कम्प्यूटरीकृत लेखांकन प्रणाली एक ऐसी लेखा प्रणाली है जिसमें वित्तीय लेन-देन को कंप्यूटर और लेखांकन सॉफ्टवेयर की सहायता से दर्ज, संसाधित और सुरक्षित रखा जाता है।

गति

  • कम्प्यूटरीकृत लेखांकन प्रणाली में किसी लेन-देन को केवल एक बार दर्ज करना पड़ता है। इसके बाद वह अपने आप सभी खातों, तलपट और अंतिम खातों में पहुँच जाता है, जबकि हस्तलिखित लेखांकन में यह कार्य अलग-अलग पुस्तकों में हाथ से करना पड़ता है, जिससे अधिक समय लगता है।
  • यह प्रणाली बहुत अधिक आँकड़ों को कम समय में संसाधित कर सकती है और तुरंत रिपोर्ट तैयार कर देती है, जबकि हस्तलिखित लेखांकन में रिपोर्ट बनाने में कई दिन लग सकते हैं।

शुद्धता

  • इसमें गणना और प्रविष्टियाँ स्वचालित रूप से होती हैं, इसलिए जोड़, घटाव और संतुलन की गलतियाँ बहुत कम हो जाती हैं, जबकि हस्तलिखित लेखांकन में मानवीय त्रुटियों की संभावना अधिक रहती है।
  • इस प्रणाली में जाँच और मिलान की सुविधा होती है, जिससे सही आँकड़े दर्ज होते हैं। दूसरी ओर, हस्तलिखित प्रणाली पूरी तरह व्यक्ति की सावधानी पर निर्भर करती है।

विश्वसनीयता

  • कम्प्यूटरीकृत प्रणाली में सभी लेन-देन एक समान नियमों के अनुसार दर्ज होते हैं और उनका पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है, जिससे जानकारी ढूँढना आसान होता है। हस्तलिखित अभिलेखों में यह कार्य कठिन होता है।
  • इसमें आँकड़ों का बैकअप लिया जा सकता है और जानकारी सुरक्षित रहती है। इससे अभिलेखों के खोने या उनमें बदलाव होने की संभावना कम हो जाती है।

इस प्रकार, कम्प्यूटरीकृत लेखांकन प्रणाली ने पारंपरिक हस्तलिखित लेखांकन की तुलना में लेखांकन कार्य को अधिक तेज, शुद्ध और विश्वसनीय बना दिया है। हालांकि, इसके सफल उपयोग के लिए कर्मचारियों का उचित प्रशिक्षण और सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक है।

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