हरित हाइड्रोजन का उत्पादन नवीकरणीय ऊर्जा (जैसे सौर, पवन) का उपयोग करके पानी के विद्युत अपघटन (इलेक्ट्रोलिसिस) द्वारा किया जाता है। बिजली पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित करती है।
- कम कार्बन पदचिह्न : क्योंकि यह कोई ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं करता।
- ऊर्जा समृद्ध स्रोत: इसमें डीजल की तुलना में लगभग तीन गुना ऊर्जा घनत्व है। हालाँकि, अत्यधिक ठंडे तापमान की आवश्यकता के कारण इसके भंडारण और उत्पादन को सावधानीपूर्वक संभालने की आवश्यकता होती है।
- इस स्वच्छ ऊर्जा वाहक के परिवहन, उद्योग और बिजली उत्पादन में विविध अनुप्रयोग हैं, जो कार्बन उत्सर्जन को कम करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद करते हैं।
- MNRE द्वारा निर्धारित भारत के लिए ग्रीन हाइड्रोजन मानक, 12 महीने की औसत उत्सर्जन सीमा के रूप में प्रति किलोग्राम H2 के बराबर 2 किलोग्राम CO2 का मानदंड स्थापित करता है।
- (12 महीने के औसत के रूप में 2 किलो CO2 इक्विवैलेंट/ किलोग्राम H2 की उत्सर्जन सीमा निर्दिष्ट की गई है )
एक्स्ट्रा:
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन– वर्ष 2030 तक 50 लाख टन हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करना।
- राजस्थान ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2023 – राज्य सरकार ने नीति में वर्ष 2030 तक 2000 केटीपीए ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
