तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वय

तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वय मनुष्य के शरीर में विभिन्न अंगों और क्रियाओं को एक साथ संचालित करने वाला महत्वपूर्ण तंत्र है। जीवविज्ञान के अध्ययन में यह विषय हमें बताता है कि मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और नसों के माध्यम से शरीर के सभी अंग किस प्रकार आपस में जुड़कर समन्वय स्थापित करते हैं।

समन्वय होमियोस्टेसिस (स्वस्थ एवं संतुलित आंतरिक वातावरण) को बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो शरीर के उचित कार्य के लिए आवश्यक है। मनुष्यों में, अंगों और अंग प्रणालियों को शरीर के कुशल संचालन हेतु समकालिक तरीके से कार्य करने की आवश्यकता होती है। यह समन्वय शरीर को बाहरी और आंतरिक परिवर्तनों के प्रति प्रतिक्रिया करने में सक्षम बनाता है, जिससे चयापचय, तापमान नियमन और पेशीय गतिविधि जैसी प्रक्रियाएँ सुचारू रूप से संपन्न होती हैं।

मानव शरीर में समन्वय के लिए उत्तरदायी दो प्रमुख प्रणालियाँ हैं:

  1. तंत्रिका तंत्र
  2. अंतःस्रावी तंत्र
  1. तंत्रिका तंत्र:
    • तंत्रिका तंत्र तंत्रिका आवेगों (विद्युत संकेतों) के माध्यम से तीव्र, बिंदु-से-बिंदु संचार प्रदान करता है जो न्यूरॉन्स के साथ यात्रा करते हैं। ये आवेग शरीर को उद्दीपनों के प्रति त्वरित प्रतिक्रिया करने में सक्षम बनाते हैं।
    • तंत्रिका तंत्र उन क्रियाओं के समन्वय के लिए उत्तरदायी है जिनके लिए तत्काल और सटीक प्रतिक्रियाओं की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, जब आप किसी गर्म वस्तु को छूते हैं, तंत्रिका तंत्र आपको अपना हाथ शीघ्रता से हटाने में सक्षम बनाता है, जिससे चोट लगने से बचाव होता है।
  2. अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System):
    • अंतःस्रावी तंत्र, दूसरी ओर, हार्मोन्स के रक्तप्रवाह में स्राव के माध्यम से धीमी लेकिन अधिक स्थायी समन्वय प्रदान करता है। हार्मोन विभिन्न लक्ष्य अंगों तक पहुँचते हैं और वृद्धि, चयापचय तथा प्रजनन जैसी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
    • अंतःस्रावी तंत्र यह सुनिश्चित करता है कि शरीर लंबी अवधि में संतुलन बनाए रखे। उदाहरण के लिए, इंसुलिन और ग्लूकागन का स्राव रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है, जो कोशिकाओं को ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करता है।

मानव में तंत्रिका तंत्र

मानव शरीर में तंत्रिका तंत्र एक अत्यधिक विशेषीकृत नेटवर्क है जो शरीर की गतिविधियों का समन्वय करता है, संवेदी सूचनाओं को प्रक्रमित करता है और शरीर के विभिन्न भागों के बीच संचार सुविधाजनक बनाता है। यह तंत्र न्यूरॉन नामक विशेष कोशिकाओं से बना होता है जो विभिन्न प्रकार के उद्दीपनों का पता लगाने, ग्रहण करने और संचारित करने में सक्षम होते हैं। मानव में तंत्रिका तंत्र को दो मुख्य भागों में विभाजित किया गया है:

  1. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सीएनएस)
  2. परिधीय तंत्रिका तंत्र (पीएनएस)

केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS)

  • घटक: मस्तिष्क + मेरुरज्जु
  • कार्य: नियंत्रण केंद्र, संवेदी सूचना प्रसंस्करण, निर्णय लेना, संज्ञान, स्मृति, भावनाएँ

परिधीय तंत्रिका तंत्र (PNS)

  • घटक: CNS के बाहर स्थित तंत्रिकाएँ
  • कार्य: CNS को शरीर के अंगों (अंगों, मांसपेशियों, ग्रंथियों) से जोड़ना
  • तंतु प्रकार:
    • संवेदी या अभिवाही: संवेदी सूचना CNS तक ले जाते हैं
    • चालक/प्रेरक या अभिवाही: नियामक उद्धीपनों को CNS से संबधित परिधीय ऊतको/ अंगो तक पहुंचाती।
  • PNS उपविभाग:
    • कंकालीय तंत्रिका तंत्र (Somatic): ऐच्छिक गतिविधियाँ + कंकालीय मांसपेशियों से संवेदी सूचना नियंत्रित करता है
    • स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (Autonomic): अनैच्छिक कार्य नियंत्रित करता है (हृदय गति, पाचन)
      • अनुकंपी (Sympathetic): “लड़ो या भागो” (हृदय गति, रक्तचाप बढ़ाता है)
      • परानुकम्पी (Parasympathetic): “आराम और पाचन” (हृदय गति धीमी करता है, पाचन बढ़ाता है)
      • आंतरांग तंत्रिका तंत्र (Visceral): आंतरिक अंगों से/तक आवेग नियंत्रित करता है

न्यूरॉन्स (तंत्रिका कोशिकाएँ)

  • तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाइयाँ
  • न्यूरॉन्स तंत्रिका तंत्र की मूलभूत इकाइयाँ हैं जो तंत्रिका आवेगों के संचरण के लिए उत्तरदायी होती हैं। 

प्रत्येक न्यूरॉन में तीन प्राथमिक घटक होते हैं:

  • कोशिका काय (सोमा):
    • कोशिका काय में केंद्रक एवं अन्य कोशिकांग पाए जाते हैं
    • इसमें निसल के दाने (Nissl’s granules) होते हैं जो न्यूरॉन के कार्य के लिए आवश्यक प्रोटीन संश्लेषण में भाग लेते हैं।
  • डेंड्राइट्स (द्रुमाक्ष्य):
    • कोशिका काय से निकलने वाली छोटी, शाखित संरचनाएँ। अन्य न्यूरॉन्स या संवेदी कोशिकाओं से संकेत प्राप्त करती हैं। आवेगों को कोशिका काय की ओर संचारित करती हैं।
  • एक्सॉन (तंत्रिकाक्ष):
    • एक लंबा, अशाखित तंतु जो तंत्रिका आवेगों को कोशिका काय से दूर अन्य न्यूरॉन्स, मांसपेशियों या ग्रंथियों तक पहुँचाता है।
    • एक्सॉन के अंत में सिनैप्टिक नॉब (synaptic knobs) या टर्मिनल्स होते हैं। इनमें न्यूरोट्रांसमीटर से भरी सिनैप्टिक पुटिकाएँ (synaptic vesicles) पाई जाती हैं। 
    • ये न्यूरोट्रांसमीटर सिनैप्स (दो न्यूरॉन्स के बीच का अंतराल) में संकेत संचरण में सहायता करते हैं।
तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वय
Fig: न्यूरॉन की संरचना
न्यूरॉन्स के प्रकार

न्यूरॉन्स को उनमें उपस्थित एक्सॉन और डेंड्राइट्स की संख्या के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:

  • बहुध्रुवी न्यूरॉन: 1 एक्सॉन, अनेक डेंड्राइट्स (सर्वाधिक सामान्य, प्रमस्तिष्क प्रांतस्था में पाए जाते हैं)
  • द्विध्रुवी न्यूरॉन: 1 एक्सॉन, 1 डेंड्राइट (संवेदी अंगों में पाए जाते हैं, जैसे रेटिना)
  • एकध्रुवी न्यूरॉन: एकल प्रक्रिया दो शाखाओं में विभाजित होती है (भ्रूण में पाए जाते हैं)
तंत्रिका आवेगों का संचरण
  1. तंत्रिका आवेग उत्पन्न होना:
    • एक उद्दीपन (जैसे स्पर्श, ध्वनि) न्यूरॉन में विद्युत आवेश में परिवर्तन को ट्रिगर करता है।
    • आयनों (सोडियम, पोटैशियम) की गति एक क्रिया विभव (तंत्रिका आवेग) उत्पन्न करती है।
  2. आवेग चालन:
    • क्रिया विभव न्यूरॉन के एक्सॉन के साथ सिनैप्स की ओर यात्रा करता है।
  3. सिनैप्टिक संचरण:
    • सिनैप्स पर, विद्युत आवेग न्यूरोट्रांसमीटर के मुक्त होने को ट्रिगर करता है।
    • न्यूरोट्रांसमीटर सिनैप्टिक अंतराल को पार करते हैं और अगले न्यूरॉन पर रिसेप्टर्स से बंधते हैं।
  4. आवेग प्रसार:
    • न्यूरोट्रांसमीटर का बंधन पोस्टसिनैप्टिक न्यूरॉन की झिल्ली विभव में परिवर्तन का कारण बनता है।
    • यह एक नया क्रिया विभव उत्पन्न कर सकता है, जिससे संकेत संचरण जारी रहता है।
  5. संकेत लक्ष्य तक पहुँचना:
    • संकेत तंत्रिका मार्ग के साथ अपने लक्ष्य (जैसे मांसपेशियों या ग्रंथियों) तक यात्रा करता है।
तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वय

केंद्रीय तंत्रिका तंत्र  (CNS)

तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वय

केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सीएनएस), जिसमें मस्तिष्क और मेरुरज्जु शामिल हैं, शरीर का प्राथमिक नियंत्रण और समन्वय केंद्र है। यह संवेदी सूचनाओं को प्रक्रमित और एकीकृत करता है, विचारों, भावनाओं और स्मृतियों को उत्पन्न करता है, और उद्दीपनों के प्रति प्रतिक्रिया आरंभ करता है। मस्तिष्क, कमांड सेंटर के रूप में, अनेक महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करता है जो शरीर के अस्तित्व और कुशलता के लिए आवश्यक हैं।

तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वय

मस्तिष्क

मस्तिष्क के कार्य:
  1. ऐच्छिक गतिविधियों का नियंत्रण: मस्तिष्क ऐच्छिक पेशीय गतिविधियों को नियंत्रित करता है, जिससे चलने, बोलने और लिखने या वाद्ययंत्र बजाने जैसी सूक्ष्म मोटर कौशल संबंधी क्रियाएँ संभव होती हैं।
  2. अनैच्छिक अंगों का नियमन: यह हृदय की धड़कन, श्वसन और पाचन जैसी अनैच्छिक क्रियाओं का भी प्रबंधन करता है। ये कार्य मस्तिष्क के विभिन्न भागों, विशेष रूप से पश्चमस्तिष्क और मस्तिष्क स्तंभ द्वारा नियंत्रित होते हैं।
  3. समस्थापन (होमियोस्टेसिस): मस्तिष्क शरीर के तापमान (तापनियमन), भूख, प्यास और दैनिक जैविक चक्रों (24-घंटे के जैविक चक्र) जैसी प्रमुख प्रक्रियाओं को नियंत्रित करके समस्थापन बनाए रखने में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
  4. भावनाएँ और व्यवहार: उच्चतर कार्य जैसे भावनाएँ, विचार प्रक्रियाएँ, बुद्धिमत्ताऔर स्मृति मस्तिष्क के विशिष्ट क्षेत्रों में संसाधित होती हैं। उदाहरण के लिए, लिम्बिक प्रणाली भावनाओं के लिए महत्वपूर्ण है, और प्रमस्तिष्कीय वल्कुट तर्क और समस्या-समाधान जैसे उच्च संज्ञानात्मक कार्यों में संलग्न होती है।
  5. अंतःस्रावी तंत्र का नियमन: मस्तिष्क कई अंतःस्रावी ग्रंथियों के साथ संचार करता है और उन्हें नियंत्रित करता है, जिससे हार्मोन उत्पादन और स्राव प्रभावित होता है। उदाहरण के लिए, यह पीयूष ग्रंथि को नियंत्रित करता है, जो बदले में वृद्धि, चयापचय और प्रजनन को नियंत्रित करती है।
  6. संवेदी प्रक्रमण: मस्तिष्क दृष्टि, श्रवण, स्वाद, स्पर्श और गंध जैसे संवेदी निवेशों के प्रक्रमण का स्थल है। इन संवेदी संकेतों की व्याख्या की जाती है ताकि प्रत्यक्षण और प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न की जा सकें।
मस्तिष्क के विभाग:

1. अग्रमस्तिष्क (Forebrain)

  1. प्रमस्तिष्क (Cerebrum):
    • बाएँ और दाएँ गोलार्धों में विभाजित, कॉर्पस कैलोसम द्वारा जुड़े (संचार के लिए)
    • प्रमस्तिष्कीय वल्कुट (Cerebral Cortex): धूसर द्रव्य, सतह क्षेत्र बढ़ाने के लिए सिलवटों वाली;
      जटिल क्रियाओं, संवेदी प्रक्रमण, स्मृति, बुद्धिमत्ता, संचार के लिए उत्तरदायी।
    • श्वेत द्रव्य (White Matter): माइलिन से ढंके तंत्रिका तंतु जो मस्तिष्क के विभिन्न क्षेत्रों के बीच संचार सुविधाजनक बनाते हैं।
  1. थैलेमस (Thalamus): संवेदी और प्रेरक संकेतों के लिए संपर्क स्थल।
  2. हाइपोथैलेमस (Hypothalamus): शरीर के तापमान, भूख, प्यास और आंतरिक घड़ी को नियंत्रित करता है; हार्मोन्स को प्रभावित करता है।
  3. लिम्बिक तंत्र (Limbic System): एमिग्डाला (भावनाएँ) और हिप्पोकैम्पस (स्मृति) को शामिल करता है, भावनाओं, प्रेरणा और व्यवहार को नियंत्रित करता है।

2. मध्यमस्तिष्क (Midbrain):

  1. अग्रमस्तिष्क और पश्चमस्तिष्क के बीच स्थित
  2. दृश्य, श्रवण और संवेदी निवेशों का प्रक्रमण करता है।
  3. कॉर्पोरा क्वाड्रीजेमिना: दृष्टि और ध्वनि से संबंधित प्रतिवर्त क्रियाओं में शामिल।
  4. सेरेब्रल एक्वाडक्ट (Cerebral Aqueduct): तीसरे और चौथे वेंट्रिकल को जोड़ता है, सेरेब्रोस्पाइनल द्रव (CSF) का संचार करता है।

पश्चमस्तिष्क (Hindbrain):

  1. पॉन्स (Pons): मध्यमस्तिष्क और मेडुला को जोड़ता है, मस्तिष्क के भागों को आपस में जोड़ता है।
  2. अनुमस्तिष्क (Cerebellum): संतुलन, पेशीय गतिविधियों और सूक्ष्म मोटर नियंत्रण का समन्वय करता है।।
  3. मेडुला ऑब्लोंगेटा (Medulla Oblongata): महत्वपूर्ण स्वायत्त कार्यों (श्वसन, हृदय गति, रक्तचाप) को नियंत्रित करता है।
मस्तिष्क स्तंभ (Brain Stem):

मस्तिष्क स्तंभ में मध्यमस्तिष्क (midbrain), पॉन्स (pons), और मेडुला ऑब्लोंगेटा (medulla oblongata) शामिल हैं। यह मस्तिष्क और मेरुरज्जु के बीच संचार मार्ग के रूप में कार्य करता है, तथा हृदय गति और श्वसन दर जैसे अनेक अनैच्छिक कार्यों को नियंत्रित करता है जो जीवन के लिए आवश्यक हैं।

मेरुरज्जु (Spinal Cord)

संरचना एवं कार्य

मेरुरज्जु केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) की एक बेलनाकार, लम्बी संरचना है जो मस्तिष्क स्तंभ से नीचे की ओर कशेरुक स्तंभ (vertebral column) में फैली होती है। यह तंत्रिकीय संकेतों के संचरण और प्रतिवर्त क्रियाओं (reflexes) को सुविधाजनक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

मेरुरज्जु की विशेषताएँ

  • स्थान एवं विस्तार:
    • मेरुरज्जु मेडुला ऑब्लोंगेटा (मस्तिष्क स्तंभ का भाग) से दूसरी कटि कशेरुका (L2) तक फैली होती है।
    • यह कशेरुक स्तंभ के भीतर सुरक्षित रहती है, जो चोट से सुरक्षा प्रदान करता है।
  • संरचना:
    • धूसर द्रव्य (Grey Matter):
      • मेरुरज्जु के केंद्र में स्थित, तितली या “H” के आकार का।
      • न्यूरॉन कोशिका काय, डेंड्राइट्स और सिनैप्स समाहित करता है।
    • श्वेत द्रव्य (White Matter): धूसर पदार्थ को घेरे रहता है।
  • कार्य:
    • प्रतिवर्त क्रिया (Reflex Action): गर्दन से नीचे की प्रतिवर्त क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जैसे दर्द से हटना या मुद्रा बनाए रखना।
    • संवेदी आवेग संचालन (Sensory Impulse Conduction): त्वचा, मांसपेशियों और अन्य परिधीय संरचनाओं से संवेदी सूचना को आरोही पथों (ascending tracts) द्वारा मस्तिष्क तक पहुँचाता है।
    • प्रेरक प्रतिक्रिया संचालन (Motor Response Conduction): मस्तिष्क से प्राप्त मोटर आदेशों को अवरोही पथों (descending tracts) द्वारा धड़ और अंगों की मांसपेशियों तक पहुँचाता है।
मेरुरज्जु के क्षेत्र

मेरुरज्जु को मेरु तंत्रिकाओं के आधार पर 31 खंडों में विभाजित किया गया है:

  • ग्रीवा (C1-C8): गर्दन और ऊपरी अंगों का नियंत्रण।
  • वक्षीय (T1-T12): धड़ और ऊपरी पीठ का नियंत्रण।
  • कटि (L1-L5): निचली पीठ और पैरों का नियंत्रण।
  • त्रिक (S1-S5): श्रोणि (Pelvis) और निचले अंगों का नियंत्रण।
  • कोक्सीजियल (1): पुच्छास्थि क्षेत्र।
NEURAL CONTROL AND COORDINATION
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