केन्द्रीय सतर्कता आयोग

केन्द्रीय सतर्कता आयोग भारत सरकार का एक प्रमुख सतर्कता एवं भ्रष्टाचार-निरोधक संस्थान है, जिसकी स्थापना प्रशासनिक ईमानदारी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई। यह सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार की रोकथाम, जाँच की निगरानी और सतर्कता संबंधी मार्गदर्शन प्रदान करता है। राजनीतिक व्यवस्था और शासन विषय के अंतर्गत केन्द्रीय सतर्कता आयोग की संरचना, शक्तियाँ और कार्यों का अध्ययन महत्वपूर्ण माना जाता है।

गठन और पृष्ठभूमि:
  • गठन वर्ष: 1964
  • गठन का आधार: केंद्र सरकार द्वारा पारित एक कार्यपालिका प्रस्ताव।
  • सिफारिश करने वाली समिति: संथानम समिति (1962-64), जिसका उद्देश्य प्रशासनिक भ्रष्टाचार की रोकथाम था
  • CVC भारत सरकार के किसी भी मंत्रालय/विभाग के अधीन नहीं है।
  • यह एक स्वायत्त (independent) निकाय है जो केवल संसद के प्रति उत्तरदायी होता है।
  • CVC स्वयं कोई अन्वेषण (investigation) नहीं करता।
  • यह जाँच के लिए:
    • CBI (Central Bureau of Investigation) को निर्देश देता है, या
    • मुख्य सतर्कता अधिकारियों (CVOs) के माध्यम से सरकारी कार्यालयों में मामले की जाँच करवाता है।
  • भ्रष्टाचार निवारण विषय पर गठित संथानम समिति की सिफारिशों पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (Central Bureau of Investigation- CBI) की स्थापना 1 अप्रैल, 1963 को गृह मंत्रालय के एक प्रस्ताव द्वारा की गई थी। 
सांविधिक दर्जा:
  • प्रारंभ में CVC न तो एक संवैधानिक संस्था थी, न ही सांविधिक (Statutory)।
  • CVC अधिनियम, 2003 के द्वारा CVC को सांविधिक दर्जा प्रदान किया गया।
  • यह अधिनियम 11 सितंबर 2003 से लागू हुआ।
विजन:
  • भारत के नागरिकों की चिंताओं को दूर करने और उनकी अभिलाषाओं को पूरा करने के लिए, लोक प्रशासन की पारदर्शी और उत्तरदायी व्यवस्था को प्रोत्साहित करने हेतु नैतिकता और सत्यनिष्ठा के मूल्यों को बढ़ावा देकर सुशासन सुनिश्चित करना और भ्रष्टाचार का मुकाबला करना ।
मिशन :
  1. भ्रष्टाचार विरोधी नियमों और विनियमों को सख्ती से तथा शीघ्र लागू करके भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक विश्वसनीय अवरोधक का निर्माण करना ।
  2. भ्रष्टाचार को न्यूनतम करने के लिए प्रभावी निवारक उपाय तैयार करना ।
  3. नैतिक मूल्यों को अन्तर्निविष्ट करने और भ्रष्टाचार के प्रति समाज की सहनशीलता को कम करने के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाना ।
  4. भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष में नागरिकों, समाज और सभी हितधारकों की सहभागिता को प्रोत्साहित करना।संस्थागत और नियामक ढांचे को सशक्त करके और मानव संसाधन विकसित करके सतर्कता प्रशासन के मानकों की निरंतर वृद्धि करना ।
  5. प्रभावी रूप से लागू करने के लिए भ्रष्टाचार विरोधी अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना; सूचना साझा करना, वैश्विक सर्वोत्तम पद्धतियों का आदान-प्रदान करना और कर्मियों का क्षमता निर्माण करना।
स्वतंत्रता:
  • CVC को एक स्वतंत्र एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया है जो किसी कार्यपालिका नियंत्रण में नहीं होती है।
व्हिसल ब्लोअर सुरक्षा (2004):
  • वर्ष 2004 में CVC को “सार्वजनिक हित खुलासे एवं सूचना देने वाले की सुरक्षा प्रस्ताव” (Public Interest Disclosure and Protection of Informers – PIDPI) के तहत सूचना देने वालों (Whistle Blowers) से शिकायत प्राप्त करने और उन पर कार्यवाही करने के लिए अधिकृत किया गया।
  • इसका उद्देश्य था कि कोई भी व्यक्ति भ्रष्टाचार अथवा पद के दुरुपयोग की शिकायत गोपनीय रूप से कर सके।
  • आयोग को यह अधिकार भी है कि वह जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण शिकायतों को स्वयं ही निपटा सके।

प्रमुख भूमिका:

  • केंद्रीय सतर्कता आयोग को शीर्ष सतर्कता संस्था के रूप में माना गया है।
  • यह केंद्र सरकार के सभी विभागों, मंत्रालयों, सार्वजनिक उपक्रमों एवं स्वायत्त संस्थाओं की सतर्कता गतिविधियों की निगरानी करता है।
संरचना
  • संस्था का स्वरूप:
    • CVC एक बहुसदस्यीय संस्था है।
    • इसमें निम्न पदाधिकारी शामिल होते हैं:
      • एक केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (Chief Vigilance Commissioner) – अध्यक्ष के रूप में
      • अधिकतम दो सतर्कता आयुक्त (सदस्य)
  • नियुक्ति प्रक्रिया:
    • इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
    • राष्ट्रपति को एक तीन-सदस्यीय समिति की सिफारिश पर नियुक्ति करनी होती है, जिसमें शामिल होते हैं:
      • प्रधानमंत्री (अध्यक्ष)
      • लोकसभा में विपक्ष के नेता
      • केंद्रीय गृहमंत्री
  • कार्यकाल और प्रतिबंध:
    • कार्यकाल: 4 वर्ष अथवा 65 वर्ष की आयु, जो पहले हो, तक होता है।
    • कार्यकाल समाप्ति के बाद:
      • वे केंद्र या राज्य सरकार के किसी भी पद के लिए अयोग्य माने जाते हैं।
  • पद से हटाने की प्रक्रिया:
    • राष्ट्रपति निम्नलिखित परिस्थितियों में किसी आयुक्त को पद से हटा सकते हैं:
      • दिवालिया (Insolvent) घोषित होना।
      • चरित्रहीनता के आधार पर किसी अपराध में दोषी ठहराया जाना।
      • कार्यकाल के दौरान लाभ के पद को स्वीकार करना।
      • मानसिक या शारीरिक अक्षमता (राष्ट्रपति की राय में)।
      • ऐसा कोई आर्थिक लाभ लेना, जिससे आयोग का कार्य प्रभावित हो सकता हो।
    • गंभीर मामलों (दुराचार या अक्षमता) में:
      • राष्ट्रपति को मामला उच्चतम न्यायालय को संदर्भित करना होता है।
      • यदि जांच के उपरांत न्यायालय आरोपों को सही मानता है, तो राष्ट्रपति उसे पद से हटा सकते हैं।
    • “दुराचार” की परिभाषा:
      • यदि कोई सदस्य:
        • केंद्र सरकार के अनुबंध या कार्य में शामिल हो, या
        • ऐसे अनुबंधों से होने वाले लाभ में भागीदारी करता हो।
    • स्वैच्छिक इस्तीफा: सतर्कता आयुक्त राष्ट्रपति को पत्र लिखकर स्वयं भी इस्तीफा दे सकता/सकती है।
  • वेतन और सेवा शर्तें:
    • केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की सेवा शर्तें एवं वेतन संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष के समान होते हैं।
    • सतर्कता आयुक्तों की सेवा शर्तें एवं वेतन UPSC के सदस्यों के समान होते हैं।
    • नियुक्ति के बाद इनमें कोई अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जा सकता।

CVC (संशोधन) विधेयक, 2021 –

  • 2021 का संशोधन:
    • “केंद्रीय सतर्कता आयोग (संशोधन) विधेयक, 2021” के माध्यम से कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए।
    • इस संशोधन में CVC द्वारा सरकारी संगठनों की सतर्कता इकाइयों में कार्यरत अधिकारियों के स्थानांतरण और पोस्टिंग से संबंधित दिशा-निर्देशों को संशोधित किया गया।
  • कार्यकाल की सीमा:
    • अब किसी भी अधिकारी का एक स्थान पर अधिकतम कार्यकाल 3 वर्ष तक सीमित कर दिया गया है।
    • यह व्यवस्था ब्यूरोक्रेटिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए की गई है।

संगठनात्मक ढांचा

मुख्य घटक (Main Components):

  • CVC के अंतर्गत तीन प्रमुख इकाइयाँ होती हैं:
    • सचिवालय (Secretariat)
    • मुख्य तकनीकी परीक्षक शाखा (CTE Branch)
    • विभागीय जाँचों के लिए आयुक्त (CDI Branch)
सचिवालय (Secretariat):
    • यह CVC की प्रशासनिक शाखा है।
    • इसमें निम्न कर्मचारी कार्यरत होते हैं:
      • एक सचिव (Secretary)
      • संयुक्त सचिव (Joint Secretaries)
      • उप सचिव (Deputy Secretaries)
      • अवर सचिव (Under Secretaries)
      • कार्यालय सहायक कर्मचारी (Office Staff)
    मुख्य तकनीकी परीक्षक शाखा (CTE Branch):
      • यह आयोग की तकनीकी शाखा है।
      • इसके प्रमुख होते हैं:
        • मुख्य अभियंता (Chief Engineer) – जिन्हें मुख्य तकनीकी परीक्षक (CTE) कहा जाता है।
        • इनके अधीन सहायक अभियंता स्टाफ भी कार्य करते हैं।
      • CTE शाखा के मुख्य कार्य:
        • सरकारी निर्माण कार्यों का तकनीकी अंकेक्षण – सतर्कता दृष्टिकोण से।
        • निर्माण संबंधी शिकायतों की विशिष्ट मामलों में जाँच।
        • CBI को तकनीकी मामलों की जाँच में सहयोग प्रदान करना, जैसे:
          • तकनीकी मामलों की विशेषज्ञता
          • दिल्ली स्थित संपत्तियों के मूल्यांकन में सहायता
      • CVC एवं मुख्य सतर्कता अधिकारियों (CVOs) को तकनीकी विषयों पर सलाह/सहायता देना।
      • विभागीय जाँचों के लिए आयुक्त (Commissioners for Departmental Inquiries – CDI):
        • ये जाँच अधिकारी होते हैं।
        • कार्य : लोक सेवकों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई में मौखिक सुनवाई और जाँच-पड़ताल करना।

      मुख्य कार्य एवं शक्तियाँ(Main Functions and Powers)

      केन्द्रीय सतर्कता आयोग के सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 के अंतर्गत इस आयोग के अधिकार एवं कार्य निम्नलिखित हैं

      1. केंद्र सरकार के निर्देश पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत किसी भी कर्मचारी के विरुद्ध जांच करना।
      2. CVC को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के तहत संदेहास्पद लेनदेन या कार्यों की सूचना प्राप्त करने का अधिकार प्राप्त है।
      3. CVC के पास दीवानी न्यायालय जैसी शक्तियाँ हैं:
        • गवाहों को बुलाना,
        • दस्तावेज़ प्रस्तुत करने के लिए बाध्य करना,
        • शपथ पर साक्ष्य लेना आदि।
          • इसका चरित्र अर्ध-न्यायिक (quasi-judicial) माना जाता है।
      4. निम्न श्रेणियों के अधिकारियों के विरुद्ध शिकायतों की जांच:
        • भारत सरकार के ग्रुप ‘A’ के अधिकारी।
        • अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी।
        • केंद्र सरकार के प्राधिकरणों के निर्दिष्ट स्तर के अधिकारी।
      5. CBI (दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना) के भ्रष्टाचार मामलों की जाँच और कार्यप्रणाली की निगरानी।
      6. CBI को भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों में निर्देश देना।
      7. CBI द्वारा की गई जांचों की समीक्षा करना।
      8. मुकदमा चलाने हेतु प्राधिकरणों को भेजे गए लंबित मामलों की समीक्षा करना।
      9. केंद्र सरकार व उसके अधीन प्राधिकरणों को सतर्कता मामलों में सलाह देना।
      10. केंद्र सरकार के मंत्रालयों व विभागों के सतर्कता प्रशासन पर नजर रखना।
      11. लोकहित उद्घाटन (Whistleblower) व सूचक सुरक्षा से संबंधित शिकायतों की जांच करना।
      12. सतर्कता और अनुशासन से संबंधित मामलों में केंद्र सरकार को नियम बनाने में सलाह देना।
      13. प्रवर्तन निदेशालय (ED) के निदेशक एवं वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति के लिए चयन समिति का सदस्य होना।
      14. मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम, 2002 के तहत संदिग्ध लेन-देन की सूचना प्राप्त करने का विशेषाधिकार।

      लोकपाल एक्ट 2013 के बाद हुए बदलाव

      1. नियुक्तियों में भूमिका
        • CBI में नियुक्ति:
          • केंद्रीय सतर्कता आयुक्त समिति के अध्यक्ष होते हैं
          • समिति की सिफारिशों पर केंद्र सरकार CBI में पुलिस अधीक्षक और उससे ऊपर के स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति करती है
          • CBI के निदेशक को छोड़कर
        • ED (Enforcement Directorate) में नियुक्ति:
          • केंद्रीय सतर्कता आयुक्त समिति के अध्यक्ष
          • समिति की सिफारिशों पर केंद्र सरकार उप निदेशक स्तर से ऊपर के पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति करती है
      2. लोकपाल द्वारा भेजे गए मामलों की प्राथमिक जांच करना:
        • समूह A और B की रिपोर्ट लोकपाल को भेजी जाती है।
        • समूह C और D की आगे की जांच CVC स्वयं करता है और दोषी पाए गए अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश करता है।
      कार्यक्षेत्र (Jurisdiction of CVC)
      1. केंद्र सरकार से संबंधित अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्य और ग्रुप ‘A’ अधिकारी।
      2. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में स्केल-5 से ऊपर के अधिकारी।
      3. RBI, NABARD, SIDBI में ग्रेड D और उससे ऊपर के अधिकारी।
      4. सरकारी उपक्रमों के बोर्ड के मुख्य कार्यकारी, कार्यकारी और E-8 / E-7 या उससे ऊपर के अधिकारी।
      5. साधारण बीमा कंपनियों में प्रबंधक और ऊपर के अधिकारी।
      6. LIC में वरिष्ठ डिविजनल प्रबंधक और ऊपर के अधिकारी।
      7. वे अधिकारी जो ₹8700 प्रतिमाह (संशोधित वेतनमान) या उससे अधिक वेतन पाते हैं तथा केंद्र सरकार द्वारा नियंत्रित सोसायटी/स्थानीय प्राधिकरणों के अधीन हों।
      कार्यप्रणाली (Working Method)
      1. आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली में है और यहीं से सभी कार्यों का संचालन होता है।
      2. यह अपनी कार्यवाही न्यायिक स्वभाव के साथ करता है और इसके पास दीवानी न्यायालय जैसी शक्तियाँ होती हैं।
      3. यह केंद्र सरकार या उसके प्राधिकरणों से जानकारी या रिपोर्ट मांग सकता है।
      4. किसी जांच एजेंसी से जांच रिपोर्ट मिलने पर आयोग संबंधित मंत्रालय या विभाग को कार्रवाई की सलाह देता है।
      5. यदि सरकार आयोग की सलाह से असहमत होती है, तो उसे कारण लिखित रूप में आयोग को बताना होता है।
      6. आयोग प्रतिवर्ष अपनी वार्षिक रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपता है, जिसे संसद में प्रस्तुत किया जाता है।
      मंत्रालयों में सतर्कता इकाइयाँ (Vigilance Units in Ministries)
      1. मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO):
        • प्रत्येक मंत्रालय/विभाग में एक मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) होता है।
        • यह अधिकारी मंत्रालय के सतर्कता प्रभाग का प्रमुख होता है।
      2. भूमिका और जिम्मेदारियाँ:
        • सचिव एवं विभागाध्यक्ष को सतर्कता मामलों में सलाह देना।
        • संबंधित संस्था, CBI और CVC के बीच संपर्क की कड़ी बनना।
      3. मुख्य कार्य:
        • कर्मचारियों द्वारा किए गए भ्रष्ट आचरण की जानकारी एकत्र करना।
        • सत्यापन योग्य आरोपों की जाँच/अनुसंधान करना।
        • जाँच रिपोर्टों को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए तैयार करना।
        • ज़रूरत पड़ने पर मामलों को CVC को संदर्भित करना।

      CVC की सीमाएँ (Limitations)

      1. सिर्फ सलाहकार निकाय:
        • CVC को एक “सिर्फ सलाह देने वाला निकाय” माना जाता है।
        • किसी भी अधिकारी के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज करने का अधिकार नहीं है।
      2. सीमित जांच अधिकार:
        • CVC के पास संयुक्त सचिव या उससे ऊपर के अधिकारियों के विरुद्ध CBI जांच का निर्देश देने का अधिकार नहीं है (इसके लिए सरकार की अनुमति आवश्यक है)।
      3. संसाधनों की कमी:
        • आयोग के पास स्वतंत्र जांच हेतु आवश्यक संसाधनों की कमी है।
        • यह पूरी तरह CBI या CVOs पर निर्भर है।
      4. सलाह को मानने की बाध्यता नहीं:
        • केंद्रीय मंत्रालय या विभाग CVC की सलाह को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं। वे उसे अस्वीकार भी कर सकते हैं।
      5. केवल सतर्कता या अनुशासनात्मक मामलों में अधिकार:
        • CVC का अधिकारक्षेत्र आपराधिक मामलों तक सीमित नहीं है।
        • यह केवल सतर्कता, भ्रष्टाचार और आचरण संबंधी मामलों से निपटता है।

      व्हिसल ब्लोवर संरक्षण विधेयक, 2011

      पृष्ठभूमि:

      • 26 अगस्त, 2010 को केंद्र सरकार ने लोकसभा में “जनहित प्रकटीकरण एवं प्रकटीकरण करने वाले व्यक्तियों के संरक्षण संबंधी विधेयक, 2010” (Public Interest Disclosure and Protection to Persons Making the Disclosure Bill, 2010) पेश किया।
      • इस विधेयक का उद्देश्य था — सरकारी भ्रष्टाचार और विशेषाधिकारों के दुरुपयोग को उजागर करने वालों को कानूनी संरक्षण देना।
      • विधेयक संसद की स्थायी समिति को भेजा गया, जिसकी सिफारिशों के आधार पर सरकार ने 13 दिसंबर 2011 को इसमें संशोधन किया और इसका नाम बदलकर “व्हिसल ब्लोअर संरक्षण विधेयक, 2011” कर दिया।
      • लोकसभा ने 27 दिसंबर 2011 को इसे पारित किया, लेकिन राज्यसभा में यह 2011, 2012 और 2013 के विभिन्न सत्रों में चर्चा सूची में होते हुए भी पारित नहीं हो पाया।
      • अंततः यह विधेयक 21 फरवरी 2014 को राज्यसभा से पारित हुआ और 9 मई 2014 को राष्ट्रपति की स्वीकृति के साथ “सूचना प्रदाता संरक्षण अधिनियम, 2014” (Whistle Blowers’ Protection Act, 2014) के रूप में लागू हुआ।

        प्रमुख विशेषताएँ:

        • गोपनीयता की सुरक्षा: अधिनियम व्हिसल ब्लोअर की पहचान को गोपनीय रखने की विधि प्रदान करता है ताकि उन्हें प्रताड़ना या खतरे का सामना न करना पड़े।
        • जनहित में प्रकटीकरण का प्रावधान: कोई भी व्यक्ति भ्रष्टाचार या सरकारी सेवकों द्वारा अधिकारों के दुरुपयोग को जनहित में उजागर कर सकता है, चाहे वह मंत्री ही क्यों न हो।
        • प्राधिकृत निकाय: ऐसे प्रकटीकरण केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) या सरकार द्वारा अधिसूचित किसी अन्य सक्षम निकाय के समक्ष किए जा सकते हैं।
        • दुर्भावनापूर्ण शिकायत पर दंड: यदि कोई शिकायत झूठी या दुर्भावना से प्रेरित पाई जाती है, तो शिकायतकर्ता को 2 वर्ष तक की जेल और ₹30,000 तक जुर्माने की सजा हो सकती है।
        • विश्वसनीयता की शपथ: जो व्यक्ति शिकायत कर रहा है उसे यह घोषणा करनी होती है कि वह जानकारी सही और प्रमाणिक है, और यह उसने स्वयं की संतुष्टि के बाद दी है।
        • प्रक्रिया:
          • प्रकटीकरण लिखित रूप में या ईमेल के माध्यम से किया जा सकता है।
          • पूरी जानकारी और प्रमाणिक दस्तावेज़ों के साथ यह प्रक्रिया निर्धारित मानदंडों के अनुसार होनी चाहिए।
        • गुमनाम शिकायतों पर कार्रवाई नहीं: यदि कोई शिकायतकर्ता अपनी पहचान नहीं बताता या उसकी पहचान सत्यापित नहीं की जा सकती, तो उस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
        • राष्ट्रीय सुरक्षा अपवाद: अधिनियम राष्ट्रीय सुरक्षा, जम्मू-कश्मीर, सशस्त्र बलों, प्रधानमंत्री की सुरक्षा में लगे बल, और पूर्व प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा में लगे बलों पर लागू नहीं होता।

            महत्वपूर्ण तथ्य

            केंद्रीय सतर्कता आयुक्त
            1. श्री एन. एस. राउ – 19 फरवरी 1964 से 23 अगस्त 1968
            2. श्री एस. दत्त
            3. श्री बी. के. आचार्य
            4. श्री एम. जी. पिम्पुटकर
            5. श्री राम कृष्ण त्रिवेदी
            6. श्री आर. पी. खन्ना
            7. श्री उ. सी. अग्रवाल
            8. श्री सी. जी. सोमैया
            9. श्री टी. यू. विजयशेखरन
            10. श्री एस. वी. गिरी
            11. श्री एन. वितल
            12. श्री पी. शंकर
            13. श्री प्रत्युष सिन्हा
            14. श्री पी. जे. थॉमस
              • सितंबर 2010 में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) की सिफारिश पर पी. जे. थॉमस को मुख्य सतर्कता आयुक्त (CVC) नियुक्त किया गया।
              • उनकी नियुक्ति शुरू से ही विवादों में रही, क्योंकि उनके विरुद्ध पूर्व में पामोलिन घोटाले से जुड़े आरोपों के मामले लंबित थे।
              • इस नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
              • 3 मार्च 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने पी. जे. थॉमस की नियुक्ति को अवैध ठहराकर रद्द कर दिया।
              • इसके बाद पी. जे. थॉमस ने मुख्य सतर्कता आयुक्त पद से इस्तीफा दे दिया।
            15. श्री प्रदीप कुमार
            16. श्री राजीव
            17. श्री के. वी. चौधरी
            18. श्री शरद कुमार
            19. श्री संजय कोठारी
            20. श्री सुरेश एन. पटेल
            21. श्री प्रवीण कुमार श्रीवास्तव – वर्तमान में (29.05.2023 से)
            अन्य सतर्कता आयुक्त
            1. श्री वी. एस. माथुर – 16/03/1999 से 15/03/2002 तक
            2. श्री एच. जे. डोरा
            3. श्री जांकी बल्लभ
            4. श्री सुदीप कुमार
            5. श्रीमती रंजना कुमार
            6. श्री आर. श्रीकुमार
            7. श्री जे. एम. गर्ग
            8. श्री राजीव (पहला कार्यकाल)
            9. श्री राजीव (दूसरा कार्यकाल)
            10. डॉ. तेजेंद्र मोहन भासिन
            11. श्री शरद कुमार
            12. श्री सुरेश एन. पटेल
            13. श्री अरविंद कुमार – 03/08/2022 से 29/09/2024 तक
            14. श्री ए. एस. राजीव – वर्तमान में

            वर्तमान में –

            1. श्री प्रवीण कुमार श्रीवास्तव (केंद्रीय सतर्कता आयुक्त) (29.05.2023 से)
            2. श्री ए एस राजीव (सतर्कता आयुक्त)
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