आर्द्र व उपाद्र जलवायु। इस प्रकार की मिट्टी पूर्वी राजस्थान में पाई जाती है।
- विस्तार:- अलवर, कोटपुतली-बहरोड़, भरतपुर, करौली, धौलपुर और डीग।
एंटिसोल
- शुष्क व अर्धशुष्क प्रकार की जलवायु। अधिकतर अरावली पर्वतमाला के पश्चिम में फैली हुई है।
- इस प्रकार की मिट्टी का अधिकतम विस्तार राजस्थान में पाया जाता है।
इन्सेप्टिसोल
- अर्ध-शुष्क व आर्द्र प्रकार की जलवायु।
- विस्तार– राजसमंद, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, सलूम्बर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सिरोही, पाली

राज्य कृषि विभाग द्वारा मिट्टी का वर्गीकरण
| मिट्टी के प्रकार | शामिल जिले |
| कैल्सी ब्राउन (मरुस्थलीय मृदा) | जैसलमेर व बीकानेर |
| नॉन केल्सी ब्राउन मृदा | नागौर, अजमेर, सीकर, झूँझूँनू, जयपुर, अलवर |
| जिप्सीफेरस | बीकानेर |
| रेवेरिना | श्री-गंगानार |
| साई-रोज़ेम्स | श्री गंगानगर |
| नवीन भूरी मृदा | अजमेर – भीलवाड़ा |
| पर्वतीय मृदा | कोटा – उदयपुर |
| लाल दोमट मृदा | बांसवाड़ा, डूंगरपुर |
| मरुस्थलीय मृदा | श्री गंगानगर,चूरू,झुँझूनू, जैसलमेर,बीकानेर,बाड़मेर, जोधपुर, नागौर |
| जलोढ़ मृदा | अलवर, भरतपुर, जयपुर, सवाईमाधोपुर |
| मरुस्थलीय बालुका स्तूप मृदा | जैसलमेर, अजमेर, बीकानेर, बाड़मेर, जोधपुर |
| पीली – भूरी मृदा | जयपुर, सवाईमाधोपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, उदयपुर, टोंक |
| धूसर भूरी जलोढ़ मृदा | पाली, जालौर, सिरोही, नागौर, अजमेर |
| मध्यम गहरी काली मृदा | कोटा, बूंदी, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, भरतपुर, झालावाड़ |
