भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक

भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक भारत का संवैधानिक लेखा परीक्षा निकाय है, जो सरकार के वित्तीय लेन-देन और खातों की पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। राजनीतिक व्यवस्था और शासन के अध्ययन में, यह संस्था महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सार्वजनिक निधियों के प्रभावी उपयोग और वित्तीय जवाबदेही में केंद्रीय भूमिका निभाती है।

भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक
  • अनुच्छेद 148 के अंतर्गत CAG (Comptroller and Auditor General of India) के स्वतंत्र संवैधानिक पद की स्थापना की गई है।
  • इसे संक्षेप में महालेखा परीक्षक कहा जाता है।
  • यह भारतीय लेखा परीक्षण और लेखा विभाग का प्रमुख होता है।
  • इसका कार्य लोक वित्त का संरक्षक बनकर केंद्र और राज्य सरकारों की वित्तीय गतिविधियों पर निगरानी रखना है।
  • डॉ. भीमराव अंबेडकर के अनुसार, “भारत का नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG-कैग) संभवतः भारत के संविधान का सबसे महत्त्वपूर्ण अधिकारी है। वह ऐसा व्यक्ति है जो यह देखता है कि संसद द्वारा अनुमन्य खर्चों की सीमा से अधिक धन खर्च न होने पाए या संसद द्वारा विनियोग अधिनियम में निर्धारित मदों पर ही धन खर्च किया जाए।”
  • भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के (कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971 पर आधारित है। 

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • 1858 – महालेखाकार का कार्यालय स्थापित हुआ, उसी वर्ष अंग्रेजों ने ईस्ट इंडिया कंपनी से भारत का प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथों में लिया।
  • 1860 – सर एडवर्ड ड्रमंड पहले ऑडिटर जनरल नियुक्त हुए।
  • इसके कुछ समय बाद इस पद को भारत सरकार का लेखा परीक्षक और महालेखाकार कहा जाने लगा।
  • 1866 – इस पद का नाम बदलकर नियंत्रक महालेखा परीक्षक (Comptroller of Accounts) किया गया।
  • 1884 – इसे पुनः नामित कर दिया गया: भारत का नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG of India)।
  • भारत सरकार अधिनियम, 1919 – CAG को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया गया क्योंकि इस पद को वैधानिक दर्जा मिला।
  • भारत सरकार अधिनियम, 1935 – संघीय ढाँचे में प्रांतीय लेखा परीक्षकों का प्रावधान किया गया और CAG के पद को और अधिक शक्तिशाली बनाया गया।
    • इसमें नियुक्ति और सेवा प्रक्रियाओं का उल्लेख भी था।
    • महालेखापरीक्षक के कर्त्तव्यों का संक्षिप्त विवरण भी शामिल किया गया।
  • 1936 – लेखा और लेखा परीक्षा आदेश (Audit & Accounts Order) जारी हुआ, जिसने CAG की जिम्मेदारियों और लेखा परीक्षा कार्यों को परिभाषित किया।
    • यह व्यवस्था 1947 तक अपरिवर्तित रही।
  • 1947 (स्वतंत्रता के बाद) – भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 में प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति द्वारा नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की नियुक्ति होगी।
  • 1958 – CAG के अधिकार-क्षेत्र में जम्मू और कश्मीर को भी शामिल किया गया।
  • 1971 – केंद्र सरकार ने नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (कर्त्तव्य, शक्तियाँ और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971 लागू किया।
    • अधिनियम ने CAG को केंद्र और राज्य सरकारों के लिये लेखांकन (Accounting) तथा लेखा परीक्षा (Auditing) दोनों की जिम्मेदारी दी।
  • 1976 – CAG को लेखांकन के कार्यों से मुक्त कर दिया गया, और केवल लेखा परीक्षा का कार्यभार सौंपा गया।
विजन
  • CAG का लक्ष्य है कि हम सार्वजनिक संसाधनों पर भरोसेमंद और स्वतंत्र लेखापरीक्षण (Audit) करते रहें और इस क्षेत्र में अग्रणी बने।
मिशन
  • CAG उच्च गुणवत्ता के लेखापरीक्षण और लेखाकरण के जरिए जवाबदेही, पारदर्शिता और अच्छे शासन (Good Governance) को बढ़ावा देते हैं। साथ ही जनता, सरकार और विधानमंडल को यह भरोसा दिलाते हैं कि सार्वजनिक धन का सही और कुशल उपयोग हो रहा है।
आधारभूत मूल्य
  • संस्थागत मूल्य: व्यावसायिक मानक, निष्पक्षता, स्वतंत्रता और पारदर्शिता।
  • जन मूल्य: नैतिकता, ईमानदारी, क्षमता, निष्पक्षता और सामाजिक जिम्मेदारी।

भारत के महालेखा नियंत्रक एवं परीक्षक से संबंधित अनुच्छेद

अनुच्छेद (148-151)

भाग-5

अनुच्छेदविषयवस्तु
    148भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक
    149भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के कर्तव्य एवं शक्तियां
    150संघ के और राज्यों के लेखाओं का प्रारूप
    151लेखापरीक्षा प्रतिवेदन

अन्य संबंधित प्रावधान 

  • अनुच्छेद 279 –
    • ‘शुद्ध आय (Net Proceeds)’ की गणना CAG द्वारा प्रमाणित की जाती है।
    • इसका प्रमाणपत्र अंतिम और बाध्यकारी माना जाता है।
  • तीसरी अनुसूची –
    • इसकी धारा IV में CAG और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा पदभार ग्रहण के समय ली जाने वाली शपथ का प्रावधान है।
  • छठी अनुसूची –
    • जिला परिषद या क्षेत्रीय परिषद के खातों को राष्ट्रपति और CAG द्वारा अनुमोदित प्रारूप में रखा जाना चाहिए।
    • इन निकायों के खाते CAG द्वारा निर्धारित तरीके से तैयार होंगे।
    • इन खातों से संबंधित CAG की रिपोर्ट राज्यपाल को प्रस्तुत की जाएगी, जो बाद में राज्य विधानमंडल के पटल पर रखी जाती है।

अनुच्छेद 148 – नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की नियुक्ति, शपथ और सेवा की शर्तों से संबंधित

148(1)

नियुक्ति

  • CAG की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षर और मुहर सहित अधिपत्र से होती है।

148(2)

शपथ

  • पदभार ग्रहण करने से पूर्व CAG को राष्ट्रपति (या उनके द्वारा नियुक्त व्यक्ति) के समक्ष शपथ लेनी होती है। 
  • शपथ का प्रारूप तीसरी अनुसूची में है, जिसमें
    • संविधान के प्रति निष्ठा, 
    • निष्पक्षता और 
    • ईमानदारी से कर्तव्यों के निर्वहन का संकल्प शामिल है।
















148(3)

सेवा शर्तें व वेतन

  • वेतन और सेवा शर्तें संसद तय करती है; जब तक संसद तय न करे, तब तक दूसरी अनुसूची के अनुसार होंगी।
  • नियुक्ति के बाद वेतन, पेंशन या सेवा शर्तों में उसके लिए हानिकारक बदलाव नहीं किया जा सकता।
  • वेतन (CAG)  – महालेखा परीक्षक (कर्तव्य, शक्तियां एवं सेवा शर्तें) अधिनियम 1971 के अनुसार
    • नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के बराबर वेतन मिलता है। (₹ 250,000 मासिक वेतन)
    • लेकिन, अगर कोई व्यक्ति CAG बनने से पहले
      • केंद्र सरकार / राज्य सरकार से पेंशन ले रहा था (विकलांगता या क्षतिपूर्ति पेंशन को छोड़कर),
      • या पेंशन लेने के लिए पात्र था, तो उसके वेतन से यह राशि घटा दी जाएगी—
        • उस पेंशन की रकम
        • और यदि उसने पेंशन का कोई हिस्सा अग्रिम (commuted value) रूप में पहले ही ले लिया हो, तो उस हिस्से की रकम भी घटाई जाएगी।

कार्यकाल

  • कार्यकाल: 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो।
  • कार्यकाल समाप्ति से पहले, CAG राष्ट्रपति को त्यागपत्र देकर पद छोड़ सकता है।

पद से हटाना

पद से हटाया जाना:

  • CAG को उसकी निर्धारित पदावधि में काम करने की संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त है।
  • CAG को उसी प्रक्रिया और आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाया जाता है, अर्थात्:
    • दुर्व्यवहार या असक्षमता के आधार पर,
    • संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से संकल्प पारित करने के बाद,
    • राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है।
  • अतः वे राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर नहीं होते, भले ही उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा होती है।
  • महाभियोग शब्द का प्रयोग नहीं (यह केवल राष्ट्रपति के लिए है)।


148(4)

सेवानिवृत्ति के बाद प्रतिबंध

  • सेवानिवृत्ति/पदत्याग के बाद CAG को भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन किसी पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता।




148(5)

नियम व अधिनियम

  • CAG की शक्तियाँ और कार्यभार भारतीय संविधान, संसद द्वारा पारित अधिनियमों, और राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए नियमों के अधीन होते हैं।
  • इन नियमों को राष्ट्रपति वर्तमान CAG के परामर्श से निर्धारित करता है।
  • इसके अंतर्गत भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग की सेवा शर्तें भी आती हैं।




148(6)

प्रशासन और व्यय

  • CAG कार्यालय के प्रशासन से संबंधित व्यय (वेतन, भत्ते, पेंशन आदि) भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से लिए जाते हैं।
  • इसलिए इन खर्चों के लिए संसद की स्वीकृति आवश्यक नहीं होती।
हटाने की प्रक्रिया
  • किन-किन पदों पर लागू
    • उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश।
    • मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner)।
    • नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)।
  • हटाने के आधार
    • दुर्व्यवहार (misbehavior)
    • पद के दुरुपयोग (misuse of office)
    • अक्षमता (incapacity)
  • प्रक्रिया
    • संसद द्वारा प्रस्ताव (Resolution) पारित होना आवश्यक।
    • प्रस्ताव तभी पारित होगा जब:
      • सदन के कुल सदस्यों का 50% से अधिक मतदान हो।
      • उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों में से 2/3 विशेष बहुमत समर्थन दे।
  • महाभियोग शब्द का प्रयोग
    • न्यायाधीशों, मुख्य चुनाव आयुक्त और CAG के मामले में संविधान में ‘महाभियोग’ शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है।
    • ‘महाभियोग’ शब्द का उपयोग केवल राष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया के लिए किया जाता है।
  • राष्ट्रपति को हटाने हेतु:
    • संसद के दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का 2/3 विशेष बहुमत आवश्यक है।
    • यह प्रक्रिया केवल राष्ट्रपति के लिए लागू होती है, किसी अन्य पद के लिए नहीं।

अनुच्छेद 149 – भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के कर्तव्य एवं शक्तियां

1

संवैधानिक आधार

  • अनुच्छेद 149 संसद को CAG के कर्तव्य और शक्तियाँ निर्धारित करने के लिए अधिकृत करता है। 
  • इसके अंतर्गत संसद ने महालेखा परीक्षक (कर्तव्य, शक्तियां एवं सेवा शर्तें) अधिनियम, 1971 पारित किया।

2

खातों का परीक्षण

  • CAG भारत की आकस्मिक निधि और सार्वजनिक खाते तथा प्रत्येक राज्य की आकस्मिक निधि और सार्वजनिक खाते के सभी खर्चों का परीक्षण करता है।

3

संचित निधि का परीक्षण

  • CAG भारत की संचित निधि और प्रत्येक राज्य व केंद्रशासित प्रदेश की संचित निधि से संबंधित खर्चों का परीक्षण करता है।

4

मंत्री और CAG

  • कोई भी मंत्री संसद में CAG का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता और न ही CAG द्वारा किए गए कार्य की जिम्मेदारी ले सकता है।

5

राज्य सरकारों के लेखा

  • CAG राज्य सरकारों के लेखाओं का संकलन और अनुरक्षण करता है।

6

सरकारी कंपनियों की लेखा परीक्षा

  • सरकारी कंपनियों का ऑडिट निजी अंकेक्षकों द्वारा किया जाता है जिन्हें सरकार
  • CAG की सलाह पर नियुक्त करती है। CAG इनकी पूरक लेखा परीक्षा (Supplementary Audit) कर सकता है।

7

संसद और राज्य सरकारों के लेखा

  • CAG संसद की लोक लेखा समिति (PAC) का मार्गदर्शक, मित्र और गाइड के रूप में कार्य करता है।

8

महालेखा परीक्षक अधिनियम, 1971

  • यह अधिनियम 1971 में पारित हुआ और 1976 में संशोधित करके केंद्र सरकार के लेखा से लेखा परीक्षा को अलग किया गया।

9

लेखा परीक्षण के कर्तव्य

  • (i) भारत और राज्य सरकारों की सभी व्यय संबंधी लेखाओं की लेखा परीक्षा।
  • (ii) विभागों के लाभ-हानि लेखा, तुलन पत्र व अन्य अनुषंगी लेखाओं का परीक्षण।
  • (iii) कर निर्धारण, संग्रहण और आवंटन की निगरानी।
  • (iv) अनुदान प्राप्त निकायों का लेखा परीक्षण।

10

केंद्रीय और राज्य सरकार के लेन-देन

  • CAG ऋण, निक्षेप निधि, जमा, अग्रिम, बचत खाता और धन प्रेषण से संबंधित सभी लेन-देन की जाँच करता है।

11

अन्य लेखा परीक्षण

  • राष्ट्रपति या राज्यपाल के निवेदन पर अन्य प्राधिकरणों (जैसे स्थानीय निकायों) के लेखों का परीक्षण करता है।

12

लेखों के प्रारूप पर सलाह

  • CAG राष्ट्रपति को सलाह देता है कि केंद्र और राज्यों के लेखों को किस प्रारूप में रखा जाए।

13

रिपोर्टिंग

  • (i) केंद्र सरकार की रिपोर्ट राष्ट्रपति को, जो संसद में रखी जाती है (अनुच्छेद 151)।
  • (ii) राज्य सरकार की रिपोर्ट राज्यपाल को, जो विधानमंडल में रखी जाती है।

14

शुद्ध आगमों का निर्धारण

  • किसी कर या शुल्क की शुद्ध आगमों का निर्धारण और प्रमाणन करता है। यह अंतिम होता है (अनुच्छेद 279)।

15

भंडार व स्टॉक्स

  • सरकारी स्टॉक्स और भंडार की ऑडिट और रिपोर्ट करता है।

16

विनियोग और वित्त लेखा रिपोर्ट

  • CAG राष्ट्रपति को तीन रिपोर्ट प्रस्तुत करता है (i) विनियोग लेखा (Appropriation Accounts), 
  • (ii) वित्तीय लेखा (Finance Accounts),
  • (iii) सरकारी उपक्रमों पर रिपोर्ट।

17

लोक लेखा समिति

  • CAG की रिपोर्ट लोक लेखा समिति द्वारा जाँची जाती है और इसके निष्कर्ष संसद को बताए जाते हैं।
CAG और लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee – PAC)
  • लोक लेखा समिति की पृष्ठभूमि
    • लोक लेखा समिति (PAC) एक स्थायी संसदीय समिति है।
    • इसका गठन भारत सरकार अधिनियम, 1919 के तहत किया गया था।
  • CAG और PAC का संबंध
    • ऑडिट रिपोर्टों का प्रस्तुतीकरण
    • CAG की ऑडिट रिपोर्टें केंद्र और राज्य स्तर पर लोक लेखा समिति को सौंपी जाती हैं।
    • केंद्रीय स्तर पर CAG अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है।
    • राष्ट्रपति इन रिपोर्टों को संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखते हैं।
  • रिपोर्टों की जाँच
    • लोक लेखा समिति मुख्य रूप से निम्नलिखित की जाँच करती है –
      1. विनियोग खाते (Appropriation Accounts)
      2. वित्त खाते (Finance Accounts)
  • सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (Public Sector Undertakings – PSUs) की ऑडिट रिपोर्ट
    • महत्त्वपूर्ण मामलों की सूची
      • CAG सबसे आवश्यक और महत्वपूर्ण मामलों की एक सूची तैयार करता है और इसे लोक लेखा समिति को सौंपता है।
  • भूमिका और सहयोग
    • CAG कभी-कभी राजनेताओं और सरकारी अधिकारियों द्वारा व्यक्त किए गए विचारों की व्याख्या और अनुवाद भी करता है।
  • सुधारात्मक कार्रवाई की निगरानी
    • CAG यह सुनिश्चित करता है कि उसके द्वारा सुझाई गई सुधारात्मक कार्रवाई लागू की गई है या नहीं।
    • यदि सुधारात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तो CAG मामला लोक लेखा समिति को भेज देता है।
    • तत्पश्चात PAC आवश्यक कार्रवाई करती है।

निष्कर्ष : भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का मुख्य कार्य केंद्र और राज्य सरकारों के लेखों की लेखा परीक्षा करना, प्राप्तियों और व्ययों की निगरानी करना, और संसद तथा राज्य विधानमंडल को लेखों से संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत करना है। CAG सरकार की वित्तीय पारदर्शिता और सही खर्च की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

दूसरा प्रशासनिक सुधार आयोग (Administrative Reforms Commission-ARC) की सिफारिशें 

  1. बेहतर लोक जवाबदेही और लेखा परीक्षा नियंत्रण के लिए लेखा परीक्षा और संबंधित संस्थानों के बीच बेहतर सहयोग और परस्पर संवाद सुनिश्चित करना; 
  2. संतुलित लेखा परीक्षा रिपोर्टिंग; 
  3. बेहतर समन्वय के लिए कार्यपालिका के साथ सहज संवाद स्थापित करना; 
  4. लेखा परीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत करने में समयबद्धता बनाए रखना; 
  5. बेहतर और प्रभावी डेटा संग्रह और विश्लेषण के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग; 
  6. और SIT लेखा परीक्षा रिपोर्टों के आधार पर सुधारात्मक कार्रवाई को गति प्रदान करना।

अनुच्छेद 150 – संघ और राज्यों के लेखों का प्रारूप

  • संघ और राज्यों के खातों का प्रारूप राष्ट्रपति तय करता है।
  • इस प्रक्रिया में राष्ट्रपति CAG से परामर्श करता है।

अनुच्छेद 151 – लेखापरीक्षा प्रतिवेदन

  • अनुच्छेद 151(1) – भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक (CAG) की संघ के लेखों से संबंधित रिपोर्टों को राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। राष्ट्रपति इन्हें संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएंगे। इसे लोक लेखा समिति का ‘आंख और कान’ कहा जाता है।
  • अनुच्छेद 151(2) – राज्यों के लेखों से संबंधित रिपोर्ट राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी, जो उसे राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखवाएगा।
  • CAG द्वारा प्रस्तुत तीन प्रमुख लेखा परीक्षा प्रतिवेदन:
    1. विनियोग लेखाओं पर लेखा परीक्षा रिपोर्ट : यह रिपोर्ट वास्तविक खर्चों और संसद द्वारा विनियोग अधिनियम के माध्यम से स्वीकृत खर्चों के बीच तुलनात्मक स्थिति को प्रस्तुत करती है।
    2. वित्त लेखाओं पर लेखा परीक्षा रिपोर्ट: यह रिपोर्ट केन्द्र सरकार की वार्षिक प्राप्तियों और खर्चों का लेखा प्रस्तुत करती है।
    3. सरकारी उपक्रमों पर लेखा परीक्षा रिपोर्ट: यह रिपोर्ट सरकारी उपक्रमों के वित्तीय मामलों की लेखा परीक्षा करती है।
      • CAG की रिपोर्ट राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत करता है। इसके बाद, लोक लेखा समिति इन रिपोर्टों की जांच करती है और इसके निष्कर्षों को संसद के समक्ष रखती है।
  • सार्वजनिक उपक्रमों संबंधी समिति (Committee on Public Undertakings – COPU) –
    • सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) की कार्यक्षमता और प्रदर्शन पर CAG की टिप्पणियों की जांच करती है।
    • यानी CAG की PSU audit reports का परीक्षण COPU करती है।
प्राक्कलन समिति (Estimates Committee)
  • इसका कार्य अनुमानित व्यय (budget estimates) का परीक्षण करना है।
  • यह यह देखती है कि सरकार को दिए गए धन का कुशल उपयोग हो रहा है या नहीं।
  • लेकिन CAG की रिपोर्टों का परीक्षण नहीं करती।

महालेखा परीक्षक (CAG) की भूमिका और उत्तरदायित्व:

  • CAG वित्तीय प्रशासन के क्षेत्र में भारत के संविधान और संसदीय विधि के अनुरक्षण के प्रति उत्तरदायी है। कार्यकारी (मंत्रिपरिषद) का वित्तीय प्रशासन CAG की लेखा परीक्षा रिपोर्टों के माध्यम से सुनिश्चित किया जाता है।
  • CAG संसद का एजेंट होता है और संसद के माध्यम से खर्चों का लेखा परीक्षण करता है, इसलिए वह केवल संसद के प्रति जिम्मेदार होता है।

CAG की स्वतंत्रता और जिम्मेदारी:

  • CAG को खर्चों की लेखा परीक्षा में अधिक स्वतंत्रता होती है। वह अपने लेखा परीक्षा संहिताओं और नियमावलियों को स्वयं तय करता है। हालांकि, उसे अन्य लेखा परीक्षाओं के लिए कार्यकारी सरकार से स्वीकृति प्राप्त करनी होती है।
  • CAG यह सुनिश्चित करता है कि जो धन विधिक रूप से किसी विशेष प्रयोजन के लिए वितरित किया गया है, वह उसी प्रयोजन के लिए खर्च किया गया है। इसके अलावा, वह सरकारी व्यय की तर्कसंगतता, निष्ठा, और मितव्ययिता की भी जांच करता है।

गुप्त सेवा व्यय पर सीमाएं:

  • CAG गुप्त सेवा व्यय के ब्यौरे की मांग नहीं कर सकता। लेकिन वह प्रमाण-पत्र स्वीकार कर सकता है, जो यह प्रमाणित करे कि खर्च अनुमोदित प्राधिकरण के तहत किया गया था।

CAG की भूमिका की सीमाएं:

  1. भारत के संविधान में CAG की परिकल्पना महालेखापरीक्षक के रूप में की गई है। हालांकि, व्यवहार में CAG केवल महालेखापरीक्षक की भूमिका निभाता है।
  2. CAG का भारत की संचित निधि से धन की निकासी पर कोई नियंत्रण नहीं होता। विभिन्न विभाग CAG की स्वीकृति के बिना धन की निकासी कर सकते हैं। CAG की भूमिका केवल खर्च के बाद लेखा परीक्षा तक सीमित रहती है।

ब्रिटेन और भारत के CAG की भूमिका में अंतर:

  • ब्रिटेन के CAG के पास नियंत्रक सहित महालेखापरीक्षक की शक्तियाँ होती हैं, जबकि भारत के CAG के पास यह शक्तियाँ नहीं हैं। भारत में, कार्यकारी लोक राजकोष से धन केवल CAG की स्वीकृति से नहीं निकाल सकती।

CAG और निगमों की लेखा परीक्षा:

भारत में CAG (महालेखापरीक्षक और नियंत्रक) की भूमिका सार्वजनिक निगमों और सरकारी कंपनियों की लेखा परीक्षा में सीमित है। इसके संबंध को निम्नलिखित तीन कोटियों में देखा जा सकता है:

सीधा और पूर्ण लेखा परीक्षा
  • कुछ निगमों की लेखा परीक्षा पूरी तरह से CAG द्वारा की जाती है।
  • उदाहरण:
    • दामोदर घाटी निगम
    • तेल और प्राकृतिक गैस आयोग (ONGC)
    • एयर इंडिया
    • इंडियन एयरलाइंस कॉरपोरेशन
प्रोफेशनल अंकेक्षकों द्वारा लेखा परीक्षा (CAG की सलाह पर)
  • कुछ अन्य निगमों की लेखा परीक्षा निजी पेशेवर अंकेक्षकों द्वारा की जाती है, जिन्हें CAG की सलाह पर केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है।
  • यदि आवश्यकता हो तो CAG इन निगमों की पूरक लेखा परीक्षा कर सकता है।
  • उदाहरण:
    • केंद्रीय भंडारण निगम
    • औद्योगिक वित्त निगम

निजी लेखा परीक्षा

  • कुछ निगमों की लेखा परीक्षा पूरी तरह से निजी पेशेवर अंकेक्षकों द्वारा की जाती है, और CAG की इसमें कोई भूमिका नहीं होती।
  • ये निगम अपनी वार्षिक रिपोर्ट और लेखा सीधे संसद के समक्ष प्रस्तुत करते हैं।
  • उदाहरण:
    • जीवन बीमा निगम
    • भारतीय रिजर्व बैंक
    • भारतीय स्टेट बैंक
    • भारतीय खाद्य निगम
सरकारी कंपनियों की लेखा परीक्षा
  • सरकारी कंपनियों की लेखा परीक्षा में भी CAG की भूमिका सीमित होती है।
  • इन कंपनियों की लेखा परीक्षा निजी अंकेक्षकों द्वारा की जाती है, जिन्हें CAG की सलाह पर सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है।
  • CAG इनकी पूरक लेखा परीक्षा या जांच लेखा परीक्षा कर सकता है।
ऑडिट बोर्ड की स्थापना
  • 1968 में CAG कार्यालय के तहत लेखा परीक्षा बोर्ड (Audit Board) की स्थापना की गई थी।
  • यह बोर्ड बाहरी विशेषज्ञों को विशेष उद्यमों जैसे इंजीनियरिंग, लौह और इस्पात, रसायन आदि के लेखा परीक्षा के तकनीकी पहलुओं को देखने के लिए नियुक्त करता है।
  • इस बोर्ड का गठन भारतीय प्रशासनिक सुधार आयोग की अनुशंसा पर किया गया था।
  • इस बोर्ड के पास एक अध्यक्ष और दो सदस्य होते हैं, जो CAG द्वारा नियुक्त किए जाते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर CAG की भूमिका

INTOSAI (International Organization of Supreme Audit Institutions)

  • विश्व स्तर पर सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्थानों (SAIs) का संगठन। 
  • भारत का CAG इसका सक्रिय सदस्य है। 
  • उद्देश्य – लेखापरीक्षण मानक तय करना, अनुभव साझा करना, सर्वोत्तम प्रथाएँ विकसित करना।

ASOSAI (Asian Organization of Supreme Audit Institutions)

  • एशियाई देशों की SAIs का संगठन। भारत संस्थापक सदस्य है और कई बार चेयरमैन रह चुका है। 
  • उद्देश्य – सहयोग, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण।

द्विपक्षीय संबंध (Bilateral Relations)

  • भारत का CAG विभिन्न देशों के साथ MoU करता है। 
  • उद्देश्य – तकनीकी सहयोग, अनुभव साझा करना और संयुक्त प्रशिक्षण।

वैश्विक लेखापरीक्षा नेतृत्व फोरम एवं अन्य निकाय

  • CAG, UN, विश्व बैंक, IMF और अन्य अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करता है। Global Audit Leadership Forum (GALF) में सक्रिय भूमिका।

अंतर्राष्ट्रीय लेखापरीक्षा कार्य

  • CAG, संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं (UN HQ, UNICEF, FAO, WHO आदि) का बाहरी ऑडिटर चुना गया है। इससे भारत की अंतर्राष्ट्रीय साख बढ़ी।

विदेशी लेखा परीक्षा कार्यालय

  • CAG, विदेशों में भारतीय दूतावासों व मिशनों के खातों की ऑडिट करता है, ताकि सार्वजनिक धन का सही उपयोग सुनिश्चित हो।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की प्रमुख चुनौतियाँ

1प्रशासन का सीमित ज्ञानऑडिटरों को प्रशासन की गहरी जानकारी न होने से दृष्टिकोण संकीर्ण हो जाता है।
2लेखापरीक्षा की जटिलताभ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के नए रूपों के कारण समस्याएँ बढ़ रही हैं।
3बढ़ती जिम्मेदारियाँपरंपरागत कार्यों के साथ अब PPP परियोजनाओं और नई योजनाओं का भी लेखा-जोखा करना पड़ता है।
4पूर्वाग्रही नियुक्ति का डरनियुक्ति की स्पष्ट प्रक्रिया न होने से कार्यपालिका पर अधिक नियंत्रण रहता है।
5व्यावहारिक चुनौतियाँदस्तावेजों में देरी, अधिकारियों का सहयोग न मिलना, कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार की जाँच में कठिनाई।
6रिकॉर्ड तक देर से पहुँचआवश्यक दस्तावेज समय पर न मिलने से गहन और समयबद्ध जाँच प्रभावित होती है।
7कार्यकाल की सीमा65 वर्ष की उम्र सीमा होने से छह वर्ष का पूरा कार्यकाल नहीं मिल पाता, जिससे निरंतरता प्रभावित होती है।
8पक्षपातपूर्ण ऑडिटिंग के आरोपऑडिट रिपोर्ट में नुकसान के अनुमान पर विवाद होते हैं, जिससे विश्वसनीयता पर प्रश्न उठते हैं।

पूर्व CAG विनोद राय द्वारा सुझाए गए प्रमुख सुधार 

  1. CAG के दायरे में सभी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) परियोजनाएँ, पंचायती राज संस्थान और सरकार द्वारा वित्तपोषित संस्थान शामिल किए जाने चाहिए।
  2. 1971 के CAG अधिनियम में संशोधन किया जाना चाहिए ताकि यह शासन में आए परिवर्तनों के अनुरूप हो सके।
  3. नए CAG का चयन, मुख्य सतर्कता आयुक्त (CVC) की तरह, कॉलेजियम प्रणाली के माध्यम से किया जाना चाहिए।

पॉल एच. एप्पलबाई की आलोचना (CAG की भूमिका)

क्र. सं.आलोचना / बिंदुसंक्षिप्त विवरण
1औपनिवेशिक विरासतCAG का कार्य ब्रिटिश शासन की विरासत है, जो स्वतंत्र भारत में भी जारी रहा।
2निर्णय लेने में अनिच्छाCAG का काम निर्णय लेने की अनिच्छा और काम की कमी का कारण है; इसे नकारात्मक और दमनात्मक प्रभाव वाला माना।
3संसदीय दायित्व का अतिवादसंसद लेखा परीक्षा को अत्यधिक महत्व देती है, लेकिन CAG के कार्यों को संविधान के अनुसार परिभाषित नहीं कर पाई।
4CAG का कार्य महत्त्वपूर्ण नहींCAG अच्छे प्रशासन को न तो समझते हैं और न ही उनसे ऐसी अपेक्षा की जा सकती है।
5लेखा परीक्षा प्रशासन नहीं हैलेखा परीक्षा एक सीमित और निरस कार्य है, जो प्रशासनिक निर्णयों के लिए बहुत उपयोगी नहीं है।
6विभागीय अधिकारियों का अधिक ज्ञानविभागीय अधिकारी (जैसे उप-सचिव) अपने विभाग की समस्याओं को CAG से बेहतर जानते हैं।
निष्कर्षसीमित प्रभाव और अवरोधCAG की भूमिका प्रशासनिक दृष्टि से अप्रासंगिक और बाधक है; इसे लेखा परीक्षा के दायित्व से मुक्त किया जाना चाहिए। यानी (CAG) का पद समाप्त कर दिया जाना चाहिए। 

लेखापरीक्षा सलाहकार बोर्ड-

  • यह बोर्ड नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) को लेखापरीक्षा से जुड़े मामलों जैसे – दृष्टिकोण, तकनीक, कवरेज, कार्यक्षेत्र और प्राथमिकताओं पर सलाह देता है।
  • इसके सदस्य मानद (Honorary) रूप से कार्य करते हैं।
  • 12वाँ लेखापरीक्षा सलाहकार बोर्ड 16 जुलाई 2025 से दो वर्षों के लिए गठित किया गया है।
  • अध्यक्ष- श्री के. संजय मूर्ति,(भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक)

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक अब तक

क्र.सं.नामकार्यकालविशेष टिप्पणी / प्रमुख तथ्य
1वी. नरहरी राव(1948-1954)स्वतंत्र भारत के पहले CAG थे।
2ए. के. चन्दा(1954-1960)
3ए. के. रॉय(1960-1966)
4एस. रंगनाथन(1966-1972)
5ए. बख्शी(1972-1978)
6ज्ञान प्रकाश(1978-1984)
7त्रिलोकी नाथ चतुर्वेदी(1984-1990)बाद में कर्नाटक के राज्यपाल भी बने।
8सी. जी. सोमैया(1990-1996)
9वी. के. शुंगलू(1996-2002)
10वी. एन. कौल(2002-2008)
11विनोद राय(2008-2013)2G स्पेक्ट्रम और कोयला आवंटन जैसी जाँच-बाजार के साथ CAG रिपोर्टों को राष्ट्रीय सुर्खियाँ दिलाईं।
12शशि कान्‍त शर्मा(2013-2017)
13राजीव महर्षि(2017-2020)एकमात्र ऐसे  अधिकारी जो CAG बनने से पहले Home Secretary, Finance Secretary और Chief Secretary के रूप में कार्य कर चुका है।
14गिरीश चंद्र मुर्मू(2020-2024)जम्मू और कश्मीर के पहले लेफ्टिनेंट गवर्नर भी रहे।
15के संजय मूर्ति21 नवंबर 2024 से……………..2029 तक 

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