राष्ट्रीय महिला आयोग

राष्ट्रीय महिला आयोग भारत में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, सशक्तिकरण और उनके हितों की सुरक्षा के लिए स्थापित एक महत्वपूर्ण वैधानिक संस्था है, जिसकी स्थापना 1992 में की गई। यह आयोग महिलाओं से संबंधित शिकायतों की सुनवाई, नीतिगत सुझाव और जागरूकता फैलाने का कार्य करता है। राजनीतिक व्यवस्था और शासन विषय के अंतर्गत राष्ट्रीय महिला आयोग का अध्ययन महिलाओं की स्थिति और अधिकारों की समझ के लिए अत्यंत आवश्यक है।

राष्ट्रीय महिला आयोग
  • स्थापना
    • राष्ट्रीय महिला आयोग की स्थापना 31 जनवरी 1992 को की गई।
    • यह एक वैधानिक/सांविधिक निकाय (Statutory Body) है।
  • विधिक आधार
    • आयोग का गठन राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 के अंतर्गत किया गया। [भारत सरकार का अधिनियम संख्या 20, 1990]
    • अधिनियम में कुल 5 अध्याय, 17 धाराएँ हैं।
  • मुख्य उद्देश्य
    • महिलाओं के लिए उपलब्ध संवैधानिक एवं कानूनी सुरक्षा उपायों की समीक्षा करना, उनके हित में सुधारात्मक विधायी उपायों की सिफारिश करना, महिलाओं से संबंधित शिकायतों के निवारण में सहायता करना तथा महिलाओं को प्रभावित करने वाले सभी नीतिगत मामलों पर सरकार को परामर्श देना।

पृष्ठभूमि:- 

  • 1971 में भारत में महिलाओं की स्थिति पर समिति (CSWI – Committee on the Status of Women in India) का गठन किया गया, जिसका उद्देश्य महिलाओं की सामाजिक स्थिति को प्रभावित करने वाले संवैधानिक, कानूनी एवं प्रशासनिक प्रावधानों की समीक्षा करना था।
  • CSWI ने महिलाओं की शिकायतों के निवारण तथा सामाजिक-आर्थिक विकास हेतु एक स्थायी राष्ट्रीय महिला आयोग की स्थापना की सिफारिश की।
  • राष्ट्रीय महिला भावी योजना (1988–2000) सहित विभिन्न समितियों, आयोगों एवं योजनाओं ने महिलाओं के लिए एक सर्वोच्च राष्ट्रीय निकाय के गठन का सुझाव दिया।
  • 1990 के दशक में आयोजित विश्व महिला सम्मेलन के बाद महिलाओं के लिए एक राष्ट्रीय आयोग की आवश्यकता स्पष्ट हुई, जिसमें भारत ने ऐसे आयोग की स्थापना की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
  • वर्ष 1990 में केंद्र सरकार ने आयोग की संरचना, कार्य एवं शक्तियों के संबंध में NGOs, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा विशेषज्ञों से परामर्श किया।
  • मई 1990 में राष्ट्रीय महिला आयोग से संबंधित विधेयक लोकसभा में प्रस्तुत किया गया।
  • जुलाई 1990 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा इस विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया।
  • अगस्त 1990 में विधेयक में संशोधन कर आयोग को सिविल न्यायालय की शक्तियाँ प्रदान की गईं।
  • 30 अगस्त 1990 को विधेयक को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई।
  • अंततः 31 जनवरी 1992 को प्रथम राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन किया गया।

राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990(5 अध्याय, 17 धाराएँ)

अध्यायनामधाराविषय / क्या प्रावधान है
अध्याय–1 प्रारंभिक1संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारंभ
2परिभाषाएँ
अध्याय–2 राष्ट्रीय महिला आयोग3राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन
4अध्यक्ष व सदस्यों की पदावधि एवं सेवा शर्तें
5आयोग के अधिकारी एवं कर्मचारी
6वेतन एवं भत्तों का भुगतान
7रिक्तियों से आयोग के कार्य अमान्य नहीं
8आयोग की समितियाँ
9आयोग की प्रक्रिया
अध्याय–3 आयोग के कृत्य10आयोग के कार्य एवं शक्तियाँ
अध्याय–4 वित्त, लेखे एवं लेखापरीक्षा11केन्द्र सरकार से अनुदान
12लेखे एवं लेखापरीक्षा (CAG)
13वार्षिक रिपोर्ट
14संसद में रिपोर्ट का प्रस्तुतीकरण
अध्याय–5 प्रकीर्ण15लोक सेवक का दर्जा
16आयोग से परामर्श
17नियम बनाने की शक्ति

राष्ट्रीय महिला आयोग : संरचना(धारा 3)

पदसंख्यानियुक्ति प्राधिकारीयोग्यता / विशेष प्रावधान
अध्यक्ष1केन्द्र सरकार द्वारा नामितमहिलाओं के हितों के लिए प्रतिबद्ध व्यक्ति
सदस्य5केन्द्र सरकार द्वारा नामितकानून/विधान, ट्रेड यूनियनवाद, महिलाओं की औद्योगिक क्षमता का प्रबंधन, महिला स्वैच्छिक संगठन (महिला कार्यकर्ता सहित), प्रशासन, आर्थिक विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा या सामाजिक कल्याण में अनुभव
अनिवार्य प्रावधान – कम से कम 1 सदस्य अनुसूचित जाति (SC) से तथा 1 सदस्य अनुसूचित जनजाति (ST) से
सदस्य-सचिव1केन्द्र सरकार द्वारा नामित(i) प्रबंधन, संगठनात्मक संरचना या समाजशास्त्रीय आंदोलन का विशेषज्ञ या (ii) संघ की सिविल सेवा/अखिल भारतीय सेवा का सदस्य अथवा संघ के अधीन सिविल पद पर समुचित अनुभव के साथ कार्यरत
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) का गठन राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 की धारा 3 के तहत केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है। इसमें एक अध्यक्ष, 5 सदस्य और एक सदस्य-सचिव शामिल होते हैं, जिन्हें केंद्र सरकार नामित करती है।

राष्ट्रीय महिला आयोग के कार्य एवं शक्तियाँ – (धारा-10)

  1. आयोग निम्नलिखित कार्य करेगा—
    • संविधान और अन्य कानूनों के अंतर्गत महिलाओं को प्रदत्त सुरक्षा उपायों से संबंधित सभी मामलों की जांच एवं परीक्षण।
    • केन्द्रीय सरकार को प्रतिवर्ष तथा आवश्यकतानुसार अन्य समयों पर सुरक्षा उपायों के कार्यान्वयन पर रिपोर्ट प्रस्तुत करना।
    • रिपोर्टों में संघ या राज्य द्वारा महिलाओं की स्थिति सुधारने हेतु प्रभावी कार्यान्वयन संबंधी सिफारिशें करना।
    • संविधान के मौजूदा प्रावधानों एवं महिलाओं को प्रभावित करने वाले कानूनों की समीक्षा कर संशोधन हेतु सुधारात्मक विधायी उपाय सुझाना।
    • संविधान एवं महिलाओं से संबंधित कानूनों के उल्लंघन के मामलों को उपयुक्त प्राधिकारियों के समक्ष उठाना।
    • शिकायतों पर विचार करना तथा स्वतः संज्ञान लेना, विशेष रूप से—
      • महिलाओं के अधिकारों से वंचित करना,
      • महिलाओं की सुरक्षा, समानता और विकास हेतु बने कानूनों का कार्यान्वयन न होना,
      • महिलाओं के कल्याण एवं राहत हेतु बनाए गए नीतिगत निर्णयों, दिशा-निर्देशों या आदेशों का अनुपालन न होना।
    • महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव और अत्याचारों से उत्पन्न विशिष्ट समस्याओं पर विशेष अध्ययन या जांच कर बाधाओं की पहचान और रणनीतियों का सुझाव।
    • सभी क्षेत्रों में महिलाओं का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु प्रचारात्मक एवं शैक्षिक अनुसंधान करना तथा उनकी उन्नति में बाधक कारकों की पहचान।
    • महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक विकास की योजना प्रक्रिया में भाग लेना और सलाह देना।
    • संघ और राज्यों में महिलाओं के विकास की प्रगति का मूल्यांकन करना।
    • जेल, रिमांड होम, महिला संस्थानों या अन्य हिरासत स्थलों का निरीक्षण कर आवश्यक होने पर उपचारात्मक कार्रवाई हेतु प्राधिकारियों से मामला उठाना।
    • महिलाओं के बड़े समूह को प्रभावित करने वाले मुद्दों से संबंधित मुकदमों हेतु धन उपलब्ध कराना।
    • महिलाओं से संबंधित मामलों एवं कठिनाइयों पर सरकार को समय-समय पर रिपोर्ट देना।
    • कोई अन्य मामला जो केन्द्रीय सरकार द्वारा संदर्भित किया जाए। 
  2. केन्द्रीय सरकार आयोग की रिपोर्टों को संसद के दोनों सदनों के समक्ष प्रस्तुत करेगी तथा सिफारिशों पर की गई या प्रस्तावित कार्रवाई अथवा अस्वीकार के कारणों का विवरण देगी। 
  3. यदि रिपोर्ट राज्य से संबंधित हो तो उसकी प्रति राज्य सरकार को भेजी जाएगी, जिसे राज्य विधानमंडल के समक्ष रखा जाएगा।
  4. आयोग को जांच के दौरान सिविल न्यायालय की सभी शक्तियाँ प्राप्त होंगी, जिनमें—  
    • किसी भी व्यक्ति को बुलाना और शपथ पर परीक्षा,
    • दस्तावेज़ों की खोज और उत्पादन,
    • हलफनामों पर साक्ष्य,
    • सार्वजनिक अभिलेख प्राप्त करना,
    • गवाहों व दस्तावेज़ों की जांच हेतु कमीशन जारी करना,
    • कोई अन्य विषय जो निर्धारित किया जा सकता है।

राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा प्रकाशित पुस्तकों की सूची

क्रम संख्यापुस्तक का नाम
1Jagriti – Chronical of Women’s Realities, Rights, and Rise (Apr 2025 – Vol. 1)
2कर्मयोगिनी वीरांगना – पुण्यलोक अहिल्यादेवी होलकर
3संविधान निर्माण की 15 नायिकाएं
4नया दौर
5पंचायत की जननायिकाएँ
6Power of POSH – Empowering Women in the Workplace
7Naya Daur – The Legal Empowerment of Muslim Women
8नवजीवन – भारत में एसिड अटैक सर्वाइवर के अधिकार, कानून और आशाएँ
9Tere Mere Sapne
10POWER OF POSH
11भारतीय न्याय संहिता 2023 की महत्वपूर्ण धाराएँ
12Tere Mere Sapne – Pre-Marital Literacy Kit for Facilitators
13तेरे मेरे सपने – विवाह पूर्व संवाद केंद्र
14365 Days of Commitment
15SHE Servers – कदम कदम बढ़ाए जा
16सफरनामा – सेवा और अनुभव की कहानियाँ
17संकल्पों का संग्रह
18JAGRITI – Awakening of Women’s Power

राष्ट्रीय महिला आयोग के अध्यक्ष

क्र.सं.नामकार्यकाल (From)कार्यकाल (To)
1.सुश्री जयंती पटनायक03.02.199230.01.1995
2.डॉ. वी. मोहिनी गिरि21.07.199520.07.1998
3.सुश्री विभा पार्थसारथी18.01.199917.01.2002
4.डॉ. पूर्णिमा आडवाणी25.01.200224.01.2005
5.डॉ. गिरिजा व्यास16.02.200515.02.2008
6.सुश्री ममता शर्मा09.04.200802.08.2011
7.सुश्री ललिता कुमारमंगलम01.08.201429.09.2017
8.सुश्री रेखा शर्मा (कार्यवाहक अध्यक्ष)29.09.201728.09.2018
9.सुश्री रेखा शर्मा07.08.201806.08.2021
10.श्रीमती विजया के. रहाटकर22.10.2024वर्तमान में कार्यरत

महत्वपूर्ण तथ्य :- 

  • सुश्री जयंती पटनायक –  प्रथम अध्यक्ष
  • डॉ. गिरिजा व्यास –  पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता
  • सुश्री रेखा शर्मा – वर्तमान में राज्यसभा सांसद भी हैं।
  • श्रीमती विजया के. रहाटकर – 
    • राष्ट्रीय महिला आयोग की 9वीं अध्यक्ष 
    • विजया किशोर रहाटकर इससे पूर्व महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष (2016–2021) रह चुकी हैं।
    • इसके अतिरिक्त, उन्होंने औरंगाबाद नगर निगम की मेयर (2007–2010) के रूप में भी कार्य किया है।
    • अध्यक्ष के रूप में उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण एवं संरक्षण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पहलों पर कार्य किया, जिनमें—
      • “सक्षमा” : एसिड अटैक सर्वाइवर्स के पुनर्वास और सशक्तिकरण हेतु
      • “प्रज्वला” : स्वयं सहायता समूहों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने हेतु
      • “सुहिता” : महिलाओं के लिए 24×7 हेल्पलाइन सेवा प्रमुख हैं।

राष्ट्रीय महिला आयोग : सदस्यों की सूची

क्र.सं.नामकार्यकाल (From)कार्यकाल (To)
1.सुश्री मोनिका दास03.02.199230.01.1995
2.सुश्री बनोज सेनापति03.02.199230.01.1995
3.सुश्री गंगा पोटाई19.02.1992 / 22.11.199421.10.1993 / 26.03.1996
4.डॉ. पद्मा सेठ05.02.1992 / 18.01.199604.02.1995 / 17.03.1997
5.सुश्री सुभाषिनी अली06.04.199331.08.1993
6.सुश्री मनोरमा सिंह24.07.199530.03.1996
7.सुश्री कैलाशपति24.07.199520.01.1998
8.सुश्री कोकिला व्यास27.07.199523.01.1998
9.डॉ. इंदिरा बसवराज08.10.199607.10.1999
10.सुश्री सुकेशी ओराम01.11.199631.10.1999
11.डॉ. सईद हमीद02.06.199701.06.2000
12.सुश्री विजय दक्ष10.12.199809.12.2001
13.डॉ. पूर्णिमा आडवाणी28.12.199827.12.2001
14.सुश्री के. संथा रेड्डी09.02.200008.02.2003
15.सुश्री अनुसुइया उइके10.02.2000 / 17.02.200409.02.2003 / 20.05.2005
16.सुश्री नफीसा हुसैन19.09.2000 / 03.11.200318.09.2003 / 20.05.2005
17.सुश्री बेबी रानी मौर्य20.02.200219.02.2005
18.सु. सुधा मलैया19.04.200218.04.2005
19.सुश्री निर्मला सीतारमन03.11.200320.05.2005
20.सुश्री यास्मीन अबरार24.05.2005 / 15.07.200823.05.2008 / 14.07.2011
21.सुश्री सुशीला त्रिया25.05.200516.03.2006
22.सुश्री मालिनी भट्टाचार्य26.05.200511.05.2008
23.सुश्री नीवा कोंवर27.05.2005 / 15.07.200826.05.2008 / 07.06.2010
24.सुश्री निर्मला वेंकटेश15.07.2005 / 24.09.200814.07.2008 / 27.02.2009
25.सुश्री मंजू स्नेहलता हेम्ब्रूम30.06.200629.06.2009
26.सुश्री वानसुक सिएम26.09.2008 / 15.03.201225.09.2011 / 04.04.2013
27.सुश्री चारु वली खन्ना02.08.201101.08.2014
28.सुश्री हेमलता खेरिया15.03.201214.03.2015
29.सुश्री निर्मला सामंत प्रभावलकर19.03.201223.12.2014
30.सुश्री शमीना शफीक11.04.201210.04.2015
31.श्रीमती लालडिंगलियानी सेलो19.09.201316.09.2016
32.श्रीमती रेखा शर्मा06.08.201505.08.2018
33.सुश्री सुषमा साहू17.08.201516.08.2018
34.श्री आलोक रावत20.10.201516.08.2018
35.श्रीमती कमलेश गौतम19.11.201818.11.2021
36.श्रीमती सोसो शाइज़ा19.11.201820.09.2020
37.श्रीमती चंद्रमुखी देवी26.11.201825.11.2021
38.श्रीमती श्यामला एस. कुंदर07.03.201906.03.2022
39.डॉ. राजुलबेन एल. देसाई08.03.201907.03.2022
40.सुश्री खुशबू सुंदर28.02.202328.06.2024
41.सुश्री डेलिना खोंगडुप01.03.2023अभी तक
42.श्रीमती ममता कुमारी10.03.2023अभी तक
43.डॉ. अर्चना मजूमदार21.10.202431.12.2025

राष्ट्रीय महिला आयोग : सदस्य-सचिवों की सूची

क्र.सं.नामकार्यकाल (From)कार्यकाल (To)
1.सुश्री उमा पिल्लई31.01.199229.05.1992
2.सुश्री एनी प्रसाद30.05.1992 / 01.03.199501.09.1994 / 31.12.1995
3.डॉ. इंदिरा मिश्रा02.09.1994 / 01.01.199628.02.1995 / 14.01.1996
4.श्री टी. एन. श्रीवास्तव15.01.199612.06.1996
5.डॉ. एन. एस. अच्युतन04.07.199617.09.1997
6.सुश्री बीनू सेन18.09.199718.09.2000
7.सुश्री रेवा नैयर16.10.200022.10.2002
8.सुश्री सुनीला बसंत31.01.200316.09.2004
9.श्री एन. पी. गुप्ता17.02.200531.08.2007
10.श्री समीरेन्द्र चटर्जी10.09.200725.03.2010
11.सुश्री ज़ोहरा चटर्जी26.03.201019.09.2011
12.सुश्री अनीता अग्निहोत्री17.10.201104.05.2012
13.सुश्री के. रत्ना प्रभा04.03.201324.12.2013
14.डॉ. (सुश्री) नंदिता चटर्जी26.12.201331.01.2015
15.सुश्री प्रीति मदान30.07.201502.01.2017
16.डॉ. सतबीर बेदी23.01.201721.11.2018
17.सुश्री मीनाक्षी गुप्ता27.11.201831.10.2019
18.सुश्री मीता राजीवलोचन08.01.202031.10.2022
19.सुश्री मीनाक्षी नेगी05.04.202318.02.2025
20.श्री सुदीप जैन09.09.2025अभी तक

वर्तमान में

अध्यक्षश्रीमती विजया के. रहाटकर22.10.2024 से 
सदस्यसुश्री डेलिना खोंगडुप01.03.2023 से
श्रीमती ममता कुमारी10.03.2023 से
सदस्य-सचिवश्री सुदीप जैन09.09.2025 से

पदावधि व सेवा शर्तें – (धारा 4)

  • कार्यकाल : 3 वर्ष (या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो)
  • त्यागपत्र : केन्द्र सरकार को लिखित
  • हटाने के आधार:
    • दिवालियापन
    • नैतिक अधमता वाला अपराध
    • विकृतचित्त
    • कर्तव्य से इंकार
    • 3 लगातार बैठकों में अनुपस्थिति
    • पद का दुरुपयोग

नोट :सुनवाई का अवसर अनिवार्य

पुनर्नियुक्ति:- 
  • अध्यक्ष और सदस्य, दोनों ही, पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र होते हैं। ऐसे व्यक्ति जो किसी भी पद पर दो कार्यकाल पूरा कर चुके हैं (सदस्य-सचिव को छोड़कर) वे पुनः नामांकन के लिए अपात्र हैं। अधिनियम किसी सदस्य या अध्यक्ष के कार्यकाल की संख्या के बारे में मौन है।
अध्यक्ष पद में रिक्तिः 
  • अध्यक्ष की मृत्यु या त्यागपत्र की स्थिति में, केन्द्र सरकार एक सदस्य को अध्यक्ष के रूप में कार्य करने के लिए नामित करेगी, जब तक कि रिक्त स्थान को नए नामांकन के माध्यम से नहीं भरा जाता।
लोक सेवक का दर्जा: 
  • राष्ट्रीय महिला आयोग के अध्यक्ष, सदस्य, अधिकारी और कर्मचारी लोक सेवक माने जाते हैं।
वार्षिक रिपोर्ट – (धारा 13)
  • आयोग को प्रत्येक वित्तीय वर्ष के दौरान किए गए कार्यों का एक विस्तृत विवरण (रिपोर्ट) तैयार करना होता है, जिसे केंद्र सरकार को प्रस्तुत किया जाता है।
संसद में प्रस्तुतीकरण – (धारा 14)
  • केंद्र सरकार इस रिपोर्ट (और लेखापरीक्षा रिपोर्ट) को प्राप्त करने के बाद, संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के समक्ष रखती है।
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