विजयनगर की सांस्कृतिक उपलब्धियां प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। इस साम्राज्य ने कला, स्थापत्य, साहित्य, संगीत और नृत्य को अभूतपूर्व संरक्षण प्रदान किया। विजयनगर काल में निर्मित मंदिर, मूर्तियाँ और सांस्कृतिक संस्थाएँ दक्षिण भारतीय परंपराओं की गौरवशाली पहचान को और अधिक सशक्त बनाती हैं।
विजयनगर की सांस्कृतिक उपलब्धियां
अर्थ व महत्त्व
- विजयनगर का शाब्दिक अर्थ – “जीत का नगर”।
- इसे मध्ययुग का प्रथम हिन्दू साम्राज्य कहा जाता है।
- राजधानी – तुंगभद्रा नदी के दक्षिणी तट पर स्थित विजयनगर (हम्पी)।
- यह नगर शक्ति व सम्पदा का प्रतीक था।
अब्दुल रज्जाक (फारसी यात्री) के अनुसार –
“विजयनगर दुनिया के सबसे भव्य शहरों में से एक था, जिसे उसने देखा या सुना था।”
उद्भव व स्थापना
- स्थापना वर्ष: 1336 ई०
- संस्थापक: दो भाई – हरिहर एवं बुक्का
- राजवंश: संगम वंश (पिता का नाम – संगम)
स्थापना के कारण
- दक्षिण भारत में मुस्लिम सत्ता के विस्तार के विरुद्ध प्रतिक्रिया स्वरूप।
- क्षेत्रीय राजनीतिक अस्थिरता व विघटन से उत्पन्न परिस्थितियाँ।
धार्मिक पृष्ठभूमि
- हरिहर व बुक्का मूलतः काकतीय शासक प्रताप स्वरूप के सेवक थे।
- बाद में काम्पिली (कर्नाटक) आ गए।
- वे पहले मुसलमान बन गए थे, परंतु माधव विद्यारण्य (ब्राह्मण साधु व विद्वान) तथा उसके भाई सायण (वेद भाष्यकार) की प्रेरणा से पुनः हिन्दू धर्म अपनाया।
- इन्हीं की प्रेरणा से विजयनगर राज्य की स्थापना की।
राजनीतिक परिस्थिति
- अलाउद्दीन खिलजी के समय से ही दक्षिण में विद्रोह हो रहे थे।
- मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल (1334 ई.) में काम्पिली प्रान्त में विद्रोह हुआ।
- उसके दमन हेतु हरिहर व बुक्का को दक्षिण भेजा गया।
- वहाँ पहुँचकर उन्होंने स्वतन्त्र सत्ता स्थापित कर ली।
विजयनगर की सांस्कृतिक उपलब्धियों को तीन स्पष्ट भागों में विभाजित किया गया है —
- साहित्य
- स्थापत्य कला और
- संगीत एवं नृत्य
1. साहित्य (Literature)
सामान्य जानकारी
- कृष्णदेवराय एक विद्वान, कला प्रेमी और ‘अभिनव भोज’, ‘आंध्र भोज’ तथा ‘आंध्र पितामह’ कहलाते थे।
- विजयनगर की राजभाषा तेलुगू थी, परन्तु संस्कृत, तमिल और कन्नड़ भाषाओं में भी साहित्य का विकास हुआ।
- कृष्णदेव राय स्वयं संस्कृत और तेलुगू के महान कवि थे।
कृष्णदेवराय की रचनाएँ
| भाषा | रचना | विषय / विशेषता |
| तेलुगू | आमुक्त माल्यद (Amuktamalyada) | विष्णु अवतार रंगनायक और संत अंडाल के विवाह का वर्णन; राजनीतिक व प्रशासनिक विचार; इसे विष्णुचितीय व विस्वुवितीय भी कहा जाता है। |
| संस्कृत | जाम्बवती कल्याण, उषा परिणय, मदालसा चरित्र | नाटक एवं काव्य रचनाएँ |
तेलुगू साहित्य का स्वर्णयुग (कृष्णदेव राय काल)
- कृष्णदेव राय के दरबार में 8 प्रसिद्ध कवि थे जिन्हें अष्टदिग्गज कहा जाता था।
- यह काल तेलुगू साहित्य का शास्त्रीय युग कहलाता है।
अष्टदिग्गज कवि
| कवि | प्रमुख रचना | भाषा |
| अल्लासानी पेद्दना | मनुकारिता (स्वारोचित सम्भव), हरिकथा सरनसमू | तेलुगू |
| नन्दी तिम्मन | पारिजात हरण | तेलुगू |
| भट्टमूर्ति | नरसभूपालियम, वसुचरित्र | तेलुगू |
| धूर्जटी | कालहस्ति महामात्य | तेलुगू |
| तेनालीराम | पांडुरंग माहात्म्य | तेलुगू |
| अन्य कवि: मल्लन, रामचन्द्र, जिरगाली मूरन | – | तेलुगू |
- अल्लासानी पेद्दना को तेलुगू कविता का पितामह (आंध्र कविता पितामह) कहा जाता है।
- तेनालीराम की तुलना अकबर के बीरबल से की जाती है।
तेलुगू के पाँच महाकाव्य
- आमुक्तमाल्यद – कृष्णदेव राय
- मनुकारितामनुचरितम् – अल्लासानी पेद्दना
- वसुचरित – भट्टमूर्ति
- राघव पांडवीयम – पिंगली सूरल
- पांडुरंग माहात्म्य – तेनालीराम
अन्य साहित्यिक रचनाएँ
संस्कृत में
- सायण – वेदों पर भाष्य, सुधानिधि, संगीतसार
- हेमाद्रि – धर्मशास्त्रों पर टीका
- ईश्वर दीक्षित – हेमकूट पर टीकाएँ
- अगस्त्य – अनेक काव्य रचनाएँ
- श्रीनाथ – श्रृंगार दीपिका, श्रृंगार नैषध, हरविलासम्
- माधव विद्यारण्य – काल निर्णय, पाराशर स्मृति पर टीका
- रामराज पंडित – वसुचरित्र (कन्नड़)
- राजनाथ – शाल्वभ्युदय, भागवत चंपू
कन्नड़ में
- मधुर – धर्मनाथ पुराण
- केतन – दशकुमार चरित का अनुवाद; उपाधि “अभिनव दण्डी”
- गोमतेश्वर की स्तुति में कविताएँ
- कृष्णदेव राय के दरबार में संस्कृत एवं कन्नड़ भाषाओं में विभिन्न पुस्तकों की रचना हुई, जिनमें ‘भाव चिंतारण’ तथा ‘वीर शैवामृत’ प्रमुख हैं।
तमिल में
- तमिल भाषा पहले से विकसित थी; विजयनगर काल में निरंतर प्रगति हुई।
अन्य उल्लेखनीय
- मदुरा विजयम् – गंगा देवी (कुमार कम्पन्न की पत्नी)
- वरदाम्बिका परिणय – तिरूवलाम्बा (अच्युत राय के विवाह पर)
- द तमिल कंट्री अंडर विजयनगर – ए. कृष्णस्वामी
2. स्थापत्य कला (Architecture)
प्रमुख स्थापत्य विशेषताएँ
- विजयनगर स्थापत्य की शैली प्रोविदा शैली (बेसर शैली का रूप) कहलाती थी।
- मुख्य विशेषताएँ:
- विशाल गोपुरम (राया गोपुरम)
- हजार स्तंभों का मंडप, कल्याण मंडप, अमान मंडप
- अलंकृत स्तंभ, छतों की सजावट, स्तंभों के नीचे करंड सज्जा
- स्तंभों पर दरियाई घोड़े (याली) की आकृतियाँ
- देव विवाह (कल्याणोत्सव) के लिए विशेष मण्डप
प्रमुख निर्माण कार्य
| निर्माण | निर्माता | विशेषता |
| हजारा मंदिर | कृष्णदेव राय | राम को समर्पित |
| विट्ठल स्वामी मंदिर | कृष्णदेव राय | कृष्ण को समर्पित |
| नागलपुर नगर | कृष्णदेव राय | माँ नागला देवी की स्मृति में |
| हास्पेट नगर | कृष्णदेव राय | पत्नी की स्मृति में |
| कमल महल | – | हिन्दू स्थापत्य पर इस्लामी प्रभाव |
| लेपाक्षी मंदिर | – | सबसे बड़ी एकाश्मक नन्दी मूर्ति; चित्रकला के प्रमाण (लेपाक्षी कला) |
- विजयनगर के शासक शिव देवता विरुपाक्ष के नाम पर शासन करते थे;
- कृष्णदेव राय स्वयं वैष्णव थे।
3. संगीत एवं नृत्य (Music & Dance)
प्रमुख विशेषताएँ
- कृष्णदेव राय और अन्य विजयनगर शासकों ने संगीत एवं नृत्य को विशेष संरक्षण दिया।
- दरबार में अनेक प्रसिद्ध गायक, वादक और नर्तक थे।
संगीत संबंधी ग्रंथ
| रचनाकार | ग्रंथ | विवरण |
| सायण | संगीतसार | संगीत सिद्धांतों की व्याख्या |
| मल्लीनाथ | – | मल्लिकार्जुन के संरक्षण में कार्य किया |
| रामामात्य (मल्लीनाथ के पोते) | स्वरमेल कलानिधि | संगीत ग्रंथ |
| लक्ष्मीनारायण | संगीत सर्वोदय | देवराय द्वितीय के दरबार में |
| कृष्णदेव राय के दरबारी संगीतकार | – | संगीत सर्वोदय, स्वरमेव कलानिधि की रचना |
विजयनगर की सांस्कृतिक उपलब्धियां
