भारत निर्वाचन आयोग

भारत निर्वाचन आयोग भारत का संवैधानिक निकाय है, जो चुनाव प्रक्रिया की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। राजनीतिक व्यवस्था और शासन के अध्ययन में, यह आयोग महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर संसद और विधानसभा के चुनावों का संचालन करता है और लोकतंत्र की मजबूती में योगदान देता है।

भारत निर्वाचन आयोग

परिचय

  • भारत निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र और स्थायी संवैधानिक निकाय है।
  • इसकी स्थापना 25 जनवरी 1950 को की गई थी।
    • चुनाव आयोग की स्थापना के उपलक्ष्य में 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है।
  • यह आयोग भारत में लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, राज्यसभा, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों का संचालन करता है।
    • इसके अतिरिक्त, राज्यों के विधान परिषदों (Legislative Councils) के चुनाव (जहां दो सदनीय विधानमंडल है) का भी संचालन करता है।
  • इसका उद्देश्य है – देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना।
  • पंचायत और नगर निगम के चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा कराए जाते हैं।

संवैधानिक आधार

  • यह संविधान के भाग-15 (भाग XV) में समाहित है।
  • निर्वाचन आयोग की स्थापना और कार्यभार संविधान के अनुच्छेद 324 से 329 के अंतर्गत वर्णित है।
  • संविधान का अनुच्छेद 324 निर्वाचन आयोग की स्थापना और उसकी संरचना से संबंधित है।
  • इसके अनुसार, निर्वाचन आयोग में एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त (Chief Election Commissioner – CEC) और अन्य निर्वाचन आयुक्त (Election Commissioners) हो सकते हैं।

निर्वाचन आयोग से संबंधित अनुच्छेद

अनुच्छेदविषयवस्तु
324निर्वाचन का अधीक्षण, निर्देशन व नियंत्रण निर्वाचन आयोग को सौंपा गया।
325धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर किसी को मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित नहीं किया जाएगा।
326लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर होंगे (18 वर्ष से ऊपर)।
327संसद को चुनावों से संबंधित प्रावधान बनाने की शक्ति।
328राज्य विधानमंडल को अपने चुनावों के लिए प्रावधान करने की शक्ति।
329चुनाव से संबंधित मामलों में न्यायालयों का हस्तक्षेप वर्जित है (निर्वाचन याचिका के अलावा)।

भारत निर्वाचन आयोग संरचना

  • 1950 से 15 अक्टूबर 1989 तक:
    • निर्वाचन आयोग में मूलतः केवल एक चुनाव आयुक्त का प्रावधान था । अर्थात् आयोग एक एकल सदस्यीय निकाय था।
  • 16 अक्टूबर 1989:
    • मतदान की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई।
    • कार्यभार बढ़ने पर राष्ट्रपति ने दो अतिरिक्त निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की।
    • 16 अक्टूबर, 1989 से 1 जनवरी, 1990 तक तीन-सदस्यीय निकाय बन गया। (1 CEC + 2 ECs)।
  • 2 जनवरी, 1990 :
    • दो निर्वाचन आयुक्तों के पद समाप्त कर दिए गए।
    • 2 जनवरी, 1990 से 30 सितम्बर, 1993 तक यह एक एकल-सदस्यीय निकाय बन गया
    • आयोग फिर से एकल सदस्यीय हो गया।
  • 01 अक्टूबर 1993 से वर्तमान तक:
    • 1 अक्टूबर, 1993 से यह तीन-सदस्यीय निकाय बन गया।
    • दो निर्वाचन आयुक्तों को फिर से नियुक्त किया गया।
    • तब से आयोग एक स्थायी बहुसदस्यीय निकाय के रूप में कार्य कर रहा है।
  • वर्तमान संरचना
    • आयोग में तीन सदस्य होते हैं:
      • 1 मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC)
      • 2 निर्वाचन आयुक्त (ECs)
    • सभी आयुक्तों के पास समान शक्तियाँ होती हैं।
    • यदि मतभेद हो, तो निर्णय बहुमत के आधार पर लिया जाता है।

नियुक्ति:

  • मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) और अन्य निर्वाचन आयुक्तों (EC) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा चयन समिति की सिफ़ारिश पर की जाती है।
  • सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप
    • मार्च 2023 में सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 142 के तहत ‘पूर्ण न्याय’ के लिए एक व्यवस्था लागू की:
    • CEC और EC की नियुक्ति एक तीन-सदस्यीय समिति द्वारा की जाएगी:
      1. प्रधानमंत्री – अध्यक्ष
      2. भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) – सदस्य
      3. लोकसभा में विपक्ष के नेता – सदस्य
    • यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी जब तक संसद इस विषय पर कोई कानून नहीं बना देती।
  • मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023
    • ‘मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल अधिनियम, 2023’ के अनुसार:
    • चयन समिति में शामिल होंगे:
      1. प्रधानमंत्री – अध्यक्ष
      2. लोकसभा में विपक्ष के नेता – सदस्य
      3. प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री – सदस्य
    • यदि लोकसभा में विपक्ष के नेता को मान्यता प्राप्त नहीं है, तो उस स्थिति में सबसे बड़े विपक्षी दल का नेता समिति में शामिल होगा।

    नोट : 

    • जून 2012 में, पूर्व उप प्रधान मंत्री और भारतीय संसद में विपक्ष के पूर्व नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने सुझाव दिया कि सीईसी (साथ ही नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी)) की नियुक्ति एक द्विदलीय कॉलेजियम द्वारा की जानी चाहिए जिसमें प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश , कानून मंत्री और लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेता शामिल हों।
    अध्यक्षता:
    • यदि आयोग बहुसदस्यीय हो, तो मुख्य निर्वाचन आयुक्त अध्यक्ष के रूप में कार्य करता है।
    प्रादेशिक आयुक्त:
    • राष्ट्रपति, निर्वाचन आयोग की सलाह पर, प्रादेशिक आयुक्तों की नियुक्ति कर सकता है।
    शपथ
    • यह शपथ राष्ट्रपति या राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति के समक्ष शपथ लेनी होती है
    • शपथ का प्रारूप संविधान की तीसरी अनुसूची में दिया गया है।
    • शपथ में –
      • संविधान के प्रति निष्ठा,
      • निष्पक्षता, और
      • कर्तव्यों के ईमानदारी से निर्वहन का संकल्प होता है।
    सेवा शर्तें व कार्यकाल:
    • मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों के:
      • पद, शक्तियाँ और अधिकार समान होते हैं।
      • कार्यकाल: 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो।
      • आयोग के सदस्यों की सेवा शर्तें और कार्यकाल राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।
      • सभी आयुक्तों का वेतन, भत्ता एवं अन्य सुविधाएं उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान होती हैं।
        • मुख्य चुनाव आयुक्त व अन्य आयुक्तों को ₹ 2,50,000 मासिक वेतन मिलता है। 
      • नियुक्ति के बाद मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सेवा शर्तों में कोई अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
      • वे किसी भी समय त्यागपत्र दे सकते हैं या निर्धारित प्रक्रिया से हटाए जा सकते हैं।

    पद से हटाया जाना

    • मुख्य निर्वाचन आयुक्त:
      • मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसकी निर्धारित पदावधि में काम करने की संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त है।
      • मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसी प्रक्रिया और आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाया जाता है, अर्थात्:
        • दुर्व्यवहार या असक्षमता के आधार पर,
        • संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से संकल्प पारित करने के बाद,
        • राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है।
        • अतः वे राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर नहीं होते, भले ही उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा होती है।
    • अन्य आयुक्तों:
      • अन्य निर्वाचन आयुक्त या प्रादेशिक आयुक्त को पद से केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश पर ही हटाया जा सकता है, अन्यथा नहीं।
    हटाने की प्रक्रिया
    • किन-किन पदों पर लागू
      • उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश।
      • मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner)।
      • नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)।
    • हटाने के आधार
      • दुर्व्यवहार (misbehavior)
      • पद के दुरुपयोग (misuse of office)
      • अक्षमता (incapacity)
    • प्रक्रिया
      • संसद द्वारा प्रस्ताव (Resolution) पारित होना आवश्यक।
      • प्रस्ताव तभी पारित होगा जब:
        • सदन के कुल सदस्यों का 50% से अधिक मतदान हो।
        • उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों में से 2/3 विशेष बहुमत समर्थन दे।
    • महाभियोग शब्द का प्रयोग
      • न्यायाधीशों, मुख्य चुनाव आयुक्त और CAG के मामले में संविधान में ‘महाभियोग’ शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है।
      • ‘महाभियोग’ शब्द का उपयोग केवल राष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया के लिए किया जाता है।
    • राष्ट्रपति को हटाने हेतु:
      • संसद के दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का 2/3 विशेष बहुमत आवश्यक है।
      • यह प्रक्रिया केवल राष्ट्रपति के लिए लागू होती है, किसी अन्य पद के लिए नहीं।
    चुनाव आयोग की शक्तियाँ एवं कार्य
    • निर्वाचन आयोग की शक्तियाँ व कार्यों को तीन मुख्य श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:
      1. प्रशासनिक कार्य
      2. सलाहकारी कार्य
      3. अर्द्ध-न्यायिक कार्य

    शक्तियाँ व कार्य

    प्रशासनिक कार्य

    • निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण – Parliamentary Delimitation Act के अनुसार पूरे भारत में निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण।
    • मतदाता सूची निर्माण – समय-समय पर निर्वाचक नामावली तैयार करना और सभी पात्र मतदाताओं को पंजीकृत करना।
    • निर्वाचन कार्यक्रम निर्धारण – चुनाव की तारीख व समय-सारणी तय करना, नामांकन पत्रों की जाँच करना।
    • राजनीतिक दलों को मान्यता देना – राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर दलों को मान्यता देना और चुनाव चिह्न आवंटित करना।
    • चुनाव कर्मचारियों की मांग – चुनाव कराने के लिए आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति हेतु राष्ट्रपति/राज्यपाल से अनुरोध करना।
    • चुनावी पर्यवेक्षण – देशभर में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने हेतु संपूर्ण चुनावी तंत्र की निगरानी करना।
    • मीडिया समय आवंटन – राजनीतिक दलों को प्रचार हेतु रेडियो/टीवी पर समय आवंटन करना।
    • पंजीकरण एवं मान्यता – राजनीतिक दलों का पंजीकरण एवं प्रदर्शन के आधार पर उन्हें राष्ट्रीय/राज्य स्तरीय दल का दर्जा देना।
    मतदाता शिक्षा (Voter Education)
    • लोकतांत्रिक सफलता का आधार –  लोकतांत्रिक एवं निर्वाचन प्रक्रियाओं में मतदाता की सक्रिय सहभागिता किसी भी लोकतंत्र की सफलता का मूल आधार होती है।
    • मतदाता शिक्षा का उद्देश्य- नागरिकों को चुनाव प्रक्रिया, उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना। मतदाता भागीदारी को बढ़ाना और सार्थक मतदान को प्रोत्साहित करना।
    • भारत निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2009 में मतदाता शिक्षा को निर्वाचन प्रबंधन का अभिन्न अंग माना। तब से इसे एक औपचारिक रणनीति के रूप में अपनाया गया है।

    सलाहकारी कार्य

    • निरर्हता मामलों में परामर्श – संसद सदस्यों की अयोग्यता के मामलों में राष्ट्रपति को सलाह देना।
    • राज्य विधानपरिषद संबंधी सलाह – विधानपरिषद सदस्यों की अयोग्यता पर राज्यपाल को परामर्श देना।
    • राष्ट्रपति शासन की स्थिति में सलाह – राष्ट्रपति शासन वाले राज्य में एक वर्ष बाद चुनाव कराए जाएं या नहीं, इस पर राष्ट्रपति को सलाह देना।

    अर्द्ध-न्यायिक कार्य

    • विवाद समाधान – राजनीतिक दलों की मान्यता और चुनाव चिह्न से जुड़े विवादों का न्यायालय की तरह निपटारा करना।
    • चुनाव अनियमितताओं की जाँच – चुनावी अनियमितता (जैसे हिंसा, रिगिंग, बूथ कैप्चरिंग) की जाँच हेतु अधिकारियों की नियुक्ति।
    • आचार संहिता लागू करना – उम्मीदवारों और दलों के लिए आचार संहिता लागू करना और उसका अनुपालन सुनिश्चित करना।
    • चुनाव रद्द करना – गंभीर अनियमितताओं के आधार पर चुनाव को रद्द करना।
    न्यायिक समीक्षा
    • निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) मतदान समाप्त होने और परिणाम घोषित होने के बाद स्वयं किसी निर्वाचन परिणाम की समीक्षा, पुनरीक्षण या निरस्तीकरण नहीं कर सकता।
    • लोकसभा या राज्य विधानसभा के चुनाव परिणाम को चुनौती देने का एकमात्र तरीका निर्वाचन याचिका (Election Petition) है।
      • ऐसी याचिका केवल संबंधित उच्च न्यायालय (High Court) में दाखिल की जाती है।
      • उच्च न्यायालय का निर्णय अपील के रूप में सुप्रीम कोर्ट में ले जाया जा सकता है।
      • राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन परिणाम को चुनौती देने हेतु याचिका सीधे सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में प्रस्तुत की जाती है।
      • सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होता है।

    चुनाव आयोग की प्रशासनिक संरचना

    केंद्र स्तर पर
    • उप निर्वाचन आयुक्त: सिविल सेवा से लिए जाते हैं; कार्यकाल आधारित नियुक्ति।
    • सचिवालय स्टाफ: सचिव, संयुक्त सचिव, उप सचिव, अवर सचिव आदि मिलकर आयोग की सहायता करते हैं।
    राज्य स्तर पर
    • मुख्य निर्वाचन अधिकारी (Chief Electoral Officer – CEO)
      • मुख्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा, राज्य सरकार से परामर्श के बाद नियुक्त किया जाता है।
    जिला स्तर पर
    • जिला निर्वाचन अधिकारी (Collector/DM)
      • जिले में चुनाव प्रबंधन का उत्तरदायी होता है।
    • निर्वाचन अधिकारी और पीठासीन अधिकारी
      • प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र और मतदान केंद्र के लिए नियुक्त किए जाते हैं।

    निर्वाचन आयोग की दृष्टि, लक्ष्य एवं निदेशक सिद्धांत

    • दृष्टि (Vision)
      • भारत का निर्वाचन आयोग, चुनावी लोकतंत्र को गहराई और मजबूती देने के लिए सक्रियता, भागीदारी और श्रेष्ठता का संस्थान बनना चाहता है — न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी।
    • लक्ष्य (Mission)
      • स्वतंत्रता, स्वायत्तता और अखंडता को बनाए रखते हुए, सभी संबंधित पक्षों (Stakeholders) की सुलभता, समावेशिता और नैतिक भागीदारी सुनिश्चित करना।
      • स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव संपन्न कराने हेतु उच्चतम पेशेवर मानकों का पालन करना, ताकि लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में विश्वास और भरोसा सुदृढ़ हो।
    • निदेशक सिद्धांत (Guiding Principles)
      • संवैधानिक मूल्यों जैसे – स्वतंत्रता, समता, निष्पक्षता व कानून के शासन को बनाए रखना।
      • विश्वसनीयता, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व, शुचिता और स्वायत्तता के साथ चुनाव संचालन।
      • समावेशी और मतदाता-केंद्रित वातावरण द्वारा सभी पात्र नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना।
      • राजनीतिक दलों व अन्य स्टेकहोल्डरों की रचनात्मक भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
      • चुनाव प्रक्रिया को लेकर जागरूकता का प्रचार – मतदाता, राजनीतिक दल, चुनाव अधिकारी, उम्मीदवार और आम जनता में।
      • मानव संसाधन का विकास – प्रभावी और पेशेवर चुनावी सेवाओं के संचालन के लिए।
      • चुनाव प्रक्रिया को सुगम बनाने हेतु श्रेष्ठ संरचना विकसित करना।
      • तकनीकी नवाचारों को अपनाकर चुनाव प्रणाली का निरंतर सुधार करना।
      • नवाचारी प्रक्रियाओं को अपनाना ताकि आदर्शों और लक्ष्यों की पूर्ण प्राप्ति सुनिश्चित हो।
      • लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत बनाकर, चुनावी व्यवस्था में लोगों के विश्वास को बनाए रखना।

    मुख्य निर्वाचन आयुक्त व अन्य सदस्य- 

    मुख्य निर्वाचन आयुक्त
    1सुकुमार सेन21 मार्च 1950 से 19 दिसंबर 1958भारत के प्रथम मुख्य निर्वाचन आयुक्त, 1951-52 का पहला आम चुनाव।
    2के.वी.के. सुन्दरम20 दिसंबर 1958 से 30 सितंबर 1967
    3एस.पी. सेन वर्मा1 अक्तूबर 1967 से 30 सितंबर 1972
    4डॉ. नगेन्द्र सिंह1 अक्तूबर 1972 से 6 फरवरी 1973कार्यकाल 4 महीने, बाद में ICJ के जज व अध्यक्ष।
    9श्रीमती वी.एस. रमादेवी26 नवंबर 1990 से 11 दिसंबर 1990एकमात्र महिला CECकार्यकाल 15 दिनबाद में कर्नाटक की राज्यपाल (पहली स्थायी महिला राज्यपाल)।
    10टी.एन. शेषन12 दिसंबर 1990 से 11 दिसंबर 1996“चुनाव आयोग का पुनर्निर्माता”,धनबल-बाहुबल पर कड़ा नियंत्रणफोटो पहचान पत्र लागूआयोग की स्वतंत्रता स्थापित।
    17डॉ. एस. वाई कुरैशी30 जुलाई 2010 से 10 जून 2012पहले मुस्लिम CECSVEEP कार्यक्रम शुरू
    19श्री एच. एस. ब्रह्मा16 जनवरी 2015 से 18 अप्रैल 2015प्रौद्योगिकी के उपयोग पर ज़ोर।
    22श्री ओ. पी. रावत23 जनवरी 2018 से 01 दिसंबर 2018
    23श्री सुनील अरोड़ा02 दिसंबर 2018 से 12 अप्रैल 20212019 का आम चुनाव (अब तक का सबसे बड़ा चुनाव)।
    24श्री सुशील चंद्रा13 अप्रैल 2021 से 14 मई 2022ई-वोटिंग व इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग की संभावनाओं पर अध्ययन।
    25श्री राजीव कुमार 15 मई 2022 से 18 फरवरी 2025
    26श्री ज्ञानेश कुमार19 फरवरी, 2025 से …………….
    पूर्व निर्वाचन आयुक्त
    1श्री वी. एस. सेगल16.10.1989 से 02.01.1990
    2श्री एस. एस. धनोआ16.10.1989 से 02.01.1990
    3डॉ. जी. वी. जी. कृष्णमूर्ति01.10.1993 से 30.09.1999
    4श्री. अशोक लवासा23.10.2018 से 31.08.2020
    5श्री अनूप चंद्र पाण्डेया09.06.2021 से 14.02.2024
    6श्री अरुण गोयल21.11.2022 से 09.03.2024
    7श्री डॉ विवेक जोशी19 फरवरी, 2025 ……..
    8श्री डॉ. सुखबीर सिंह संधू15 मार्च, 2024………..
    वर्तमान
    1श्री ज्ञानेश कुमारमुख्य निर्वाचन आयुक्त15 मार्च, 2024 को भारत के निर्वाचन आयुक्त के रूप में नियुक्त हुए थे।19 फरवरी, 2025 को भारत के 26वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में पदभार संभाला।
    2श्री डॉ विवेक जोशीनिर्वाचन आयुक्तपदभार ग्रहण – 19 फरवरी, 2025
    3श्री डॉ. सुखबीर सिंह संधूनिर्वाचन आयुक्तकार्यभार ग्रहण – 15 मार्च, 2024
    SWEEP (स्वीप)
    • सुव्यवस्थित मतदाता शिक्षा और निर्वाचक सहभागिता(Systematic Voters’ Education and Electoral Participation)
    • सुव्यवस्थित मतदाता शिक्षा और निर्वाचक सहभागिता कार्यक्रम, जिसे स्वीप नाम से जाना जाता है, भारत में मतदाता शिक्षा, मतदाता जागरूकता फैलाने और मतदाता साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए भारत निर्वाचन आयोग का प्रमुख कार्यक्रम है। वर्ष 2009 से, हम भारत के निर्वाचकों को तैयार करने और उन्हें निर्वाचक प्रक्रिया से संबंधित सामान्य ज्ञान से परिचित करवाने के लिए कार्य कर रहें हैं।
    ईवीएम और वीवीपैट
    • भारत निर्वाचन आयोग 2001 से लोकसभा और विधानसभा के सभी निर्वाचनों में ईवीएम का उपयोग कर रहा है। ईवीएम में अब तक 315 करोड़ से अधिक मत दर्ज किए गए हैं।
    • भारत निर्वाचन आयोग द्वारा वोटर वेरिफाएबल पेपर आडिट ट्रेल (VVPAT) प्रणाली का प्रयोग पहली बार नोक्सेन विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, नागालैंड में किया गया था

    भारत निर्वाचन आयोग (ECI) – Apps और Portals

    Voter Portalनए मतदाता रजिस्ट्रेशन, सुधार, स्थानांतरण, नाम खोज, ऑनलाइन डॉक्यूमेंट अपलोड।
    Voter Helpline Appरजिस्ट्रेशन, सुधार, शिकायत दर्ज, बारकोड स्कैन से वेरिफिकेशन।
    SMS Serviceनाम सत्यापन हेतु छोटा संदेश भेजकर चेक।
    1950 Toll-Free Numberकॉल सेंटर, बहुभाषी सपोर्ट, शिकायत दर्ज।
    PWD Appदिव्यांग मतदाताओं के लिए रजिस्ट्रेशन, व्हीलचेयर रिक्वेस्ट, दृष्टिबाधित हेतु ऑडियो बैलेट।
    SVEEP Portalमतदाता शिक्षा, जागरूकता, क्विज़, फोरम, तस्वीरें साझा।
    EVM Management System (EMS)EVM/VVPAT मूवमेंट ट्रैकिंग, सुरक्षित वितरण।
    ERO Netनिर्वाचक नामावली शुद्धिकरण, नया पंजीकरण, रिकॉर्ड अपडेट।
    cVIGIL Appनागरिकों द्वारा आचार संहिता उल्लंघन रिपोर्ट (100 मिनट में निस्तारण)।
    Candidate Suvidha Appनामांकन स्थिति व अन्य सेवाओं की ट्रैकिंग।
    ENCORE Softwareअभ्यर्थी/निर्वाचन प्रबंधन (नामांकन, वोटर टर्नआउट, मतगणना, परिणाम)।
    Booth Appमतदाता पहचान (QR Code + फोटो), डिजिटल वोटर स्लिप, टर्नआउट डेटा, शिकायत रिपोर्टिंग।
    Voter Turnout Appप्रत्येक विधानसभा/संसदीय निर्वाचन क्षेत्र का तत्क्षण उसी समय के टर्नआउट का विवरण प्रदान करता है।
    निर्वाचन व्यय एपअभ्यर्थियों द्वारा किए गए दैनिक निर्वाचन खर्चों की निगरानी।
    सूचकांक कार्ड (Index Card)ENCORE का महत्वपूर्ण मॉड्यूल; निर्वाचन की अंतिम सांख्यिकीय रिपोर्ट का प्रबंधन।
    चुनाव कानून (संशोधन) विधेयक, 2021 के प्रस्ताव 
    • दिसंबर 2021 में लोकसभा ने चुनाव कानून (संशोधन) विधेयक, 2021 पारित किया। यह विधेयक मतदाता सूची डेटा और मतदाता पहचान पत्र को आधार प्रणाली से जोड़ने का प्रयास करता है

    18वीं लोकसभा आम चुनाव

    • घोषणा तिथि : 16 मार्च 2024 को चुनाव आयोग ने कार्यक्रम घोषित किया।
    • चरणबद्ध चुनाव : कुल 7 चरणों में संपन्न।
    • चरणवार मतदान प्रतिशत
    • पहला चरण (19 अप्रैल 2024) – 66.14%
    • दूसरा चरण (26 अप्रैल 2024) – 66.71%
    • तीसरा चरण (7 मई 2024) – 65.68%
    • चौथा चरण (13 मई 2024) – 69.16% (सर्वाधिक मतदान)
    • पाँचवाँ चरण (20 मई 2024) – 62.20%
    • छठा चरण (25 मई 2024) – 63.37%
    • सातवाँ चरण (1 जून 2024) – 61.63%
    • मतगणना
      • तिथि : 4 जून 2024
    • कुल मतदान
      • 2024 : 64.64 करोड़ वोट पड़े
      • 2019 : 61.4 करोड़ वोट पड़े
      • मतदान प्रतिशत (2024) : 65.79%
      • 2019 चुनाव के मुकाबले 1.61% कम है। पिछली बार कुल आंकड़ा 67.40% था।
    • राजनीतिक दल व वोट शेयर
      • राष्ट्रीय दल : 6 राष्ट्रीय दलों ने भाग लिया
      • कुल वोट शेयर : 63.35% (संयुक्त वैध मतों का)
      • निर्विरोध निर्वाचन क्षेत्र : सूरत (गुजरात)
    • निर्वाचन क्षेत्रवार मतदान
      • सर्वाधिक मतदान वाला पीसी : धुबरी (असम) – 92.3%
      • न्यूनतम मतदान वाला पीसी : श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) – 38.7%
        • (2019 में यहाँ मात्र 14.4% मतदान हुआ था)
      • 50% से कम मतदान वाले पीसी : 11
    • NOTA (None of the Above)
      • 2024 : 63,71,839 वोट (0.99%)  [2019 : 1.06% वोट]
      • इंदौर में नोटा को 2 लाख से अधिक वोट मिले – यह अब तक का रिकॉर्ड है।
      • नोटा विकल्प पहली बार 2014 में पेश किया गया था।
      • नोटा को वोट मिलने का कानूनी प्रभाव नहीं, क्योंकि विजेता वही होता है जिसने सबसे अधिक वोट प्राप्त किए।
      • कुछ राज्यों में (जैसे हरियाणा) नोटा को काल्पनिक उम्मीदवार माना जाता है।
    • जेंडर आधारित मतदान
      • महिला मतदाता (2024) : 65.78% (सूरत को छोड़कर)
      • पुरुष मतदाता (2024) : 65.55%
      • थर्ड जेंडर मतदाता (2024) : 27.09%
    • निर्दलीय उम्मीदवार
      • कुल स्वतंत्र उम्मीदवार (2024) : 3921
      • विजयी स्वतंत्र उम्मीदवार : केवल 7
    • स्वतंत्र महिला उम्मीदवार : 279
    • लोकसभा 2024 में कुल 74 महिला सांसद निर्वाचित हुईं, जो कुल सांसदों का 13.63% है।
    • सर्वाधिक 11 महिला सांसद पश्चिम बंगाल से चुनी गईं।

    18वीं लोकसभा आम चुनाव परिणाम

    पार्टीप्राप्त सीटे प्राप्त वोट %
    भारतीय जनता पार्टी – बीजेपी240(गठबंधन की सीटें- 293)36.56%
    इंडियन नेशनल काँग्रेस9921.19%
    समाजवादी पार्टी374.58%
    आल इण्डिया तृणमूल कांग्रेस294.37%
    द्रविड़ मुनेत्र कड़गम – डीएमके221.82%
    तेलुगु देशम – टीडीपी161.98%
    जनता दल (यूनायटेड) – जेडी(यू)121.25%
    नेशनलिस्ट काँग्रेस पार्टी- शरदचंद्र पवार80.92%
    CPI (M)41.76%
    आम आदमी पार्टी31.11%
    भारत आदिवासी पार्टी1
    राष्ट्रीय लोकतान्त्रिक पार्टी1
    निर्दलीय72.79
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