भारत के उप-राष्ट्रपति : पद, शक्तियाँ और कार्य भारतीय संविधान के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पद है, जो देश की राजनीतिक व्यवस्था और शासन को सुदृढ़ बनाने में अहम भूमिका निभाता है। उप-राष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं और संसदीय कार्यवाही के संचालन में सक्रिय योगदान देते हैं। राजनीतिक व्यवस्था और शासन के अध्ययन में उप-राष्ट्रपति के पद, उनकी शक्तियों तथा कार्यों को समझना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
- भारत में उप-राष्ट्रपति का पद देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद होता है।
- आधिकारिक क्रम (Order of Precedence) में यह राष्ट्रपति के बाद आता है।
- यह पद अमेरिका के उप-राष्ट्रपति की तर्ज पर गठित किया गया है।
- भारत की राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा जारी वरीयता सूची (Order of Precedence) में उपराष्ट्रपति का स्थान राष्ट्रपति के बाद दूसरा उच्चतम है।
- भारत में उपराष्ट्रपति अधिकतम 6 माह तक कार्यवाह राष्ट्रपति रह सकता है, जब तक नया राष्ट्रपति निर्वाचित न हो जाए।
- उप-राष्ट्रपति से संबंधित अनुच्छेद भारतीय संविधान के अनुच्छेद 63 से लेकर अनुच्छेद 71 तक आते हैं।
उप-राष्ट्रपति कार्य और जिम्मेदारियाँ
उप-राष्ट्रपति से संबंधित अनुच्छेद
| अनुच्छेद | विषयवस्तु |
| 63 | भारत के उप-राष्ट्रपति |
| 64 | उप-राष्ट्रपति का राज्यों की परिषद का पदेन सभापति होना |
| 65 | उप-राष्ट्रपति का आकस्मिक रिक्तियों अथवा राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में राष्ट्रपति के कर्तव्यों का निर्वहन |
| 66 | उप-राष्ट्रपति का चुनाव |
| 67 | उप-राष्ट्रपति का कार्यकाल |
| 68 | उप-राष्ट्रपति कार्यालय की रिक्ति की पूर्ति के लिए चुनाव का समय निर्धारण तथा आकस्मिक रिक्ति की पूर्ति के लिए चुने गए व्यक्ति का कार्यकाल |
| 69 | उप-राष्ट्रपति द्वारा शपथ ग्रहण |
| 70 | अन्य आकस्मिकताओं में राष्ट्रपति के कर्तव्यों का निर्वहन |
| 71 | उप-राष्ट्रपति के चुनाव संबंधी अथवा उससे जुड़े मामले |
अनुच्छेद 63: भारत का उपराष्ट्रपति
- भारत में एक उपराष्ट्रपति का पद होगा।
- यह संवैधानिक पद है, जिसकी व्यवस्था भारतीय संविधान में की गई है।
अनुच्छेद 64: उपराष्ट्रपति का राज्यसभा का पदेन सभापति होना
- उपराष्ट्रपति स्वतः राज्यसभा का सभापति होता है (ex-officio Chairman)।
- वह कोई अन्य लाभ का पद धारण नहीं कर सकता।
- राष्ट्रपति के रूप में कार्य करने की स्थिति में जब उपराष्ट्रपति अनुच्छेद 65 के अंतर्गत राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है या उसके कृत्यों का निर्वहन करता है:
- उस दौरान वह राज्यसभा के सभापति का कार्य नहीं करेगा।
- उसे राज्यसभा सभापति का वेतन/भत्ता नहीं मिलेगा (अनुच्छेद 97 के अंतर्गत)।
- इस संदर्भ में उसकी शक्तियां व कार्य लोकसभा अध्यक्ष की भांति ही होती है।
अनुच्छेद 65: राष्ट्रपति के पद में रिक्ति या अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति का कार्यभार संभालना
- राष्ट्रपति पद रिक्त होने पर: यदि राष्ट्रपति की मृत्यु, पदत्याग, हटाए जाने या अन्य कारण से पद रिक्त हो जाता है, तो उपराष्ट्रपति उस समय तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा, जब तक नया निर्वाचित राष्ट्रपति पद ग्रहण न कर ले।
- राष्ट्रपति की अनुपस्थिति या असमर्थता की स्थिति में: यदि राष्ट्रपति बीमार, अनुपस्थित या अन्य कारण से अपने कर्तव्यों को निभाने में असमर्थ है, तो उपराष्ट्रपति उस समय तक राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन करेगा, जब तक राष्ट्रपति पुनः कार्यभार नहीं संभाल लेता।
- अधिकार और सुविधाएं: उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते समय राष्ट्रपति की सभी शक्तियां और विशेषाधिकार प्राप्त होंगे।
- वह उन उपलब्धियों, भत्तों और विशेषाधिकारों का हकदार होगा, जो संसद द्वारा विधि द्वारा निर्धारित किए जाएं,
- और जब तक ऐसा उपबंध न हो, तब तक दूसरी अनुसूची में वर्णित सुविधाएं उसे मिलेंगी।
- उपराष्ट्रपति जब किसी अवधि में कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है तो वह राज्यसभा के सभापति को प्राप्त होने वाले वेतन व भत्ते नहीं पाता है, अपितु उसे राष्ट्रपति को प्राप्त होने वाले वेतन व भत्ते आदि मिलते हैं ।
- यदि उप-राष्ट्रपति का पद भी रिक्त हो तब भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) कार्यवाहक राष्ट्रपति का कार्य करेगा।
- यदि मुख्य न्यायाधीश का पद भी रिक्त हो तब उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश कार्यवाहक राष्ट्रपति बनेगा।
- कार्यवाहक राष्ट्रपति को राष्ट्रपति की सभी शक्तियाँ और उन्मुक्तियाँ तथा संसद द्वारा निर्धारित सभी सुविधाएँ, भत्ते और विशेषाधिकार भी प्रदान किए जाते हैं।
उपराष्ट्रपति का वेतन व भत्ते
- संविधान में उपराष्ट्रपति के वेतन व भत्तों के लिए कोई अलग अनुच्छेद नहीं है।
- उन्हें वेतन, भत्ते व पेंशन राज्यसभा के सभापति के रूप में मिलते हैं।
- वर्तमान में –
- उपराष्ट्रपति का वेतन: ₹4 लाख प्रतिमाह।
- राष्ट्रपति का वेतन: ₹5 लाख प्रतिमाह।
- उपराष्ट्रपति के वेतन, भत्ते और पेंशन भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) पर भारित व्यय होते हैं।
अनुच्छेद 66: उपराष्ट्रपति का निर्वाचन
- निर्वाचन की प्रक्रिया:
- उपराष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में संसद के निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्य होते हैं।
- उपराष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में राज्य विधानसभाओं के सदस्य शामिल नहीं होते हैं।
- चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के साथ एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से होता है और मतदान गुप्त मतदान द्वारा होता है।
- मूल संविधान में उप-राष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक द्वारा किया जाना था।
- यह प्रक्रिया जटिल एवं बोझिल थी, इसलिए 11वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1961 के द्वारा इसे समाप्त कर दिया गया।
- वर्तमान में संविधान में कहीं भी “संयुक्त अधिवेशन” शब्द का प्रयोग नहीं है।
- संसद/विधानमंडल की सदस्यता पर प्रभाव:
- उपराष्ट्रपति संसद या किसी राज्य विधानसभा के किसी भी सदन का सदस्य नहीं हो सकता।
- यदि कोई सदस्य उपराष्ट्रपति चुना जाता है, तो उसके पद ग्रहण की तारीख से उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त मानी जाएगी।
- योग्यता (Eligibility): कोई व्यक्ति उपराष्ट्रपति बनने के लिए तभी पात्र होगा जब वह—
- भारत का नागरिक हो,
- 35 वर्ष या अधिक आयु का हो,
- राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए अर्हित हो।
- अपात्रता (Disqualifications): यदि कोई व्यक्ति भारत सरकार, राज्य सरकार या उनके अधीनस्थ स्थानीय अथवा अन्य प्राधिकारी के अधीन लाभ का पद धारण करता है, तो वह उपराष्ट्रपति नहीं बन सकता।
- उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव के लिए उम्मीदवार के नामांकन पर कम से कम 20 मतदाताओं द्वारा प्रस्तावक के रूप में और 20 मतदाताओं द्वारा समर्थक के रूप में हस्ताक्षर किए जाने चाहिए।
- प्रत्येक उम्मीदवार को भारतीय रिजर्व बैंक में ₹15,000 की जमानत राशि जमा करनी होती है।
अनुच्छेद 67: उपराष्ट्रपति की पदावधि
- कार्यकाल: उपराष्ट्रपति पद ग्रहण की तारीख से 5 वर्ष तक पद पर बना रहेगा।
- उपराष्ट्रपति की पदावधि समाप्त होने से पहले ही नए उपराष्ट्रपति का चुनाव संपन्न कर लिया जाएगा।
- यदि किसी कारण (मृत्यु, त्यागपत्र, महाभियोग आदि) से उपराष्ट्रपति का पद रिक्त हो जाता है, तो रिक्ति की तारीख से 6 माह के भीतर चुनाव कराया जाएगा।
- निर्वाचित व्यक्ति, अपने कार्यभार ग्रहण की तिथि से 5 वर्ष की अवधि तक उपराष्ट्रपति पद पर रहेगा
- पद से त्यागपत्र (Resignation): उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति को संबोधित लिखित पत्र द्वारा पद से त्यागपत्र दे सकता है।
- पद से हटाया जाना (Removal):
- उपराष्ट्रपति को हटाने के लिए औपचारिक महाभियोग की आवश्यकता नहीं है।
- राज्यसभा द्वारा संकल्प पारित कर तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत द्वारा हटाया जा सकता है
- इस पर लोकसभा की सहमति आवश्यक होती है।
- ऐसा संकल्प प्रस्तावित करने से पहले कम से कम 14 दिन पूर्व सूचना देना अनिवार्य है।
- ध्यान देने योग्य बात यह है कि संविधान में उपराष्ट्रपति को हटाने हेतु कोई आधार नहीं है।
- प्रस्ताव के समय उपराष्ट्रपति राज्यसभा की अध्यक्षता नहीं करते।
- उत्तराधिकारी के आने तक पद पर बने रहना: कार्यकाल समाप्त होने पर भी उपराष्ट्रपति तब तक पद पर बना रहता है, जब तक नया उपराष्ट्रपति पद ग्रहण नहीं कर लेता।
अनुच्छेद 68: उपराष्ट्रपति के पद में रिक्ति को भरने की प्रक्रिया
- उपराष्ट्रपति का कार्यकाल समाप्त होने वाली रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही पूरा कर लिया जाएगा।
- यदि उपराष्ट्रपति की मृत्यु, त्यागपत्र, हटाए जाने या अन्य कारणों से पद रिक्त हो जाए, तो उस रिक्ति को भरने के लिए यथाशीघ्र निर्वाचन कराया जाएगा।
- आकस्मिक रिक्ति होने पर तत्काल चुनाव का प्रावधान है, परंतु 6 माह की समयसीमा नहीं।
- आकस्मिक रिक्ति के कारण निर्वाचित व्यक्ति को, पद ग्रहण की तिथि से 5 वर्षों तक, अनुच्छेद 67 के प्रावधानों के अधीन रहकर, उपराष्ट्रपति के रूप में पद पर बने रहने का अधिकार होगा।
- संविधान में कार्यवाहक उपराष्ट्रपति का कोई प्रावधान नहीं है।
अनुच्छेद 69: उपराष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान
- उपराष्ट्रपति को पद ग्रहण करने से पहले, राष्ट्रपति या राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किसी प्रतिनिधि के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान लेना अनिवार्य है।
- शपथ का प्रारूप: उपराष्ट्रपति निम्नलिखित वाक्य बोलकर शपथ या प्रतिज्ञान करेगा:
- “मैं, अमुक, ईश्वर की शपथ लेता हूँ (या सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूँ) कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूँगा तथा जिस पद को मैं ग्रहण करने वाला हूँ उसके कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक निर्वहन करूँगा।”
अनुच्छेद 70: अन्य आकस्मिकताओं में राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन
- यदि कोई ऐसी आकस्मिक स्थिति उत्पन्न होती है जिसका इस अध्याय में उल्लेख नहीं किया गया है, तो संसद यह तय कर सकती है कि राष्ट्रपति के कर्तव्यों का निर्वहन कौन और कैसे करेगा।
- संसद को यह अधिकार है कि वह ऐसे मामलों में आवश्यक विधिक प्रावधान करे जिन्हें वह उपयुक्त समझे।
अनुच्छेद 71: राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित विवाद
- राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से उत्पन्न सभी शंकाओं और विवादों का अंतिम निर्णय सिर्फ उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) द्वारा किया जाएगा। उसका निर्णय अंतिम होता है।
- यदि उच्चतम न्यायालय किसी व्यक्ति का चुनाव शून्य घोषित करता है, तो उसके द्वारा पहले किए गए कार्य वैध माने जाएंगे, भले ही वह अब वैध निर्वाचित न हो।
- संसद को यह अधिकार है कि वह राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित विषयों को विधि द्वारा नियंत्रित कर सके।
- राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव को निर्वाचक मंडल में किसी रिक्ति के आधार पर प्रश्नगत नहीं किया जा सकता।
उप-राष्ट्रपति की शक्तियाँ एवं कार्य
- दोहरे कार्य – उप-राष्ट्रपति के दो प्रमुख कार्य होते हैं:
- राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में कार्य
- उप-राष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है।
- इस भूमिका में उसकी शक्तियाँ एवं कार्य लोकसभा अध्यक्ष के समान होते हैं।
- वह राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन, अनुशासन बनाए रखना, प्रश्नकाल एवं बहसों का नियंत्रण आदि करता है।
- इस भूमिका में वह अमेरिका के उप-राष्ट्रपति के समान कार्य करता है, जो वहाँ के उच्च सदन (सीनेट) का सभापति होता है।
- कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य
- जब राष्ट्रपति का पद त्यागपत्र, निष्कासन, मृत्यु या अन्य कारणों से रिक्त हो जाता है, तब उप-राष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति बनता है।
- वह अधिकतम 6 महीने तक कार्यवाहक राष्ट्रपति रह सकता है।
- इस अवधि में नए राष्ट्रपति का निर्वाचन आवश्यक होता है।
- यदि राष्ट्रपति अस्थायी रूप से अनुपस्थित, बीमार, या अपने कर्तव्यों के निष्पादन में असमर्थ हो, तो उप-राष्ट्रपति अस्थायी रूप से उनके कर्तव्यों का निर्वहन करता है।
- राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में कार्य
- जब उप-राष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है, तब वह राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्य नहीं करता। उस समय उसके स्थान पर राज्यसभा का संचालन उप-सभापति करता है।
- 1969 – राष्ट्रपति डॉ. ज़ाकिर हुसैन की मृत्यु पर उपराष्ट्रपति वी. वी. गिरी कार्यवाह राष्ट्रपति बने।
- वी. वी. गिरी के उपराष्ट्रपति पद से त्यागपत्र के बाद सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एम. हिदायतुल्ला कार्यवाह राष्ट्रपति बने।
- 1977 – राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद की मृत्यु पर उपराष्ट्रपति बी. डी. जत्ती कार्यवाह राष्ट्रपति बने।
उपराष्ट्रपतियों का निर्वाचन (1952-2022)
| क्र.स. | निर्वाचन वर्ष | विजयी उम्मीदवार | विशेष तथ्य / टिप्पणी |
| 1 | 1952 | डॉ. एस. राधाकृष्णन | निर्विरोध निर्वाचित उप-राष्ट्रपति पद पर दो बार निर्वाचित हुए। डॉ. एस. राधाकृष्णन ने जून 1960 में राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की सोवियत संघ यात्रा के दौरान राष्ट्रपति का कार्यभार संभाला। जुलाई 1961 में जब डॉ. राजेन्द्र प्रसाद अस्वस्थ थे, उस समय भी डॉ. राधाकृष्णन ने राष्ट्रपति का कार्य किया। |
| 2 | 1957 | डॉ. एस. राधाकृष्णन | |
| 3 | 1962 | डॉ. जाकिर हुसैन | बाद में राष्ट्रपति बने |
| 4 | 1967 | वी.वी. गिरि | कार्यकाल पूर्ण होने से पहले त्यागपत्रराष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन के निधन होने पर कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। |
| 5 | 1969 | जी.एस. पाठक | पहले उपराष्ट्रपति जो राष्ट्रपति नहीं बने |
| 6 | 1974 | बी.डी. जत्ती | राष्ट्रपति फकरुद्दीन अली अहमद के निधन होने पर कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया।सबसे अधिक समय तक कार्यवाहक राष्ट्रपति रहे |
| 7 | 1979 | एम. हिदायतुल्ला | निर्विरोध निर्वाचितपूर्व CJI; कार्यवाहक राष्ट्रपति भी रहे; तीनों पद (CJI, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति) पर कार्य करने वाले एकमात्र व्यक्ति |
| 8 | 1984 | आर. वेंकटरमण | राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनने पर त्यागपत्र; बाद में राष्ट्रपति बने |
| 9 | 1987 | डॉ. शंकर दयाल शर्मा | निर्विरोध निर्वाचितराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनने पर त्यागपत्र; कांग्रेस के एकमात्र राष्ट्रीय अध्यक्ष जो उपराष्ट्रपति बने; बाद में राष्ट्रपति बने |
| 10 | 1992 | के. आर. नारायणन | बाद में राष्ट्रपति बने |
| 11 | 1997 | कृष्णकांत | पहले उप-राष्ट्रपति थे जिनका पद पर रहते हुए निधन हुआ। |
| 12 | 2002 | बी.एस. शेखावत | राष्ट्रपति चुनाव लड़ने हेतु कार्यकाल पूर्ण होने से पूर्व त्यागपत्र दिया |
| 13 | 2007 | मो. हामिद अंसारी | डॉ. एस. राधाकृष्णन उप-राष्ट्रपति पद पर दो बार निर्वाचित हुए।भारतीय विदेश सेवा से जुड़े; |
| 14 | 2012 | मो. हामिद अंसारी | |
| 15 | 2017 | वेंकैया नायडू | भाजपा के एकमात्र राष्ट्रीय अध्यक्ष जो उपराष्ट्रपति बने |
| 16 | 2022 | जगदीप धनकड़ | वकील; पूर्व पश्चिम बंगाल के राज्यपाल; 2022 में मार्गरेट अल्वा को हराया |
उप-राष्ट्रपति से संबंधित तथ्य
निर्विरोध निर्वाचित उप-राष्ट्रपति
- डॉ. एस. राधाकृष्णन (2 बार)
- एम. हिदायतुल्ला
- डॉ. शंकर दयाल शर्मा
पद त्याग कर राष्ट्रपति पद हेतु उम्मीदवार बनने वाले:
- वी. वी. गिरि
- आर. वेंकटरमण
- शंकरदयाल शर्मा
- भैरों सिंह शेखावत
उपराष्ट्रपति जो बाद में राष्ट्रपति बने :
- अब तक 6 उपराष्ट्रपति बाद में भारत के राष्ट्रपति बने हैं।
- डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
- उपराष्ट्रपति : 1952–1962
- राष्ट्रपति : 1962–1967
- डॉ. ज़ाकिर हुसैन
- उपराष्ट्रपति : 1962–1967
- राष्ट्रपति : 1967–1969
- वी. वी. गिरी
- उपराष्ट्रपति : 1967–1969
- राष्ट्रपति : 1969–1974
- आर. वेंकटरमन
- उपराष्ट्रपति : 1984–1987
- राष्ट्रपति : 1987–1992
- डॉ. शंकर दयाल शर्मा
- उपराष्ट्रपति : 1987–1992
- राष्ट्रपति : 1992–1997
- के. आर. नारायणन
- उपराष्ट्रपति : 1992–1997
- राष्ट्रपति : 1997–2002
राष्ट्रपति नहीं बन सके
- गोपाल स्वरुप पाठक
- बी.डी. जत्ती
- मोहम्मद हिदायतुल्ला
- कृष्णकांत
- भैरोंसिंह शेखावत
- हामिद अंसारी
- वेंकैया नायडु
मोहम्मद हिदायतुल्ला
- भारत के मुख्य न्यायाधीश, कार्यवाहक राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति – तीनों पदों पर कार्य करने वाले एकमात्र व्यक्ति।
शंकरदयाल शर्मा
- कांग्रेस के एकमात्र राष्ट्रीय अध्यक्ष जो उपराष्ट्रपति बने।
नीलम संजीव रेड्डी
- राष्ट्रपति का निर्विरोध निर्वाचन अब तक केवल एक बार हुआ है।
जगदीप धनखड़
- जन्म: 1951, झुंझुनूं, राजस्थान
- पृष्ठभूमि: वकील, राजस्थान उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन, जयपुर के पूर्व अध्यक्ष
- पूर्व पद:
- राज्यपाल, पश्चिम बंगाल (2019-2022)
- लोकसभा सांसद, झुंझुनूं (1989–1991), जनता दल
- संसदीय कार्य राज्य मंत्री, चंद्रशेखर मंत्रिमंडल (1990-91)
- विधानसभा सदस्य, किशनगढ़, कांग्रेस (1993–1998)
- 2022 में उपराष्ट्रपति चुनाव में मार्गरेट अल्वा को हराकर निर्वाचित हुए।
उपराष्ट्रपतियों का निर्वाचन :
| विजयी उम्मीद्धार | मुख्य प्रतिद्धंदी |
| डॉ. एस. राधाकृष्णन | निर्विरोध |
| वी.वी. गिरि | प्रो. हबीब |
| बी.डी. जत्ती | एन.ई. होरो |
| एम. हिदायतुल्ला | निर्विरोध |
| डॉ. शंकर दयाल शर्मा | जसवंत सिंह |
| मो. हामिद अंसारी | गोपालकृष्ण गांधी |
| वेंकैया नायडू | गोपालकृष्ण गांधी |
| जगदीप धनखड़ (528) | मार्गरेट अल्वा (182) |
