खिलजी वंश

खिलजी वंश (1290–1320 ई.) दिल्ली सल्तनत का एक महत्वपूर्ण शासनकाल था, जिसने राजनीतिक विस्तार और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से अपनी सशक्त पहचान बनाई। प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत के अंतर्गत यह वंश अलाउद्दीन खिलजी की सैन्य सफलताओं, आर्थिक नीतियों और दक्षिण भारत तक हुए अभियानों के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।

खिलजी कौन थे?

  • जाति पर मतभेद —
    • बरनी: तुर्कों से भिन्न।
    • निजामुद्दीन अहमद: चंगेज़ ख़ाँ के दामाद कुलीज़ ख़ाँ के वंशज।
    • डॉ. किशोरी लाल: मूलतः तुर्क, अफगानिस्तान की हेलमंद नदी के आसपास का क्षेत्र “खल्ज़” → “खिलजी”।
  • मंगोलों की उथल-पुथल से भारत में शरणार्थी रूप में आए।
  • स्थानीय रीति-रिवाज अपनाए।

जलालुद्दीन फिरोज खिलजी (1290–1296 ई.)

परिचय

  • कैकुबाद का आरिज-ए-मुमालिक, उपाधि – शाइस्ता खाँ, बरन का राज्यपाल।
  • मूलतः तुर्किस्तान निवासी, जीवन का आरंभ साधारण सैनिक के रूप में।
  • बलबन के समय मंगोलों से अनेक सफल युद्ध।
  • कोतवाल फखरूद्दीन के आमंत्रण पर दिल्ली आए।
  • राज्यारोहण: 1290 ई., किलोखरी महल में, आयु ~70 वर्ष — सल्तनत काल का सबसे वृद्ध सुल्तान।
  • 1 वर्ष तक दिल्ली में प्रवेश नहीं किया; किलोखरी से शासन।

 प्रशासनिक पुनर्गठन

  • पुत्र इख्तियारुद्दीन – खान-ए-खाना
  • पुत्र हिसामुद्दीन – अर्कली खाँ
  • पुत्र कद्र खाँ – उपाधि प्राप्त
  • भतीजा अलाऊद्दीन – अमीर-ए-तुजुक
  • भतीजा अलमास बेग – आखूर बेग
  • अहमद चप – नायब बारबक/अमीर-ए-हाजिब
  • फखरूद्दीन – कोतवाल यथावत
  • अमीर खुसरो – शाही पुस्तकालयाध्यक्ष
  • विभाग – दीवान-ए-वकूफ की स्थापना।

राजत्व सिद्धांत

  • उदार निरंकुशतावाद।
  • नीति – “मैं वृद्ध मुसलमान हूँ, मुसलमानों का रक्त नहीं बहा सकता।”
  • बरनी: “सुल्तान चींटी को भी नुकसान न पहुँचाने की नीति पर विश्वास करता था।”
  • बलबन के विपरीत उदार एवं क्षमाशील।

मुख्य विद्रोह

1. मलिक छज्जू (1290 ई.)

  • बलबन का रिश्तेदार, कड़ा-मणिकपुर का इक्तेदार।
  • स्वयं को “सुल्तान मगीसुद्दीन” घोषित किया।
  • समर्थक: हाथिम खाँ (अवध), अमीर अली, तुर्क अमीर।
  • अर्कली खाँ ने बदायूं के पास पराजित किया।
  • छज्जू को माफ किया गया।
  • अर्कली खाँ -मुल्तान का इक्तेदार,
    अलाऊद्दीन – कड़ा-मणिकपुर का इक्तेदार बना।

2. सिद्दी मौला (ईरानी सूफी) विद्रोह

  • अजोधन में शेख फरीद शकरगंज का शिष्य।
  • शिष्य – इख्तियारुद्दीन (सुल्तान का पुत्र)।
  • पुराने तुर्क अमीर सुल्तान की हत्या कर मौला को खलीफा बनाना चाहते थे।
  • साजिश उजागर → मौला को हाथी के पैरों तले कुचलवाया गया।
  • बरनी: “यह अन्यायपूर्ण हत्या थी।”
  • यह इल्बारी दल का अंतिम प्रयास था।

3. ताजुद्दीन कूची का षड्यंत्र

  • बलबन कालीन तुर्की अमीर।
  • सुल्तान की हत्या की योजना → पकड़ा गया → क्षमा कर दिया गया।

सैन्य अभियान

1. रणथम्भौर (1291 ई.)

  • चौहान शासक हम्मीर देव के विरुद्ध।
  • झाइन दुर्ग जीता (कुंजी दुर्ग)।
  • शाही सेनाएँ – अर्कली खाँ, अहमद चप, कराबहादुर।
  • हम्मीर देव का सेनापति गुरदास सैनी मारा गया।
  • सुल्तान ने घेरा उठाते हुए कहा –
    “ऐसे दस दुर्ग भी मुसलमान के एक बाल के बराबर नहीं।”

2. मंगोल आक्रमण (1292 ई.)

  • हलाखू का पौत्र अब्दुल्ला ~2 लाख मंगोल।
  • अर्कली खाँ ने बरराम में पराजित किया, 1000 मंगोल बंदी।
  • सुल्तान ने मैत्रीपूर्ण व्यवहार किया;
    उलूग खाँ से पुत्री का विवाह, 4000 मंगोलों ने इस्लाम स्वीकार किया → “नव मुसलमान”, इन्हें मंगोलपुरी बसाया गया।

3. मंण्डोर विजय (1292 ई.)

  • शासक सामंत सिंह, दुर्ग पर सल्तनत का अधिकार, मस्जिद का निर्माण।

4. भिलसा अभियान (1292 ई.)

  • सेनापति अलाउद्दीन, धन व मूर्तियाँ लूटीं, मंदिर तोड़े।
  • सुल्तान ने अलाऊद्दीन को अवध का इक्तेदार बनाया।

5. देवगिरी अभियान (1294 ई.)

  • अलाऊद्दीन ने गुप्त रूप से देवगिरी (यादव राजा रामचंद्र देव) पर चढ़ाई की।
  • सहयोगी – बरनी का चाचा मलिक अला-उल-मुल्क।
  • झूठा बहाना – “चंदेरी अभियान”
  • लूट के बाद संधि –
    • एलिचपुर की वार्षिक आय अलाऊद्दीन को,
    • पुत्री का विवाह अलाऊद्दीन से,
    • भारी धन प्राप्त:
      • 600 मण सोना, 700 मण मोती, 2 मण लाल नीलम, 1000 मण चाँदी, 4000 रेशमी थान।
    • डॉ. एस. राय: “अलाऊद्दीन ने दिल्ली को देवगिरी से जीता।”

जलालुद्दीन की हत्या (1296 ई.)

  • देवगिरी लूट की खबर पर सुल्तान ने अलाऊद्दीन से धन मांगा नहीं।
  • अलाऊद्दीन ने पत्र भेजकर सुल्तान को कड़ा आने का आमंत्रण दिया।
  • सुल्तान नाव से पहुँचा, अलाऊद्दीन ने धोखे से हत्या करवाई।
  • हत्यारा – इख्तियारुद्दीन हूद, योजनाकार – जफर खाँ।
  • बरनी ने आलोचना की।
  • जलालुद्दीन की पत्नी मलिका-ए-जहान ने पुत्र रूकनुद्दीन इब्राहीम को सुल्तान घोषित किया,
    परंतु अलाऊद्दीन खिलजी ने सत्ता हथिया ली और जलालुद्दीन के परिवार का संहार किया।

  अलाउद्दीन खिलजी (1296–1316)

प्रारंभिक जीवन

  • मूल नाम – अली गुरशस्प
  • जन्म – 1266 ई., सिरसा (हरियाणा)
  • पिता – शिहाबुद्दीन खिलजी
  • वंश – अफगानिस्तान से भारत आया खिलजी परिवार
  • पिता की मृत्यु के बाद चाचा जलालुद्दीन खिलजी ने पालन किया।
  • शिक्षा – लगभग अनपढ़; सल्तनत काल का पहला निरक्षर सुल्तान।
  • पद – जलालुद्दीन के समय अमीर-ए-तुजुक, फिर कड़ा व अवध का इक्तेदार
  • दो विवाह: (1) जलालुद्दीन की पुत्री, (2) मलिक संजर की बहन ‘महरू’।

राज्यारोहण (1296 ई.)

  • जलालुद्दीन की हत्या (20 जुलाई 1296 ई.) के बाद खुद को सुल्तान घोषित किया।
  • बरनी: “शहीद सुल्तान के सिर से रक्त टपक रहा था, अलाउद्दीन ने चंदोवा उठाकर स्वयं को सुल्तान कहा।”
  • खिताब – अबुल मुजफ्फर सुल्तान अलाउद्दीन मुहम्मद शाह खिलजी।
  • खिताब व पद वितरण
    • अलमास बेग → उलुग खाँ
    • मलिक संजर → अल्प खाँ
    • हिजाबुद्दीन → जफर खाँ
  • राज्याभिषेक – 21 अक्टूबर 1296, दिल्ली के लाल महल में।

दिल्ली की स्थिति

  • जलालुद्दीन की मृत्यु के बाद पत्नी मलिका-ए-जहाँ ने पुत्र कद्र खाँ (रुक्नुद्दीन इब्राहिम) को सुल्तान बनाया।
  • अर्कली खाँ मुल्तान में रहा।
  • अलाउद्दीन ने देवगिरि की लूट से मिले धन से सेना व जनता को प्रभावित किया।

महत्वपूर्ण नियुक्तियाँ

  • वजीर – ख्वाजा खातिर
  • कोतवाल – नुसरत खाँ
  • आरिज-ए-मुमालिक – जफर खाँ
  • दादबेग-ए-हजरत – फखरूद्दीन

जलाली परिवार का अंत

  • मुल्तान अभियान – जफर खाँ व उलुग खाँ ने घेरा;
    • सूफी शेख रूक्नुद्दीन की मध्यस्थता → प्राण रक्षा का वादा, पर
    • नुसरत खाँ ने हांसी के पास अर्कली खाँ, रुक्नुद्दीन इब्राहिम, अहमद चप को अंधा कर मार डाला।

विश्वासघाती जलाली अमीरों का दमन

  • जिन्होंने धन लेकर साथ दिया, उन सभी की संपत्ति जब्त।
  • केवल कुतुबुद्दीन अलवी, मलिक जमाल, मलिक नासिरुद्दीन राना बचे।

प्रमुख विद्रोह

  1. नव-मुसलमानों का विद्रोह (1299 ई.)
    • गुजरात लूट के बाद धन बाँटने पर विवाद।
    • विद्रोह: मुहम्मदशाह, कहबू, बुर्राक, यलहक आदि।
    • परिणाम – नुसरत खाँ ने दमन किया;
      दिल्ली में पहली बार विद्रोही परिवारों को दंडित किया गया।
  2. अकत खाँ विद्रोह (1301 ई.)
    • रणथम्भौर अभियान में सुल्तान की हत्या की कोशिश;
    • सैनिक मानिक ने जान बचाई;
    • अकत खाँ व भाई कुतलुग खाँ मारे गए।
  3. मलिक उमर व मंगू खाँ (1301 ई.)
    • बदायूं-अवध के इक्तेदार;
    • विद्रोह दबाया गया, दोनों अंधे कर दिए गए।
  4. हाजी मौला विद्रोह (1301 ई.)
    • कोतवाल फखरूद्दीन का मुक्त दास;
    • दिल्ली पर हमला, पर दमन हुआ।

 विद्रोहों के कारण (बरनी के अनुसार)

  1. अमीरों की निकटता
  2. शराब व भोग-विलास
  3. अत्यधिक संपत्ति
  4. सुल्तान की जनता से दूरी

चार प्रमुख अध्यादेश

  1. जब्ती नीति (Confiscation Policy)
    • अमीरों की जागीरें व वक्फ खालसा में ली गईं।
  2. मद्य-निषेध व जुआ-प्रतिबंध
    • स्वयं शराब त्यागी, सार्वजनिक रूप से प्रतिबंध लगाया।
  3. गुप्तचर प्रणाली का गठन
    • साम्राज्य की हर घटना की जानकारी हेतु जासूसी तंत्र।
  4. अमीरों के मेल-मिलाप व विवाह पर नियंत्रण
    • बिना सुल्तान अनुमति विवाह या दावत निषिद्ध।

मंगोल आक्रमण (1297–1306 ई.)

कुल 6 प्रमुख आक्रमण — सल्तनत काल में सर्वाधिक।

वर्षमंगोल नायकपरिणाम / युद्धउल्लेख
1297कादर खाँजारन मंजूर का युद्ध, पराजय; 20,000 मंगोल मरेअमीर खुसरो
1299साल्दीपराजितइसामी, फरिश्ता
1299 (अंत)कुतलुग ख्वाजाकीली का युद्ध – जफर खाँ शहीद, पर मंगोल पीछे हटेबरनी
अज्ञात (1303 ई.)मंगोल दिल्ली पहुँचे; सीरी दुर्ग की घेरेबंदी असफलअमीर खुसरो
1305अलीबेग, तरकात, तारगीअमरोहा युद्ध – मलिक नायक की विजय, सिरों से मीनार बनीफरिश्ता, इसामी
1306कबक, ताईबू, इकबाल मंदहिन्द-ए-अली युद्ध, मलिक काफूर की विजयफरिश्ता: 50,000 में 4,000 जीवित

1307 ई. में इकबाल मंद का छोटा आक्रमण अंतिम माना गया।

मंगोल नीति की समीक्षा

  • ट्रांस-ऑक्सियाना का शासक – दावा खाँ
  • बलबन की रक्षात्मक नीति की जगह “रक्त व लौह नीति” (Iron and Blood Policy) अपनाई।
  • सीमांत प्रांतों की सुरक्षा हेतु
    • गाजी तुगलक को सीमांत रक्षक नियुक्त किया।
  • मंगोल आक्रमण स्थायी रूप से विफल हुए।

   साम्राज्य विस्तार नीति

  • सल्तनत का पहला सुल्तान जिसने साम्राज्यवाद को नीति बनाया।
  • पूर्ववर्ती सुल्तान संगठन तक सीमित रहे,
    जबकि अलाउद्दीन ने विस्तार को लक्ष्य बनाया।
  • लेनपूल: “अलाउद्दीन सल्तनत काल का समुद्रगुप्त था।”

अलाउद्दीन खिलजी के उत्तरी भारत के अभियान

गुजरात अभियान (1299 ई.)

  • सेनापति – उलुग खाँ व नुसरत खाँ
  • उलुग खाँ पहले सिंध में तैनात था; जैसलमेर पहुँचकर भाटी मूलराज को हराया (पहला शाका)।
  • गुजरात के बघेल शासक कर्णदेव द्वितीय की राजधानी अन्हिलवाड़ा (पाटन) लूटी।
  • कमला देवी (कर्णदेव की पत्नी) को पकड़कर दिल्ली लाई गई – अलाउद्दीन ने विवाह किया → मल्लिका-ए-जहाँ उपाधि।
  • सोमनाथ मंदिर नष्ट किया गया, मूर्ति के टुकड़े दिल्ली भेजे।
  • देवल देवी (कर्णदेव की पुत्री) ने देवगिरि में शरण ली।
  • मलिक काफूर (हिजड़ा) को नुसरत खाँ ने खम्भात से 1000 दीनार में खरीदा → “हजार-दीनारी” कहलाया।
  • बाद में अलाउद्दीन का मलिक-ए-नायब व वज़ीर बना।
  • गुजरात को सल्तनत का प्रान्त बनाया गया।

मालवा अभियान (1305 ई.)

  • सेनापति – आइन-उल-मुल्क।
  • शासक – महलकदेव; सेनापति – हरनंदकोका।
  • माण्डू, उज्जैन, चन्देरी, धार विजित।
  • माण्डू = दक्षिण विजय की कुंजी (अमीर खुसरो)।
  • सल्तनत की सीमा व्यास नदी से बढ़कर सिन्धु नदी तक।

 अलाउद्दीन खिलजी के राजस्थान अभियान

रणथम्भौर अभियान (1301 ई.)

  • स्रोत – हम्मीररासो, हम्मीर महाकाव्य
  • कारण – हम्मीर द्वारा मंगोल सेनापति मुहम्मद शाह व केहबू को शरण देना।
  • सेनापति – नुसरत खाँ व उलुग खाँ (अलमास बेग)।
  • झाइन दुर्ग (रणथम्भौर की कुंजी) पर अधिकार – नाम रखा सैर-ए-नौ
  • जौहर का पहला फारसी उल्लेख (अमीर खुसरो – खजाइन-उल-फुतुह)।
  • रानी रंगदेवी ने जौहर किया।
  • नुसरत खाँ युद्ध में मारा गया।
  • विजय के बाद – “कुफ्र का गढ़ इस्लाम का घर हो गया” (खुसरो)।

 चित्तौड़ अभियान (1303 ई.)

  • अलाउद्दीन ने चित्तौड़ को खिज्र खाँ के नाम पर खिजराबाद रखा।
  • अमीर खुसरो की रचना – खजाइन-उल-फुतुह
  • गोरा-बादल – प्रमुख सेनानायक।
  • पद्मावत (मलिक मुहम्मद जायसी, 16वीं सदी) – कथा खजाइन-उल-फुतुह पर आधारित।
  • खुसरो ने जौहर का उल्लेख नहीं किया।
  • पद्मिनी = सेवा; अलाउद्दीन = सुलेमान के रूप में वर्णित।

सिवाणा अभियान (1308 ई.)

  • शासक – शीतलदेव सोनगरा (कान्हड़देव का भतीजा)।
  • सेनापति – कमालुद्दीन गुर्ग (अफगानिस्तान मूल)।
  • शीतलदेव युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुआ।
  • दुर्ग का नाम बदलकर खैराबाद रखा गया।

जालौर अभियान (1311 ई.)

  • शासक – कान्हड़देव (पुत्र वीरमदेव)।
  • सेनापति – कमालुद्दीन गुर्ग (1315 में गुजरात में विद्रोह दमन करते हुए मरा)।
  • बीका दहिया के विश्वासघात से दुर्ग पतन।
  • जालौर का नाम जलालाबाद रखा गया।
  • यहाँ अल्लाई/तोप मस्जिद का निर्माण।
  • कान्हड़देव व वीरमदेव युद्ध में वीरगति।

अलाउद्दीन के दक्षिणी अभियान 

  • नीति – अधिराजत्व (Suzerainty) अपनाई, सीधे शासन नहीं किया।
  • वर्णन – अमीर खुसरो (खजाइन-उल-फुतुह), बरनी (तारीख-ए-फिरोजशाही)
  • सेनानायक – मलिक काफूर।

दक्षिण के प्रमुख राज्य व शासक

राज्यशासक
देवगिरी (यादव)रामचन्द्र देव / शंकर देव
वारंगल (काकतिय)प्रतापरुद्र देव द्वितीय
द्वारसमुद्र (होयसल)वीर बल्लाल तृतीय
मदुरा (पाण्ड्य)वीर पाण्ड्य, सुन्दर पाण्ड्य

देवगिरी अभियान

  • प्रारंभिक विजय: 1296 ई. (अलाउद्दीन, जलालुद्दीन के समय)।
  • दूसरा अभियान: 1307 ई., मलिक काफूर व ख्वाजा हाजी के नेतृत्व में।
  • कारण:
    • रामचन्द्र देव ने कर देना बंद किया।
    • करणदेव बाघेला को शरण देना।
    • कमला देवी की पुत्री देवल रानी को पाने का प्रयास।
  • परिणाम: रामचन्द्र ने अधीनता स्वीकारी, दिल्ली आया, सम्मानित हुआ,
    • पुत्री इल्लपाली का विवाह अलाउद्दीन से।
    • गुजरात का नवसारी क्षेत्र उसके राज्य में मिला।
    • अलाउद्दीन का विश्वसनीय सहयोगी बना।
  • 1313 ई. – शंकर देव मारा गया; हरपाल देव को गद्दी दी गई।

वारंगल (तेलंगाना)

  • पहला आक्रमण – 1303 ई. (मलिक छज्जू) असफल।
  • दूसरा आक्रमण – 1308 ई. (मलिक काफूर) सफल।
  • शासक – प्रतापरुद्र देव द्वितीय (लहर देव)
  • उसने कोहिनूर हीरा, 100 हाथी, 7000 घोड़े व जवाहरात भेंट किए।
  • स्वर्ण मूर्ति में हीरे की माला डालकर भेंट दी।
  • नियमित कर स्वीकार किया।

 द्वारसमुद्र (होयसल)

  • आधुनिक हैलबीडु, जिला हासन (कर्नाटक)।
  • आक्रमण – 1310 ई. (मलिक काफूर)
  • शासक – वीर बल्लाल तृतीय, जो पाण्ड्य अभियान पर गया था।
  • देवगिरी के रामचन्द्र देव ने सहायता की।
  • बल्लाल ने इस्लाम या जजिया में से विकल्प चुना।
  • सम्पूर्ण राजकोष छीना गया।
  • अलाउद्दीन ने 10 लाख टंके व खिलअत देकर राज्य लौटाया।

पाण्ड्य (मदुरा / माबर)

  • आक्रमण – 1311 ई. (मलिक काफूर)
  • पाण्ड्य शासक – मारवर्मन कुलशेखर के दो पुत्र – सुन्दरवीर पाण्ड्य
  • गृहयुद्ध का लाभ उठाया गया।
  • राजधानी – वीरधूल
  • मंदिर लूटे गए, रामेश्वरम् मंदिर नष्ट कर मस्जिद बनाई (खुसरो, फरिश्ता)।
  • कर/अधीनता नहीं स्वीकारी → राजनैतिक असफलता।
  • अपार धन प्राप्त:
    • 512 हाथी, 5000 घोड़े, विशाल जवाहरात।
    • “महमूद गजनवी की लूट से अधिक” (फरिश्ता, आर.एस. शर्मा)।
  • सफलता से प्रभावित होकर काफूर को मलिक-ए-नायब की उपाधि दी गई।
  • काफूर ने देवगिरी में मुख्यालय स्थापित किया।
  • इसामी – “काफूर का न्याय बगीचे पर वर्षा समान।”

अलाउद्दीन खिलजी की बाजार व्यवस्था

  • पहला सुल्तान जिसने आर्थिक मामलों को राज्य-नीति का अंग बनाया (1301 ई. के बाद लागू)।
  • स्रोत: बरनी (तारीख-ए-फिरोजशाही), इसामी, इब्नबतूता, अमीर खुसरो, खैर-उल-मजलिस
उद्देश्य
  • बरनी: मंगोलों से रक्षा हेतु विशाल सेना कम वेतन में रखनी थी, अतः वस्तुएँ सस्ती रखी गईं।
  • अमीर खुसरो: जनता को राहत देने हेतु।
नियंत्रण का क्षेत्र
  • फरिश्ता: अधिकांश प्रांतों में
  • मोरलैंड व बरनी: केवल दिल्ली में
  • शेख मुबारक: अलाउद्दीन की मृत्यु के साथ समाप्त।
प्रमुख अधिकारी
  1. दीवान-ए-रियासत (वाणिज्य मंत्री)मलिक याकूब
    • बाजार नियंत्रण का सर्वोच्च अधिकारी
    • व्यापारी वर्ग पर नियंत्रण, आर्थिक नियम लागू
  2. शहना-ए-मंडी (मुख्य बाजार निरीक्षक)मलिक कबूल
    • दुकानदारों व मूल्य नियंत्रण
  3. बरीद-ए-मंडी – गुप्तचर विभाग से संबंधित।
तीन प्रमुख बाजार
  1. सराय-ए-अदल (कपड़ा व निर्मित वस्तुओं का बाजार)
    • स्थान: बदायूं द्वार के पास
    • 5 अधिनियम:
      1. बिक्री केवल सराय-ए-अदल में
      2. सस्ती दरें सुनिश्चित
      3. व्यापारियों का पंजीकरण
      4. मुल्तानी व्यापारियों को 20 लाख टंका ऋण
      5. परवाना नवीस की नियुक्ति (बहुमूल्य वस्त्रों की खरीद नियंत्रण)।
  2. गल्ला बाजार (खाद्यान्न बाजार)
    • 7 अधिनियम:
      1. खाद्यान्न की निश्चित कीमतें
      2. शहना व कर्मचारियों की नियुक्ति
      3. दोआब से लगान अनाज में (½ उपज)
      4. अनाज परिवहन पर नियंत्रण
      5. मुनाफाखोरी पर रोक
      6. खेतों में बिक्री मूल्य तय
      7. नियमित रिपोर्ट प्रणाली (शहना, बरीद, मुन्ही)।
  3. घोड़े, मवेशी व दासों का बाजार
    • 4 नियम:
      1. गुणवत्ता आधारित मूल्य
      2. पूंजीपतियों का बहिष्कार
      3. दलालों पर नियंत्रण
      4. सुल्तान की व्यक्तिगत जांच।
समीक्षा
  • बरनी: “बर-अबर सिद्धांत” (उत्पादन लागत पर आधारित, 7 नियम)।
  • उपभोक्ता को लाभ, उत्पादक को हानि।
  • राशनिंग व्यवस्था व भंडारण लागू।
  • मूल्य सस्ते से अधिक स्थिर रहे — “यह युग का आश्चर्य था।”
  • के.ए. निजामी: श्रेष्ठ आर्थिक उपलब्धि।
  • के.एस. लाल: अस्थायी उपाय।
भू-राजस्व सुधार
  • भूमि अनुदानों का अंत: मिल्क, इदरात, इनाम, वक्फ भूमि जब्त कर खालसा भूमि बनाई।
  • दोआब क्षेत्र पूर्ण खालसा घोषित।
  • खुत, मुकदम, चौधरी के विशेषाधिकार समाप्त।
    • इन्हें घोड़े पर बैठने व अच्छे वस्त्र पहनने की मनाही।
    • काजी मगीसुद्दीन की सलाह पर यह वर्ग दमनित।
  • भूमि की पैमाईश:
    • बिस्वा इकाई (1/20 बीघा)
    • उपज का ½ भाग (50%) खराज के रूप में
    • मसाहत प्रणाली लागू (वास्तविक आय पर कर)
    • आमिल, मुहस्सिल आदि नियुक्त।
  • अन्य कर: घरीकर (आवास कर), चराई कर, खम्स (लूट का 4/5 भाग राज्य को)।
  • विशेष: नकद कर-अदायगी अनिवार्य (पहला सुल्तान)।
  • झांई (राजस्थान): कर-अपवाद क्षेत्र; “शहरे-नूर” कहा गया।
सैन्य सुधार
  • स्थायी सेना (हशम-ए-मुर्रत्तब) की स्थापना।
  • नकद वेतन प्रणाली, इक्ता समाप्त।
  • घोड़े दागने व सैनिक हुलिया प्रणाली शुरू।
  • आरिज-ए-मुमालिक – भर्ती अधिकारी।
  • फरिश्ता: 4,75,000 घुड़सवार।
  • वेतन:
    • घुड़सवार – 234 टंका वार्षिक
    • दो-अस्पा – 312 टंका
    • पैदल – 78 टंका।
  • दशमलव पद्धति (10,000 = तुमन)।
  • गुप्तचर विभाग: बरीद-ए-मुमालिक प्रमुख, मुन्ही/मुनहियान सहायक।
  • तेज घुड़सवार डाक प्रणाली विकसित।
राजत्व का सिद्धांत

स्रोत: बरनी, अमीर खुसरो (तारीख-ए-अलाई)

तीन आधार:

  1. निरंकुशता:
    • सत्ता का स्रोत शक्ति, न ईश्वर न जनता।
    • “सिंहासन निज बाहुबल से प्राप्त व सुरक्षित।”
    • K.S. Lal: फ्रांस के लुई XIV जैसा निरंकुश शासक।
  2. धर्म-राजनीति पृथक्करण:
    • उलेमा व खलीफा का प्रभाव अस्वीकार।
    • “मैं नहीं जानता कि शरीयत अनुमति देती है या नहीं।” — अलाउद्दीन
  3. साम्राज्यवाद:
    • विश्व-विजय योजना, उपाधि — “सिकंदर-ए-सानी”
अंत व उत्तराधिकारी
  • रोग: जलोदर (1315 ई.), मृत्यु 6 जनवरी 1316 ई.
  • मलिक काफूर का प्रभाव – अलप खाँ की हत्या।
  • उत्तराधिकारी: शिहाबुद्दीन उमर (कठपुतली सुल्तान)।

 परवर्ती खिलजी सुल्तान

सुल्तानघटनाएँ / विशेषताएँ
शिहाबुद्दीन उमरमलिक काफूर संरक्षक; शीघ्र काफूर की हत्या (मुबारक शाह द्वारा)।
कुतुबुद्दीन मुबारक शाहशिहाबुद्दीन को अंधा कर सत्ता हथियाई; विलासी व उन्मुक्त।
विद्रोहगुजरात (हैदर-वजीरक), देवगिरी का विलय (हरपाल देव को जिंदा जलाया), यकलखी खाँ विद्रोह, असदुद्दीन षड्यंत्र।
औलिया विवादनिजामुद्दीन औलिया से विरोध, इनाम पर सिर काटने का आदेश; पर स्वयं मारा गया (1330)।
नासीरुद्दीन खुसरो शाह“बरादू क्रांति” के नेता; हिन्दू समर्थन, गौहत्या निषेध; गाजी तुगलक ने हराया व मारा।
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