राजस्थान का सामाजिक जीवन

राजस्थान के प्रमुख त्योहार और मेले, राजस्थानी कला व संस्कृति का अभिन्न अंग हैं, जो राज्य की धार्मिक विविधता, सामाजिक परंपराओं एवं सांस्कृतिक समन्वय को दर्शाते हैं। हिंदू मासानुसार पर्वों के साथ-साथ मुस्लिम, जैन, सिख, ईसाई, बौद्ध, पारसी एवं सिन्धी धर्मों के प्रमुख त्योहार एवं उर्स राजस्थान के बहुधार्मिक एवं बहुसांस्कृतिक समाज की विशेष पहचान प्रस्तुत करते हैं। इन विभिन्न समुदायों के पर्वों एवं मेलों का अध्ययन राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सह-अस्तित्व एवं सामाजिक एकता को समझने में सहायक सिद्ध होता है।

राजस्थान में त्योहार  का क्रम श्रावण मास की तीज से प्रारंभ माना जाता है। यह चक्र चैत्र मास की गणगौर पर समाप्त होता है इसलिए लोक कहावत है की 

“तीज त्योहार बावड़ी, ले डूबी गणगौर”

  • विक्रमी संवत् : चंद्रमा आधारित पंचांग –
    • इसमें महीनों की गणना चंद्र कला (तिथि) के आधार पर की जाती है।
    • एक चंद्र मास ≈ 29½ दिन का होता है।
    • चंद्र वर्ष की गणना –
      • 29½ × 12 = 355 दिन
      • जबकि सौर वर्ष = 365 दिन
      • अंतर = 10–11 दिन
      • नोट : – इस अंतर को संतुलित करने के लिए प्रत्येक तीसरे वर्ष एक अतिरिक्त मास जोड़ा जाता है, जिसे कहते हैं — अधिकमास (Adhik Maas / मलमास)
    • विक्रमी संवत् के महीने (चंद्रमा आधारित) – चैत्र , वैशाख , ज्येष्ठ , आषाढ़ , श्रावण , भाद्रपद , आश्विन , कार्तिक , मार्गशीर्ष (अग्रहायण) , पौष , माघ , फाल्गुन
Social Life of Rajasthan | राजस्थान का सामाजिक जीवन

चैत्र मास

चैत्र मास : प्रमुख त्योहार

  • यह मास हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष का प्रथम मास है, जो वसंत ऋतु में मार्च–अप्रैल के बीच आता है 
  • चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिन्दू नववर्ष, विक्रम संवत् और चैत्र नवरात्र आरम्भ होते हैं 
  • पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी मास में ब्रह्मा द्वारा सृष्टि की रचना हुई मानी जाती है
  • देश के विभिन्न भागों में यह दिन उगादी, गुड़ी पड़वा, नवरोज और चेटीचंड के रूप में मनाया जाता है

Festival  

Date  

Facts 

धुलंडी

चैत्र कृष्ण एकम

  • धुलंडी, जिसे रंगों वाली होली भी कहा जाता है
  • फूलडोल उत्सव – शाहपुरा
    • रामस्नेही संप्रदाय द्वारा
    • एकम – पंचम तक 
  • बादशाह मेला ब्यावर

शीतलाष्टमी(बास्योड़ा)

चैत्र कृष्ण अष्टम 

  • शीतला माता की पूजा, ठंडा भोजन करते हैं 

घुड़ला

चैत्र कृष्ण अष्टम

  • CK8 → CS3
  • राव सातल देव द्वारा मल्लू खां को पराजित करने के उपलक्ष्य में मारवाड़ क्षेत्र में

नववर्ष 

चैत्र शुक्ल एकम

  • हिन्दुओं का नया वर्ष शुरु

वासंतिक नवरात्रि

चैत्र शुक्ल एकम – नवम

  • माँ दुर्गा की पूजा 
  • बड़ा नवरात्र

सिंजारा

चैत्र शुक्ल द्वितीया

  • गणगौर तीज से एक दिन पहले ससुराल पक्ष द्वारा नवविवाहित पुत्रवधू को परिधान/उपहार भेजना 

गणगौर

चैत्र शुक्ल तीज 

  • CK1 → CS3
  • गण/ईसर (शिव), गौर/ईसरी (पार्वती) की पूजा 
  • अविवाहित लड़की → योग्य वर 
  • विवाहित स्त्री → सुहाग दीर्घायु 
  • गणगौर सवारी जयपुर की प्रसिद्ध
  • धींगा गणगौर (उदयपुर, जोधपुर)
  • गुलाबी गणगौर (नाथद्वारा)
    • चैत्र शुक्ल पंचम (CS-5)
  • जैसलमेर – केवल गवर की पूजा
  • बूंदी, जोधपुर राजपरिवार गणगौर नहीं मनाता

अशोकाष्टमी

चैत्र शुक्ल अष्टमी

  • अशोक के पेड़ की पूजा करते हैं 

रामनवमी

चैत्र शुक्ल नवमी 

  • भगवान राम का जन्म
  • बही-खाते बदलने का दिन 

महावीर जयंती

चैत्र शुक्ल त्रयोदसी

हनुमान जयंती

चैत्र शुक्ल पूर्णिमा 

  • सालासर बालाजी का मेला

चैत्र मास : प्रमुख मेले

मेला 

तिथि

प्रमुख विशेषताएँ

शीतला माता मेला (चाकसू)

चैत्र कृष्ण सप्तमी 

  • बैलगाड़ी मेला भी कहते हैं 

केसरियाजी मेला धुलेव (उदयपुर)

चैत्र कृष्ण अष्टमी 

  • ऋषभदेव (हिंदू-जैन)
  • केसर चढ़ावा-केसरियानाथ 
  • काली मूर्ति – कालाजी 
  • धूला भील मूर्ति लाया → धुलेव देव

मल्लीनाथ पशु मेला तिलवाड़ा (बालोतरा)

CK11 – CS11

  • राजस्थान का सबसे पुराना पशु मेला

घोटिया अंबा का मेला (बाँसवाड़ा )

चैत्र अमावस्या 

  • आदिवासियों का दूसरा कुंभ 

गणगौर मेला जयपुर  

CS तृतीया 

कैलादेवी मेला करौली

चैत्र शुक्ल अष्टमी 

  • लांगुरिया नृत्यलक्खी मेला भी कहते हैं 

श्री महावीर जी मेला करौली 

CS 13 – VK 1

  • रथ के सारथी – SDM 
  • सालासर बालाजी का मेला (चूरू) चैत्र पूर्णिमा 
  • पाबूजी का मेला (कोलू गाँव फलौदी)  चैत्र अमावस्या 

वैशाख मास

वैशाख मास : प्रमुख त्योहार

  • यह हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष का दूसरा मास है, जो अप्रैल–मई में वसंत के उत्तरार्द्ध व ग्रीष्म के प्रारम्भ में आता है। 
  • यह मास स्नान, दान, व्रत और तीर्थ-यात्रा के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। वैशाख शुक्ल अक्षय तृतीया को विशेष पुण्य फलदायी माना गया है। 
  • इसी मास में बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलते हैं, जगन्नाथ रथयात्रा की तैयारी प्रारम्भ होती है तथा बाँके बिहारी जी का चरण दर्शन होता है। लोक परंपरा में यह मास विवाह और शुभ कार्यों के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

Festival  

Date  

Facts 

बुद्ध पूर्णिमा

वैशाख पूर्णिमा 

  • भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति, महापरिनिर्वाण
  • इसे पीपल पूर्णिमा भी कहते हैं।

अक्षय तृतीया  (आखा तीज)

वैशाख शुक्ल तृतीया 

  • शुभ कार्यों की सर्वोत्तम तिथि (अबूझ सावा)
  • बीकानेर स्थापना दिवस
  • पारंपरिक रूप से बाल-विवाह
  • किसान हल चलाकर अच्छी फसल की कामना
  • इसी दिन से सतयुगत्रेतायुग का आरम्भ माना जाता है  

मेला 

तिथि

प्रमुख विशेषताएँ

धींगा गवर बेतमार मेला – जोधपुर

वैशाख कृष्ण तृतीया 

  • महिलाएँ विभिन्न स्वांग धारण करती हैं
  • अखण्ड सुहाग की कामना
  • रात्रि में शोभायात्रा

गैर मेला – (सियावा,सिरोही)

वैशाख शुक्ल चतुर्थी

  • लोक नृत्य में किया है ये 

नरसिंह चतुर्दशी (नरसिंह जयंती)

वैशाख शुक्ल चतुर्थी

  • अजमेर में लाल्या – काल्या का मेला
  • लाल्या – वराह भगवान 
  • काल्या – हिरण्यकश्यप

नारायणी माता मेला (सरिस्का, अलवर)

वैशाख शुक्ल एकादशी

  • शक्तिपीठ मेला
  • नाइयों और अलवर मीणाओं की कुल देवी

बाणगंगा मेला (विराटनगर, कोटपूतली-बहरोड़)

वैशाख पूर्णिमा

  • पौराणिक नदी बाणगंगा से जुड़ा, धार्मिक स्नान

गोमती सागर मेला (झालरापाटन)

वैशाख पूर्णिमा

  • स्नान व दान का महत्त्व 

मातृकुंडिया मेला (चित्तौड़गढ़)

वैशाख पूर्णिमा

  • राशमी गाँव में, चंद्रभागा नदी के किनारे 
  • “राजस्थान का हरिद्वार” 

गौतमेश्वर मेला (अरनोद,प्रतापगढ़)

वैशाख पूर्णिमा

  • शिव आराधनाआदिवासी भागीदारी

मार्कण्डेश्वर मेला  (सिरोही)

वैशाख पूर्णिमा

  • महर्षि मार्कण्डेय से संबंध

ज्येष्ठ मास

ज्येष्ठ मास: प्रमुख त्योहार

  • ज्येष्ठ मास हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष का तीसरा मास है, जो मई–जून के बीच आता है। 
  • यह ग्रीष्म ऋतु का चरम काल माना जाता है, इसलिए इस मास में जलदान, छाया, सेवा, व्रत और संयम का विशेष महत्व है। 
  • लोक परंपरा में ज्येष्ठ मास को तप, परोपकार और पुण्य अर्जन से जोड़ा जाता है।

Festival  

Date  

Facts 

वट सावित्री व्रत

ज्येष्ठ अमावस्या

  • विवाहित स्त्रियां वट वृक्ष की पूजा (बड़ अमावस्या) करके पति की दीर्घायु हेतु व्रत करती हैं
  • सावित्री–सत्यवान कथा

शनि जयंती

ज्येष्ठ अमावस्या

  • सूर्यपुत्र शनिदेव का जन्म दिवस
  • शनि दोष शांति हेतु पूजन

गंगा दशहरा

ज्येष्ठ शुक्ल दशमी

  • माँ गंगा का पृथ्वी पर अवतरण
  • स्नान–दान का अत्यधिक पुण्य

निर्जला एकादशी

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

  • वर्ष की सबसे कठोर एकादशी
  • जल तक ग्रहण नहीं किया जाता

वट पूर्णिमा

ज्येष्ठ पूर्णिमा

  • वट सावित्री व्रत का समापन
  • सौभाग्य एवं अखंड दांपत्य का प्रतीक
मेला तिथिप्रमुख विशेषताएँ
सीता माता मेला – प्रतापगढ़ज्येष्ठ अमावस्या(माता सीता का  वनवास के दौरान निवास, लव-कुश का जन्म)सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य में (उड़न गिलहरी)
सीता बाड़ी का मेलाकेलवाड़ा (बारां)वैशाख पूर्णिमा से ज्येष्ठ अमावस्यासहरियाओं का लघु कुंभ
गंगा दशमी मेला – कामां (डीग)ज्येष्ठ शुक्ल सप्तमी से द्वादशी तकगंगा अवतरण

आषाढ़ मास

आषाढ़ मास : प्रमुख त्योहार

  • आषाढ़ मास हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष का चौथा मास है, जो जून–जुलाई में आता है 
  • यह वर्षा ऋतु के आगमन का संकेत देता इसलिए कृषि गतिविधियों की शुरुआत होती है। 
  • धार्मिक दृष्टि से आषाढ़ में चातुर्मास का आरम्भ होता है, जिसके कारण विवाह एवं अन्य मांगलिक कार्य स्थगित रहते हैं।
  • मान्यता है कि इसी मास में भगवान विष्णु योग निद्रा में प्रवेश करते हैं, इसलिए तप, संयम और साधना का विशेष महत्व माना जाता है।

Festival  

Date  

Facts 

गुप्त नवरात्रि

आषाढ़ शुक्ल एकम् से नवम

  • शक्ति साधना एवं तंत्र-मंत्र उपासना का काल
  • नौ देवियों की गुप्त आराधना

भडल्या नवमी

आषाढ़ शुक्ल नवम

  • अक्षय तृतीया के समान शुभ मानी जाती है
  • विवाह के लिए यह अंतिम सावा होता

देवशयनी ग्यारस

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

  • इसी दिन से चातुर्मास का आरम्भ माना जाता हैं। 
  • इस दिन से देवता चार माह के लिए सो जाते है अत: चार माह तक शुभ कार्य वर्जित 
  • मान्यता: भगवान विष्णु क्षीरसागर में योग निद्रा में जाते हैं
  • चार माह बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी (प्रबोधिनी एकादशी) को जागरण

गुरु पूर्णिमा/ व्यास पूर्णिमा 

आषाढ़ पूर्णिमा 

  • महर्षि वेदव्यास का जन्म दिवस
  • गुरु को श्रद्धा वश दक्षिण देकर पूजा की जाती है (💰😀)

श्रावण मास

श्रावण मास: प्रमुख त्योहार

  • श्रावण मास हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष का पाँचवाँ मास है, जो सामान्यत: जुलाई–अगस्त में आता है। 
  • यह वर्षा ऋतु, हरियाली और भगवान शिव की उपासना का प्रमुख मास माना जाता है। श्रावण मास प्रकृति-पूजन, लोक – परंपराओं तथा आस्था और पर्यावरण चेतना का महत्त्वपूर्ण प्रतीक है।

Festival  

Date  

Facts 

नाग पंचमी

श्रावण कृष्ण पंचमी

  • सर्पों की पूजा (जोधपुर – नागपंचमी मेला)
  • सर्पदंश से रक्षा की लोकमान्यता

निडरी नवमी

श्रावण कृष्ण नवमी

  • नेवले (निडरी) की पूजा
  • सांपों से रक्षा का प्रतीक पर्व

कामिका एकादशी

श्रावण कृष्ण ग्यारस 

  • भगवान विष्णु की पूजा 

हरियाली अमावस्या

श्रावण अमावस्या

  • कल्पवृक्ष की पूजा
  • खेतों में जाकर भोजन करने की परंपरा

छोटी तीज

श्रावण शुक्ल तृतीया 

  • अन्य नाम “श्रावणी/हरियाली तीज”
  • पति-पत्नी के प्रेम का त्योहार, महिलाएँ लहरिया ओढ़ती हैं
  • जयपुर में छोटी तीज की सवारी प्रसिद्ध, घेवर की मिठाई 
  • नवविवाहिताओं हेतु सिंजारा (ससुराल से उपहार)

रक्षाबंधन (नारियल पूर्णिमा)

श्रावण पूर्णिमा

  • भाई-बहन के स्नेह का पर्व
  • श्रवण कुमार की पूजा
  • तटीय क्षेत्रों में नारियल पूर्णिमा
  • ब्राह्मण – नया जनेऊ धारण करते हैं

श्रावण मास के व्रत

वन सोमवार / सुखिया सोमवार व्रत

श्रावण मास के सभी सोमवारों को

  • श्रावण के सभी सोमवार
  • भगवान शिव की पूजा
  • वन सोमवार → घर से खाना बनाकर वन में ग्रहण किया

मंगलागौरी व्रत

मंगलवार को 

  • विवाहित महिलाओं द्वारा किया जाता है
  • वैवाहिक सुख-समृद्धि की कामना

मेला

तिथि

प्रमुख विशेषताएँ

कल्पवृक्ष मेला

हरियाली अमावस्या

  • कल्पवृक्ष की पूजा
  • पर्यावरण संरक्षण

फतेहसागर झील मेला

हरियाली अमावस्या

  • झील तट पर धार्मिक अनुष्ठान

बुड्ढा जोहड़ मेला 

श्रावण अमावस्या

  • सिख धर्म का प्रमुख मेला
  • रायसिंहनगर, श्रीगंगानगर

परशुराम महादेव मेला

श्रावण शुक्ल सप्तमी

  • शिव-परशुराम परंपरा
  • अरावली क्षेत्र का प्रसिद्ध मेला

सालेश्वर महादेव मेला 

श्रावण शुक्ल षष्ठी-सप्तमी

  • पाली, शिव पूजा
  • क्षेत्रीय आस्था

वीरपुरी मेला 

श्रावण माह का अंतिम सोमवार

  • मंडोर जोधपुर, शिवभक्ति
  • सोमवार का विशेष महत्त्व

मीराबाई / चारभुजा नाथ मेला

श्रावण शुक्ल 11 से भाद्रपद कृष्ण 3 

  • मीरा भक्ति परंपरा
  • वैष्णव आस्था

कल्याण जी मेला डिग्गी (टोंक)

श्रावण अमावस्यावैष्णव धर्म 

  • डिग्गी के तीन वार्षिक मेलों में से एक (वैशाख पूर्णिमा , भाद्रपद शुक्ल एकादशी )
  • लोटियों का मेला – श्रावण शुक्ल पंचमी (मंडोर जोधपुर)
  • वीरपुरी मेला श्रावण मास के प्रथम सोमवार

भाद्रपद मास

  • भाद्रपद हिन्दू पंचांग का एक प्रमुख महीना है, जिसे त्योहारों की अधिकता वाला माह माना जाता है। 
  • इस माह में कृष्ण जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, तेजा दशमी और रामदेवरा मेला जैसे महत्त्वपूर्ण धार्मिक एवं लोक पर्व आते हैं।
  • भाद्रपद मास का संबंध कृषि, वर्षा और लोक देवताओं की उपासना से भी जुड़ा हुआ है। इसी माह के अंत में पितृ पक्ष (श्राद्ध) का प्रारंभ होता है, जो पूर्वजों की स्मृति और श्रद्धा से संबंधित है।

भाद्रपद मास : प्रमुख त्योहार

Festival  

Date  

Facts 

बड़ी तीज

भाद्रपद कृष्ण तृतीया 

  • कजली तीज / सातुड़ी तीज / बूढ़ी तीज / उजली तीज
  • विवाहित स्त्रियां पति की दीर्घायु हेतु व्रत रखती हैं
  • बूंदी में बड़ी तीज की सवारी प्रसिद्ध
  • बड़ी तीज – पूर्वी राजस्थान व हाड़ौती क्षेत्र में प्रचलित
  • बड़ी तीज – मारवाड़ क्षेत्र में प्रसिद्ध
    • सत्तू के भोग की परंपरा

हल छठ

भाद्रपद कृष्ण षष्ठी

  • बलराम जयंती से संबंधित
  • हल और कृषि उपकरणों की पूजा
  • ऊब छठ –
    • विवाहित स्त्रियां पति की लंबी आयु, कुंआरी लड़कियां अच्छे पति की कामना
    • सूर्यास्त के बाद से लेकर चांद के उदय होने तक खड़े रहते है
    • अन्य नाम – चन्दन षष्ठी, चानन छठ और चंद्र छठ

कृष्ण जन्माष्टमी

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी

  • भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव

गोगा नवमी

भाद्रपद कृष्ण नवमी

  • लोक देवता गोगाजी की पूजा
  • किसान हल को 9 गांठ वाली राखी बांधते हैं।
  • गोगाजी का मेला गोगामेड़ी (नोहर)

बछ बारस

भाद्रपद कृष्ण द्वादशी 

  • इस दिन गाय व बछड़े व पूजा की जाती है
  • अन्य नाम – गाय पूजनी

सती अमावस्या

भाद्रपद कृष्ण अमावस्या

  • झुंझुनूँ में रानी सती का मेला
  • इसे दादी सती भी कहा जाता है।

बाबे री बीज

भाद्रपद शुक्ल  द्वितीया

  • रामदेवजी जयंती से जुड़ा पर्व
  • रामदेवरा (जैसलमेर) में मेला (मारवाड़ का कुंभ)

गणेश चतुर्थी

भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी

  • गणेश जी का जन्मोत्सव
  • त्रिनेत्र गणेश जी मेला सवाईमाधोपुर 
  • चुंघी गणेश तीर्थ (BS4) – जैसलमेर

ऋषि पंचमी

भाद्रपद शुक्ल पंचमी

  • सप्तऋषियों की पूजा
  • महिलाओं द्वारा व्रत

राधाष्टमी

भाद्रपद शुक्ल अष्टमी

  • श्रीराधा का जन्मोत्सव

तेजा दशमी / रामदेव जयंती 

भाद्रपद शुक्ल दशमी

  • लोकदेवता वीर तेजाजी की पूजा
  • नागौरी नस्ल के पशुओं से जुड़ा

जलझूलनी एकादशी / देवझूलनी

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

  • भगवान विष्णु/कृष्ण को बेवाण में बिठाकर जल में झुलाने की परंपरा
  • अन्य नाम – ढोला ग्यारसदेव झुलनी ग्यारस

अनंत चतुर्दशी

भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी

  • अनंत सूत्र बांधने की परंपरा
  • गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन

श्राद्ध प्रारंभ

भाद्रपद पूर्णिमा – आश्विन अमावस

  • पितृ पक्ष का आरंभ
  • घर की दीवार पर गोबर की सांझी
  • उदयपुर के मच्छन्दर नाथ मंदिर की साँझियाँ प्रसिद्ध

भाद्रपद मास के प्रमुख मेले

मेला

तिथि

प्रमुख विशेषताएँ

रामदेवरा मेला (जैसलमेर)

BS 2 – 11

  • लोकदेवता रामदेव जी से संबंधित, पैदल यात्राएँ

रानी सती मेला (झुंझुनूं)

BK 11 – MK 9

  • सती प्रथा से जुड़ा ऐतिहासिक मेला

वीर तेजाजी पशु मेला (नागौर)

BS10

  • नागौरी नस्ल के पशु
  • राजस्थान का प्रमुख पशु मेला

गणेश चतुर्थी मेला(सवाई माधोपुर)

BS4

  • इसी दिन जैसलमेर में चुंघी गणेश मंदिर में मेला 

भर्तृहरि मेला

BS8

  • नाथ संप्रदाय से जुड़ाकनफटे साधुओं की उपस्थिति
  • वैशाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी एवं अष्टमी को भी
  • चारभुजा नाथ मेला (राजसमंद) – BS 11 
  • खेजड़ली मेला (जोधपुर) – BS 2
  • सवाई भोज मेला (आसींद, भीलवाड़ा) – BS 8
  • कजली/उजली तीज (बूंदी) – BK 3
  • भर्तृहरि का मेला (अलवर) – BS 7
  • डोल मेला शाहाबाद, बारां – BS 11

आश्विन मास

  • हिन्दू पंचांग के अनुसार अश्विन वर्ष का सातवाँ मास है, जो सामान्यत: सितंबर–अक्टूबर के बीच आता है और शरद ऋतु का प्रतिनिधि माना जाता है। 
  • इस मास में शारदीय नवरात्र, दुर्गा पूजा, महानवमी और विजयादशमी (दशहरा) जैसे प्रमुख पर्व आते हैं। 
  • अश्विन पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा/कोजागरी पूर्णिमा) का विशेष धार्मिक महत्व है, जिसे रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह मास शक्ति उपासना, धर्म-विजय और सामाजिक उत्सवों से जुड़ा हुआ माना जाता है।

आश्विन मास : प्रमुख त्योहार

Festival  

Date  

Facts 

अश्विन अमावस्या

आश्विन अमावस्या

  • पितृ तर्पण व दान
  • श्राद्ध कर्म का महत्व

शारदीय नवरात्र प्रारम्भ

आश्विन शुक्ल 1 – 9

  • नौ दिन देवी दुर्गा की नौ रूपों की उपासना, नौ कन्याओं को खाना 
  • घटस्थापना का महत्व

महासप्तमी

आश्विन शुक्ल सप्तमी

  • दुर्गा पूजा का विशेष दिन
  • देवी की विशेष आराधना

दुर्गाष्टम / महाअष्टमी

आश्विन शुक्ल अष्टमी

  • देवी महागौरी की पूजा
  • कन्या पूजन का महत्व

महानवमी

आश्विन शुक्ल नवमी

  • दुर्गा पूजा का समापन चरण
  • शस्त्र पूजा व शक्ति साधना

दशहरा

आश्विन शुक्ल दशमी

  • अन्य नाम – विजयदशमी 
  • असत्य पर सत्य की विजय
  • राम द्वारा रावण वध की स्मृति
  • शस्त्र पूजन व शमी पूजा
  • दशहरा मेला – कोटा

शरद पूर्णिमा / कोजागरी पूर्णिमा

आश्विन पूर्णिमा

  • लक्ष्मी पूजा
  • रास पूर्णिमा
  • रात्रि में खीर रखने की परंपरा
  • लालदास जी मेला (अलवर) – संत लालदास जी की समाधि/धाम पर आयोजित
  • चामुंडा माता मेला (जोधपुर दुर्ग) AS 9
  • नवरात्र व्रत – सम्पूर्ण मास

कार्तिक मास

  • कार्तिक मास को स्नान-दान का मास कहा जाता है, क्योंकि इस पूरे महीने में विशेष रूप से कार्तिक स्नान और दान का धार्मिक महत्त्व माना जाता है। 
  • देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने की मान्यता है, जिसके बाद विवाह एवं अन्य शुभ कार्यों का पुनः आरंभ होता है। 
  • इसी मास में लगने वाला पुष्कर मेला राजस्थान का सबसे रंगीन और अंतर्राष्ट्रीय स्तर का सबसे प्रसिद्ध मेला है, जिसमें बड़ी संख्या में देश-विदेश के पर्यटक आते हैं। 
  • कपिल मुनि मेला (कोलायत) को जांगल प्रदेश का कुंभ कहा जाता है, जो अपने धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व के लिए प्रसिद्ध है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन दीपदान, स्नान और विभिन्न धार्मिक मेलों का आयोजन होता है, जिससे इस मास का विशेष धार्मिक महत्त्व ओर अधिक बढ़ जाता है।

कार्तिक मास : प्रमुख त्योहार

Festival  

Date  

Facts 

करवा चौथ

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी

  • पति की दीर्घ आयु के लिए सुहागन स्त्रियां व्रत करती हैं 

अहोई अष्टमी 

कार्तिक कृष्ण अष्टम

  • अहोई माता (पार्वती का रूप) की पूजा शाम को तारे निकलने पर
  • संतान की लंबी आयु, निसंतान महिलाएं संतान प्राप्ति हेतु 
  • निर्जला व्रत – बिना जल के

तुलसी एकादशी

कार्तिक कृष्ण एकादश

  • तुलसी जी की पूजा
  • रमा एकादशी भी कहते है

धनतेरस धनत्रयोदशी

कार्तिक कृष्ण तेरस 

  • भगवान धन्वंतरि का अवतरण
  • आयु, आरोग्य एवं धन-समृद्धि की कामना
  • दीपदान की परंपरा

नरक चतुर्दशी 

कार्तिक कृष्ण चौदस 

  • नरकासुर वध की स्मृति
  • प्रातः स्नान का विशेष महत्त्व
  • छोटी दीपावली भी कहते हैं 
  • रूप चौदस भी कहते हैं

दीपावली (लक्ष्मी पूजन)

कार्तिक अमावस्या

  • लक्ष्मी–गणेश पूजन
  • इसी दिन महावीर स्वामी व स्वामी दयानन्द सरस्वती का निर्वाण 
  • व्यापारिक नववर्ष का आरम्भ (विक्रम संवत का शुभारंभ)

गोवर्धन पूजा 

कार्तिक शुक्लएकम 

  • गोबर से बने गोवर्धन जी की पूजा
  •  मंदिर में अन्नकूट बंटता है (अन्नकूट महोत्सव नाथद्वारा प्रसिद्ध)

भाई दूज

कार्तिक शुक्ल द्वितीया

  • भाई-बहन के स्नेह का पर्व
  • यम द्वितीया (यम-यमुना की कथा से जुड़ा)

गोपाष्टमी 

कार्तिक शुवल अष्टमी 

  • गायों को चारा खिलाते हैं 

आंवला नवमी 

कार्तिक शुक्ल नवमी 

  • अन्य नाम – अक्षय नवमी  
  • इस दिन आंवले में विष्णु जी निवास करते हैं इसलिए उसकी पूजा

देवउठनी / देवोत्थान ग्यारस 

कार्तिक शुक्ल एकादशी

  • चार माह की योगनिद्रा के बाद विष्णु जागते हैं
  • शुभ कार्यों का पुनः आरंभ

कार्तिक पूर्णिमा

कार्तिक पूर्णिमा

  • अन्य नाम – त्रिपुर पूर्णिमा / सत्यनारायण पूर्णिमा
  • कार्तिक स्नान (गंगा/पुष्कर ) का विशेष महत्व, दीपदान की परंपरा
  • प्रमुख मेलों (पुष्कर कोलायत)

कार्तिक मास के प्रमुख मेले

मेला

तिथि

प्रमुख विशेषताएँ

गरुड़ मेला बंशी पहाड़पुर (भरतपुर)

कार्तिक शुक्ल तृतीया

  • वैष्णव परंपरा से जुड़ा
  • संतान प्राप्ति हेतु

पुष्कर मेला(अजमेर)

शुक्ल एकादशी – पूर्णिमा

  • मेरवाड़ा का कुंभ, अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि
  • ऊँट, घोड़े, बैल का क्रय-विक्रय
  • ब्रह्मा मंदिर व पुष्कर सरोवर

कपिल मुनि मेला(बीकानेर)

कार्तिक पूर्णिमा

  • सांख्य दर्शन के प्रणेता कपिल मुनि से जुड़ा
  • सरोवर पर दीपदान

चंद्रभागा मेला(झालावाड़)

कार्तिक पूर्णिमा

  • चन्द्रभागा नदी तट पर आयोजन
  • मालवी नस्ल के पशुओं का मेला
  • हाड़ौती का सुरंगा मेला भी कहते हैं

साहवा सिख मेलासाहवा (चूरू)

कार्तिक पूर्णिमा

  • राजस्थान का सबसे बड़ा सिख मेला
  • गुरु नानक व गुरु गोविन्द सिंह से जुड़ी स्मृतियां

कपिल धारा मेला (बारां)

कार्तिक पूर्णिमा

  • सहरिया जनजाति से संबंधित

मार्गशीर्ष मास

  • मार्गशीर्ष मास को वैष्णव भक्ति का प्रमुख मास माना जाता है, क्योंकि इस अवधि में भगवान विष्णु की उपासना, स्नान और व्रतों का विशेष धार्मिक महत्व होता है। 
  • मोक्षदा एकादशी का संबंध भगवत गीता के उपदेश से जोड़ा जाता है, जिस कारण इस दिन गीता पाठ और विष्णु पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। 
  • इसी मास में आयोजित होने वाला मानगढ़ धाम मेला आदिवासी समाज से जुड़ा एक महत्त्वपूर्ण स्मृति मेला है, जो गुरु गोविन्द गिरी के बलिदान की याद दिलाता है। वहीं चंद्रभागा पशु मेला हाड़ौती क्षेत्र में मालवी नस्ल के पशुओं के क्रय-विक्रय के लिए प्रसिद्ध है, जिससे इस मास का आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व भी स्पष्ट होता है।

मार्गशीर्ष मास : प्रमुख त्योहार

Festival  

Date  

Facts 

मोक्षदा एकादशी

मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी

  • भगवद्गीता उपदेश दिवस से जुड़ी
  • इस दिन गीता पाठ का विशेष महत्व
  • मोक्षदा एकादशी – MS11 – व्रत पापों से मुक्ति, विष्णु पूजा
  • चौथ माता का मेला – MS 4 – चौथ का बरवाड़ा सवाई माधोपुर 
  • नागौर मेला – प्रतिवर्ष माघ में

पौष मास

  • पौष मास को शीत ऋतु का प्रमुख धार्मिक मास माना जाता है, जिसमें स्नान, दान और व्रतों का विशेष महत्त्व होता है। इस मास की पौष पूर्णिमा पर स्नान-दान को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है और श्रद्धालु धार्मिक आस्था के साथ दान-पुण्य करते हैं।
  • इसी मास में आयोजित होने वाला नाकोड़ा जी मेला जैन धर्म का एक प्रमुख और प्रसिद्ध मेला है, जहाँ देश-भर से जैन श्रद्धालु दर्शन एवं साधना के लिए आते हैं।

पौष मास : प्रमुख त्योहार

Festival  

Date  

Facts 

पौष अमावस्या

पौष शुक्ल अमावस्या

  • पितृ तर्पण का महत्व
  • दान-पुण्य का दिन

सफला एकादशी

पौष शुक्ल एकादशी

  • स्नान-दान का विशेष महत्त्व
  • दान का पुण्य फल
  • नाकोड़ा जी मेला (बालोतरा) – पौष कृष्ण दशमी – जैन धर्म 
  • वरकाणा मेला (पाली) – पौष शुक्ल दशमी – जैन धर्म

माघ मास

  • माघ मास को स्नान-दान का सर्वोत्तम मास माना जाता है, क्योंकि इस अवधि में किए गए स्नान और दान को विशेष पुण्यफलदायी माना गया है। 
  • इसी मास में आने वाली वसंत पंचमी ज्ञान, विद्या और कला की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती की पूजा का प्रमुख पर्व है। 
  • माघ माह में आयोजित होने वाला बेणेश्वर मेला राजस्थान का प्रसिद्ध “आदिवासियों का कुंभ” कहलाता है, जो जनजातीय संस्कृति और धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र है। 
  • वहीं माघ पूर्णिमा के दिन स्नान-दान के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक मेलों का आयोजन होता है, जिससे इस मास का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व ओर अधिक बढ़ जाता है।

माघ मास : प्रमुख त्योहार

Festival  

Date  

Facts 

तिल चौथ 

माघ कृष्ण चतुर्थी 

  • सकट चौथ / वक्रतुण्ड चतुर्थी / तिलकुटा चौथ
  • गणेश जी व चौथ माता को तिलकुट्टे का भोग

भीष्म अष्टमी

माघ कृष्ण अष्टमी

  • पितामह भीष्म को जलांजलि
  • पितृ तर्पण से जुड़ा पर्व
  • धर्म, त्याग व कर्त्तव्य का प्रतीक

षटतिला एकादशी

माघ कृष्ण एकादशी

  • काली गाय व काले तिलों के दान

मौनी अमावस 

माघ अमावस

  • मनु ऋषि (ब्रह्मा जी के मानस पुत्र) ने इस दिन मौन रहकर तपस्या की थी, इसलिए इसे मौनी अमावस्या कहते हैं 

बसंत पंचमी 

माघ शुक्ल पंचमी 

  • ऋतुराज बसंत का आगमन 
  • सरस्वती माता की आराधना 

बेणेश्वर मेला 

माघ पूर्णिमा 

  • डूंगरपुर,  सोम-माही-जाखम के संगम पर 

माघ मास के प्रमुख मेले

मेला

तिथि

प्रमुख विशेषताएँ

बेणेश्वर मेला डूंगरपुर (नवाटापुरा)

MS 11 – पूर्णिमा

  • सोम-माही-जाखम संगम
  • आदिवासियों का कुंभ
  • संत मावजी से संबंधित

चौथ माता मेलाचौथ का बरवाड़ा (सवाई माधोपुर)

माघ कृष्ण  चतुर्थी

  • चौथ माता की पूजा
  • क्षेत्रीय आस्था

पर्यटन मरु मेला जैसलमेर व सम

माघ शुक्ल त्रयोदशी – अमावस्या

  • पर्यटन विभाग द्वारा आयोजन
  • लोकनृत्य व सांस्कृतिक कार्यक्रम

फाल्गुन मास

  • फाल्गुन मास को उत्सवों और रंगों का मास माना जाता है, क्योंकि इस महीने में उल्लास, आनंद और सामूहिक सहभागिता से जुड़े अनेक पर्व मनाए जाते हैं। 
  • इसी मास में आने वाली महाशिवरात्रि भगवान शिव की उपासना का सर्वोच्च पर्व है, जिसमें व्रत, रात्रि जागरण और विशेष पूजा का महत्व होता है। 
  • फाल्गुन पूर्णिमा को मनाई जाने वाली होली सामाजिक समरसता, प्रेम और उल्लास का प्रतीक पर्व है, जो भेदभाव को मिटाकर आपसी भाईचारे को प्रोत्साहित करता है। 
  • वहीं मेहन्दीपुर बालाजी धाम हनुमान जी के बाल रूप की आराधना का प्रमुख केंद्र है, जहाँ श्रद्धालु आस्था और विश्वास के साथ दर्शन हेतु आते हैं।

फाल्गुन मास : प्रमुख त्योहार

Festival  

Date  

Facts 

महाशिवरात्रि

फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी

  • भगवान शिव की आराधना का प्रमुख पर्व
  • रात्रि जागरण व चार पहर की पूजा

चनणी चेरी मेला

फाल्गुन  शुक्ल सप्तमी

  • देशनोक (बीकानेर) में आयोजित
  • क्षेत्रीय लोकआस्था से जुड़ा

आंवला एकादशी

फाल्गुन  शुक्ल एकादशी 

  • नवजात बच्चे के जन्म के बाद पहली होली पर ननिहाल पक्ष उपहार लाता है जिसे ढूँढ कहते हैं

होली

फाल्गुन  पूर्णिमा

  • होलिका दहन व रंगोत्सव
  • सामाजिक समरसता का पर्व
  • फुलेरा दूज – FS 2 
  • खेलनी सातम – FS 7
  • महाशिवरात्रि व्रत – फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी
  • होलिका दहन व्रत – फाल्गुन पूर्णिमा
  • होली (धुलंडी) – फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन होता है। अगले दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को धुलंडी (रंगों की होली) मनाई जाती है। यह पर्व वसंत ऋतु, उल्लास, सामाजिक समरसता और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
    • राजस्थान में क्षेत्रीय विशेषताएँ – 
      • जयपुर – सभ्य समाज द्वारा “जन्म, मरण और परण” का प्रतीकात्मक आयोजन (बाप की अर्थी, बेटे की बारात और पौत्र जन्म का दृश्य)
      • भिनाय (अजमेर) –  कोड़ामार होली
      • महावीरजी (करौली) – लठमार होली चांदन गाँव (करौली)
      • बाड़मेर –  पत्थर मार होली , कानुड़ा गाँव का गैर नृत्य
      • मेवाड़ अंचल – आदिवासियों का भगोरिया खेल , ग्रामीण क्षेत्रों में गैर नृत्य
      • शेखावाटी क्षेत्र –  गींदड़ नृत्य
      • बीकानेर – प्रसिद्ध “रम्मतें” , डेगची / बाल्टी मार होली
      • ब्यावर (अजमेर) – बादशाह की सवारी
      • कोटा (आवां व सांगोद) – न्हाण उत्सव / न्हाण की होली , खेल-तमाशों द्वारा मनोरंजन
      • राजस्थान में होली के विविध रूप –
        • देवर–भाभी की होली – ब्यावर (अजमेर)
        • रोने-बिलखने वाली होली – जोधपुर
        • गोबर के कंडों की होली – गलियाकोट (डूंगरपुर)
        • राड़ रमण की होली – भिलुड़ा ग्राम (डूंगरपुर)
        • दूध-दही की होली – नाथद्वारा (राजसमंद)
        • बादशाह की होली – नाथद्वारा (राजसमंद)
        • अंगारों की होली – केकड़ी (अजमेर), लालसोट (दौसा)
        • मुर्दों की होली – मरुधनी (भीलवाड़ा)
        • फूलों की होली – गोविंद देव जी मंदिर, जयपुर
        • कंकड़ मार होली – जैसलमेर
        • भाटा गैर – जालौर
        • कानुड़ा गाँव का गैर नृत्य – बाड़मेर
        • गोटा गैर – भीनमाल (जालौर)

फाल्गुन मास के प्रमुख मेले

मेला

तिथि

प्रमुख विशेषताएँ

शिवरात्रि मेला शिवाड़ (सवाई माधोपुर)

फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी

  • इस शिवलिंग को बारहवाँ ज्योतिर्लिंग की मान्यता प्राप्त हैं।
  • महाशिवरात्रि पर विशाल मेला

चन्द्रप्रभु मेला तिजारा (अलवर)

फाल्गुन शुक्ल सप्तमी

  • जैन धर्म से संबंधित
  • वर्ष में दो बार आयोजन

डाडा पम्पाराम मेला विजयनगर (श्रीगंगानगर)

फाल्गुन माह (7 दिन)

  • संत पम्पाराम की स्मृति में

तिलस्वा महादेव मेला मांडलगढ़ (भीलवाड़ा) 

फाल्गुन पूर्णिमा

  • शिव पूजा से जुड़ा

मेहंदीपुर बालाजी मेला (दौसा)

फाल्गुन माह

  • हनुमान जी के बाल रूप की पूजा

मुस्लिम समाज के त्योहार एवं उर्स का अध्ययन करने से पहले इस्लामी (हिजरी) कैलेंडर के महीनों के नाम जानना आवश्यक है। इस्लामी कैलेंडर चंद्र आधारित होता है और इसमें कुल 12 महीने होते हैं— 1. मुहर्रम  2.सफ़र 3. रबी-उल-अव्वल 4. रबी-उल-सानी (रबी-उल-आख़िर) 5. जमाद-उल-अव्वल 6. जमाद-उल-सानी (जमाद-उल-आख़िर) 7. रज्जब 8. शाबान 9. रमज़ान 10. शव्वाल 11. ज़िलक़ाद 12. ज़िलहिज्जइन्हीं महीनों के अनुसार मुस्लिम समाज के प्रमुख त्योहार और उर्स निर्धारित होते हैं, जैसे रमज़ान के बाद ईद-उल-फ़ित्तर, ज़िलहिज्ज में ईद-उल-जुहा, रज्जब माह में अजमेर का उर्स तथा मुहर्रम माह में मातमी आयोजन।

मुस्लिम समाज : प्रमुख त्योहार

अवसर / पर्व

इस्लामी माह / तिथि

प्रकृति

विशेष

ईद-उल-फ़ित्तर

रमज़ान के बाद शव्वाल माह की 1 तारीख

धार्मिक पर्व

  • रमज़ान के रोज़ों की समाप्ति का पर्व
  • फ़ित्रा (दान) का विशेष महत्व
  • सामूहिक नमाज़

ईद-उल-जुहा (बकरीद)

ज़िलहिज्ज माह की 10 तारीख

धार्मिक पर्व

  • कुर्बानी का पर्व
  • हज़रत इब्राहीम के पुत्र ईस्माइल की  क़ुर्बानी की स्मृति में

मुहर्रम

मुहर्रम माह

शोक पर्व

  • इमाम हुसैन की शहादत की याद
  • ताज़िया व मातमी जुलूस

शब-ए-बारात

शाबान माह की 14वीं तारीख

धार्मिक रात्रि

  • गुनाहों की माफी की रात्रि
  • इबादत व क़ब्रिस्तान ज़ियारत

शब-ए-क़द्र

रमज़ान की 27वीं तारीख

पवित्र रात्रि

  • क़ुरान अवतरण की रात
  • हज़ार महीनों से श्रेष्ठ मानी जाती है

ईद उल मिलाद-उन-नबी (बारावफात)

रबी-उल-अव्वल माह 12वीं तारीख

धार्मिक पर्व

  • हज़रत मोहम्मद साहब का जन्मदिन व मृत्यु दिन 

मुस्लिम समाज : प्रमुख उर्स (राजस्थान विशेष)

उर्स

स्थान

समय

विशेष

ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती का उर्स

अजमेर

रज्जब माह (6 दिन)

  • विश्व प्रसिद्ध उर्स
  • जन्नती दरवाज़ा चौथे दिन खुलता है
  • कव्वाली का आयोजन

तारकीन का उर्स

नागौर

रज्जब माह

  • क़ाज़ी हमीदुद्दीन नागौरी से संबंधित
  • अजमेर के बाद दूसरा बड़ा उर्स

गलियाकोट का उर्स

गलियाकोट (डूंगरपुर)

मुहर्रम की 27वीं तारीख

  • दाऊदी बोहरा समुदाय का प्रमुख उर्स
  • फखरुद्दीन पीर की दरगाह

नरहड़ की दरगाह का मेला

नरहड़ (झुंझुनूँ)

कृष्ण जन्माष्टमी

  • हज़रत हाजिब शक्कर बादशाह
  • हिन्दू–मुस्लिम एकता का प्रतीक

ख्वाजा निज़ामुद्दीन शाह का उर्स

फतेहपुर (शेखावाटी)

निर्धारित तिथि

  • सूफ़ी परंपरा से जुड़ा

पंजाबशाह बाबा का उर्स

अजमेर

ऐतिहासिक

  • ‘अढ़ाई दिन का झोंपड़ा’ से जुड़ा

जैन धर्म भारत के प्राचीनतम धर्मों में से एक है, जिसकी मूल शिक्षाएँ अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह पर आधारित हैं। जैन परंपरा के अनुसार कुल 24 तीर्थंकर हुए हैं, जिनमें अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर थे। जैन धर्म कर्म सिद्धांत और आत्मशुद्धि पर विशेष बल देता है तथा मोक्ष को जीवन का अंतिम लक्ष्य मानता है। यह धर्म तप, संयम और व्रतों के माध्यम से आध्यात्मिक उन्नति पर जोर देता है।

जैन धर्म के प्रमुख पर्व एवं त्योहार

पर्व / उत्सव

तिथि / माह

विशेष

ऋषभदेव जयंती

चैत्र कृष्ण नवमी

  • प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव की जयंती
  • केसरियाजी (उदयपुर) से जुड़ी

महावीर जयंती

चैत्र शुक्ल त्रयोदशी

  • 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी का जन्मोत्सव

पर्युषण 

भाद्रपद शुक्ल पंचमी–चतुर्दशी

  • जैन धर्म का सबसे पवित्र पर्व
  • उपवास, तप, क्षमायाचना

दस-लक्षण पर्व

चैत्र , भाद्रपद , माघ

  • इस पर्व का संबंध लौकिक जगत से ना हो कर आत्मा के गुणों सौ हैं।

क्षमावाणी / संवत्सरी

पर्युषण का अंतिम दिन

  • “मिच्छामि दुक्कड़म्” कहकर क्षमा याचना

सुगंध दशमी

भाद्रपद शुक्ल दशमी

  • धार्मिक आस्था से जुड़ा पर्व

रोट तीज

भाद्रपद शुक्ल तृत्तीय 

  • विशेष रूप से जैन समाज में प्रचलित

दीपावली (निर्वाण दिवस)

कार्तिक अमावस्या

  • भगवान महावीर का निर्वाण दिवस

सिक्ख धर्म की स्थापना 15वीं शताब्दी में गुरु नानक देव जी द्वारा की गई थी। यह धर्म एकेश्वरवाद पर आधारित है और ईश्वर को निर्गुण, निराकार और सर्वव्यापी मानता है। सिक्ख धर्म में गुरु परंपरा का विशेष महत्त्व है, जिसमें कुल दस गुरु हुए; अंतिम गुरु गुरु गोविंद सिंह जी ने गुरु ग्रंथ साहिब को शाश्वत गुरु घोषित किया। सिक्ख धर्म का मूल संदेश नाम जपो, किरत करो और वंड छको (ईश्वर स्मरण, परिश्रम से आजीविका और बाँटकर खाने) पर आधारित है। यह धर्म समानता, सेवा, भाईचारे और सामाजिक न्याय पर विशेष बल देता है तथा जाति-भेद और अंधविश्वास का विरोध करता है।

सिख धर्म के प्रमुख त्योहार व पर्व

पर्व

समय

विशेष

गुरु नानक जयंती (गुरुपर्व)

कार्तिक पूर्णिमा

  • सिक्ख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी की जयंती
  • प्रभात फेरी व नगर कीर्तन

लोहड़ी 

13 जनवरी 

  • नई फसल के आगमन की ख़ुशी में मनाया जाता हैं।

बैशाखी

13/14 अप्रैल

  • गुरु गोविंद सिंह जी द्वारा खालसा पंथ की स्थापना (1699) की गई।

होला मोहल्ला

फाल्गुन

  • वीरता और शस्त्र कौशल का प्रदर्शन
  • आनंदपुर साहिब

शहीदी दिवस

विभिन्न तिथियाँ

  • गुरु अर्जन देव, गुरु तेगबहादुर की शहादत

ईसाई धर्म की उत्पत्ति ईसा मसीह (यीशु मसीह) की शिक्षाओं से हुई, जिनका जन्म लगभग ईसा पूर्व 4–6 के आसपास माना जाता है। यह धर्म एकेश्वरवाद पर आधारित है और ईश्वर को प्रेम, करुणा और क्षमा का स्रोत मानता है। ईसाई धर्म का पवित्र ग्रंथ बाइबिल है, जिसमें पुराना नियम (Old Testament) और नया नियम (New Testament) शामिल हैं। इस धर्म का मूल संदेश प्रेम, त्याग, सेवा और क्षमा पर आधारित है—जिसे “अपने पड़ोसी से प्रेम करो” के सिद्धांत से व्यक्त किया जाता है। ईसाई धर्म ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और समाज सेवा के क्षेत्र में विश्वभर में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।

ईसाई धर्म : प्रमुख त्योहार व पर्व

पर्व

समय

विशेष

क्रिसमस

25 दिसंबर

  • ईसा मसीह का जन्म दिवस

गुड फ्राइडे / ब्लैक / हॉली फ्राइडे

मार्च–अप्रैल

  • ईसा मसीह के बलिदान की स्मृति

ईस्टर

गुड फ्राइडे के बाद

  • ईसा मसीह के पुनरुत्थान का पर्व

न्यू ईयर

1 जनवरी

  • नववर्ष का उत्सव

बौद्ध धर्म की स्थापना गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) ने छठी शताब्दी ईसा पूर्व में की थी। यह धर्म दुःख के कारण और निवारण पर केंद्रित है, जिसे बुद्ध ने चार आर्य सत्य और अष्टांगिक मार्ग के माध्यम से समझाया। बौद्ध धर्म में अहिंसा, करुणा, मध्यम मार्ग और प्रज्ञा पर विशेष बल दिया गया है। इसका अंतिम लक्ष्य निर्वाण की प्राप्ति है, अर्थात् जन्म–मृत्यु के बंधन से मुक्ति। बौद्ध धर्म ने एशिया के अनेक देशों में सांस्कृतिक, नैतिक और दार्शनिक प्रभाव डाला तथा शांति और सह-अस्तित्व का संदेश दिया।

बौद्ध धर्म के प्रमुख त्योहार व पर्व

पर्व

समय

विशेष

बुद्ध पूर्णिमा (वैशाख पूर्णिमा)

वैशाख

  • गौतम बुद्ध का जन्म, ज्ञान और निर्वाण

अशोक विजयादशमी

आश्विन

  • अशोक द्वारा धम्म विजय की स्मृति

कठिन चीवर दान

वर्षा ऋतु के बाद

  • भिक्षुओं को वस्त्र दान

पारसी अथवा ज़रथोस्त्री धर्म की स्थापना ज़रथोस्त्र (ज़रतुस्त्र) द्वारा प्राचीन ईरान (फ़ारस) में की गई थी। यह धर्म एकेश्वरवाद पर आधारित है और आहुरमज़्दा को सर्वोच्च ईश्वर मानता है। पारसी धर्म का मूल सिद्धांत सत् और असत् के संघर्ष पर आधारित है, जिसे “सद्विचार, सद्वचन और सद्कर्म” (Good Thoughts, Good Words, Good Deeds) के माध्यम से व्यक्त किया जाता है। इसका पवित्र ग्रंथ जेन्दअवेस्ता है और अग्नि को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए अग्नि मंदिरों का विशेष महत्त्व है। भारत में पारसी समुदाय ने व्यापार, उद्योग, समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

पारसी (ज़रथोस्त्री) धर्म : प्रमुख त्योहार

पर्वसमयविशेष
नौरोज21 मार्चपारसी नववर्ष
खोरदाद सालअगस्तपैगंबर ज़रथोस्त्र का जन्म दिवस
गहांबारवर्ष में 6 बारसृष्टि से जुड़े पर्व

सिन्धी धर्म के त्योहार

सिन्धी धर्म सिंध क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक–सांस्कृतिक परंपरा है, जिसका केंद्र भगवान झूलेलाल की उपासना और वरुण देव से जुड़ी जल-पूजा है। यह धर्म सामाजिक समरसता, सत्य, अहिंसा और मानव-कल्याण पर आधारित है। चेटीचण्ड, थड़ड़ी सातम और चालीसा जैसे पर्व सिन्धी समाज की आस्था, संघर्ष और सांस्कृतिक पहचान को व्यक्त करते हैं।

  • सिन्धी धर्म के त्योहार –
    • चेटीचण्ड (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) –
      • भगवान झूलेलाल जी का जन्म इसी दिन हुआ था, इसी कारण इसे झूलेलाल जयंती भी कहते हैं।
      • झूलेलाल जी का जन्म पाकिस्तान के सिंध प्रान्त के धधू नामक स्थान पर हुआ।
      • झूलेलाल जी ने सिंध की प्रजा को सिंध के राजा मिरखशाह के अत्याचारों से मुक्त कराया।
      • भगवान झूलेलाल को वरुण देव का अवतार माना जाता है।
  • थड़ड़ी सातम / बड़ी सातम (भाद्रपद कृष्ण – सप्तमी) – 
    • इस दिन सिन्धी समाज में ठंडा भोजन किया जाता है।
    • इसी कारण इसे बायरा / बड़ी सातम भी कहा जाता है।
    • इस दिन सिन्धी समाज की महिलाएँ पीपल के वृक्ष पर चाँदी की मूर्ति रखकर पूजा करती हैं।
  • चालीसा महोत्सव (16 जुलाई से 24 अगस्त तक) – 
    • इस अवसर पर 40 दिन तक व्रत किए जाते हैं
    • सिंध प्रान्त के बादशाह मिरखशाह के जुल्मों से परेशान होकर सिन्धी समाज के लोगों ने 40 दिनों का व्रत किया था। 40वें दिन झूलेलाल का अवतार हुआ।
  • अमुंड पर्व (फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी) – 
    • इस दिन झूलेलाल जी की मृत्यु हुई थी

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