अनुभूति

भ्रम गलत या विकृत प्रत्यक्षीकरण होते हैं, जिनके कारण व्यक्ति वास्तविकता को सही रूप में नहीं समझ पाता। संगठन में ऐसे मानसिक भ्रम प्रबंधकीय निर्णयों को प्रभावित कर सकते हैं और कर्मचारियों के बारे में गलत धारणाएँ बना सकते हैं।

प्रबंधकीय निर्णयों पर भ्रमों के प्रभाव:

  • आकार का भ्रम: इसमें किसी व्यक्ति या वस्तु के वास्तविक आकार अथवा बाहरी रूप को देखकर गलत निष्कर्ष निकाल लिया जाता है। उदाहरण: एक प्रबंधक यह मान लेता है कि लंबा, अच्छे कपड़े पहनने वाला और आत्मविश्वासी युवा कर्मचारी अधिक सक्षम है, जबकि वास्तव में साधारण दिखने वाला वरिष्ठ कर्मचारी अधिक कुशल हो सकता है।
  • आकृति या क्षेत्रफल का भ्रम: इसमें किसी व्यक्ति या स्थिति के केवल एक छोटे भाग को देखकर उसके बारे में पूरी राय बना ली जाती है। उदाहरण: किसी कर्मचारी से एक छोटी गलती हो जाती है। प्रबंधक उसी गलती पर ध्यान देकर उसे अयोग्य समझ लेता है, जबकि उसका समग्र कार्य-निष्पादन अच्छा होता है।

ऐसे भ्रमों के कारण कार्य-निष्पादन के मूल्यांकन में पक्षपात, पदोन्नति के गलत निर्णय, कर्मचारियों के मनोबल में कमी तथा अप्रभावी प्रबंधकीय निर्णय हो सकते हैं।

प्रत्यक्षीकरण की सीमाओं को दूर करने के उपाय: प्रबंधकों को चाहिए कि वे – 

  • कर्मचारियों और परिस्थितियों के बारे में पूर्ण जानकारी प्राप्त करें।
  • केवल पहली छाप पर निर्भर न रहें, बल्कि कुछ समय तक निरीक्षण करें।
  • त्वरित या अधूरी धारणाओं के बजाय तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लें।

इन उपायों को अपनाकर प्रबंधक मानसिक भ्रमों के प्रभाव को कम कर सकते हैं तथा कार्यस्थल पर अधिक निष्पक्ष, सटीक और प्रभावी निर्णय ले सकते हैं।

आरोपण सिद्धांत वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति अपने और दूसरों के व्यवहार के कारणों को समझने का प्रयास करते हैं। यह बताता है कि व्यवहार आंतरिक कारकों (व्यक्तित्व, क्षमता, प्रयास) के कारण हुआ है या बाह्य कारकों (परिस्थिति, भाग्य, वातावरण) के कारण।

मुख्य अवधारणाएँ / प्रक्रिया

लोग आरोपण करने के लिए तीन मुख्य मानदंडों का उपयोग करते हैं:

  • विशिष्टता: क्या व्यक्ति अलग-अलग परिस्थितियों में अलग व्यवहार करता है? (उच्च = बाह्य कारण)
  • सहमति: क्या अन्य लोग भी उसी स्थिति में वैसा ही व्यवहार करते हैं? (उच्च = बाह्य कारण)
  • संगति: क्या व्यक्ति समय के साथ लगातार वैसा ही व्यवहार करता है? (उच्च = आंतरिक कारण)

आरोपण में सामान्य त्रुटियाँ

  • मूलभूत आरोपण त्रुटि: दूसरों के व्यवहार का मूल्यांकन करते समय आंतरिक कारकों पर अधिक जोर देना।
  • स्वार्थपरक पक्षपात: अपनी सफलता को आंतरिक और असफलता को बाह्य कारणों से जोड़ना।
  • हेलो प्रभाव, स्टिरियोटाइपिंग आदि।

संगठनात्मक व्यवहार में महत्व

  • प्रबंधकों को यह समझने में मदद करता है कि कर्मचारी क्यों कुछ खास व्यवहार करते हैं।
  • प्रदर्शन मूल्यांकन और फीडबैक को निष्पक्ष बनाता है।
  • कार्यस्थल पर पक्षपात और गलतफहमी को कम करता है।
  • अभिप्रेरणा, नेतृत्व, संघर्ष समाधान और टीम निर्माण में सहायक है।
  • व्यवहार के आंतरिक और बाह्य कारणों को अलग करके बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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