उभरती तकनीक 

उभरती तकनीक: विज्ञान व प्रौद्योगिकी के अंतर्गत उभरती तकनीक वे नई और तेजी से विकसित हो रही प्रौद्योगिकियाँ हैं, जो समाज, अर्थव्यवस्था और शासन के विभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तन ला रही हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), ब्लॉकचेन, रोबोटिक्स और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकें भविष्य की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

  • जॉन मैकार्थी [AI के जनक] के अनुसार: “बुद्धिमान मशीन, विशेष रूप से बुद्धिमान कंप्यूटर प्रोग्राम बनाने का विज्ञान और इंजीनियरिंग ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता है।”
  • नीति आयोग (NITI Aayog) के अनुसार: “AI प्रौद्योगिकियों का एक ऐसा समूह (Constellation) है जो मशीनों को उच्च स्तर की बुद्धिमत्ता के साथ कार्य करने और समझने, बोध करने तथा कार्य करने की मानवीय क्षमताओं का अनुकरण (Emulate) करने में सक्षम बनाता है।”
  • सरल शब्दों में: AI मशीनों की उन संज्ञानात्मक कार्यों को करने की क्षमता को संदर्भित करता है जैसे सोचना, समझना (Perceiving), सीखना, समस्या समाधान और निर्णय लेना।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रकार 

क्षमता के आधार पर (AI के चरण)

प्रकारविवरणउदाहरण
संकीर्ण AI (Narrow AI/ Weak AI)एक विशिष्ट कार्य को कुशलता से करता हैवॉयस असिस्टेंट जैसे – सिरी, एलेक्सा, गूगल असिस्टेंट 
सामान्य AI (General AI/ Strong AI)यह एक काल्पनिक भविष्य का AI है जो किसी भी ऐसे बौद्धिक कार्य को करने में सक्षम होगा जो एक मनुष्य कर सकता है।एक ऐसा रोबोट जो तर्क, समस्या- समाधान और निर्णय लेने में सक्षम हो (अभी तक विकसित नहीं हुआ है)।
अति-बुद्धिमान AI (Super intelligent AI)ऐसा एआई जो सभी क्षेत्रों में मानव बुद्धिमत्ता में श्रेष्ठ हो, जिसमें भावनात्मक बुद्धिमत्ता भी शामिल है।उदाहरण: एक सैद्धांतिक अवधारणा है; अक्सर साइंस फिक्शन फिल्मों में दिखाया जाता है (जैसे, Ex Machina)।

कार्यप्रणाली के आधार पर

प्रकारविवरणउदाहरण
प्रतिक्रियाशील मशीनेंकेवल वर्तमान डेटा पर कार्य करती हैं, पिछले अनुभवों को संग्रहीत नहीं करतीं।IBM Deep Blue (शतरंज – सुपर कंप्यूटर)
सीमित स्मृतिसीमित मात्रा में पिछले डेटा से सीख सकती है।स्वचालित कार
थ्योरी ऑफ माइंडमानव भावनाओं और सामाजिक अंतःक्रियाओं को समझने की क्षमता रखती है।प्रयोगात्मक अवस्था
Self-Aware AI (स्व-जागरूक AI)चेतना और स्व-जागरूकता रखने वाली मशीनें।पूर्णतः सैद्धांतिक

मशीन लर्निंग (ML)

  • मशीन लर्निंग (ML) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का एक उप-समुच्चय (Subset) है जो प्रणालियों को डेटा से सीखने, पैटर्न की पहचान करने और बिना स्पष्ट रूप से प्रोग्राम किए गए निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।

मशीन लर्निंग के प्रकार (Types of Machine Learning)

  • पर्यवेक्षित अधिगम (Supervised Learning)
    • परिभाषा: यह चिह्नित डेटा (Labeled data) (इनपुट + आउटपुट) से सीखता है। इसमें मॉडल को पहले से ज्ञात उत्तरों के साथ प्रशिक्षित किया जाता है।
    • मॉडल: लीनियर रिग्रेशन, लॉजिस्टिक रिग्रेशन, सपोर्ट वेक्टर मशीन (SVM), डिसीजन ट्री, K-निएरेस्ट नेबर्स (KNN)।
    • अनुप्रयोग:
      • स्पैम का पता लगाना, मूल्य भविष्यवाणी।
      • भारत में उदाहरण: ICAR और CropIn द्वारा फसल उपज पूर्वानुमान; HDFC/SBI द्वारा ऋण वर्गीकरण।
  • अपर्यवेक्षित अधिगम (Unsupervised Learning)
    • परिभाषा: यह अचिह्नित डेटा (Unlabeled data) से सीखता है और डेटा में छिपे हुए पैटर्न या समूहों (Clusters) का पता लगाता है।
    • मॉडल: K-मीन्स क्लस्टरिंग, पदानुक्रमित क्लस्टरिंग (Hierarchical Clustering), मुख्य घटक विश्लेषण (PCA), ऑटोएनकोडर्स आदि।
    • अनुप्रयोग:
      • ग्राहक वर्गीकरण, विसंगति का पता लगाना।
      • भारत में उदाहरण: PMGSY (प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना) द्वारा सड़क योजना के लिए कम विकसित क्षेत्रों का क्लस्टरिंग।
  • सुदृढ़ीकरण अधिगम (Reinforcement Learning)
    • परिभाषा: इसमें एक ‘एजेंट’ पुरस्कार (Rewards) और दंड (Penalties) के माध्यम से ‘प्रयत्न और त्रुटि’ (Trial & Error) विधि द्वारा सीखता है।
    • मॉडल: Q-लर्निंग, डीप Q-नेटवर्क (DQN), पॉलिसी ग्रेडिएंट मेथड्स, प्रॉक्सिमल पॉलिसी ऑप्टिमाइज़ेशन (PPO)।
    • अनुप्रयोग:
      • गेम खेलना, स्वचालित कारें।
      • रोबोटिक्स और ड्रोन (कृषि और रक्षा क्षेत्र में)।
  • अर्ध-पर्यवेक्षित अधिगम (Semi-Supervised Learning)
    • परिभाषा: यह सीखने के लिए कम मात्रा में चिह्नित (Labeled) और बड़ी मात्रा में अचिह्नित (Unlabeled) डेटा का उपयोग करता है।
    • मॉडल: अर्ध-पर्यवेक्षित SVM, स्व-प्रशिक्षण, ग्राफ-आधारित मॉडल।
    • अनुप्रयोग:
      • चिकित्सा निदान, धोखाधड़ी का पता लगाना।
      • कृषि: उपग्रह चित्रों के आधार पर फसल की निगरानी।

डीप लर्निंग और न्यूरल नेटवर्क

  • यह मशीन लर्निंग की एक शाखा है जो कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क (ANNs) पर निर्भर करती है, जो मानव मस्तिष्क से प्रेरित है।
  • इसमें प्रत्येक कार्य के लिए स्पष्ट प्रोग्रामिंग (Explicit programming) की आवश्यकता नहीं होती है; यह डेटा से स्वतः ही पैटर्न सीखता है।
  • भौतिकी का नोबेल पुरस्कार 2024
    • यह पुरस्कार उन मौलिक खोजों और आविष्कारों के लिए दिया गया जो कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क (ANNs) के साथ मशीन लर्निंग को सक्षम बनाते हैं।

लोकप्रिय न्यूरल नेटवर्क मॉडल

मॉडलविशेषताउपयोग
CNN (कन्वॉल्यूशनल न्यूरल नेटवर्क)छवियों के लिए सर्वश्रेष्ठ, स्थानिक विशेषताओं को निकालता हैफेस ID, मेडिकल स्कैन, स्वचालित कारें
RNN (रिकरेंट न्यूरल नेटवर्क)अनुक्रमिक डेटा को संभालता है → पिछले इनपुट्स को याद रखता हैटेक्स्ट जनरेशन, भाषा मॉडल्स, पूर्वानुमान
LSTM (लॉन्ग शॉर्ट-टर्म मेमोरी)दीर्घकालिक निर्भरताओं को कैप्चर करता हैचैटबॉट्स, भाषण, अनुवाद
ट्रांसफॉर्मर्सआधुनिक NLP का आधार → लूप नहीं होते, समानांतर प्रशिक्षण संभवGPT, BERT, अनुवाद, सारांश
GANs (जनरेटिव एडवर्सरियल नेटवर्क)वास्तविक डेटा उत्पन्न करता है (छवियाँ एवं डीपफेक्स) → रचनात्मक AI (Creative AI)डीपफेक, कृत्रिम छवियाँ

डीप लर्निंग के अनुप्रयोग

  1. स्वचालित ड्राइविंग: संकेतों, पैदल यात्रियों और बाधाओं का पता लगाना।
  2. छवि और वाक् पहचान: फेशियल आईडी (Facial ID), वॉयस असिस्टेंट।
  3. प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP): चैटबॉट, अनुवाद, भावना विश्लेषण।
  4. पूर्वसूचक विश्लेषण: वित्त, स्वास्थ्य सेवा, विपणन।
  5. एयरोस्पेस और रक्षा: सैनिकों की सुरक्षा के लिए उपग्रह चित्र पहचान।
  6. चिकित्सा अनुसंधान: कैंसर का पूर्व में ही पता लगाना।
  7. औद्योगिक स्वचालन: मशीनों के पास श्रमिकों की सुरक्षा और वस्तु की पहचान।

AI vs ML vs DL का तुलनात्मक चार्ट

पैरामीटरकृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)मशीन लर्निंग (ML)डीप लर्निंग (DL)
परिभाषा मशीनों द्वारा मानव जैसी बुद्धिमत्ता का अनुकरणडेटा से सीखने वाले एल्गोरिदमबड़े डेटा से सीखने वाले न्यूरल नेटवर्क्स
लक्ष्य निर्णय लेना, तर्क करनापैटर्न पहचानना, भविष्यवाणी करनाजटिल फीचर निष्कर्षण, स्वचालन
तकनीक नियम-आधारित प्रणाली, ML, DLसुपरवाइज़्ड, अनसुपरवाइज़्ड, रिइन्फोर्समेंट लर्निंगCNNs, RNNs, ट्रांसफॉर्मर्स
डेटा आवश्यकता मध्यमउच्चबहुत अधिक (बिग डेटा)
मानव हस्तक्षेप अक्सर आवश्यकप्रशिक्षण के बाद न्यूनतमसबसे कम (एंड-टू-एंड लर्निंग)
उदाहरण चैटबॉट्स, रोबोटिक्स, विशेषज्ञ प्रणालीस्पैम फ़िल्टर, स्टॉक मूल्य भविष्यवाणी, अनुशंसा प्रणालीसेल्फ-ड्राइविंग कारें, इमेज पहचान, वाणी/भाषा प्रसंस्करण

AI ⊃ ML ⊃ DL

जनरेटिव एआई और लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM)

जनरेटिव एआई (Generative AI) 

  • जनरेटिव एआई एक अत्याधुनिक तकनीकी प्रगति है जो मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके मीडिया के नए रूप, जैसे टेक्स्ट, ऑडियो, वीडियो और एनिमेशन बनाने की क्षमता रखती है।
  • प्रशिक्षण पद्धति: इन मॉडलों को मुख्य रूप से ‘अपर्यवेक्षित अधिगम’ (Unsupervised Learning) तकनीकों का उपयोग करके प्रशिक्षित किया जाता है। वे बड़े प्रशिक्षण डेटासेट से पैटर्न और सांख्यिकी सीखते हैं और फिर मानव-निर्मित डेटा की नकल करने वाली नई सामग्री उत्पन्न करते हैं।
  • पारंपरिक AI बनाम जेनरेटिव AI: पारंपरिक एआई के विपरीत, जो केवल डेटा का वर्गीकरण (Classify) या पूर्वानुमान (Predict) करता है, जनरेटिव एआई मौलिक आउटपुट (Original outputs) उत्पन्न करता है।
  • सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले मॉडल वेरिएशनल ऑटोएनकोडर्स (VAEs), जनरेटिव एडवरसरियल नेटवर्क (GANs) और ‘ऑटोरिग्रेसिव’ (Autoregressive) मॉडल हैं।

Generative AI कैसे कार्य करता है?

घटकभूमिका
फाउंडेशन मॉडलबड़े डेटा सेट पर प्रशिक्षित विशाल न्यूरल नेटवर्क
ट्रांसफॉर्मर संदर्भ-आधारित सामग्री निर्माण (उदा. GPT, BERT)
डिफ्यूजन मॉडलचित्र/वीडियो निर्माण (उदा. DALL·E, Midjourney)
सुदृढ़ीकरण अधिगमफीडबैक के आधार पर आउटपुट का परिष्करण

लोकप्रिय जनरेटिव AI टूल्स

टूल (Tool)विकासकर्त्ताप्रकार / फोकसमुख्य उपयोग
ChatGPTOpenAILLM / टेक्स्ट आधारितउत्तर लेखन, सारांश, कोडिंग सहायता
Bard → GeminiGoogle DeepMindमल्टीमोडल एआईGoogle Search व Workspace के साथ एकीकरण
नैनो बनानागूगलछवि निर्माण
GrokxAI (एलन मस्क)एक्स (Twitter) के लिए चैटबॉटहास्य + तथ्य, एक्स से रियल टाइम जानकारी
LLaMAMetaओपन-सोर्स LLMअनुसंधान और प्रयोग के लिए उपयुक्त
DeepSeekDeepSeek AI (चीन)ओपन-सोर्स चीनी LLMकोडिंग व टेक्स्ट जनरेशन; तेजी से उभरता खिलाड़ी
SoraOpenAIटेक्स्ट-टू-वीडियो जनरेटरपाठ से वीडियो बनाना
DALL·EOpenAIटेक्स्ट-टू-इमेज जनरेटरएआई-जनित कलाकृतियाँ
GitHub CopilotGitHub + OpenAIकोड जनरेशन एआईडेवलपर्स को तेज़ी से कोड लिखने में सहायता
Perplexity AIPerplexity.aiसर्च + LLMतथ्यात्मक खोज + AI आधारित सारांश प्रदान करता है।
Copilotमाइक्रोसॉफ्टटेक्स्ट, कोड, इमेज जनरेशनऑफिस और एज के साथ एकीकृत
Claudeएंथ्रोपिकसुरक्षा-प्रथम डिज़ाइन के साथ संवैधानिक एआई

S.A.R.A.H.

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जनरेटिव एआई का उपयोग करते हुए एक डिजिटल स्वास्थ्य प्रवर्तक प्रोटोटाइप S.A.R.A.H. का अनावरण किया है।

लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM)

  • एक लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एक प्रकार है जो मानव भाषा को समझने, उत्पन्न करने और संसाधित करने में सक्षम होता है।
  • यह विशाल मात्रा में टेक्स्ट डेटा (जैसे किताबें, वेबसाइट्स, सोशल मीडिया) पर प्रशिक्षित होता है और डीप लर्निंग (विशेष रूप से ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर) का उपयोग करके भाषा पैटर्न सीखता है।
  • उदाहरण
    • वैश्विक: चैटजीपीटी (ओपनएआई), BERT, नैनो बनाना और जेमिनी (गूगल), क्लॉड (एंथ्रोपिक), LLaMA (मेटा)।
  • भारत के AI और लार्ज लैंग्वेज मॉडल
भारतGPT (CoRover.ai द्वारा)12+ भाषाओं में टेक्स्ट, 14+ में वॉयस समर्थन; भारतीय उद्यमों और सार्वजनिक उपयोग हेतु
कृत्रिम (ओला द्वारा)2 ट्रिलियन+ टोकन पर प्रशिक्षित; भारतीय भाषाओं पर विशेष ध्यान
प्रोजेक्ट वाणी (गूगल-समर्थित + IISc)भारतीय बोलियों पर व्यापक डेटा एकत्र करता है → वाक् पहचान और स्वाभाविक भाषा प्रसंस्करण (NLP) प्रणालियों के सुधार हेतु।
डिजिटल इंडिया भाषिणीMeitY द्वारा एआई-संचालित भाषा अनुवाद प्लेटफॉर्म।राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन (NLTM) का हिस्सा; भारतीय भाषाओं में डिजिटल पहुँच (टेक्स्ट + वॉयस) को सक्षम बनाता है तथा भारतीय भाषाई कंटेंट सृजन को प्रोत्साहित करता है।
भारतजेन BharatGenविश्व का पहला सरकारी-वित्त पोषित बहु-मॉडल LLM (लॉन्च: 2024, नई दिल्ली)।राष्ट्रीय अंतःविषयी साइबर-भौतिक प्रणालियाँ मिशन (NM-ICPS) के अंतर्गत विकसित।भाषा, वाक् और दृष्टि पर केंद्रित → नागरिक सहभागिता और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार हेतु।IIT बॉम्बे के नेतृत्व में शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों का कंसोर्टियम।
सर्वम-1 (Sarvam-1)2 बिलियन पैरामीटर वाला लार्ज लैंग्वेज मॉडल।10 भारतीय भाषाओं का समर्थन।अनुवाद, सार-संक्षेपण और कंटेंट निर्माण में उपयोग।
चित्रलेखा (AI4Bharat)ओपन-सोर्स वीडियो ट्रांसक्रिएशन प्लेटफार्म; भारतीय भाषाओं में ऑडियो ट्रांसक्रिप्ट संपादन को सक्षम करता है।
हनुमान का एवरेस्ट 1.0 (SML)बहुभाषी एआई प्रणाली।35 भारतीय भाषाओं का समर्थन (लक्ष्य: 90 भाषाएँ)।भारतीय भाषाओं के लिए सबसे व्यापक कवरेज।
ब्रह्मAI (Zenteiq)8B–80B पैरामीटर वाला मल्टीमॉडल मॉडल; विज्ञान और औद्योगिक नवाचार हेतु
युक्ति (बेस), वार्ता (निर्देश), और कवच (गार्ड) (GenLoop)छोटे भाषा मॉडल (2B पैरामीटर) का विकास।सभी 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं के लिए देशज निर्णय क्षमता (Native Reasoning) और सामग्री नियंत्रण का समर्थन।
म्यूलहंटर AIRBI द्वारा वित्तीय संस्थानों को अवैध खातों की पहचान करने और डिजिटल धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने में मदद करने के लिए शुरू किया गया।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संबंधित महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन

AI एक्शन समिट 2025

  • एआई एक्शन समिट 2025 का आयोजन 10–11 फरवरी, 2025 को पेरिस, फ्रांस में किया गया। यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन (AI Governance) पर आयोजित तीसरा वैश्विक शिखर सम्मेलन था। इससे पूर्व हुए सम्मेलन निम्न थे:
    • ब्लेचली पार्क समिट (यूके, 2023) → AI को विनियमित करने के लिए ब्लेचली घोषणा
    • सियोल AI समिट (दक्षिण कोरिया, 2024)।
  • सह-अध्यक्ष: राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (फ्रांस) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (भारत)।
  • इसके साथ ही द्वितीय भारत–फ्रांस AI नीति गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया गया।
  • संयुक्त घोषणा-पत्र
    • 58 देशों (भारत, चीन, EU सहित) द्वारा हस्ताक्षरित।
    • शीर्षक: “लोगों और ग्रह के लिए समावेशी और सतत कृत्रिम बुद्धिमत्ता”
    • अमेरिका और यूके ने अत्यधिक विनियमन की चिंताओं का हवाला देते हुए हस्ताक्षर नहीं किए।
  • शुरू की गईं प्रमुख पहल 
पहलउद्देश्य और साझेदार
जनहित एआई प्लेटफ़ॉर्मसार्वजनिक-निजी प्रयासों को जोड़ना; खुला, विश्वसनीय AI को बढ़ावा देना।
वर्तमान (Current) एआई फ़ाउंडेशन$400 मिलियन का फंड → सार्वजनिक AI संसाधनों (डेटासेट्स, ओपन-सोर्स टूल्स) के लिए
पर्यावरणीय रूप से सतत AI के लिए गठबंधनफ्रांस, UNEP (संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम), ITU द्वारा नेतृत्व; 11 देशों एवं 37 कंपनियों द्वारा समर्थित; भारत – संस्थापक सदस्य।

इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026

  • स्थान: भारत मंडपम, नई दिल्ली (फरवरी 2026)
  • मेजबान: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार।
  • यह ग्लोबल साउथ के किसी राष्ट्र द्वारा आयोजित किया जाने वाला अब तक का पहला एआई शिखर सम्मेलन है।
  • विषय और मार्गदर्शक सिद्धांत
    • लोगो (Logo): अशोक चक्र + न्यूरल फ्लेयर्स (Neural flares) → जो नैतिक शासन और परिवर्तनकारी एआई का प्रतीक है।
    • तीन सूत्र (मार्गदर्शक सिद्धांत):
      • जनता (People): सांस्कृतिक विविधता और सुलभता का सम्मान करने वाला समावेशी एआई।
      • ग्रह (Planet): स्थिरता और जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप संसाधन-कुशल एआई।
      • प्रगति (Progress): विकास के लिए कंप्यूट, डेटा और मॉडल तक पहुंच का लोकतंत्रीकरण करना।
    • सात चक्र: इसके सात प्राथमिकता वाले कार्य क्षेत्र हैं।
  • प्रमुख प्रमुख पहल
    • उड़ान (UDAAN) – ग्लोबल एआई पिच फेस्ट: भारत के टियर-2/3 शहरों के एआई स्टार्टअप + महिला और दिव्यांग संस्थापकों के लिए।
    • युवा-एआई (YuvaAI) इनोवेशन चैलेंज और एआई बाय हर (AI by HER): युवा और महिला नवाचारियों को सशक्त बनाना।
    • सभी के लिए वैश्विक नवाचार चुनौती: वास्तविक दुनिया की सार्वजनिक चुनौतियों के लिए एआई समाधान।
  • आठ फाउंडेशनल मॉडल परियोजनाओं का शुभारंभ
    • अवतार एआई (IIT बॉम्बे कंसोर्टियम): ‘भारत-जेन’।
    • फ्रैक्टल एनालिटिक्स: भारत का पहला बड़ा ‘रीज़निंग मॉडल’ (70B पैरामीटर्स) → विज्ञान (STEM) और स्वास्थ्य सेवा के लिए।
    • टेक महिंद्रा मेकर्स लैब: कुशल 8B पैरामीटर वाला इंडिक मॉडल (हिंदी बोलियों पर केंद्रित) + शासन के लिए एजेंटिक एआई प्लेटफॉर्म “ओरियन” (Orion)।
    • जेनटीक (Zenteiq) – ब्रह्म-एआई (BrahmAI): मल्टीमॉडल मॉडल (8B–80B पैरामीटर्स) → विज्ञान और औद्योगिक नवाचार के लिए।
    • जेनलूप (GenLoop) – युक्ति/वार्ता/कवच: छोटे भाषा मॉडल (2B पैरामीटर्स) → सभी 22 आधिकारिक भारतीय भाषाओं का समर्थन करने के लिए।
    • इंटेलीहेल्थ (Intellihealth)
    • शोध एआई (Shodh AI): सामग्री खोज के लिए 7B पैरामीटर मॉडल → सामग्री विज्ञान में तेजी लाने के लिए।

नोट: प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण पर 21वां अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (ICON-2024) 19-22 दिसंबर, 2024 के दौरान एयू-केबीसी अनुसंधान केंद्र, चेन्नई, भारत में आयोजित किया जाएगा।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संबंधित महत्वपूर्ण पहल

वैश्विक स्तर पर (Global Level)

  • यूरोपीय संघ AI अधिनियम
    • विश्व का पहला व्यापक एआई कानून
    • जोखिम-आधारित विनियमन का ढाँचा प्रस्तुत करता है: निषिद्ध, उच्च जोखिम, सीमित जोखिम, न्यूनतम जोखिम प्रणाली वर्गीकरण
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर वैश्विक साझेदारी (GPAI)
    • लॉन्च: जून 2020
    • प्रकार: बहु-हितधारक पहल जो एआई सिद्धांत और व्यवहार (Theory-Practice Gap) के बीच की खाई को अनुप्रयुक्त अनुसंधान के माध्यम से पाटती है।
    • सदस्यता: 28 देश + EU (विकासशील देशों के लिए खुला)।
    • सचिवालय: OECD, पेरिस (फ्रांस)
    • भारत की भूमिका: संस्थापक सदस्य, 2024 में लीड चेयर।
    • नई दिल्ली घोषणा: मानव-केंद्रित और उत्तरदायी एआई को बढ़ावा देने हेतु अपनाई गई।
  • हिरोशिमा एआई प्रक्रिया (HAP)
    • प्रारंभ: 2023, G7 के अंतर्गत (OECD व GPAI सहयोग से)।
    • उद्देश्य: सुरक्षित, भरोसेमंद और इंटरऑपरेबल AI शासन ढांचे का निर्माण।

India Initiatives

इंडिया-एआई मिशन (IndiaAI Mission)

  • लॉन्च: 7 मार्च 2024
  • बजट परिव्यय: ₹10,371.92 करोड़।
  • नोडल एजेंसी: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (DIC) के तहत एक स्वतंत्र व्यापार प्रभाग (IBD) ‘इंडिया-एआई’ (IndiaAI)।
  • उद्देश्य:
    • एआई प्रौद्योगिकियों तक पहुंच का लोकतंत्रीकरण करना।
    • तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार को बढ़ावा देना।
    • नैतिक, सुरक्षित और उत्तरदायी एआई सुनिश्चित करना।
    • समावेशी विकास और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन को गति देना।
  • 7 प्रमुख स्तंभ
    • इंडिया-एआई कंप्यूट क्षमता: PPP मॉडल के माध्यम से 10,000+ GPU; एआई मार्केटप्लेस; एआई-एज़-ए-सर्विस (AI-as-a-Service)।
    • इंडिया-एआई इनोवेशन सेंटर: स्वदेशी LMMs (लार्ज मल्टीमॉडल मॉडल्स) और क्षेत्रीय फाउंडेशनल मॉडल का विकास।
    • इंडिया-एआई डेटासेट प्लेटफॉर्म (AIKosha): उच्च गुणवत्ता वाले गैर-व्यक्तिगत डेटासेट और एकीकृत पहुंच।
    • इंडिया-एआई एप्लिकेशन डेवलपमेंट: स्वास्थ्य सेवा, कृषि, जलवायु, शासन और सीखने की अक्षमताओं (Learning disabilities) में एआई का उपयोग।
    • इंडिया-एआई फ्यूचर स्किल्स: स्नातक (UG) से पीएचडी स्तर तक एआई शिक्षा; टियर 2/3 शहरों में 570 डेटा और एआई लैब।
    • इंडिया-एआई स्टार्टअप फाइनेंसिंग: डीप-टेक एआई स्टार्टअप्स के लिए वित्तीय सहायता।
    • सुरक्षित और विश्वसनीय एआई (AISI): ‘इंडिया-एआई सेफ्टी इंस्टीट्यूट’ के माध्यम से सुरक्षा ढांचे और आत्म-मूल्यांकन का निर्माण।

भारत की अन्य पहलें

  • राष्ट्रीय एआई पोर्टल – INDIAai
    • MeitY, नीति आयोग और NIC द्वारा लॉन्च किया गया।
    • यह एआई समाचार, अनुसंधान, स्टार्टअप और नीतियों के लिए ‘वन-स्टॉप’ डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
  • YUVAi (युवा-एआई) (AI के साथ उन्नति और विकास के लिए युवा)
    • NeGD (MeitY) और इंटेल इंडिया द्वारा कक्षा 8-12 के छात्रों के लिए शुरू किया गया। 
    • इसका उद्देश्य छात्रों को मानव-केंद्रित एआई डिजाइनर के रूप में सशक्त बनाना है।
  • RAISE समिट: सामाजिक सशक्तिकरण के लिए उत्तरदायी एआई (Responsible AI for Social Empowerment), जो नैतिक एआई उपयोग पर केंद्रित है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रमुख घटक और तकनीक

एआई अवधारणा/प्रौद्योगिकी

विवरण और मुख्य विशेषताएं

मशीन लर्निंग (ML)

  • मशीन लर्निंग (Machine Learning) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का एक उपसमुच्चय है। इसमें ऐसे एल्गोरिदम विकसित किए जाते हैं जो कंप्यूटरों को स्पष्ट रूप से प्रोग्राम किए बिना, डेटा से सीखने और समय के साथ अपने प्रदर्शन में सुधार करने की अनुमति देते हैं। 
  • मशीन लर्निंग के मुख्य प्रकारों में सुपरवाइज्ड लर्निंग, अनसुपरवाइज्ड लर्निंग और रिइन्फोर्समेंट लर्निंग शामिल हैं।

डीप लर्निंग

  • डीप लर्निंग (गहन शिक्षा) मशीन लर्निंग का एक उपक्षेत्र है, जिसमें मल्टी-लेयर न्यूरल नेटवर्क (डीप न्यूरल नेटवर्क) का उपयोग किया जाता है।
  •  यह तकनीक विशेष रूप से छवि और भाषण पहचान जैसे कार्यों में सफल सिद्ध हुई है।

न्यूरल नेटवर्क

  • ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML) का एक मौलिक घटक हैं, विशेष रूप से डीप लर्निंग के उपक्षेत्र में।ये मानव मस्तिष्क की संरचना और कार्य से प्रेरित गणनात्मक मॉडल हैं, जिनमें एक दूसरे से जुड़े नोड्स (कृत्रिम न्यूरॉन्स) होते हैं, जो परतों में व्यवस्थित होते हैं।

प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP)

  • NLP कंप्यूटरों और मानव भाषाओं के बीच बातचीत पर केंद्रित है
  • यह कंप्यूटरों को मानव-सदृश टेक्स्ट को समझने, व्याख्या करने और उत्पन्न करने में सक्षम बनाता है, जिससे यह चैटबॉट्स और भाषा अनुवाद जैसे अनुप्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।

कृत्रिम सामान्य बुद्धिमत्ता (AGI)

  • ऐसी मशीनें जो स्व-अधिगम (Self-learning) की प्रक्रिया के माध्यम से स्वायत्त रूप से ‘सोचने’ और ‘कार्य करने’ में सक्षम होती हैं।

फाउंडेशनल AI

  • बड़े पैमाने के AI मॉडल जिन्हें बहुत बड़े डेटासेट पर प्रशिक्षित किया जाता है और जिन पर जनरेटिव एआई (Generative AI) सहित कई विशिष्ट अनुप्रयोग बनाए जा सकते हैं।

कंप्यूटर विज़न

  • यह क्षेत्र मशीनों को छवियों या वीडियो जैसे दृश्य डेटा के आधार पर व्याख्या करने और निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।
  • वस्तु की पहचान और छवि वर्गीकरण सामान्य अनुप्रयोग हैं।

रोबोटिक्स

  • AI को अक्सर रोबोटिक सिस्टम में एकीकृत किया जाता है ताकि उन्हें स्वायत्त रूप से कार्य करने में सक्षम बनाया जा सके।
  • इसमें भौतिक रोबोट और सॉफ्टवेयर-आधारित रोबोट दोनों शामिल हैं।

एक्सपर्ट सिस्टम

  • ये कंप्यूटर सिस्टम किसी विशेष डोमेन में मानव विशेषज्ञ की निर्णय लेने की क्षमता की नकल करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
  • वे पूर्वनिर्धारित नियमों के एक सेट के आधार पर निर्णय लेने के लिए नियम-आधारित सिस्टम का उपयोग करते हैं।
  • रोबोटिक्स प्रौद्योगिकी की वह शाखा है जो रोबोट के डिजाइन (अभिकल्पना), निर्माण, संचालन और अनुप्रयोग से संबंधित है।

रोबोट क्या है? (What is a Robot?)

  • एक रोबोट एक प्रोग्राम योग्य (Programmable) मशीन है जो कार्यों को स्वायत्त (Autonomously) या अर्ध-स्वायत्त रूप से कर सकती है।
  • यह मनुष्यों के समान दिख सकते हैं (ह्यूमनॉइड / मानवसदृश) या कार्यात्मक और कार्य-विशिष्ट हो सकते हैं (जैसे औद्योगिक रोबोट या ड्रोन)।
  • उदाहरण: स्वचालित कारें, ड्रोन, कारखानों में रोबोटिक आर्म (भुजाएं), या शल्य चिकित्सा रोबोट।

असीमोव के रोबोटिक्स के नियम (Asimov’s Laws)

  • प्रसिद्ध विज्ञान-कथा लेखक आइजैक असीमोव ने 1942 में अपनी कहानियों के संग्रह ‘आई, रोबोट’ (I, Robot) के माध्यम से “रोबोटिक्स के तीन नियम” दुनिया के सामने रखे।
  • ये नियम रोबोटों के आचरण को निर्देशित करने वाले एक काल्पनिक नैतिक ढांचे (Ethical framework) के रूप में पहचाने जाते हैं:
    • प्रथम नियम: कोई भी रोबोट किसी इंसान को चोट नहीं पहुंचाएगा और न ही अपनी निष्क्रियता से उसे किसी संकट में पड़ने देगा।
    • द्वितीय नियम: रोबोट को मनुष्यों के हर आदेश का पालन करना अनिवार्य है, बशर्ते वे निर्देश प्रथम नियम का उल्लंघन न करते हों।
    • तृतीय नियम: एक रोबोट अपने वजूद की रक्षा तब तक करेगा जब तक कि यह सुरक्षा पहले या दूसरे नियम के आड़े न आती हो।
    • शून्य नियम (बाद में सम्मिलित): रोबोट समूची मानवता के हितों की रक्षा करेगा और उसे नुकसान से बचाएगा। असीमोव ने इसे व्यक्तिगत सुरक्षा के ऊपर सामूहिक मानवीय कल्याण को महत्व देने के लिए जोड़ा था।

महत्वपूर्ण रोबोट (भारत और राजस्थान – 2025)

रोबोट क्षेत्रमहत्व / समाचार में क्यों
व्योममित्र  (इसरो)अंतरिक्षमानवाकृति रोबोट (Humanoid Robot) – गगनयान मिशन हेतु विकसित; उन्नत सिमुलेशन परीक्षण जारी।
मित्रा रोबोट (इनवेंटो रोबोटिक्स)स्वास्थ्य सेवा और आतिथ्यएम्स दिल्ली एवं निजी अस्पतालों में रोगियों से संवाद एवं टेलीप्रेज़ेन्स हेतु उपयोग।
SS इनोवेशंस सर्जिकल रोबोटस्वास्थ्य सेवास्वदेशी, कम लागत वाला रोबोटिक सर्जरी सिस्टम; “दा विंची” प्रणाली का विकल्प
रोबोडॉक / दा विंची सिस्टमस्वास्थ्य सेवारोबोटिक सर्जरी अब टियर-2 शहरों तक विस्तारित।
असिमोव रोबोटिक्स (केरल)सेवाअस्पताल एवं हवाई अड्डों के लिए सेवा रोबोट (Service Robots)।
TAL Brabo (टाटा मोटर्स)विनिर्माणभारत का पहला औद्योगिक रोबोट; “मेक इन इंडिया 2.0” का हिस्सा।
मानव (A-SET इंस्टीट्यूट)शिक्षा और अनुसंधानभारत का पहला 3D-प्रिंटेड ह्यूमनॉइड; रोबोटेक्स इंडिया 2025 में प्रदर्शित।
जेनरोबोटिक्स बैंडिकूटस्वच्छतासीवर-सफाई रोबोट; “स्वच्छ भारत मिशन” के अंतर्गत तैनात।दुनिया का पहला रोबोटिक स्कैवेंजर (केरल पहला राज्य और जयपुर राजस्थान का पहला शहर बना जिसने इसे अपनाया।)
होमोसेप एटमस्वच्छताभारत का पहला सेप्टिक टैंक/मैनहोल सफाई रोबोट; IIT मद्रास आधारित स्टार्टअप Solinas द्वारा विकसित।
MULE (मल्टी- यूटिलिटी लेग्ड इक्विपमेंट)रक्षाभारतीय सेना + निजी भागीदारों द्वारा विकसित एआई-आधारित मल्टी-यूटिलिटी रोबोटिक म्यूल/डॉग्स; निगरानी, टोही (Reconnaissance) एवं रसद (Logistics) कार्य हेतु; लगभग 12 किग्रा भार वहन क्षमता; थर्मल कैमरा एवं रडार से सुसज्जित।
ग्रिडबॉट्स (Gridbots)परमाणु और रक्षाहानिकारक वातावरणों में कार्य करने हेतु विकसित रोबोट।
म्युनिसिपल क्लीनिंग रोबोट्स (जयपुर)शहरी शासनस्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत रोबोटिक अपशिष्ट प्रबंधन पायलट प्रोजेक्ट।
  • बिग डेटा उन डेटासेट्स को संदर्भित करता है जो इतने बड़े और जटिल होते हैं कि पारंपरिक डेटा प्रसंस्करण सॉफ़्टवेयर और विधियाँ उन्हें प्रभावी रूप से संसाधित नहीं कर सकतीं।
  • बिग डेटा के 6 Vs का सारांश:
    1. मात्रा (Volume): डेटा की मात्रा।
    2. वेग (Velocity): डेटा उत्पन्न होने और प्रसंस्करण की गति।
    3. विविधता (Variety): डेटा के विभिन्न प्रकार और स्वरूप।
    4. सत्यता (Veracity): डेटा की गुणवत्ता और सटीकता।
    5. मूल्य (Value): डेटा से निकाले गए उपयोगी और महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टियाँ।
    6. परिवर्तनशीलता (Variability): डेटा की बदलती प्रकृति और निरंतरता।
  • बिग डेटा विश्लेषण में डेटा में पैटर्न और अंतर्दृष्टियों की पहचान करना शामिल है, जो निर्णय लेने में मदद करता है और रुझानों को समझने में सहायक होता है।
  • जनवरी 2025 में, भारत ने संयुक्त राष्ट्र के बिग डेटा और आधिकारिक सांख्यिकी के लिए डेटा साइंस पर विशेषज्ञ समिति (UN-CEBD) का सदस्य बना। इस सदस्यता के माध्यम से भारत वैश्विक स्तर पर आधिकारिक सांख्यिकी के लिए बिग डेटा के उपयोग से संबंधित मानकों के निर्माण में योगदान दे सकेगा।
  • प्रोजेक्ट ADVAIT → कर प्रणालियों में धोखाधड़ी का पता लगाने के लिए बड़े डेटा-आधारित विश्लेषण।

अपाचे हडूप (Apache Hadoop) – बिग डेटा का आधार

  • हडूप एक ओपन-सोर्स फ्रेमवर्क है, जिसका उपयोग कंप्यूटर के ‘क्लस्टर’ का उपयोग करके बड़े डेटासेट के वितरित भंडारण और प्रसंस्करण के लिए किया जाता है।
  • बिग डेटा एनालिटिक्स इसी फ्रेमवर्क पर कार्य करता है।
  • हडूप के मुख्य घटक
    • HDFS (हडूप डिस्ट्रीब्यूटेड फाइल सिस्टम): यह हडूप की भंडारण परत (Storage Layer) है। यह डेटा को छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित करता है और उन्हें क्लस्टर के विभिन्न नोड्स (Nodes) पर वितरित करता है।
    • MapReduce (मैप-रिड्यूस): यह हडूप की प्रसंस्करण परत है। यह समानांतर रूप से डेटा को प्रोसेस करने के लिए जावा-आधारित प्रोग्रामिंग मॉडल का उपयोग करता है।
    • YARN (येट अनदर रिसोर्स नेगोशिएटर): यह संसाधन प्रबंधन (Resource management) और कार्य शेड्यूलिंग की परत है। यह तय करता है कि किस कार्य को कितने संसाधन (CPU, RAM) आवंटित किए जाने चाहिए।
    • Hadoop Common: यह उन साझा लाइब्रेरी और जावा एपीआई (APIs) को प्रदान करता है जिनका उपयोग HDFS, YARN और MapReduce द्वारा किया जाता है।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग से तात्पर्य इंटरनेट (“क्लाउड”) के माध्यम से कंप्यूटिंग सेवाओं (जैसे सर्वर, स्टोरेज, डेटाबेस, नेटवर्किंग, सॉफ्टवेयर) की डिलीवरी (आपूर्ति) से है।
  • यह तकनीक उपयोगकर्ताओं को किसी भौतिक हार्डवेयर को खरीदने या उसका मालिक बनने की आवश्यकता के बिना, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक ऑन-डिमांड (On-demand) पहुंच की सुविधा देती है।
  • प्रमुख उदाहरण: अमेज़न AWS, गूगल ड्राइव, माइक्रोसॉफ्ट वनड्राइव और माइक्रोसॉफ्ट एज़्योर (Azure)।

क्लाउड कंप्यूटिंग के प्रकार (परिनियोजन मॉडल के आधार पर)

  • सार्वजनिक क्लाउड (Public Cloud)
    • स्वामित्व/प्रबंधन: तृतीय पक्ष के प्रदाता (जैसे AWS, Google Cloud)।
    • लाभ: लागत प्रभावी, मापनीय, रखरखाव का कोई बोझ नहीं।
    • उपयोग: सूक्ष्म एवं लघु उद्योग (SMEs), वेब होस्टिंग, परीक्षण।
    • भारतीय संदर्भ: जोमैटो (Zomato) और पेटीएम (Paytm) स्केलिंग के लिए इसका उपयोग करते हैं।
  • निजी क्लाउड (Private Cloud)
    • विशिष्ट उपयोग: केवल एक ही संगठन के लिए (अक्सर ऑन-प्रिमाइसेस)।
    • लाभ: बेहतर नियंत्रण, सुरक्षा और अनुकूलन।
    • उपयोग: वित्त, स्वास्थ्य सेवा, सरकारी एजेंसियां।
    • भारतीय संदर्भ: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ग्राहक डेटा के लिए प्राइवेट क्लाउड का उपयोग करता है।
  • हाइब्रिड क्लाउड (Hybrid Cloud)
    • मिश्रण: यह पब्लिक और प्राइवेट क्लाउड का संयोजन है।
    • लाभ: लागत दक्षता और सुरक्षा का संतुलन; गतिशील कार्यभार (Workloads) के लिए उपयुक्त।
    • भारतीय संदर्भ: भारतीय रेलवे हाइब्रिड मॉडल के साथ विशाल डेटासेट का प्रबंधन करता है।
  • सामुदायिक क्लाउड (Community Cloud)
    • साझा बुनियादी ढांचा: यह एक ऐसा क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर है जिसे समान उद्देश्यों (जैसे सुरक्षा आवश्यकताएँ, नियामक अनुपालन) वाले कई संगठन आपस में साझा करते हैं।
    • साझाकरण और सहयोग: यह सहयोग को बढ़ावा देता है और बुनियादी ढांचे की लागत को साझा करने में मदद करता है।
    • उदाहरण: इसका उपयोग विशेष रूप से अनुसंधान संस्थानों और विश्वविद्यालयों जैसे विशिष्ट समुदायों द्वारा किया जाता है।
    • प्रकृति: यह आम जनता के लिए बिना किसी नियामक जाँच के खुला नहीं होता है; यह केवल उस विशिष्ट सामुदायिक समूह के सदस्यों तक ही सीमित होता है।

क्लाउड कंप्यूटिंग के सेवा मॉडल (Service Models)

  • इन्फ्रास्ट्रक्चर एज़ ए सर्विस (IaaS)
    • परिभाषा: यह बुनियादी ढांचा (सर्वर, स्टोरेज, नेटवर्किंग) प्रदान करता है। उपयोगकर्ता ऑपरेटिंग सिस्टम और एप्लिकेशन का प्रबंधन स्वयं करता है।
    • उदाहरण: AWS EC2, गूगल कंप्यूट इंजन, एज़्योर VMs, मेघराज (MeghRaj) – भारत का राष्ट्रीय क्लाउड।
    • लाभ: मापनीय (Scalable), लचीला और लागत प्रभावी।
    • भारतीय संदर्भ: जोमैटो (Zomato) प्लेटफॉर्म प्रबंधन के लिए एज़्योर का उपयोग करता है।
  • प्लेटफॉर्म एज़ ए सर्विस (PaaS)
    • परिभाषा: यह बुनियादी ढांचे के प्रबंधन के बिना एप्लिकेशन विकास के लिए एक प्लेटफॉर्म प्रदान करता है।
    • उदाहरण: एज़्योर ऐप सर्विस, गूगल ऐप इंजन, आधार प्रमाणीकरण सेवाएँ
    • लाभ: विकास प्रक्रिया को सरल बनाता है, तीव्र परिनियोजन (Deployment)।
    • भारतीय संदर्भ: स्टार्टअप्स ऐप बनाने के लिए PaaS का उपयोग करते हैं।
  • सॉफ्टवेयर एज़ ए सर्विस (SaaS)
    • परिभाषा: इंटरनेट के माध्यम से प्रदान किए जाने वाले ‘रेडी-टू-यूज़’ (उपयोग के लिए तैयार) एप्लिकेशन।
    • उदाहरण: गूगल वर्कस्पेस, ऑफिस 365, जीएसटीएन (GSTN), डिजी लॉकर, भीम (BHIM)
    • लाभ: कहीं भी सुलभ, इंस्टॉलेशन की आवश्यकता नहीं, सदस्यता आधारित।
    • भारतीय संदर्भ: डिजी लॉकर एक प्रमुख सरकारी SaaS सेवा है।
  • नेटवर्क-एज़-ए-सर्विस (NaaS)
    • यह एक ऐसा मॉडल है जिसमें ग्राहक क्लाउड प्रदाताओं से नेटवर्किंग सेवाएँ किराए पर लेते हैं।
    • यह उपयोग के आधार पर भुगतान करने और व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुसार स्केल करने की लचीलापन प्रदान करता है।
    • यह ग्राहकों को अपने नेटवर्किंग बुनियादी ढांचे के रखरखाव के बिना नेटवर्क संचालित करने की अनुमति देता है।

मालवेयर-एज़-ए-सर्विस (MaaS)

  • यह कोई वैध क्लाउड कंप्यूटिंग सर्विस मॉडल नहीं है।
  • यह साइबर अपराध (Cybercrime) का एक प्रकार है जहाँ साइबर अपराधियों द्वारा अन्य हैकर्स या दुर्भावनापूर्ण तत्वों को इंटरनेट पर सेवा के रूप में मालवेयर (Malware) बिक्री या किराए पर दिया जाता है।
  • MaaS वैध SaaS मॉडल की तरह ही कार्य करता है, जहाँ सॉफ्टवेयर (मालवेयर) सदस्यता या ‘पे-पर-यूज़’ आधार पर प्रदान किया जाता है।

एज कम्प्यूटिंग (Edge computing)

  • एज कम्प्यूटिंग वह तकनीक है जिसमें डेटा प्रोसेसिंग और गणना (computation) नेटवर्क के एज (यानी जहाँ डेटा उत्पन्न होता है – जैसे सेंसर, डिवाइस, लोकल सर्वर) पर ही किया जाता है। 
  • इससे डेटा को पूरी तरह से दूर स्थित क्लाउड तक भेजने की आवश्यकता नहीं होती।
  • यह कैसे काम करता है: डेटा → स्थानीय रूप से संसाधित → केवल प्रासंगिक जानकारी क्लाउड को भेजी जाती है।
  • मुख्य विशेषताएँ:
    • तेज़ प्रोसेसिंग – चूंकि प्रसंस्करण डेटा स्रोत के करीब होता है, विलंबता (देरी) कम होती है।
    • IoT और क्लाउड के बीच सेतु – यह डाउनस्ट्रीम (क्लाउड → उपकरण) और अपस्ट्रीम (उपकरण → क्लाउड) डेटा प्रवाह दोनों को संभालता है।
    • कम बैंडविड्थ की आवश्यकता – बार-बार पूरे डेटा को क्लाउड पर भेजने की जरूरत नहीं।
    • रियल-टाइम निर्णय – स्वचालित कारों और स्वास्थ्य उपकरणों जैसे सिस्टमों में तत्काल कार्रवाई को सक्षम बनाता है।
  • उदाहरण:
    • स्वचालित कार: सेंसर (गति, कैमरा, ब्रेक) से डेटा कार के ऑनबोर्ड कंप्यूटर (एज डिवाइस) द्वारा तुरंत संसाधित किया जाता है ताकि त्वरित ड्राइविंग निर्णय लिए जा सकें।
    • स्मार्ट फैक्ट्री (इंडस्ट्री 4.0): मशीनों में IoT सेंसर स्थानीय रूप से दोष पहचान डेटा को संसाधित करते हैं और नुकसान से बचने के लिए मशीन को तुरंत रोक सकते हैं।

भारत की क्लाउड कंप्यूटिंग पहल

क्लाउड पहल

प्लेटफ़ॉर्म की विशेषताएं और सेवाएं

मेघराज (MeghRaj – 2013)

विवरण: यह इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा शुरू किया गया

  • ‘जीआई क्लाउड’ (GI Cloud – Government of India Cloud) है।
  • उद्देश्य: इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश में ई-सेवाओं के वितरण में तेजी लाना है।
  • भूमिका: राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) ‘मेघराज’ के अंतर्गत क्लाउड सेवाएं प्रदान कर रहा है।
  • सेवाएँ: सरकारी विभागों के लिए IaaS, PaaS और SaaS प्रदान करना।

डिजीबॉक्स (DigiBoxx)

  • यह एक SaaS (स्टोरेज-एज़-ए-सर्विस) कंपनी है जो व्यवसायों और व्यक्तियों को क्लाउड-आधारित ‘प्रबंधित भंडारण सेवाएँ’ प्रदान करती है।

डिजिलॉकर (DigiLocker)

  • यह इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की एक प्रमुख पहल है।
  • यह नागरिकों को उनके प्रामाणिक दस्तावेजों तक डिजिटल पहुंच प्रदान करने के लिए क्लाउड-आधारित दस्तावेज़ भंडारण की सुविधा देता है।

राजमेघ (RajMegh)

  • यह ‘राजस्थान का क्लाउड’ है।
  • विकासकर्ता: राजस्थान सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग (DoIT&C) द्वारा विकसित।
  • विशेषताएँ: जयपुर में ‘टियर-III’ (Tier-III) प्रमाणित स्टेट डेटा सेंटर (SDC)। 
  • यह राजस्थान के लिए SaaS और PaaS के आधार पर एंड-टू-एंड क्लाउड सक्षमता प्रदान करता है।

राजस्थान डेटा सेंटर नीति – 2025

  • राजस्थान बजट वर्ष 2024–25 में घोषित इस नीति का उद्देश्य राजस्थान को डेटा सेंटर, क्लाउड अवसंरचना और डिजिटल सेवाओं का राष्ट्रीय केंद्र बनाना है।
  • विजन: “डेटा नया तेल है और डेटा सेंटर नए तेल कुएँ हैं।”
  • यह नीति पहली बार डेटा सेंटर्स को आवश्यक सेवाओं के रूप में मान्यता प्रदान करती है, जिससे त्वरित विकास एवं रणनीतिक तकनीकी निवेश को प्रोत्साहन मिलता है।
  • मुख्य उद्देश्य
    • 5 वर्षों में 300 मेगावाट स्थापित क्षमता प्राप्त करना।
    • 5 वर्षों में ₹20,000 करोड़ का निवेश आकर्षित करना।
    • राजस्थान भर में 5 समर्पित डेटा सेंटर पार्क विकसित करना।
    • डेटा स्थानीयकरण को बढ़ावा देना एवं राजस्थान को किफायती डेटा सेंटर गंतव्य के रूप में स्थापित करना।
  • प्रोत्साहन एवं सहायता
    • वित्तीय प्रोत्साहन: पात्रता: न्यूनतम 2 MW क्षमता; श्रेणियाँ – लार्ज (₹25 – ₹100 करोड़), मेगा (₹100 – ₹250 करोड़), अल्ट्रा-मेगा (₹250 करोड़ से ऊपर)।
    • विकल्प:
      • निवेश सब्सिडी: राज्य कर का 75% प्रतिपूर्ति– 7 वर्षों तक।
      • पूंजी सब्सिडी: पात्र स्थिर पूंजी निवेश (EFCI) का 10–20% पुनर्भुगतान।
      • टर्नओवर-लिंक्ड प्रोत्साहन: 10 वर्षों के लिए शुद्ध बिक्री टर्नओवर का 1–1.4%।
    • सनराइज प्रोत्साहन (पहले 3 मेगा प्रोजेक्ट्स): अतिरिक्त 25% सब्सिडी, 5% ब्याज छूट, नवीकरणीय ऊर्जा शुल्क पर छूट।
    • अन्य लाभ: बिजली शुल्क में 100% छूट (7 वर्ष), 75% स्टाम्प ड्यूटी छूट, जमीन भुगतान में लचीलापन।
    • आईपी सृजन हेतु सहायता: पेटेंट, GI टैग्स और नवाचार के लिए ₹1 करोड़ समर्थन।
  • ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ (IoT) एक ऐसा नेटवर्क है जिसमें विभिन्न उपकरण (Devices), सेंसर (संवेदक) और प्रणालियाँ आपस में जुड़ी होती हैं। ये प्रणालियाँ सीधे मानवीय हस्तक्षेप के बिना, इंटरनेट के माध्यम से डेटा एकत्र करती हैं, उसका आदान-प्रदान करती हैं और उसे संसाधित (Process) करती हैं।
  • IoT प्रणाली के मुख्य घटक: एक IoT प्रणाली मुख्य रूप से तीन घटकों से मिलकर बनी होती है:
    • स्मार्ट उपकरण: वे भौतिक उपकरण जो डेटा एकत्र करते हैं (जैसे: स्मार्ट टेलीविज़न, विभिन्न सेंसर)।
    • IoT एप्लिकेशन: वह सॉफ्टवेयर जो एकत्रित डेटा का विश्लेषण और प्रसंस्करण करता है।
    • ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (GUI): वह माध्यम जिसके द्वारा उपयोगकर्ता IoT प्रणाली को नियंत्रित और मॉनिटर करता है।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • कनेक्टिविटी: उपकरणों का नेटवर्क से जुड़ना (जैसे: वाई-फाई, ब्लूटूथ, 5G, LoRa आदि के माध्यम से)।
    • स्वचालन: न्यूनतम मानवीय इनपुट के साथ स्मार्ट और स्वचालित निर्णय लेने की क्षमता।
    • डेटा-संचालित: यह प्रणाली वास्तविक समय (Real-time) में डेटा के संग्रह और उसके विश्लेषण पर निर्भर करती है।
    • AI और क्लाउड एकीकरण: यह पूर्वसूचक विश्लेषण (Predictive analysis), निर्णय समर्थन और दूरस्थ (रिमोट) नियंत्रण जैसी उन्नत क्षमताओं को प्रदान करता है।
  • IoT के अनुप्रयोग
    • स्मार्ट होम: स्वचालित प्रकाश व्यवस्था, थर्मोस्टेट और घरेलू उपकरण (जैसे- Nest, Ring, Alexa)।
    • स्वास्थ्य सेवा: पहनने योग्य उपकरण (Wearables – जैसे: Fitbit, स्मार्ट बैंड) जो हृदय गति, रक्तचाप (BP) और ग्लूकोज जैसे स्वास्थ्य मापदंडों की निगरानी करते हैं।
    • औद्योगिक IoT (IIoT): पूर्वसूचक रखरखाव (Predictive maintenance), रोबोटिक्स और आपूर्ति श्रृंखला अनुकूलन।
    • कृषि: IoT-सक्षम ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई), मृदा नमी सेंसर और मौसम की निगरानी।
      • भारतीय उदाहरण: IoT डेटा का उपयोग करके PMFBY (प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना) के तहत फसल बीमा; नमो ड्रोन दीदी योजना।
      • राजकिसान IoT पायलट: राजस्थान के टोंक और सीकर जिलों में वास्तविक समय में मृदा की नमी और सिंचाई को नियंत्रित करने के लिए एक ऐप का परीक्षण किया जा रहा है।
    • स्मार्ट शहर: स्मार्ट यातायात संकेत, स्वचालित अपशिष्ट (कचरा) संग्रह, तथा जल और ऊर्जा संरक्षण।
उभरती तकनीक

IoT आर्किटेक्चर के संदर्भ में, वायरलेस कनेक्टिविटी (जैसे: Wi-Fi, Bluetooth, Zigbee, LoRa आदि) मुख्य रूप से नेटवर्क लेयर द्वारा नियंत्रित की जाती है। 

प्रत्येक लेयर की भूमिका:

लेयरIoT में भूमिका
एप्लिकेशन लेयरउपयोगकर्ताओं और एप्लिकेशन से इंटरफेस करता है (जैसे: स्मार्ट होम ऐप्स, स्वास्थ्य निगरानी डैशबोर्ड)
परसेप्शन लेयरसेंसरों के माध्यम से भौतिक मानकों का पता लगाती है (जैसे तापमान, गति, आर्द्रता)।
नेटवर्क लेयरडेटा को वायर्ड/वायरलेस नेटवर्क के माध्यम से प्रसारित करता है (जैसे: Wi-Fi, Zigbee, Cellular, LoRaWAN)
ट्रांसपोर्ट लेयरडिवाइस और सर्वर के बीच डेटा के विश्वसनीय ट्रांसमिशन को सुनिश्चित करता है (जैसे: TCP/UDP प्रोटोकॉल)
प्रोसेसिंग लेयर (Middleware)डेटा संग्रहण, प्रोसेसिंग और विश्लेषण (Cloud/Edge Computing) (जैसे: डेटाबेस – SQL, NoSQL, बिग डेटा एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग एल्गोरिद्म)

इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) बनाम इंटरनेट ऑफ एवरीथिंग (IoE)

  • IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) → यह इंटरनेट के माध्यम से भौतिक उपकरणों (स्मार्टफोन, घरेलू उपकरण, पहनने योग्य उपकरण आदि) का एक ऐसा संयोजन है जो डेटा के आदान-प्रदान और प्रक्रियाओं के स्वचालन (Automation) को सक्षम बनाता है।
  • फोकस: केवल डिवाइस और उनके बीच संचार
  • उदाहरण: स्मार्ट होम डिवाइस, वियरेबल्स, कनेक्टेड वाहन।
  • IoE (इंटरनेट ऑफ एवरीथिंग) → यह केवल उपकरणों को ही नहीं, बल्कि लोगों, डेटा और प्रक्रियाओं को भी जोड़कर IoT के दायरे को और अधिक व्यापक बनाता है।
    • फोकस: उपकरणों, लोगों, डेटा और प्रक्रियाओं का समग्र एकीकरण
    • उदाहरण: स्मार्ट सिटी, एकीकृत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र, कनेक्टेड हेल्थकेयर।
पहलू        IoTIoE
दायराकेवल डिवाइसडिवाइस + लोग + डेटा + प्रक्रियाएँ
संचार डिवाइस-टू-डिवाइस (उपकरण से उपकरण)समग्र रूप से सभी का संवाद
उद्देश्यस्वचालनसमग्र बुद्धिमत्ता और अनुकूलन

आगामी IoT सम्मेलन (2025)

  • IEMECON 2025 – जयपुर
    • तारीख: 8–10 दिसंबर, 2025
    • आयोजक: यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट (UEM), जयपुर
    • थीम: “एंबेडेड सिस्टम्स, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स, संचार, और ऑप्टिकल नेटवर्क में AI की प्रगति”।
  • इंडिया इंटरनेशनल IoT ऑटोमेशन एक्सपो 
    • प्रगति मैदान, दिल्ली
    • फोकस: स्मार्ट सिटीज़, IoT, ई-गवर्नेंस, EVs, लॉजिस्टिक्स, और स्वचालन।
  • IDCIoT 2025 – इंटेलिजेंट डेटा कम्युनिकेशन एंड IoT कॉन्फ्रेंस
    • 2025 – तीसरा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
    • 5-7 फरवरी, 2025, रेवा यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु में।
  • ब्लॉकचेन एक विकेंद्रीकृत और वितरित बहीखाता (Decentralised, distributed ledger) प्रणाली है। यह एक नेटवर्क (कई कंप्यूटरों) में लेनदेन को इस प्रकार रिकॉर्ड करती है कि वे छेड़छाड़-रोधी और पारदर्शी होते हैं।
  • यह ब्लॉक्स की एक श्रृंखला होती है, जहाँ प्रत्येक ब्लॉक डेटा या डिजिटल जानकारी संग्रहीत करता है (उदाहरण: बिटकॉइन के मामले में, एक ब्लॉक क्रिप्टोकरेंसी हस्तांतरण का रिकॉर्ड रखता है)।
  • एक बार जब कोई ब्लॉक श्रृंखला में जुड़ जाता है, तो उसे बदलना अत्यंत कठिन होता है, जिससे डेटा की अखंडता (Integrity) सुनिश्चित होती है।

ब्लॉकचेन तकनीक से संबंधित अवधारणा

क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency)

  • क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल या आभासी मुद्रा है जो सुरक्षा के लिए क्रिप्टोग्राफिक तकनीकों का उपयोग करती है।
  • पारंपरिक मुद्राओं (जैसे, सरकारी द्वारा जारी फिएट मनी) के विपरीत, जो सरकारों द्वारा जारी की जाती हैं, क्रिप्टोकरेंसी विकेंद्रीकृत नेटवर्क पर कार्य करती है और ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करती है।
  • उदाहरण: बिटकॉइन (प्रथम क्रिप्टोकरेंसी – 2008, सातोशी नाकामोतो), इथेरियम, अल्टकॉइन, रिपल, लाइटकॉइन, सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC – भारत – डिजिटल रुपये (e₹))।
  • सहमति तंत्र (Consensus Mechanisms)
    • प्रूफ ऑफ वर्क (PoW): इसमें ‘माइनर्स’ लेनदेन को सत्यापित करने के लिए जटिल गणितीय समस्याओं को हल करते हैं (जैसे बिटकॉइन में)।
    • प्रूफ ऑफ स्टेक (PoS): इसमें सत्यापनकर्ता का चयन उनके पास मौजूद सिक्कों (Coins) की संख्या के आधार पर किया जाता है। उदाहरण: इथेरियम 2.0।
    • अन्य तंत्र: डेलीगेटेड प्रूफ ऑफ स्टेक (DPoS), प्रूफ ऑफ अथॉरिटी (PoA), आदि।
  • भारत में कानूनी स्थिति
    • क्रिप्टोकरेंसी को आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत वर्चुअल डिजिटल संपत्ति के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
    • इसे कानूनी/वैध मुद्रा (Legal Tender) का दर्जा प्राप्त नहीं है, अर्थात इसका उपयोग भुगतान हेतु नहीं किया जा सकता, किन्तु होल्डिंग, ट्रेडिंग/निवेश की अनुमति है।
  • भारत में क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज (Exchanges)
    • WazirX: भारत के सबसे बड़े और लोकप्रिय एक्सचेंजों में से एक। यह बिटकॉइन, एथेरियम और रिपल जैसी प्रमुख मुद्राओं में व्यापार की सुविधा देता है।
    • अन्य: CoinSwitch Kuber, ZebPay, Unocoin, Bitbns, CoinDCX।
  • मार्केट्स इन क्रिप्टो एसेट्स (MiCA) विधान
    • यूरोपीय संसद द्वारा पारित विधेयक।
    • उद्देश्य: क्रिप्टो-एसेट सेवा प्रदाताओं के लिए विधिक ढाँचा प्रदान करना और उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित करना।

केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा पायलट परियोजनाएँ

देश / संगठन
CBDC
पहल और मुख्य विशेषताएं
वैश्विकबहामाससैंड डॉलर (Sand Dollar) – अक्टूबर 2020 में लॉन्च किया गया पहला पूर्ण रूप से लागू CBDC (पहला बड़े पैमाने का खुदरा CBDC)।
नाइजीरियाई-नायरा (e-Naira)
चीनई-सीएनवाई (e-CNY – डिजिटल युआन) – यह दुनिया का सबसे बड़ा CBDC पायलट है, लेकिन अभी इसे पूर्ण पैमाने पर लॉन्च नहीं किया गया है।
ब्राजीलड्रेक्स (Drex) – उन्नत पायलट चरण; खुदरा और थोक उपयोग के लिए।
स्वीडनई-क्रोन (e-Krona)
कजाकिस्तानडिजिटल टेंगे (Digital Tenge) – खुदरा और खनन (Mining) क्षेत्र के एकीकरण के लिए पायलट परियोजना।
mBridge प्लेटफॉर्मबैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) ने सीमा पार सीबीडीसी निपटान (Settlement) के लिए ‘mBridge’ प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है।
भारतखुदरा सीबीडीसी (Retail CBDC – e₹-R)लॉन्च: 1 दिसंबर, 2022यह व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) और व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) लेनदेन का समर्थन करता है।नोट: e₹-R एक टोकन-आधारित सीबीडीसी है। यह UPI से भिन्न है, क्योंकि UPI एक ‘खाता-आधारित’ भुगतान प्रणाली है। (टोकन-आधारित प्रणाली भौतिक नकदी की तरह काम करती है, जहाँ टोकन सीधे स्थानांतरित होता है)।इसका परीक्षण वर्तमान में सीमित संख्या में प्रतिभागियों के साथ एक “बंद उपयोगकर्ता समूह” (Closed User Group) में किया जा रहा है।
थोक सीबीडीसी (Wholesale CBDC – e₹-W)लॉन्च: 1 नवंबर, 2022इसका उपयोग मुख्य रूप से अंतर-बैंक निपटान (Interbank settlements) और सरकारी प्रतिभूतियों के लेनदेन के लिए किया जाता है।

नॉन-फंजिबल टोकन (Non-Fungible Tokens)

  • ये ब्लॉकचेन-आधारित डिजिटल संपत्तियां (Digital assets) हैं (जैसे डिजिटल कला, संगीत, वीडियो)।
  • प्रत्येक NFT को एक विशिष्ट और अपरिवर्तनीय कोड दिया जाता है जो स्वामित्व का स्पष्ट रिकॉर्ड प्रदान करता है और संबंधित डिजिटल परिसंपत्ति की प्रामाणिकता को सत्यापित करता है।
  • विभाज्यता (Indivisible): इन्हें संपूर्ण इकाइयों के रूप में खरीदा, बेचा और स्वामित्व में रखा जाता है। इन्हें टुकड़ों में विभाजित नहीं किया जा सकता।
  • दुर्लभता (Scarcity): प्रत्येक NFT विशिष्ट और दुर्लभ (Scarce) होता है। इसकी नकल (Duplication) करना या जालसाजी (Forging) करना असंभव है।
  • फंजिबल (परिवर्तनीय): क्रिप्टोकरेंसी (जैसे बिटकॉइन या एथेरियम) ‘फंजिबल’ होती हैं, जिसका अर्थ है कि वे आपस में बदली जा सकती हैं (एक बिटकॉइन का मूल्य दूसरे बिटकॉइन के समान ही होता है)।
  • नॉन-फंजिबल (अपरिवर्तनीय): इसके विपरीत, प्रत्येक NFT अद्वितीय या अपनी तरह का एकमात्र (One-of-a-kind) होता है, जो इसे ‘नॉन-फंजिबल’ बनाता है।

विकेंद्रीकृत वित्त (DeFi)

  • यह एक उभरती हुई अवधारणा है जो पारंपरिक मध्यस्थों (Intermediaries) (जैसे बैंक या ब्रोकरेज) पर निर्भर हुए बिना वित्तीय उत्पाद और सेवाएँ प्रदान करने के लिए ब्लॉकचेन का उपयोग करती है।
  • DeFi एप्लीकेशन ब्लॉकचेन पर ‘स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स’ के माध्यम से काम करते हैं, जो पूर्वनिर्धारित नियमों के अनुसार वित्तीय लेनदेन को स्वचालित करते हैं और विश्वसनीय तीसरे पक्ष की आवश्यकता को समाप्त करते हैं।

विकेंद्रीकृत एप्लिकेशन (dApps)

  • ये ऐसे सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन हैं जो किसी एक केंद्रीय सर्वर के बजाय ब्लॉकचेन पर चलते हैं।
  • सामान्य ऐप्स (जैसे Instagram) के विपरीत, dApps का कोई एक मालिक या नियंत्रक नहीं होता है।
  • ये खुले (Open-source), सुरक्षित होते हैं और स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स की सहायता से स्वचालित रूप से संचालित होते हैं।

आभासी डिजिटल परिसंपत्ति (Virtual Digital Asset)

  • ‘आभासी डिजिटल परिसंपत्ति’ (Virtual Digital Asset) एक डिजिटल सूचना, कोड, नंबर या टोकन है, जो भारतीय या विदेशी मुद्रा की श्रेणी में नहीं आता। इसे क्रिप्टोग्राफिक (कूटलेखन) तरीकों से बनाया जाता है और इसे किसी भी नाम से पहचाना जा सकता है।
  • प्रमुख उदाहरण: इसमें बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी और NFT (नॉन-फंजिबल टोकन) शामिल हैं।
  • कानूनी स्थिति: इन परिसंपत्तियों के लेनदेन धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के विधिक दायरे के अंतर्गत आते हैं।
  • महत्वपूर्ण तथ्य:
    • VDAs से संबंधित कराधान और कर की कटौती (Withholding of tax) के नियमों को वित्त विधेयक 2022 में जगह दी गई थी।
    • लागू होने की तिथि: 1 अप्रैल 2022 से प्रभावी नियमों के अनुसार, VDAs के हस्तांतरण से होने वाली आय पर 30% की दर (अधिभार और उपकर सहित) से कर लागू है।

ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी से संबंधित पहल

भारत के ब्लॉकचेन प्रोजेक्ट्स

राज्य प्रोजेक्ट/पहल मुख्य विशेषताएं और अनुप्रयोग
राष्ट्रीय स्तर (India)IndiaChain – इंडियाचेन (नीति आयोग)एक राष्ट्रीय ब्लॉकचेन नेटवर्क स्थापित करने की परियोजना, जो इंडिया स्टैक (IndiaStack – आधार आधारित डिजिटल अवसंरचना) के साथ एकीकृत होकर भूमि अभिलेख, स्वास्थ्य सेवा और सब्सिडी वितरण जैसी सार्वजनिक सेवाओं में पारदर्शिता, दक्षता और विश्वास बढ़ाने का उद्देश्य रखती है।
StaTwig (स्टेटविग)वैक्सीन आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी – COVID एवं अन्य टीकों हेतु।
AgriLedger (एग्रीलेजर)किसानों और खरीदारों के बीच प्रत्यक्ष जुड़ाव हेतु ब्लॉकचेन प्लेटफॉर्म।
राजस्थान राज्य स्तर पर अपना खाता (जमाबंदी) पायलट परियोजना टैंपर-प्रूफ भूमि रिकॉर्ड के लिए ब्लॉकचेन के साथ एकीकृत।राजस्थान उन प्रारंभिक राज्यों में से एक है (तेलंगाना एवं महाराष्ट्र के साथ) जिसने भूमि प्रशासन में ब्लॉकचेन का परीक्षण किया।
iStart राजस्थानसूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग राजस्थान सरकार की फ्लैगशिप स्टार्टअप पहल, जो वेब3 (Web3) और ब्लॉकचेन स्टार्टअप्स को सहायता प्रदान करती है।
ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी के लिए उत्कृष्टता केंद्रराजकॉम्प इन्फो सर्विसेज लिमिटेड और आईआईटी कानपुर के बीच समझौता ज्ञापन।यह केंद्र आईआईटी के साथ मिलकर ब्लॉकचेन तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को प्रयोगशाला से वास्तविक दुनिया में लाने का काम करेगा।राजस्थान के बजट 2022-23 में इसकी घोषणा की गई।

विश्वस्य ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी स्टैक

  • इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा भारत के राष्ट्रीय ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी स्टैक के रूप में सितंबर 2024 में लॉन्च किया गया।
  • यह राष्ट्रीय ब्लॉकचेन रणनीति के अंतर्गत राष्ट्रीय ब्लॉकचेन ढाँचा (NBF) का एक भाग है।
  • यह एक ब्लॉकचेन-एज़-ए-सर्विस (BaaS) मंच प्रदान करता है, जो भौगोलिक रूप से वितरित अवसंरचना (NIC डेटा केन्द्रों – भुवनेश्वर, पुणे और हैदराबाद में) पर आधारित है, और विभिन्न अनुमति-आधारित (Permissioned) ब्लॉकचेन अनुप्रयोगों को समर्थन देने हेतु विकसित किया गया है।
  • इसमें NBFLite सैंडबॉक्स शामिल है, जो स्टार्टअप और अकादमिक क्षेत्रों हेतु त्वरित प्रोटोटाइपिंग, अनुसंधान और नवाचार को सक्षम बनाता है।
  • विश्वस्य किसी भी प्रकार की सार्वजनिक क्रिप्टो माइनिंग के लिए नहीं है।

यू-विन (U-WIN – यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्लेटफॉर्म)

  • लॉन्चकर्ता: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW)
  • उद्देश्य: गर्भवती महिलाओं और बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रमों को डिजिटल रूप से दर्ज और प्रबंधित करना।
  • मॉडल: को-विन (Co-WIN – कोविड वैक्सीन प्लेटफॉर्म) की सफलता पर आधारित।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • डिजिटल रजिस्ट्री: सभी नियमित टीकाकरणों का इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाए रखती है।
    • कवर की गई बीमारियाँ: 12 टीका-निवारणीय रोगों को कवर करती है।
    • डिजिटल प्रमाणपत्र: क्यूआर-आधारित एवं डिजिटली सत्यापित ई-टीकाकरण प्रमाणपत्र (Co-WIN की तरह)।
    • स्व-पंजीकरण: अभिभावक एवं गर्भवती महिलाएँ पोर्टल या मोबाइल एप के माध्यम से स्वयं पंजीकरण कर सकती हैं।
    • ऑफ़लाइन मोड: स्वास्थ्यकर्मी इंटरनेट न होने पर भी डेटा दर्ज कर सकते हैं।
    • स्वचालित अलर्ट: आगामी डोज़ के लिए SMS अनुस्मारक (Reminders) भेजे जाते हैं।
    • डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड के लिए ABHA और चाइल्ड ABHA जनरेशन।
    • भाषा उपलब्धता: 11 क्षेत्रीय भाषाओं, जिनमें हिन्दी भी शामिल है, में उपलब्ध।
  • ऑवर-द-टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म वे डिजिटल सेवाएँ हैं जो इंटरनेट के माध्यम से सीधे उपभोक्ताओं को ऑडियो, वीडियो या टेक्स्ट सामग्री प्रदान करती हैं। ये पारंपरिक ब्रॉडकास्ट या केबल टीवी वितरण के तरीकों पर निर्भर नहीं करती हैं।
  • इन्हें सामान्यतः स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म भी कहा जाता है।
  • विनियमन → OTT प्लेटफॉर्म सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 (IT Rules 2021) के अंतर्गत आते हैं → आचार संहिता, सामग्री वर्गीकरण, शिकायत निवारण।
    • केबल टीवी: केबल समाचार नेटवर्क केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 (सूचना और प्रसारण मंत्रालय) के तहत विनियमित होते हैं।
    • प्रिंट मीडिया (मुद्रित माध्यम): यह भारतीय प्रेस परिषद (PCI) द्वारा प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 के तहत विनियमित है।
  • IT नियम 2021 की आचार संहिता OTT मंचों को ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट मंच (OCCPs) के रूप में वर्णित करती है।
  • ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट वह ऑडियो-विज़ुअल सामग्री (जैसे फ़िल्में, वेब-सीरीज़, पॉडकास्ट आदि) है जो माँग पर (On-demand) दर्शकों के लिए उपलब्ध कराई जाती है।
  • राजस्व मॉडल: ओटीटी प्लेटफॉर्म केवल सब्सक्रिप्शन (सशुल्क सदस्यता) तक सीमित नहीं हैं; ये विज्ञापन-आधारित या हाइब्रिड (मिश्रित) मॉडल पर भी काम कर सकते हैं।
  • लोकप्रिय OTT प्लेटफ़ॉर्म के उदाहरण
    • वीडियो स्ट्रीमिंग: नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम वीडियो, डिज़नी+ हॉटस्टार।
    • संगीत स्ट्रीमिंग: स्पॉटिफ़ाई, ऐप्पल म्यूज़िक।
    • गेमिंग और लाइव स्ट्रीमिंग: ट्विच (Twitch), यूट्यूब।
  • दूरदर्शन एक पारंपरिक ‘प्रसारण टेलीविजन’ (Traditional Broadcast TV) नेटवर्क है, जो रेडियो तरंगों या उपग्रह के माध्यम से सीधे दर्शकों तक पहुँचता है। यह OTT (ओवर-द-टॉप) प्लेटफ़ॉर्म की श्रेणी में नहीं आता है।
  • सोशल मीडिया का तात्पर्य उन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से है जहाँ उपयोगकर्ता सामग्री (Content) का निर्माण और साझाकरण कर सकते हैं, तथा आभासी समुदायों (Virtual communities) में एक-दूसरे के साथ संपर्क स्थापित कर सकते हैं।
  • पारंपरिक मीडिया के विपरीत, सोशल मीडिया द्वि-मार्गी संचार की अनुमति देता है, जिससे रचनाकारों और दर्शकों के बीच अंतःक्रिया (Interaction) संभव हो पाती है।
  • लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के प्रकार
    • सामान्य सोशल नेटवर्किंग: व्यक्तिगत संपर्क और सामग्री साझा करने के लिए।  उदाहरण: फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर (X)।
    • पेशेवर नेटवर्किंग: करियर विकास, नौकरी की तलाश और व्यावसायिक संपर्क (B2B) बनाने के लिए। उदाहरण: लिंक्डइन (LinkedIn)।
    • लघु-प्रारूप सामग्री: छोटे, मनोरंजक या सूचनात्मक वीडियो के लिए। उदाहरण: टिकटॉक, स्नैपचैट, यूट्यूब शॉर्ट्स।
    • समुदाय-आधारित प्लेटफॉर्म / चर्चा मंच: ऐसे प्लेटफॉर्म जहाँ उपयोगकर्ता विशिष्ट विषयों पर एक-दूसरे के प्रश्नों के उत्तर देते हैं और नए विचार तथा समाचार साझा करते हैं। उदाहरण: रेडिट (Reddit), कोरा (Quora)।
प्लेटफार्म का नामविशेषताएँ/उद्देश्य
फेसबुकएक लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग साइट जहाँ लोग व्यक्तिगत और करियर से संबंधित सामग्री (Content), रुचियों और गतिविधियों को साझा करते हैं।
इंस्टाग्रामफोटो और वीडियो साझा करने के लिए एक सोशल नेटवर्क, जहाँ अधिकांश सामग्री सार्वजनिक (Public) होती है और उपयोगकर्ता अन्य उपयोगकर्ताओं का अनुसरण (Follow) कर सकते हैं।
स्नैपचैटएक सोशल नेटवर्किंग ऐप जहाँ लोग फोटो और वीडियो के आदान-प्रदान और चैटिंग (Chatting) के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़ते हैं।
पिंटरेस्टएक वेबसाइट जहाँ उपयोगकर्ता दूसरों के साथ साझा करने के लिए संबंधित छवियों के पिनबोर्ड (Pinboards) बनाते हैं।
लिंक्डइन (LinkedIn)एक पेशेवर नेटवर्किंग साइट जहाँ कंपनियां और उम्मीदवार आपस में संपर्क बना सकते हैं। यह करियर विकास और रोजगार के अवसरों के लिए प्राथमिक मंच है।
यूट्यूब (YouTube)यहाँ उपयोगकर्ता वीडियो बना सकते हैं और साझा कर सकते हैं, जैसे कि ‘हाउ-टू’ (निर्देशात्मक) वीडियो, रेसिपी (नुस्खे), और हास्य वीडियो। यह दुनिया का सबसे बड़ा वीडियो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म है।
चर्चा मंच (Discussion Forums)ऐसे प्लेटफॉर्म जहाँ उपयोगकर्ता एक-दूसरे के सवालों के जवाब देते हैं और नए विचार व समाचार साझा करते हैं। (जैसे: Quora या Reddit)।

विस्तारित वास्तविकता (XR) – एक व्यापक अवधारणा

  • XR एक व्यापक शब्द है जो उन इमर्सिव (Immersive) तकनीकों को कवर करता है जो वास्तविकता के बारे में मानवीय धारणा (Perception) को विस्तृत या परिवर्तित करती हैं। 
  • इसमें संवर्धित वास्तविकता (AR), आभासी वास्तविकता (VR) और मिश्रित वास्तविकता (MR) शामिल हैं।
  • महत्व: यह भौतिक और डिजिटल वातावरण के बीच की रेखा को धुंधला कर देती है → गेमिंग, रक्षा प्रशिक्षण, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, पर्यटन और शासन में उपयोग किया जाता है।
उभरती तकनीक

प्रौद्योगिकी (AR / VR/ MR)

विशेषताएं, उपकरण, उदाहरण और अनुप्रयोग

संवर्धित वास्तविकता (Augmented Reality – AR)

  • AR डिजिटल तत्वों को वास्तविक दुनिया पर अध्यारोपित (Overlay) करती है।
  • कार्य: यह वास्तविक दुनिया को प्रतिस्थापित किए बिना, उसमें आभासी या डिजिटल जानकारी जोड़कर उसे संवर्धित (Enhance) करती है।
  • इमर्सिव स्तर (Immersion Level): इसका स्तर निम्न से मध्यम होता है, क्योंकि इसमें वास्तविक दुनिया की प्रधानता बनी रहती है।
  • उपकरण: स्मार्टफोन, AR चश्मे (Google Glass, AR मोड में Microsoft HoloLens), टैबलेट।
  • उदाहरण: पोकेमॉन गो (Pokémon Go) गेम, वर्चुअल फर्नीचर प्लेसमेंट के लिए IKEA ऐप, गूगल AR नेविगेशन।
  • अनुप्रयोग:
    • रक्षा: AR-सहायित युद्धक्षेत्र डिस्प्ले (हथियारों और मानचित्रों की वास्तविक समय में जानकारी)।
    • शिक्षा: विज्ञान और चिकित्सा विषयों के त्रिविमीय (3D) मॉडल के माध्यम से शिक्षण।
    • स्वास्थ्य सेवा: शल्य चिकित्सा (सर्जरी) के दौरान रोगी के महत्वपूर्ण डेटा का वास्तविक समय में प्रदर्शन।
    • कृषि: AR के माध्यम से फसल की निगरानी और कीट नियंत्रण का विश्लेषण।

आभासी वास्तविकता (Virtual Reality – VR)

  • यह एक पूर्णतः निमज्जक (Immersive) अनुकारित/अनुकरणीय (Simulated) वातावरण बनाता है जो उपयोगकर्ता को भौतिक वातावरण/वास्तविकता से पूर्णतः अलग कर देता है।उपयोगकर्ता के संपूर्ण दृष्टि क्षेत्र को कंप्यूटर द्वारा उत्पन्न त्रिविमीय (3D) वातावरण से प्रतिस्थापित कर दिया जाता है।
  • इमर्सिव स्तर: उच्च (इसमें वास्तविक दुनिया पूरी तरह से अवरुद्ध या ब्लॉक हो जाती है)।
  • उपकरण: इसके लिए विशिष्ट VR हेडसेट (जैसे ओकुलस-मेटा क्वेस्ट, एचटीसी वाइव, सोनी प्लेस्टेशन VR), मोशन कंट्रोलर और VR ग्लव्स (दस्ताने) की आवश्यकता होती है।
  • उदाहरण: फ्लाइट सिम्युलेटर (उड़ान अनुकारक), VR-आधारित पर्यटन (वर्चुअल ताजमहल टूर), गेमिंग। 
  • अनुप्रयोग
    • सैन्य क्षेत्र: पायलट और युद्ध प्रशिक्षण के लिए अनुकारक (Simulators)
    • स्वास्थ्य सेवा: PTSD (अभिघातज के बाद का तनाव विकार) के लिए VR थेरेपी और शल्य चिकित्सा (सर्जरी) का अभ्यास।
    • शिक्षा: आभासी कक्षाएं और पुरातत्व संबंधी अनुकरण।
    • पर्यटन: विरासत स्थलों और दुर्गम स्थानों का आभासी भ्रमण।

मिश्रित वास्तविकता (Mixed Reality – MR)

  • यह AR और VR का मिश्रण (Hybrid) है → यह डिजिटल वस्तुओं को वास्तविक दुनिया में प्रस्तुत करता है और उपयोगकर्ताओं को उनके साथ इस तरह अंतःक्रिया (Interact) करने की अनुमति देता है जैसे कि वे भौतिक रूप से मौजूद हों।
  • विशेषता: डिजिटल और भौतिक वस्तुएं एक साथ सह-अस्तित्व (Coexist) में रहती हैं और वास्तविक समय में एक-दूसरे के साथ अंतःक्रिया करती हैं।
  • इमर्सिव स्तर: मध्यम से उच्च (यह वास्तविक और आभासी दुनिया का मिश्रण है)।
  • आवश्यक उपकरण: विशेष हेडसेट जिनमें संवेदक (Sensors) लगे होते हैं (जैसे Microsoft HoloLens, Magic Leap)।
  • उपयोग के उदाहरण: वास्तविक स्थान पर कार प्रोटोटाइप का डिज़ाइन बनाना, MR पर आधारित चिकित्सा प्रशिक्षण।
  • अनुप्रयोग:
    • उद्योग: कारखानों के लिए डिजिटल ट्विन तकनीक (भौतिक मशीन का सटीक डिजिटल प्रतिरूप)।
    • रक्षा: MR-आधारित युद्ध क्षेत्र का अनुकरण।
    • स्वास्थ्य सेवा: होलोग्राम का उपयोग करके वास्तविक समय में शल्य चिकित्सा (सर्जरी) की योजना बनाना।
    • शिक्षा: संवादात्मक (Interactive) विज्ञान प्रयोग, जहाँ छात्र आभासी रसायनों या अंगों के साथ सुरक्षित रूप से प्रयोग कर सकते हैं।

मुख्य अंतर (AR बनाम VR बनाम MR)

विशेषता संवर्धित वास्तविकता (AR)आभासी वास्तविकता (VR)मिश्रित वास्तविकता (MR)
वास्तविकता वास्तविक दुनिया + डिजिटल आरोपण (Overlay)पूर्णतः आभासी वातावरणवास्तविक + डिजिटल का संवादात्मक संलयन (Fusion)
इमर्शन आंशिक (Partial)पूर्ण वास्तविक और आभासी दोनों का निर्बाध मिश्रण
उपकरण स्मार्टफोन, AR चश्मा VR हेडसेटसेंसर और कैमरों से लैस MR हेडसेट
उदाहरण पोकेमोन गो फ्लाइट सिमुलेटर (उड़ान अनुकारक)माइक्रोसॉफ्ट होलोलेंस (शल्य चिकित्सा प्रशिक्षण)

डिजिटल ट्विन (Digital Twin)

  • डिजिटल ट्विन एक भौतिक वस्तु, प्रक्रिया या प्रणाली का वर्चुअल (आभासी) और वास्तविक-समय प्रतिरूप (Real-Time Replica) होता है।
  • डिजिटल ट्विन IoT सेंसर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा विश्लेषण द्वारा संचालित होता है।यह निरंतर वास्तविक वस्तु से डेटा एकत्र कर आभासी मॉडल को अपडेट करता है ताकि वह वास्तविक परिवेश का सटीक प्रतिबिंब बना रहे।
  • यह केवल सिमुलेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्वानुमान, अनुकूलन एवं निर्णय-निर्माण में भी सहायता करता है। इससे वास्तविक प्रणाली में बिना किसी व्यवधान के सुधारात्मक निर्णय लिए जा सकते हैं।
  • यह डिजिटल प्रतिनिधित्व बनाने, वास्तविक समय डेटा एकत्र करने, और मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करने के लिए चार प्रमुख प्रौद्योगिकियों का उपयोग करता है: इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), एक्सटेंडेड रियलिटी (XR), क्लाउड कंप्यूटिंग, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता

मेटावर्स (Metaverse)

  • मेटावर्स एक त्रिविमीय (3D) सक्षम आभासी वास्तविकता (VR) क्षेत्र है।
  • यह वास्तविक दुनिया के विकल्प या उसकी प्रतिलिपि (Replica) के रूप में डिजिटल अनुभव प्रदान करता है।
  • यह लोगों को ऑनलाइन यथार्थवादी (Lifelike) अनुभव प्राप्त करने की अनुमति देता है।
  • यह अनिवार्य रूप से संवर्धित वास्तविकता (AR), आभासी वास्तविकता (VR), इंटरनेट और अन्य प्रौद्योगिकियों का एक अभिसरण (Convergence) है, जो एक निरंतर और इमर्सिव (Immersive) डिजिटल ब्रह्मांड का निर्माण करता है।
  • ‘मेटावर्स’ शब्द का सर्वप्रथम उल्लेख 1942 में नील स्टीफेंसन के विज्ञान-कथा उपन्यास ‘स्नो क्रैश’ (Snow Crash) में किया गया था।
मेटावर्स के आधारभूत स्तंभ (4 Layers)
  • बुनियादी ढांचा परत (Infrastructure layer): यह उपकरणों को सक्षम बनाता है, उन्हें नेटवर्क से जोड़ता है और सामग्री वितरित करता है।
  • वर्चुअलाइजेशन इंजन परत (Virtualization engine layer): यह गणनात्मक और प्रोग्रामिंग प्लेटफॉर्म प्रदान करता है।
  • इंटरफेस और एक्सेस परत (Interface and Access layer): यह उपयोगकर्ताओं को मेटावर्स तक पहुँचने में सहायता करती है।
  • उपयोगकर्ता अनुभव और उपयोग के मामले (User experience and use cases layer): डिजिटल संपत्तियों का निर्माण, बिक्री, व्यापार और भंडारण आदि।

मेटावर्स के उदाहरण

  • फेसबुक: हाल ही में ‘मेटावर्स’ बनाने की अपनी महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप कंपनी का नाम बदलकर ‘मेटा’ (Meta) कर दिया है।
  • माइक्रोसॉफ्ट: अपना ‘मेश’ (Mesh) प्लेटफॉर्म पेश किया है, जिसमें मिश्रित वास्तविकता (MR) की क्षमताएं हैं।
  • Nvidia: वर्चुअल ब्रह्मांड के अपने संस्करणों पर काम कर रही है।
  • एपिक (Epic): ‘फोर्टनाइट’ (Fortnite) गेम बनाने वाली इस कंपनी ने खेलों से आगे बढ़कर डांस पार्टियों और आभासी संगीत कार्यक्रमों जैसे सामाजिक अनुभवों की शुरुआत की है।

राजस्थान AVGC-XR नीति (2024–25)

  • AVGC-XR = एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी
  • दिनांक: आधिकारिक लॉन्च: 4 दिसंबर, 2024, अधिसूचना जारी: 29 जनवरी, 2025 (31 मार्च, 2029 तक)
  • घोषणा: राजस्थान बजट 2024–25
  • उद्देश्य: राजस्थान को रचनात्मक प्रौद्योगिकियों के लिए राष्ट्रीय हब बनाना।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • AVGC‑XR को मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र के भीतर एक उदीयमान क्षेत्र (Sunrise Sector) के रूप में मान्यता दी गई है।
    • अगले 5 वर्षों में रचनात्मक प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 50,000 रोजगार सृजित करने का लक्ष्य।
    • राजस्थान AVGC-XR फंड: 50 करोड़ रुपये (स्टार्टअप्स और उद्यमों को अनुदान, इक्विटी निवेश और वित्तपोषण प्रदान करने के लिए)।
    • लाभार्थी:
      • स्टार्टअप, स्टूडियो, उद्यम
      • शैक्षणिक संस्थान और छात्र
      • कलाकार, रचनात्मक पेशेवर
    • अवसंरचना:
      • अटल इनोवेशन स्टूडियो और एक्सेलेरेटर की स्थापना के लिए ₹1,000 करोड़ का आवंटन।
      • iStart राजस्थान पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार (टेक्नो हब, इनोवेशन हब, संभाग मुख्यालयों पर इनक्यूबेटर)।
    • विरासत पर्यटन के लिए XR/AR/VR का उपयोग (आमेर किला, जंतर मंतर, सिटी पैलेस)।

नोट: भारत का AVGC-XR क्षेत्र 2023 में $3 बिलियन से बढ़कर 2030 तक $26 बिलियन होने का अनुमान (CAGR 14–16%)।

  • क्वांटम कंप्यूटिंग कम्प्यूटर विज्ञान का वह क्षेत्र है जो परमाणु और उपपरमाण्विक स्तर पर क्वांटम सिद्धांत (Quantum Theory) के नियमों का उपयोग करता है।
  • जर्मन भौतिक विज्ञानी वर्नर हाइजेनबर्ग ने एक प्रसिद्ध शोध पत्र प्रकाशित किया जिसने ‘क्वांटम यांत्रिकी’ (Quantum Mechanics) नामक परिघटना की खोज का मार्ग प्रशस्त किया।
  • मूल इकाई: क्वांटम कंप्यूटर सूचना की मूल इकाई के रूप में ‘बिट्स’ के स्थान पर ‘क्यूबिट्स’ (Qubits) का उपयोग करते हैं।
  • अनुप्रयोग: क्रिप्टोग्राफी, दवा खोज, जलवायु मॉडलिंग, लॉजिस्टिक्स, AI अनुकूलन।

क्वांटम कंप्यूटिंग बनाम पारंपरिक (क्लासिकल) कंप्यूटिंग

पहलू

क्लासिकल कंप्यूटिंग

क्वांटम कंप्यूटिंग

मूल इकाई

बिट (Bit) → 0 या 1

क्यूबिट (Qubit) → 0, 1, या दोनों एक साथ (सुपरपोजिशन)

प्रसंस्करण

अनुक्रमिक (Sequential) → एक समय में एक गणना

समानांतर (Parallel) → एक साथ कई संभावनाओं पर विचार

मूल सिद्धांत

शास्त्रीय भौतिकी – ट्रांजिस्टर, अर्धचालक पर आधारित

क्वांटम यांत्रिकीसुपरपोजिशन, एंटेंगलमेंट, टनलिंग पर आधारित

गति

मूर के नियम (Moore’s Law) द्वारा सीमित; घातांकीय वृद्धि धीमी।

क्वांटम समानांतरता के कारण अत्यधिक तेज़ घातांकीय गति वृद्धि की संभावना।

शोर सहिष्णुता

न्यूनतम अंतर्निहित शोर

शोर के प्रति अत्यधिक संवेदनशील (जिसे विसंबंधन या Decoherence कहा जाता है)।

त्रुटि प्रबंधन

स्थिर, बहुत कम त्रुटि दर।

क्यूबिट अत्यधिक नाजुक होते हैं → क्वांटम त्रुटि सुधार की आवश्यकता होती है।

सुरक्षा प्रभाव

क्लासिकल एन्क्रिप्शन (जैसे RSA, ECC) पर निर्भर करता है। (नोट: क्वांटम कंप्यूटर इसे आसानी से तोड़ सकते हैं)

क्वांटम कुंजी वितरण (QKD) → क्वांटम जानकारी की प्रतिलिपि बनाने का कोई भी प्रयास क्वांटम अवस्था को नष्ट कर देता है, जिससे यह हैकिंग से सुरक्षित रहता है।

प्रसंस्करण विधि

क्लासिकल लॉजिक गेट्स (AND, OR, NOT)

क्वांटम गेट्स (Hadamard, CNOT, SWAP)

हार्डवेयर

सिलिकॉन चिप्स, ट्रांजिस्टर।

अतिचालक परिपथ (Superconducting circuits), ट्रैप्ड आयन, फोटोनिक्स, टोपोलॉजिकल क्यूबिट्स।

अनुप्रयोग

रोज़मर्रा की कंप्यूटिंग: वर्ड प्रोसेसिंग, वेब ब्राउज़िंग, डेटाबेस।

विशिष्ट कार्य: क्रिप्टोग्राफी, औषधि खोज (Drug discovery), जलवायु मॉडलिंग, AI अनुकूलन।

क्वांटम कंप्यूटिंग से संबंधित प्रमुख अवधारणा

क्वांटम कंप्यूटिंग

संबंधित प्रमुख अवधारणा

क्वांटम सुपरपोजीशन

  • क्यूबिट्स (Qubits) एक समय में एक से अधिक क्वांटम अवस्था या स्थान में एक साथ मौजूद हो सकते हैं, जबकि वे एक ही इकाई बने रहते हैं।
  • एक क्यूबिट 0, 1, या दोनों के संयोजन (|ψ⟩ = α|0⟩ + β|1⟩) की अवस्था में हो सकता है।
  • सुपरपोज़िशन (Superposition) के कारण क्यूबिट एक साथ कई गणनाएँ कर सकता है – जिसे समानांतर प्रसंस्करण भी कहा जाता है।

क्वांटम उलझाव (एंटेंगलमेंट)

  • दो कणों की अवस्था (State) इस प्रकार जुड़ जाती है कि एक कण की अवस्था में परिवर्तन दूसरे को भी प्रभावित करता है — चाहे उनके बीच की दूरी कितनी भी हो।
  • यह क्वांटम संचार और क्वांटम नेटवर्किंग का आधार है।

क्वांटम व्यतिकरण (इंटरफेरेंस)

  • क्वांटम प्रणालियाँ एक-दूसरे के साथ तरंगों (Waves) की तरह हस्तक्षेप कर सकती हैं।
  • क्वांटम एल्गोरिद्म सही समाधानों की संभाव्यता को बढ़ाने (Amplify) और गलत समाधानों की संभाव्यता को घटाने (Suppress) के लिए इस हस्तक्षेप का उपयोग करते हैं।

क्वांटम टनलिंग

  • क्वांटम टनलिंग कणों की उस क्षमता को संदर्भित करता है जिसमें वे बाधाओं को पार कर सकते हैं, जबकि शास्त्रीय भौतिकी के अनुसार उनके पास ऐसा करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा नहीं होती। (तेज अवस्था परिवर्तन को सक्षम करता है)
  • यह सिद्धांत क्वांटम डॉट्स जैसे क्वांटम कंप्यूटर हार्डवेयर के कार्य के लिए महत्वपूर्ण है।

क्वांटम कोहेरेंस

  • क्वांटम यांत्रिकी क्यूबिट्स को सुपरपोज़िशन अवस्था में बनाए रखने की अनुमति देती है, जहाँ वे एक साथ 0 और 1 का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।
  • यह सुपरपोज़िशन और एंटेंगलमेंट की निरंतरता बनाए रखने की क्षमता होती है – जो क्वांटम कंप्यूटिंग का स्थायित्व सुनिश्चित करती है।

क्वांटम सुप्रीमेसी

  • वह बिंदु (Threshold) जहाँ एक क्वांटम कंप्यूटर ऐसा गणितीय कार्य पूर्ण कर सकता है जो किसी भी शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर के लिए असंभव है।
  • 2019 में, साइकामोर (Sycamore – गूगल का क्वांटम कंप्यूटर) ने ‘सुप्रीमेसी’ का दावा किया।

क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD)

  • QKD एक ऐसी तकनीक है जो दो पक्षों के बीच सुरक्षित कुंजी वितरित करने के लिए क्वांटम भौतिकी के नियमों का उपयोग करती है, जो डेटा के डिक्रिप्शन को रोकती है, और इस प्रकार सुरक्षित संचार सुनिश्चित करती है।
  • QKD संदेश को स्वयं एन्क्रिप्ट नहीं करता – यह केवल कुंजी विनिमय को सुरक्षित करता है।
  • QUESS (क्वांटम एक्सपेरिमेंट्स एट स्पेस स्केल): चीन – हैक-प्रूफ सैन्य संचार के लिए विश्व का पहला क्वांटम उपग्रह (2016), जिसे मिसियस भी कहा जाता है।

मेजोराना जीरो मोड्स

  • ये विलक्षण क्वासिपार्टिकल्स होते हैं, जो पारंपरिक इलेक्ट्रॉन जैसे मूलभूत कण नहीं हैं।
  • ये कुछ विशिष्ट टोपोलॉजिकल सुपरकंडक्टर में उत्पन्न होते हैं।
  • इनमें टोपोलॉजिकल डीजनरेसी होती है – अर्थात हल्की गड़बड़ी होने पर भी उनकी समग्र क्वांटम अवस्था अपरिवर्तित रहती है।
  • यही गुण इन्हें क्वांटम कंप्यूटरों के लिए अत्यधिक मजबूत क्यूबिट्स बनाता है।

क्वांटम टेलीपोर्टेशन (Quantum Teleportation)

  • क्वांटम टेलीपोर्टेशन (दूरसंचरण) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत किसी भौतिक कण को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किए बिना, उसकी क्वांटम अवस्था (जिसे क्यूबिट कहते हैं) या उसमें निहित सूचना को स्थानांतरित किया जाता है।
  • नासा (NASA) का क्वांटम टेलीपोर्टेशन प्रदर्शन: नासा (NASA) ने फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क और सिंगल-फोटॉन संसूचकों (Detectors) का उपयोग करके 44 किलोमीटर की दूरी तक फोटॉन के क्यूबिट्स का सफलतापूर्वक टेलीपोर्टेशन किया है।

‘qkdSim’: RRI का QKD सिमुलेशन टूलकिट

  • यह एंड-टू-एंड क्वांटम कुंजी वितरण (QKD) के लिए एक अनुकार टूलकिट (Simulation toolkit) है।
  • विकासकर्ता: रमन अनुसंधान संस्थान (RRI), जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) का एक स्वायत्त संस्थान है।
  • यह भारत का पहला एंड-टू-एंड ‘फ्री-स्पेस’ (मुक्त-आकाश) QKD प्रयोग है।
  • यह इसरो (ISRO) द्वारा समर्थित भारत के QuEST (सैटेलाइट तकनीक का उपयोग करके क्वांटम प्रयोग) का हिस्सा है → जो भारत का पहला उपग्रह-आधारित सुरक्षित क्वांटम संचार प्रयास है।

नोट: मई 2025 में, टेलीमैटिक्स विकास केंद्र (C‑DOT) ने शास्त्रीय और क्वांटम संचार में सहयोगात्मक अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनपीएल) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

संस्थानउपलब्धिविवरण
DRDO + IIT दिल्लीफ्री-स्पेस QKD2025: फ्री-स्पेस ऑप्टिकल लिंक के माध्यम से ‘उलझे हुए फोटॉन’ (Entangled photons) का उपयोग करके 1 किमी फ्री-स्पेस QKD का प्रदर्शन।
2022: विंध्याचल और प्रयागराज के बीच कमर्शियल-ग्रेड अंडरग्राउंड डार्क ऑप्टिकल फाइबर का उपयोग करके भारत का पहला इंटरसिटी क्वांटम संचार लिंक
2024: 100 किमी लंबी टेलीकॉम-ग्रेड ऑप्टिकल फाइबर पर क्वांटम उलझाव (Entanglement) का उपयोग।
इसरो (ISRO)फ्री-स्पेस QKD अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (SAC), अहमदाबाद में 300 मीटर का परीक्षण (2021)। इसका उद्देश्य उपग्रह आधारित क्वांटम संचार (SBQC) का नेतृत्व करना है। 
सैटेलाइट आधारित QKD योजनासैटेलाइट SAQTI (क्वांटम और ऑप्टिकल तकनीक का उपयोग करके सुरक्षित अनुप्रयोग) 
DRDO + TIFR, मुंबई6-क्यूबिट क्वांटम प्रोसेसरक्लाउड इंटरफेस के माध्यम से प्रदर्शित (अगस्त 2024)। यह ‘अतिचालक परिपथ’ (Superconducting circuit) तकनीक पर आधारित है।
C-DoTभारत का पहला क्वांटम सुरक्षित लिंक(2023).संचार भवन और NIC, नई दिल्ली के बीच स्थापित (2023)। यह प्रकाशिक तंतु (Optical fibre) तकनीक पर आधारित है।
MeitY(C-DAC)क्वांटम प्रौद्योगिकी में उत्कृष्टता केंद्र (CoE)MAQAN (मेट्रो एरिया क्वांटम एक्सेस नेटवर्क) – IIT मद्रास में सुरक्षित क्वांटम संचार परीक्षण-मंच (Testbed)।
सी-डॉट + स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज(2025)मल्टी-कोर फाइबर (MCF) ट्रांसमिशन2025: 4-कोर मल्टी-कोर फाइबर का उपयोग करके 100 किमी पर भारत का पहला QKD ट्रांसमिशन, जो एक ही फाइबर पर पारंपरिक + क्वांटम डेटा एक साथ सक्षम करता है।
TCS + IIT-बॉम्बेभारत का पहला क्वांटम डायमंड माइक्रोचिप इमेजरयह सेमीकंडक्टर चिप्स में विसंगतियों (Anomalies) का पता लगाने के लिए हीरे की संरचना में मौजूद दोषों (जिन्हें नाइट्रोजन-वैकेंसी या NV केंद्र कहा जाता है) का उपयोग करता है।
QNu Labs (स्टार्टअप)व्यावसायीकरणआर्मोस (QKD), ट्रोपोस् – Tropos (QRNG) और क्यू-शील्ड – QShield (एकीकृत मंच) का विकास किया।
राजस्थानIIT जोधपुर → क्वांटम फोटोनिक्स और सुरक्षित संचार पर शोध।सेना की दक्षिण-पश्चिमी कमान (जयपुर) → रक्षा संचार के लिए QKD की संभावनाओं की तलाश।

भारत में हालिया क्वांटम प्रौद्योगिकी उपलब्धियां

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM)

  • मंजूरी: अप्रैल 2023 में ₹6,003 करोड़ की राशि के साथ, अवधि 8 वर्ष (2023–2031)।
  • उद्देश्य:
    • क्वांटम तकनीकों में वैज्ञानिक और औद्योगिक R&D को प्रारंभ करना, पोषित करना और उसका विस्तार करना।
    • एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना ताकि भारत को क्वांटम प्रौद्योगिकी एवं अनुप्रयोगों में वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित किया जा सके।
  • क्रियान्वयन संस्था: विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST)।
  • मुख्य फोकस क्षेत्र: क्वांटम संचार, क्वांटम संगणना, क्वांटम संवेदीकरण और मापन विज्ञान, क्वांटम सामग्री एवं उपकरण।
  • संरचना: 4 थीमैटिक हब्स (Thematic Hubs)
    • क्वांटम कंप्यूटिंग – IISc बेंगलुरु
    • क्वांटम संचार – IIT मद्रास + C-DOT, नई दिल्ली
    • क्वांटम संवेदीकरण और मापन विज्ञान – IIT बॉम्बे
    • क्वांटम सामग्री और उपकरण – IIT दिल्ली
  • प्रमुख लक्ष्य (Key Goals):
    • 20 से 1000 क्यूबिट (Qubit) क्षमता वाले क्वांटम कंप्यूटरों का विकास।
    • 2000 किमी तक सुरक्षित सैटेलाइट आधारित क्वांटम संचार।
    • सुपरकंडक्टर्स और उच्च संवेदनशीलता वाले क्वांटम सेंसर जैसे क्वांटम सामग्री का विकास।

क्यूपीएआई-इंडस (QpiAI-Indus)

  • भारत का पहला फुल-स्टैक क्वांटम कंप्यूटर, जिसे बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप QpiAI ने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के अंतर्गत विकसित किया है।
  • तकनीकी विशेषताएं: 25 सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट्स के साथ उन्नत हार्डवेयर, स्केलेबल (विस्तार योग्य) क्वांटम नियंत्रण प्रणाली, एआई-संवर्धित सॉफ्टवेयर → कम त्रुटि के साथ तेज, स्थिर गणनाएं।
  • यह हाइब्रिड क्वांटम-क्लासिकल कंप्यूटिंग को सक्षम बनाता है, जिसमें QpiAISaaS प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से क्लाउड एक्सेस उपलब्ध है।
  • अनुप्रयोग: दवा अनुसंधान, सामग्री विज्ञान, लॉजिस्टिक्स, मोबिलिटी, जलवायु परिवर्तन और सततता जैसे क्षेत्रों को लक्षित करता है।
  • “फुल-स्टैक” का अर्थ है कि यह हार्डवेयर (क्यूबिट्स), नियंत्रण इलेक्ट्रॉनिक्स, AI-संवर्धित सॉफ्टवेयर, और क्लाउड प्लेटफॉर्म – चारों स्तरों को सम्मिलित रूप से कवर करता है।

भारत का पहला क्वांटम कंप्यूटिंग गाँव

  • स्थान: अमरावती, आंध्र प्रदेश
  • प्रमुख भागीदार
    • आंध्र प्रदेश सरकार (रीयल-टाइम गवर्नेंस सोसाइटी – RTGS के माध्यम से)
    • उद्योग साझेदार: IBM, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), लार्सन एंड टूब्रो (L&T)।

क्वांटम विज्ञान और प्रौद्योगिकी का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष

  • संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2025 को ‘क्वांटम विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अंतर्राष्ट्रीय वर्ष’ के रूप में घोषित किया है।
  • वर्ष 2025 को इसलिए चुना गया है क्योंकि यह क्वांटम यांत्रिकी के प्रारंभिक विकास के 100 वर्ष पूरे होने को मान्यता देता है।
  • जर्मन भौतिक विज्ञानी वर्नर हाइजेनबर्ग (Werner Heisenberg) ने एक प्रसिद्ध शोध पत्र प्रकाशित किया था, जिसने ‘क्वांटम यांत्रिकी’ नामक परिघटना (Phenomenon) की खोज का मार्ग प्रशस्त किया।

क्वांटम चिप 

मेजोराना 1 चिप (Majorana 1 Chip)
  • यह टोपोलॉजिकल क्यूबिट्स (Topological Qubits) पर आधारित विश्व का पहला क्वांटम प्रोसेसर है (जो मेजराना ज़ीरो मोड्स – MZMs पर आधारित हैं)।
  • विकसित: Microsoft (2025) द्वारा, DARPA के US2QC प्रोग्राम के अंतर्गत।
  • यह पदार्थ की एक नई अवस्था का प्रतिनिधित्व करती है → “टोपोकंडक्टर (Topoconductor)”
  • उद्देश्य → त्रुटि-सहिष्णु (Fault-Tolerant)स्केलेबल क्वांटम कंप्यूटिंग प्राप्त करना।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • सामग्री (Material): इंडियम आर्सेनाइड (InAs) + एल्युमिनियम नैनोवायर्स → H-आकार की संरचना।
    • क्यूबिट संख्या: प्रोटोटाइप में 8 क्यूबिट्स; भविष्य में प्रति चिप 1 मिलियन क्यूबिट्स तक स्केलेबल।

प्रमुख अवधारणाएं

क्वांटम अवधारणा / घटकमुख्य विशेषताएं और महत्व
मेजोराना जीरो मोड्स (MZMs)यह विलक्षण क्वासिपार्टिकल्स हैं जो स्वयं के प्रतिपार्टिकल होते हैं।सबसे पहले 1937 में भविष्यवाणी की गई, 2025 में प्रयोगात्मक रूप से निर्मित।स्थिर क्यूबिट्स के लिए आदर्श।
टोपोलॉजिकल क्यूबिट्सडेटा को क्वांटम अवस्थाओं के वैश्विक गुणधर्मों में एनकोड करते हैं, जिससे ये स्थानीय त्रुटियों (Local Errors) के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी होते हैं।
टोपोकंडक्टरएक नई सामग्री, जिसमें इंडियम आर्सेनाइड (InAs) और एल्युमिनियम (Al) को संयोजित किया गया है ताकि MZMs को होस्ट किया जा सके।
क्रायोजेनिक संचालनचिप लगभग 10 मिलिकेल्विन (10 mK) तापमान पर कार्य करती है ताकि सुपरकंडक्टिविटी बनी रहे।
विलो (गूगल) – Willow
  • प्रकार: क्वांटम चिप (105-क्यूबिट)
  • क्यूबिट्स: सुपरकंडक्टिंग ट्रांसमॉन क्यूबिट्स → निम्न तापमान पर कृत्रिम परमाणु।
ओसेलॉट (Ocelot)
  • अमेज़न द्वारा विकसित प्रोटोटाइप क्वांटम कंप्यूटिंग चिप।

भारत में सेमीकंडक्टर का विकास

  • भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM)
    • शुरुआत: 2021, ₹76,000 करोड़ का परिव्यय।
    • नोडल मंत्रालय: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)।
    • उद्देश्य: भारत में एक सतत सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना, चिप डिज़ाइन क्षमता को मजबूत करना, और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकरण।
    • फोकस: आत्मनिर्भर भारत, विश्वसनीय वैश्विक चिप साझेदार।
    • 4 योजनाएँ: फेब्स, डिस्प्ले फेब्स, कंपाउंड/सेंसर/ATMP, DLI (डिज़ाइन लिंक्ड प्रोत्साहन)।
    • सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम → वार्षिक फ्लैगशिप इवेंट → उद्योग, शिक्षा, नीति निर्माता, स्टार्टअप को नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक साथ लाता है।
  • विक्रम प्रोसेसर (इसरो): 32-बिट स्पेस-ग्रेड चिप।
  • SHAKTI-आधारित सेमीकंडक्टर चिप (IRIS)
    • विकसितकर्ता: IIT-मद्रास और इसरो
    • नाम: IRIS – स्वदेशी RISC-V कंट्रोलर फॉर स्पेस एप्लिकेशन्स।
    • आधारित: SHAKTI माइक्रोप्रोसेसर (ओपन-सोर्स RISC-V आर्किटेक्चर)।
    • समर्थन: डिजिटल इंडिया RISC-V (DIRV) पहल के तहत, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय।
    • पूर्ववर्ती:
      • RIMO (2018) – पहली स्वदेशी रूप से निर्मित SHAKTI चिप।
      • MOUSHIK (2020) – IoT और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए SoC।
    • अनुप्रयोग: एयरोस्पेस (लॉन्च वाहन, ग्राउंड स्टेशन), IoT और औद्योगिक IoT।
  • DIRV पहल
    • उद्देश्य: RISC-V का उपयोग करके माइक्रोप्रोसेसर- आधारित उत्पादों का स्वदेशी विकास को बढ़ावा देना।
  • परिवहन का 5वाँ साधन: हाइपरलूप एक अत्यंत उच्च गति वाली परिवहन प्रणाली है जो एक ‘निकट-निर्वात ट्यूब’ (Near-vacuum tube) में यात्रा करती है। ट्यूब के भीतर निर्वात होने के कारण यह घर्षण और वायु कर्षण (हवा के प्रतिरोध) को लगभग समाप्त कर देती है।
  • गति: वायु प्रतिरोध की अनुपस्थिति के कारण, इसका ‘पॉड’ (Pod – यात्री कक्ष) संभावित रूप से 1000 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति तक पहुँच सकता है।
  • पारंपरिक 4 साधन: सड़क, रेल, जल और वायु।
  • हाइपरलूप तकनीक के पीछे का मूल सिद्धांत ‘चुंबकीय उत्तोलन’ (Magnetic levitation / Maglev) है। 
  • यह तकनीक वाहन (पॉड) को चुंबकों से बने एक मार्गदर्शन ट्रैक पर हवा में निलंबित (Suspended) रखने और आगे की ओर धकेलने (Propelled) की अनुमति देती है, जिससे भौतिक संपर्क टूट जाता है और यांत्रिक घर्षण शून्य हो जाता है।
  • एशिया का पहला अंतरराष्ट्रीय हाइपरलूप शिखर सम्मेलन IIT-मद्रास में आयोजित किया गया था।
  • भारत का पहला 450 मीटर का हाइपरलूप परीक्षण ट्रैक भी IIT-मद्रास परिसर में ही पूरा किया गया है। (नोट: इसलिए कथन C गलत है, क्योंकि यह कानपुर में नहीं बल्कि मद्रास में है)।
  • अध्ययन के अधीन संभावित मार्ग: मुंबई-पुणे, और बेंगलुरु-चेन्नई।
उभरती तकनीक

3D प्रिंटिंग 

  • परिभाषा: एक डिजिटल मॉडल से त्रिविमीय (3D) वस्तुओं का परत-दर-परत (Layer-by-layer) विनिर्माण। 
  • यह व्यवकलनात्मक (Subtractive) या पारंपरिक विनिर्माण के विपरीत है, जिसमें सामग्री के एक ठोस ब्लॉक को काटकर वस्तु बनाई जाती है।
  • 3D प्रिंटिंग के लिए CAD (कंप्यूटर-एडेड डिजाइन) सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाता है।
  • तकनीकें: FDM (फ्यूज्ड डिपोजिशन मॉडलिंग), SLA (स्टीरियोलिथोग्राफी), SLS (सेलेक्टिव लेजर सिंटरिंग)।
  • सामग्री: प्लास्टिक, धातु, सिरेमिक, जैव-सामग्री, कंक्रीट।
  • अनुप्रयोग:
    • स्वास्थ्य सेवा: प्रोस्थेटिक्स, इम्प्लांट, ऑर्गन स्कैफ़ोल्ड।
    • एयरोस्पेस/ऑटोमोटिव: हल्के पुर्ज़े, रैपिड प्रोटोटाइपिंग।
    • निर्माण: 3D‑प्रिंटेड घर (भारत: Tvasta, IIT Madras)।
    • रक्षा: स्पेयर पार्ट्स, ड्रोन।
    • शिक्षा और अनुसंधान एवं विकास: प्रोटोटाइपिंग, नवाचार लैब।
  • प्रमुख परियोजनाएँ:
    • 3D प्रिंटेड पोस्ट ऑफिस (बेंगलुरु, 2023) 
    • 3D प्रिंटेड घर (IIT मद्रास, Tvasta)
    • केरल की पहली 3D कंक्रीट प्रिंटिंग प्रयोगशाला (2024)।
    • स्पेस टेक में 3D प्रिंटिंग (अग्निकुल कॉसमॉस)
      • IIT मद्रास द्वारा समर्थित स्टार्टअप ‘अग्निकुल कॉसमॉस’ ने दुनिया के पहले एकल-पीस (Single-piece) 3D-मुद्रित इंजन वाले रॉकेट का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया है।
      • अग्निबाण SOrTeD (Agnibaan SOrTeD) 
        • पूर्ण रूप: सब-ऑर्बिटल टेक्नोलॉजिकल डेमोंस्ट्रेटर।
        • प्रकार: भारत का पहला सेमी-क्रायोजेनिक (Semi-cryogenic) इंजन संचालित रॉकेट।
        • लॉन्चपैड: ‘धनुष’ — श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) में स्थित भारत का पहला निजी तौर पर विकसित लॉन्चपैड।

4D प्रिंटिंग 

  • परिभाषा: यह 3D प्रिंटिंग का ही एक विस्तारित रूप है, जिसमें मुद्रित वस्तुएं बाहरी उद्दीपकों (External stimuli) जैसे कि गर्मी, प्रकाश, पानी या चुंबकीय क्षेत्र के प्रति प्रतिक्रिया करते हुए समय के साथ अपना आकार, गुण या कार्य बदल लेती हैं।
  • समय का आयाम: 3D प्रिंटिंग में ‘समय’ का चौथा आयाम जोड़कर इसे विकसित किया गया है।
  • स्मार्ट सामग्री (Smart Materials): इसका मूल विचार स्मार्ट सामग्रियों का उपयोग करना है, जैसे कि आकार-स्मृति पॉलिमर (Shape-memory polymers), हाइड्रोजेल और कंपोजिट।
  • अन्य नाम: इसे आकार-परिवर्तन प्रणाली (Shape-morphing systems), प्रोग्राम योग्य पदार्थ या 4D बायो-प्रिंटिंग के रूप में भी जाना जाता है।
  • अनुप्रयोग:
    • स्वास्थ्य सेवा: स्व-समायोजित होने वाले स्टेंट (Stents) और लक्षित औषधि वितरण प्रणालियाँ।
    • रक्षा और एयरोस्पेस: स्व-मरम्मत करने वाली संरचनाएं और अनुकूलनशील छलावरण (Adaptive camouflage)
    • निर्माण: ऐसी सामग्रियाँ जो पर्यावरण (आर्द्रता, तापमान) के अनुसार स्वयं को ढाल लेती हैं।
    • कपड़ा उद्योग: स्मार्ट फैब्रिक जो आवश्यकतानुसार अपना आकार या इन्सुलेशन (ऊष्मारोधन) बदल सकते हैं।
  • हालिया उपलब्धि (भारत – 2025)
    • भारतीय शोधकर्ताओं ने 4D-मुद्रित कृत्रिम रक्त वाहिकाएं विकसित की हैं, जिनका उपयोग उन्नत चिकित्सा ग्राफ्ट के लिए किया जाएगा।
    • संभावित उपयोग: अंग प्रत्यारोपण, संवहनी शल्य चिकित्सा और पुनर्योजी चिकित्सा

3D प्रिंटिंग बनाम 4D प्रिंटिंग

पहलू3D प्रिंटिंग 4D प्रिंटिंग 
प्रकृति स्थिर (Static) वस्तुओं का निर्माणगतिशील (Dynamic), स्वतः रूप परिवर्तित करने वाली वस्तुएं
सामग्री प्लास्टिक, धातु, सिरेमिक स्मार्ट सामग्री (जैसे आकार-स्मृति बहुलक, हाइड्रोजेल)
प्रेरक प्रिंटिंग के बाद कोई बदलाव नहींउद्दीपनों (जैसे- ऊष्मा, प्रकाश, जल) के प्रति प्रतिक्रिया करती है
अनुप्रयोग प्रोटोटाइपिंग (प्रतिरूप निर्माण), विनिर्माणअनुकूली स्वास्थ्य सेवा, रक्षा, स्मार्ट बुनियादी ढांचा
चरणव्यावसायिक रूप से परिपक्व उभरती हुई तकनीक, प्रायोगिक 
  • ‘चौथी औद्योगिक क्रांति’ शब्द का प्रतिपादन वर्ष 2016 में विश्व आर्थिक मंच (WEF) के संस्थापक क्लाउस श्वाब द्वारा किया गया था।
  • चौथी औद्योगिक क्रांति का अर्थ नई तकनीकों के माध्यम से विनिर्माण उद्योग का डिजिटल रूपांतरण है। इसमें निम्नलिखित तकनीकें शामिल हैं:  कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML), योज्य विनिर्माण (3D प्रिंटिंग), संवर्धित और आभासी वास्तविकता (AR/VR), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), 5G तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी और क्वांटम कंप्यूटिंग।
  • इसका उपयोग “स्मार्ट फैक्ट्री” की अवधारणा को संदर्भित करने के लिए भी किया जाता है – जो पूरी तरह से जुड़े हुए साइबर-भौतिक तंत्र (Cyber-physical systems) हैं। ये तंत्र भौतिक और डिजिटल पहलुओं का विलय (Merge) करते हैं।
  • भारत में विकास (C4IR): तेलंगाना सरकार ने हैदराबाद में ‘चौथी औद्योगिक क्रांति केंद्र’ (C4IR) स्थापित करने के लिए विश्व आर्थिक मंच (WEF) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह केंद्र विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा और कृषि-तकनीक पर ध्यान केंद्रित करेगा।
उभरती तकनीक
उभरती तकनीक

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