नीति आयोग भारत सरकार का एक प्रमुख नीति-निर्माण संस्थान है जिसकी स्थापना 1 जनवरी 2015 को की गई। यह देश के समग्र विकास, सहकारी संघवाद और दीर्घकालीन रणनीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राजनीतिक व्यवस्था और शासन विषय के अंतर्गत नीति आयोग की संरचना, उद्देश्य और कार्यों का अध्ययन विशेष महत्व रखता है।
नीति आयोग : संरचना, कार्य एवं उद्देश्य

- आधिकारिक घोषणा: 15 अगस्त, 2014 को मोदी सरकार द्वारा योजना आयोग को भंग कर नीति आयोग की स्थापना की घोषणा।
- स्थापना: 1 जनवरी, 2015
- नीति आयोग की प्रथम बैठक 8 फरवरी 2015 को आयोजित की गई थी। इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी।
- विरासत: नीति आयोग योजना आयोग का उत्तराधिकारी है, लेकिन यह न तो संवैधानिक और न ही वैधानिक निकाय है। इसे एक गैर-संवैधानिक निकाय के रूप में स्थापित किया गया है।
- नीति आयोग योजना आयोग की ही तरह भारत सरकार के एक कार्यकालकीय संकल्प’ (केन्द्रीय मंत्रिमंडल) द्वारा सृजित निकाय है।
- कार्य: नीति आयोग भारत सरकार के नीति-निर्माण का प्रमुख प्रबुद्ध मंडल (थिंक टैंक) है, जो रणनीतिक और दीर्घकालिक नीतियों के निर्माण में योगदान देता है।
- ‘सहकारी संघवाद’ की भावना को प्रतिध्वनित करते हुए अधिकतम शासन, न्यूनतम सरकार की परिकल्पना की परिकल्पना के लिये ‘बॉटम-अप’ दृष्टिकोण पर ज़ोर दिया गया था।
- इसके पास नीतियांँ लागू करने का अधिकार नहीं है।
- इसके पास निधि आवंटित करने का अधिकार नहीं है, जो वित्त मंत्री में निहित है।
- नीति आयोग की सम्पूर्ण गतिविधियों को चार मुख्य भागों में विभाजित किया जा सकता है:
- नीति एवं कार्यक्रम रूपरेखा
- सहकारी संघवाद
- निगरानी और मूल्यांकन
- थिंक टैंक, और ज्ञान एवं नवाचार केंद्र
- नीति आयोग के दो मुख हब
- टीम इंडिया हब– राज्य और केंद्र के बीच इंटरफेस का काम करता है।
- ज्ञान और नवोन्मेष (Knowledge & Innovation) हब– नीति आयोग थिंक टैंक की भाँति कार्य करता है।
नीति आयोग का गठन व संरचना
अध्यक्ष (Chairperson):
- भारत के प्रधानमंत्री
शासी परिषद (Governing Council):
- सभी राज्यों के मुख्यमंत्री
- केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री (जहाँ विधानसभा है, जैसे दिल्ली और पुडुचेरी)
- अन्य केंद्र शासित प्रदेशों के उप-राज्यपाल
क्षेत्रीय परिषदें (Regional Councils):
- एक से अधिक राज्यों/क्षेत्रों से जुड़े विशेष मुद्दों को सुलझाने हेतु गठित
- इनका संयोजन प्रधानमंत्री करते हैं
- सभापति – नीति आयोग के अध्यक्ष या उनके द्वारा नामित व्यक्ति
विशिष्ट आमंत्रित (Special Invitees):
- प्रधानमंत्री द्वारा नामित विशेषज्ञ, विद्वान, प्रैक्टिशनर
- संबंधित क्षेत्र में विशेष ज्ञान/अनुभव रखने वाले
पूर्णकालिक सांगठनिक ढाँचा (Organisational Structure):
- उपाध्यक्ष (Vice Chairman):
- प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त, कैबिनेट मंत्री के समकक्ष
- वह कैबिनेट की बैठकों में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल होता हैं।
- वह आयोग का वास्तविक कार्यकारी प्रमुख होता हैं।
- पूर्णकालिक सदस्य (Full-time Members):
- राज्य मंत्री के समकक्ष
- अंशकालिक सदस्य (Part-time Members):
- अधिकतम 2, प्रमुख विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों आदि से (पदेन सदस्य)
- पदेन सदस्य (Ex-officio Members):
- प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्रिपरिषद के अधिकतम 4 सदस्य
- मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी (CEO):
- प्रधानमंत्री द्वारा निश्चित कार्यकाल के लिए नियुक्त, सचिव स्तर के समकक्ष
- सचिवालय (Secretariat):
- आवश्यकता अनुसार
नीति आयोग का पुनर्गठन (16 जुलाई 2024)
प्रधानमंत्री ने 18.09.2021 और 15.11.2022 की अधिसूचनाओं के क्रम में नीति आयोग (राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्था) के संशोधित संघटन को अनुमोदित किया। नया ढाँचा इस प्रकार है –
- अध्यक्ष (Chairperson):
- प्रधानमंत्री
- उपाध्यक्ष (Vice-Chairperson):
- श्री सुमन के. बेरी
- 1 मई 2022 से नीति आयोग के उपाध्यक्ष का पदभार संभाला।
- श्री सुमन के. बेरी
- पूर्णकालिक सदस्य (Full-time Members):
- श्री वी. के. सारस्वत
- प्रो. रमेश चन्द
- डॉ. वी. के. पॉल
- श्री अरविंद विरमानी
- श्री राजीव गौबा – 25.03.2025 से
- पदेन सदस्य (Ex-officio Members):
- श्री राजनाथ सिंह (रक्षा मंत्री)
- श्री अमित शाह (गृह एवं सहकारिता मंत्री)
- श्री शिवराज सिंह चौहान (कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री; और ग्रामीण विकास मंत्री)
- श्रीमती निर्मला सीतारमण (वित्त मंत्री एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री)
- विशेष आमंत्रित (Special Invitees):
- श्री नितिन जयराम गडकरी (सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री)
- श्री जगत प्रकाश नड्डा (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री; और रसायन एवं उर्वरक मंत्री)
- श्री एच. डी. कुमारस्वामी (भारी उद्योग मंत्री; और इस्पात मंत्री)
- श्री जीतन राम मांझी (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री)
- श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह (पंचायती राज मंत्री; और मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री)
- डॉ. वीरेंद्र कुमार (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री)
- श्री किंजरापु राममोहन नायडू (नागर विमानन मंत्री)
- श्री जुएल ओराम (जनजातीय कार्य मंत्री)
- श्रीमती अन्नपूर्णा देवी (महिला एवं बाल विकास मंत्री)
- श्री चिराग पासवान (खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री)
- राव इन्द्रजीत सिंह (सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राज्य मंत्री – स्वतंत्र प्रभार; योजना मंत्रालय के राज्य मंत्री – स्वतंत्र प्रभार; और संस्कृति मंत्रालय में राज्य मंत्री)
नीति आयोग के उपाध्यक्ष
| क्र. सं. | नाम | कार्यकाल | तथ्य |
| 1 | श्री अरविंद पनगढीया | 5 जनवरी 2015 से 31 अगस्त 2017 | प्रथम उपाध्यक्ष |
| 2 | राजीव कुमार | 1 सितंबर 2017 से 30 अप्रैल 2022 | |
| 3 | सुमन के. बेरी | 1 मई 2022 से वर्तमान तक | वर्तमान उपाध्यक्ष |
नीति आयोग (NITI Aayog) के CEO
| क्र. सं. | नाम | कार्यकाल | तथ्य |
| 1 | अमिताभ कांत | 17 फरवरी 2016 से 30 जून 2022 | प्रथम |
| 2 | परमेश्वरन अय्यर | जुलाई 2022 से फरवरी 2023 | श्री अय्यर, जो नीति आयोग के सीईओ के रूप में कार्यरत थे, को तीन साल के कार्यकाल के लिए वाशिंगटन डीसी, यूएसए स्थित विश्व बैंक मुख्यालय का कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया गया है। |
| 3 | बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम | मार्च 2023 से वर्तमान | वर्तमान |
योजना राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार))
- राव इंद्रजीत सिंह

बैठकें
- अब तक 10 हो चुकी है ।
- दसवीं बैठक (24 मई 2025)
- अध्यक्षता : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
- उपस्थिति : 24 राज्यों के मुख्यमंत्री व 7 केंद्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल
- विषय : “विकसित राज्य से विकसित भारत @2047”
- शुरुआत : पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों की स्मृति में मौन
- पीएम के मुख्य बिंदु :
- विकसित भारत हर भारतीय की आकांक्षा है, केवल किसी दल का एजेंडा नहीं।
- भारत शीर्ष 5 अर्थव्यवस्थाओं में, 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर।
- मैन्युफैक्चरिंग मिशन का लाभ उठाएँ, विदेशी निवेश का स्वागत करें।
- शिक्षा व कौशल विकास (AI, सेमीकंडक्टर, 3D प्रिंटिंग आदि) पर जोर; ₹60,000 करोड़ की स्किलिंग योजना।
- साइबर सुरक्षा, हाइड्रोजन और ग्रीन एनर्जी को अवसर बताया।
नीति आयोग के सिद्धांत एवं कार्यप्रणाली
नीति आयोग प्रभावी शासन के 7 सिद्धांतों पर कार्य करता है, जिनमें शामिल हैं:
- जन-समर्थक एजेंडा – ऐसा नीति कार्यक्रम जो व्यक्ति एवं समाज, दोनों की आकांक्षाओं को पूरा करे।
- सक्रिय प्रत्युत्तरशीलता – नागरिकों की आवश्यकताओं को समझकर त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया देना।
- सक्रिय नागरिक संलग्नता – नीति निर्माण एवं कार्यान्वयन में जनभागीदारी सुनिश्चित करना।
- स्त्री सशक्तीकरण – सभी पक्षों में महिलाओं को समान अधिकार और अवसर प्रदान करना।
- समावेशिता – अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों को विकास प्रक्रिया में समुचित भागीदारी देना।
- युवाओं को समान अवसर – युवा वर्ग को समुचित अवसर देकर उन्हें राष्ट्रनिर्माण में भागीदार बनाना।
- तकनीक आधारित पारदर्शिता – शासन व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुक्रियाशीलता लाने के लिए तकनीक का उपयोग।
विशेषज्ञता प्राप्त शाखाएँ
- शोध शाखा: विषय विशेषज्ञों के साथ आतंरिक और क्षेत्रीय सुविज्ञता का निर्माण।
- परामर्शिता शाखा: केंद्रीय और राज्य सरकारों के लिए विशेषज्ञ पैनल और समस्या समाधानकर्ता।
- टीम इंडिया शाखा: राज्य और मंत्रालयों के प्रतिनिधियों के साथ राष्ट्रीय सहयोग और संवाद।
नीति आयोग उद्देश्य
- राष्ट्रीय विकास की साझा दृष्टि तैयार करना – प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों के सहयोग से राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, क्षेत्रों और रणनीतियों पर सहमति बनाना।
- सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना – राज्यों के साथ निरंतर सहयोग सुनिश्चित करना, यह मानते हुए कि मजबूत राज्य ही मजबूत भारत बना सकते हैं।
- ग्राम स्तर से योजनाओं की शुरुआत – योजना निर्माण की प्रक्रिया को नीचे से ऊपर की ओर ले जाना और विश्वसनीय योजनाओं का विकास करना।
- राष्ट्रीय सुरक्षा का ध्यान – नीति निर्धारण में राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को बनाए रखना।
- वंचित वर्गों पर विशेष ध्यान – समाज के उन वर्गों को प्राथमिकता देना जो विकास से वंचित रहे हैं।
- दीर्घकालिक रणनीति निर्माण एवं अनुश्रवण – नीतियों की प्रगति पर निगरानी रखना और आवश्यकतानुसार उनमें सुधार करना।
- थिंक टैंक और संस्थानों से सहयोग – देश-विदेश के शोध संस्थानों और विशेषज्ञों के साथ सहभागिता को बढ़ावा देना।
- ज्ञान और नवाचार आधारित प्रणाली बनाना – विशेषज्ञों और नवाचारकर्ताओं के सहयोग से उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करना।
- अंतर-विभागीय समन्वय मंच – विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना।
- संसाधन केंद्र के रूप में कार्य करना – सुशासन और स्थायी विकास के लिए अनुसंधान आधारित ज्ञान का संकलन करना।
- कार्यक्रमों की निगरानी और समीक्षा – योजनाओं के सफल कार्यान्वयन के लिए आवश्यक संसाधनों की पहचान और निगरानी करना।
- प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण – कार्यान्वयन में तकनीक और मानव संसाधनों की दक्षता पर ध्यान देना।
- विकास एजेंडा को लागू करना – उपर्युक्त लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक सभी गतिविधियों को अंजाम देना।
नीति आयोग जिन प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है:
- समर्थकारी प्रशासन – सरकार एक मार्गदर्शक और सक्षम साझेदार के रूप में कार्य करे।
- कृषि एवं किसान कल्याण – खाद्य सुरक्षा से आगे बढ़कर किसानों की आय और कृषि उत्पादों के विविधीकरण पर जोर देना।
- वैश्विक भागीदारी में भारत की सक्रिय भूमिका – अंतरराष्ट्रीय विमर्श में भारत की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना।
- मध्यम वर्ग की भागीदारी – आर्थिक रूप से जागरूक मध्यवर्ग की पूर्ण क्षमता का दोहन करना।
- बौद्धिक सम्पदा और उद्यमिता का उपयोग – नवाचार और वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करना।
- प्रवासी भारतीयों की भूमिका – उनके आर्थिक एवं कूटनीतिक सामर्थ्य को जोड़ना।
- सुरक्षित नगरीकरण – शहरीकरण को अवसर मानते हुए आधुनिक, सुरक्षित एवं तकनीक आधारित शहरों का निर्माण।
- प्रौद्योगिकी आधारित सुशासन – पारदर्शिता बढ़ाना और भ्रष्टाचार को कम करना।
भारत को सक्षम बनाने की दिशा में लक्ष्य
- युवाओं की शक्ति का उपयोग – शिक्षा, कौशल विकास, लैंगिक समानता और रोजगार के माध्यम से युवाओं की क्षमताओं का दोहन।
- निर्धनता उन्मूलन – हर व्यक्ति को सम्मानपूर्ण और आत्मनिर्भर जीवन जीने का अवसर देना।
- सामाजिक समानता – जाति, लिंग और आर्थिक असमानता के आधार पर बनी विषमता को दूर करना।
- गांवों को विकास प्रक्रिया से जोड़ना – ग्रामीण भारत को योजनाओं का भागीदार बनाना।
- छोटे व्यवसायों को समर्थन – रोजगार सृजन के स्रोत 50 मिलियन छोटे व्यापारियों को नीतिगत मदद देना।
- पर्यावरण और पारिस्थितिकी की सुरक्षा – प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करना।
नीति आयोग के मार्गदर्शक सिद्धांत
- उपरोक्त कार्यों के सम्पादन के लिए नीति आयोग निम्नलिखित सिद्धांतों द्वारा निदेशित होता है:
- अंत्योदय – पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों पर आधारित, सबसे अंतिम पंक्ति के गरीब, वंचित और हाशिये पर खड़े व्यक्ति के कल्याण को प्राथमिकता देना।
- समावेशिता – लिंग, धर्म, जाति, क्षेत्र या वर्ग पर आधारित सभी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करते हुए समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाना।
- ग्राम-केंद्रित विकास – ग्रामीण क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और हमारी सांस्कृतिक, नैतिक एवं आत्मिक ऊर्जा का उपयोग करना।
- जनसंख्यात्मक लाभांश – भारत की जनसंख्या को परिसंपत्ति मानते हुए शिक्षा, कौशल विकास और उत्पादक रोजगार के माध्यम से उनकी क्षमताओं का पूर्ण उपयोग करना।
- जन-सहभागिता – विकास को जन-आधारित बनाना ताकि नागरिक सक्रिय भागीदारी के साथ सुशासन में भूमिका निभाएं।
- अभिशासन (Good Governance) – पारदर्शी, उत्तरदायी, सक्रिय, और परिणाम-उन्मुख शासन प्रणाली को बढ़ावा देना; “लागत से परिणाम” की ओर उन्मुखता।
- धारणीयता (Sustainability) – पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए सतत विकास को अपनाना, भारतीय परंपरा के अनुरूप प्रकृति के प्रति सम्मान के साथ।
नीति आयोग की स्थायी समितियाँ (Standing Committees of NITI Aayog)
- नीति आयोग की स्थायी समितियाँ वे समितियाँ होती हैं जो आयोग के भीतर नियमित रूप से विशिष्ट विषयों पर नीतिगत दिशा-निर्देश देने के लिए गठित होती हैं।
- शासन परिषद (Governing Council)
- अध्यक्ष: भारत के प्रधानमंत्री
- सदस्य: सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल
- कार्य: राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श, केंद्र और राज्यों में सहयोग बढ़ाना।
- मुख्य कार्यकारी समिति (Executive Council)
- अध्यक्ष: नीति आयोग के CEO
- सदस्य: आयोग के सभी पूर्णकालिक सदस्य, विशेषज्ञ, और वरिष्ठ अधिकारी
- कार्य: आयोग की योजनाओं को लागू करने की रणनीतियों पर कार्य करना।
- प्रमुख विषयगत क्षेत्र समितियाँ
- यह समितियाँ स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, ऊर्जा, सतत विकास, और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित होती हैं।
- सदस्य: विषय विशेषज्ञ, संबंधित मंत्रालयों के अधिकारी, नीति आयोग के सदस्य।
- SDG (Sustainable Development Goals) समिति
- उद्देश्य: भारत के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की निगरानी करना।
- नीति आयोग SDGs के लिए नोडल एजेंसी है।
- शासन परिषद (Governing Council)
विशेष कार्य बल (Special Task Forces / Mission Teams)
- नीति आयोग समय-समय पर विशिष्ट मुद्दों पर कार्य करने हेतु विशेष कार्य बलों का गठन करता है। ये अस्थायी प्रकृति के होते हैं और विशेष मिशन/समस्या पर कार्य कर समाधान प्रस्तुत करते हैं।
- प्रमुख कार्य बलों के उदाहरण: कार्य बल / मिशन व उनके उद्देश्य
- Agriculture Reforms Task Force – कृषि बाजार सुधार, कृषि आय दोगुनी करने के उपाय
- Task Force on Employment Generation – रोजगार सृजन पर नीति सुझाव देना
- Task Force on Elimination of Poverty – गरीबी उन्मूलन की रणनीतियाँ तैयार करना
- Mission on Transforming India’s Gold Market – स्वर्ण नीति में सुधार हेतु सुझाव देना
- Task Force on Artificial Intelligence – भारत में एआई का उपयोग बढ़ाने पर सिफारिशें
- National Nutrition Mission (POSHAN Abhiyaan) – कुपोषण कम करने के लिए नीति आयोग की अगुवाई
- अन्य उदाहरण:
- Aspirational Districts Programme Team
- उद्देश्य: पिछड़े जिलों का समावेशी विकास
- कार्यान्वयन: जिलों की रैंकिंग, रियल टाइम डेटा मॉनिटरिंग
- Atal Innovation Mission Team
- नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों और स्टार्टअप्स को सहयोग
- Aspirational Districts Programme Team
विशेषताएँ और भूमिका
| स्थायी समितियाँ | विशेष कार्य बल |
| दीर्घकालिक और संस्थागत | अल्पकालिक और समस्या-विशेष |
| नियमित बैठकें | परियोजना समाप्ति तक सीमित |
| नीति निर्माण और निगरानी | समाधान प्रदान करना और क्रियान्वयन सुझाव |
निष्कर्ष
- नीति आयोग की स्थायी समितियाँ और विशेष कार्य बल, दोनों ही भारत की नीतियों को सशक्त बनाने और जमीनी समस्याओं का समाधान निकालने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- यह प्रणाली नीति आयोग को लचीला (flexible), सहभागी (participatory), और नवाचारोन्मुख (innovation-driven) बनाती है।
नीति आयोग की प्रतिबद्धताएँ
- सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना
- नागरिक सहभागिता को प्रेरित करना
- विकास के अवसरों तक समान पहुँच सुनिश्चित करना
- लचीला और सहभागी अभिशासन अपनाना
- तकनीकी नवाचार के माध्यम से नीति और कार्यक्रमों को बेहतर बनाना
योजना आयोग का आंतरिक संगठन (कार्मिक ढाँचा)
दोहरा पदानुक्रम
- योजना आयोग का ढाँचा दो प्रमुख भागों में बाँटा गया था:
- प्रशासनिक पदक्रम
- तकनीकी पदक्रम
1. प्रशासनिक पदक्रम
- शीर्ष पर सचिव होता था।
- सहयोगी पद: संयुक्त सचिव, उप सचिव, अवर सचिव तथा अन्य लिपिकीय कर्मचारी।
- चयन: भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय राजस्व सेवा (IRS), केंद्रीय सचिवालय सेवा, एवं अन्य गैर-तकनीकी सेवाओं से।
2. तकनीकी पदक्रम
- शीर्ष पर सलाहकार (Adviser) होता था।
- सहयोगी पद: चीफ, निदेशक, संयुक्त निदेशक तथा अन्य तकनीकी कर्मचारी।
- चयन: भारतीय आर्थिक सेवा (IES), भारतीय सांख्यिकीय सेवा (ISS), केंद्रीय अभियंत्रण सेवा, आदि से।
- सलाहकार का दर्जा: भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव/संयुक्त सचिव के समकक्ष।
योजना आयोग का आलोचनात्मक मूल्यांकन
- शक्ति और प्रभाव
- आरंभ में यह केवल सलाहकार संस्था थी, लेकिन बाद में यह निर्देशक संस्था बन गया।
- आलोचकों ने इसे कहा:
- ‘सुपर कैबिनेट’
- ‘इकोनॉमिक कैबिनेट’
- ‘फिफ्थ व्हील ऑफ दि कोच’
- प्रमुख आलोचनाएं
- प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC) – योजना आयोग को ‘पैरेलल कैबिनेट’ बताया जो संविधान के अनुसार मंत्रिपरिषद के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करता है।
- डी.आर. गाडगिल – आयोग नीति-निर्माण में घुसपैठ करता है और गैर-विकासात्मक क्षेत्रों में भी हस्तक्षेप करता है।
- अशोक चंदा – योजना आयोग की भूमिका ‘आर्थिक कैबिनेट’ जैसी हो गई थी, जो मंत्रिमंडलीय ढांचे के विपरीत है।
- के. संथानम – संघीय ढाँचे को कमजोर कर एकात्मक प्रणाली जैसा माहौल बनाता है।
- पी.वी. राजामन्नार – योजना आयोग और वित्त आयोग के बीच कार्यों में टकराव की ओर संकेत।
- पी.पी. अग्रवाल – आयोग नीति-निर्माण में अत्यधिक हस्तक्षेप करता है।
- प्राक्कलन समिति – आयोग की कैबिनेट मंत्रियों से सम्बद्धता की समीक्षा की मांग की।
राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC)
- स्थापना और स्थिति
- अगस्त 1952 में भारत सरकार के कार्यकारी आदेश द्वारा।
- कोई संवैधानिक या वैधानिक निकाय नहीं।
- आखिरी बैठक: 27 दिसंबर 2012 (12वीं योजना की स्वीकृति)।
- 1 जनवरी 2016 को इसे समाप्त करने का समाचार, लेकिन आधिकारिक निर्णय नहीं।
- संरचना
- अध्यक्ष: भारत के प्रधानमंत्री
- सदस्य:
- केंद्र सरकार के सभी कैबिनेट मंत्री
- सभी राज्यों के मुख्यमंत्री
- सभी संघ शासित प्रदेशों के प्रशासक
- योजना आयोग (नीति आयोग) के सदस्य
- सचिव: योजना आयोग/नीति आयोग का सचिव
- उद्देश्य
- राज्यों का सहयोग प्राप्त करना
- राष्ट्रीय संसाधनों को मजबूती देना
- समान आर्थिक नीतियों को बढ़ावा देना
- संतुलित और तेज विकास सुनिश्चित करना
- मुख्य कार्य
- राष्ट्रीय योजना के दिशा-निर्देश देना
- योजना आयोग द्वारा तैयार योजनाओं पर विचार करना
- योजना के लिए आवश्यक संसाधनों का मूल्यांकन
- सामाजिक-आर्थिक नीतियों पर विचार-विमर्श
- योजना की समीक्षा करना
- लक्ष्य प्राप्ति हेतु उपायों की अनुशंसा
- प्रक्रिया
- योजना आयोग → केंद्रीय कैबिनेट → NDC → संसद → स्वीकृति के बाद सरकारी गजट में प्रकाशन
- आलोचनात्मक मूल्यांकन
- सकारात्मक पक्ष – केन्द्र-राज्य समन्वय का मंच, राष्ट्रीय नीतियों में राज्य की भागीदारी।
- नकारात्मक पक्ष –निर्णय पहले से लिए जाते थे, परिषद केवल ‘रबड़ स्टैम्प’ बनकर रह गई थी।
- प्रमुख टिप्पणियाँ
- एम. ब्रेचर – एनडीसी ने योजना आयोग को शोध संस्था में सीमित कर दिया।
- एच.एम. पटेल – यह केवल सलाहकार संस्था नहीं, बल्कि नीति निर्माण की संस्था है।
- के. संथानम – एनडीसी एक ‘सुपर कैबिनेट’ की तरह काम करता है।
- ए.पी. जैन – एनडीसी संवैधानिक कार्यक्षेत्र में अतिक्रमण करता है, जबकि यह सिर्फ विचार-विमर्श का मंच होना चाहिए।
नीति आयोग की महत्वपूर्ण पहलें
आकांक्षी जिला कार्यक्रम (Aspirational Districts Programme – ADP) :
- शुभारंभ : जनवरी 2018 में प्रधानमंत्री द्वारा।
- उद्देश्य : देश के 112 सबसे पिछड़े जिलों का त्वरित व प्रभावी विकास।
- मुख्य विशेषताएँ
- 3C मॉडल
- Convergence – केंद्र व राज्य योजनाओं का एकीकरण।
- Collaboration – केंद्र, राज्य व ज़िला प्रशासन का सहयोग।
- Competition – जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा (मासिक रैंकिंग द्वारा)।
- 3C मॉडल
- राज्यों की भूमिका – कार्यक्रम के मुख्य चालक राज्य सरकारें हैं।
- फोकस क्षेत्र (5 विषय)
- स्वास्थ्य एवं पोषण
- शिक्षा
- कृषि एवं जल संसाधन
- वित्तीय समावेशन एवं कौशल विकास
- आधारभूत संरचना
- फोकस क्षेत्र (5 विषय)
- मापन प्रणाली
- 49 प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (KPIs) पर आधारित।
- डेल्टा रैंकिंग – प्रत्येक महीने प्रगति की तुलना।
- प्रगति व रैंकिंग Champions of Change Dashboard पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध।
- दृष्टिकोण
- प्रत्येक जिला पहले अपने राज्य के सर्वश्रेष्ठ जिले की बराबरी करे।
- इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष जिलों की श्रेणी में आने की आकांक्षा।
- प्रतिस्पर्धात्मक व सहकारी संघवाद की भावना को प्रोत्साहन।
- साझेदारी
- नीति आयोग संबंधित मंत्रालयों व विकास सहयोगियों के साथ मिलकर प्रगति को तेज करता है।
- जिलों को श्रेष्ठ प्रथाओं को अपनाने व दोहराने के लिए प्रेरित किया जाता है।
- लक्ष्य
- सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का स्थानीयकरण।
- नागरिकों का जीवनस्तर ऊँचा करना।
- समावेशी विकास – “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास”।
SDGs –
- नोडल संस्था – NITI Aayog देश में SDGs (2030 Agenda) लागू करने की प्रमुख संस्था।
- संघवाद की भावना – सहकारी व प्रतिस्पर्धी संघवाद को बढ़ावा।
- निगरानी उपकरण:
- SDG India Index – राज्यों/UTs का प्रदर्शन व रैंकिंग।
- North-Eastern Region District SDG Index – पूर्वोत्तर राज्यों के जिलों की प्रगति का आकलन।
- National Multidimensional Poverty Index (MPI) – गरीबी के बहुआयामी पहलुओं का राज्य, UT व जिला स्तर पर डेटा।
- SDG India Index Report –
- उपलब्धियों पर बेंचमार्किंग।
- राज्यों/UTs की प्रगति व विकासात्मक अंतराल को उजागर करती है।
- प्रतिस्पर्धा व सहयोग को प्रोत्साहन।
- MPI का महत्व –
- SDG Target 1.2 की निगरानी।
- लक्ष्य: गरीबी में रहने वाली आबादी का अनुपात कम से कम आधा करना।
- नीतियों व योजनाओं को लक्षित और प्रभावी बनाने में सहायक।
E-AMRIT –
- Accelerated e-Mobility Revolution for India’s Transportation
- उद्देश्य – इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) पर सभी जानकारी का वन-स्टॉप पोर्टल।
- जानकारी – EV अपनाने से जुड़ी भ्रांतियाँ, खरीद, निवेश अवसर, नीतियाँ, सब्सिडी आदि।
- विकास – नीति आयोग द्वारा UK सरकार के साथ Knowledge Exchange Programme के तहत।
- समझौता – UK-India Joint Roadmap 2030 का हिस्सा।
- भूमिका –
- उपभोक्ताओं को EV के लाभों पर जागरूक करना।
- सरकार की EV संबंधी पहलों को पूरक बनाना।
- भारत की EV पहलें –
- FAME योजना (Faster Adoption and Manufacturing of Hybrid & Electric Vehicles)।
- PLI योजना (Production Linked Incentive) → EV अपनाने का पारिस्थितिकी तंत्र तैयार।
- भविष्य की योजना – पोर्टल को और इंटरएक्टिव व यूज़र-फ्रेंडली बनाना।
Shoonya अभियान – शून्य प्रदूषण गतिशीलता
- शुरुआत – नीति आयोग द्वारा।
- अर्थ – Shoonya संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ “शून्य” → नए अवसरों की शुरुआत।
- उद्देश्य –
- शहरी डिलीवरी और राइड-हेलिंग सेवाओं में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) का उपयोग बढ़ाना।
- परिवहन क्षेत्र में तेज़ी से शून्य-उत्सर्जन वाहनों की ओर परिवर्तन।
- दृष्टिकोण –
- स्वच्छ, टिकाऊ और प्रदूषण-मुक्त परिवहन प्रणाली को बढ़ावा देना।
- जलवायु परिवर्तन से निपटने और शहरों में वायु प्रदूषण घटाने का प्रयास।
NITI for States :
- शुरुआत – नीति आयोग (NITI Aayog) द्वारा शुरू किया गया एक एकीकृत प्लेटफॉर्म है।
- उद्देश्य –
- राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को ज्ञान साझा करने, सीखने और प्रेरित होने का अवसर देना।
- “विकसित भारत” (Viksit Bharat) की दिशा में राज्यों की भागीदारी और सहयोग सुनिश्चित करना।
- विशेषताएँ –
- राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर उपलब्ध नवीनतम जानकारी तक पहुँच प्रदान करता है।
- राज्यों की नीतियों, योजनाओं और नवाचारों को साझा करने का मंच है।
- सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) का आदान-प्रदान कर राज्यों को नीति निर्माण और क्रियान्वयन में मदद करता है।
- महत्व –
- राज्यों के बीच सहयोगी संघवाद (Cooperative Federalism) को बढ़ावा देता है।
- विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग।
- राज्यों को एक-दूसरे के अनुभवों और सफलताओं से सीखने का अवसर।
- लक्ष्य –
- राज्यों की सशक्त भागीदारी से भारत को विकसित राष्ट्र (Viksit Bharat @2047) बनाने की दिशा में आगे बढ़ाना।
Mission LiFE
- पृष्ठभूमि
- मिशन LiFE (Lifestyle for Environment) की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने UNFCCC COP26 (ग्लासगो, 2021) में की।
- उद्देश्य: जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए व्यक्तिगत जीवनशैली और व्यवहार को केंद्र में लाना।
- नोडल एजेंसी –
- भारत सरकार ने नीति आयोग को Mission LiFE का मुख्य कार्यान्वयन निकाय (Nodal/Implementing Agency) नियुक्त किया।
- P3 (Pro-Planet People) समुदाय का निर्माण –
- नीति आयोग इस वैश्विक नेटवर्क को बढ़ावा देता है ताकि लोग पर्यावरण-मित्र जीवनशैली अपनाएँ।
- नीति आयोग Mission LiFE को “विकसित भारत @2047” के विजन से जोड़ता है।
Project SATH-E (2017)
- शुरुआत
- 2017 में नीति आयोग (NITI Aayog) ने शुरू किया।
- उद्देश्य: स्कूली शिक्षा क्षेत्र के लिए 3 “Role Model States” तैयार करना।
- चयनित राज्य: झारखंड, ओडिशा और मध्यप्रदेश।
अटल नवाचार मिशन (AIM)
- स्थापना: जनवरी 2016 में नीति आयोग के तहत
- उद्देश्य: भारत में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना।
- प्रमुख पहलें:
- अटल टिंकरिंग लैब्स (ATL)
- अटल इनक्यूबेशन सेंटर्स (AICs)
- वर्तमान स्थिति:
- 2024 तक भारत में 10,000 से अधिक ATL स्थापित किए गए हैं।
- 72 AICs संचालित हो रहे हैं, जिनमें 3,500 से अधिक स्टार्टअप्स को समर्थन प्राप्त है।
- 1,000 से अधिक स्टार्टअप्स की महिला संस्थापक हैं।
- प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग ने दीपक बागला को अटल नवाचार मिशन (AIM) का नया मिशन निदेशक नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 21 जुलाई 2025 को की गई थी।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना:
- प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 6 वर्ष की अवधि के लिए प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को स्वीकृति प्रदान की है।
- यह योजना 2025-26 से 100 जिलों में लागू की जाएगी।
- नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम से प्रेरित यह योजना कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों पर केंद्रित पहली विशिष्ट योजना है।
- योजना का क्रियान्वयन 11 विभागों की 36 मौजूदा योजनाओं, राज्यों की अन्य योजनाओं और निजी क्षेत्र की स्थानीय भागीदारी में किया जाएगा।
