राजस्थान के प्रमुख मंदिर

राजस्थान के प्रमुख मंदिर राज्य की समृद्ध धार्मिक आस्था और स्थापत्य कला के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। राजस्थानी कला व संस्कृति के अंतर्गत ये मंदिर विभिन्न राजवंशों की वास्तुकला, शिल्पकला और सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाते हैं। दिलवाड़ा, एकलिंगजी, रणकपुर तथा ओसियां जैसे मंदिर राजस्थान की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को उजागर करते हैं।

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भारत में मंदिर निर्माण की परंपरा का सुव्यवस्थित विकास गुप्त काल ( 4वीं–6वीं शताब्दी ईस्वी ) में हुआ। प्रारंभिक चरण में मंदिर लकड़ी और ईंट जैसी नाशवान सामग्रियों से निर्मित किए जाते थे, किंतु कालांतर में पत्थर एवं बलुआ पत्थर जैसी टिकाऊ सामग्रियों का प्रयोग बढ़ा। भारतीय मंदिर स्थापत्य को सामान्यत: तीन प्रमुख शैलियों (नागर, द्रविड़ और बेसर) में वर्गीकृत किया जाता है।

बिंदु

नागर शैली

द्रविड़ शैली

वेसर शैली

राजस्थान के प्रमुख मंदिर

क्षेत्र

हिमालय से विंध्याचल

कृष्णा नदी से कन्याकुमारी

विंध्याचल से कृष्णा नदी

मूल स्वरूप

उत्तर भारतीय शैली

दक्षिण भारतीय शैली

नागर + द्रविड़ का मिश्रण

शिखर

वक्राकार 

पिरामिड आकार गोपुरम् 

मिश्रित व संतुलित

गर्भगृह

चौकोर

विशाल प्रांगण के साथ

कॉम्पैक्ट संरचना

प्रमुख विशेषता

सूक्ष्म नक्काशी

विशाल परिसर, गोपुरम

सरल व संतुलित डिजाइन

भारत के प्रमुख उदाहरण

भीतरगांव विष्णु मंदिर (सबसे प्राचीन)

मीनाक्षी मंदिर (मदुरै), बृहदेश्वर (तंजावुर)

लाडखान मंदिर, ऐहोल (सबसे प्राचीन)

राजस्थान में उदाहरण

सोमेश्वर (किराडू), अम्बिका (जगत), दधिमाता (नागौर), ओसियां

रंगनाथ मंदिर (पुष्कर), तिरुपति बालाजी (सुजानगढ़)

शैलीमुख्य विशेषताएँप्रमुख उदाहरणराजस्थान में उदाहरण
पंचायतन शैलीएक मुख्य देव (विष्णु) + चार सहायक देव (सूर्य, शक्ति, शिव, गणेश), एक परिक्रमा पथहरिहर मंदिर, ओसियां भंडदेवरा (बारां), बूढ़ादीत (कोटा), जगदीश (उदयपुर), बाड़ोली (चित्तौड़)
भूमिज शैलीनागर की उपशैली, खुला प्रदक्षिणा पथसेवाड़ी जैन मंदिर, पाली उंडेश्वर (बिजौलिया), महानालेश्वर (मेनाल), भंडदेवरा (रामगढ़)
एकायतन शैलीकेवल एक ही मुख्य देव का मंदिरविभिन्न एकदेवालय मंदिर
कच्छपघात शैलीविशाल शिखर, मेरु-मंडावर स्तम्भ, घटपल्लव, पंचशाखा हारकच्छपघात राजवंशशांतिनाथ जैन मंदिर, पद्मनाभ मंदिर (झालरापाटन)

राजस्थान में मंदिर निर्माण – 

  • 7वीं शताब्दी –
    • राजस्थान में मंदिर निर्माण के स्पष्ट प्रमाण 

7वीं -10वीं शताब्दी –

  • मंदिर स्थापत्य का विकास काल 
  • 8वीं शताब्दी – क्षेत्रीय शैली गुर्जर-प्रतिहार / महामारू शैली का विकास  
  • इस काल के प्रमुख मंदिर –
    • ओसियां – सूर्य मंदिर, हरिहर मंदिर, महावीर जैन मंदिर, सच्चियाय माता मंदिर, पपलाज माता  
    • आभानेरी – हर्षमाता मंदिर 
    • चित्तौड़ – कालिका माता मंदिर 
    • खेड़ (बालोतरा) – रणछोड़ जी, कामेश्वर महादेव, मरकंडी माता (निमाज) 
    • नागौर – दधिमाता मंदिर  

10वीं–11वीं शताब्दी –

  • गुर्जर-प्रतिहार शैली का चरमोत्कर्ष, सोलंकी शैली का उदय
  • इस काल के प्रमुख मंदिर
    • नीलकंठेश्वर मंदिर, केकिन्द/जसनगर (मेड़ता के दक्षिण)
    • हर्षनाथ मंदिर, सीकर
    • नीलकण्ठेश्वर मंदिर
      • राजोरगढ़ / पारानगर (सरिस्का के दक्षिण-पश्चिम)
      • प्रतिहार सामंत मथनदेव द्वारा निर्मित 
      • त्रिकूटाकार (एक मंडप में खुलते 3 गर्भगृह)
    • सोमेश्वर मंदिर, किराडू (1016 ई.) – गुर्जर-प्रतिहार शैली का अंतिम एवं सर्वश्रेष्ठ उदाहरण
इसी समय के वे मंदिर जो गुर्जर-प्रतिहार शैली में नहीं हैं-
  • बाड़ौली का मंदिर
  • नागदा का सास-बहू मंदिर
  • जगत का अम्बिका मंदिर (उदयपुर)

11वीं–13वीं शताब्दी –

  • मंदिर स्थापत्य का स्वर्णकाल
  • शैलियाँ – सोलंकी व मारु-गुर्जर
    • प्रमुख मंदिर – समिधेश्वर (चित्तौड़ दुर्ग)
    • विशेषताएँ – अलंकृत, पतले, लम्बे गोल स्तम्भ; ऊँची पीठिका
  • भूमिज शैली –
    • सेवाड़ी जैन मंदिर, पाली (1010–1020 ई.) प्राचीनतम 
    • महानालेश्वर, मेनाल
    • भण्डदेवरा, रामगढ़ (बारां)
    • उंडेश्वर मंदिर, बिजौलिया

13वीं शताब्दी के बाद – स्थापत्य में सामान्य गिरावट

  • प्रमुख बड़े मंदिर
    • जगदीश मंदिर, उदयपुर
    • एकलिंगजी मंदिर
    • केशोरायपाटन मंदिर
    • जगत शिरोमणि मंदिर, आमेर
  • 16वीं शताब्दी के बाद
    • धार्मिक असहिष्णुता व विध्वंस के कारण
    • हवेली-मंदिर स्थापत्य का विक

उदयपुर संभाग के मंदिर

उदयपुर जिले के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

जगदीश मंदिर, उदयपुर

  • निर्माण – 1651 ई., महाराणा जगत सिंह प्रथम
  • शैली – इंडो-आर्यन (पंचायतन – चार लघु मंदिरों से परिवृत)
  • पिछोला झील के किनारे ऊँचे चबूतरे पर स्थित विष्णु (जगन्नाथ राय) मंदिर, गर्भगृह के सामने गरुड़ की विशाल प्रतिमा
  • इसे “सपनों से बना मंदिर” भी कहते हैं – महाराणा के स्वप्न में स्वयं जगन्नाथ जी ने मूर्ति की जगह बताई

एकलिंग नाथ मंदिर, कैलाशपुरी (गिर्वा)

  • निर्माण – 734 ई., बप्पा रावल (वर्तमान स्वरूप महाराणा रायमल)
  • मेवाड़ शासकों के इष्टदेव व कुलदेवता
  • यहाँ का राजा स्वयं को एकलिंग जी का दीवान मानते हैं  
  • काले पत्थर का चौमुखा शिवलिंग (चार मुख)। 
  • यहाँ सबसे बड़ी ध्वजा चढ़ाई जाती है। 
  • परिसर में पाशुपत संप्रदाय के संस्थापक लकुलीश (27वें अवतार) का मंदिर भी है।
  • मीराबाई का मन्दिर – मन्दिर के अहाते में कुंभा द्वारा निर्मित विष्णु मंदिर

ऋषभदेव (केसरियानाथ/कालाजी) मंदिर, धुलैव

  • 1100 स्तम्भों से निर्मित, बिना चूने के। 
  • कालाजी (भगवान ऋषभदेव की चमकीली काली प्रतिमा के कारण) केसरियानाथ जी (विश्व में सर्वाधिक केसर चढ़ने से)
  • भारत का एकमात्र मंदिर जहाँ चारों संप्रदाय (जैन, आदिवासी, वैष्णव, शैव) समान रूप से पूजा करते हैं।

अम्बिका देवी मंदिर, जगत (सलूम्बर)

  • निर्माण – 10वीं शताब्दी अल्लट के समय 
  • शैली – महामारू
  • मातृदेवियों को समर्पित शक्तिपीठ। 
  • उत्कृष्ट मूर्तिकला के कारण “मेवाड़ का खजुराहो”
  • शिखर नागर शैली का; गुर्जर-प्रतिहार कालीन होते हुए भी विशुद्ध गुर्जर प्रतिहार शैली में नहीं

सहस्रबाहु / सास-बहू मंदिर, नागदा 

  • निर्माण – 10वीं शताब्दी गुहिल शासक श्रीधर
  • दो जुड़वा मंदिर—बड़ा सास का मंदिर (10 सहायक देवालयों से घिरा) और छोटा बहू का मंदिर (पंचायतन)
  • विष्णु को समर्पित। 
  • सास के मन्दिर का शिखर ईटों का है तथा शेष मन्दिर संगमरमर का है।
  • नागदा गुहिलों की प्रथम राजधानी थी।

आदिवराह मंदिर, आहड़

  • गुर्जर-प्रतिहार कालीन, अल्लट द्वारा  
  • वराह अवतार को समर्पित प्राचीन मंदिर।

आहड़ के जैन मंदिर

  • 10वीं शताब्दी, जैन धर्म के तपागच्छ की उद्भव स्थली। 
  • यहीं आचार्य जगच्चन्द्र सूरी को कठोर तप के बाद ‘तपा’ की उपाधि मिली, जिससे तपागच्छ परंपरा प्रारंभ हुई।

जावर विष्णु मंदिर, जावर

  • महाराणा कुम्भा की पुत्री रमाबाई द्वारा 
  • पंचायतन शैली में, शिल्पी- ईश्वर
  • जावर माइंस क्षेत्र में स्थित, रमाकुण्ड पास में

मछंदर नाथ मंदिर, उदयपुर

  • अपनी सांझियों के लिए प्रसिद्ध, इसलिए इसे संझ्या मंदिर भी कहा जाता है।

गुप्तेश्वर महादेव, उदयपुर

  • तीतरड़ी–एकलिंगपुरा के बीच हाड़ा पर्वत पर स्थित। “मेवाड़ का अमरनाथ” कहलाता है।

चित्तौड़गढ़ जिले के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

समिधेश्वर / त्रिभुवन नारायण मंदिर (चित्तौड़ दुर्ग)

  • 11वीं सदी शिव मंदिर, मालवा परमार राजा भोज द्वारा 
  • शैली – मारू-गुर्जर
  • 1428 ई. में महाराणा मोकल द्वारा पुनर्निर्माण, इसलिए मोकल जी का मंदिर

मीराबाई मंदिर (चित्तौड़ दुर्ग)

  • 16वीं सदी, महाराणा सांगा
  • मीरां की भक्ति हेतु 
  • सामने रैदास की 4 खंभा छतरी

कुम्भश्याम मंदिर (चित्तौड़ दुर्ग)

  • 8वीं सदी, प्रतिहार कालीन (महामारू शैली)
  • मूलत: शिव मंदिर (त्रिमुखी शिव मूर्ति)
  • मलेच्छ आक्रमण के बाद राणा कुम्भा ने वैष्णव रूप दिया

कालिका माता मंदिर, (चित्तौड़ दुर्ग)

  • 8 वीं सदी मानमोरी राजा द्वारा, मूलत: सूर्य मंदिर
  • शैली – महामारू
  • गुहिलों की आराध्य देवी
  • सज्जनसिंह द्वारा जीर्णोद्धार

तुलजा भवानी मंदिर (चित्तौड़ दुर्ग)

  • 15वीं सदी, महाराणा कुंभा के शासनकाल में
  • यह मंदिर देवी दुर्गा के अवतार, उग्र देवी तुलजा भवानी को समर्पित है
  • तुलजा भवानी शिवाजी महाराज की आराध्य देवी है

बाण माता मंदिर (चित्तौड़ दुर्ग)

  • गुहिल वंश की कुलदेवी
  • ब्रह्माणी माताजी, बायण माताजी (बाणासुर का वध करने की वजह से बायण माता) और बाणेश्वरी माताजी

श्रृंगार चंवरी /सतबीस देवरी (चित्तौड़)

  • 11वीं सदी, 27 देवरियाँ; मध्य में विशाल जैन मंदिर 
  • प्राचीन काल में यह शांतिनाथ का प्रसिद्ध जैन मंदिर था, जिसे महाराणा कुम्भा के कोषाधिपति के पुत्र भण्डारी वेलका ने 1448-49 में बनवाया था।
  • मध्य में छोटी सी वेदी पर चार खंभों की छतरी (कुम्भा की पुत्री के विवाह की चंवरी) इसलिए इसका नाम श्रृंगार चंवरी

महानालेश्वर मंदिर (मेनाल, चित्तौड़ )

  • शैव धर्म के लकुलिश संप्रदाय का प्रमुख केंद्र
  • यही एक भूमिज शैली का सुहवेश्वर मंदिर बना हुआ है।

मंगलेश्वर महादेव (मातृकुंडिया)

  • बनास नदी तट
  • राजस्थान का हरिद्वार / मेवाड़ का प्रयाग

सांवलिया सेठ मंदिर (मंडफिया)

  • राजस्थान का सर्वाधिक चढ़ावे वाला मंदिर
  • जलझूलनी एकादशी मेला

लालबाई-फूलबाई मंदिर (पूठोली)

  • चित्तौड़ क्षेत्र में जैन परंपरा का प्रमुख केंद्र

बाड़ोली शिव मंदिर समूह (भैंसरोड़गढ़)

  • 9वीं सदी, हूण राजा मिहिरकुल द्वारा
  • नागर एवं पंचायतन शैली का मिश्रित रूप
  • 9 मंदिरों का समूह ; घाटेश्वर महादेव प्रमुख मंदिर
  • 1821 ई. में जेम्स टॉड द्वारा प्रकाश में लाए गए
  • “इनकी विचित्र और भव्य बनावट का यथावत्‌ वर्णन करना लेखनी की शक्ति से बाहर है, मानो हुनर का खजाना खाली कर दिया गया है।” – जेम्स टॉड

अन्नपूर्णा (बिरवड़ी माता)

  • महाराणा हम्मीर के काल में 
  • सिसोदिया वंश की कुलदेवी

राजसमंद जिले के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

द्वारकाधीश मंदिर, कांकरोली

  • निर्माण – महाराणा राजसिंह
  • वल्लभ सम्प्रदाय की 7 पीठों में एक

श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा

  • यहाँ का संगीत हवेली संगीत कहलाता है 
  • नाथजी को सप्त ध्वजा का स्वामी भी कहा जाता है 
  • वल्लभ सम्प्रदाय का प्रमुख केंद्र

चारभुजा मंदिर, गढ़बोर

  • निर्माण – महाराणा मोकल के समय 
  • मेवाड़ का वारीनाथ; मेवाड़ के चार धामों में एक

कुंतेश्वर महादेव, फरारा

  • कुन्ती द्वारा स्थापित माना जाता है

विश्वास स्वरूपम्, नाथद्वारा

  • 369 फीट ऊँची विश्व की प्रमुख शिव प्रतिमा

परशुराम गुफा

  • राजस्थान का अमरनाथ
  • श्रावण में फूटा देवल मेला भरता है 

बांसवाड़ा जिले के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

घोटिया अम्बा माता मंदिर (घोटिया)

  • आदिवासियों का प्रमुख मंदिर 
  • चैत्र अमावस्या को भील मेला; 
  • पांडव-कुंड, भीम-कुंड; पांडव-वनवास से जुड़ी मान्यता (वनवास गुजारा, आम का पेड़ लगाया)

नंदिनी माता मंदिर (बड़ोदिया)

  • पौष पूर्णिमा मेला; अष्टभुजी प्रतिमा
  • इन्हें वासुदेव-देवकी की आठवीं संतान माना जाता है

त्रिपुरा सुंदरी (तलवाड़ा)

  • वागड़ अंचल का प्रमुख शक्तिपीठ
  • इन्हें तुरताई माता के नाम से भी जाना जाता है

छींछ माता मंदिर (छींछ)

  • देवीदास द्वारा निर्मित; ब्रह्मा मंदिर के निकट

ब्रह्मा मंदिर (छींछ)

  • 12वीं सदी
  • ब्रह्मा जी की आदमकद चतुर्मुखी प्रतिमा
  • स्थापना – महारावल जगमाल सिंह

कालिंजरा जैन मंदिर (कालिंजरा)

  • ऋषभदेव को समर्पित
  • हरन नदी तट

अन्य मंदिर – धूणी के रणछोड़ जी (बांसवाड़ा)   

डूंगरपुर जिले के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

बेणेश्वर धाम (नवाटापरा)

  • स्थापना – संत मावजी (1727)
  • सोम-माही-जाखम संगम
  • आदिवासियों का कुम्भ/बागड़ का कुंभ/बागड़ का पुष्कर 
  • मेला – माघ पूर्णिमा 
  • नोट – ‘कांठल का हरिद्वार’ गौतमेश्वर महादेव (प्रतापगढ़ के मेले को कहा जाता है)

देव सोमनाथ मंदिर (सोम नदी तट)

  • 12वीं सदी; सोम नदी के तट पर 3 मंजिला शिव मंदिर 
  • बिना चूना-सीमेंट सिर्फ़ सफेद पत्थर से निर्मित 
  • “वागड़ का वैभव”

हरि मंदिर / संत मावजी मंदिर (साबला)

  • संत मावजी की जन्मस्थली (निष्कलंक संप्रदाय)
  • मावजी की लिखित वाणियाँ – ‘चोपड़ा’

विजय राज राजेश्वर मंदिर (गैबसागर)

  • निर्माण – विजयसिंह; पूर्ण – लक्ष्मणसिंह (1923)
  • गैबसागर झील पर बना हुआ, डूंगरपुर के प्रसिद्ध परेवा पत्थर से निर्माण

गवरी बाई का मंदिर

  • “वागड़ की मीरा”; भक्ति परंपरा से जुड़ा

फूलेश्वर शिवालय

  • 1780 ई.; रानी फूल कंवर द्वारा

शिव ज्ञानेश्वर शिवालय

  • महारावल शिवसिंह ने माता की स्मृति में बनवाया

प्रतापगढ़ जिले के मंदि

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

गौतमेश्वर महादेव मंदिर (अरनोद) 

  • कांठल का हरिद्वार 
  • मेला – बुद्ध पूर्णिमा (वैशाख पूर्णिमा)
  • गौतम ऋषि की तपोस्थली

भ्रमर माता मंदिर 

  • छोटी सादड़ी प्रतापगढ़ 
  • यहाँ एक अभिलेख (490 ई ) भी है जिसमे गौर, औलिंकर वंश का उल्लेख मिलता है

सीता माता मंदिर 

  • सीतामाता अभयारण्य स्थित 
  • अभयारण्य उड़न गिलहरियों हेतु प्रसिद्ध (Flying squirrels) 

कोटा संभाग के मंदिर

कोटा जिले के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

भीमचौरी शिव मंदिर  (मुकन्दरा हिल्स)

  • राजस्थान का प्राचीनतम गुप्तकालीन प्रदक्षिणा-पथ वाला मंदिर;
  • मुकन्दरा टाइगर रिज़र्व क्षेत्र में

कणसवा शिव मंदिर  (कोटा)

  • 8वी सदी का गुप्तकालीन शिव मंदिर, चतुर्भुज शिवलिंग; 
  • सूर्य की पहली किरण सीधे शिवलिंग पर

दाढ़ देवी मंदिर

  • कोटा के पूर्व शाही परिवार की कुलदेवी
  • मेला – चैत्र नवरात्रि मे 9 दिवसीय

विभीषण जी का मंदिर (कैथून)

  • भारत का एकमात्र विभीषण मंदिर, 3-5 सदी, धड़ से ऊपर की (सिर्फ सिर) विभीषण मूर्ति की पूजा
  • विभीषण की पूजा राम भक्त के रूप में

चारचौमा शिवालय  (चारचौमा गाँव)

  • गुप्तकालीन चतुर्मुखी शिवलिंग; महाशिवरात्रि पर चारचौमा की सोरती मेला

बूढ़ादीत सूर्य मंदिर (दीगोद)

  • 9वीं सदी; बूढ़ा + आदित्य, पंचायतनचतुर्वेद हरिहर पितामह मंदिर नाम से प्रसिद्ध

गेपरनाथ महादेव (कोटा)

  • भूमि से ~300 फीट नीचे गर्भगृह; शिवलिंग पर सतत जलधारा

गरडिया महादेव मंदिर (डाबी, तालेड़ा )

  • कोटा डाबी उदयपुर रोड पर (NH 76)
  • [कुछ बुक्स इसे कोटा में तथा कुछ इसे बूंदी में बताती हैं लेकिन अपने राजस्थान टूरिज्म की website का डेटा यूज करेंगे जिसमे कोटा में बताया इस मंदिर को]

अन्य मंदिर – गरडिया महादेव – कोटा (प्राचीन शिव मंदिर), मथुराधीश मंदिर – कोटा (वल्लभ सम्प्रदाय की प्रथम पीठ), खड़े गणेश मंदिर – कोटा, कर्णेश्वर मंदिर (NH-12)

बूंदी जिले के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

केशवराय जी (केशवराय पाटन )

  • 1601 ई, राजा शत्रुशाल  द्वारा 
  • चंबल नदी के तट पर, विष्णु मंदिर

कपालेश्वर मंदिर (इंद्रगढ़)

  • चाकण  नदी के तट पर 
  • जैत्रसिंह द्वारा

झालावाड़ जिले के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

शीतलेश्वर महादेव (झालरापाटन)

  • 689 ई. राजस्थान का सबसे प्राचीन तिथि युक्त मंदिर, गुर्जर-प्रतिहार शैली 
  • गुप्तकालीन, चंद्रभागा नदी के किनारे 
  • फ़र्ग्यूसन – हिंदू मंदिरों में सबसे प्राचीन स्थापत्य की दृष्टि से सर्वश्रेठ
  • अन्य नाम – चंद्रमौलेश्वर महादेव मंदिर

सात सहेली मंदिर (झालरापाटन)

  • अन्य नाम – पद्मनाभ मंदिर /सूर्य मंदिर /चारभुजा मंदिर (जेम्स टॉड)
  • राजस्थान का सबसे प्राचीन सूर्य मंदिर (10वी सदी), 
  • सूर्य घुटनों तक जूते पहने हुए, सप्तरथ 
  • यह मन्दिर खजुराहो शैली/कच्छपघात शैली में बना हुआ है

चन्द्रभागा मंदिर (झालरापाटन)

  • 7वीं सदी; चन्द्रभागा नदी तट

शांतिनाथ जैन मंदिर  (झालरापाटन)

  • काले पत्थर की दिगम्बर प्रतिमा, कच्छपघात शैली

कौलवी की बौद्ध गुफाएँ

  • राजस्थान का ऐलोरा; 7वीं सदी

अन्य मंदिर – छनेरी–पनेरी देवालय, नागेश्वर पार्श्वनाथ, चांदखेड़ी जैन मंदिर (तीर्थंकर आदिनाथ), वराह मंदिर झालावाड़ 

बारां जिले के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

भण्डदेवरा शिव मंदिर  (रामगढ़)

  • भूमिज शैली का शिव मंदिर 
  • 10वीं सदी में मेदवंशीय राजा मलय वर्मा द्वारा   
  • हाड़ौती का खजुराहो / राजस्थान का मिनी खजुराहो; मिथुन मूर्तियाँ;

ब्रह्माणी माता (सोरसन)

  • सहरिया क्षेत्र की लोकदेवी, सोरसन गोडावण अभयारण्य क्षेत्र में स्थित
  • अन्य नाम – बरमाया का मंदिर,योगिनी का मंदिर 
  • देवी की पीठ (back) की पूजा 
  • गर्दभ मेले का आयोजन (आजकल घोड़े)

गड़गच्च देवालय (अटरू)

  • 10वीं सदी का शिवालय ; औरंगज़ेब द्वारा ध्वंस, बाद में पुनर्निर्माण, खजुराहो शैली

सीताबाड़ी (केलवाड़ा) 

  • सहरिया जनजाति का कुम्भ (अस्थि विसर्जन)
  •  लव–कुश जन्मस्थली की मान्यता

कल्याण राय (श्रीजी) मंदिर 

  • 1537 ई. रायकुंवर बाई द्वारा रणथम्भौर से मूर्ति लाई गई
  • भगवान विष्णु को समर्पित

मामा–भान्जा मंदिर फूलदेवरा (अटरू)

  • शिव मंदिर 
  • बिना चूना–सीमेंट निर्मित

काकुनी शिव मंदिर समूह  छीपाबड़ौद

  • शैव–वैष्णव–जैन
  • 9वीं–10वीं सदी; परवन नदी तट

बांसथूनी शिवालय

  • कोटा–शाहबाद मार्ग पर स्थित खण्डित मंदिर

जयपुर संभाग के मंदिर

जयपुर जिले के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

जगत शिरोमणि मंदिर (आमेर)

  • निर्माण 1599–1608 कनकावती द्वारा पुत्र जगतसिंह की स्मृति में;  मुगल प्रभाव
  • कृष्ण की वही मूर्ति जिसकी बचपन में मीरा पूजा करती थीं अत: मीरा मंदिर नाम पड़ा

गोविन्द देव जी मंदिर (जयपुर)

  • वृंदावन से लाए कृष्ण भगवान के 3 विग्रह में से एक
  • राजस्थान में गौड़ीय सम्प्रदाय की प्रथम पीठ
  • जयपुर के शासक गोविंद देव जी को वास्तविक शासक और खुद को उनका दीवान मानते हैं 
  • वल्लभ सम्प्रदाय बाल रूप की पूजा करते हैं, तो गौड़ीय सम्प्रदाय वाले युगल रूप अर्थात्‌ राधाकृष्ण के रूप में पूजते हैं
  • 1735 ई. सवाई जयसिंह – सिटी पैलेस के जयनिवास उद्यान में,बिना शिखर का मंदिर
  • विश्व का सबसे बड़ा बिना खम्भों का सत्संग हॉल
  • जगन्नाथपुरी, ब्रज और ढूँढाड़ क्षेत्र की परम्पराओं का सुन्दर संयोजन

गोपीनाथ जी मंदिर (जयपुर)

  • यह भी उन 3 विग्रह में से एक; सवाई जयसिंह द्वारा निर्मित, गौड़ीय संप्रदाय से संबंधित 
  • यह प्रतिमा भी गोविंद देव जी के साथ ही वृंदावन के लाई गई थी

लक्ष्मीनारायण / बिड़ला मंदिर (जयपुर)

  • गंगा प्रसाद बिड़ला द्वारा; मकराना संगमरमर 
  • एशिया का प्रथम वातानुकूलित मंदिर
  • हिन्दू , ईसाई व मुस्लिम डिजाइन से बना हुआ राज्य का एकमात्र मन्दिर

गणेश मंदिर (मोती डूंगरी)

  • 1761 ई. में माधोसिंह प्रथम द्वारा 
  • प्रतिमा मावली (माधोसिंह जी प्रथम की पत्नी का पीहर) से लाई गई

चूलगिरी जैन मंदिर  (जयपुर)

  • तीर्थंकर पार्श्वनाथ को समर्पित 
  • पहाड़ी पर स्थित प्रमुख जैन तीर्थ

अम्बिकेश्वर महादेव (आमेर)

  • कोकिलदेव द्वारा निर्माण
  • मिर्जा राजा जयसिंह द्वारा जीर्णोद्धार
  • कछवाहों का सबसे प्राचीन देवप्रासाद

सूर्य मंदिर (गलता जी)

  • मंकी वैली भी कहते है, सवाई जयसिंह द्वितीय के काल में राव कृपाराम द्वारा 
  • माघ शुक्ल सप्तमी मेला

सूर्य मंदिर (आमेर)

  • 954 ई. का शिलालेख; चामुण्डहरि के पुत्र द्वारा निर्माण

कल्कि मंदिर (जयपुर)

  • 1739 ई.- सवाई जयसिंह
  • द्रविड़ शिखर शैली, विश्व का प्रथम कल्कि मंदिर

राजेश्वर शिवालय 

  • 1864 ई.; रामसिंह द्वितीय; जयपुर राजाओं का निजी मंदिर

बृहस्पति मंदिर जयपुर (राजस्थान का प्रथम बृहस्पति मंदिर), ताड़केश्वर मंदिर जयपुर 

अलवर के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

नीलकंठेश्वर महादेव सरिस्का

  • 1010 ई. राजोरगढ़ (पारानगर) गुर्जर प्रतिहार राजा मथनदेव द्वारा   
  • काले रंग की शिवलिंग
  • नोट – कई स्रोत इसे बड़गुर्जर राजा अजयपाल द्वारा निर्मित बताते हैं

भर्तृहरि मंदिर  अलवर

  • कनफटे साधुओं का तीर्थ (नाथ सम्प्रदाय)
  • वैशाख व भाद्रपद में लक्खी मेला

पांडुपोल हनुमान  अलवर

  • हनुमान जी की शयन मुद्रा में मूर्ति
  • इस जगह भीम द्वारा पर्वत में गदा मारकर रास्ता बनाया गया

सोमनाथ मंदिर –भानगढ़

  • 1631 ई.; माधोसिंह; गुजरात सोमनाथ की प्रतिकृति

नौगजा जैन मंदिर  अलवर

  • 27 फीट ऊँची प्रतिमा
  • तीर्थंकर पार्श्वनाथ को समर्पित

नौगाँवा जैन मंदिर  अलवर

  • प्रतिमा की पीठ पर प्रशस्ति अंकित

नारायणी माता मंदिर 

  • नाइयों की कुल देवी

दौसा – सीकर – झुंझुनूं के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

हर्षद माता मंदिर आभानेरी (दौसा)

  • 8वीं सदी में राजा चाँद द्वारा, स्वास्तिक आकार का
  • मूलत: भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर दुर्गा माता का मंदिर है
  • गुर्जर प्रतिहार कालीन (महामारू शैली), पंचायतन प्रकार 
  • हर्षद माता को ‘उल्लास की देवी’ भी कहते हैं
  • पास में चाँद बावड़ी स्थित है

मेहंदीपुर बालाजी  दौसा

  • यहाँ की हनुमान जी की मूर्ति पर्वत का ही अंग है
  • भूत-प्रेत बाधा निवारण; 
  • मेला – चैत्र पूर्णिमा (हनुमान जयंती)

हर्षनाथ मंदिर  सीकर

  • 10 वी सदी; चौहान शासक सिंहराज द्वारा विग्रहराज-IInd के शासन काल में 
  • गुर्जर प्रतिहार कालीन (महामारू शैली)

खाटू श्याम जी  सीकर

  • मन्दिर की नींव 1720 ई. में मारवाड़ राजा अभय सिंह के द्वारा
  • कृष्ण भगवान के स्वरूप श्याम जी की पूजा
  • महाभारत से पहले श्री कृष्ण ने बर्बरीक के शीश की बलि ली इसलिए ‘शीश के दानी नाम से प्रसिद्ध’ 
  • गुलाब चढ़ाने की परम्परा

सप्त गौ माता मंदिर (रैवासा) 

  • राजस्थान का प्रथम सप्त गौमाता मंदिर

लोहार्गल मंदिर – झुंझुनूं

  • युद्ध समाप्ति के पश्चात पांडवों ने पाप मुक्ति हेतु यहाँ के सूर्यकुण्ड में स्नान किया, जिससे उनके सारे हथियार गल गये 
  • यहाँ सूर्य कुंड, सूर्य मंदिर (छाय देवी के साथ), पांडव गुफा, और हनुमान मंदिर जैसे कई महत्वपूर्ण स्थल हैं
  • मालकेतु पर्वत; चौबीस कोसी परिक्रमा

रघुनाथ जी मंदिर – खेतड़ी

  • मूँछों वाली राम-लक्ष्मण प्रतिमा

अन्य मंदिर – बंदे के बालाजी मंदिर-झुंझुनूं (गोलकार मुंह के बालाजी), श्री पंचदेव मन्दिर (झुंझुनूं), रानी सती मंदिर (झुंझुनूं), द्वारकाधीश मंदिर (नवलगढ़), शारदा देवी मंदिर (झुंझुनूं), रानी सती मंदिर (झुंझुनूं), जगदीश मंदिर (चिड़ावा), सोमनाथ मंदिर+ बैजनाथ मंदिर (दौसा), नीलकंठ मंदिर (दौसा)

जोधपुर संभाग के मंदिर

ओसियां के मंदिर

  • 8वीं–12वीं शताब्दी, प्रतिहार वंश की देन 
  • जैन, वैष्णव व शाक्त मंदिर, महामारू शैली 
  • राजस्थान का भुवनेश्वर’ कहलाता है

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

महावीर जैन मंदिर 

  • 8 वीं सदी में प्रतिहार राजा वत्सराज द्वारा निर्मित
  • राजस्थान का अब तक का सबसे प्राचीन जैन मंदिर

सूर्य मंदिर 

  • राजस्थान का कोणार्क’ व ‘ब्लैक पैगोड़ा’ कहा जाता है

हरिहर मंदिर 

  • हरिहर – विष्णु-शिव का संयुक्त रूप 
  • 8वीं शताब्दी के तीन प्रतिहार कालीन मंदिर 
  • राजस्थान में पंचायतन शैली का प्रथम उदाहरण

सच्चियाय माता मंदिर 

  • शाक्त परंपरा का प्रमुख मंदिर, गुर्जर-प्रतिहार शैली 
  • पंचायतन शैली- कोनों पर विष्णु, शिव व सूर्य
  • दरवाजों पर पौराणिक तथा लोक कथाओं का चित्रण
  • ओसवालों की कुलदेवी

पिपलाज /पीपड़ला माता मंदिर 

  • गुर्जर-प्रतिहार कालीन। चर्म रोगों और अन्य बाधाओं से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध 
  • शांडिल्य गोत्र की कुलदेवी

जोधपुर के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

महामंदिर 

  • नाथ सम्प्रदाय का राजस्थान में प्रमुख केंद्र 
  • 1805 ई. में महाराजा मानसिंह द्वारा निर्मित 
  • 84 खम्भों वाला विशाल मंदिर

अधरशिला रामदेव मंदिर

  • इस मंदिर का स्तम्भ जमीन से आधा इंच ऊपर उठा हुआ है 
  • यहाँ बाबा रामदेव के पगल्ये पूजे जाते हैं

रावण मंदिर (मंडोर)

  • उत्तर भारत का प्रथम रावण मंदिर माना जाता है 
  • माना जाता है, की रावण की पत्नी मंदोदरी जोधपुर की प्राचीन राजधानी मण्डोर की रहने वाली थी
  • प्रतिमा निर्माण – चुन्नीलाल

वीरों की दालान  (मंडोर)

  • महाराजा अजीतसिंह द्वारा निर्मित 
  • चामुण्डा, महिषासुर मर्दिनी, पाबूजी, रामदेवजी, गोगाजी, हड़बूजी, मेहाजी आदि की मूर्तियाँ

33 करोड़ देवताओं की साल  (मंडोर)

  • महाराजा अभयसिंह द्वारा निर्मित 
  • गणेश वंदना, शिव-पार्वती, राम, सूर्य व पंचमुखी ब्रह्मा की प्रतिमाएँ

तीजा मांजी का मंदिर

  • मारवाड़ शासक मानसिंह की भटियानी रानी प्रतापकुँवरी द्वारा निर्मित

अन्य मंदिर – रसिक बिहारी मंदिर (वैष्णव परंपरा), घनश्याम मंदिर (मुगल शैली का प्रभाव), राज रणछोड़जी मंदिर (जसवंतसिंह द्वितीय की स्मृति में रानी जाचेड़ी कंवर द्वारा), कुंज बिहारी मंदिर (विजयसिंह की पासवान गुलाबराय द्वारा), काला-गोरा भैरव मंदिर (मंडोर), ज्वालामुखी मंदिर (चट्टान काटकर महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमा निर्मित)

जैसलमेर के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

रामदेवरा 

  • पहले इस गाँव का नाम रुणिचा, बाबा रामदेव के अन्तिम विश्राम का स्थान 
  • गोद ली हुई डाली बाई की समाधि
  • मेला – भादवा में

लक्ष्मीनाथ मंदिर (जैसलमेर दुर्ग)

  • लक्ष्मी विष्णु की युगल मूर्ति 
  • जैसलमेर के शासक स्वयं को लक्ष्मीनारायण जी का दीवान मानते थे

लोद्रवा पार्श्वनाथ मंदिर

  • काले रंग की पार्श्वनाथ प्रतिमा, पंचायतन शैली 
  • 1618 ई. में जैन श्रावक धीरूशाह भंसाली द्वारा पुनर्निर्माण

पार्श्वनाथ – ऋषभदेव मंदिर

  • पार्श्वनाथ ऋषभदेव के मंदिर 
  • 1416 ई. में महारावल लक्ष्मणसिंह शिल्पकार धन्ना द्वारा (दिलवाड़ा के समतुल्य)

अन्य मंदिर – भटियाणी माता मंदिर, सूर्य मंदिर (वैरिसिंह द्वारा रानी सूर्यकंवर के नाम पर), रत्नेश्वर महादेव, शांतिनाथ–कुंथुनाथ मंदिर, संभवनाथ जैन मंदिर, टीकमराय (आदिनारायण) मंदिर, अमरसागर जैन मंदिर (हिम्मतराम बाफना द्वारा), गज मंदिर (महारानी रूपकंवर ने गजसिंह की स्मृति में), हिंगलाज माता मंदिर, तनोट माता मंदिर 

 फलौदी के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

लटियाल माता का मंदिर

  • दो मंदिर, छोटा मंदिर जूना मंदिर कहते हैं 
  • देवी महिषासुर मर्दिनी का मूल विग्रह लटियाल माता के रूप में स्थापित 
  • मंदिर में शमी वृक्ष (खेजड़ी)
  • मेला – प्रतिवर्ष नवरात्रि में

जाम्भोलाव धाम, गाँव जाम्बा

  • गुरु श्री जंभेश्वर का मुख्य तीर्थ स्थल
  • जांबा गांव, बाप तहसील (फलौदी) 
  • मेला – चैत्र अमावस्या

हड़बूजी का मंदिर(बैंगटी गाँव)

  • यहाँ हड़बूजी महाराज की बैलगाड़ी की पूजा की जाती है
  • मेला – भाद्रपद कृष्ण षष्ठी को बैंगटी में

मेहुजी मांगलिया मंदिर (बापिनी)

  • मेला – भाद्रपद कृष्ण अष्टमी
  • लोकदेवता में अच्छे से पढ़ेंगे दोनों को

बाड़मेर के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

किराडू के  मंदिर  

  • प्राचीन नाम किरात कूप
  • जीर्ण शीर्ण शिव-विष्णु मंदिर, 1016 ई 
  • ‘राजस्थान का खजुराहो’ (मिथुन मूर्तियों के कारण) व ‘मूर्तियों का खजाना’ (पौराणिक कथाओं के दृश्य) भी कहा जाता है
  • सोमेश्वर मंदिर –
    • किराडू का सबसे बड़ा प्रमुख मंदिर 
    • गुर्जर प्रतिहार शैली का अन्तिम व सर्वाधिक भव्य मंदिर 

रानी भटियानी मन्दिर(जसोल)

  • ’भुआ सा’ के नाम से प्रसिद्ध, जैसलमेर के जोगीदास गाँव की राजकुमारी
  • पश्चिमी राजस्थान आौर सिंध पाकिस्तान में पूजनीय
  • मुख्यतया ढोली जाति द्वारा पूज्य

सफेद अखाड़ा

  • ’सिद्धेश्वर महादेव’ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है
  • भगवान शिव, भगवान कृष्ण और राधा तथा हनुमान जी की समाधियां

आलम जी का मंदिर (धोरीमन्ना)

  • ‘घोड़ों का तीर्थ’ 
  • आलम पशु मेला प्रसिद्ध (अश्वपालक यहाँ अच्छी नस्ल हेतु)

कपालेश्वर महादेव(चौहटन)

  • यहाँ पांडवों ने अज्ञातवास बिताया था
  • विष्णु जी के चरण पूजा (बिशन पगल्या)

अन्य मंदिर – जूना किला और मन्दिर, चिन्तामणी पार्श्वनाथ जैन मन्दिर, सफेद अखाड़ा, सुईया मेला-चौहटन (4 वर्ष में, ‘अर्द्धकुंभ’ नाम से प्रसिद्ध), गरीब नाथ शिव मंदिर (शिव), विरातरा माता मंदिर (भोपा जाति की कुलदेवी), देवका सूर्य मन्दिर (NH-68 बाड़मेर जैसलमेर)

बालोतरा के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

भैरव जी / नाकोड़ा पार्श्वनाथ जैन मंदिर

  • मेवानगर, पचपद्रा (बालोतरा) 
  • 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ को समर्पित
  • आचार्य कीर्ति रतन सूरी द्वारा नाकोड़ा भैरव की स्थापना 
  • स्थानीय नाम – हाथ की हुजूर, जागती जोत

हल्देश्वर महादेव (पीपलूद)

  • राजस्थान का लघु माउंट आबू 
  • छप्पन की पहाड़ियों में स्थित

अन्य मंदिर – ब्रह्मा मंदिर (आसोतरा), मल्लीनाथ जी मंदिर (तिलवाड़ा), रणछोड़ राय मंदिर (खेड)

सिरोही के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

देलवाड़ा जैन मंदिर समूह (माउंट आबू)

  • 11वीं–13वीं शताब्दी, सोलंकी (चालुक्य) स्थापत्य 
  • राजस्थान के सर्वश्रेष्ठ जैन मंदिर 
  • पाँच मंदिरों का समूह

1. विमलवसाही जैन मंदिर

  • ऋषभदेव / आदिनाथ का मंदिर
  • 1031 ई. में गुजरात चालुक्य राजा भीमदेव के मंत्री विमल शाह द्वारा निर्मित
  • शिल्पी – कीर्तिधर, 57 देवरियाँ
  • कर्नल टॉड: “ताजमहल के बाद सबसे श्रेष्ठ भवन”

2. लूणवसाही जैन मंदिर

  • अन्य नाम – नेमिनाथ / लूणवसही / देवरानी जेठानी का मंदिर
  • 22वें तीर्थंकर नेमिनाथ का मंदिर (काले पत्थर की प्रतिमा)
  • 1230 ई. में भीमदेव II के मंत्री वास्तुपाल – तेजपाल द्वारा निर्मित
  • शिल्पी – शोभनदेव
  • मुख्य मंदिर के द्वार के दोनों ओर दो ताक हैं जिन्हें देवरानी-जेठानी का गवाक्ष कहा जाता है

3. पीत्तलहर मंदिर

  • प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ का मंदिर
  • आदिनाथ की 108 मन पीतल की प्रतिमा
  • निर्माता – भीमशाह, इसलिए इसे ‘भामाशाह का मंदिर’ भी कहा जाता है

4. खरतरवसही मंदिर

  • 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ का मंदिर
  • 15वीं शताब्दी में मंडलीक द्वारा निर्मित
  • तीन मंजिला चौमुखा मंदिर
  • इसे ‘सिलावटों का मंदिर’ भी कहा जाता है

5. महावीर स्वामी जैन मंदिर

  • 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी का मंदिर

वशिष्ठ जी का मंदिर

  • यहाँ वशिष्ट जी ने यज्ञ किया, जिसकी अग्नि में से चार व्यक्ति (चौहान, चालुक्य, परमार, प्रतिहार) उत्पन्न हुये जो आगे चार राजपूत जाति बन गई

अचलेश्वर महादेव (आबू)

  • परमार शासकों के कुलदेवता 
  • शिवलिंग के स्थान पर एक खड्डा है जिसे ब्रह्मखड्ड कहते है  
  • शिव के पैर के अंगूठे की पूजा 
  • महमूद बेगड़ा का आक्रमण, मधुमक्खियों के हमले से सेना पराजित → ‘भंवराथल’

रसिया बालम / कुंवारी कन्या मंदिर (आबू)

  • विष का प्याला लिए युवक व युवती की प्रतिमा 

सारणेश्वर महादेव

  • दुर्गनुमा परकोटा
  • देवड़ा राजाओं की कुलदेवी का मंदिर

सूर्य मंदिर (वरमाण)

  • मूलतः 7वीं शताब्दी 
  • प्राचीन नाम – ब्राह्मण स्वामी मंदिर
  • सभा मंडप में सात घोड़ों के रथ पर सूर्य

अन्य मंदिर

  • बाजना गणेश जी मंदिर
  • कुंथुनाथ दिगम्बर जैन मंदिर (आबू)
  • अर्बुदा देवी / अधर देवी / अम्बिका देवी का मंदिर
  • विट्ठल भगवान मंदिर
  • देरी सेरी (12 मंदिरों का समूह)

जालौर के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

सुन्धा माता मंदिर 

  • चामुंडा देवी को ही सुंधा माता कहा जाता है 
  • सुंडा पर्वत पर स्थित 
  • यह एक प्राचीन तांत्रिक शक्ति पीठ है 
  • अधरेश्वरी माता (धड़ रहित मूर्ति की पूजा के कारण)
  • यहाँ राजस्थान का प्रथम रोप-वे

सिरे मंदिर 

  • एक प्राचीन शिव मंदिर 
  • ऋषि जालंधर नाथ की तपोभूमि
  • पुनर्निर्माण – मानसिंह जी (जोधपुर)

लक्ष्मीवल्लभ पार्श्वनाथ 72 जिनालय(भीनमाल)

  • देश का सबसे बड़ा जैन मंदिर 

अन्य मंदिर – जगत स्वामी सूर्य मंदिर (भीनमाल), वराह मंदिर भीनमाल (पीले पत्थर), नीलकंठ महादेव जालौर (काला-पीला शिवलिंग), आपेश्वर महादेव रामसीन (गुर्जर-प्रतिहार कालीन), पातालेश्वर मंदिर सेवाडा, चामुंडा माता मंदिर आहोर 

पाली के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

रणकपुर जैन मंदिर 

  • इस मंदिर समूह में 3 जैन तथा 1 सूर्य मंदिर है 
  • इस मंदिर समूह में 3 जैन तथा 1 सूर्य मंदिर है 
    1. आदिनाथ चौमुखा मंदिर 
      • कुंभा के शासनकाल में मंत्री धरणकशाह द्वारा मगही/मथाई नदी के किनारे, शिल्पी देपाक
      • मूल गर्भगृह में आदिनाथ की चौमुखी प्रतिमा, सामने दो विशाल घंटे
      • 24 मंडप, 84 शिखर,1444 स्तंभों, 426 खंभों, 89 गुंबदों और 29 हॉलों
      • अन्य नाम – ‘स्तम्भों का वन’, खंभों का अजायबघर, त्रिलोक दीपक (महाकवि माघ), नलिनी गुल्म विमान (विमलसूरी), चतुर्मुख जिन प्रसाद
      • मुख्य दीवार की छत पर नृत्य करती अप्सराओं और दिव्य कन्याओं की प्रतिमा उत्कीर्ण
    2. नेमिनाथ जैन मंदिर 
      • मैथुन मूर्तियाँ 
      • इसलिए ‘वेश्याओं का मंदिर’ कहा जाता है
    3. पार्श्वनाथ जैन मंदिर
      • नेमिनाथ मंदिर के पास ही 
    4. सूर्य मंदिर
      • मूल रूप से 13वीं शताब्दी, बाद में इसका पुनर्निर्माण
      • भूमिज शैली, सूर्य (सात घोड़ों का रथ पर) – सूर्याणी की मूर्ति

सेवाड़ी जैन मंदिर

  • राजस्थान का सबसे प्राचीन भूमिज शैली मंदिर (1010–20 ई.)

कामेश्वर  महादेव (आऊवा)

  • गुर्जर प्रतिहार कालीन 
  • शिवपुराण में जो वर्णन (भगवान शिव ने इसी जगह देवताओं के प्रतिनिधि कामदेव को जलाकर भस्म किया)

स्वर्ण मन्दिरफालना (पाली ) 

  • तीर्थंकर पार्श्वनाथ को समर्पित 
  • प्रथम जैन स्वर्ण मंदिर 
  • गेटवे ऑफ गोडवाड़ ‘ व ‘मिनी मुंबई

मुंछाला महावीर (देसूरी)

  • कुंभलगढ़ अभ्यारण में, घाणेराव के पास  
  • रिद्धि-सिद्धि की आदमकद मूर्तियां

जैन पंचतीर्थ

  • वरकाणा, नारलाई, नाडोल, रणकपुर, मुंछाला

बीकानेर संभाग के मंदिर

बीकानेर के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

कपिल मुनि मंदिर (कोलायत)

  • कपिल सरोवर (कोलायत झील) के किनारे स्थित 
  • जनश्रुति अनुसार कपिल मुनि का आश्रम और सांख्य दर्शन का प्रतिपादन यहीं हुआ
  • झील के किनारे 52 घाट निर्मित, झील में दीपदान परम्परा, एक गुरुद्वारा 
  • कार्तिक पूर्णिमा पर जांगल प्रदेश का सबसे बड़ा मेला

पूनरासर हनुमान जी

  • मेला – ऊँटगाड़ी मेला’ के नाम से (भाद्रपद मास)

हेरम्ब गणपति (जूनागढ़ किला)

  • गणपति शेर पर सवार (मूषक पर नहीं) 

भांडाशाह जैन मंदिर 

  • अन्य नामत्रिलोक दीपक प्रसाद / भंडेश्वर – संडेश्वर / घी वाला मंदिर (नीव में पानी की जगह घी डालने के कारण)
  • 5 वें तीर्थंकर सुमतिनाथ को समर्पित
  • निर्माण 1514 ई. भांडाशाह ओसवाल (राव लूणकरण के समय)
  • नींव में सैकड़ों मण घी डाला गया
  • मंदिर की संरचना में जटिल दर्पण का काम, भित्ति चित्र और सोने की परत से बनी चित्रकारी

लक्ष्मीनारायण (लक्ष्मीनाथ) मंदिर 

  • निर्माण – राव लूणकरण 
  • विष्णु-लक्ष्मी को समर्पित
  • बीकानेर के शासक भगवान लक्ष्मीनाथजी को बीकानेर का वास्तविक राजा और स्वयं को उनके दीवान मानते थे

राज रतनबिहारी मंदिर

  • निर्माण – महाराजा रतनसिंह
  • अवधि – 1846–1851 ई.
  • रतनबिहारी उद्यान में स्थित

पूर्णेश्वर महादेव मंदिर – भीनासर

  • संत पूर्णानंद के नाम पर मंदिर का नाम

कोडमदेसर भैरूजी – कोडमदेसर

  • निर्माण – राव बीका मंडोर से भैरव प्रतिमा लाए 
  • इस जगह प्रारंभ में बीकानेर की नींव रखने के लिए चुना गया था यह राव बीका की प्रथम राजधानी थी

सुनारी देवी मंदिर – बीकानेर

  • स्थानीय देवी-पूजा का प्रमुख केंद्र

चूरू के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

सालासर बालाजी 

  • दाढ़ी-मूँछ वाले हनुमान’ मूर्ति 
  • निर्माण – मुस्लिम कारीगर नूरा व दाउद संस्थापक – महात्मा मोहनदास

तिरुपति बालाजी (वेंकटेश्वर)  सुजानगढ़

  • उत्तर भारत का एकमात्र वेंकटेश मंदिर
  • निर्माण – सोहनलाल जानोदिया द्वारा 1994 डॉ एम नागराज तथा डॉ वेंकटाचार्य के देखरेख में  
  • द्रविड़ शैली, इसे सिद्ध हनुमंत पीठ भी कहते हैं

साहवा गुरुद्वारा (साहवा)

  • गुरु गोबिंद सिंह का आगमन 
  • राजस्थान का सबसे बड़ा सिख मेला

ददरेवा मंदिर 

  • गोगाजी महाराज की जन्मस्थली 
  • गोगाजी की घोड़े पर सवार मूर्ति

गंगानगर – हनुमानगढ़ के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

गुरुद्वारा बुड्ढा जोहड़ (डाबला)

  • निर्माण प्रारंभ – 1954, बाबा फतेहसिंह 
  • राजस्थान का सबसे बड़ा गुरुद्वारा 
  • श्रावण अमावस्या पर विशाल मेला, विशाल पवित्र सरोवर

गोगाजी मंदिर (गोगामेड़ी)

  • अश्व की पीठ पर हाथ में बरछा लिए हुए गोगाजी की एक सुन्दर प्रतिमा
  • मेला – भाद्रपद शुक्ल नवमी
  • भक्त लोग पीले वस्त्र पहनकर आते हैं

भद्रकाली मंदिर (लाल पत्थर से बनी एक प्रतिमा), डाडा पम्पाराम डेरा (विजयनगर)

भरतपुर संभाग के मंदिर

भरतपुर के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

गंगा मंदिर

  • निर्माण प्रारम्भ: महाराजा बलवन्त सिंह (1845 ई.) गंगा प्रतिमा प्रतिष्ठा- महाराजा ब्रजेन्द्र सिंह (12 फरवरी 1937
  • कर्मचारियों व धनी वर्ग द्वारा एक माह का वेतन दान 
  • राजपूत, मुगल तथा द्रविड़ स्थापत्य शैली का सुन्दर मिश्रण
  • भगवान कृष्ण, लक्ष्मीनारायण और शिव पार्वती की मूर्तियाँ

लक्ष्मण मंदिर

  • निर्माण आरम्भ: महाराजा बलदेव सिंह, पूर्णता: बलवन्त सिंह 
  • भरतपुर जाट शासकों के कुलदेवता 
  • राजस्थान का एकमात्र प्रमुख लक्ष्मण मंदिर
  • राजस्थानी स्थापत्य शैली, गुलाबी रंग के पत्थरों पर नक़्काशी
  • दीवारों, छतों , मेहराबों व खंभों पर फूल पत्ते व पक्षियों के चित्र

उषा मंदिर / उषा मस्जिद

  • बयाना दुर्ग परिसर में स्थित

धौलपुर के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

शेर शिकार गुरुद्वारा

  • सिख गुरू हरगोविन्द साहिब की धौलपुर यात्रा के समय स्थापित 
  • मुचुकुंद के पास

मचकुण्ड

  • स्नान से चर्म रोग निवारण की मान्यता 
  • “तीर्थों का भांजा” कहा जाता है

अन्य मंदिर – चोपरा शिव मंदिर(19वी सदी), चौंसठ योगिनी मंदिर, सैपऊ महादेव मंदिर, महाकालेश्वर मंदिर (सरमथुरा)

करौली के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

श्री महावीर जी मंदिर(हिंडौन सिटी)

  • 24वें जैन तीर्थंकर श्री महावीर जी को समर्पित
  • प्राचीन नाम चांदनपुर → “चांदनपुर के महावीर”
  • गम्भीर नदी के तट पर स्थित 
  • निर्माता: अमरचन्द बिलाला (जैन श्रावक)
  • मेला – चैत्र शुक्ल त्रियोदशी

कैला देवी मंदिर 

  • त्रिकूट पर्वत पर कालीसिल नदी के किनारे 
  • कैला देवी की 16 भुजाओं वाली मूर्ति

मनमोहन/मदनमोहन जी 

  • गौड़ीय सम्प्रदाय का मंदिर
  • हनुमान जी को स्तनपान कराते हुए अंजनी माता की मूर्ति
  • जयपुर नरेश गोपाल सिंह जी द्वारा वृंदावन से मूर्ति लाकर स्थापना

सवाई माधोपुर के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

त्रिनेत्र गणेश मंदिर(रणथम्भौर दुर्ग)

  • भारत का सबसे प्राचीन गणेश मंदिर
  • एकमात्र त्रिनेत्र गणेश मंदिर 
  • प्रतिमा का केवल मुख 
  • विवाह/मांगलिक कार्य पर प्रथम निमंत्रण 
  • गणेश चतुर्थी पर मेला

घुश्मेश्वर महादेव(शिवाड़)

  • शिव के 12वें ज्योतिर्लिंग की मान्यता • शिवलिंग सदैव जलमग्न
  • राजस्थान का एकमात्र मंदिर जहाँ गर्भगृह में महिलाओं का प्रवेश वर्जित

चमत्कार जी मंदिर

  • जैन मंदिर 
  • ऋषभदेव जी की प्रतिमा

काला–गोरा भैरव

  • काला व गोरा भैरव की दो प्रतिमाएँ 
  • लटकती प्रतीत होने के कारण “झूलता भैरू”

अन्य मंदिर – धुँधलेश्वर मंदिर, अमरेश्वर महादेव

डीग के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

पूंछरी का लौठा(गोवर्धन)

  • भगवान कृष्ण के ग्वालों में से एक, मधुमंगल (लौठा बाबा) 
  • यहां देवता लेटी हुई मुद्रा में हैं
  • गिरिराज (गोवर्धन) की 21 किमी परिक्रमा मार्ग पर स्थित

चौरासी खम्भा मंदिर (कामां )

  • बिना मूर्ति का मंदिर 
  • पुराणों में विष्णु मंदिर के रूप में उल्लेख

अजमेर संभाग के मंदिर

अजमेर जिले के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

रंगनाथ जी का मंदिर   (पुष्कर)

  • द्रविड़ शैली में निर्मित अपने गोपुरम के लिए प्रसिद्ध 
  • निर्माण- परशुराम द्वारा 1844 ई. 
  • मूलत: विष्णु मंदिर (विष्णु, लक्ष्मी एवं नृसिंह की मूर्तियाँ)

सोनी जी की नसियां 

  • इसे लाल मंदिर भी कहा जाता है 
  • मूलतः ऋषभदेव (आदिनाथ) को समर्पित
  • निर्माण – मूलचंद सोनी व टीकमचंद (1864–65) 
  • छत पर स्वर्णनगरी हॉल (स्वर्णकलश)
  • भीतर सिद्धकूट चैत्यालय स्थित

ब्रह्मा जी का मंदिर (पुष्कर)

  • भारत का एकमात्र प्रमुख ब्रह्मा मंदिर
  • उल्लेख – पद्म पुराण एवं अन्य पुराणों में
  • निर्माण- गोकुलचंद पारिख द्वारा 
  • ASI द्वारा राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित

वराह मंदिर (पुष्कर)

  • भगवान वराह (विष्णु के अवतार) को समर्पित
  • वैष्णव परम्परा से सम्बद्ध

सावित्री जी का मंदिर  (पुष्कर)

  • ब्रह्मा जी की पत्नी सावित्री को समर्पित
  • पुष्कर के समीप पहाड़ी पर स्थित

अन्य मंदिर – रमा बैकुण्ठनाथ मंदिर (वैष्णव सम्प्रदाय), नाद की शिव प्रतिमा, नौग्रहों का मन्दिर (किशनगढ़), नारेली जैन मन्दिर, साईं बाबा मंदिर, अटभटेश्वर महादेव मंदिर (हेमाडपंथी वास्तुकला शैली)

भीलवाड़ा जिले के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

बागोर साहिबगुरुद्वारा 

  • यहाँ श्री गुरू गोविन्द सिंह जी पंजाब की यात्रा पर जाते समय ठहरे

उंडेश्वर महादेव मंदिर   

  • भूमिज शैली
  • यहाँ तीन शिव मंदिर समूह है (महाकाल, उंडेश्वर महादेव और हजारेश्वर मंदिर)

चामुण्डा माता मंदिर, मंदाकिनी मंदिर (बिजोलिया), तिलस्वां महादेव (सर्वेश्वर महादेव)

टोंक जिले के मंदिर

मंदिर/स्थान

मुख्य तथ्य

देवधाम मंदिरजोधपुरिया  

  • मानसी, बांडी व खेराकुशी नदी के संगम पर

कल्याण जी का मंदिर 

  • निर्माण – राजा दिग्व ने मेवाड़ राणा संग्राम सिंह के शासनकाल में 
  • हिंदू – विष्णु के अवतार के रूप पूजा  
  • मुस्लिम – कल्हण पीर के रूप में पूजा
  • कुष्ठ रोग निवारण हेतु प्रसिद्ध, भव्य शिखर 16 स्तम्भों पर आधारित
  • राजस्थान की एकमात्र विष्णु भगवान की ऐसी मूर्ति जिसकी सुबह में बाल्यावस्था, दोपहर में युवावस्था एवं रात्रि में वृद्धावस्था के रूप में दर्शन होते है

गोकर्णेश्वर महादेव का मंदिर

  • बीसलदेव जी के मंदिर के नाम से जाना जाता
  • बनास  नदी क्षेत्र में स्थित
  • चौहान शासक बीसलदेव (विग्रहराज IV) द्वारा

सुनहरी कोठी

  • 19वीं सदी, सुनहरी कोठी या गोल्डन मैन्शन

अन्य मंदिर – माण्डव ऋषि की तपोस्थली, जामा मस्ज़िद(नवाब अमीर ख़ां द्वारा), जल देवी मंदिर (बावड़ी गाँव टोडारायसिंह), ब्रदीविशाल मंदिर नटवाड़ा, धन्नाभगत गुरूद्वारा

नागौर जिले के मंदिर

  • बाबा हरिराम मंदिर (झोरड़ा वाले बाबा), कुचामन का सूर्य मंदिर

महत्वपूर्ण शब्दावली 

  • तोरण द्वार – मंदिर का अलंकृत प्रवेशद्वार
  • उप-मण्डप – तोरण द्वार के बाद स्थित प्रारम्भिक मण्डप
  • सभा मण्डप – विशाल आंगन/मुख्य सभा स्थल
  • गर्भगृह – मूल मंदिर, जिसमें मुख्य देव (मूल नायक) की प्रतिमा स्थापित होती है
  • शिखर – गर्भगृह के ऊपर स्थित अलंकृत ऊर्ध्व संरचना
  • प्रदक्षिणा पथ – गर्भगृह के चारों ओर बना परिक्रमा गलियारा
मंदिरजिला
चारचौमा शिवालयकोटा 
भीमचौरी शिव मंदिरकोटा 
कंसुआ शिव मंदिरकोटा 
शीतलेश्वर महादेवझालरापाटन 
दर्रा के शिव मंदिरकोटा-झालावाड़ मार्ग
माकनगंज मंदिरचित्तौड़गढ़ 

काल

मंदिर/स्थान

8वीं-9वीं शताब्दी

  • हर्षत माता मंदिर- आभानेरी (दौसा)
  • ओसियां का सूर्य मंदिर- औसियां
  • कालिका माता मंदिर- चित्तौड़गढ़ किला
  • कुंभ श्याम मंदिर- चित्तौड़गढ़ किला

9वीं शताब्दी

  • कामेश्वर मंदिर – आउवा    
  • रणछोड़ जी मंदिर- खेड़ (बालोतरा)

10वीं-11वीं शताब्दी

  • हर्षनाथ मंदिर- सीकर
  • नीलकंठेश्वर मंदिर- जसनगर (मेड़ता)
  • नीलकंठेश्वर मंदिर- पारानगर (सरिस्का)
  • मरकंडी माता मंदिर- निमाज (ब्यावर)
  • नकटी माता मंदिर- (जयपुर)
  • दधिमाता मंदिर- गोठ मांगलोद (नागौर)
  • सोमेश्वर मंदिर- किराडू (बाड़मेर)

काल

मंदिर/स्थान

11वीं से 13वीं शताब्दी

  • सच्चियाय माता मंदिर- ओसियां
  • समिधेश्वर मंदिर- चित्तौड़गढ़ किला
  • दिलवाड़ा के जैन मंदिर- माउंट आबू

कुछ मंदिर जो गुर्जर प्रतिहार शैली के समय के होके भी इस शैली से भिन्न हैं

  • बाड़ौली शिव मंदिर (घाटेश्वर) 
  • सास – बहू मंदिर (नागदा)
  • अंबिका मंदिर – जगत (उदयपुर)
  • सूर्य मंदिर – टूस गाँव (मंदेसर, उदयपुर)
  • एकलिंगनाथ जी (उदयपुर)
  • हर्ष मंदिर (बिलाडा, जोधपुर)

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