राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, संरक्षण और संवर्धन के लिए स्थापित एक महत्वपूर्ण वैधानिक संस्था है, जिसकी स्थापना बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2005 के अंतर्गत की गई। यह आयोग बच्चों से संबंधित शिकायतों की जांच, नीतियों की निगरानी और जागरूकता फैलाने का कार्य करता है। राजनीतिक व्यवस्था और शासन विषय के अंतर्गत राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग का अध्ययन प्रशासनिक व्यवस्था और बाल कल्याण की समझ के लिए आवश्यक माना जाता है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के कार्य एवं अधिकार
स्थापना:
- मार्च 2007
वैधानिक आधार:
- बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005
- अधिनियम संसद द्वारा दिसंबर 2005 में पारित
लागू क्षेत्र:
- जम्मू-कश्मीर को छोड़कर संपूर्ण भारत
परिभाषा:
- 0 से 18 वर्ष तक के व्यक्ति को बच्चा माना गया है।
उद्देश्य एवं दृष्टिकोण
- यह सुनिश्चित करना कि बच्चों से संबंधित सभी कानून, नीतियाँ, योजनाएँ एवं प्रशासनिक तंत्र
- भारतीय संविधान तथा संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार सम्मेलन (UNCRC) के अनुरूप हों।
- आयोग अधिकार-आधारित दृष्टिकोण (Rights Based Approach) को अपनाते हुए कार्य करता है।
- राष्ट्रीय नीतियों और कार्यक्रमों में राज्य, जिला एवं ब्लॉक स्तर की विशिष्ट आवश्यकताओं को सम्मिलित करना।
- समुदायों और परिवारों तक गहरी पहुँच स्थापित कर बच्चों के वास्तविक मुद्दों को समझना।
- क्षेत्रीय एवं जमीनी अनुभवों को नीति निर्माण की प्रक्रिया में शामिल करना।
- मजबूत संस्थागत ढाँचे, विकेंद्रीकरण तथा स्थानीय निकायों की भूमिका को सुदृढ़ करना।
- बच्चों के कल्याण और अधिकारों के प्रति सामुदायिक एवं सामाजिक चेतना का विकास करना।
आयोग के कार्य
- किसी भी कानून द्वारा या उसके तहत प्रदान किए गए सुरक्षा उपायों की जांच और समीक्षा करें और उनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए उपायों की सिफारिश करना।
- केंद्र सरकार को उन सुरक्षा उपायों के संचालन पर वार्षिक आधार पर या किसी अन्य समय पर रिपोर्ट देना, जैसा कि आयोग उचित समझे।
- बाल अधिकारों के उल्लंघन की जाँच करना और यदि आवश्यक हो तो कानूनी कार्रवाई का सुझाव देना।
- संधियों और अन्य अंतर्राष्ट्रीय उपकरणों का अध्ययन करें और मौजूदा नीतियों, कार्यक्रमों की समीक्षा करें और बाल अधिकारों पर सिफारिशें प्रदान करना।
- एनसीपीसीआर बाल अधिकारों के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देता है।
- जनता को बच्चों के अधिकारों के बारे में शिक्षित करें और प्रकाशनों, मीडिया और अन्य उपलब्ध चैनलों के माध्यम से इन अधिकारों की रक्षा के लिए उपयोग किए जा सकने वाले सुरक्षा उपायों के ज्ञान में वृद्धि करना।
- अपने काम में और बच्चों के साथ काम करने वाले अन्य सरकारी विभागों और संगठनों के काम में बच्चों के विचारों को बढ़ावा देना, सम्मान देना और महत्व देना।
- बच्चों के अधिकारों के बारे में जानकारी बनाना और उसका प्रसार करना।
- चाइल्ड डेटा संकलित करना और उसकी जांच करना।
- बच्चों के साथ काम करने वाले अन्य पेशेवरों के लिए स्कूल पाठ्यक्रम, शिक्षक तैयारी कार्यक्रम और प्रशिक्षण में बाल अधिकारों को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करना।
- आतंकवाद, अंतरसमूह संघर्ष, दंगों, प्राकृतिक आपदाओं, घरेलू हिंसा, एचआईवी/एड्स, तस्करी, दुर्व्यवहार, यातना और शोषण के साथ-साथ अश्लील साहित्य और वेश्यावृत्ति के आलोक में बच्चों को उनके अधिकारों का प्रयोग करने से रोकने वाली सभी बाधाओं की जांच करें और उचित सुधारात्मक पैमाने की सिफारिश करना।
- निम्न मामलों में शिकायतों की जांच करना और अपनी तरफ से नोटिस भेजनाः
- i. बाल अधिकारों का उल्लंघन व वंचन।
- ii. बच्चों की सुरक्षा तथा विकास के लिए उपलब्ध कानून का क्रियांवयन न होना।
- iii. बच्चों की कठिनाइयां कम करने वाले तथा बच्चों के कल्याण को सुनिश्चित करने वाले नीति निर्णयों, दिशा-निर्देशों या निर्देशों का अनुपालन न होना, तथा ऐसे बच्चों को राहत प्रदान करना या ऐसे मामले को उचित प्राधिकारों के साथ चर्चा करना।
- कोई अन्य कार्य, जो कि यह बच्चों के अधिकार को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक समझता हो, तथा वे मामले जो उपरोक्त कार्यों के लिए ज्ञातव्य हो।
आयोग की शक्तियां
- किसी मामले की जांच करने के दौरान आयोग के पास कोड ऑफ सिविल प्रॉसीजर 1908 के तहत विशेषकर निम्न मामलों में व्यवहार न्यायालय द्वारा कार्यवाही करने के सभी अधिकार होंगे:
- भारत के किसी भी हिस्से से किसी व्यक्ति को सम्मन जारी करना तथा उसे उपस्थित होने के लिए कहना और शपथ दिलाकर जांच करना।
- किसी दस्तावेज की खोज तथा निर्माण करने की आवश्यकता जताना।
- शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना।
- किसी कोर्ट ऑफ ऑफिस से किसी पब्लिक रिकॉर्ड या उसकी कॉपी की मांग करना।
- गवाहों या दस्तावेजों की जांच के लिए आयोगों के गठन का आदेश देना।
- मामले को उन मजिस्ट्रेट के पास भेजना जिनके पास उनकी सुनवाई के न्यायिक अधिक हों।
- जांच समाप्त होने पर, आयोग के पास निम्न कार्यों की शक्ति होगी:
- जांच के दौरान बाल अधिकारों तथा कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन का मामला साबित होने पर संबंधित सरकार को कार्रवाई या अभियोजन अथवा किसी अन्य कार्यवाई के लिए अनुशंसा करना।
- यदि वह अदालत उचित समझती है तो निर्देशों, आदेशों या आज्ञापत्र के लिए सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय जाना।
- यदि आवश्यक हो तो पीड़ित या उनके परिवार के सदस्यों की ऐसी अंतरिम सहायता की मंजूरी के लिए संबद्ध सरकार या प्राधिकार को अनुशंसा भेजना।
आयोग की संरचना
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पद 156484_2feb38-11> |
संख्या 156484_c67917-e6> |
नियुक्ति 156484_09c0a4-0f> |
योग्यता / क्षेत्र 156484_25178b-7d> | 156484_ef2820-bf> |
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अध्यक्ष 156484_4790e6-75> |
1 156484_6c3162-45> |
केंद्र सरकार द्वारा 156484_b85ea0-c7> |
प्रतिष्ठित व्यक्ति, जिसने बाल कल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया हो 156484_57caa7-9e> |
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सदस्य 156484_c42174-96> |
6 156484_396e21-f8> |
केंद्र सरकार द्वारा 156484_cdf535-2b> |
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अध्यक्षों की सूची
| क्रम | नाम | कार्यकाल |
| 1 | शांता सिन्हा | 2007–2013 |
| 2 | कुशल सिंह | 2013–2014 |
| 3 | वी. एस. ओबेरॉय | 14.10.2014 – 10.05.2015 |
| 4 | नूतन गुहा बिस्वास | 11.05.2015 – 16.09.2015 |
| 5 | स्तुति नारायण कक्कड़ | 2015–2018 |
| 6 | राकेश श्रीवास्तव | 17.09.2018 – 16.10.2018 |
| 7 | प्रियांक कानूनगो | 2018–2024 |
| 8 | तृप्ति गुरहा | 20.01.2025 – 19.11.2025 |
| 9 | वलेटी प्रेमचंद | 03.12.2025 – वर्तमान |
सदस्य सचिवों की सूची
| क्रम | नाम | कार्यकाल |
| 1 | शालिनी प्रसाद | 05.04.2007 – 30.04.2008 |
| 2 | वी. सी. तिवारी | 13.06.2008 – 31.05.2009 |
| 3 | लव वर्मा | 03.11.2009 – 12.07.2012 |
| 4 | डॉ. विवेक जोशी | 13.07.2012 – 21.10.2012 |
| 5 | असीम श्रीवास्तव | 22.10.2012 – 14.06.2016 |
| 6 | रश्मी सक्सेना साहनी | 16.06.2016 – 31.07.2016 |
| 7 | डॉ. प्रीति श्रीवास्तव | 01.08.2016 – 01.01.2017 |
| 8 | गीता नारायण | 02.01.2017 – 03.06.2019 |
| 9 | रूपाली बनर्जी सिंह | 03.06.2019 – 28.02.2025 |
| 10 | डॉ. संजीव शर्मा | 25.04.2025 – वर्तमान |
श्रीमती प्रीति भारद्वाज दलाल सदस्य (बच्चों से संबंधित कानून)
नियुक्ति
- आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है।
- अध्यक्ष की नियुक्ति शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति की सिफारिश पर होती है।
त्यागपत्र
- अध्यक्ष या सदस्य किसी भी समय केंद्र सरकार को लिखित त्यागपत्र लिखकर अपने पद से त्यागपत्र दे सकते हैं।
पदच्युति
- केंद्र सरकार आदेश द्वारा अध्यक्ष या सदस्य को पद से हटा सकती है यदि वह—
- दिवालिया घोषित हो।
- पद पर रहते हुए किसी सशुल्क रोजगार में संलग्न हो।
- कार्य करने से इनकार करे या कार्य करने में असमर्थ हो।
- सक्षम न्यायालय द्वारा मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित किया गया हो।
- पद का दुरुपयोग करे जिससे जनहित प्रभावित हो।
- नैतिक पतन से जुड़े अपराध में दोषी ठहराया गया हो।
- नोट: पदच्युति से पूर्व संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है।
एनसीपीसीआर की प्रमुख पहलें
POCSO ई-बॉक्स:
- बाल यौन शोषण की ऑनलाइन शिकायत पेटी, जिससे POCSO अधिनियम, 2012 के तहत अपराधों की सीधी रिपोर्टिंग और त्वरित कार्रवाई संभव होती है।
संवर्धन कार्यक्रम:
- बाल तस्करी से निपटने हेतु भेद्यता मानचित्रण तथा मौजूदा तंत्रों के साथ समन्वय।
MASI ऐप:
- देशभर के बाल देखभाल संस्थानों (CCI) की रियल-टाइम निगरानी के लिए मोबाइल ऐप।
GHAR पोर्टल (घर-घर जाओ):
- बच्चों की वापसी, पुनर्वास और प्रत्यावर्तन की डिजिटल ट्रैकिंग एवं निगरानी हेतु पोर्टल।
प्रमुख बाल-केंद्रित अधिनियम एवं योजनाएँ
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा—
- POCSO अधिनियम, 2012 (बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण)
- किशोर न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015
- बाल संरक्षण सेवाएँ योजना (CPS) (पूर्ववर्ती: एकीकृत बाल संरक्षण योजना)
- CPS के अंतर्गत—
- राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता।
- कठिन परिस्थितियों में बच्चों की स्थिति का विश्लेषण।
- बाल देखभाल संस्थानों की स्थापना एवं रखरखाव।
