राजस्थान की प्रमुख झीलें: राजस्थान का भूगोल विषय में झीलों का विशेष महत्व है, जो राज्य की प्राकृतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय संरचना को प्रभावित करती हैं। यहाँ की झीलें खारे और मीठे पानी की होती हैं, जिनमें सांभर, जैसमंद और फतेहसागर जैसी प्रमुख झीलें शामिल हैं।
राजस्थान की खारे पानी की झीलें
सांभर झील
- राजस्थान की सबसे बड़ी प्राकृतिक खारे पानी की झील, जिसका निर्माण वासुदेव चौहान ने करवाया था (बिजोलिया शिलालेख के अनुसार)। भारत की तीसरी सबसे बड़ी खारे पानी की झील (पहली चिल्का – ओडिशा और दूसरी पुलिकट – आंध्र प्रदेश)।
- भारत में नमक का उत्पादन 8% है, जबकि राजस्थान में इसका 80-90% हिस्सा सांभर सॉल्ट्स लिमिटेड (हिंदुस्तान सॉल्ट लिमिटेड) द्वारा किया जाता है।
- क्यार – वाष्पोत्सर्जन विधि द्वारा नमक उत्पादन की विधि।
- रामसर स्थल (1990)– कुरंजा व फ्लेमिंगो
- 2019 में एवियन बोटुलिज्म वायरस के कारण 20 हजार पक्षियों की मौत की खबरें आई थीं।
- मेंथा, रूपनगढ़, खंडेला और खारी नदियों के जल प्रवाह से निर्मित।
- विस्तार – डीडवाना, जयपुर (फुलेरा)
- रणतमती सांभर झील प्रबंधन परियोजना, 2022 झील के प्रबंधन, विकास और संरक्षण के लिए चलाई जा रही है।

पचपदरा झील
- बालोतरा में स्थित। पचपदरा झील से सर्वोत्तम गुणवत्ता का नमक उत्पादित होता है, क्योंकि इस झील में सोडियम क्लोराइड की मात्रा 98% है।
- पचपदरा में मोरली झाड़ी से खारवाल जाति नमक का उत्पादन करती है।
डीडवाना
- सोडियम सल्फेट (Na2SO4) की अधिक मात्रा के कारण निम्न गुणवत्ता वाला और अखाद्य नमक बनता है। इसका उपयोग वस्त्र, कांच, कागज और चमड़ा उद्योग में किया जाता है।
- राजस्थान राज्य रासायनिक कारखाना – 1964
राजस्थान में खारे पानी की अन्य झीलें
- लूणकरणसर –बीकानेर (यहां नमक का उत्पादन बहुत कम होता है)
- तालछापर (चूरू), काले हिरण का घर कहलाता है
| झील | ज़िला |
| बाप झील | फलौदी |
| कावोद | जैसलमेर |
| काछौर | सीकर |
| रेवासा | सीकर |
| डेगाना | नागौर |
| नावा | डीडवाना-कुचामन |
| पिथमपूरी | सीकर |

राजस्थान की मीठे पानी की झीलें
जयसमंद झील/ढेबर झील (सलूम्बर)
- भारत की दूसरी सबसे बड़ी मीठे पानी की कृत्रिम झील (पहली – गोविंद सागर, हिमाचल प्रदेश) राजस्थान की पहली कृत्रिम झील है, जिसका निर्माण 1685 – 1691 ई. में मेवाड़ महाराणा जयसिंह द्वारा गोमती, झावेरी और बागर नदियों को रोक कर करवाया गया था।
- इसमें 7 द्वीप शामिल हैं, जिनमें सबसे बड़ा बाबा का मगरा/भांगड़ा और सबसे छोटा प्यारी है।
- इसे भील और मीणा जनजातियों के निवास स्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है।
- अपनी जैव विविधता के कारण, यह एक जलीय पर्यावास के रूप में प्रसिद्ध है।
विशेष आकर्षण
- रूठी रानी का महल, चित्रित हवा महल, एलीफैंट रॉक की मूर्ति।
- 1950 में सिंचाई के लिए जयसमंद झील से दो नहरें – श्यामपुरा और भाट – निकाली गईं।
- महाराणा जयसिंह द्वारा नर्मदेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण करवाया गया था।
पिछौला झील (उदयपुर)
- 1525 में राणा लाखा के शासनकाल के दौरान पिच्छू बंजारा द्वारा पिछोला गांव में अपने बैल की स्मृति में इसका निर्माण द्वारा करवाया गया था।
- झील जलापूर्ति करने वाली नदियाँ: सिरसमा और बुझरा नदियाँ (अरावली पहाड़ियों से)।
- झील के भीतर दो महल मौजूद हैं।
- जग मंदिर महल:
- एक द्वीप पर स्थित, इसे ताजमहल का अग्रदूत माना जाता है। इसका निर्माण महाराणा करण सिंह द्वारा 1620 में शुरू किया गया था और महाराणा जगत सिंह प्रथम द्वारा 1651 में पूरा किया गया था।
- 1857 के विद्रोह के दौरान, महाराणा स्वरूप सिंह ने ब्रिटिश अधिकारियों को शरण दी। उन्होंने राजकुमार खुर्रम (शाहजहाँ) को भी शरण प्रदान की जब उन्होंने अपने पिता जहांगीर के खिलाफ विद्रोह किया था।
- जग मंदिर महल:
- जग निवास पैलेस:
- महाराणा जगत सिंह द्वितीय द्वारा निर्मित।
- राणा लाखा ने नटनी का चबूतरा इसके किनारों पर बनवाया था।
- फर्ग्यूसन ने इन महलों की तुलना लंदन के विंडसर सिटी से की है।
दूध तलाई
- छोटी-छोटी पहाड़ियों के बीच, पिछोला झील की ओर जाने वाली सड़क पर स्थित।
- कई छोटी पहाड़ियों के बीच बसी यह छोटी झील एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण के रूप में कार्य करती है।
- आस-पास के दर्शनीय स्थल: दीनदयाल उपाध्याय पार्क
स्वरुप सागर
- इसका निर्माण 1857 ई. में स्वरूप सिंह द्वारा करवाया गया था।
- यह एक नहर है जो, पिछोला झील को फतेह सागर झील से जोड़ती है।
फ़तेह सागर झील (उदयपुर)
- मूल रूप से महाराणा जय सिंह (1678 – 1680 ईस्वी) द्वारा “देवली तालाब” के रूप में निर्मित।
- महाराणा फतेह सिंह (1888-1889 ईस्वी) द्वारा पुनर्निर्मित।
- विशेषताएँ:
- इस बांध को कनॉट बांध कहा जाता है, जिसका नाम ड्यूक ऑफ कनॉट (एक ब्रिटिश अधिकारी) के नाम पर रखा गया है।
- इसमें तीन द्वीप शामिल हैं: सबसे बड़ा – नेहरू गार्डन
- दूसरा – सौर वेधशाला
- सबसे छोटा – जेट माउंटेन
नक्की झील
- क्रेटर/टेक्टोनिक झील – माउंट आबू (सिरोही) में स्थित है।
- ऐसा माना जाता है कि इसे देवताओं ने अपने नाखूनों से खोदा था।
- राजस्थान की सबसे ऊंची (1200 मीटर) और सबसे गहरी (35 मीटर) झील।
- गरासिया जनजाति के लिए पवित्र झील।
- टोड रॉक, ननरॉक, नंदी रॉक, हॉर्न रॉक
- सर्दियों में जम जाता है।
राजसमंद
- यह झील महाराणा राज सिंह प्रथम द्वारा 1662 से 1676 ईस्वी के बीच गोमती, केलवा और ताली नदियों के दक्षिण-पश्चिमी छोर पर।
- बांध और झील बनाने का लक्ष्य व्यापक सूखे और अकाल (1661) के पीड़ितों को रोजगार प्रदान करना और स्थानीय किसानों को नहर सिंचाई प्रदान करना था।
- गोमती नदी द्वारा जल आपूर्ति।
- नौ-चोकी पाल और द्वारकाधीश मंदिर आकर्षण बिंदु हैं।
- घेवर माता मंदिर का भी निर्माण किया गया है (ऐसा माना जाता है कि इस झील की नींव घेवर माता ने ही रखी थी)। यहां सूर्यघड़ी के अवशेष भी मिले हैं।
- राज सिंह प्रशस्ति – काले संगमरमर पर उत्कीर्ण 25 शिलालेख, प्रशस्तिकार: रणछोड़ भट्ट, तेलंग
पुष्कर
- क्रेटर/ज्वालामुखी झील – अजमेर।
- पांचव तीर्थ, तीर्थों का मामा
- अर्धचंद्राकार 52 घाट
- “रंगीला मेला” -कार्तिक पूर्णिमा
आनासागर
- यह एक मनोरम कृत्रिम झील है, जिसका निर्माण अजयपाल चौहान के पुत्र अर्णोराज चौहान ने 1135 और 1150 ईस्वी के बीच करवाया था।
- मुगल सम्राट जहांगीर ने झील के पास दौलत बाग उद्यान बनवाकर झील की सुंदरता बढ़ाई।
- सम्राट शाहजहाँ ने भी उद्यान और झील के बीच बारादरी के नाम से जाने जाने वाले पाँच मंडपों का निर्माण करवाकर इसके विस्तार में योगदान दिया।
- जल आपूर्ति बाँडी नदी के माध्यम से होता है।
फॉय सागर झील/वरुण सागर (अजमेर)
- इसका निर्माण सन् 1892 ईस्वी में ब्रिटिश इंजीनियर फॉय द्वारा किया गया था।
- इसे सूखे के दौरान लोगों को रोजगार और सहायता प्रदान करने के लिए एक अकाल राहत परियोजना के रूप में बनाया गया था।
कोलायत झील (बीकानेर)
- कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहां कपिल मुनि मेला लगता है।
- पुष्कर के समान दीप दान (दीपक अर्पण) की परंपरा।
- पीपल के पेड़ों की बहुतायत से शुष्क रेगिस्तानी बगीचे जैसा वातावरण बनता है।
- चारण जाति धार्मिक कारणों से इस झील की यात्रा नहीं करता है।
गजनेर झील (बीकानेर)
- महाराजा गज सिंह द्वारा निर्मित
- गजनेर महल की परछाई इस झील में प्रतिबिंबित होती है।
- गजनेर वन्यजीव अभ्यारण्य – बटबड़ पक्षियों (डेमोइसेल सारस) के लिए प्रसिद्ध
कायलाना झील (जोधपुर)
- इसका निर्माण 1872 ईस्वी में महाराजा सर प्रताप सिंह द्वारा अकाल राहत परियोजना के रूप में किया गया था।
- झील के एक हिस्से को तख्त सागर के नाम से जाना जाता है।
- भारत का पहला रेगिस्तानी वनस्पति उद्यान, माचिया जैविक उद्यान, इसके तट पर स्थित है।
सिलीसेढ़
- अलवर में स्थित
- विनय सिंह द्वारा निर्मित
- गोल्डन ट्रायंगल पर स्थित
- “नंदेन कानन” भी कहा जाता है
- रामसर साइट्स में शामिल
मानसागर झील
- जयपुर में स्थित, इसका निर्माण मानसिंह ने 1610 ई. में करवाया था।
गैप / गैब सागर
- डूंगरपुर में स्थित है, जिसका निर्माण महारावल गोपीनाथ ने करवाया था
रामगढ झील
- बारां में स्थित, यह एक क्रेटर झील है।
उदय सागर झील
- उदय/बेडच नदी पर नदी के प्रवाह को रोककर महाराणा उदय सिंह द्वारा 1559-1564 ई. के बीच इसका निर्माण कराया गया था।
बड़ी झील
- तीन छतरियों से घिरी हुई, बड़ी झील देश की सबसे बेहतरीन मीठे पानी की झीलों में से एक है।
- यह एक कृत्रिम झील है जिसका निर्माण महाराणा राज सिंह ने शहर को सूखे के विनाशकारी प्रभावों से बचाने के लिए करवाया था। उन्होंने इस झील का नाम अपनी माता जना देवी के नाम पर जियान सागर रखा था।
- 1973 के सूखे के दौरान, यह झील उदयपुर के लोगों के लिए वरदान साबित हुई।
आनंद सागर तालाब
- बाई तालाब के नाम से भी जानी जाने वाली इस कृत्रिम झील का निर्माण महारावल जगमल सिंह की रानी लांची बाई ने करवाया था।
- बांसवाड़ा के पूर्वी भाग में स्थित, यह ‘कल्प वृक्ष’ के नाम से जाने जाने वाले पवित्र वृक्षों से घिरा हुआ है, जो आगंतुकों की मनोकामनाएं पूरी करने के लिए प्रसिद्ध हैं।
डायलाब झील (बाँसवाड़ा)
- बांसवाड़ा शहर के पास जयपुर रोड पर स्थित यह झील अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है।
- इसके किनारे स्थित हनुमान मंदिर इसे धार्मिक आस्था का केंद्र बनाता है, जो साल भर भक्तों को आकर्षित करता है।
बालसमंद झील
सन् 1159 ईस्वी में निर्मित, इसे मंडोर की जल आपूर्ति के लिए एक जलाशय के रूप में योजनाबद्ध किया गया था। बाद में इसके किनारे पर ग्रीष्मकालीन महल के रूप में बालसमंद झील का निर्माण किया गया।

राजस्थान में राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना (एनएलसीपी)।
- पर्यावरण एवं वन मंत्रालय वर्ष 2001 से ही झीलों के संरक्षण और संवर्धन के लिए राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना (एनएलसीपी) को लागू कर रहा है।
- शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में प्रदूषित झीलों का प्रबंधन।
- राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना के उद्देश्य:
- झीलों के सतत प्रबंधन और संरक्षण में राज्य सरकारों को प्रोत्साहित करना और उनका समर्थन करना।
- 1 अप्रैल, 2016 से केंद्र और राज्य सरकारों के बीच लागत साझाकरण अनुपात 60:40 (पहले 70:30) हो गया। कार्यान्वयन एजेंसी: स्थानीय स्वशासन (एलएसजी) विभाग।
राजस्थान में राष्ट्रीय पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (एनएलसीपी) के अंतर्गत आने वाली झीलें
- फ़तेह सागर झील, उदयपुर
- पिछौला झील, उदयपुर
- आना सागर झील, अजमेर
- पुष्कर झील, अजमेर
- नक्की झील, माउंट आबू, सिरोही
- मान सागर झील, जयपुर

जलीय पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना (एनपीसीए)
- मुख्य उद्देश्य:
- झीलों और आर्द्रभूमि का सतत संरक्षण
- जैव विविधता संवर्धन और पारिस्थितिकी तंत्र का पुनर्स्थापन।
- जल की गुणवत्ता में सुधार और प्रदूषण नियंत्रण।
- इन जल निकायों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं को सुदृढ़ बनाना।
- प्रमुख विशेषताऐं:
- एकीकृत दृष्टिकोण: झीलों और आर्द्रभूमि के संरक्षण और प्रबंधन के लिए समान नीतियों और दिशानिर्देशों वाला एक सामान्य नियामक ढांचा।
- वित्तीय प्रावधान:
- इसे 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान लागू किया गया (7 फरवरी, 2013)।
- अनुमानित लागत: ₹900 करोड़।
- लागत साझाकरण अनुपात: 70:30 (अधिकांश राज्यों के लिए), 90:10 (पूर्वोत्तर राज्यों के लिए)।
- कार्यक्रम के घटक:
- झीलों और आर्द्रभूमियों के लिए सूचीकरण और सूचना प्रणाली।
- राष्ट्रीय स्तर के दिशानिर्देश और निर्देश।
- संशोधित आर्द्रभूमि नियम (2010)।
- राज्य और स्थानीय स्तर पर क्षमता निर्माण और मूल्यांकन।
- आजीविका मॉडल परियोजना- जयसमंद, कडाना, माही बजाज सागर पर
राजस्थान की अन्य महत्वपूर्ण झीलें
| राजस्थान राज्य की अन्य महत्वपूर्ण झीलें: | |
| बुझ सागर अमर सागर गड़ीसर झील | जैसलमेर |
| किशोर सागर | कोटा |
| नंदसमंद | राजसमंद |
| बुडा जोहड़ | श्री-गंगानगर |
| मावठा | जयपुर |
| रानी सागर, गुलाब सागर, फूलैर लाल सागर | जोधपुर |
| पन्नाशाह | झुंझुनू |
| तलवाड़ा झील | हनुमानगढ़ |
| मानसरोवर झील | सवाई-माधोपुर |
