राजस्थान के प्रमुख त्योहार और मेले, राजस्थानी कला व संस्कृति का अभिन्न अंग हैं, जो राज्य की धार्मिक विविधता, सामाजिक परंपराओं एवं सांस्कृतिक समन्वय को दर्शाते हैं। हिंदू मासानुसार पर्वों के साथ-साथ मुस्लिम, जैन, सिख, ईसाई, बौद्ध, पारसी एवं सिन्धी धर्मों के प्रमुख त्योहार एवं उर्स राजस्थान के बहुधार्मिक एवं बहुसांस्कृतिक समाज की विशेष पहचान प्रस्तुत करते हैं। इन विभिन्न समुदायों के पर्वों एवं मेलों का अध्ययन राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सह-अस्तित्व एवं सामाजिक एकता को समझने में सहायक सिद्ध होता है।
राजस्थान के प्रमुख त्योहार और मेले
राजस्थान में त्योहार का क्रम श्रावण मास की तीज से प्रारंभ माना जाता है। यह चक्र चैत्र मास की गणगौर पर समाप्त होता है इसलिए लोक कहावत है की
“तीज त्योहार बावड़ी, ले डूबी गणगौर”
- विक्रमी संवत् : चंद्रमा आधारित पंचांग –
- इसमें महीनों की गणना चंद्र कला (तिथि) के आधार पर की जाती है।
- एक चंद्र मास ≈ 29½ दिन का होता है।
- चंद्र वर्ष की गणना –
- 29½ × 12 = 355 दिन
- जबकि सौर वर्ष = 365 दिन
- अंतर = 10–11 दिन
- नोट : – इस अंतर को संतुलित करने के लिए प्रत्येक तीसरे वर्ष एक अतिरिक्त मास जोड़ा जाता है, जिसे कहते हैं — अधिकमास (Adhik Maas / मलमास)
- विक्रमी संवत् के महीने (चंद्रमा आधारित) – चैत्र , वैशाख , ज्येष्ठ , आषाढ़ , श्रावण , भाद्रपद , आश्विन , कार्तिक , मार्गशीर्ष (अग्रहायण) , पौष , माघ , फाल्गुन

हिंदुओं के मेले एवं त्योहार
चैत्र मास
चैत्र मास : प्रमुख त्योहार
- यह मास हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष का प्रथम मास है, जो वसंत ऋतु में मार्च–अप्रैल के बीच आता है
- चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिन्दू नववर्ष, विक्रम संवत् और चैत्र नवरात्र आरम्भ होते हैं
- पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी मास में ब्रह्मा द्वारा सृष्टि की रचना हुई मानी जाती है
- देश के विभिन्न भागों में यह दिन उगादी, गुड़ी पड़वा, नवरोज और चेटीचंड के रूप में मनाया जाता है
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Festival 157693_27cf7d-4e> |
Date 157693_2edef2-1c> |
Facts 157693_4b38aa-55> |
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धुलंडी 157693_844419-03> |
चैत्र कृष्ण एकम 157693_987b61-b4> |
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शीतलाष्टमी(बास्योड़ा) 157693_3101e7-f8> |
चैत्र कृष्ण अष्टम 157693_f75912-9c> |
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घुड़ला 157693_875816-0b> |
चैत्र कृष्ण अष्टम 157693_90cafa-0f> |
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नववर्ष 157693_def88e-08> |
चैत्र शुक्ल एकम 157693_d4b3a8-c0> |
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वासंतिक नवरात्रि 157693_ea75f4-6e> |
चैत्र शुक्ल एकम – नवम 157693_29db6e-8a> |
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सिंजारा 157693_1b75ec-da> |
चैत्र शुक्ल द्वितीया 157693_afd280-d5> |
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गणगौर 157693_d0aedc-48> |
चैत्र शुक्ल तीज 157693_73a32c-0f> |
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अशोकाष्टमी 157693_d81f63-c2> |
चैत्र शुक्ल अष्टमी 157693_279665-d5> |
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रामनवमी 157693_0709ee-99> |
चैत्र शुक्ल नवमी 157693_5e1bb4-02> |
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महावीर जयंती 157693_b819a4-3a> |
चैत्र शुक्ल त्रयोदसी 157693_f4c887-f0> | 157693_88f423-71> |
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हनुमान जयंती 157693_49c87e-d8> |
चैत्र शुक्ल पूर्णिमा 157693_30658e-80> |
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चैत्र मास : प्रमुख मेले
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मेला 157693_0739f0-76> |
तिथि 157693_b734fa-db> |
प्रमुख विशेषताएँ 157693_afefc9-e4> |
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शीतला माता मेला (चाकसू) 157693_23b5d2-d3> |
चैत्र कृष्ण सप्तमी 157693_df7d30-2c> |
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केसरियाजी मेला धुलेव (उदयपुर) 157693_d5b381-92> |
चैत्र कृष्ण अष्टमी 157693_41c571-f6> |
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मल्लीनाथ पशु मेला तिलवाड़ा (बालोतरा) 157693_de3730-ac> |
CK11 – CS11 157693_4995df-a7> |
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घोटिया अंबा का मेला (बाँसवाड़ा ) 157693_0ad1f7-61> |
चैत्र अमावस्या 157693_1e1cf8-f8> |
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गणगौर मेला जयपुर 157693_2fbbf1-d3> |
CS तृतीया 157693_8d5a30-07> | 157693_133e47-9c> |
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कैलादेवी मेला करौली 157693_c6b76e-0f> |
चैत्र शुक्ल अष्टमी 157693_00baea-60> |
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श्री महावीर जी मेला करौली 157693_45452f-5c> |
CS 13 – VK 1 157693_1615bb-0f> |
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| 157693_1d0108-97> | 157693_8fad77-84> |
वैशाख मास
वैशाख मास : प्रमुख त्योहार
- यह हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष का दूसरा मास है, जो अप्रैल–मई में वसंत के उत्तरार्द्ध व ग्रीष्म के प्रारम्भ में आता है।
- यह मास स्नान, दान, व्रत और तीर्थ-यात्रा के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। वैशाख शुक्ल अक्षय तृतीया को विशेष पुण्य फलदायी माना गया है।
- इसी मास में बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलते हैं, जगन्नाथ रथयात्रा की तैयारी प्रारम्भ होती है तथा बाँके बिहारी जी का चरण दर्शन होता है। लोक परंपरा में यह मास विवाह और शुभ कार्यों के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
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Festival 157693_9c71bd-5a> |
Date 157693_6fa246-a8> |
Facts 157693_de96cc-75> |
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बुद्ध पूर्णिमा 157693_aab1dc-85> |
वैशाख पूर्णिमा 157693_822ab0-fe> |
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अक्षय तृतीया (आखा तीज) 157693_fb2a9f-af> |
वैशाख शुक्ल तृतीया 157693_6b6f92-88> |
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मेला 157693_bd74bd-28> |
तिथि 157693_3ca522-66> |
प्रमुख विशेषताएँ 157693_fb916e-3d> |
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धींगा गवर बेतमार मेला – जोधपुर 157693_fe740d-16> |
वैशाख कृष्ण तृतीया 157693_9b8574-97> |
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गैर मेला – (सियावा,सिरोही) 157693_7c1e72-ed> |
वैशाख शुक्ल चतुर्थी 157693_d34357-b1> |
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नरसिंह चतुर्दशी (नरसिंह जयंती) 157693_30b030-7f> |
वैशाख शुक्ल चतुर्थी 157693_26a9a7-bc> |
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नारायणी माता मेला (सरिस्का, अलवर) 157693_a9760d-21> |
वैशाख शुक्ल एकादशी 157693_3ad03b-63> |
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बाणगंगा मेला (विराटनगर, कोटपूतली-बहरोड़) 157693_c70897-8b> |
वैशाख पूर्णिमा 157693_54321e-7d> |
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गोमती सागर मेला (झालरापाटन) 157693_c04bbe-cc> |
वैशाख पूर्णिमा 157693_7ba9c9-0f> |
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मातृकुंडिया मेला (चित्तौड़गढ़) 157693_81e057-ff> |
वैशाख पूर्णिमा 157693_5dc1cb-a6> |
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गौतमेश्वर मेला (अरनोद,प्रतापगढ़) 157693_ec6bb7-85> |
वैशाख पूर्णिमा 157693_1b94af-4b> |
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मार्कण्डेश्वर मेला (सिरोही) 157693_6d670e-a5> |
वैशाख पूर्णिमा 157693_c2b6ab-8e> |
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ज्येष्ठ मास
ज्येष्ठ मास: प्रमुख त्योहार
- ज्येष्ठ मास हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष का तीसरा मास है, जो मई–जून के बीच आता है।
- यह ग्रीष्म ऋतु का चरम काल माना जाता है, इसलिए इस मास में जलदान, छाया, सेवा, व्रत और संयम का विशेष महत्व है।
- लोक परंपरा में ज्येष्ठ मास को तप, परोपकार और पुण्य अर्जन से जोड़ा जाता है।
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Festival 157693_c003ad-15> |
Date 157693_bbc6d5-62> |
Facts 157693_97372f-9b> |
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वट सावित्री व्रत 157693_9145f3-10> |
ज्येष्ठ अमावस्या 157693_73d515-cb> |
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शनि जयंती 157693_c0aa9f-05> |
ज्येष्ठ अमावस्या 157693_e0b282-1c> |
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गंगा दशहरा 157693_222506-d1> |
ज्येष्ठ शुक्ल दशमी 157693_6e3324-a9> |
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निर्जला एकादशी 157693_ba12f9-a8> |
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी 157693_a0f73b-f9> |
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वट पूर्णिमा 157693_50e31a-70> |
ज्येष्ठ पूर्णिमा 157693_eb95a2-0d> |
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| मेला | तिथि | प्रमुख विशेषताएँ |
| सीता माता मेला – प्रतापगढ़ | ज्येष्ठ अमावस्या(माता सीता का वनवास के दौरान निवास, लव-कुश का जन्म) | सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य में (उड़न गिलहरी) |
| सीता बाड़ी का मेलाकेलवाड़ा (बारां) | वैशाख पूर्णिमा से ज्येष्ठ अमावस्या | सहरियाओं का लघु कुंभ |
| गंगा दशमी मेला – कामां (डीग) | ज्येष्ठ शुक्ल सप्तमी से द्वादशी तक | गंगा अवतरण |
आषाढ़ मास
आषाढ़ मास : प्रमुख त्योहार
- आषाढ़ मास हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष का चौथा मास है, जो जून–जुलाई में आता है
- यह वर्षा ऋतु के आगमन का संकेत देता इसलिए कृषि गतिविधियों की शुरुआत होती है।
- धार्मिक दृष्टि से आषाढ़ में चातुर्मास का आरम्भ होता है, जिसके कारण विवाह एवं अन्य मांगलिक कार्य स्थगित रहते हैं।
- मान्यता है कि इसी मास में भगवान विष्णु योग निद्रा में प्रवेश करते हैं, इसलिए तप, संयम और साधना का विशेष महत्व माना जाता है।
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Festival 157693_068d13-16> |
Date 157693_bda486-6a> |
Facts 157693_b86a6d-c2> |
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गुप्त नवरात्रि 157693_d6c7b1-67> |
आषाढ़ शुक्ल एकम् से नवम 157693_960560-3b> |
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भडल्या नवमी 157693_030950-10> |
आषाढ़ शुक्ल नवम 157693_a75bee-e5> |
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देवशयनी ग्यारस 157693_07906e-7e> |
आषाढ़ शुक्ल एकादशी 157693_78def5-20> |
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गुरु पूर्णिमा/ व्यास पूर्णिमा 157693_cf0e62-79> |
आषाढ़ पूर्णिमा 157693_0502f5-3f> |
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श्रावण मास
श्रावण मास: प्रमुख त्योहार
- श्रावण मास हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष का पाँचवाँ मास है, जो सामान्यत: जुलाई–अगस्त में आता है।
- यह वर्षा ऋतु, हरियाली और भगवान शिव की उपासना का प्रमुख मास माना जाता है। श्रावण मास प्रकृति-पूजन, लोक – परंपराओं तथा आस्था और पर्यावरण चेतना का महत्त्वपूर्ण प्रतीक है।
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Festival 157693_1c73bd-23> |
Date 157693_e6e136-f8> |
Facts 157693_a0388f-b5> |
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नाग पंचमी 157693_ba4b22-e2> |
श्रावण कृष्ण पंचमी 157693_414054-69> |
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निडरी नवमी 157693_f28474-50> |
श्रावण कृष्ण नवमी 157693_8d4c52-ce> |
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कामिका एकादशी 157693_6ff318-15> |
श्रावण कृष्ण ग्यारस 157693_2bee6c-81> |
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हरियाली अमावस्या 157693_b2f740-66> |
श्रावण अमावस्या 157693_2f407b-9b> |
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छोटी तीज 157693_2ed7dc-3b> |
श्रावण शुक्ल तृतीया 157693_975150-d0> |
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रक्षाबंधन (नारियल पूर्णिमा) 157693_98d80f-30> |
श्रावण पूर्णिमा 157693_aa29cc-db> |
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श्रावण मास के व्रत
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वन सोमवार / सुखिया सोमवार व्रत 157693_c43178-52> |
श्रावण मास के सभी सोमवारों को 157693_f72221-26> |
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मंगलागौरी व्रत 157693_65b8bb-2d> |
मंगलवार को 157693_5542da-f7> |
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मेला 157693_7f62da-74> |
तिथि 157693_705e3f-a0> |
प्रमुख विशेषताएँ 157693_419ca6-4a> |
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कल्पवृक्ष मेला 157693_55c3ce-20> |
हरियाली अमावस्या 157693_7fe3fa-aa> |
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फतेहसागर झील मेला 157693_a90484-16> |
हरियाली अमावस्या 157693_c306fa-3f> |
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बुड्ढा जोहड़ मेला 157693_f0389c-e8> |
श्रावण अमावस्या 157693_ab26bf-76> |
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परशुराम महादेव मेला 157693_f85bec-de> |
श्रावण शुक्ल सप्तमी 157693_4b096f-a3> |
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सालेश्वर महादेव मेला 157693_cab544-22> |
श्रावण शुक्ल षष्ठी-सप्तमी 157693_5759be-34> |
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वीरपुरी मेला 157693_9134e0-e4> |
श्रावण माह का अंतिम सोमवार 157693_f27aaf-01> |
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मीराबाई / चारभुजा नाथ मेला 157693_e1dd29-52> |
श्रावण शुक्ल 11 से भाद्रपद कृष्ण 3 157693_3b4e6e-96> |
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कल्याण जी मेला डिग्गी (टोंक) 157693_24f060-43> |
श्रावण अमावस्यावैष्णव धर्म 157693_4a8ca0-f6> |
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| 157693_33b7f5-5c> | 157693_e65616-d7> |
भाद्रपद मास
- भाद्रपद हिन्दू पंचांग का एक प्रमुख महीना है, जिसे त्योहारों की अधिकता वाला माह माना जाता है।
- इस माह में कृष्ण जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, तेजा दशमी और रामदेवरा मेला जैसे महत्त्वपूर्ण धार्मिक एवं लोक पर्व आते हैं।
- भाद्रपद मास का संबंध कृषि, वर्षा और लोक देवताओं की उपासना से भी जुड़ा हुआ है। इसी माह के अंत में पितृ पक्ष (श्राद्ध) का प्रारंभ होता है, जो पूर्वजों की स्मृति और श्रद्धा से संबंधित है।
भाद्रपद मास : प्रमुख त्योहार
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Festival 157693_804544-ef> |
Date 157693_d921f8-e2> |
Facts 157693_d958da-5f> |
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बड़ी तीज 157693_b7da43-c4> |
भाद्रपद कृष्ण तृतीया 157693_3fed47-57> |
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हल छठ 157693_c9fe2d-ed> |
भाद्रपद कृष्ण षष्ठी 157693_7f3212-a4> |
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कृष्ण जन्माष्टमी 157693_706e28-3a> |
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी 157693_539afc-26> |
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गोगा नवमी 157693_527355-f9> |
भाद्रपद कृष्ण नवमी 157693_5f625f-30> |
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बछ बारस 157693_15bb27-ec> |
भाद्रपद कृष्ण द्वादशी 157693_5f8187-88> |
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सती अमावस्या 157693_e86fd5-74> |
भाद्रपद कृष्ण अमावस्या 157693_95e8db-7e> |
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बाबे री बीज 157693_3e04cd-dc> |
भाद्रपद शुक्ल द्वितीया 157693_00bd19-81> |
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गणेश चतुर्थी 157693_ac5f3f-36> |
भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी 157693_0c50ae-bf> |
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ऋषि पंचमी 157693_6854ed-0f> |
भाद्रपद शुक्ल पंचमी 157693_fbc2ce-e1> |
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राधाष्टमी 157693_56ee60-ce> |
भाद्रपद शुक्ल अष्टमी 157693_6e03f2-c9> |
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तेजा दशमी / रामदेव जयंती 157693_dae8bc-ef> |
भाद्रपद शुक्ल दशमी 157693_37ed7f-78> |
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जलझूलनी एकादशी / देवझूलनी 157693_8f68c3-ff> |
भाद्रपद शुक्ल एकादशी 157693_c1651d-89> |
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अनंत चतुर्दशी 157693_5e298e-c8> |
भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी 157693_7e0ef6-83> |
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श्राद्ध प्रारंभ 157693_1a8b7c-e6> |
भाद्रपद पूर्णिमा – आश्विन अमावस 157693_66b0c3-09> |
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भाद्रपद मास के प्रमुख मेले
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मेला 157693_74da71-04> |
तिथि 157693_cbed5b-b9> |
प्रमुख विशेषताएँ 157693_739817-52> |
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रामदेवरा मेला (जैसलमेर) 157693_68b8ab-d2> |
BS 2 – 11 157693_c6e467-84> |
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रानी सती मेला (झुंझुनूं) 157693_3ec75f-77> |
BK 11 – MK 9 157693_5363ff-78> |
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वीर तेजाजी पशु मेला (नागौर) 157693_f02e3f-cb> |
BS10 157693_34dab6-ab> |
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गणेश चतुर्थी मेला(सवाई माधोपुर) 157693_52a397-8c> |
BS4 157693_367a9c-bc> |
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भर्तृहरि मेला 157693_6c52d3-b7> |
BS8 157693_467f2e-fc> |
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| 157693_7fa262-96> | 157693_0aae9a-ab> |
आश्विन मास
- हिन्दू पंचांग के अनुसार अश्विन वर्ष का सातवाँ मास है, जो सामान्यत: सितंबर–अक्टूबर के बीच आता है और शरद ऋतु का प्रतिनिधि माना जाता है।
- इस मास में शारदीय नवरात्र, दुर्गा पूजा, महानवमी और विजयादशमी (दशहरा) जैसे प्रमुख पर्व आते हैं।
- अश्विन पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा/कोजागरी पूर्णिमा) का विशेष धार्मिक महत्व है, जिसे रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह मास शक्ति उपासना, धर्म-विजय और सामाजिक उत्सवों से जुड़ा हुआ माना जाता है।
आश्विन मास : प्रमुख त्योहार
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Festival 157693_6cc127-34> |
Date 157693_f18ac1-76> |
Facts 157693_ded891-78> |
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अश्विन अमावस्या 157693_07ae30-c4> |
आश्विन अमावस्या 157693_870285-1a> |
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शारदीय नवरात्र प्रारम्भ 157693_fd0f35-9c> |
आश्विन शुक्ल 1 – 9 157693_aa2635-b7> |
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महासप्तमी 157693_6d4e76-49> |
आश्विन शुक्ल सप्तमी 157693_6a84dd-59> |
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दुर्गाष्टम / महाअष्टमी 157693_40b467-9e> |
आश्विन शुक्ल अष्टमी 157693_e08fce-3f> |
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महानवमी 157693_1263f2-8b> |
आश्विन शुक्ल नवमी 157693_69dcc2-2b> |
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दशहरा 157693_92c680-4e> |
आश्विन शुक्ल दशमी 157693_094b94-8c> |
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शरद पूर्णिमा / कोजागरी पूर्णिमा 157693_42fce8-e5> |
आश्विन पूर्णिमा 157693_c961dc-cf> |
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| 157693_6f1562-0f> | 157693_13272b-d1> |
कार्तिक मास
- कार्तिक मास को स्नान-दान का मास कहा जाता है, क्योंकि इस पूरे महीने में विशेष रूप से कार्तिक स्नान और दान का धार्मिक महत्त्व माना जाता है।
- देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने की मान्यता है, जिसके बाद विवाह एवं अन्य शुभ कार्यों का पुनः आरंभ होता है।
- इसी मास में लगने वाला पुष्कर मेला राजस्थान का सबसे रंगीन और अंतर्राष्ट्रीय स्तर का सबसे प्रसिद्ध मेला है, जिसमें बड़ी संख्या में देश-विदेश के पर्यटक आते हैं।
- कपिल मुनि मेला (कोलायत) को जांगल प्रदेश का कुंभ कहा जाता है, जो अपने धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व के लिए प्रसिद्ध है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन दीपदान, स्नान और विभिन्न धार्मिक मेलों का आयोजन होता है, जिससे इस मास का विशेष धार्मिक महत्त्व ओर अधिक बढ़ जाता है।
कार्तिक मास : प्रमुख त्योहार
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Festival 157693_ec0516-84> |
Date 157693_3fd735-9b> |
Facts 157693_ff2c55-db> |
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करवा चौथ 157693_e2d3b6-28> |
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी 157693_2bf23d-fb> |
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अहोई अष्टमी 157693_910069-12> |
कार्तिक कृष्ण अष्टम 157693_fb138f-a0> |
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तुलसी एकादशी 157693_cfab5c-0d> |
कार्तिक कृष्ण एकादश 157693_1b4f93-41> |
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धनतेरस धनत्रयोदशी 157693_192ac8-20> |
कार्तिक कृष्ण तेरस 157693_952506-e1> |
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नरक चतुर्दशी 157693_486318-44> |
कार्तिक कृष्ण चौदस 157693_4ac436-2a> |
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दीपावली (लक्ष्मी पूजन) 157693_c765df-39> |
कार्तिक अमावस्या 157693_662f09-03> |
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गोवर्धन पूजा 157693_84669e-a8> |
कार्तिक शुक्लएकम 157693_2ad82e-37> |
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भाई दूज 157693_ff94bd-67> |
कार्तिक शुक्ल द्वितीया 157693_08269d-34> |
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गोपाष्टमी 157693_f6b605-d8> |
कार्तिक शुवल अष्टमी 157693_33d422-4c> |
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आंवला नवमी 157693_143664-64> |
कार्तिक शुक्ल नवमी 157693_363212-76> |
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देवउठनी / देवोत्थान ग्यारस 157693_d51c9c-8a> |
कार्तिक शुक्ल एकादशी 157693_e473c3-e3> |
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कार्तिक पूर्णिमा 157693_181284-fd> |
कार्तिक पूर्णिमा 157693_a92e79-81> |
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कार्तिक मास के प्रमुख मेले
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मेला 157693_5f469b-f6> |
तिथि 157693_67cf1c-63> |
प्रमुख विशेषताएँ 157693_bf147f-c7> |
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गरुड़ मेला बंशी पहाड़पुर (भरतपुर) 157693_c85c31-07> |
कार्तिक शुक्ल तृतीया 157693_804c0a-53> |
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पुष्कर मेला(अजमेर) 157693_559680-66> |
शुक्ल एकादशी – पूर्णिमा 157693_c47573-d7> |
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कपिल मुनि मेला(बीकानेर) 157693_8963d2-90> |
कार्तिक पूर्णिमा 157693_98beab-7c> |
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चंद्रभागा मेला(झालावाड़) 157693_ac24b5-c0> |
कार्तिक पूर्णिमा 157693_ede5a2-b0> |
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साहवा सिख मेलासाहवा (चूरू) 157693_d4ad48-36> |
कार्तिक पूर्णिमा 157693_979d46-0b> |
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कपिल धारा मेला (बारां) 157693_a5e303-3c> |
कार्तिक पूर्णिमा 157693_02a9ee-7a> |
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मार्गशीर्ष मास
- मार्गशीर्ष मास को वैष्णव भक्ति का प्रमुख मास माना जाता है, क्योंकि इस अवधि में भगवान विष्णु की उपासना, स्नान और व्रतों का विशेष धार्मिक महत्व होता है।
- मोक्षदा एकादशी का संबंध भगवत गीता के उपदेश से जोड़ा जाता है, जिस कारण इस दिन गीता पाठ और विष्णु पूजन का विशेष महत्व माना जाता है।
- इसी मास में आयोजित होने वाला मानगढ़ धाम मेला आदिवासी समाज से जुड़ा एक महत्त्वपूर्ण स्मृति मेला है, जो गुरु गोविन्द गिरी के बलिदान की याद दिलाता है। वहीं चंद्रभागा पशु मेला हाड़ौती क्षेत्र में मालवी नस्ल के पशुओं के क्रय-विक्रय के लिए प्रसिद्ध है, जिससे इस मास का आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व भी स्पष्ट होता है।
मार्गशीर्ष मास : प्रमुख त्योहार
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Festival 157693_362c6f-6c> |
Date 157693_eb939d-bc> |
Facts 157693_0f3d8f-de> |
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मोक्षदा एकादशी 157693_9ed85c-68> |
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी 157693_2d137d-55> |
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| 157693_a28466-a1> | 157693_c52eca-10> |
पौष मास
- पौष मास को शीत ऋतु का प्रमुख धार्मिक मास माना जाता है, जिसमें स्नान, दान और व्रतों का विशेष महत्त्व होता है। इस मास की पौष पूर्णिमा पर स्नान-दान को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है और श्रद्धालु धार्मिक आस्था के साथ दान-पुण्य करते हैं।
- इसी मास में आयोजित होने वाला नाकोड़ा जी मेला जैन धर्म का एक प्रमुख और प्रसिद्ध मेला है, जहाँ देश-भर से जैन श्रद्धालु दर्शन एवं साधना के लिए आते हैं।
पौष मास : प्रमुख त्योहार
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Festival 157693_bcd254-61> |
Date 157693_cc2c22-c0> |
Facts 157693_7f40ec-ba> |
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पौष अमावस्या 157693_45d64c-44> |
पौष शुक्ल अमावस्या 157693_36daf5-d8> |
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सफला एकादशी 157693_16e734-bc> |
पौष शुक्ल एकादशी |
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| 157693_ea082b-a7> | 157693_30d504-de> |
माघ मास
- माघ मास को स्नान-दान का सर्वोत्तम मास माना जाता है, क्योंकि इस अवधि में किए गए स्नान और दान को विशेष पुण्यफलदायी माना गया है।
- इसी मास में आने वाली वसंत पंचमी ज्ञान, विद्या और कला की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती की पूजा का प्रमुख पर्व है।
- माघ माह में आयोजित होने वाला बेणेश्वर मेला राजस्थान का प्रसिद्ध “आदिवासियों का कुंभ” कहलाता है, जो जनजातीय संस्कृति और धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र है।
- वहीं माघ पूर्णिमा के दिन स्नान-दान के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक मेलों का आयोजन होता है, जिससे इस मास का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व ओर अधिक बढ़ जाता है।
माघ मास : प्रमुख त्योहार
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Festival 157693_719496-0b> |
Date 157693_c0af38-1f> |
Facts 157693_4a7ded-a6> |
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तिल चौथ 157693_c162c4-fa> |
माघ कृष्ण चतुर्थी 157693_f90e0a-78> |
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भीष्म अष्टमी 157693_ae92b4-5a> |
माघ कृष्ण अष्टमी 157693_940e26-bc> |
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षटतिला एकादशी 157693_033858-c8> |
माघ कृष्ण एकादशी 157693_6386ce-6c> |
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मौनी अमावस 157693_e1c23e-c9> |
माघ अमावस 157693_a45fcc-c6> |
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बसंत पंचमी 157693_befccc-d1> |
माघ शुक्ल पंचमी 157693_07b432-f2> |
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बेणेश्वर मेला 157693_97a77a-a0> |
माघ पूर्णिमा 157693_c31cad-cd> |
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माघ मास के प्रमुख मेले
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मेला 157693_95877f-c7> |
तिथि 157693_18317e-de> |
प्रमुख विशेषताएँ 157693_b39b02-75> |
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बेणेश्वर मेला डूंगरपुर (नवाटापुरा) 157693_867039-3b> |
MS 11 – पूर्णिमा 157693_173b9a-0a> |
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चौथ माता मेलाचौथ का बरवाड़ा (सवाई माधोपुर) 157693_b3fc59-8b> |
माघ कृष्ण चतुर्थी 157693_d30451-34> |
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पर्यटन मरु मेला जैसलमेर व सम |
माघ शुक्ल त्रयोदशी – अमावस्या 157693_30267e-7f> |
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फाल्गुन मास
- फाल्गुन मास को उत्सवों और रंगों का मास माना जाता है, क्योंकि इस महीने में उल्लास, आनंद और सामूहिक सहभागिता से जुड़े अनेक पर्व मनाए जाते हैं।
- इसी मास में आने वाली महाशिवरात्रि भगवान शिव की उपासना का सर्वोच्च पर्व है, जिसमें व्रत, रात्रि जागरण और विशेष पूजा का महत्व होता है।
- फाल्गुन पूर्णिमा को मनाई जाने वाली होली सामाजिक समरसता, प्रेम और उल्लास का प्रतीक पर्व है, जो भेदभाव को मिटाकर आपसी भाईचारे को प्रोत्साहित करता है।
- वहीं मेहन्दीपुर बालाजी धाम हनुमान जी के बाल रूप की आराधना का प्रमुख केंद्र है, जहाँ श्रद्धालु आस्था और विश्वास के साथ दर्शन हेतु आते हैं।
फाल्गुन मास : प्रमुख त्योहार
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Festival 157693_362721-f1> |
Date 157693_f31f9e-e1> |
Facts 157693_fcdd97-1b> |
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महाशिवरात्रि 157693_4b5d32-de> |
फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी 157693_05ea32-02> |
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चनणी चेरी मेला 157693_0979f3-47> |
फाल्गुन शुक्ल सप्तमी 157693_30d60a-92> |
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आंवला एकादशी 157693_84e9c1-b0> |
फाल्गुन शुक्ल एकादशी 157693_39cec3-25> |
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होली 157693_eecdb0-8e> |
फाल्गुन पूर्णिमा 157693_73079c-1f> |
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- फुलेरा दूज – FS 2
- खेलनी सातम – FS 7
- महाशिवरात्रि व्रत – फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी
- होलिका दहन व्रत – फाल्गुन पूर्णिमा
- होली (धुलंडी) – फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन होता है। अगले दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को धुलंडी (रंगों की होली) मनाई जाती है। यह पर्व वसंत ऋतु, उल्लास, सामाजिक समरसता और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
- राजस्थान में क्षेत्रीय विशेषताएँ –
- जयपुर – सभ्य समाज द्वारा “जन्म, मरण और परण” का प्रतीकात्मक आयोजन (बाप की अर्थी, बेटे की बारात और पौत्र जन्म का दृश्य)
- भिनाय (अजमेर) – कोड़ामार होली
- महावीरजी (करौली) – लठमार होली चांदन गाँव (करौली)
- बाड़मेर – पत्थर मार होली , कानुड़ा गाँव का गैर नृत्य
- मेवाड़ अंचल – आदिवासियों का भगोरिया खेल , ग्रामीण क्षेत्रों में गैर नृत्य
- शेखावाटी क्षेत्र – गींदड़ नृत्य
- बीकानेर – प्रसिद्ध “रम्मतें” , डेगची / बाल्टी मार होली
- ब्यावर (अजमेर) – बादशाह की सवारी
- कोटा (आवां व सांगोद) – न्हाण उत्सव / न्हाण की होली , खेल-तमाशों द्वारा मनोरंजन
- राजस्थान में होली के विविध रूप –
- देवर–भाभी की होली – ब्यावर (अजमेर)
- रोने-बिलखने वाली होली – जोधपुर
- गोबर के कंडों की होली – गलियाकोट (डूंगरपुर)
- राड़ रमण की होली – भिलुड़ा ग्राम (डूंगरपुर)
- दूध-दही की होली – नाथद्वारा (राजसमंद)
- बादशाह की होली – नाथद्वारा (राजसमंद)
- अंगारों की होली – केकड़ी (अजमेर), लालसोट (दौसा)
- मुर्दों की होली – मरुधनी (भीलवाड़ा)
- फूलों की होली – गोविंद देव जी मंदिर, जयपुर
- कंकड़ मार होली – जैसलमेर
- भाटा गैर – जालौर
- कानुड़ा गाँव का गैर नृत्य – बाड़मेर
- गोटा गैर – भीनमाल (जालौर)
- राजस्थान में क्षेत्रीय विशेषताएँ –
फाल्गुन मास के प्रमुख मेले
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मेला 157693_49fd59-38> |
तिथि 157693_50add2-07> |
प्रमुख विशेषताएँ 157693_9d4cdd-dc> |
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शिवरात्रि मेला शिवाड़ (सवाई माधोपुर) 157693_eca9d4-f5> |
फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी 157693_c6cac1-3b> |
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चन्द्रप्रभु मेला तिजारा (अलवर) 157693_a43116-d6> |
फाल्गुन शुक्ल सप्तमी 157693_283199-cd> |
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डाडा पम्पाराम मेला विजयनगर (श्रीगंगानगर) 157693_8d63a3-77> |
फाल्गुन माह (7 दिन) 157693_bab42f-d6> |
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तिलस्वा महादेव मेला मांडलगढ़ (भीलवाड़ा) 157693_fd25b0-fc> |
फाल्गुन पूर्णिमा 157693_6f0217-e2> |
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मेहंदीपुर बालाजी मेला (दौसा) 157693_73f39e-e1> |
फाल्गुन माह 157693_179541-29> |
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मुस्लिम धर्म के त्योहार एवं उर्स
मुस्लिम समाज के त्योहार एवं उर्स का अध्ययन करने से पहले इस्लामी (हिजरी) कैलेंडर के महीनों के नाम जानना आवश्यक है। इस्लामी कैलेंडर चंद्र आधारित होता है और इसमें कुल 12 महीने होते हैं— 1. मुहर्रम 2.सफ़र 3. रबी-उल-अव्वल 4. रबी-उल-सानी (रबी-उल-आख़िर) 5. जमाद-उल-अव्वल 6. जमाद-उल-सानी (जमाद-उल-आख़िर) 7. रज्जब 8. शाबान 9. रमज़ान 10. शव्वाल 11. ज़िलक़ाद 12. ज़िलहिज्जइन्हीं महीनों के अनुसार मुस्लिम समाज के प्रमुख त्योहार और उर्स निर्धारित होते हैं, जैसे रमज़ान के बाद ईद-उल-फ़ित्तर, ज़िलहिज्ज में ईद-उल-जुहा, रज्जब माह में अजमेर का उर्स तथा मुहर्रम माह में मातमी आयोजन।
मुस्लिम समाज : प्रमुख त्योहार
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अवसर / पर्व 157693_d7b779-b3> |
इस्लामी माह / तिथि 157693_ccbbb9-8c> |
प्रकृति 157693_83a3a0-28> |
विशेष 157693_cbc448-6d> |
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ईद-उल-फ़ित्तर 157693_a4044f-20> |
रमज़ान के बाद शव्वाल माह की 1 तारीख 157693_dbaaaf-44> |
धार्मिक पर्व 157693_784665-33> |
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ईद-उल-जुहा (बकरीद) 157693_e3922d-8a> |
ज़िलहिज्ज माह की 10 तारीख 157693_310767-4c> |
धार्मिक पर्व 157693_6aa666-15> |
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मुहर्रम 157693_22df1b-f9> |
मुहर्रम माह 157693_295bba-19> |
शोक पर्व 157693_8c53f0-be> |
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शब-ए-बारात 157693_3a8aa6-12> |
शाबान माह की 14वीं तारीख 157693_867218-49> |
धार्मिक रात्रि 157693_87cf03-a5> |
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शब-ए-क़द्र 157693_3bd93f-7e> |
रमज़ान की 27वीं तारीख 157693_6fd7c5-3e> |
पवित्र रात्रि 157693_3a2a97-3b> |
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ईद उल मिलाद-उन-नबी (बारावफात) 157693_7155f9-ab> |
रबी-उल-अव्वल माह 12वीं तारीख 157693_07626a-2a> |
धार्मिक पर्व 157693_dcd8e3-97> |
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मुस्लिम समाज : प्रमुख उर्स (राजस्थान विशेष)
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उर्स 157693_9379f5-24> |
स्थान 157693_58c56f-1c> |
समय 157693_683598-70> |
विशेष 157693_c4f27e-5b> |
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ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती का उर्स 157693_6658b2-78> |
अजमेर 157693_d5bd87-55> |
रज्जब माह (6 दिन) 157693_8eae96-72> |
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तारकीन का उर्स 157693_36188a-bc> |
नागौर 157693_d621cd-9a> |
रज्जब माह 157693_2d2404-60> |
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गलियाकोट का उर्स 157693_d167d2-21> |
गलियाकोट (डूंगरपुर) 157693_42d4cd-5c> |
मुहर्रम की 27वीं तारीख 157693_afcdda-25> |
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नरहड़ की दरगाह का मेला 157693_f00c64-86> |
नरहड़ (झुंझुनूँ) 157693_acffba-a0> |
कृष्ण जन्माष्टमी 157693_8816dc-dc> |
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ख्वाजा निज़ामुद्दीन शाह का उर्स 157693_710a94-3d> |
फतेहपुर (शेखावाटी) 157693_4f3f3e-64> |
निर्धारित तिथि 157693_f9b1ab-90> |
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पंजाबशाह बाबा का उर्स 157693_fcf209-61> |
अजमेर 157693_b93025-b7> |
ऐतिहासिक 157693_0c1dbd-c7> |
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जैन धर्म
जैन धर्म भारत के प्राचीनतम धर्मों में से एक है, जिसकी मूल शिक्षाएँ अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह पर आधारित हैं। जैन परंपरा के अनुसार कुल 24 तीर्थंकर हुए हैं, जिनमें अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर थे। जैन धर्म कर्म सिद्धांत और आत्मशुद्धि पर विशेष बल देता है तथा मोक्ष को जीवन का अंतिम लक्ष्य मानता है। यह धर्म तप, संयम और व्रतों के माध्यम से आध्यात्मिक उन्नति पर जोर देता है।
जैन धर्म के प्रमुख पर्व एवं त्योहार
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पर्व / उत्सव 157693_d22df9-26> |
तिथि / माह 157693_bbe219-4f> |
विशेष 157693_cec302-db> |
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ऋषभदेव जयंती 157693_992503-f0> |
चैत्र कृष्ण नवमी 157693_3737e7-5c> |
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महावीर जयंती 157693_13c843-32> |
चैत्र शुक्ल त्रयोदशी 157693_7c85d7-d8> |
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पर्युषण 157693_35829d-24> |
भाद्रपद शुक्ल पंचमी–चतुर्दशी 157693_ebde72-57> |
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दस-लक्षण पर्व 157693_e41bf4-28> |
चैत्र , भाद्रपद , माघ 157693_06d348-48> |
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क्षमावाणी / संवत्सरी 157693_f230d0-ab> |
पर्युषण का अंतिम दिन 157693_81de9e-1c> |
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सुगंध दशमी 157693_cdd760-18> |
भाद्रपद शुक्ल दशमी 157693_e818f7-60> |
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रोट तीज 157693_6958ed-1f> |
भाद्रपद शुक्ल तृत्तीय 157693_8f9e0d-3e> |
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दीपावली (निर्वाण दिवस) 157693_2ee26b-63> |
कार्तिक अमावस्या 157693_3380b5-5a> |
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सिक्ख धर्म
सिक्ख धर्म की स्थापना 15वीं शताब्दी में गुरु नानक देव जी द्वारा की गई थी। यह धर्म एकेश्वरवाद पर आधारित है और ईश्वर को निर्गुण, निराकार और सर्वव्यापी मानता है। सिक्ख धर्म में गुरु परंपरा का विशेष महत्त्व है, जिसमें कुल दस गुरु हुए; अंतिम गुरु गुरु गोविंद सिंह जी ने गुरु ग्रंथ साहिब को शाश्वत गुरु घोषित किया। सिक्ख धर्म का मूल संदेश नाम जपो, किरत करो और वंड छको (ईश्वर स्मरण, परिश्रम से आजीविका और बाँटकर खाने) पर आधारित है। यह धर्म समानता, सेवा, भाईचारे और सामाजिक न्याय पर विशेष बल देता है तथा जाति-भेद और अंधविश्वास का विरोध करता है।
सिख धर्म के प्रमुख त्योहार व पर्व
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पर्व 157693_4204c1-91> |
समय 157693_c10569-74> |
विशेष 157693_3148fc-28> |
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गुरु नानक जयंती (गुरुपर्व) 157693_2ceeca-ac> |
कार्तिक पूर्णिमा 157693_64e75c-68> |
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लोहड़ी 157693_5e2722-d2> |
13 जनवरी 157693_e807bb-18> |
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बैशाखी 157693_01278c-41> |
13/14 अप्रैल 157693_6dcb18-21> |
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होला मोहल्ला 157693_8f712e-d8> |
फाल्गुन 157693_110b8d-34> |
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शहीदी दिवस 157693_1090d2-cb> |
विभिन्न तिथियाँ 157693_afa154-f2> |
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ईसाई धर्म
ईसाई धर्म की उत्पत्ति ईसा मसीह (यीशु मसीह) की शिक्षाओं से हुई, जिनका जन्म लगभग ईसा पूर्व 4–6 के आसपास माना जाता है। यह धर्म एकेश्वरवाद पर आधारित है और ईश्वर को प्रेम, करुणा और क्षमा का स्रोत मानता है। ईसाई धर्म का पवित्र ग्रंथ बाइबिल है, जिसमें पुराना नियम (Old Testament) और नया नियम (New Testament) शामिल हैं। इस धर्म का मूल संदेश प्रेम, त्याग, सेवा और क्षमा पर आधारित है—जिसे “अपने पड़ोसी से प्रेम करो” के सिद्धांत से व्यक्त किया जाता है। ईसाई धर्म ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और समाज सेवा के क्षेत्र में विश्वभर में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।
ईसाई धर्म : प्रमुख त्योहार व पर्व
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पर्व 157693_5cc19c-84> |
समय 157693_98b436-1a> |
विशेष 157693_683981-e9> |
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क्रिसमस 157693_0d5a41-4b> |
25 दिसंबर 157693_170a73-e2> |
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गुड फ्राइडे / ब्लैक / हॉली फ्राइडे 157693_48a1c9-05> |
मार्च–अप्रैल 157693_0cb484-35> |
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ईस्टर 157693_48437f-5f> |
गुड फ्राइडे के बाद 157693_e492dd-db> |
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न्यू ईयर 157693_b913d7-5c> |
1 जनवरी 157693_092eec-03> |
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बौद्ध धर्म
बौद्ध धर्म की स्थापना गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) ने छठी शताब्दी ईसा पूर्व में की थी। यह धर्म दुःख के कारण और निवारण पर केंद्रित है, जिसे बुद्ध ने चार आर्य सत्य और अष्टांगिक मार्ग के माध्यम से समझाया। बौद्ध धर्म में अहिंसा, करुणा, मध्यम मार्ग और प्रज्ञा पर विशेष बल दिया गया है। इसका अंतिम लक्ष्य निर्वाण की प्राप्ति है, अर्थात् जन्म–मृत्यु के बंधन से मुक्ति। बौद्ध धर्म ने एशिया के अनेक देशों में सांस्कृतिक, नैतिक और दार्शनिक प्रभाव डाला तथा शांति और सह-अस्तित्व का संदेश दिया।
बौद्ध धर्म के प्रमुख त्योहार व पर्व
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पर्व 157693_6befbe-a9> |
समय 157693_bea04c-82> |
विशेष 157693_6cf072-bf> |
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बुद्ध पूर्णिमा (वैशाख पूर्णिमा) 157693_7be51c-45> |
वैशाख 157693_de5245-b5> |
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अशोक विजयादशमी 157693_ed1f62-76> |
आश्विन 157693_059823-81> |
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कठिन चीवर दान 157693_27f60f-53> |
वर्षा ऋतु के बाद 157693_ecc513-43> |
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पारसी (ज़रथोस्त्री) धर्म
पारसी अथवा ज़रथोस्त्री धर्म की स्थापना ज़रथोस्त्र (ज़रतुस्त्र) द्वारा प्राचीन ईरान (फ़ारस) में की गई थी। यह धर्म एकेश्वरवाद पर आधारित है और आहुरमज़्दा को सर्वोच्च ईश्वर मानता है। पारसी धर्म का मूल सिद्धांत सत् और असत् के संघर्ष पर आधारित है, जिसे “सद्विचार, सद्वचन और सद्कर्म” (Good Thoughts, Good Words, Good Deeds) के माध्यम से व्यक्त किया जाता है। इसका पवित्र ग्रंथ जेन्दअवेस्ता है और अग्नि को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए अग्नि मंदिरों का विशेष महत्त्व है। भारत में पारसी समुदाय ने व्यापार, उद्योग, समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
पारसी (ज़रथोस्त्री) धर्म : प्रमुख त्योहार
| पर्व | समय | विशेष |
| नौरोज | 21 मार्च | पारसी नववर्ष |
| खोरदाद साल | अगस्त | पैगंबर ज़रथोस्त्र का जन्म दिवस |
| गहांबार | वर्ष में 6 बार | सृष्टि से जुड़े पर्व |
सिन्धी
सिन्धी धर्म के त्योहार
सिन्धी धर्म सिंध क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक–सांस्कृतिक परंपरा है, जिसका केंद्र भगवान झूलेलाल की उपासना और वरुण देव से जुड़ी जल-पूजा है। यह धर्म सामाजिक समरसता, सत्य, अहिंसा और मानव-कल्याण पर आधारित है। चेटीचण्ड, थड़ड़ी सातम और चालीसा जैसे पर्व सिन्धी समाज की आस्था, संघर्ष और सांस्कृतिक पहचान को व्यक्त करते हैं।
- सिन्धी धर्म के त्योहार –
- चेटीचण्ड (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) –
- भगवान झूलेलाल जी का जन्म इसी दिन हुआ था, इसी कारण इसे झूलेलाल जयंती भी कहते हैं।
- झूलेलाल जी का जन्म पाकिस्तान के सिंध प्रान्त के धधू नामक स्थान पर हुआ।
- झूलेलाल जी ने सिंध की प्रजा को सिंध के राजा मिरखशाह के अत्याचारों से मुक्त कराया।
- भगवान झूलेलाल को वरुण देव का अवतार माना जाता है।
- चेटीचण्ड (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) –
- थड़ड़ी सातम / बड़ी सातम (भाद्रपद कृष्ण – सप्तमी) –
- इस दिन सिन्धी समाज में ठंडा भोजन किया जाता है।
- इसी कारण इसे बायरा / बड़ी सातम भी कहा जाता है।
- इस दिन सिन्धी समाज की महिलाएँ पीपल के वृक्ष पर चाँदी की मूर्ति रखकर पूजा करती हैं।
- चालीसा महोत्सव (16 जुलाई से 24 अगस्त तक) –
- इस अवसर पर 40 दिन तक व्रत किए जाते हैं।
- सिंध प्रान्त के बादशाह मिरखशाह के जुल्मों से परेशान होकर सिन्धी समाज के लोगों ने 40 दिनों का व्रत किया था। 40वें दिन झूलेलाल का अवतार हुआ।
- अमुंड पर्व (फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी) –
- इस दिन झूलेलाल जी की मृत्यु हुई थी
