कृषि, बागवानी, वानिकी और पशुपालन

कृषि, बागवानी, वानिकी और पशुपालन: विज्ञान व प्रौद्योगिकी के अंतर्गत ये क्षेत्र खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार हैं। आधुनिक तकनीकों, उन्नत बीज, सिंचाई प्रणालियों तथा वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता में वृद्धि की जा रही है, जिससे सतत विकास और आजीविका सुदृढ़ होती है।

राजस्थान में कृषि विकास

कृषि संस्थान

संस्था का नाम /केंद्र

स्थान एवं प्रतिष्ठान का विवरण

केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (CAZRI)

  • मरुस्थल वनीकरण केंद्र (डेजर्ट अफॉरेस्टेशन स्टेशन) की स्थापना 1952 में जोधपुर में की गई थी।
  • बाद में इसे 1957 में मरुस्थल वनीकरण एवं मृदा संरक्षण केंद्र (डेजर्ट अफॉरेस्टेशन एंड सॉइल कंजर्वेशन) के रूप में विस्तारित किया गया और अंततः 1959 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), नई दिल्ली के अंतर्गत इसे CAZRI के रूप में उन्नत किया गया।
  • इस संस्थान की स्थापना ऑस्ट्रेलिया और UNESCO की सहायता से की गई थी।
  • CAZRI जोधपुर स्थित मुख्यालय में छह प्रभागों के माध्यम से कार्य करता है।
  • स्थान-विशिष्ट समस्याओं पर कार्य करने के लिए विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में पाँच क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र स्थापित किए गए हैं।
  • क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र: भुज (गुजरात), लेह (लद्दाख), बीकानेर, जैसलमेर, पाली-मारवाड़

शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (AFRI)

  • 1988 में जोधपुर में स्थापित किया गया, जिसका उद्देश्य राजस्थान, गुजरात, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों की वानिकी अनुसंधान आवश्यकताओं को पूरा करना है।

राष्ट्रीय सरसों-अनुसंधान केंद्र

  • सेवर (भरतपुर) में 20 अक्टूबर 1993 को स्थापित किया गया।
  • बाद में फरवरी 2009 में इसका नाम बदलकर “भाकृअनुप-भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान (भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान)” कर दिया गया।

केन्द्रीय ऊन विकास बोर्ड (CWDB)

  • स्थापना – 1987जोधपुर में स्थापित।
  • कार्य प्रारंभ – 1989

केंद्रीय राज्य कृषि फार्म, सूरतगढ़

  • सूरतगढ़ (गंगानगर) में 15 अगस्त 1956 को स्थापित किया गया।
  • यह एशिया का सबसे बड़ा केंद्रीय कृषि फार्म है, जो सूरतगढ़, गंगानगर में स्थित है।
  • इसकी स्थापना 1956 में सोवियत संघ (USSR) की सहायता से की गई थी। 

केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान (CIAH)

  • बीकानेर में स्थित है।
अन्य संस्थान
केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थानअविकानगर (टोंक) – 1962
केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान अविकानगर (टोंक) – 1962
भेड़ एवं ऊन प्रशिक्षण संस्थानजयपुर
भेड़ रोग अनुसंधान प्रयोगशालाजोधपुर
NBPGR क्षेत्रीय केंद्र (राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो)जोधपुर
राष्ट्रीय बीज मसाला अनुसंधान केंद्रतबीजी, अजमेर – 2000
राजस्थान कुक्कुट अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थानअजमेर –1988–89
राजस्थान कृषि अनुसंधान केंद्र (क्षेत्रीय केंद्र)दुर्गापुरा, जयपुर – 1943
केन्द्रीय कृषि फार्म – 2जैतसर, गंगानगर – कनाडा की सहायता से
बेर एवं खजूर अनुसंधान केन्द्रबीकानेर – 1978
बैल पालन केंद्रनागौर
केंद्रीय ऊन परीक्षण प्रयोगशालाबीकानेर – 1965
भेड़ प्रजनन केन्द्र (मेरिनो नस्ल उत्पादन केंद्र)फतेहपुर, सीकर – 1973
राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र (NRCC)जोहडबीड, बीकानेर
कपास अनुसंधान केंद्रश्रीगंगानगर
केंद्रीय पशुधन प्रजनन फार्मसूरतगढ़ (गंगानगर)
चारा बीज उत्पादन फार्ममोहनगढ़ (जैसलमेर)
बाजरा अनुसंधान केंद्रबाड़मेर
ज्वार (सोरघम) अनुसंधान केन्द्रवल्लभनगर (उदयपुर)
राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थानउदयपुर
माणिक्य लाल वर्मा जनजातीय अनुसंधान एवं सर्वेक्षण संस्थानउदयपुर
राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग योजना ब्यूरो – पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्रउदयपुर
भैंस प्रजनन केंद्रवल्लभनगर (उदयपुर)
भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण – पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्रउदयपुर
भारत मौसम विज्ञान विभाग वेधशालाजयपुर
राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (NIA)जयपुर
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (CEERI)पिलानी (झुंझुनू)
राष्ट्रीय सूअर फार्मअलवर
सिरेमिक विद्युत अनुसंधान एवं विकास केन्द्रबीकानेर
मत्स्य सर्वेक्षण एवं अनुसंधान केंद्रउदयपुर
वन्यजीव प्रबंधन एवं मरुस्थलीय पारिस्थितिकी प्रशिक्षण संस्थानतालछापर, चूरू
बाजरा अनुसंधान केंद्रमंडोर (जोधपुर)
मक्का अनुसंधान केंद्रबोसावत (बांसवाड़ा)
चावल अनुसंधान केंद्रबांसवाड़ा
इसबगोल अनुसंधान केंद्रमंडोर (जोधपुर)
कृषि अनुसंधान केंद्र (ARC)बीकानेर
चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थानजयपुर
राजस्थान राज्य आयुष अनुसंधान केंद्रअजमेर
केंद्रीय शुष्क क्षेत्र बागवानी अनुसंधान केंद्र (NRCAH)बीछवाल (बीकानेर)
राई अनुसंधान केंद्रसेवर (भरतपुर)
औषधीय पादप अनुसंधान केंद्रमाउंट आबू (सिरोही)
सिंचाई प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थानकोटा
कृषि-पारिस्थितिकी पर्यटन एवं अंतरराष्ट्रीय पुष्प अनुसंधान केंद्रमाउंट आबू (सिरोही)
बकरी विकास एवं चरागाह उत्पादन परियोजनारामसर, अजमेर – स्विट्जरलैंड के सहयोग से।

राजस्थान में पशुधन प्रजनन और अनुसंधान केंद्र

  • हरित मुनिया प्रजनन केंद्र – उदयपुर
  • भेड़ प्रजनन केंद्र – फतेहपुर (सीकर)। इस केंद्र की एक इकाई बांकल्या (डीडवाना-कुचामन) में स्थित है।
  • भैंस प्रजनन केंद्र – डग (झालावाड़), कुम्हेर (डीग)
  • घोड़ा प्रजनन एवं अनुसंधान केंद्र – केरू (जोधपुर)

राजस्थान में उत्कृष्टता केंद्र 

उत्कृष्टता केंद्रस्थान
साइट्रस (नींबू वर्गीय फल)नांता, कोटा
अनारबस्सी, जयपुर
खजूर सागर भोजका, जैसलमेर
अमरूददेवड़ावास, टोंक
संतराझालावाड़
आमखेमरी, धोलपुर
सब्जियांबूंदी
फूलसवाई माधोपुर
सीताफलचित्तौड़गढ़
पपीतादौसा
अंजीरसिरोही
मक्काबांसवाड़ा
रेयर अर्थ एलिमेंट्स (दुर्लभ मृदा तत्व)उदयपुर
चिकित्सीय आनुवंशिकीजे.के. लोन अस्पताल, जयपुर
माटी कलाजयपुर
जैतून (ऑलिव) बस्सी, जयपुर
ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकीभामाशाह डेटा सेंटर, जयपुर
डॉ. आंबेडकर उत्कृष्टता केंद्रराजस्थान विश्वविद्यालय
इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT)स्वामी केशवानंद प्रौद्योगिकी संस्थान, जयपुर
सिरेमिकबीकानेर
बाजराजोधपुर कृषि विश्वविद्यालय
स्वयंसिद्धा जयपुर
वास्तु एवं ज्योतिषजयपुर
मधुमक्खी पालनभरतपुर
बाजराजोधपुर

राजस्थान में उद्यानिकी विकास

  • 1989–90 में उद्यानिकी निदेशालय की स्थापना की गई।मुख्यालय – जयपुरउद्देश्य – फलों, सब्जियों, मसालों, फूलों और औषधीय पौधों के क्षेत्रफल, उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि करना तथा राजस्थान की उद्यानिकी संभावनाओं का पूर्ण उपयोग करना।
  • 1990–91 में राज्य योजनाएं और केंद्र प्रायोजित योजनाएं प्रारंभ की गई।
  • 1992–93 में विश्व बैंक सहायता प्राप्त कृषि विकास परियोजना शुरू की गई।
  • जोधपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर की खजूर टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला स्थापित की गई है।
कृषि बागवानी वानिकी और पशुपालन

बागवानी विकास योजनाएं

राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM)

  • फलों, मसालों और फूलों जैसी विभिन्न उद्यानिकी फसलों के क्षेत्रफल, उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से यह योजना चलाई जा रही है।
  • यह योजना राज्य के चयनित 41 जिलों में लागू की जा रही है।

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना

इस योजना के अंतर्गत खजूर की खेती, राष्ट्रीय बागवानी मिशन से वंचित जिलों में उद्यानिकी विकास, तथा शहरी क्षेत्रों में सब्जी क्लस्टर विकसित करने जैसी पहलें शामिल हैं।इसके साथ ही झालावाड़, धौलपुर, टोंक, बूंदी, चित्तौड़गढ़, सवाई माधोपुर, बस्सी (जयपुर) और नांता (कोटा) में स्थित उत्कृष्टता केंद्रों को सुदृढ़ करने पर भी ध्यान दिया जाता है, ताकि संरक्षित खेती को बढ़ावा दिया जा सके और नर्सरियों का विकास किया जा सके।

राजस्थान गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना (2024)

  • उद्देश्य – किसानों को जैविक खाद/उर्वरक उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करके राजस्थान में जैविक खेती को बढ़ावा देना।
  • मुख्य विशेषता – किसानों को एकमुश्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
  • जैविक खाद/उर्वरक उत्पादन इकाई स्थापित करने के लिए अनुदान (सब्सिडी) दी जाती है।
  • किसानों को ₹10,000 या इकाई लागत का 50% (जो कम हो) प्रदान किया जाता है।

राजस्थान पशुधन बीमा योजना / मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना (2024)

  • उद्देश्य – पशुओं की मृत्यु या बीमारी से होने वाले आर्थिक नुकसान से पशुपालकों की सुरक्षा करना तथा पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार करना।    
  •  मुख्य विशेषताएँ –राज्य के सभी पशुधन के लिए निःशुल्क बीमा कवरेज।
  • बीमित पशुओं के लिए निःशुल्क टीकाकरण।
  • दुग्ध पशुओं तथा अन्य पशुधन प्रजातियों के लिए बीमा सुविधा उपलब्ध।
  • पशुपालकों की आर्थिक संवेदनशीलता कम करना और उत्पादकता बढ़ाना।
  • लाभार्थी – राजस्थान के पशुपालक/पशुधन मालिक।

राजीव गांधी कृषक साथी सहायता योजना (मुआवजा विवरण)

  • उद्देश्य – दुर्घटना की स्थिति में किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करना।    
  •  लाभ – दुर्घटना से मृत्यु होने पर ₹2,00,000।
  • दिव्यांगता की स्थिति में ₹5,000 से ₹50,000 तक, दिव्यांगता की गंभीरता के अनुसार।

ज्ञान संवर्धन कार्यक्रम

  • इस कार्यक्रम के अंतर्गत राजस्थान के 100 किसान चार देशों में जाकर आधुनिक कृषि तकनीकों को सीखेंगे।
  • FPO से जुड़े किसान नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और ब्राजील का दौरा करेंगे।
  • यह दौरा नवंबर 2025 से शुरू होगा।
  • राज्य के 10 कृषि संभागों से 10-10 किसानों का चयन सात दिवसीय दौरे के लिए किया गया है।
  • इस अध्ययन भ्रमण के दौरान किसानों को नवीनतम तकनीकों और नवाचारों की जानकारी दी जाएगी।
  • चयनित किसानों को नवंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच अलग-अलग बैचों में प्रशिक्षण दिया गया।
  • इस दौरे के दौरान किसान कम भूमि और कम पानी में पॉलीहाउस (पॉलिथीन/प्लास्टिक से बना रक्षात्मक घर) तथा ऑफ-सीजन खेती और पशुपालन के बेहतर तरीके सीखेंगे।

राजस्थान में कृषि

  • राजस्थान में कृषि मुख्यतः वर्षा पर निर्भर है।
  • राज्य में कमजोर मानसून के कारण वर्षा कम और अनियमित होती है, इसलिए कृषि उत्पादन भी प्रभावित होता है।
  • राजस्थान में GSVA (सकल राज्य मूल्य वर्धित) में कृषि का योगदान
    • स्थिर मूल्यों (2011–12) पर: 25.33%
    • वर्तमान मूल्यों पर: 25.74%
  • मुख्य अवलोकन:
    • स्थिर मूल्यों (2011–12) पर सकल मूल्य वर्धित (GSVA) वर्ष 2021–22 में ₹1.92 लाख करोड़ से बढ़कर 2025–26 में ₹2.23 लाख करोड़ हो गया, जो 3.82% CAGR की वृद्धि दर्शाता है। 
    • वर्तमान मूल्यों पर GVA वर्ष 2021–22 में ₹3.23 लाख करोड़ से बढ़कर 2025–26 में ₹4.41 लाख करोड़ हो गया, जो 8.10% CAGR की वृद्धि दर्शाता है।
    • इस प्रकार कृषि और संबद्ध क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था के प्रमुख घटक बने हुए हैं।
कृषि बागवानी वानिकी और पशुपालन
  • 10 कृषि-जलवायु क्षेत्रों वाला राजस्थान खाद्यान्न, नकदी फसलों तथा उद्यानिकी फसलों की विविध किस्मों के उत्पादन की उच्च क्षमता रखता है।
कृषि बागवानी वानिकी और पशुपालन
  • वर्ष 2024-25 के लिए वर्तमान मूल्यों पर कृषि क्षेत्र का क्षेत्रवार योगदान
कृषि बागवानी वानिकी और पशुपालन
राज्य में खरीफ और रबी फसलों का उत्पादन
  • वर्ष 2025–26 के अग्रिम अनुमानों के अनुसार राज्य में कुल खाद्यान्न उत्पादन 283.98 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.28% कम है।
  • 2025-26 में फसलों का उत्पादन
  • फसल प्रकार 
  • उत्पादन -लाख मीट्रिक टन(अनुमानित)पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि/कमी खाद्यान्न उत्पादन
  • खरीफ89.5521.61% ↓रबी194.430.49%  ↓ अनाजखरीफ69.0326.71% ↓
  • रबी167.823.35% ↓दलहनखरीफ20.522.34% ↑
  • रबी26.6122.34 % ↑तिलहनखरीफ41.237.85% ↑
  • रबी59.236.72% ↑गन्ना
  • 3.6122.37% ↓
  • तिलहन का उत्पादन – लगभग 100.46 लाख टन अनुमानित है (7.18% की वृद्धि)। कपास का उत्पादन – लगभग 17.94 लाख गांठ (बेल) होने की संभावना है (0.34% की वृद्धि)।

प्रमुख कृषि फसलों में राजस्थान की तुलनात्मक स्थिति

फसलराजस्थान का स्थानयोगदान (%)
राई और सरसों1st43.43%
बाजरा 1st41.34%
कुल तिलहन1st23.61%
पोषक-अनाज1st14.21%
ग्वार1st88.80%
मूंगफली2nd19.91%
चना 3rd17.39%
कुल दालें3rd13.76%
सोयाबीन3rd8.96%

कृषि के लिए बजट 2025–26

  • मिनी फूड पार्क – अनूपगढ़ (श्रीगंगानगर) में स्थापित किया जाएगा।
  • एग्रो फूड पार्क – सांचौर (जालोर) में स्थापित किया जाएगा।
  • मंडी / उत्कृष्टता केंद्र      –              स्थान
    • फल-सब्जी मंडी         – जैतारण (ब्यावर),
    • सिरोहीउप कृषि मंडी            – बनेठा (टोंक), मांडर (सिरोही)
    • लहसुन उत्कृष्टता केंद्र  –                बारां
  • गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना के अंतर्गत 2.50 लाख गोपालक परिवारों को ब्याज मुक्त ऋण प्रदान किया जाएगा।
  • समसामयिक घटनाएँ
    • स्वदेशी पशु नस्लों के संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य का पहला सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस इंडिजिनस फार्म पाली में स्थापित किया जाएगा। (राशि: ₹10 करोड़)।
    • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘कैच द रेन’ अभियान से प्रेरित होकर ‘कर्मभूमि से मातृभूमि’ अभियान के तहत CSR के माध्यम से 5000 जल पुनर्भरण संरचनाएँ बनाई जाएंगी।
    • प्रवासी पशुपालकों के लिए आवासीय विद्यालय राजसमंद में खोला जाएगा।
    • भरतपुर में एक बायोलॉजिकल पार्क की स्थापना की जाएगी तथा नाहरगढ़ (जयपुर) के बायोलॉजिकल पार्क में विकास कार्य किए जाएंगे।

पशुपालन के लिए बजट 2025-26

  • उत्कृष्टता केंद्र – राजस्थान पशु चिकित्सा विज्ञान संस्थान पॉलीक्लिनिक – पांचबत्ती, जयपुरपशुओं के लिए ‘आई केयर स्पेशलिटी सेंटर’ – हिंगोनिया (जयपुर) तथा RAJUVAS, बीकानेर
  • पशु कृत्रिम अंग केंद्र – बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय, सांगानेर।
  • सेक्स सॉर्टेड सीमेन लैब’ – बस्सी (जयपुर) में स्थापित की जाएगी।
  • मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना – इस योजना का दायरा बढ़ाकर प्रत्येक श्रेणी में बीमित पशुपालकों की संख्या दोगुनी की जाएगी।
  • “सेक्स सॉर्टेड कृत्रिम गर्भाधान” के लिए पहले दो कृत्रिम गर्भाधान पर 75% सब्सिडी तथा शेष दो कृत्रिम गर्भाधान पर 50% सब्सिडी देकर 10 लाख पशुपालकों को लाभान्वित किया जाएगा।

समृद्ध कृषि के लिए पशुधन

राज्य में पशुपालन केवल कृषि का सहायक कार्य नहीं, बल्कि विशेष रूप से शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में एक प्रमुख आर्थिक गतिविधि है।

  • पशुधन गणना 2019 के अनुसार राज्य में कुल पशुधन संख्या 568.01 लाख तथा कुक्कुट की संख्या 146.23 लाख थी।
  • राज्य में देश के कुल पशुधन का लगभग 10.60 प्रतिशत हिस्सा है।
  • इसमें देश के 7.24 प्रतिशत मवेशी, 12.47 प्रतिशत भैंस, 14.00 प्रतिशत बकरियाँ, 10.64 प्रतिशत भेड़ और 84.43 प्रतिशत ऊँट शामिल हैं। 
  • वर्ष 2023–24 में राज्य ने देश के कुल दूध उत्पादन में 14.51% तथा ऊन उत्पादन में 47.53% योगदान दिया।

पशुधन विकास

पशुओं के स्वास्थ्य, उत्पादकता और कल्याण में सुधार के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं और पहलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

  • खुरपका-मुंहपका रोग नियंत्रण कार्यक्रम (FMD) – एक व्यापक टीकाकरण अभियान के तहत राज्य में 200.13 लाख गायों और भैंसों को निःशुल्क FMD टीके लगाए गए।
  • सेक्स सॉर्टेड सीमेन योजना  – दुग्ध पशुओं की नस्ल सुधार के लिए सब्सिडी 50% से बढ़ाकर 75% कर दी गई, जिससे लगभग 2 लाख पशुपालक किसानों को लाभ मिला।
  • ऊंट संरक्षण अनुदान – ऊंट पालकों को ₹20,000 की वित्तीय सहायता दो किस्तों में दी जाती है—पहली किस्त: बछड़े के जन्म के 0–2 माह के भीतरदूसरी किस्त: 1 वर्ष की आयु पर
  • मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना – 1 दिसंबर 2025 से गाय, भैंस, भेड़, बकरी और ऊंट जैसे देशी पशुधन के लिए निःशुल्क बीमा शुरू किया गया है। इस योजना के अंतर्गत बीमा प्रीमियम का 100% भार राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है।

पशुपालकों के कल्याण हेतु पहल

राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) 
  • यह एक उद्यमिता विकास कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य पशुपालकों को पशुपालन क्षेत्र में उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित करना है।
राज सरस सुरक्षा कवच बीमा योजना (9वां चरण)
  • यह एक व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना है, जो 1 फरवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 तक लागू है। दुर्घटना से मृत्यु या पूर्ण स्थायी विकलांगता की स्थिति में ₹5 लाख देय।आंशिक स्थायी विकलांगता की स्थिति में ₹2.50 लाख देय।
मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना
  • इस योजना के अंतर्गत दूध उत्पादकों को दी जाने वाली सहायता राशि वर्ष 2022–23 में ₹2 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹5 प्रति लीटर कर दी गई।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना
  • 16 जुलाई 2025 को स्वीकृत इस योजना का उद्देश्य कम प्रदर्शन वाले 100 कृषि जिलों को लक्षित करना है। इसके लिए 6 वर्षों तक प्रति वर्ष ₹24,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
  • इस योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना, सिंचाई और भंडारण में सुधार करना तथा किसानों को ऋण उपलब्ध कराना है।इसका ध्यान केवल कृषि और संबद्ध गतिविधियों पर केंद्रित रहेगा।
  • इस योजना के अंतर्गत 11 मंत्रालयों की 36 योजनाओं का समन्वित क्रियान्वयन किया जाएगा, जिससे लगभग 1.7 करोड़ किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
  • जिला स्तर की योजनाएं जिला कलेक्टर द्वारा कृषि विश्वविद्यालयों और नीति आयोग के सहयोग से तैयार की जाएगी।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड, किसान ऐप और जिला रैंकिंग प्रणाली विकसित की जाएगी।
  • इस समन्वय में राज्य सरकार की योजनाएं और निजी क्षेत्र के साथ स्थानीय साझेदारियाँ भी शामिल होंगी।
  • यह योजना नई योजनाएं शुरू करने के बजाय मौजूदा कार्यक्रमों का समन्वित और अंतिम छोर तक प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करेगी, जिससे दोहराव कम होगा और प्रभाव बढ़ेगा
  • जिलों का चयन निम्न आधारों पर किया जाएगा –
    • कम कृषि उत्पादकता
    • कम फसल तीव्रता
    • कम ऋण वितरण

प्रत्येक चयनित जिले में जिला धन-धान्य कृषि योजना (DDKY) समिति का गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता जिला कलेक्टर या ग्राम पंचायत द्वारा की जाएगी।

कृषि बागवानी वानिकी और पशुपालन

गोपालन विभाग

  • राज्य सरकार देशी गाय नस्लों के संरक्षण और विकास को बढ़ावा देती है। इसके लिए गोवंश संरक्षण एवं संवर्धन निधि नियम, 2016 के अंतर्गत गौशालाओं और नंदीशालाओं के माध्यम से सतत विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

गौशाला विकास पहल

गौशाला विकास योजना
  • पंजीकृत गौशालाओं में मूलभूत अवसंरचना (जैसे – गौशाला शेड, चारा भंडार, गोपालक आवास गृह, पानी की टंकी आदि) के विकास के लिए राज्य सरकार 90:10 (सरकार : जन सहभागिता) के अनुपात में अधिकतम ₹10 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
पंचायत समिति स्तरीय नंदीशाला
  • जन सहभागिता योजनाइस योजना का उद्देश्य आवारा नर गोवंश की समस्या का समाधान करना है।
  • इसके अंतर्गत पंचायत समिति स्तर पर नंदी शालाओं की स्थापना की जाती है, जिसमें 90:10 (सरकार : जनसहभागिता) के अनुपात में वित्तीय व्यवस्था होती है।
ग्राम गौशाला / पशु आश्रय स्थल जन सहभागिता योजना
  • इस योजना का उद्देश्य आवारा पशुओं को आश्रय प्रदान करना है।
  • इसके तहत ग्राम पंचायत स्तर पर गौशाला या पशु आश्रय स्थल स्थापित किए जाते हैं।इसकी अनुमानित स्थापना लागत ₹1 करोड़ है, जिसमें 90:10 (सरकार : जनसहभागिता) का प्रावधान है।
डेयरी विकास
  • दिसंबर 2025 तक राज्य में 19,643 डेयरी सहकारी समितियां कार्यरत हैं, जो 24 जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों से संबद्ध हैं।
  • इन सभी का शीर्ष राज्य स्तरीय संगठन राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) लिमिटेड, जयपुर है

विकसित संकर (हाइब्रिड) किस्में

  • जौ – आरडीबी-1, बीएल-2, राजकिरण, आरडी 2035, आरडी 2552, आरडी 2503, आरडी 2668, आरडी 2624, आरडी 2660, आरडी 2715, आरडी 2786, आरडी 2794, आरडी 2849, आरडी 2899, आरडी 2907, कैलाश, केदार, करण, ज्योति।
  • बाजरा – राज 171, आरएचबी (90, 121,127,154, 173, 177, 223, 228, 233, 234)। [बायो फोर्टिफाइड फसलें- आरएचबी 233 और 234]
  • खरबूजा – दुर्गापुरा मधु, आरएम 50, एमएचवाई 3, एमएचवाई 5।
  • तरबूज – दुर्गापुरा केसर, दुर्गापुरा लाल।
  • चावल – बासमती, माही सुगंधा, परमार, पद्मा, जमुना।
  • गन्ना – को-1007, को-1111।
  • मक्का – माही कंचन, माही धवल, अरुण, प्रभात, एचएम-8।थार शोभा – खेजड़ी।

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