सुकरात (469-399 ईसा पूर्व) को पश्चिमी दर्शन के जनक के रूप में जाना जाता है
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सुकराती दर्शन |
प्रशासन में नैतिकता |
उदाहरण |
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एक ही अच्छाई है ज्ञान और एक ही बुराई है अज्ञानता |
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जीवन के उद्देश्य को जाने बिना जीने का कोई अर्थ नहीं – मनुष्य को अपने उद्देश्य को समझना चाहिए। उन्हें समाज और खुद की बेहतरी के लिए काम करना चाहिए। |
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सुकरात सहज वैराग्य की वकालत करते हैं।निकम्मे लोग केवल खाने-पीने के लिये ही जीते हैं; योग्य लोग केवल जीने के लिए खाते-पीते हैं – सुकरात |
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व्यक्ति को धन और वैभव के जीवन की बजाय सदाचारी जीवन अपनाना चाहिए। |
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शपथ तोड़ना अन्याय है |
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पारदर्शी संवाद को प्रोत्साहित करना |
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- जीवन का समम बोनम (अंतिम अच्छाई)– खुशी सममम बोनम यानी सर्वोच्च और अंतिम अच्छाई है। यह ख़ुशी बौद्धिक आनंद और दार्शनिक चिंतन से आनी चाहिए।
- प्रयोग – सेवा देकर, कर्तव्य पूरा करके, या कर्तव्य की पुकार से परे जाकर भी खुश रहना
- उदाहरण – नासिक के 40 अधिकारियों ने स्वेच्छा से 56 कोविड अनाथों की जिम्मेदारी लेने के लिए अपनी ड्यूटी से आगे बढ़कर काम किया
- नशीली दवाओं के दुरुपयोग, अश्लील साहित्य, कामुक साहित्य, हिंसक खेल, सोशल मीडिया सामग्री के बिना सोचे-समझे उपभोग और बुरी संगति से मिलने वाली खुशी को ध्यान, शारीरिक व्यायाम, अच्छे साहित्य और दोस्तों की अच्छी संगति से मिलने वाली खुशी से प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए।
- प्रयोग – सेवा देकर, कर्तव्य पूरा करके, या कर्तव्य की पुकार से परे जाकर भी खुश रहना
- ‘गोल्डन मीन’ (स्वर्णिम मध्य) का सिद्धांत – सद्गुण दो चरम सीमाओं के बीच का एक माध्यम है। यह संयम में निहित है. प्रत्येक सद्गुण दो अवगुणों के बीच में स्थित है। उदाहरण –
- कायरता और मूर्खता के बीच साहस
- अशिष्टता और चापलूसी के बीच विनम्रता
- लालच और आलस के बीच महत्वाकांक्षा
- प्रयोग-
- चाटुकारिता और राजनेताओं के प्रति शत्रुता/नफरत के बीच – राजनीतिक तटस्थता
- उदाहरण – मैं राजनेताओं से नफरत नहीं करता। मुझे ख़राब राजनीति से नफ़रत है: टी.एन. शेषन
- उदासीनता और नर्वस ब्रेकडाउन के बीच – सहानुभूति
- निर्भया केस को सुलझाने के दौरान पूर्व आईपीएस छाया शर्मा भावनात्मक रूप से टूट गई
- चाटुकारिता और राजनेताओं के प्रति शत्रुता/नफरत के बीच – राजनीतिक तटस्थता
| सिद्धांत | परिभाषा | प्रस्तावक |
| नैतिक अहंवाद | किसी कर्म को नैतिक रूप से सही माना जाता है यदि उसके परिणाम उस व्यक्ति के लिए अधिक अनुकूल होते हैं जो उस कर्म को कर रहा है, जबकि दूसरों के लिए कम अनुकूल होते हैं। | आयन रैंड, चार्वाक, सुखवाद |
| नैतिक परहितवाद | किसी कर्म को नैतिक रूप से सही माना जाता है यदि उसके परिणाम उस व्यक्ति को छोड़कर, सभी के लिए अधिक अनुकूल होते हैं। | लोकसंग्रह (गीता), अगस्टे कॉम्टे |
| उपयोगीतावाद | किसी कर्म को नैतिक रूप से सही माना जाता है यदि उसके परिणाम ‘सभी’ के लिए अधिक अनुकूल होते हैं। | जेरेमी बेंथम, जॉन स्टुअर्ट मिल, हेनरी सिडविक, पीटर सिंगर, चाणक्य |
Intro – पश्चिमी दर्शन मुख्यतः यूनानी और यूरोपीय दार्शनिकों की शिक्षाओं का परिणाम है। जैसे सुकरात, प्लेटो, अरस्तू, इमैनुएल कांट, जेरेमी बेंथम, जॉन रॉल्स, आदि।
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Western Philosophy |
Evils prevalent in Indian society |
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सोफिज्म – नैतिक मूल्यों में व्यक्तिपरकता + तर्क |
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सुकरात –
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प्लेटो –
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अरस्तू –
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एपिक्यूरियनवाद – मानसिक और बौद्धिक आनंद |
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स्टोइकवाद – स्टोइक अत्यंत कठोर तप की सलाह देते हैं |
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उपयोगितावाद |
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इमैनुएल कांट |
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जॉन रॉल्स |
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Conclusion –
- Summary – भारतीय संस्कृति की विशेषता उसकी सहिष्णु और आत्मसात करने की प्रकृति रही है। प्राचीन भारतीय दर्शन के साथ पश्चिमी दार्शनिक ज्ञान को आत्मसात करके, इस धरती माता के निवासी के रूप में हम मिलकर बेहतर प्राणियों की ओर बढ़ सकते हैं) 🚫
- Slogan – प्राचीन भारतीय ज्ञान को पश्चिमी दर्शन के साथ जोड़कर हम निश्चित रूप से ‘सर्वे भवन्तु सुखिन’ के सपने को साकार कर सकते हैं
