बेसिक कंप्यूटर विज्ञान

बुनियादी कंप्यूटर विज्ञान: विज्ञान व प्रौद्योगिकी के अंतर्गत बुनियादी कंप्यूटर विज्ञान कंप्यूटर की संरचना, कार्यप्रणाली, हार्डवेयर–सॉफ्टवेयर तथा डेटा प्रसंस्करण के मूल सिद्धांतों का अध्ययन करता है। यह विषय सूचना प्रौद्योगिकी की आधारशिला है, जो आधुनिक संचार, स्वचालन और डिजिटल सेवाओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कंप्यूटर प्रणाली (Computer System) क्या है ?

कंप्यूटर सिस्टम एक प्रोग्राम करने योग्य डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है। यह डेटा के रूप में इनपुट (Input) स्वीकार करता है, प्रोग्राम के निर्देशों के आधार पर इस डेटा को संसाधित (Process) करता है, और अर्थपूर्ण उपयोग के लिए वांछित प्रारूप में जानकारी या आउटपुट (Output) देता है।

कंप्यूटर की विशेषताएं (Characteristics of Computer)

  1. गति (Speed): यह अत्यंत तेज़ गति से कार्य करता है, लाखों निर्देशों (MIPS) को प्रति सेकंड निष्पादित करने की क्षमता रखता है।
  2. सटीकता/शुद्धता (Accuracy): यह सभी कार्यों और गणनाओं को पूर्ण परिशुद्धता के साथ करता है। इसमें त्रुटियां मुख्य रूप से मानवीय (गलत डेटा) या तकनीकी खराबी (जैसे वायरस) के कारण होती हैं।
  3. सक्षमता (Diligence): यह बिना थके, एकाग्रता या गति खोए घंटों तक लगातार काम कर सकता है।
  4. स्मरण शक्ति (Storage/Power of Remembering): इसमें भविष्य में आवश्यकतानुसार डेटा पुन: प्राप्ति की क्षमता होती है।
  5. बहुमुखी प्रतिभा (Versatility): यह विभिन्न वातावरणों (जैसे स्कूल, अस्पताल, कार्यालय, अनुसंधान, मनोरंजन) में कई अलग-अलग प्रकार के कार्य करने में सक्षम है।
  6. स्वचालन (Automation): एक बार निर्देश प्राप्त होने पर, यह कार्यों को स्वचालित रूप से निष्पादित करता है, जिससे समय और धन की बचत होती है।
  7. संग्रह क्षमता (Storage): कंप्यूटर में डेटा की विशाल मात्रा (करोड़ों फाइल) को सुरक्षित रखने की उच्च क्षमता होती है।

कंप्यूटर का विकास (पीढ़ियां) (Computer Generations)

कंप्यूटर के विकास के इतिहास को मुख्य रूप से पाँच पीढ़ियों में विभाजित किया गया है। तकनीकी सुधारों के कारण प्रत्येक उत्तरोत्तर पीढ़ी में कंप्यूटर की गति, सटीकता और भंडारण क्षमता में वृद्धि हुई है।

पीढ़ियां हार्डवेयर तकनीक सिस्टम के उदाहरण
प्रथम पीढ़ी
(1942–1954)
मुख्य इलेक्ट्रॉनिक घटक: वैक्यूम ट्यूब (निर्वात नलिकाएं)इनपुट/आउटपुट डिवाइस: पंच कार्डENIAC, EDVAC, EDSAC, UNIVAC, IBM 701
द्वितीय पीढ़ी
(1955–1964)
मुख्य इलेक्ट्रॉनिक घटक: ट्रांजिस्टरइनपुट/आउटपुट डिवाइस: चुंबकीय टेप और फ्लॉपी डिस्कIBM 7030, IBM 7094, IBM 1400 सीरीज़, CDC 164, UNIVAC सीरीज़
तृतीय पीढ़ी
(1964–1975)
मुख्य इलेक्ट्रॉनिक घटक: एकीकृत परिपथc(ICs)इनपुट/आउटपुट डिवाइस: इनपुट के लिए कीबोर्ड और माउस, द्वितीयक मेमोरी के लिए उच्च क्षमता वाली डिस्कIBM 360/370, UNIVAC 1108, UNIVAC AC 9000, PDP 11, CDC 6600
चतुर्थ पीढ़ी
(1975–वर्तमान)
वेरी लार्ज स्केल इंटीग्रेशन (VLSI) तकनीक, माइक्रोप्रोसेसर
इनपुट/आउटपुट डिवाइस: इनपुट के लिए कीबोर्ड और माउस, द्वितीयक मेमोरी के लिए उच्च क्षमता वाली डिस्क
STAR 1000, CRAY-X-MP (सुपर कंप्यूटर), DEC 10, PDP 11, CRAY-1, IBM 4341, ALTAIR 8800, Apple कंप्यूटर, VAX9000
पंचम पीढ़ी
(वर्तमान–भविष्य)
इन मशीनों में बायो-चिप (Bio-chip) और ULSI (अल्ट्रा लार्ज स्केल इंटीग्रेशन), तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का समावेश होगा।IBM नोटबुक, Pentium PC, SUN वर्कस्टेशन

कंप्यूटर का वर्गीकरण 

  1. अनुप्रयोग/कार्य के आधार पर
    1. एनालॉग कंप्यूटर
      • निरंतर डेटा के साथ कार्य करते हैं।
      • उदाहरण: स्पीडोमीटर, थर्मामीटर।
    2. डिजिटल कंप्यूटर
      • विविक्त (बाइनरी) डेटा (0 और 1) के साथ कार्य करते हैं।
      • उदाहरण: पीसी, लैपटॉप।
    3. हाइब्रिड कंप्यूटर
      • एनालॉग और डिजिटल कंप्यूटरों की विशेषताओं का संयोजन करते हैं।
      • उदाहरण: अस्पतालों में ECG मशीनें।
  1. आकार के आधार पर
    1. माइक्रो कंप्यूटर
      • सबसे छोटे, व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं के लिए बनाए गए।
      • उपवर्ग: डेस्कटॉप कंप्यूटर, लैपटॉप, पामटॉप, नोटबुक, टैबलेट कंप्यूटर।
    2. मिनीकंप्यूटर
      • मध्यम आकार के, मेनफ्रेम से कम शक्तिशाली लेकिन कई उपयोगकर्ताओं को सेवा देते हैं।
      • उपयोग: उद्योगों और छोटे संगठनों में।
    3. मेनफ्रेम कंप्यूटर
      • बड़े और शक्तिशाली, बड़े संगठनों द्वारा भारी डेटा प्रोसेसिंग के लिए उपयोग किए जाते हैं।
      • उदाहरण: बैंकिंग, रेलवे आरक्षण।
    4. सुपरकंप्यूटर
      • सबसे शक्तिशाली और तेज कंप्यूटर।
      • उपयोग: मौसम पूर्वानुमान, परमाणु सिमुलेशन, अंतरिक्ष अनुसंधान।
      • उदाहरण: CRAY X-MP, PARAM, Summit।
  2. उद्देश्य के आधार पर
    1. सामान्य उद्देश्य कंप्यूटर
      • विभिन्न प्रकार के कार्य करने के लिए डिज़ाइन किए गए।
      • उदाहरण: पर्सनल कंप्यूटर (PCs), लैपटॉप।
    2. विशेष उद्देश्य कंप्यूटर
      • विशिष्ट कार्य करने के लिए बनाए गए।
      • उदाहरण: एम्बेडेड सिस्टम, मौसम पूर्वानुमान कंप्यूटर।

सुपरकंप्यूटर 

  • एक सुपरकंप्यूटर उच्च-प्रदर्शन वाली कंप्यूटिंग प्रणाली (HPC system) है जो अत्यंत उच्च गति से डेटा के विशाल भंडार को संसाधित करने में सक्षम है। इसकी गति को FLOPS (Floating Point Operations Per Second) में मापा जाता है।
  • उपयोग: इसका उपयोग जलवायु मॉडलिंग, औषधि खोज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), खगोल भौतिकी और रक्षा जैसे जटिल क्षेत्रों में किया जाता है।

भारत में सुपरकंप्यूटिंग का घटनाक्रम (1986–2025)

वर्ष

मील का पत्थर / घटना

1986

  • अमेरिका ने भारत को Cray X-MP सुपरकंप्यूटर निर्यात करने से इनकार किया।

1988

  • सरकार ने स्वदेशी सुपरकंप्यूटर विकसित करने के लिए C-DAC (प्रगत संगणन विकास केंद्र) की स्थापना की।

1991

  • PARAM 8000 का शुभारंभ – भारत का पहला सुपरकंप्यूटर (C-DAC द्वारा विकसित)।

2002

  • PARAM Padma – TOP500 वैश्विक सूची में शामिल होने वाला पहला भारतीय सुपरकंप्यूटर

2015

  • राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) का शुभारंभ – MeitY और DST द्वारा।

2020

  • PARAM सिद्धि-AI – वैश्विक टॉप 100 सूची में प्रवेश; AI-केंद्रित HPC प्रणाली

2022

  • PARAM शिवाय (IIT BHU) – राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत विकसित पहला सुपरकंप्यूटर।IITs और IISERs में परम शक्ति (IIT खड़गपुर), ब्रह्मा (IISER पुणे), गंगा (IIT रुड़की), परम प्रवेग (IISc बैंगलोर), परम अनंता (IIT गांधीनगर), परम हिमालय (IIT मंडी) की स्थापना।

2023

  • ऐरावत (AIRAWAT) सुपरकंप्यूटर का शुभारंभ – C-DAC पुणे में; वैश्विक रैंक #75

2024

  • GMRT पुणे, IUAC दिल्ली, SNB कोलकाता में परम रुद्र (PARAM Rudra) श्रृंखला की स्थापना।इसे स्वदेशी ‘रुद्र’ (Rudra) सर्वर और ‘त्रिनेत्र’ (Trinetra) इंटरकनेक्ट का उपयोग करके बनाया गया है।

TOP500 सुपरकंप्यूटर (जून 2025)

रैंकसुपरकंप्यूटरदेश
1El Capitan (1.742 ExaFLOPS)अमेरिका
2Frontier
3Aurora
4JUPITER Boosterयूरोपीय संघ (जर्मनी)
5Eagle (Azure) – सबसे उच्च रैंक वाला क्लाउड सुपरकंप्यूटरअमेरिका
162AIRAWAT (AI अनुसंधान, विश्लेषण और ज्ञान प्रसार मंच)भारत
भारत के अन्य सुपरकंप्यूटर: Arka, Arunika, Pratyush, Mihir, PARAM Siddhi-AI.

Note:

विश्वभारत
पहला यांत्रिक गणना उपकरणAbacus
पहला कंप्यूटर ENIACSiddhartha
पहला सुपरकंप्यूटरCRAY-1 (1976)PARAM 8000
सुपरकंप्यूटर के जनकSeymour Cray विजय पांडुरंग भटकर
सबसे तेज सुपरकंप्यूटरEl Capitan (USA)AIRAWAT

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM)

  • शुभारंभ: वर्ष 2015 में, 7 वर्षीय समयसीमा (2015-2022) और ₹4,500 करोड़ के बजट के साथ।
  • लक्ष्य: राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास (R&D) और शैक्षणिक संस्थानों को नेशनल नॉलेज नेटवर्क (NKN) ग्रिड का उपयोग करके जोड़ना, जिससे उन्हें 70 से अधिक उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) सुविधाओं से जोड़ा जा सके।
  • उद्देश्य: एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना जो भारत को सुपरकंप्यूटिंग में एक प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित करे, और HPC क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और आत्मनिर्भरता प्राप्त करना।
  • संचालन (Steered by): विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) तथा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)।
  • कार्यान्वयन: प्रगत संगणन विकास केंद्र (C-DAC, पुणे) और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc, बेंगलुरु)।
  • मिशन की उपलब्धियां
  • HPC क्षमता: अब तक HPC मशीनों में कुल 24.83 पेटाफ्लॉप्स (PF) की क्षमता विकसित की जा चुकी है।
    • प्रमुख उदाहरण: परम सिद्धि-AI (5.26 PF, वैश्विक स्तर पर शीर्ष 100 में शामिल), परम प्रवेग (3.3 PF, IISc बेंगलुरु), परम शिवाय (IIT-BHU), और परम शक्ति (IIT-खड़गपुर)।
  • स्वदेशी विकास (Indigenous Development): मिशन के तहत प्रमुख स्वदेशी घटकों का विकास किया गया है, जिनमें शामिल हैं:
    • रुद्र (Rudra) सर्वर बोर्ड 1.0
    • त्रिनेत्र (Trinetra) HPC इंटरकनेक्ट (अंतर्संयोजन)
    • HPC सिस्टम सॉफ्टवेयर स्टैक 1.1
    • क्लाउड और HPC के लिए विभिन्न बेंचमार्क अनुप्रयोग

एक कंप्यूटर सिस्टम मुख्य रूप से चार बुनियादी घटकों या कार्यात्मक इकाइयों (Functional Units) से मिलकर बना होता है। ये घटक निम्नलिखित हैं:

  1. इनपुट डिवाइस/आगत इकाई (Input Unit): वे उपकरण जिनके माध्यम से डेटा और निर्देश कंप्यूटर में प्रविष्ट किए जाते हैं।
  2. केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई (Central Processing Unit): इसे कंप्यूटर का ‘मस्तिष्क’ कहा जाता है, जहाँ डेटा का प्रसंस्करण होता है।
  3. सिस्टम मेमोरी/स्मृति इकाई (Memory Unit): यह डेटा और निर्देशों को अस्थायी या स्थायी रूप से सुरक्षित रखने का कार्य करती है।
  4. आउटपुट डिवाइस/निर्गम इकाई (Output Unit): प्रसंस्कृत जानकारी को उपयोगकर्ता के समक्ष प्रदर्शित करने वाले उपकरण।

कंप्यूटर का ब्लॉक आरेख और कार्य प्रक्रिया (Computer Block Diagram and Working Process)

आधुनिक कंप्यूटर की कार्यप्रणाली का पहला उपयोगी प्रारूप जॉन वॉन न्यूमैन (John von Neumann) द्वारा प्रस्तावित किया गया था। उनके अनुसार, कंप्यूटर की कार्य प्रक्रिया एक निश्चित क्रम में होती है:

इनपुट इकाई (Input Unit) → मेमोरी इकाई (Memory Unit) → सी.पी.यू. (CPU) → आउटपुट इकाई (Output Unit)

इनपुट डिवाइस/आगत इकाई (Input Unit)

  • वे हार्डवेयर उपकरण जो उपयोगकर्ता से इनपुट डेटा को सी.पी.यू. तक भेजते हैं, उन्हें इनपुट डिवाइस या आगत युक्तियाँ कहा जाता है।
  • इन युक्तियों के मुख्य उत्तरदायित्व और कार्य निम्नलिखित हैं:
    • बाहरी स्रोतों से डेटा और जानकारी को प्राप्त (कैप्चर) करके कंप्यूटर सिस्टम में भेजना (स्थानांतरित करना)
    • मानवीय निर्देशों और डेटा को मशीनी भाषा में परिवर्तित करना, ताकि कंप्यूटर उसे समझ सके।
  • प्रमुख इनपुट डिवाइस के उदाहरण: कीबोर्ड, माउस, जॉयस्टिक, स्कैनर, माइक्रोफोन, टचपैड, बायोमेट्रिक सेंसर, ग्राफिक टैबलेट, बार/क्यूआर कोड रीडर, वेबकैम, मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर रीडर (MICR) और ऑप्टिकल कैरेक्टर रीडर (OCR) डिवाइस आदि।

कीबोर्ड (Key Board)

कीबोर्ड पर कुंजियों के प्रकार (Types of Keys on Keyboard)

कुंजी का प्रकार विवरण और उदाहरण 
अक्षरांकीय कुंजियाँ (Alphanumeric Keys)इसमें अक्षर (A–Z) और अंक (0–9) शामिल हैं, जिनका उपयोग टेक्स्ट और संख्याएँ टाइप करने के लिए किया जाता है।
अंक कुंजियाँ (Numeric Keys)कीबोर्ड के दाईं ओर स्थित अंक और गणितीय संकारक (Operators जैसे +, -, *, /)। इसे ‘न्यूमेरिक कीपैड’ भी कहा जाता है।
फंक्शन कुंजियाँ (Function Keys)कीबोर्ड के सबसे ऊपर स्थित प्रोग्राम करने योग्य कुंजियाँ (F1 से F12), जो विशिष्ट कार्यों को निष्पादित करने के लिए उपयोग की जाती हैं।
कर्सर नियंत्रण कुंजियाँ (Cursor Control Keys)तीर वाली कुंजियाँ (↑ ↓ ← →), Home, End, Page Up, Page Down; जिनका उपयोग स्क्रीन पर कर्सर को घुमाने के लिए किया जाता है।
विशेष चिह्न कुंजियाँ (Character Keys)विशेष वर्णों या चिह्नों को लिखने के लिए उपयोग की जाने वाली कुंजियाँ, जैसे: @, $, #, %, & आदि।
विशेष उद्देश्य कुंजियाँ (Special Purpose Keys)विभिन्न विशिष्ट कार्यों के लिए उपयोग की जाने वाली कुंजियाँ: Control (Ctrl), Enter, Shift, Alt, Escape (Esc), Tab आदि।
  • कंप्यूटर कीबोर्ड और कुंजियों से जुड़े मुख्य तथ्य
    • मानक/सामान्य कुंजियाँ (Standard Keys):
      • एक सामान्य कीबोर्ड में आमतौर पर 101 से 108 कुंजियाँ होती हैं।
      • QWERTY लेआउट सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला कीबोर्ड विन्यास है, जिसमें सामान्यतः 104 कुंजियाँ होती हैं।
    • टॉगल कुंजियाँ (Toggle Keys):
      • ये वे कुंजियाँ हैं जिनकी स्थिति (Status) हर बार दबाने पर ‘ऑन’ और ‘ऑफ’ के बीच बदलती है।
      • उदाहरण: Caps Lock और Num Lock
      • विशेष जानकारी: जब Caps Lock ‘ऑन’ होता है, तो टाइप किए गए अक्षर बड़े अक्षरों में प्रदर्शित होते हैं।
    • संशोधक कुंजियाँ (Modifier Keys):
      • ये कुंजियाँ अन्य कुंजियों के साथ संयोजन में उपयोग किए जाने पर उनके मूल कार्य को संशोधित कर देती हैं।
      • उदाहरण: Shift, Ctrl (Control) और Alt (Alternate)

विशेष उद्देश्य कुंजियाँ (Special Purpose Keys)

कुंजी (Key)विवरण और कार्य 
कंट्रोल (Ctrl) कुंजीइसका उपयोग विशेष कमांड के लिए अन्य कुंजियों के साथ संयोजन में किया जाता है (जैसे: प्रतिलिपि/Copy के लिए Ctrl+C)।
रिटर्न/एंटर (Enter) कुंजीकिसी प्रविष्टि (Entry) को समाप्त करने या दस्तावेज़ में एक नई पंक्ति (New line) शुरू करने के लिए।
शिफ्ट (Shift) कुंजीऊपर स्थित प्रतीकों को टाइप करने या अक्षरों को बड़े अक्षरों (Capital letters) में लिखने के लिए।
एस्केप (Esc) कुंजीवर्तमान संचालन (Operation) को रद्द करने या बीच में छोड़ने (Abort) के लिए, या Ctrl के साथ स्टार्ट मेनू खोलने के लिए।
बैकस्पेस कुंजीकर्सर के बाईं ओर (Left) के वर्णों को मिटाने के लिए उपयोग की जाती है।
डिलीट (Delete) कुंजीकर्सर के दाईं ओर (Ahead/Right) के वर्णों या चयनित डेटा को मिटाने के लिए।
कैप्स लॉक (Caps Lock) कुंजीवर्णमाला को बड़े अक्षरों में टाइप करने के लिए। यह टाइपिंग को टॉगल (अवस्था परिवर्तन) करती है।
नम लॉक (Num Lock) कुंजीन्यूमेरिक कीपैड (अंक कुंजियों) को सक्रिय या निष्क्रिय (Enable/Disable) करने के लिए।
विंडोज कुंजीस्टार्ट मेनू (Start Menu) खोलने के लिए।
टैब (Tab) कुंजीकर्सर को अगले टैब स्टॉप पर ले जाने या पैराग्राफ में इंडेंट (खाली जगह) देने के लिए।
होम (Home) कुंजीकर्सर को दस्तावेज़ या वर्तमान पंक्ति की शुरुआत में ले जाने के लिए।

पॉइंटिंग डिवाइस/सूचक युक्तियाँ (Pointing Device)

  • एक पॉइंटिंग डिवाइस एक ऐसी इनपुट इंटरफेस है जो उपयोगकर्ता को कंप्यूटर में स्थानिक डेटा (Spatial Data) प्रविष्ट करने की अनुमति देती है।
  • महत्वपूर्ण तथ्य: कीबोर्ड एक पॉइंटिंग डिवाइस नहीं है।
  • प्रमुख पॉइंटिंग डिवाइस के उदाहरण:
    • माउस (Mouse): यह एक हाथ से पकड़ा जाने वाला उपकरण है जिसमें बटन और एक स्क्रॉल व्हील (Scroll wheel) होता है, जो स्क्रीन पर कर्सर को घुमाता है।
    • ट्रैकपैड (Trackpad): लैपटॉप पर स्थित एक स्पर्श-संवेदी सतह जो माउस की तरह कार्य करती है।
    • टचस्क्रीन (Touchscreen): एक ऐसा उपकरण जो अलग से किसी पॉइंटिंग डिवाइस की आवश्यकता को समाप्त कर देता है।
    • स्टायलस (Stylus): एक पेन जैसा उपकरण जिसका उपयोग अक्सर टचस्क्रीन, स्मार्टफोन या ग्राफिक्स टैबलेट पर किया जाता है।
    • ट्रैकबॉल (Trackball): एक सॉकेट में स्थित गेंद वाला उपकरण जिसमें गेंद के घूमने का पता लगाने के लिए सेंसर लगे होते हैं। इनका उपयोग आमतौर पर CAD (कंप्यूटर एडेड डिजाइन) वर्कस्टेशन पर किया जाता है।
    • जॉयस्टिक (Joystick): एक लीवर जो कंप्यूटर स्क्रीन पर कर्सर को नेविगेट करने के लिए कई दिशाओं में घूमता है। इनका उपयोग अक्सर गेम खेलने के लिए किया जाता है।
    • एयर माउस (Air Mouse): इसे जायरोस्कोपिक माउस (Gyroscopic mouse) के रूप में भी जाना जाता है। यह हवा में अपनी स्थिति (Orientation) को महसूस करता है और उपयोगकर्ता को डिवाइस हिलाकर कर्सर को नियंत्रित करने की अनुमति देता है।
    • 3D माउस (3D Mouse): इसका उपयोग मुख्य रूप से CAD अनुप्रयोगों में जटिल 3D मॉडल को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।

कुछ अन्य महत्वपूर्ण इनपुट उपकरण 

उपकरण

कार्य एवं उदाहरण

बारकोड रीडर (Barcode Reader)

  • एक इनपुट डिवाइस जो उत्पादों पर मुद्रित बारकोड (यूनिवर्सल प्रोडक्ट कोड) को पढ़ता है।यह एक प्रकाश पुंज (Light beam)
  • उत्सर्जित करता है; जो बारकोड से परावर्तित होता है और डिटेक्टर गहरे व हल्के बार के पैटर्न को पढ़ता है। 
  • उदाहरण: सुपरमार्केट में उत्पादों की कीमत पढ़ने के लिए।

ऑप्टिकल मार्क रीडर (OMR)

  • यह कागज पर अंकित निशानों (चिह्नों की उपस्थिति या अनुपस्थिति) का पता लगाता है। 
  • यह निशानों को डेटा रिकॉर्ड के रूप में स्कैन और व्याख्या करने के लिए प्रकाश पुंज का उपयोग करता है। 
  • उदाहरण: परीक्षाओं की बहुविकल्पीय उत्तर पुस्तिकाओं (MCQ sheets), मतदान पत्रों और सर्वेक्षणों के लिए।

ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR)

  • यह स्कैन की गई छवियों से छपे हुए टेक्स्ट को संपादन योग्य (Editable ASCII) टेक्स्ट में बदलता है। 
  • इसका उपयोग बिलों (टेलीफोन, बिजली), बीमा दस्तावेजों आदि को डिजिटल बनाने में किया जाता है।
  • उन्नत रूप: इंटेलिजेंट कैरेक्टर रिकग्निशन (ICR)

मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर रिकग्निशन (MICR)

  • यह चुंबकीय स्याही (Magnetic ink) से छपे अक्षरों को उनके आकार की जांच करके पढ़ता है। 
  • उदाहरण: बैंकों में चेक (Cheque) को प्रोसेस करने के लिए, चेक के नीचे लिखे MICR कोड को पढ़ने के लिए इसका व्यापक उपयोग होता है।

स्मार्ट कार्ड रीडर (Smart Card Reader)

  • यह स्मार्ट कार्ड के माइक्रोप्रोसेसर या मेमोरी से डेटा एक्सेस करने के लिए उपयोग होता है।
  • दो प्रकार: मेमोरी कार्ड (नॉन-वोलेटाइल मेमोरी) & माइक्रोप्रोसेसर कार्ड (प्रोसेसर + वोलाटाइल मेमोरी)
  • उदाहरण: संस्थानों में सुरक्षित प्रमाणीकरण (Authentication) के लिए।

बायोमेट्रिक सेंसर (Biometric Sensor)

  • यह व्यक्तियों के शारीरिक (फिंगरप्रिंट, चेहरा) या व्यावहारिक (हस्ताक्षर) लक्षणों को पहचानता है। 
  • उदाहरण: कार्यालयों और संस्थानों में उपस्थिति प्रणाली और सुरक्षा प्रमाणीकरण के लिए।

आउटपुट डिवाइस (निर्गत युक्तियाँ/Output Unit)

  • वे हार्डवेयर उपकरण जो कंप्यूटर से प्राप्त परिणामों या आउटपुट को प्रदर्शित करने के लिए उत्तरदायी होते हैं, उन्हें आउटपुट डिवाइस कहा जाता है।
  • प्रमुख आउटपुट डिवाइस के उदाहरण: डिस्प्ले मॉनिटर, प्रोजेक्टर, स्पीकर, प्रिंटर, प्लॉटर (Plotter), हेडफोन आदि।
बेसिक कंप्यूटर विज्ञान

मॉनिटर (Monitor)

  • उपयोगकर्ता कंप्यूटर के साथ मॉनिटर के माध्यम से संवाद (Interact) करता है। यह टेलीविजन के आकार का होता है और इसे विजुअल डिस्प्ले यूनिट (VDU) भी कहा जाता है।
  • माइक्रो कंप्यूटर में मुख्य रूप से दो प्रकार के मॉनिटर उपयोग किए जाते हैं:
    • सी.आर.टी. मॉनिटर (Cathode Ray Tube):
      • इसकी स्क्रीन पर फास्फोरस पदार्थ का लेप होता है, जो एक प्रकाशदीप्त पदार्थ है।
      • जब सी.आर.टी. स्क्रीन पर इलेक्ट्रॉनों की बौछार करता है, तो स्क्रीन चमकने लगती है और चित्र उभरते हैं।
    • एफ.पी.डी. मॉनिटर (FPD – Flat Panel Display):
      • ये इलेक्ट्रॉन बीम के बजाय लिक्विड क्रिस्टल, प्लाज्मा, या इलेक्ट्रो-ल्यूमिनेसेंट पदार्थों का उपयोग करते हैं।
      • इनकी रेज़ोल्यूशन अपेक्षाकृत कम होती है।
      • एफ.पी.डी. मॉनिटर तीन प्रकार के होते हैं:
        • लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले मॉनिटर (LCD)
        • गैस प्लाज्मा डिस्प्ले मॉनिटर (GPD)
        • इलेक्ट्रोल्यूमिनसेंट डिस्प्ले मॉनिटर (ELD)
      • तुलना: जी.पी.डी. और ई.एल.डी. की रेज़ोल्यूशन एल.सी.डी. की तुलना में बेहतर होती है, लेकिन ये काफी महंगे होते हैं।

डिस्प्ले तकनीकों की तुलना (Comparison of Display Technologies)

तकनीक 

कार्य सिद्धांत 

लाभ 

सीमाएँ 

LCD (लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले)

प्रकाश के मार्ग को नियंत्रित करने के लिए लिक्विड क्रिस्टल+ बैकलाइट का उपयोग।

  • पतला और हल्का।
  • CRT की तुलना में कम बिजली की खपत।
  • लागत प्रभावी (किफायती)।
  • बैकलाइट की आवश्यकता (कम कंट्रास्ट)।
  • संकीर्ण व्यूइंग एंगल (देखने का कोण सीमित)।
  • धीमा प्रतिक्रिया समय।

LED (लाइट एमिटिंग डायोड डिस्प्ले)

LCD पैनल + LED बैकलाइट (किनारों या सीधे पीछे से रोशनी)।

  • LCD से अधिक चमकीला (Brighter)।
  • लंबी उम्र (Lifespan)।
  • ऊर्जा कुशल (कम बिजली)।
  • सीमित कंट्रास्ट (बैकलाइट लीकेज के कारण)।
  • OLED की तुलना में कम रंग सटीकता (Color accuracy)।

OLED (ऑर्गेनिक LED)

विद्युत प्रवाह होने पर कार्बनिक उत्सर्जक पदार्थ (Organic emissive materials) स्वयं प्रकाश उत्सर्जित करते हैं।

  • स्व-प्रदीप्त (बैकलाइट की आवश्यकता नहीं)।
  • उच्च कंट्रास्ट और गहरा काला रंग।चौड़ा व्यूइंग एंगल। 
  • लचीले और पतले डिस्प्ले संभव।
  • कम उम्र (कार्बनिक पदार्थ का क्षय होता है)।
  • बर्न-इन (Burn-in) का जोखिम।उच्च लागत।

माइक्रो-एल.ई.डी. (MicroLED)

अकार्बनिक सूक्ष्म LED प्रति पिक्सेल स्वयं प्रकाश उत्सर्जित करते हैं।

  • अत्यधिक चमक और बेहतर रंग सटीकता।
  • OLED से अधिक लंबी उम्र।
  • बहुत कम बिजली की खपत।
  • स्केलेबिलिटी (पैनल के आकार को बदला जा सकता है)।
  • अत्यधिक उच्च लागत और जटिल निर्माण प्रक्रिया।
  • वर्तमान में सीमित उपलब्धता (अभी उभरती हुई तकनीक)।


महत्वपूर्ण बिंदु (Important Points)

  • पिक्सेल (Pixels): स्क्रीन पर कोई भी छवि छोटे-छोटे बिंदुओं से बनी होती है, इन सूक्ष्म बिंदुओं को पिक्सेल कहा जाता है। यह डिजिटल छवि की सबसे छोटी इकाई है।
  • रेजोल्यूशन (Resolution): यह स्क्रीन पर प्रदर्शित होने वाले पिक्सेल की कुल संख्या को संदर्भित करता है। इसे आमतौर पर चौड़ाई × ऊँचाई के रूप में व्यक्त किया जाता है।
    • इसे पिक्सेल घनत्व (Pixel Density) में मापा जाता है।
      • PPI (Pixels Per Inch): डिजिटल डिस्प्ले (जैसे मॉनिटर, मोबाइल) का पिक्सेल घनत्व।
      • DPI (Dots Per Inch): प्रिंटर की प्रिंटिंग गुणवत्ता या रेजोल्यूशन।
    • रेजोल्यूशन स्क्रीन पर छवि की गुणवत्ता को दर्शाता है।
      • उच्च रेजोल्यूशन (↑पिक्सेल): इसका अर्थ है छवि में अधिक विवरण, स्पष्टता और तीक्ष्णता (Sharpness)।
    • सामान्य मानक (16:9 आस्पेक्ट रेशियो/Aspect Ratio):
      • HD (720p): 1280 × 720 पिक्सेल।
      • Full HD (FHD / 1080p): 1920 × 1080 पिक्सल (लगभग 2 मेगापिक्सल)।
      • Quad HD (QHD / 1440p): 2560 × 1440 पिक्सल।
      • Ultra HD (UHD / 4K): 3840 × 2160 पिक्सल (यह 1080p के कुल पिक्सल का ठीक चार गुना होता है)।

प्रिंटर (Printer)

  • प्रिंटर संसाधित डेटा की हार्ड कॉपी या मुद्रित प्रति तैयार करता है। यह उपयोगकर्ता को छवियों, टेक्स्ट या किसी अन्य जानकारी को कागज पर छापने में सक्षम बनाता है।
प्रिंटर के प्रकार (Types of Printers)
  • इम्पैक्ट प्रिंटर (Impact Printers): ये प्रिंटर टाइपराइटर की तरह कागज पर भौतिक रूप से प्रहार (Strike) करके छपाई करते हैं। ये शोर अधिक करते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं:
    • कैरेक्टर प्रिंटर (Character Printers)
      • डॉट मैट्रिक्स (Dot Matrix): यह स्याही वाले रिबन पर प्रहार करने के लिए पिनों (Pins) का उपयोग करता है। यह कम लागत वाला और शोर करने वाला होता है। इसका उपयोग बिलिंग और बैंकिंग में अधिक होता है।
      • डेज़ी व्हील (Daisy Wheel): यह उच्च गुणवत्ता वाली छपाई (Letter-quality) करता है लेकिन बहुत धीमा होता है। अब इसका उपयोग लगभग समाप्त हो चुका है।
    • लाइन प्रिंटर (Line Printers): ये एक बार में पूरी पंक्ति (Line) को छापते हैं। इनका उपयोग बड़े पैमाने पर डेटा केंद्रों में किया जाता है।
      • ड्रम प्रिंटर (Drum Printers)
      • चेन प्रिंटर (Chain Printers)
  • नॉन-इम्पैक्ट प्रिंटर (Non-Impact Printers): ये प्रिंटर कागज पर प्रहार किए बिना स्याही या ऊष्मा (Heat) का उपयोग करते हैं। ये शांत और उच्च गुणवत्ता वाले होते हैं। एक बार में केवल एक ही प्रति प्रिंट हो सकती है।
    • इंकजेट प्रिंटर (Inkjet Printer): यह कागज पर स्याही की छोटी बूंदों का छिड़काव (Spray) करता है। यह रंगीन और फोटो प्रिंटिंग के लिए उपयुक्त और किफायती है।
    • लेजर प्रिंटर (Laser Printer): यह लेजर बीम और टोनर (सूखी स्याही) का उपयोग करता है। यह बहुत तेज़ और उच्च गुणवत्ता वाला होता है, जो कार्यालयों के लिए आदर्श है।
    • थर्मल प्रिंटर (Thermal Printer): यह ऊष्मा-संवेदी (Heat-sensitive) कागज का उपयोग करता है। यह आमतौर पर POS सिस्टम (पॉइंट ऑफ सेल), ATM और टिकट मशीनों में देखा जाता है।

प्रिंटरों की तुलना (Comparison of Printers)

विशेषताएँ लेज़र प्रिंटर इंकजेट प्रिंटरथर्मल प्रिंटर डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर 
प्रयुक्त मुद्रण सामग्री इंक पाउडर/टोनर तरल स्याही ऊष्मा संवेदनशील कागज़ स्याही से सना रिबन 
मुद्रण प्रक्रियायह गर्म करके पाउडर को कागज़ पर चिपकाता (फ्यूज करता) है।यह सूक्ष्म नोजल के माध्यम से कागज़ पर तरल स्याही छिड़कता है।थर्मल पेपर को थर्मल प्रिंट हेड के ऊपर से गुजारा जाता है।कागज़ पर रखे रिबन पर पिन (Pins) से प्रहार किया जाता है।
मुद्रण गति20 पृष्ठ प्रति मिनट (ppm)6 पृष्ठ प्रति मिनट (ppm)150 मिमी प्रति सेकंड (mm/sec)30 से 550 केरेक्टर प्रति सेकंड (cps) 
गुणवत्ताप्रिंटिंग गुणवत्ता अच्छी होती है। ब्लैक एंड व्हाइट (काले और सफेद) के लिए सर्वश्रेष्ठ।प्रिंटिंग गुणवत्ता अच्छी होती है, विशेषकर छोटे फ़ॉन्ट के लिए।चित्रों (images) की प्रिंटिंग गुणवत्ता खराब होती है। टेक्स्ट प्रिंटिंग की गुणवत्ता अच्छी होती है।चित्रों की प्रिंटिंग गुणवत्ता खराब होती है। टेक्स्ट के मामले में प्रिंटिंग अच्छी होती है।
लाभ/फायदेकम शोर करता है, तेज़ी से प्रिंट करता है, उच्च प्रिंट गुणवत्ता।कम शोर करता है, उच्च प्रिंट गुणवत्ता, वार्म-अप (warm up) समय नहीं लगता, उपकरण की लागत कम है।कम शोर करता है, तेज़, आकार में छोटा, हल्का, कम बिजली की खपत करता है, पोर्टेबल (ले जाने में आसान)।प्रिंट करना सस्ता होता है क्योंकि रिबन सस्ता होता है, कार्बन कॉपी निकालना संभव है।
हानि/नुकसानपेपर जाम (paper jams) होने की संभावना अधिक होती है। टोनर महँगा होता है। उपकरण स्वयं महँगा होता है।स्याही महंगी होती है और वाटरप्रूफ (waterproof) नहीं होती, तथा नोजल के जाम (clogging) होने की संभावना रहती है।विशेष थर्मल गुणवत्ता वाले कागज की आवश्यकता होती है, प्रिंट गुणवत्ता खराब होती है।प्रारंभिक खरीद और रखरखाव दोनों महँगे होते हैं, प्रिंटिंग तेज नहीं होती है, शोर करता है।

प्लॉटर (Plotter)

  • प्लॉटर का उपयोग बड़े मानचित्र, चार्ट, त्रिविमीय रेखाचित्र, डिजाइन और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट को प्रिंट करने के लिए किया जाता है।
  • यह एक आउटपुट डिवाइस है जिसके द्वारा हम ग्राफिक्स प्रिंट कर सकते हैं। इसका उपयोग बैनर और पोस्टर बनाने के लिए किया जाता है।
  • सामान्यतः प्लॉटर दो प्रकार के होते हैं: ड्रम पेन प्लॉटर और फ्लैट बेड प्लॉटर

उभयनिष्ठ युक्तियाँ (इनपुट और आउटपुट – Combined I/O):

  • मोडेम और नेटवर्क कार्ड: डेटा संचार के लिए (डेटा भेजना और प्राप्त करना)।
  • हेडसेट: हेडफोन आउटपुट और माइक्रोफोन इनपुट है।
  • फैक्स मशीन: इसमें स्कैनर इनपुट के रूप में और प्रिंटर आउटपुट के रूप में कार्य करता है।
  • यूएसबी (USB) ड्राइव: जब ड्राइव से डेटा पढ़ा जाता है तो यह इनपुट है, और जब भंडारण के लिए ड्राइव पर डेटा लिखा जाता है तो यह आउटपुट है।
  • टचस्क्रीन (Touchscreen)
    • यह एक आउटपुट डिवाइस है क्योंकि यह जानकारी प्रदर्शित करती है (मॉनिटर की तरह)।
    • यह एक इनपुट डिवाइस भी है क्योंकि यह उपयोगकर्ताओं को अपनी उंगली या स्टायलस से स्क्रीन को छूकर कंप्यूटर के साथ संवाद करने की अनुमति देती है।
    • यह द्वि-मार्गी संचार इसे एक उभयनिष्ठ डिवाइस बनाता है।

केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई (CPU)

  • CPU को कंप्यूटर का ‘मस्तिष्क’ कहा जाता है। इसे एक एकल एकीकृत परिपथ (IC) के रूप में निर्मित किया जाता है, जिसे माइक्रोप्रोसेसर भी कहते हैं। 
  • सिस्टम के सुचारु संचालन के लिए, CPU मेमोरी और इनपुट/आउटपुट इकाइयों के साथ मिलकर कार्य करता है।
CPU के कार्य (Functions of the CPU):
  1. CPU मेमोरी से प्रोग्राम के निर्देशों और डेटा को प्राप्त (Retrieve) करता है।
  2. यह निर्देशों में निर्दिष्ट सभी गणितीय और तार्किक संक्रियाएं करता है।
  3. संसाधित परिणामों को वापस मेमोरी में संग्रहीत कर दिया जाता है।
CPU के घटक (CPU Components):
  1. रजिस्टर (Registers):
    1. ये CPU के भीतर स्थित स्थानीय मेमोरी हैं, जो डेटा, निर्देशों और मध्यवर्ती परिणामों को अस्थायी रूप से सहेजती हैं।
    2. इनका आकार और संख्या सीमित होती है। यह कंप्यूटर की सबसे तेज़ लेकिन आकार में सबसे छोटी मेमोरी इकाई है।
  2. अंकगणितीय तर्क इकाई (Arithmetic Logic Unit – ALU):
    1. यह प्रोग्राम द्वारा आवश्यक सभी अंकगणितीय (जैसे जोड़, घटाव) और तार्किक (जैसे तुलना करना: <, >, =) गणनाओं को निष्पादित करती है।
  3. नियंत्रण इकाई (Control Unit – CU):
    1. यह निर्देशों के क्रमिक निष्पादन का पर्यवेक्षण करती है।
    2. यह निर्देशों की व्याख्या करती है और मेमोरी, ALU तथा इनपुट/आउटपुट उपकरणों के बीच डेटा के प्रवाह का प्रबंधन करती है।

सिस्टम मेमोरी (स्मृति इकाई / Memory Unit)

  • यह इकाई प्रोग्राम या डेटा को अस्थायी (Temporary) या स्थायी (Permanent) आधार पर संगृहीत करने के लिए उत्तरदायी है। 
  • कंप्यूटर की मेमोरी को मुख्य रूप से प्राथमिक (Primary), कैश (Cache) और द्वितीयक (Secondary) मेमोरी में विभाजित किया गया है।

प्राथमिक/मुख्य मेमोरी  (Main/Primary Memory)

  • यह कंप्यूटर की मुख्य मेमोरी होती है, जिसका उपयोग डेटा प्रोसेसिंग के दौरान डेटा और निर्देशों को संग्रहीत करने के लिए किया जाता है।
  • इसकी प्रकृति अस्थायी और वोलेटाइल होती है, जिसका अर्थ है कि बिजली आपूर्ति बंद होने पर इसमें संगृहीत डेटा नष्ट हो जाता है।
  • CPU इसे सीधे एक्सेस कर सकता है।
  • यह एक अर्धचालक (Semiconductor) मेमोरी है और दो प्रकार की होती है:
    • रैम (रैंडम एक्सेस मेमोरी – RAM)
    • रोम (रीड-ओनली मेमोरी – ROM)

रैम (RAM) और रोम (ROM) की तुलना

विशेषता रैम (RAM)रोम (ROM)
पूरा नाम रैंडम एक्सेस मेमोरी रीड ओनली मेमोरी 
प्रकृति यह ‘रीड/राइट’ (Read/Write) प्रकार की मेमोरी है, जिसे उपयोगकर्ता पढ़ और लिख सकता है।उपयोगकर्ता इसे केवल पढ़ (Read Only) सकता है, इसमें डेटा लिख नहीं सकता।
स्थायित्व यह वोलेटाइल या अस्थायी मेमोरी है।यह नॉन-वोलेटाइल या स्थायी मेमोरी है।
डेटा भंडारण बिजली की आपूर्ति बंद होने पर डेटा मिट जाता हैडेटा स्थायी रूप से संग्रहीत रहता है (बिजली जाने पर भी सुरक्षित)।
गति यह रोम की तुलना में तेज़ मेमोरी है।यह रैम की तुलना में धीमी मेमोरी है।
उपयोग इसका उपयोग OS लोड होने के बाद सामान्य संचालन में किया जाता है।कंप्यूटर के स्टार्टअप (Booting) के दौरान इसका उपयोग किया जाता है (BIOS – बेसिक इनपुट आउटपुट सिस्टम)।
प्रकारSRAM (स्टैटिक रैम)DRAM (डायनेमिक रैम)PROM (प्रोग्रामेबल रोम)EPROM (इरेजेबल PROM)EEPROM (इलेक्ट्रिकली इरेजेबल PROM)
बेसिक कंप्यूटर विज्ञान

सहायक/द्वितीयक/बाह्य मेमोरी (Auxiliary/Secondary Memory)

  • द्वितीयक मेमोरी में मौजूद डेटा को CPU द्वारा सीधे संसाधित नहीं किया जा सकता है; इसे पहले प्राथमिक मेमोरी में कॉपी किया जाना चाहिए।
  • द्वितीयक मेमोरी को स्थायी मेमोरी के रूप में भी जाना जाता है।
  • यह नॉन-वोलेटाइल प्रकृति की होती है, अर्थात बिजली बंद होने के बाद भी कंप्यूटर से डेटा नष्ट नहीं होता है।
  • उदाहरण: हार्ड डिस्क ड्राइव (HDD), सॉलिड स्टेट ड्राइव (SSD), पेन ड्राइव, कॉम्पैक्ट डिस्क (CD)/डिजिटल वर्सेटाइल डिस्क (DVD) आदि।

द्वितीयक भंडारण के मुख्य प्रकार

स्टोरेज का प्रकार

विवरण एवं उदाहरण

सॉलिड स्टेट स्टोरेज (Solid State Storage) 

  • यह डेटा को विद्युत रूप से संग्रहीत करने के लिए सिलिकॉन-आधारित सेल (ट्रांजिस्टर) का उपयोग करता है। 
  • इसमें फ्लैश मेमोरी का उपयोग होता है।यह बहुत तेज और विश्वसनीय होती है क्योंकि इसमें कोई मूविंग पार्ट नहीं होता।उदाहरण: यूएसबी फ्लैश/पेन ड्राइव, सॉलिड स्टेट ड्राइव (SSD)।

ऑप्टिकल स्टोरेज (Optical Storage)

  • इसमें डेटा को लैंड्स (सपाट क्षेत्र) और पिट्स (गर्त/गड्ढे) के रूप में संग्रहीत किया जाता है, जिन्हें लेजर बीम द्वारा पढ़ा जाता है।
  • उदाहरण: कॉम्पैक्ट डिस्क (CD), डिजिटल वीडियो डिस्क (DVD), ब्लू-रे डिस्क (Blu-ray Disc)।
  • विशेष तथ्य: ब्लू-रे डिस्क की भंडारण क्षमता सबसे अधिक होती है। इसे केवल ब्लू-रे राइटर/रीडर में ही चलाया जा सकता है।

मैग्नेटिक स्टोरेज (Magnetic Storage/चुंबकीय भंडारण)

  • यह डेटा को बाइनरी के रूप में एनकोड करने के लिए चुंबकीय क्षेत्रों का उपयोग करता है। (चुंबकीय स्थिति → ‘1’, अ-चुंबकीय स्थिति → ‘0’)।
  • उदाहरण: हार्ड डिस्क ड्राइव (HDD), फ्लॉपी डिस्क, ज़िप ड्राइव, मैग्नेटिक टेप (चुंबकीय टेप)।

कैश मेमोरी (Cache Memory)

  • कैश मेमोरी सी.पी.यू. (CPU) और मुख्य मेमोरी (RAM) के बीच की एक मध्यवर्ती मेमोरी है।
  • कैश मेमोरी की आवश्यकता CPU और प्राथमिक मेमोरी की परिचालन गति में अंतर के कारण होती है। (CPU बहुत तेज़ है, जबकि RAM अपेक्षाकृत धीमी)।
  • इसका उपयोग डेटा और प्रोग्राम के उन हिस्सों को रखने के लिए किया जाता है जिनका CPU द्वारा सबसे अधिक बार (Frequently) उपयोग किया जाता है।

फ्लैश मेमोरी (Flash memory): यह एक प्रकार की स्थायी मेमोरी है, जिसका अर्थ है कि बिजली की आपूर्ति न होने पर भी यह डेटा को सुरक्षित रखती है।

कुछ महत्वपूर्ण बिंदु (Some Important Points)

  1. रजिस्टर (Registers):सबसे छोटी और सबसे तेज़ भंडारण इकाइयाँ।सीधे CPU के भीतर स्थित होती हैं।वोलेटाइल (अस्थायी)
  2. कैश (Cache):एक छोटी, बहुत तेज़ मेमोरी। वोलेटाइल (अस्थायी)CPU की गति बढ़ाने के लिए RAM से बार-बार उपयोग किए जाने वाले डेटा को संग्रहीत करती है।
  3. रैम (RAM – Random Access Memory):मुख्य मेमोरी।वोलेटाइल (अस्थायी)CPU के लिए तेज़ लेकिन अस्थायी पहुँच प्रदान करती है।
  4. हार्ड डिस्क ड्राइव (HDD)/सॉलिड स्टेट ड्राइव (SSD): ये द्वितीयक भंडारण के रूप में जानी जाती हैं। नॉन-वोलेटाइल (स्थायी) विशेषताएँ: ये पदानुक्रम में सबसे बड़ी और सबसे धीमी इकाइयाँ हैं, लेकिन डेटा को स्थायी रूप से संग्रहीत करने के लिए आदर्श हैं (जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम, एप्लिकेशन और उपयोगकर्ता फ़ाइलें)।

मेमोरी पदानुक्रम (Memory Hierarchy)

  • मेमोरी पदानुक्रम विभिन्न प्रकार की मेमोरी को उनकी गति (Speed), आकार (Size), लागत (Cost) और CPU से निकटता के आधार पर व्यवस्थित करता है, जिससे सिस्टम का प्रदर्शन बेहतर होता है।
  • पदानुक्रम का क्रम: रजिस्टर → कैश → रैम → हार्ड डिस्क (तेज़ से धीमी की ओर)

विभिन्न प्रकार की मेमोरी की तुलना

भंडारण गति क्षमता सापेक्ष लागत वोलेटाइल
रजिस्टरसबसे तेज़सबसे कमसबसे अधिकहाँ
कैशअधिक तेज़कमबहुत अधिकहाँ
रैम / रोमतेज़कम/मध्यमउच्चRAM: हाँ / ROM: नहीं
हार्ड डिस्कमध्यमबहुत अधिकबहुत कमनहीं

सूचना संग्रहण और मापन की इकाइयाँ (Units of Memory Measurement)

  • बिट (Bit):
    • यह सूचना संग्रहीत करने की सबसे छोटी इकाई है।
    • प्रत्येक बिट एक बाइनरी स्विच की तरह कार्य करता है, जो केवल एक ही मान – ‘0’ या ‘1’ – को संग्रहीत करता है।
  • बाइट (Byte):
    • यह 256 (2⁸) अलग-अलग मानों का प्रतिनिधित्व करने में सक्षम होती है।
  • वर्ड (Word):
    • यह बिट्स का एक निश्चित लंबाई का समूह होता है।
    • यह वह समूह है जिस पर सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU) एक इकाई के रूप में एक बार में कार्य करता है।
    • CPU की संरचना के आधार पर ‘वर्ड’ की लंबाई 8, 16, 32 या 64 बिट्स की हो सकती है।
  • जियोपबाइट (GeopByte):
    • वर्तमान में इसे मेमोरी मापन की सबसे बड़ी इकाई माना जाता है।
  • इकाइयों का आरोही क्रम (सबसे छोटी से सबसे बड़ी)
    • बिट < निबल < बाइट < किलोबाइट (KB) < मेगाबाइट (MB) < गीगाबाइट (GB) < टेराबाइट (TB) < पेटाबाइट (PB) < एक्साबाइट (EB) < जेटाबाइट (ZB) < योट्टाबाइट (YB) < ब्रोंटोबाइट < जियोपबाइट 
मेमोरी यूनिटसमतुल्य
1 बिट (Bit)0 या 1 (बाइनरी अंक)
4 बिट्स1 निबल (Nibble)
8 बिट्स1 बाइट (Byte) = 2 निबल्स
1024 बाइट्स1 केबी (KB – किलोबाइट)
1024 केबी1 एमबी (MB – मेगाबाइट)
1024 एमबी1 जीबी (GB – गीगाबाइट)
1024 जीबी1 टीबी (TB – टेराबाइट)
1024 टीबी1 पीबी (PB – पेटाबाइट)
1024 पीबी1 ईबी (EB – एक्साबाइट)
1024 ईबी1 ज़ीबी (ZB – ज़ेट्टाबाइट)
1024 ज़ीबी1 वाईबी (YB – योट्टाबाइट)
1024 वाईबी1 ब्रॉन्टोबाइट (BrontoByte)
1024 ब्रॉन्टोबाइट1 जियोपबाइट (GeopByte – सबसे बड़ी इकाई)

एक कंप्यूटर प्रणाली मुख्य रूप से दो प्रमुख घटकों से मिलकर बनी होती है: हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर

हार्डवेयर (Hardware)

  • हार्डवेयर कंप्यूटर के उन भौतिक (Physical) और मूर्त (Tangible) घटकों का प्रतिनिधित्व करता है जिन्हें छुआ जा सकता है। 
  • हम इन्हें न केवल देख सकते हैं बल्कि स्पर्श भी कर सकते हैं। 
  • उदाहरण: सी.पी.यू. (CPU), कीबोर्ड, माउस, प्रिंटर, स्पीकर आदि।

सॉफ्टवेयर (Software)

  • कंप्यूटर पर किसी भी कार्य को निष्पादित (execute) करने के लिए, कंप्यूटर को यह बताना आवश्यक होता है कि उसे क्या करना है। हमें कंप्यूटर को निर्देश देने पड़ते हैं।
  • इन निर्देशों को ही सॉफ्टवेयर कहा जाता है तथा निर्देशों के इस समूह को प्रोग्राम (Program) कहते हैं।
  • यह उन प्रोग्रामों के समूह का प्रतिनिधित्व करता है जो कंप्यूटर सिस्टम के संचालन को नियंत्रित (Govern) करते हैं और हार्डवेयर को सुचारू रूप से चलाने में मदद करते हैं।
  • सॉफ्टवेयर इलेक्ट्रॉनिक रूप में होता है, जिसे देखा या छुआ नहीं जा सकता।

सॉफ्टवेयर के प्रकार (Types of Software)

  1. सिस्टम सॉफ्टवेयर:
    1. यह कंप्यूटर प्रणालियों के सही ढंग से कार्य करने के लिए अनिवार्य होता है।
    2. यह उपयोगकर्ता (User) और कंप्यूटर के हार्डवेयर घटकों के बीच इंटरफेस (माध्यम) का कार्य करता है।
    3. उदाहरण: ऑपरेटिंग सिस्टम (जैसे Windows) और भाषा संसाधक (जैसे कंपाइलर, असेम्बलर)।
    4. यूटिलिटी सॉफ्टवेयर:
      1. इसे सिस्टम सॉफ्टवेयर का ही एक उप-प्रकार माना जाता है।
      2. इसका उपयोग कंप्यूटर को अधिक सुरक्षित और सुचारू रूप से चलाने के लिए अतिरिक्त कार्य करने हेतु किया जाता है।
      3. उदाहरण: एंटीवायरस, डिस्क डिफ्रेग्मेंटर।
  2. एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर:
    1. ये सॉफ्टवेयर किसी विशिष्ट कार्य या उद्देश्य को पूरा करने के लिए बनाए जाते हैं।
    2. उदाहरण: एम.एस. वर्ड (MS-Word), वर्डपैड (WordPad), वेब ब्राउज़र।

सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software)

सिस्टम सॉफ्टवेयर वे प्रोग्राम होते हैं जो कंप्यूटर हार्डवेयर को नियंत्रित और प्रबंधित करते हैं तथा अन्य सॉफ्टवेयर के संचालन के लिए एक मंच प्रदान करते हैं। ये मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं:

  1. ऑपरेटिंग सिस्टम (OS):
    • यह उपयोगकर्ता और कंप्यूटर हार्डवेयर के बीच इंटरफेस का काम करता है।
    • इसका मुख्य कार्य कंप्यूटर के सभी संसाधनों (जैसे मेमोरी, प्रोसेसर, और इनपुट/आउटपुट डिवाइस) का आवंटन और प्रबंधन करना है।
    • उदाहरण: विंडोज, लिनक्स, एंड्रॉइड।
  2. भाषा अनुवादक (Language Translator/Processor):
    • यह एक ऐसा प्रोग्राम है जो उच्च स्तरीय भाषा (HLL) या असेम्बली भाषा में लिखे गए प्रोग्राम को कंप्यूटर द्वारा समझी जाने वाली मशीनी भाषा (‘0’ और ‘1’ – बाइनरी) में बदलता है।
    • यह अनुवाद कंप्यूटर के लिए अनिवार्य है क्योंकि कंप्यूटर केवल बाइनरी भाषा ही समझता है।
    • मुख्य प्रकार: असेम्बलर, कम्पाइलर और इंटरप्रेटर।
  3. डिवाइस ड्राइवर (Device Driver):
    • यह एक विशेष प्रोग्राम है जो कंप्यूटर से बाहरी रूप से जुड़े उपकरणों (जैसे प्रिंटर, स्कैनर, ग्राफिक्स कार्ड) को नियंत्रित करता है।
    • यह हार्डवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम के बीच अनुवादक की भूमिका निभाता है, जिससे ऑपरेटिंग सिस्टम विशिष्ट हार्डवेयर के साथ संवाद कर पाता है।
    • प्रत्येक हार्डवेयर को ठीक से काम करने के लिए अपने विशिष्ट ड्राइवर की आवश्यकता होती है।
बेसिक कंप्यूटर विज्ञान

ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System)

  • ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) एक ऐसा प्रोग्राम है जो उपयोगकर्ता और कंप्यूटर हार्डवेयर के बीच एक अंतरापृष्ठ (Interface) के रूप में कार्य करता है। 
  • यह इंटरफेस उपयोगकर्ता को हार्डवेयर संसाधनों का अत्यंत कुशलतापूर्वक उपयोग करने में सक्षम बनाता है।
बेसिक कंप्यूटर विज्ञान

ऑपरेटिंग सिस्टम यूजर इंटरफेस (User Interface – UI)

यूजर इंटरफेस कंप्यूटर सिस्टम की वह विशेषता है जो उपयोगकर्ता को सिस्टम के साथ संवाद (Interact) करने की अनुमति देती है। इसके मुख्य प्रकार इस प्रकार हैं:

इंटरफेस का नाममुख्य विशेषताएँउदाहरण
कमांड लाइन इंटरफेस (CLI)टाइप किए गए कमांड (निर्देशों) के माध्यम से संवाद। कमांड के सिंटैक्स (Syntax) का ज्ञान आवश्यक। कैरेक्टर यूजर इंटरफेस (CUI) भी कहलाता है। यह कुशल है पर कम यूजर-फ्रेंडली है।MS-DOS, लिनक्स टर्मिनल
ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (GUI)आइकॉन्स, मेनू, टास्कबार, विंडोज और पॉइंटिंग डिवाइसेस के माध्यम से संवाद। सरल, उपयोगकर्ता के अनुकूल और व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।विंडोज, मैक ओएस (macOS), एंड्रॉइड
जेस्चर-आधारित इंटरफेस (GBUI)संचालन के लिए शारीरिक हाव-भाव या संकेतों (हाथ/शरीर की गतिविधियों) का उपयोग। स्पर्श रहित (Touchless) संवाद सक्षम करता है।माइक्रोसॉफ्ट काइनेक्ट (Kinect), AR/VR सिस्टम
वॉयस-आधारित इंटरफेस (VUI)ध्वनि निर्देशों (Voice commands) के माध्यम से संवाद। हैंड्स-फ्री संचालन में सहायक।सिरी (Siri), गूगल असिस्टेंट, एलेक्सा
टच-आधारित इंटरफेस (TUI)स्क्रीन या डिवाइस के माध्यम से भौतिक स्पर्श इनपुट की आवश्यकता।टचस्क्रीन, एटीएम, स्मार्टफोन, कियोस्क, टैबलेट

ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार

  • Batch Processing OS → इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम में कई कार्यों (Jobs) को एक साथ बैच (Batch) के रूप में समूहित किया जाता है और बिना किसी उपयोगकर्ता हस्तक्षेप के क्रमिक रूप से निष्पादित किया जाता है।
  • ऑपरेटिंग सिस्टम कार्यों को प्राथमिकता और संसाधन आवश्यकताओं के आधार पर शेड्यूल करता है। उदाहरण: UNIX (बैच मोड)।
  • सिंगल-यूज़र OS → एक समय में केवल एक उपयोगकर्ता द्वारा एक ही कार्य निष्पादित किया जा सकता है। यह मुख्यतः व्यक्तिगत कंप्यूटरों में उपयोग होता है। उदाहरण → MS-DOS, Windows 9X.
  • सिंगल टास्किंग OS: यह एक समय में केवल एक प्रोग्राम को चलाने की अनुमति देता है। उदाहरण → Palm OS.
  • मल्टी-यूज़र OS → एक ही कंप्यूटर सिस्टम पर एक साथ कई उपयोगकर्ता कार्य कर सकते हैं। उदाहरण: VMS (वर्चुअल मेमोरी सिस्टम)।
  • मल्टी-टास्किंग OS → यह कई प्रक्रियाओं (Processes) को एक साथ चलाने की अनुमति देता है। CPU विभिन्न एप्लिकेशनों के बीच तेज़ी से स्विच करता है। उदाहरण → Linux, UNIX, Windows 95.
  • टाइम-शेयरिंग OS → यह कई प्रोग्रामों को एक साथ संसाधन (Resources) साझा करने देता है। प्रत्येक प्रक्रिया को CPU का एक टाइम स्लाइस (Time Slice) दिया जाता है। उदाहरण: Mac OS (क्लासिक संस्करण)
  • डिस्ट्रिब्यूटेड OS: यह कई केंद्रीय प्रोसेसरों का उपयोग करता है ताकि विभिन्न रियल टाइम एप्लिकेशनों को सेवा दी जा सके। उदाहरण → Amoeba OS, LOCUS.
  • रियल टाइम OS (RTOS) → यह सिस्टम किसी घटना पर निश्चित समय सीमा (Time Limit) के भीतर प्रतिक्रिया देता है। इसका उपयोग रक्षा, विमानन, स्वास्थ्य सेवा और औद्योगिक नियंत्रण में किया जाता है। प्रकार:
    • हार्ड रियल टाइम OS → इसमें सभी कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करना अनिवार्य होता है। उदाहरण: फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम, मिसाइल गाइडेंस सिस्टम।
    • सॉफ्ट रियल टाइम OS → समय सीमा लचीली होती है; कभी-कभी विलंब की अनुमति होती है, उदाहरण: मल्टीमीडिया सिस्टम।

ऑपरेटिंग सिस्टम के उदाहरण (Examples of Operating System)

  1. डेस्कटॉप ऑपरेटिंग सिस्टम
    1. UNIX: 1969 में केन थॉम्पसन और डेनिस रिची द्वारा विकसित किया गया।
    2. Apple Macintosh (Mac OS): स्टीव जॉब्स द्वारा 1984 में विकसित।
    3. LINUX: यह एक यूनिक्स-जैसा, ओपन-सोर्स OS है, जिसका उपयोग सर्वर और सिस्टम में व्यापक रूप से होता है।
    4. उबंटू (Ubuntu): लिनक्स पर आधारित एक ओपन-सोर्स OS है।
    5. माइक्रोसॉफ्ट विंडोज: माइक्रोसॉफ्ट द्वारा 1985 में प्रस्तुत किया गया। यह GUI (ग्राफिकल यूजर इंटरफ़ेस) आधारित OS है और पीसी (पर्सनल कंप्यूटर) पर सबसे अधिक उपयोग किया जाता है।
    6. एमएस-डॉस (माइक्रोसॉफ्ट डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम): यह माइक्रो कंप्यूटरों के लिए था। यह पहला OS था जो 1981 में IBM कॉर्पोरेशन द्वारा विकसित पीसी पर चला था।
  2. मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम
    1. एंड्रॉइड: गूगल द्वारा विकसित, यह लिनक्स कर्नेल पर आधारित है। नवीनतम स्थिर संस्करण (प्रदत्त डेटा के अनुसार): एंड्रॉइड 16 – बकलावा (जून 2025)।
    2. iOS: एप्पल इंक द्वारा विकसित, यह iPhone, iPad, और iPod Touch पर कार्य करता है।
    3. सिंबियन: सिंबियन लिमिटेड द्वारा विकसित। यह एक ओपन-सोर्स OS था, जिसका उपयोग नोकिया, सैमसंग, मोटोरोला, सोनी जैसे स्मार्टफोन्स द्वारा किया जाता था।
    4. ब्लैकबेरी OS: ब्लैकबेरी लिमिटेड द्वारा विकसित। यह सबसे सुरक्षित मोबाइल OS के रूप में जाना जाता है।

ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर (Open-Source Software – OSS)

  • यह वह सॉफ्टवेयर है जिसका स्रोत कोड (Source Code) सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होता है। यह उपयोगकर्ताओं को निम्नलिखित की अनुमति देता है:
    • सॉफ्टवेयर का उपयोग करना।
    • स्रोत कोड में संशोधन करना।
    • मूल अधिकारों के साथ इसे पुनर्वितरित करना।
  • प्रमुख उदाहरण:
    • गैर-सरकारी: लिनक्स, मोज़िला फ़ायरफ़ॉक्स, वीएलसी मीडिया प्लेयर, शुगर-सीआरएम (SugarCRM)।
    • सरकारी/भारतीय: गूगल का एंड्रॉयड, डिजीलॉकर, दीक्षा (DIKSHA), आरोग्य सेतु, कोविन (CoWIN)।
  • तुलना (क्लोज्ड सोर्स से):
    • क्लोज्ड सोर्स (Closed Source): एप्पल का iOS इसका उदाहरण है। इसमें कोड को संशोधित या रिवर्स इंजीनियर नहीं किया जा सकता।
  • ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर के लाभ (Advantages)
    • लागत प्रभावी: यह प्रोप्राइटरी (मालिकाना) सॉफ्टवेयर की तुलना में सस्ता है और उपयोगकर्ता को अधिक नियंत्रण प्रदान करता है।
    • तीव्र नवाचार: यह क्राउडसोर्सिंग की शक्ति का लाभ उठाता है, जिससे विकास और त्रुटियों का सुधार (बग फिक्सिंग) बहुत तेजी से होता है।
    • तकनीकी विकास में सहायक: यह 5G/6G, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और माइक्रोप्रोसेसरों जैसे क्षेत्रों में स्वदेशी तकनीक के विकास को बढ़ावा देता है।

इंडिया स्टैक (India Stack)

  • इंडिया स्टैक ओपन एपीआई (Application Programming Interface) पर आधारित एक डिजिटल मंच है।
  • प्रमुख घटक: आधार, यूपीआई (UPI), को-विन (CoWIN), डिजीलॉकर आदि।

भारत द्वारा विकसित स्वदेशी ऑपरेटिंग सिस्टम

ऑपरेटिंग सिस्टम

विवरण 

BharOS (भारत ऑपरेटिंग सिस्टम)

  • विकसितकर्ता: JandK Operations Pvt. Ltd. (IIT मद्रास में इनक्यूबेटेड)।
  • प्रकार: एंड्रॉयड ओपन सोर्स प्रोजेक्ट (AOSP) पर आधारित मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम।
  • उद्देश्य: सरकारी और एंटरप्राइज़ उपयोग के लिए गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • कोई डिफ़ॉल्ट ऐप्स नहीं (उपयोगकर्ता ऐप पारिस्थितिकी तंत्र को नियंत्रित करता है)
    • PASS (प्राइवेट ऐप स्टोर सर्विसेज)
    • नेटिव OTA (ओवर-द-एयर) अपडेट्स
    • रूट ऑफ ट्रस्ट और चेन ऑफ ट्रस्ट प्रोटोकॉल के माध्यम से सुरक्षा।

BOSS (भारत ऑपरेटिंग सिस्टम सॉल्यूशंस)

  • विकसितकर्ता: नेशनल रिसोर्स सेंटर फॉर फ्री/ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर (NRCFOSS), CDAC
  • प्रकार: सरकार और शैक्षणिक संस्थानों के लिए लिनक्स-आधारित डेस्कटॉप OS
  • उद्देश्य: भारत में ओपन-सोर्स को बढ़ावा देना।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • बहुभाषी समर्थन (हिन्दी, तमिल और अन्य भारतीय भाषाएँ)।
    • कई संस्करण जारी किए गए; नवीनतम में GNOME, LibreOffice आदि शामिल।
    • उपयोग: ई-गवर्नेंस, स्कूल लैब और सार्वजनिक क्षेत्र के कार्यालयों में उपयोग।

माया OS (Maya OS)

  • विकसितकर्ता: रक्षा मंत्रालय → रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO), सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC), नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC)।
  • प्रकार: रक्षा और रणनीतिक उपयोग के लिए ओपन-सोर्स उबंटू (लिनक्स)-आधारित सुरक्षित OS
  • उद्देश्य: संवेदनशील रक्षा प्रणालियों में विंडोज को प्रतिस्थापित करना। महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और सरकारी एजेंसियों को लक्षित करने वाले साइबर अपराधियों द्वारा साइबर सुरक्षा खतरों और मैलवेयर हमलों को रोकना
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • सुरक्षा: एप्लिकेशन का सैंडबॉक्सिंग, साइबर लचीलापन के लिए जीरो-ट्रस्ट आर्किटेक्चर
    • “चक्रव्यूह” सुरक्षा परत → उन्नत एंडपॉइंट डिटेक्शन और प्रोटेक्शन।एंटी-मैलवेयर + एंटीवायरस के रूप में कार्य करता है।उपयोगकर्ता और इंटरनेट के बीच एक आभासी बफर बनाता है ताकि हैकिंग प्रयासों को रोका जा सके।

भाषा अनुवादक (Language Translators)

प्रोग्रामिंग भाषा (Programming Languages)

  • प्रोग्रामिंग भाषाओं को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है: निम्न-स्तरीय भाषाएँ और उच्च-स्तरीय भाषाएँ
  • निम्न-स्तरीय भाषाएँ (Low Level Languages)
    • ये भाषाएँ मानव-समान भाषाओं की तुलना में मशीन कोड (Machine Code) के अधिक निकट होती हैं। इन्हें मनुष्यों द्वारा समझना कठिन होता है, लेकिन मशीनों द्वारा आसानी से समझा जा सकता है। इसके मुख्य प्रकार हैं:
      • मशीनी भाषा (Machine Language):
        • इसे बाइनरी भाषा भी कहते हैं।
        • यह ‘0’ और ‘1’ के संयोजन पर आधारित होती है, जो बुलियन बीजगणित पर निर्भर करता है।
      • असेम्बली भाषा (Assembly Language):
        • इसमें बाइनरी कोड के बजाय, नेमोनिक्स (Mnemonics) या कीवर्ड्स (जैसे- ADD, SUB, STR, आदि) का प्रयोग किया जाता है।
  • उच्च-स्तरीय भाषाएँ (High-Level Languages)
    •  दूसरी ओर, मनुष्य उच्च-स्तरीय भाषाओं (जैसे C, C++, Java, Python) को आसानी से समझ सकते हैं। लेकिन कंप्यूटर को इन उच्च-स्तरीय भाषाओं को निम्न-स्तरीय भाषाओं (मशीनी भाषा) में बदलने के लिए भाषा अनुवादकों की आवश्यकता होती है, जिसे वह समझ सके।
FORTRANफॉर्मूला ट्रांसलेशन – 1957 में IBM द्वारा
ALGOLएल्गोरिदमिक लैंग्वेज
LISPलिस्ट प्रोसेसिंग – कृत्रिम बुद्धिमत्ता में उपयोग
COBOLकॉमन बिजनेस ओरिएंटेड लैंग्वेज
BASICबिगिनर्स ऑल पर्पज़ सिंबोलिक इंस्ट्रक्शन कोड – शैक्षिक उद्देश्य के लिए
Pascalशिक्षा और सॉफ्टवेयर विकास में उपयोग
C & C+सिस्टम प्रोग्रामिंग के लिए
Javaइंटरनेट आधारित प्रोग्रामिंग के लिए
Pythonसरल, बहुउद्देशीय आधुनिक भाषा

भाषा अनुवादक (Language Translators)

  • भाषा अनुवादक (या भाषा संसाधक) वह सॉफ्टवेयर या प्रोग्राम होते हैं जो एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद करते हैं।
  • इनका मुख्य कार्य उच्च-स्तरीय भाषा (HLL) या असेम्बली भाषा में लिखे गए प्रोग्राम को मशीनी भाषा में बदलना होता है।
  • भाषा अनुवादकों को मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है: कंपाइलर, इंटरप्रेटर और असेम्बलर
    • कंपाइलर (Compiler):
      • यह एक सिस्टम प्रोग्राम है।
      • यह उच्च-स्तरीय भाषा में लिखे गए पूरे प्रोग्राम को एक साथ उसके समकक्ष मशीनी भाषा (जिसे ऑब्जेक्ट कोड कहते हैं) में अनुवादित करता है।
    • इंटरप्रेटर (Interpreter):
      • यह उच्च-स्तरीय भाषा (HLL) के प्रोग्राम को एक बार में केवल एक पंक्ति अनुवादित करता है।
      • अनुवाद के बाद, यदि कोई त्रुटि न हो तो यह उस पंक्ति को तुरंत निष्पादित (Execute) करता है।
    • असेम्बलर (Assembler):
      • यह एक सिस्टम प्रोग्राम है।
      • यह असेम्बली भाषा में लिखे गए प्रोग्राम को होस्ट कंप्यूटर की मशीनी भाषा में परिवर्तित करता है।
  • एन्कोडिंग स्कीम्स वे विधियाँ हैं जिनका उपयोग डेटा (टेक्स्ट, चित्र, ऑडियो आदि) को कंप्यूटर द्वारा भंडारण, संचरण या प्रसंस्करण के लिए उपयुक्त प्रारूप में बदलने के लिए किया जाता है।
  • प्रक्रिया: यह मानव-पठनीय डेटा (Human-readable data) को मशीन-समझने योग्य बाइनरी रूप में परिवर्तित करने की एक प्रक्रिया है।
  • सिद्धांत: प्रत्येक वर्ण (अक्षर, संख्या, प्रतीक) को एक अद्वितीय संख्यात्मक कोड आवंटित किया जाता है।
  • प्रचलित स्कीम्स: ASCII, ISCII, और यूनिकोड (Unicode)।

स्कीम

विवरण

ASCII

  • अमेरिकन स्टैंडर्ड कोड फॉर इन्फॉर्मेशन इंटरचेंज।
  • विकसितकर्ता: अमेरिकन स्टैंडर्ड्स एसोसिएशन,
  • USA।कंप्यूटरों में पाठ्य जानकारी को निरूपित करने के लिए उपयोग।
  • बिट साइज़: 7-बिट
  • कैरेक्टर समर्थन: 27 = 128 कैरेक्टर (केवल अंग्रेजी)।
  • उपयोग: पुराने सिस्टम, मूल पाठ।

Extended ASCII

  • बिट साइज़: 8-बिट
  • कैरेक्टर समर्थन: 28 = 256 कैरेक्टर।
  • उपयोग: DOS, प्रारंभिक विंडोज।

ISCII

  • इंडियन स्क्रिप्ट कोड फॉर इन्फॉर्मेशन इंटरचेंज।
  • विकसितकर्ता: ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स,
  • भारत।ASCII कोड का विस्तारित संस्करण।
  • बिट साइज़: 8-बिट
  • भारतीय लिपियाँ (हिंदी, तमिल आदि)
  • उपयोग: पुरानी भारतीय कंप्यूटिंग प्रणालियाँ।

यूनिकोड – Unicode (UTF-16)

  • विकसितकर्ता: यूनिकोड कंसोर्टियम (गैर-लाभकारी संगठन)।
  • बिट साइज़: 16-बिट। (मूल यूनिकोड डिज़ाइन)
  • कैरेक्टर समर्थन: बहुभाषी समर्थन, इमोजी आदि।
  • उपयोग: विंडोज, XML।

Unicode (UTF-8)

  • बिट आकार: परिवर्तनीय (8–32 बिट) 
  • अक्षर समर्थन: सभी भाषाओं और प्रतीकों के लिए सार्वभौमिक एन्कोडिंग 
  • उपयोग: वेब, बहुभाषीय ऐप्स 

UTF-32

  • बिट आकार: 32-बिट 
  • अक्षर समर्थन: निश्चित-लंबाई एन्कोडिंग 
  • उपयोग: आंतरिक प्रोसेसिंग

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