माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 विधि विषय का एक महत्वपूर्ण कानून है, जिसे वरिष्ठ नागरिकों और माता-पिता की देखभाल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया है। यह अधिनियम उनके भरण-पोषण, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन जीने के अधिकार को कानूनी संरक्षण प्रदान करता है।

विगत वर्षों के प्रश्न

वर्षप्रश्नअंक
2023माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 के अन्तर्गत “बच्चों में क्या सम्मिलित है?2M
2021माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के अनुसार ‘रिश्तेदार’ कोपरिभाषित कीजिए ।2M

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 परिभाषा

  • बालक – बालक के अंतर्गत पुत्र, पुत्री, पौत्र और पौत्री हैं, किंतु इसमें कोई अवयस्क सम्मिलित नहीं है;
  • अवयस्क – ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जिसके बारे में भारतीय वयस्कता अधिनियम, 1875 के उपबंधों के अंतर्गत यह समझा जाता है कि उस व्यक्ति को आयु प्राप्त नहीं हो है;
  • माता-पिता – से पिता या माता अभिप्नेत है चाहे वह, यथास्थिति: जैविक, दत्तक या सौतेला पिता या सौतेली माता है, चाहें माता या पिता कोर्ई वरिष्ठ नागरिक है या नहों;
  • नातेदार – निःसंतान वरिष्ठ नागरिक का कोई विधिक वारिस अभिप्रेत है जो अवयस्क नही है तथा उसकी मृत्यु के पश्चात्‌ उसकी संपत्ति उसके कब्जे में है या विरासत में प्राप्त करेगा;
  • वृद्ध नागरिक – कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जो भारत का नागरिक है और जिसमें साठ वर्ष या अधिक आयु प्राप्त कर ली हो;
  • संपत्ति– ‘संपत्ति’ से किसी प्रकार की संपत्ति अभिप्रेत है, चाहे वह चल या अचल, पैतृक या स्वयं अर्जित, मूर्त या अमूर्त हो, और जिसमें ऐसी संपत्ति में अधिकार या हित सम्मिलित हो

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 अधिनियम का विस्तार

  • इसका विस्तार, जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय संपूर्ण भारत पर है और यह भारत के बाहर के नागरिकों पर भी लागू होगा।

माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण (धारा 4)

माता-पिता सहित कोई वरिष्ठ नागरिक, जो अपनी कमाई से या अपने स्वामित्व वाली संपत्ति से अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ है, निम्नलिखित की स्थिति में धारा 5 के अंतर्गत आवेदन करने का हकदार होगा

  • किसी निःसंतान वरिष्ठ नागरिक द्वारा निर्दिष्ट उसके किसी संबंधी के विरुद्ध।
  • माता-पिता या दादा-दादी द्वारा अपने एक या अधिक बच्चों के नाबालिग न होने के विरुद्ध

भरणपोषण के लिए आवेदन (धारा 5)

  1. धारा 4 के अंतर्गत भरण-पोषण के लिए आवेदन निम्नलिखित माध्यम से किया जा सकता है-
  2. किसी वरिष्ठ नागरिक या माता-पिता द्वारा, जैसा भी मामला हो; या
  3. यदि वह असमर्थ है तो उसके द्वारा अधिकृत किसी अन्य व्यक्ति या संगठन द्वारा; या
  4. न्यायाधिकरण स्वप्रेरणा से संज्ञान ले सकता है।

भरण-पोषण न्यायाधिकरण का गठन (धारा 7)

  1. न्यायाधिकरण का गठन :
    • राज्य सरकार द्वारा, इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से छह मास की अवधि के भीतर
  2. अध्यक्षता :
    • राज्य के उप-खंड अधिकारी (SDO) के पद से नीचे का अधिकारी नहीं करेगा।

भरण-पोषण हेतु आदेश  (धारा-9)

  • बच्चे या नातेदार किसी वरिष्ठ नागरिक का भरण-पोषण करने में उपेक्षा करते हैं या इंकार करते हैं, जो स्वयं भरण-पोषण करने में असमर्थ है, तो न्यायाधिकरण ऐसी उपेक्षा या इंकार के बारे में समाधान हो जाने पर ऐसे बच्चों या नातेदारों को आदेश दे सकेगा कि वे ऐसे वरिष्ठ नागरिक के भरण-पोषण के लिए ऐसी मासिक दर पर मासिक भत्ता दें,
  • अधिकतम भरण-पोषण भत्ता – दस हजार रुपए प्रतिमाह

अपील (धारा-16)

  • न्यायाधिकरण के किसी आदेश से व्यथित कोई वरिष्ठ नागरिक या माता-पिता, जैसा भी मामला हो, आदेश की तारीख से साठ दिनों के भीतर अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील कर सकता है।
माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007

अनुरक्षण अधिकारी (धारा- 18)

  • राज्य सरकार जिला समाज कल्याण अधिकारी या जिला समाज कल्याण अधिकारी से नीचे के पद के किसी अधिकारी को, चाहे उसे किसी भी नाम से पुकारा जाता हो, भरण-पोषण अधिकारी के रूप में पदनामित करेगी।

वृद्धाश्रमों की स्थापना (धारा-19)

  • राज्य सरकार, आवश्यक समझे जाने वाले सुगम स्थानों पर चरणबद्ध तरीके से उतनी संख्या में वृद्धाश्रमों की स्थापना और रख-रखाव कर सकेगी, 
  • जिसकी शुरुआत प्रत्येक जिले में कम से कम एक वृद्धाश्रम से होगी, जिसमें कम से कम एक सौ पचास निर्धन वरिष्ठ नागरिकों को रखा जा सकेगा।
प्रावधान माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण संसोधन बिल, 2019
परिभाषा 
बच्चेइसमें अवयस्क को छोड़कर बच्चे और पोते-पोतियों को शामिल किया गया है। इसमें सौतेले बच्चे, दत्तक बच्चे, बहू-दामाद और नाबालिग बच्चों के कानूनी संरक्षक को भी जोड़ा गया है।
रिश्तेदार अवयस्क को छोड़कर उन कानूनी वारिसों को शामिल करता है, जो संतानविहीन वरिष्ठ नागरिक की संपत्ति के उत्तराधिकारी होंगे।अवयस्क को भी शामिल कर दिया गया है, जिनका प्रतिनिधित्व उनके कानूनी संरक्षक करेंगे।
माता-पिता इसमें जैविक, दत्तक और सौतेले माता-पिता शामिल हैं।इसमें सास-ससुर और दादा-दादी, नाना-नानी को भी शामिल किया गया है।
भरण-पोषण इसमें भोजन, वस्त्र, आवास, चिकित्सकीय देखभाल और उपचार का प्रावधान शामिल है।इसमें स्वास्थ्य सेवा, सुरक्षा और वरिष्ठ नागरिकों के गरिमापूर्ण जीवन के लिए अन्य आवश्यक सुविधाओं का प्रावधान भी जोड़ा गया है।
कल्याणइसमें भोजन, स्वास्थ्य सेवा और वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवश्यक अन्य सुविधाएं शामिल हैं।इसमें आवास, वस्त्र, सुरक्षा और वरिष्ठ नागरिकों या माता-पिता के शारीरिक और मानसिक कल्याण के लिए आवश्यक अन्य सुविधाएं शामिल की गई हैं।

FAQ (Previous year questions)

धारा 2(ए) :  बालक के अंतर्गत पुत्र, पुत्री, पौत्र और पौत्री हैं, किंतु इसमें कोई अवयस्क सम्मिलित नहीं है.

धारा 2(जी): “रिश्तेदार” से तात्पर्य निःसंतान वरिष्ठ नागरिक के किसी कानूनी उत्तराधिकारी से है जो नाबालिग न हो और उसकी संपत्ति पर कब्जा रखता हो या उसकी मृत्यु के बाद उसे विरासत में प्राप्त करेगा।

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 के अन्तर्गत “बच्चों में क्या सम्मिलित है? (अंक – 2 M, 2023)

धारा 2(ए) :  बालक के अंतर्गत पुत्र, पुत्री, पौत्र और पौत्री हैं, किंतु इसमें कोई अवयस्क सम्मिलित नहीं है.

माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के अनुसार ‘रिश्तेदार’ को परिभाषित कीजिए । (अंक – 2 M, 2021)

धारा 2(जी): “रिश्तेदार” से तात्पर्य निःसंतान वरिष्ठ नागरिक के किसी कानूनी उत्तराधिकारी से है जो नाबालिग न हो और उसकी संपत्ति पर कब्जा रखता हो या उसकी मृत्यु के बाद उसे विरासत में प्राप्त करेगा।

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