वायु व नौसेना रक्षा प्रणाली

वायु व नौसेना रक्षा प्रणाली विज्ञान और प्रौद्योगिकी का एक महत्वपूर्ण विषय है, जो वायु और समुद्री मार्गों से होने वाले खतरों से राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। इसमें मिसाइल प्रणाली, रडार, निगरानी तकनीक तथा नौसेना की रक्षा क्षमताओं का अध्ययन शामिल है। इस विषय के अंतर्गत हम विभिन्न वायु एवं नौसेना रक्षा प्रणालियों, उनके कार्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा में उनकी भूमिका का अध्ययन करेंगे।

मिसाइल रक्षा प्रणाली क्या है?

  • मिसाइल रक्षा प्रणाली (Missile Defence Systems): ये ऐसी प्रणालियाँ हैं जो दुश्मन की ओर से आने वाली मिसाइलों (बैलिस्टिक, क्रूज, हवा से लॉन्च की गई) का उनके लक्ष्य तक पहुँचने से पहले ही पता लगाने (Detect), अनुसरण करने (Track), बीच में रोकने (Intercept)और नष्ट करने (Destroy) का कार्य करती हैं।
  • भारत की वायु रक्षा प्रणाली: भारत ने अपने हवाई क्षेत्र को शत्रुतापूर्ण खतरों से बचाने के लिए एक बहु-स्तरीय वायु रक्षा नेटवर्क (Multi-layered Air Defence Network) विकसित किया है।

भारत का बहु-स्तरीय वायु रक्षा नेटवर्क

भारत का वायु रक्षा तंत्र मारक क्षमता (Range) और ऊँचाई (Altitude) के आधार पर विभिन्न स्तरों में विभाजित है:

  1. बाहरी कवच: बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (BMD): DRDO द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित इस प्रणाली में दो ‘इंटरसेप्टर’ (अवरोधक) प्रणालियाँ शामिल हैं:
    • पृथ्वी एयर डिफेंस (PAD): लंबी दूरी की मिसाइलों को वायुमंडल के बाहर (Exo-atmospheric) रोकने के लिए ‘प्रद्युम्न’ मिसाइलों का उपयोग (ऊँचाई: 50-80 किमी)।
    • एडवांस्ड एयर डिफेंस (AAD): कम ऊँचाई पर वायुमंडल के भीतर (Endo-atmospheric) अवरोधन के लिए ‘अश्विन’ मिसाइलों का उपयोग (ऊँचाई: 15-30 किमी)। 
    • नोट: भारत अमेरिका, रूस और इज़राइल के बाद कार्यशील BMD प्रणाली वाला दुनिया का चौथा देश है।
  2. लंबी दूरी की वायु रक्षा (Long-Range Air Defence): मुख्य रूप से रूस से आयातित S-400 ट्रम्फ प्रणाली का उपयोग किया जाता है। इसकी मारक क्षमता 400 किमी तक है और यह विभिन्न हवाई लक्ष्यों को नष्ट करने में सक्षम है।
  3. मध्यम दूरी की वायु रक्षा (Medium-Range Air Defence):
    • MRSAM (मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल)/बराक-8: इसे भारत (DRDO) और इजरायल (IAI) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है। यह 70-100 किमी की सीमा में 360-डिग्री सुरक्षा प्रदान करती है।
    • आकाश-NG (Akash-NG): अगली पीढ़ी की आकाश मिसाइल।
  4. कम दूरी की वायु रक्षा (Short-Range Air Defence):
    • आकाश मिसाइल प्रणाली: 100% स्वदेशी, मारक क्षमता 25-30 किमी (आकाश-NG संस्करण 80 किमी तक)। यह ‘राजेंद्र’ रडार का उपयोग करती है।
    • स्पाइडर (SPYDER): इजराइल से आयातित त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली (QRSAM), जो 15 किमी के भीतर कम ऊँचाई वाले खतरों को रोकती है।
    • समर (SAMAR): भारतीय वायु सेना द्वारा किया गया एक स्वदेशी नवाचार, जिसमें पुरानी रूसी ‘हवा से हवा’ में मार करने वाली मिसाइलों को सतह से लॉन्च करने के लिए पुन: तैयार किया गया है।
  5. अत्यंत कम दूरी की वायु रक्षा (VSHORAD): यह सुरक्षा की अंतिम पंक्ति है, जिसमें अक्सर मैन-पोर्टेबल एयर-डिफेंस सिस्टम (MANPADS) का उपयोग होता है।
    • वर्तमान में रूस से आयातित इगला-एस (Igla-S) का उपयोग किया जा रहा है (क्षमता: 6 किमी तक)।
    • DRDO पुराने सिस्टम को प्रतिस्थापित करने के लिए स्वदेशी VSHORADS विकसित कर रहा है।

विशेष अपडेट (August 2025): DRDO ने ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के तहत एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली (IADWS) का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया।

आकाशतीर – भारत की स्वदेशी स्वचालित वायु रक्षा प्रणाली
  • यह भारतीय सेना के लिए विकसित की गई एक स्वदेशी, स्वचालित वायु रक्षा नियंत्रण और रिपोर्टिंग प्रणाली है।
  • विकासकर्ता: भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL)
  • यह भारत की C4ISR संरचना (कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशंस, कम्प्यूटर्स, इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकोनिसेंस) का हिस्सा है।
  • प्रमुख विशेषताएँ:
    • कार्य: हवाई खतरों (विमान, ड्रोन, मिसाइल) का पता लगाना, ट्रैक करना और उन्हें निष्क्रिय करना।
    • प्रौद्योगिकी: कई रडार प्रणालियों का एकीकरण (जैसे REPORTER, 3D टैक्टिकल रडार और आकाश वेपन सिस्टम रडार)।
    • गतिशीलता: वाहन-आधारित प्रणाली, जिसे सक्रिय युद्ध क्षेत्रों में तैनात किया जा सकता है।
    • एकीकरण: वायु सेना की IACCS प्रणाली और नौसेना की त्रिगुण (TRIGUN) प्रणाली से सहज रूप से जुड़ती है।
  • हालिया उपयोग: मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान से आए मिसाइल/ड्रोन हमलों को निष्क्रिय करने में सफलतापूर्वक उपयोग किया गया।
प्रोजेक्ट कुशा (Project Kusha)
  • लक्ष्य: 2028-29 तक एक लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली (रूस के S-400 के समकक्ष) तैनात करना।
  • उद्देश्य: भारत की अपनी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (LR-SAM) विकसित करना।
  • विकास: यह DRDO की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है।
  • उपनाम: इसे ‘देसी S-400’ के रूप में भी जाना जा रहा है।
  • मारक क्षमता (Range): लगभग 400 किमी।
  • कार्यप्रणाली: यह LR-SAM एक त्रि-स्तरीय (150 किमी, 250 किमी और 350 किमी) लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली है, जो सतह से दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है।
VSHORADS (अत्यंत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली)
  • यह एक मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (MANPADS) है जिसे DRDO द्वारा विकसित किया गया है।
  • यह कम ऊँचाई पर उड़ने वाले हवाई खतरों (जैसे हेलीकॉप्टर, मानव रहित हवाई वाहन – UAVs) के विरुद्ध भारत की रक्षा क्षमता को बढ़ाता है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • प्रकार: अल्प-दूरी की, हल्के वजन वाली और वहन योग्य (Portable) सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल।
    • मारक क्षमता (Range): 8 किमी तक।

वैश्विक वायु रक्षा प्रणालियाँ (Global Air Defence Systems)

1. S-400 ट्रायम्फ (SA-21 ग्राउलर)

  1. यह एक मोबाइल, लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली (SAM) मिसाइल प्रणाली है।
  2. विकासकर्ता: रूस (अल्माज़ सेंट्रल डिज़ाइन ब्यूरो) द्वारा।
  3. उपनाम: भारतीय सेना में इसे ‘सुदर्शन चक्र’ कहा जाता है – जो भगवान विष्णु के दिव्य अस्त्र के समान तीव्र, सटीक और शक्तिशाली विनाश का प्रतीक है।
  4. प्रमुख विशेषताएँ
    1. रेंज: 400 किमी तक
    2. ऊँचाई: 30 किमी तक
    3. मल्टी-टारगेट क्षमता: एक साथ 36 लक्ष्यों को भेदने में सक्षम।
    4. मिसाइल प्रकार: यह स्तरीय रक्षा के लिए 4 अलग-अलग प्रकार की मिसाइलों का समर्थन करती है।
    5. लक्ष्य: विमान, मानव रहित हवाई वाहन (UAVs), क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल।
  5. भारत-रूस समझौता: भारत ने 2018 में 5.43 बिलियन डॉलर के अनुबंध के तहत 5 इकाइयाँ प्राप्त करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

2. नेशनल एडवांस्ड सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम (NASAMS-II)

  1. यह अमेरिका द्वारा विकसित एक सतह से हवा में मार करने वाली भूमि-आधारित वायु रक्षा प्रणाली है। 
  2. उद्देश्य: इसे क्रूज मिसाइलों, विमानों और ड्रोनों (UAVs) जैसे हवाई खतरों का मुकाबला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  3. यह भारत की मौजूदा रूसी (पेचोरा) और इज़राइली (स्पाइडर) रक्षा प्रणालियों के पूरक के रूप में कार्य करेगी।

3. थाड (THAAD – टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस)

  1. यह अल्प, मध्यम और मध्यवर्ती दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के विरुद्ध एक अत्यधिक प्रभावी और युद्ध-सिद्ध (Combat-proven) अमेरिकी रक्षा प्रणाली है।
  2. इसे अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन द्वारा डिज़ाइन और निर्मित किया गया है।
  3. यह एकमात्र अमेरिकी प्रणाली है जिसे वायुमंडल के भीतर (Endo-atmospheric) और वायुमंडल के बाहर (Exo-atmospheric) दोनों ही स्थितियों में लक्ष्यों को बीच में रोकने (अवरोधन) के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  4. अंतःसंक्रियता (Interoperability): यह अन्य बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों के साथ मिलकर कार्य करने में सक्षम है।
  5. गतिशीलता: यह अत्यधिक गतिशील (Highly mobile) है और इसे दुनिया भर में कहीं भी तैनात किया जा सकता है।
वायु व नौसेना रक्षा प्रणाली

4. HQ – 9 (Hong Qi 9 – होंग क्वी 9)

  1. लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली रक्षा मिसाइल।
  2. विकास: इसे चीन द्वारा विकसित किया गया है।
  3. मारक क्षमता (Range): 200 किमी।

5. आयरन डोम (Iron Dome)

6. यह इज़राइल की सतह से हवा में मार करने वाली एक अल्प-दूरी (70 किमी) की रक्षा प्रणाली है।

7. कार्यप्रणाली: इसमें रडार और अवरोधक मिसाइलें शामिल हैं जो किसी भी रॉकेट या मिसाइल का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम हैं।

8. विकास: इसे इजरायल की ‘राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स’ और ‘इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज’ द्वारा विकसित किया गया है।

  1. पैट्रियट (Patriot): अमेरिका की प्रमुख वायु रक्षा प्रणाली।
  2. MEADS (मीड्स): ‘मध्यम वायु रक्षा प्रणाली’, जिसे अमेरिका, जर्मनी और इटली ने मिलकर विकसित किया है।
  3. बराक-8 (Barak 8): इजराइल और भारत (DRDO) का संयुक्त उपक्रम।

9. गोल्डन डोम (Golden Dome)

  1. अमेरिकी राष्ट्रपति ने इजराइल के ‘आयरन डोम’ से प्रेरित होकर संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए 175 बिलियन डॉलर के ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल रक्षा कवच की घोषणा की है।
  2. संरचना: यह एक भूमि और अंतरिक्ष-आधारित बहु-स्तरीय (Multi-layered) मिसाइल रक्षा प्रणाली है।
  3. उद्देश्य: अमेरिका को लंबी दूरी की और अंतरिक्ष से प्रक्षेपित मिसाइलों से सुरक्षित रखना।
  4. एकीकरण: यह मौजूदा प्रणालियों – पैट्रियट, थाड (THAAD), एजिस (Aegis BMD) और GMD के साथ एकीकृत होकर कार्य करेगी।

भारत के महत्वपूर्ण टैंक

  1. विजयंत (Vijayanta)
    • यह भारतीय सेना का पहला स्वदेशी मुख्य युद्धक टैंक (Main Battle Tank) था।
    • रिचालन सीमा (Operational range): 530 किमी।
    • उत्पादन: इसका उत्पादन अवाडी (तमिलनाडु) स्थित भारी वाहन कारखाना में किया गया था।
  2. भीष्म (T-90)
    • यह रूसी T-90S टैंकों का भारतीय परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलित संस्करण है, जिसका निर्माण भारत में (भारी वाहन कारखाना, अवाडी, चेन्नई द्वारा) किया गया है।
    • मारक क्षमता (Range): 5 किमी तक।
  3. अजेय (T-72)
    • यह रूसी T-72MI टैंकों का भारतीय अनुकूलित संस्करण है, जिसे भारत में आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड द्वारा निर्मित किया गया है।
  4. अर्जुन MBT (मुख्य युद्धक टैंक)
    • यह भारत का पूरी तरह से स्वदेशी मुख्य युद्धक टैंक (MBT) है।
    • विकास: DRDO द्वारा ‘अर्जुन MBT प्रोजेक्ट’ के तहत विकसित (शुरुआत: 1972)।
    • विशेषताएँ: अत्याधुनिक तकनीक, उत्कृष्ट मारक क्षमता, उच्च गतिशीलता, शानदार सुरक्षा कवच। 
    • शस्त्रागार: स्वदेशी रूप से विकसित 120 मिमी की मुख्य राइफल गन और FSAPDS (फिन स्टेबलाइज्ड आर्मर-पियर्सिंग डिस्कर्डिंग सेबोट) गोला-बारूद। 
प्रोजेक्ट जोरावर (Project Zorawar) – भारतीय हल्का टैंक
  • उद्देश्य: स्वदेशी लाइट टैंक का विकास करना, जो विविध इलाकों, विशेषकर उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तेजी से तैनाती हेतु सक्षम हो।
  • विकास: DRDO और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) द्वारा।
  • वजन: लगभग 25 टन।
  • क्षमता: वायु-परिवहन योग्य, उच्च कोण से फायरिंग, सीमित आर्टिलरी भूमिका → सामरिक और परिचालन गतिशीलता को बढ़ाता है।
  • नामकरण: इसका नाम जोरावर सिंह कहलुरिया के नाम पर रखा गया है, जो जम्मू के राजा गुलाब सिंह के अधीन 19वीं सदी के डोगरा जनरल थे। उन्हें “लद्दाख के विजेता” के रूप में जाना जाता है।
  • रणनीतिक संदर्भ: यह टैंक चीन के टाइप-15 लाइट टैंकों का मुकाबला करने के लिए विकसित किया गया है, विशेष रूप से लद्दाख जैसे उच्च ऊँचाई वाले क्षेत्रों में।

असॉल्ट राइफलें

  1. भारत की स्वदेशी असॉल्ट राइफलें
    1. इन्सास (INSAS): ‘इंडियन नेशनल स्मॉल आर्म्स सिस्टम’
    2. MCIWS: ‘मल्टी कैलिबर इंडिविजुअल वेपन सिस्टम’।
    3. उग्रम (Ugram) असॉल्ट राइफल
      1. प्रकार: सशस्त्र बलों, अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस के लिए विकसित स्वदेशी असॉल्ट राइफल
      2. विकास: इसे DRDO की शस्त्रागार अनुसंधान एवं विकास स्थापना (ARDE) और द्विपा आर्मर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (हैदराबाद) द्वारा विकसित किया गया है।
      3. उद्देश्य: भारतीय सशस्त्र बलों में सेवा दे रही पुरानी हो चुकी इन्सास (INSAS) राइफल्स को प्रतिस्थापित करना।
    4. धनुष तोप (Dhanush Artillery Gun)
      1. यह 1980 के दशक में आयात की गई स्वीडिश बोफोर्स तोप का स्वदेशी रूप से उन्नत संस्करण है।
      2. मारक क्षमता (Range): 36-38 किमी (लंबी दूरी)।
      3. विशेषता: इसे ‘देसी बोफोर्स’ भी कहा जाता है और यह पूर्णतः कंप्यूटरीकृत है।
  2. विदेशी असाल्ट राइफलें
    1. हेकलर एंड कोच G36 (Heckler & Koch G36): इन असाल्ट राइफलों का निर्माण जर्मनी में किया जाता है।
    2. T91: यह ‘गैस-ऑपरेटेड’ और ‘मैगजीन-फेड’ असाल्ट राइफल है, जिसका उत्पादन चीन गणराज्य (ताइवान) के राष्ट्रीय रक्षा विभाग द्वारा किया जाता है।
    3. टिक्का T3x (Tikka T3x): यह फिनलैंड की ‘साको’ (Sako) कंपनी द्वारा निर्मित एक ‘बोल्ट-एक्शन’ राइफल श्रृंखला है।

अन्य प्रमुख आयुध प्रणालियाँ (Other Ammunitions)

K9 वज्र (K9 Vajra)
  • यह एक 155 मिमी, 52-कैलिबर वाली ‘ट्रैक्ड सेल्फ-प्रोपेलड होवित्जर’ है।
  • यह भारत के लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और दक्षिण कोरिया के हनवा डिफेंस का एक संयुक्त उद्यम है, जो दक्षिण कोरियाई ‘K9 थंडर’ पर आधारित है।
  • K9 गन को रक्षा खरीद प्रक्रिया के ‘बाय ग्लोबल’ कार्यक्रम के तहत विकसित और अधिग्रहित किया गया है।
M 777 होवित्जर (M 777 Howitzer)
  • ये अति-हल्की (Ultra-light) होवित्जर तोपें हैं जिन्हें अमेरिका से प्राप्त किया गया है।
  • मारक क्षमता (Range): 30 किमी।
लॉन्ग-रेंज ग्लाइड बम ‘गौरव’
  • प्रकार: लंबी दूरी तक वार करने वाला सटीक-निर्देशित बम
  • विकासकर्ता: DRDO (अनुसंधान केंद्र इमारत, हैदराबाद, आयुध अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान, पुणे और एकीकृत परीक्षण रेंज, चांदीपुर के सहयोग से)
  • उद्योग भागीदार: अडानी डिफेंस, भारत फोर्ज, MSMEs।
  • उद्देश्य:
    • स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक द्वारा उच्च-मूल्य वाले लक्ष्यों को नष्ट करना और लॉन्च प्लेटफ़ॉर्म की सुरक्षा सुनिश्चित करना;
    • दुश्मन की वायु रक्षा क्षेत्रों से बचाव।
  • परीक्षण प्लेटफॉर्म: Su-30MKI से।
  • रेंज: 30–150 किमी (प्रदर्शित – लगभग 100 किमी)।
  • वज़न: गौरव – विंग्ड (पंखों वाला), 1000 किलोग्राम।
  • मार्गदर्शन प्रणाली: इनर्शियल नेविगेशन + सैटेलाइट + डिजिटल कंट्रोल।
  • महत्त्व: स्वदेशी स्मार्ट शस्त्र क्षमता (गोला-बारूद) को बढ़ावा देता है, स्पाइस-2000 और SAAW का पूरक।
लॉन्ग-रेंज ग्लाइड बम ‘गौतम’
  • प्रकार: नॉन-विंग्ड (बिना पंखों वाला), 550 किलोग्राम का ग्लाइड बम।
  • दूरी: प्रारंभिक दूरी 30 किमी और भविष्य में इसे 100 किमी तक बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

लड़ाकू विमान (Fighter Jets)

जनरेशन

विवरण

1st जनरेशन

  • 1940-50
  • मिग 15, मिस्टेयर-IV

2nd जनरेशन

  • 1950-60
  • मिग-21 (रूस)
  • इनमें रात्रि में उड़ान भरने की क्षमता का अभाव था।

3rd जनरेशन

  • 1960-70
  • रडार और नाइट विजन तकनीक का समावेश
  • मिग-25 (रूस), मिराज (फ्रांस)

4th जनरेशन

  • 1970-80
  • ‘फ्लाई-बाय-वायर’ (ऑटो पायलट) विमान
  • बहु-उद्देश्यीय (Multirole) क्षमता
  • तेजस LCA (स्वदेशी)
    • सुपरसोनिक, एकल-सीट, एकल-इंजन मल्टीरोल लाइट फाइटर विमान
  • अन्य: मिग-29, मिराज-2000, F-16 (यूएसए)

4.5th जनरेशन 

  • 1990 के बाद
  • सुखोई-30 MKI (भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित)
  • राफेल
    • ट्विन-इंजन, मीडियम मल्टी-रोल कॉम्बैट विमान
    • फ्रांस की दसॉल्ट (Dassault) कंपनी से 36 विमान आयातित।
    • भारत और फ्रांस ने भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल-मरीन विमान (22 सिंगल-सीटर और चार ट्विन-सीटर) की खरीद के लिए एक अंतर-सरकारी समझौते (IGA) पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • F-18 (यूएसए)
  • टाइफून (ईयू – यूरोफाइटर)

5th जनरेशन

  • स्टील्थ तकनीक (रडार की पकड़ में न आने वाली तकनीक)।
  • भारत: AMCA (उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान – निर्माणाधीन)।
  • अमेरिका – रैप्टर (F-22), लाइटनिंग-II (F-35)।
  • रूस – सुखोई Su-57
  • चीन: चेंगदू J-20, शेनयांग FC-31।
उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (AMCA)
  • भारत का पाँचवीं पीढ़ी का बहु-उद्देश्यीय (Multirole), मध्यम वजन वाला, द्वि-इंजन (Twin-engine) युक्त लड़ाकू विमान।
  • अभिकल्पना एवं विकास (नोडल एजेंसी): वैमानिकी विकास एजेंसी (ADA), DRDO के अधीन।
  • विनिर्माण: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL)।
  • मुख्य विशेषता: उन्नत स्टील्थ (Stealth) विशेषताएं (जैसे ‘रडार अवशोषक सामग्री’), जो इसे दुश्मन के रडार की पकड़ में आने से बचाती हैं।
    • रणनीतिक भूमिका: स्टील्थ क्षमता के कारण दुश्मन की वायु रक्षा को दबाने (SEAD), नष्ट करने (DEAD) और सटीक प्रहार करने में सक्षम।
हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर (LCH)

LCH को विशेष रूप से उच्च तुंगता (High-altitude) वाली स्थितियों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसे लद्दाख जैसे क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा, जो इसे पर्वतीय युद्धनीति (Mountain warfare) के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाता है।

LCH प्रचंड (LCH Prachand)
  • यह भारत का पहला स्वदेशी बहु-उद्देश्यीय लड़ाकू हेलीकॉप्टर है, जो ‘हवा से जमीन’ और ‘हवा से हवा’ दोनों प्रकार के युद्ध में सक्षम है।
  • इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा विकसित किया गया है।
  • मारक क्षमता (Range): 700 किमी।
  • द्वितीय विशेषता: LCH दुनिया का एकमात्र ऐसा लड़ाकू हेलीकॉप्टर है जो 5,000 मीटर की ऊँचाई पर हथियारों और ईंधन के भारी भार के साथ उतर (Land) और उड़ान भर (Take off) सकता है।
  • तकनीकी आधार: यह क्षमता द्वि-इंजन वाले HAL-टर्बोमेका ‘शक्ति’ (Shakti) इंजनों (फ्रांसीसी मूल के) द्वारा संभव हुई है, जिन्हें विशेष रूप से उच्च तुंगता वाले प्रदर्शन के लिए अनुकूलित किया गया है। इसका हल्का और ‘एयरोडायनामिक’ डिजाइन भी इसमें सहायक है।
  • LCH परियोजना को 2006 में मंजूरी दी गई थी और 2013 में भारतीय सेना इसमें शामिल हुई थी।
MH-60R (रोमियो) सीहॉक हेलीकॉप्टर
  • प्रकार: यह एक उन्नत समुद्री बहु-मिशन हेलीकॉप्टर है।
  • भूमिका: पनडुब्बी-रोधी युद्ध (ASW), सतह-रोधी युद्ध (ASuW), खोज और बचाव (SAR), निगरानी और रसद।
  • निर्माता: लॉकहीड मार्टिन – सिकोर्स्की।
  • इसे ‘फॉरेन मिलिट्री सेल्स’ (FMS) के तहत अमेरिकी नौसेना द्वारा भारतीय नौसेना को आपूर्ति की गई है।
  • परिनियोजन: यह फ्रिगेट, विध्वंसक, क्रूजर और विमान वाहक पोतों से संचालित होता है।
  • क्षमता: यह दिन-रात और सभी मौसमों में संचालन के लिए सक्षम है।
  • महत्व
    • यह लंबी दूरी की समुद्री निगरानी और प्रहार क्षमता को बढ़ाता है।
    • यह हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में आधुनिक पनडुब्बियों के विरुद्ध भारतीय नौसेना की ASW क्षमताओं को सुदृढ़ करता है।
  • Current Update: मार्च 2024 में कोच्चि के INS गरुड़नौसैनिक हवाई स्टेशन पर MH-60R सीहॉक हेलिकॉप्टरों के पहले स्क्वाड्रन ‘INAS 334’ को सेवा में शामिल किया गया।
अपाचे हेलीकॉप्टर (Apache Helicopters)
  • यह लेज़र-निर्देशित ‘हेलफायर’ मिसाइलों से लैस है।
  • विशेषता: यह AH-64 प्लेटफॉर्म का आधुनिक संस्करण है।
  • क्षमता: इसकी सटीक प्रहार क्षमता और ‘स्टैंड ऑफ रेंज’ (सुरक्षित दूरी से हमला) इसे दुश्मन के हवाई क्षेत्र और जमीनी खतरों के बीच प्रभावी बनाती है।
  • विकास: इसे बोइंग डिफेंस (USA) द्वारा विकसित किया गया है।
हल्का उपयोगिता हेलीकॉप्टर (Light Utility Helicopter – LUH)
  • श्रेणी: यह तीन-टन श्रेणी का नई पीढ़ी का, एकल इंजन वाला स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया हेलीकॉप्टर है।
  • परिचालन ऊँचाई: यह समुद्र तल से 20,000 फीट की ऊँचाई पर कार्य कर सकता है।
  • भूमिका: यह एक बार में 6 यात्रियों को ले जा सकता है और परिवहन, सैन्य टुकड़ियों की आवाजाही तथा नागरिक संचालन जैसी बहु-भूमिकाएँ निभा सकता है।
  • गति एवं भार: अधिकतम गति 240 किमी/घंटा और अधिकतम उड़ान वजन 3150 किग्रा है।
HAL चेतक, चीता, ध्रुव और चीतल 
  • कार्य: ये दुर्गम और अगम्य क्षेत्रों में भारतीय सेना को रसद सहायता प्रदान करते हैं।
  • विकास: इनका विकास हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा किया गया है।
HAL रुद्र (HAL Rudra) 
  • संरचना: यह ट्विन-इंजन वाला हेलीकॉप्टर है।
  • उद्देश्य: इसे जमीनी बलों को ‘निकट हवाई सहायता’ (Close air support) प्रदान करने और सैन्य कर्मियों के परिवहन के लिए डिज़ाइन किया गया है।
चिनूक हेलीकॉप्टर (Chinook Helicopter)
  • इसे ‘फॉरेन मिलिट्री सेल्स’ (FMS) कार्यक्रम के तहत अमेरिका से प्राप्त किया गया है।
  • यह भारतीय वायु सेना के पुराने Mi-26 भारी-वजन ढोने वाले हेलीकॉप्टरों का स्थान लेगा।
  • महत्व: यह तोपखाने (जैसे M777 होवित्जर), हल्के बख्तरबंद वाहनों, सैनिकों और आपूर्ति को हिमालय के कठिन पर्वतीय क्षेत्रों तक ले जाने (Airlift) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
हवा से हवा में ईंधन भरना (Air-to-Air Refuelling)
  • यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें ईंधन को एक विमान (टैंकर) से दूसरे विमान में हवा के मध्य (Mid-air) स्थानांतरित किया जाता है।
  • लाभ: यह परिचालन सीमा, मिशन लचीलापन और युद्धक क्षमता को बढ़ाता है।
  • प्रमुख विमान: इल्यूशिन Il-78 (रूसी मूल) भारतीय वायु सेना का समर्पित ‘हवा से हवा में ईंधन भरने वाला’ विमान है। 
  • नाटो नाम: मिडास (Midas)।
  • भविष्य की योजनाएं: भारत आधुनिक बहु-भूमिका वाले टैंकरों के रूप में Airbus A330 MRTT और Boeing KC-46 Pegasus के विकल्पों पर विचार कर रहा है।
हंसा-3 NG विमान (Hansa-3 NG)
  • हंसा-3 NG भारत का पहला स्वदेशी, उत्पादन के लिए तैयार ‘पायलट प्रशिक्षक विमान’ है।
  • प्रकार: दो सीटों वाला, अगली पीढ़ी का प्रशिक्षक विमान।
  • उद्देश्य: इसे ‘निजी पायलट लाइसेंस’ (PPL) और ‘वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस’ (CPL) के लिए पायलटों को प्रशिक्षित करने हेतु डिज़ाइन किया गया है।
  • विकासकर्ता: CSIR-राष्ट्रीय वैमानिकी प्रयोगशाला (NAL), बेंगलुरु।

मानव रहित हवाई वाहन (UAVs)/ड्रोन

एक मानव रहित हवाई वाहन (UAV) या मानव रहित विमान प्रणाली (UAS), जिसे सामान्यतः ड्रोन के रूप में जाना जाता है, एक ऐसा विमान है जिसमें कोई मानवीय पायलट, चालक दल या यात्री सवार नहीं होता है, बल्कि इसे दूरस्थ (Remotely) रूप से नियंत्रित किया जाता है या यह स्वायत्त होता है।

अभ्यास – हीट (ABHYAS – HEAT)
  • अभ्यास (ABHYAS) एक हाई-स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टारगेट (HEAT) है।
  • विकासकर्ता: DRDO की एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ADE)।
  • उत्पादनकर्ता: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और लार्सन एंड टुब्रो।
  • यह हथियार प्रणालियों के अभ्यास के लिए एक वास्तविक खतरे का परिदृश्य प्रस्तुत करता है।
  • ABHYAS को ऑटोपायलट की मदद से स्वायत्त उड़ान के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • इसमें RCS (Radar Cross Section), विजुअल और IR (Infrared) ऑग्मेंटेशन सिस्टम होते हैं, जो हथियार अभ्यास के लिए आवश्यक होते हैं।

एक हाई-स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टारगेट (व्यय योग्य हवाई लक्ष्य) एक कम लागत वाला, प्रतिस्थापन योग्य ड्रोन या मानव रहित हवाई वाहन (UAV) होता है। इसका उपयोग हवाई खतरों का अनुकरण (Simulate) करने और सैन्य प्रशिक्षण, परीक्षण तथा मूल्यांकन गतिविधियों को सक्षम करने के लिए किया जाता है। ‘व्यय योग्य’ का अर्थ है कि परीक्षण के दौरान मिसाइल द्वारा इसे नष्ट किए जाने पर भारी आर्थिक नुकसान नहीं होता।

भारत के प्रमुख मानव रहित हवाई वाहन (UAVs)/ड्रोन

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UAV का नामप्रकारविकासकर्ताभूमिका / उपयोगमुख्य विशेषताएँ
अभ्यास (ABHYAS)HEAT (उच्च गति व्यय योग्य हवाई लक्ष्य)DRDO–ADEहथियार परीक्षण और प्रशिक्षण के लिए ‘अनुकरणीय हवाई लक्ष्य’RCS, दृश्य और IR सिग्नेचर, स्वायत्त उड़ान
तपस-BH (रुस्तम-II)MALE UAV (मध्यम-ऊँचाई, लंबी सहनशक्ति)DRDO–ADEसूचना, निगरानी और टोही (ISR)सहनशक्ति: लगभग 24 घंटे, EO/IR सेंसर, SATCOM
रुस्तम-1सामरिक (Tactical) UAVDRDO–ADEकम दूरी की निगरानी (ISR)सीमा: 250 किमी, उड़ान सहनशक्ति: 12-15 घंटे
आर्चर-NG (Archer-NG)UCAV (कॉम्बैट + निगरानी)DRDO–ADE + निजी भागीदारसशस्त्र निगरानी, सटीक हमलेहथियारबंद, उपग्रह नियंत्रण, AESA राडार
निशांत (Nishant)सामरिक UAV (कैटापल्ट-लॉन्च)DRDO–ADEवास्तविक समय में युद्धक्षेत्र की निगरानीरेल-लॉन्च, पैराशूट रिकवरी, EO पेलोड
पंछी (Panchi)निशांत का पहिएदार संस्करणDRDO–ADEरनवे-आधारित टेकऑफ/लैंडिंग के साथ ISRपारंपरिक लैंडिंग गियर (रेल लॉन्च के विपरीत)
SWiFTस्टील्थ UAV (घातक UCAV का प्रोटोटाइप)DRDOस्वायत्त स्टील्थ स्ट्राइक के लिए ‘तकनीकी प्रदर्शक’फ्लाइंग-विंग डिज़ाइन, जेट-संचालित
घातक (Ghatak/AURA)स्टील्थ UCAVDRDO + ADAस्वायत्त सटीक प्रहार क्षमतास्टील्थ, जेट इंजन, आंतरिक हथियार बे (Internal weapons bay)
रेवन (Raven)मिनी UAVनिजी क्षेत्र (Adani-Elbit)सामरिक निगरानी, मानव-वहन योग्य प्रणालीहल्का वजन, तीव्र परिनियोजन (Quick deploy)

विदेशी ड्रोन/UAVs (Foreign Drones)

हेरॉन (Heron)

  • इसे इजराइल से आयात किया गया है।
  • प्रकार: यह एक ‘मध्यम-ऊंचाई लंबी सहनशक्ति’ (MALE) वाला UAV है।
  • भूमिका: इसका उपयोग सूचना, निगरानी, टोही (ISR), सीमा की निगरानी, लक्ष्य प्राप्ति (Target acquisition) और संचार रिले के लिए किया जाता है।

MQ-9B प्रीडेटर (Predator) 

  • इसे अमेरिका से आयात किया गया है।
  • प्रकार: यह भी एक MALE UAV श्रेणी का ड्रोन है।
  • वर्जन (Variants):
    • स्काई गार्जियन (Sky Guardian): टोही, प्रहार मिशन और ‘कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू’ (CSAR) के लिए।
    • सी गार्जियन (Sea Guardian): समुद्री क्षेत्र की जागरूकता और पनडुब्बी-रोधी युद्ध (ASW) के लिए विशेष नौसैनिक ड्रोन।

एकीकृत ड्रोन पहचान एवं अवरोधन प्रणाली (मार्क-2 – Mark-2)

  • यह DRDO–CHESS द्वारा विकसित एक उन्नत स्वदेशी ‘काउंटर-ड्रोन’ (ड्रोन-रोधी) प्लेटफॉर्म है।
  • उद्देश्य: सीमाओं और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर शत्रुतापूर्ण ड्रोनों (निगरानी, हथियारबंद और स्वार्म अटैक/ड्रोन झुंड हमले) का पता लगाना, उनका पीछा करना और उन्हें निष्क्रिय करना।
  • मुख्य विशेषताएँ:
    • 10 किलोवाट उच्च-ऊर्जा लेज़र: यह 2 किमी की दूरी तक ड्रोनों को नष्ट करने में सक्षम है (जो मार्क-1 संस्करण की तुलना में दोगुनी क्षमता है)।
    • मल्टी-सेंसर सूट: इसमें रडार, EO/IR (इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड), RF (रेडियो फ्रीक्वेंसी) डिटेक्टर और AI-आधारित वर्गीकरण तंत्र शामिल है।
    • दोहरी मारक क्षमता (Dual Kill Mechanism):
      • हार्ड-किल (Hard-Kill): लेज़र बीम के माध्यम से ड्रोन का भौतिक विनाश।
      • सॉफ्ट-किल (Soft-Kill): रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) जैमिंग और GNSS स्पूफिंग (नेविगेशन सिग्नल को भ्रमित करना)।
    • गतिशीलता: त्वरित तैनाती के लिए इसे वाहन पर स्थापित (Vehicle-mounted) किया गया है।
  • भविष्य की तैयारी: यह प्रणाली आगामी 30 किलोवाट लेज़र सिस्टम (मारक क्षमता 5 किमी तक) के साथ संगत है।

भूमिका (Role) के आधार पर विमानों का वर्गीकरण

श्रेणी 

विमान के उदाहरण

भूमिका/कार्य 

लड़ाकू (Fighter)

  • Su-30MKI (रूस) –  बहु-भूमिका वाला, दो सीटों वाला लड़ाकू विमान
  • राफेल (फ्रांस)4.5वीं पीढ़ी का बहु-भूमिका वाला लड़ाकू विमान 
  • तेजस Mk-1A(भारत) – स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान

हवाई श्रेष्ठता (Air superiority) और प्रहार (Strike)

परिवहन विमान (Transport Aircraft)

  • Il-76 (रूस): भारी पेलोड क्षमता वाला रणनीतिक परिवहन विमान।
  • C-17 ग्लोबमास्टर और C-130J सुपर हरक्यूलिस (USA): ये विमान अपनी ‘शॉर्ट टेक-ऑफ’ (कम दूरी में उड़ान भरने) की क्षमता के लिए जाने जाते हैं, जो दुर्गम हवाई पट्टियों पर उतरने में सक्षम हैं।
  • MQ-9B ड्रोन (अक्टूबर 2024 अपडेट): अमेरिका से 31 त्रि-सेवा (Tri-service) स्काई/सी गार्डियन (RPAS) की अधिप्राप्ति। इसके लिए ‘जनरल एटॉमिक्स ग्लोबल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ प्रदर्शन-आधारित रसद सहायता प्रदान करेगी।
  • EADS CASA C-295 (स्पेन): मध्यम श्रेणी का परिवहन विमान, जिसका निर्माण भारत में ‘टाटा’ (TASL) के सहयोग से किया जा रहा है।

सैन्य टुकड़ियों और रसद (Cargo) की आवाजाही

रिफ्यूलर (Refueller)

  • इल्युशिन Il-78 (Ilyushin Il-78): भारतीय वायु सेना का मुख्य समर्पित टैंकर विमान।
  • एयरबस A330 MRTT: भविष्य में अधिप्राप्ति के लिए प्रस्तावित बहु-भूमिका टैंकर परिवहन विमान।

हवा में ईंधन भरना (Mid-air refuelling)

AWACS/निगरानी (Surveillance)

  • नेत्र (Netra) AEW&C: स्वदेशी रूप से विकसित ‘हवाई प्रारंभिक चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली’।
  • फाल्कन (Phalcon) AWACS: रूसी Il-76 प्लेटफॉर्म पर स्थापित इजरायल रडार प्रणाली
  • DRDO AEW&C Mk-II: वर्तमान में निर्माणाधीन अगली पीढ़ी की चेतावनी प्रणाली।
  • डोर्नियर-228 (Dornier-228): इस विमान का उपयोग समुद्री गश्त, प्रदूषण नियंत्रण, खोज और बचाव (SAR) तथा चिकित्सा निकासी (Medical evacuation) जैसे मिशनों के लिए किया जाता है।

रडार कवरेज, प्रारंभिक चेतावनी और कमान

प्रशिक्षक विमान (Trainer Aircraft)

  • हॉक (Hawk) Mk132: उन्नत जेट प्रशिक्षक। यह मूल रूप से ब्रिटिश विमान है, जिसका निर्माण भारत में ‘हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड’ (HAL) द्वारा लाइसेंस के तहत किया गया है।
  • किरण (Kiran) Mk-II: मध्यम दर्जे का प्रशिक्षक विमान (Intermediate Trainer), जिसे HAL द्वारा विकसित किया गया है।
  • HTT-40: स्वदेशी बुनियादी प्रशिक्षक विमान, जिसे HAL द्वारा तैयार किया गया है।
  • हंसा-3 NG (Hansa-3 NG): भारत का पहला स्वदेशी, उत्पादन-तैयार ‘पायलट प्रशिक्षक विमान’।

पायलट प्रशिक्षण

हेलीकॉप्टर (Helicopter)

  • अपाचे (Apache) AH-64E: उन्नत मारक/लड़ाकू हेलीकॉप्टर (Attack Helicopter), जिसे अमेरिका (बोइंग) से प्राप्त किया गया है।
  • चिनूक (Chinook) CH-47F (USA): भारी भार ढोने वाला रोटरक्राफ्ट (Heavy-lift Rotorcraft), जो दुर्गम क्षेत्रों में भारी मशीनरी ले जाने में सक्षम है।
  • Mi-17 V5: रूस द्वारा निर्मित परिवहन और बचाव कार्यों के लिए विश्वसनीय हेलीकॉप्टर।
  • ALH ध्रुव, रुद्र और LCH प्रचंड: ये सभी स्वदेशी प्लेटफॉर्म हैं जिन्हें HAL द्वारा विकसित किया गया है।

उपयोगिता, हमला, बचाव और रसद (Logistics)

UAV और ड्रोन

  • हेरॉन (Heron) और सर्चर (Searcher): इजराइल मूल के मानव रहित हवाई वाहन (UAVs)।
  • रुस्तम-II और तपस (Tapas): स्वदेशी ‘मध्यम-ऊँचाई लंबी सहनशक्ति’ (MALE) वाले ड्रोन।
  • SWiFT और घातक (Ghatak): वर्तमान में निर्माणाधीन ‘स्टील्थ’ क्षमता वाले मानव रहित लड़ाकू हवाई वाहन (UAVs)।

टोही, निगरानी और प्रहार

पनडुब्बी (Submarines)

पनडुब्बियों का वर्गीकरण

संक्षिप्त रूप प्रणोदन प्रकार उद्देश्य/भूमिका भारतीय उदाहरण 
SSK – सबमर्सिबल शिप (किलर)डीजल-इलेक्ट्रिक (पारंपरिक)अटैक/हंटर-किलर: इनकी जलमग्न सहनशक्ति सीमित होती है। लंबी अवधि तक गोता लगाने के लिए ये वायु-स्वतंत्र प्रणोदन (AIP) प्रणाली पर निर्भर हैं।शिशुमार-श्रेणी (INS शिशुमार), सिंधुघोष-श्रेणी (INS सिंधुवीर), कलवरी-श्रेणी (स्कॉर्पीन)।
SSN – सबमर्सिबल शिप (न्यूक्लियर)परमाणु रिएक्टर (Nuclear)अटैक/हंटर-किलर: ये तीव्र गति वाली होती हैं। इनमें लगभग असीमित जलमग्न सहनशक्ति और मारक क्षमता होती है।INS चक्र (रूस से लीज पर प्राप्त, अब वापस कर दी गई है)।
SSBN – सबमर्सिबल शिप (बैलिस्टिक, न्यूक्लियर)परमाणु रिएक्टर (Nuclear)रणनीतिक निवारण (Deterrence): ये ‘पनडुब्बी से प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल’ (SLBMs) ले जाती हैं। यह भारत के परमाणु ट्रायड (Nuclear Triad) के समुद्री आधार का निर्माण करती हैं।INS अरिहंत-श्रेणी (INS अरिहंत, INS अरिघात)।
प्रोजेक्ट 75 (Project 75)
  • इस परियोजना की शुरुआत 1997 में हुई थी, जो भारतीय नौसेना की स्वदेशी पनडुब्बी निर्माण की 30 वर्षीय योजना का हिस्सा है।
  • निर्माण: इस परियोजना के तहत कलवरी-श्रेणी (स्कॉर्पीन-श्रेणी) की छह डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों का निर्माण किया जा रहा है।
    • INS कलवरी (INS Kalvari)
    • INS खंडेरी (INS Khanderi)
    • INS करंज (INS Karanj)
    • INS वेला (INS Vela)
    • INS वागीर (INS Vagir)
    • INS वाग्शीर (INS Vagsheer): यह छठी पनडुब्बी है; इसका नाम ‘सैंड फिश’ के नाम पर रखा गया है, जो हिंद महासागर की एक समुद्री शिकारी मछली है।
  • विकासकर्ता: इनका निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), मुंबई द्वारा किया गया है।
  • तकनीकी सहयोग: इसमें फ्रांस के ‘नेवल ग्रुप’ (Naval Group) से प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण शामिल है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • इसमें उन्नत स्टील्थ (Stealth) विशेषताएँ शामिल हैं।
    • यह वायु-स्वतंत्र प्रणोदन (AIP) प्रणाली से लैस है, जो इसे सामान्य डीजल पनडुब्बियों की तुलना में अधिक समय तक जलमग्न रहने की अनुमति देती है।
प्रोजेक्ट 75 (I) – [Project 75 (India)]
  • यह ‘प्रोजेक्ट 75’ का अनुवर्ती (Follow-up) और उन्नत संस्करण है।
  • उद्देश्य: इस पहल के तहत भारतीय नौसेना के लिए फ्यूल सेल (ईंधन सेल) और वायु-स्वतंत्र प्रणोदन प्रणाली (AIP) से युक्त नई SSK पनडुब्बियों के निर्माण की परिकल्पना की गई है।
  • रणनीतिक महत्व: यह ‘रणनीतिक साझेदारी मॉडल’ के तहत भारत की पहली बड़ी परियोजना है, जिसका लक्ष्य रक्षा क्षेत्र में पूर्ण आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है।
भारत की परमाणु संचालित पनडुब्बियाँ (SSN)
  • SSN भारत की हमलावर पनडुब्बियाँ हैं।
  • प्रणोदन: ये परमाणु ऊर्जा द्वारा संचालित होती हैं।
  • हथियार प्रणाली: ये टारपीडो और क्रूज मिसाइलों जैसे पारंपरिक हथियारों को दागने में सक्षम हैं (ये परमाणु हथियार ले जाने के लिए नहीं बनी हैं)।
  • प्रमुख उदाहरण: INS चक्र (INS Chakra)
    • यह रूस से पट्टे (Lease) पर ली गई है।
    • तीन संस्करण (Variants) : INS चक्र I, INS चक्र II, INS चक्र III.
      • वर्ष 2019 में, भारत और रूस ने अकुला-श्रेणी (Akula class) की परमाणु संचालित पनडुब्बी ‘चक्र III’ को कम से कम 10 वर्षों के लिए 3 बिलियन डॉलर में पट्टे पर लेने हेतु एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
      • शक्ति: यह 190 मेगावाट (MW) के परमाणु रिएक्टर द्वारा संचालित होगी।
      • इसके 2026 या उसके बाद भारतीय नौसेना को सौंपे जाने की संभावना है।
परमाणु संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियाँ (SSBNs)
  • INS अरिहंत श्रेणी की पनडुब्बियों का निर्माण ‘उन्नत प्रौद्योगिकी पोत’ (ATV) परियोजना के तहत किया जा रहा है।
  • इनका निर्माण भारतीय नौसेना के जहाज निर्माण केंद्र, विशाखापत्तनम में किया गया है।
  • INS अरिहंत (INS Arihant)
    • यह भारत की पहली स्वदेशी परमाणु संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) है।
    • इसे 2016 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था और 2018 में यह पूरी तरह से परिचालन स्थिति में आ गई।
  • INS अरिघात (INS Arighaat – S3)
    • यह भारत की दूसरी स्वदेशी परमाणु संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी है (अरिहंत श्रेणी)।
    • रणनीतिक महत्व: यह देश के ‘परमाणु ट्रायड’ (Nuclear Triad) को मजबूती प्रदान करती है – अर्थात थल, नभ और जल से परमाणु हथियार दागने की क्षमता। यह भारत की ‘सेकंड-स्ट्राइक’ (जवाबी हमले) की क्षमता को सुनिश्चित करती है।
    • शक्ति स्रोत: यह 83 मेगावाट (MW) के ‘प्रेशराइज्ड लाइट-वाटर’ परमाणु रिएक्टर द्वारा संचालित है।
    • आयुध: यह 12 ‘सागरिका’ SLBM (K-15 मिसाइल, मारक क्षमता 750 किमी) या निर्माणाधीन 4 ‘K-4’ मिसाइलों से लैस है।
    • विस्थापन क्षमता: 6000 टन।
  • INS अरिदमन/अरिधमान (INS Aridhaman – S4)
    • यह भारत की तीसरी स्वदेशी SSBN है, जिसे निकट भविष्य में नौसेना में शामिल किया जाना है।
वायु व नौसेना रक्षा प्रणाली

विमान वाहक पोत (Aircraft Carrier)

  • शुरुआती दिनों में भारत के पास अपना स्वयं का विमान वाहक पोत नहीं था। भारत ने मित्र देशों से विमान वाहक पोत खरीदे थे, जो निम्नलिखित हैं:
    • INS विक्रांत (INS Vikrant – प्रथम)
      • भारत का पहला विमान वाहक पोत जिसे यूनाइटेड किंगडम (UK) से खरीदा गया था।
      • सेवा काल: 37 वर्षों की सेवा के बाद 1997 में इसे सेवामुक्त कर दिया गया।
      • महत्व: इसने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
    • INS विराट (INS Viraat – HMS Hermes)
      • भारत का दूसरा और सबसे लंबी अवधि तक सेवा देने वाला विमान वाहक पोत।
      • स्रोत: इसे भी UK से खरीदा गया था।
      • सेवा काल: 56 वर्षों की सेवा के बाद 2017 में इसे सेवामुक्त कर दिया गया।
    • INS विक्रमादित्य (INS Vikramaditya)
      • भारत का तीसरा विमान वाहक पोत जिसे रूस से खरीदा गया (एडमिरल गोर्शकोव/बाकू श्रृंखला)।
      • इसे 2013 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था और वर्तमान में यह सेवा में है।

भारत के स्वदेशी विमान वाहक पोत

  • INS विक्रांत (IAC-1): भारत का पहला स्वदेशी विमान वाहक पोत
    • डिजाइन: भारतीय नौसेना के नौसेना डिज़ाइन निदेशालय द्वारा।
    • विकास:कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा
      • यह पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत एक सार्वजनिक क्षेत्र का शिपयार्ड है।
    • स्वदेशी सामग्री: 76%
    • भारतीय नौसेना में कमीशन: वर्ष 2022
    • क्षमता: 43,000 टन (दुनिया का 7वां सबसे बड़ा विमानवाहक पोत)।
    • प्रक्षेपण और पुनर्प्राप्ति: STOBAR (शॉर्ट टेक-ऑफ बट अरेस्टेड रिकवरी) पद्धति का उपयोग करता है।
    • आदर्श वाक्य: “जयेम सं युधि स्पृध:” (ऋग्वेद से उद्धृत), जिसका अर्थ है – “मैं उन्हें हराता हूँ जो मेरे विरुद्ध लड़ते हैं।”
    • आकार एवं गति: 262 मीटर लंबा। इसका डिजाइन गतिशीलता पर केंद्रित है और इसकी अधिकतम गति 28 नॉट है।
    • यह 30 विमानों का एक एयर विंग संचालित कर सकता है जिसमें मिग-29K लड़ाकू विमान, कामोव-31, MH-60R मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर, स्वदेशी एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और नौसेना संस्करण हल्का लड़ाकू विमान शामिल हैं।
  • INS विशाल (INS Vishal – IAC-2): भारत का दूसरा स्वदेशी विमान वाहक पोत
    • क्षमता: 65,000 टन (भारत का सबसे बड़ा पोत)।
    • स्थिति: वर्तमान में यह विकास के चरण में है।
    • इसके विकास के लिए अमेरिका तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहा है।
वायु व नौसेना रक्षा प्रणाली

भारतीय नौसेना के अन्य महत्वपूर्ण पोत

विध्वंसक (Destroyers)
  • विध्वंसक तीव्र गति वाले, अत्यधिक पैंतरेबाज़ी (Maneuverable) में सक्षम और भारी हथियारों से लैस युद्धपोत होते हैं। इन्हें बड़े जहाजों (जैसे विमान वाहक पोत) के साथ एस्कॉर्ट करने और कम दूरी के हमलावरों से उनकी रक्षा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • प्रोजेक्ट 15A (कोलकाता श्रेणी)
    • स्वदेशी स्टील्थ गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक
    • प्रमुख जहाज: इस श्रेणी में 3 जहाज शामिल हैं- INS कोलकाता, INS कोच्चि और INS चेन्नई
  • प्रोजेक्ट 15B (विशाखापट्टनम श्रेणी)
    • लक्ष्य: कोलकाता श्रेणी के उन्नत संस्करण के रूप में ‘विशाखापत्तनम श्रेणी’ के कुल 4 विध्वंसक जहाजों का निर्माण करना (इनका नाम अक्सर भारत के प्रमुख बंदरगाह शहरों के नाम पर रखा जाता है)।
    • निर्माण: इनका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDSL) द्वारा किया गया है।
      • INS विशाखापट्टनम
      • INS मोरमुगाओ
      • INS इंफाल: 
        • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 26 दिसंबर 2023 को मुंबई में इस स्टील्थ गाइडेड मिसाइल विध्वंसक को नौसेना में शामिल किया।
        • यह उत्तर-पूर्व के किसी शहर (इंफाल, मणिपुर) के नाम पर रखा गया पहला युद्धपोत है।
        • यह महिला अधिकारियों और नाविकों के लिए समर्पित आवास सुविधा वाला पहला भारतीय नौसैनिक जहाज है।
        • इसने 2025 में अमेरिकी नौसेना के साथ PASSEX (पैसेज एक्सरसाइज) में भाग लिया।
      • INS सूरत: इसके 2026 में सेवा में शामिल होने की संभावना है।
फ्रिगेट (Frigates)
  • फ्रिगेट मध्यम आकार के युद्धपोत होते हैं। ये आमतौर पर विध्वंसक जहाजों की तुलना में धीमी गति वाले और कम भारी हथियारों से लैस होते हैं। इनका मुख्य उपयोग अन्य जहाजों की रक्षा करने और पनडुब्बी-रोधी युद्ध (ASW) के लिए किया जाता है।
  • प्रोजेक्ट 17 (शिवालिक श्रेणी): यह भारत का पहला बहु-भूमिका (Multi-role) वाला स्टील्थ फ्रिगेट कार्यक्रम है।
  • प्रोजेक्ट 17A या 17 अल्फा (नीलगिरी श्रेणी)
    • भारतीय नौसेना द्वारा इसे 2019 में लॉन्च किया गया था।
    • लक्ष्य: कुल 7 ‘नीलगिरी श्रेणी’ के स्टील्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट का निर्माण करना।
      • INS नीलगिरी (INS Nilgiri)
      • INS उदयगिरी (INS Udaygiri)
      • INS हिमगिरी (INS Himgiri)
      • INS तारागिरी (INS Taragiri हाल ही में नौसेना को प्राप्त)
      • INS दूनागिरी (INS Dunagiri)
      • INS विंध्यगिरी (INS Vindhyagiri)
      • INS महेंद्रगिरी (INS Mahendragiri – 1 सितंबर 2023 को सुदेश धनखड़ द्वारा लॉन्च)
    • निर्माण: इनमें से 4 जहाजों का निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (MDL) और 3 का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE)द्वारा किया जा रहा है।
    • विशेषताएँ:
      • इसमें स्टील्थ डिजाइन का उपयोग किया गया है, जिसमें ‘रडार-अवशोषक कोटिंग’ और ‘निम्न-अवलोकन’ (Low-observable) विशेषताएँ शामिल हैं। ये दुश्मन के रडार के लिए इसका पता लगाना कठिन बना देते हैं।
      • यह जहाज के इंफ्रारेड सिग्नेचर (IR Signature) को भी कम करता है, जिससे यह ऊष्मा-संवेदी मिसाइलों से बचा रहता है।
INS तमाल (INS Tamal – F 71)
  • प्रकार: स्टील्थ बहु-भूमिका फ्रिगेट (प्रोजेक्ट 1135.6 – तुशील श्रेणी)।
  • कमीशन: 01 जुलाई 2025 को रूस के यांतर (Yantar) शिपयार्ड में सेवा में शामिल किया गया।
  • महत्व: यह प्रोजेक्ट 1135.6 का 8वाँ और तुशील श्रेणी का दूसरा जहाज है।
  • सहयोग: यह भारत-रूस का संयुक्त सहयोग है और पिछले 65 वर्षों में इस सहयोग के तहत निर्मित 51वाँ युद्धपोत है।
    • हालांकि यह रूस में बना है, लेकिन इसमें 26% स्वदेशी घटक शामिल हैं (जैसे: ब्रह्मोस मिसाइल, हुमसा-NG सोनार)।
  • क्षमता: यह हवा, सतह, पानी के नीचे और विद्युत-चुंबकीय जैसे युद्ध के सभी आयामों के लिए सुसज्जित है।
INS तेग (INS Teg)
  • यह भारतीय नौसेना का एक स्टील्थ फ्रिगेट है।
कोरवेट (Corvettes)
  • कोरवेट छोटे और तीव्र गति वाले युद्धपोत होते हैं, जिनका उपयोग मुख्य रूप से तटीय रक्षा और त्वरित प्रहार के लिए किया जाता है।
  • प्रोजेक्ट 28 (कमोर्ता श्रेणी)
    • प्रोजेक्ट 28 को वर्ष 2003 में मंजूरी दी गई थी।
    • लक्ष्य: चार स्वदेशी पनडुब्बी-रोधी युद्ध (ASW) कोरवेट का निर्माण करना।
    • प्रमुख जहाज:
      • INS कमोर्ता (INS Kamorta)
      • INS कदमत्त (INS Kadmatt)
      • INS किल्टन (INS Kiltan)
      • INS कवरत्ती (INS Kavaratti)
    • डिज़ाइन और निर्माण: इन्हें भारतीय नौसेना के ‘नौसेना डिज़ाइन निदेशालय’ द्वारा डिज़ाइन किया गया है और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता द्वारा निर्मित किया गया है।
एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट प्रोजेक्ट (ASW-SWC)
  • संदर्भ: ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत भारतीय नौसेना ने ‘एंड्रोथ’ (Androth) को शामिल किया है, जो दूसरा ‘उथले जल का पनडुब्बी-रोधी युद्ध पोत’ है।
  • प्रकार: यह स्वदेशी रूप से निर्मित 8 जहाजों वाली ‘अरनाला-श्रेणी’ श्रृंखला का दूसरा पोत है।
  • अरनाला श्रेणी के जहाज: INS अरनाला, INS अंजादीप, INS अमिनी, INS अग्रय, INS एंड्रोथ, INS अक्षय, INS अझिक्कल और INS अजय।
  • उद्देश्य: तटीय सुरक्षा, पनडुब्बी-रोधी गश्त और उथले जल के संचालन (विशेष रूप से लक्षद्वीप के आसपास)।
  • निर्माण: गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता।
  • मुख्य विशेषताएँ:
    • प्रणोदन: इसमें डीजल इंजन और ‘वॉटरजेट’ का संयोजन उपयोग किया गया है (भारतीय नौसेना में पहली बार)।
    • हथियार प्रणाली: स्वदेशी हल्के वजन वाले टारपीडो और ASW रॉकेट।
    • निगरानी: उन्नत सोनार और सेंसर प्रणालियाँ।
    • स्वदेशी सामग्री: इसमें 80% से अधिक सामग्री ‘मेड इन इंडिया’ है।
उभयचर युद्धपोत (Amphibious Warfare Ships)
  • ये पोत सैन्य टुकड़ियों, टैंकों और हेलीकॉप्टरों को शत्रु के तटों तक पहुँचाने और वहाँ उतारने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
  • INS जलाश्व (INS Jalashwa):
    • इसे संयुक्त राज्य अमेरिका (पूर्व में USS ट्रेंटन) से प्राप्त किया गया था।
    • प्रकार: यह भारतीय नौसेना का एकमात्र ‘लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक’ (LPD) है।
    • उपयोग: इसका व्यापक रूप से आपदा राहत और निकासी अभियानों (जैसे ऑपरेशन समुद्र सेतु) के लिए उपयोग किया जाता है।
संध्याक-श्रेणी के हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण पोत (Survey Vessels)
  • ये जलराशि के मानचित्रण (Hydrographic mapping) के लिए स्वदेशी रूप से निर्मित बड़े सर्वेक्षण पोत (SVL) हैं।
  • निर्माता: गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता (80% स्वदेशी सामग्री)।
  • SVL परियोजना के चार प्रमुख जहाज
    • INS संध्याक (INS Sandhayak): इस श्रेणी का प्रथम पोत, जिसे हाल ही में कमीशन किया गया है।
    • INS निर्देशक (INS Nirdeshak): श्रेणी का द्वितीय पोत।
    • INS इक्षक (INS Ikshak): अर्थ: ‘इक्षक’ का अर्थ है ‘मार्गदर्शक’ या ‘वह जो देखता है’।
      • इस श्रेणी के तीसरे जहाज को नवंबर 2025 में कमीशन किया गया।
      • अन्य भूमिकाएँ: यह ‘नीली अर्थव्यवस्था’ को सहायता प्रदान करता है, एक ‘अस्पताल जहाज’ (40 बिस्तरों वाला) के रूप में कार्य कर सकता है, और HADR (मानवीय सहायता और आपदा राहत) अभियानों में सक्षम है।
      • आवास: यह समर्पित महिला आवास सुविधा वाला पहला SVL है।
      • आउटपुट: यह ‘राष्ट्रीय जल सर्वेक्षण कार्यालय’ के लिए नौवहन चार्ट तैयार करता है।
      • वैश्विक पहुँच: यह मॉरीशस, श्रीलंका, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे देशों के लिए भी सर्वेक्षण कार्य करता है।
    • INS संशोधक (INS Sanshodhak) – ‘शोधकर्ता’।
  • प्राथमिक भूमिका: नौवहन, बंदरगाह विकास और नौसैनिक संचालन के लिए सटीक जल-सर्वेक्षण और समुद्र विज्ञान संबंधी सर्वेक्षण करना।
INS सतलज (INS Sutlej – J17) 
  • परिचय: INS सतलज भारतीय नौसेना का एक ‘संध्याक-श्रेणी’ (पुरानी) का जल-सर्वेक्षण पोत है।
  • कमीशन: इसे 1993 में सेवा में शामिल किया गया था और इसका आधार कोच्चि में है।
  • निर्माण: इसका निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) द्वारा किया गया है।
  • हालिया मिशन: इसने हाल ही में पोर्ट लुइस, मॉरीशस में 18वें संयुक्त जल-सर्वेक्षण का कार्य संपन्न किया।
  • उद्देश्य: ISO 9002 मानकों के अनुरूप सटीक ‘इलेक्ट्रॉनिक नौवहन चार्ट’ तैयार करना।
  • उपकरण: यह एक चेतक हेलीकॉप्टर और चार ‘सर्वेक्षण मोटरबोट’ से सुसज्जित है।
ICGS अक्षर (ICGS Akshar) : तीव्र गश्ती पोत (FPV)
  • ICGS अक्षर एक तीव्र गश्ती पोत (Fast Patrol Vessel) है, जिसे हाल ही में कराइकल, पुडुचेरी में कमीशन किया गया है।
  • श्रेणी: यह आठ ‘अदम्य-श्रेणी’ के FPVs की श्रृंखला का दूसरा पोत है।
  • अदम्य-श्रेणी के तीव्र गश्ती पोत (Adamya-class FPVs)
    • इन्हें त्वरित-प्रतिक्रिया तटीय संचालन, अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की गश्त और बहु-मिशन भूमिकाओं के लिए डिज़ाइन किया गया है।
    • इनका निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) द्वारा किया गया है।
    • अदम्य-श्रेणी के जहाज: ICGS अदम्य, ICGS अक्षर, ICGS अमूल्य, ICGS अक्षय, ICGS अचल, ICGS अटल, ICGS अजीत और ICGS अपराजित।
    • ICG ‘अदम्य’ (ICG ‘Adamya’)
      • यह आठ FPV परियोजनाओं के तहत भारतीय तटरक्षक बल (ICG) में शामिल किया गया पहला तीव्र गश्ती पोत है।
INS ‘निस्तार’ (INS NISTAR)
  • यह भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित गोताखोरी सहायता पोत (Diving Support Vessel) है।
  • निर्माण: इसका निर्माण हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL), विशाखापत्तनम द्वारा किया गया है (जुलाई 2025)।
  • नाम का महत्व: संस्कृत में ‘निस्तार’ का अर्थ मुक्ति, बचाव या परित्राण होता है।
  • विशिष्ट क्षमताएं
    • गहरी समुद्री सैचुरेशन डाइविंग: 300 मीटर की गहराई तक गोताखोरी सहायता।
    • साइड डाइविंग स्टेज: 75 मीटर तक की गहराई वाले ऑपरेशनों के लिए।
    • रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROVs): 1000 मीटर की गहराई तक रोबोटिक संचालन में सक्षम।
    • DSRV के लिए मदर शिप: यह ‘डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू वेसल’ (DSRV) के लिए मातृ पोत के रूप में कार्य करता है, जो आपात स्थिति में पनडुब्बी चालक दल के बचाव और निकासी के लिए उपयोग किया जाता है।
  • INS निपुण (INS Nipun – 2026)
    • यह पश्चिमी तट के लिए तैनात होने वाला गोताखोरी सहायता पोत है।
    • यह ‘निस्तार’ का सिस्टर वेसल (समान श्रेणी का दूसरा जहाज) है, जिसे नवंबर 2023 में लॉन्च किया गया और 2026 में कमीशन किया गया।
INSV कौंडिन्य (INSV Kaundinya)
  • आईएनएसवी कौंडिन्य एक सिली हुई पाल वाली नौका (Stitched Sail Ship) है, जिसका डिजाइन अजंता की गुफाओं के चित्रों में दर्शाए गए 5वीं शताब्दी ईस्वी के एक जहाज पर आधारित है।
  • नामकरण: इसका नाम प्रसिद्ध प्राचीन भारतीय नाविक ‘कौंडिन्य’ के नाम पर रखा गया है, जो दक्षिण-पूर्व एशिया की यात्रा करते थे।
  • स्थान: नौसेना बेस, कारवार।
  • निर्माण और तकनीक:
    • इसका निर्माण लकड़ी के तख्तों को पारंपरिक विधि से आपस में सिलकर किया गया है।
    • इस तकनीक में नारियल की रस्सी, जटा और राल/रेज़िन का उपयोग किया गया है।
    • केरल के कारीगरों द्वारा श्री बाबू संकरन के नेतृत्व में इसका निर्माण किया गया।
  • परियोजना: यह पोत संस्कृति मंत्रालय (वित्त पोषण), भारतीय नौसेना और M/S होडी इनोवेशन के बीच एक त्रिपक्षीय समझौते का परिणाम है।
  • प्रतीक चिन्ह: इस पर सिंह याली, गंडाबेरुंडा, सूर्य और हड़प्पाकालीन लंगर (Anchor) के प्रतीक अंकित हैं।
  • भविष्य की योजना: प्राचीन व्यापारिक मार्गों को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से गुजरात से ओमान तक एक अंतर-महासागरीय समुद्री यात्रा की योजना है।

DRDO द्वारा विकसित प्रमुख पॉली हर्बल उत्पाद

उत्पाद का नामउपयोग
ल्यूकोस्किन विटिलिगो (ल्यूकोडर्मा) का उपचार
अमटूथदांतों की स्वच्छता हेतु हर्बल टूथपेस्ट
एक्जिटएक्जिमा और स्किन रोगों के लिए हर्बल मलहम।
हर्बोजाइमउच्च ऊंचाई पर सैनिकों के लिए पाचन सहायता
कॉर्डीसेप्स/DIP-G-FITशारीरिक सहनशक्ति बढ़ाने, थकान कम करने और उच्च ऊंचाई की समस्याओं के खिलाफ हर्बल प्रोफिलैक्टिक के रूप में कार्य करता है।

DRDO के फार्माकोलॉजी उत्पाद

उत्पादउपयोग
2-डिऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-DG)COVID-19 सहायक चिकित्सा (INMAS + डॉ. रेड्डीज़) – (ओरल दवा)।
एंटीडोट्सरासायनिक युद्ध एजेंट्स एवं विष जैसे सायनाइड विषाक्तता के लिए
miDMSAलंबे समय तक आर्सेनिक विषाक्तता का उपचार।
रक्षा औद्योगिक गलियारे (Defence Industrial Corridors)
  • उत्तर प्रदेश: कुल छह नोड्स → आगरा, अलीगढ़, चित्रकूट, झांसी, कानपुर और लखनऊ
  • तमिलनाडु: कुल पाँच नोड्स → चेन्नई, कोयंबटूर, होसुर, सलेम और तिरुचिरापल्ली।
iDEX (रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार)
  • शुभारंभ: मई 2021।
  • बजट: ₹498.78 करोड़ (2021-22 से 2025-26 तक)।
  • कार्यान्वयन निकाय: रक्षा मंत्रालय के अधीन रक्षा नवाचार संगठन (DIO)
  • संस्थापक: HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) और BEL (भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड) (एक गैर-लाभकारी धारा 8 कंपनी के रूप में)।
  • उद्देश्य
    • रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में स्वदेशी और नवीन प्रौद्योगिकियों के तेजी से विकास को बढ़ावा देना।
    • स्टार्ट-अप्स/MSMEs के साथ सह-निर्माण और सह-नवाचार की संस्कृति बनाना।
    • नवाचार और अनुसंधान एवं विकास (R&D) संस्थानों के साथ जुड़ाव बढ़ाना।
    • रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 के तहत नवीन प्रौद्योगिकियों की तीव्र खरीद को सक्षम करना।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • SPARK (सपोर्ट फॉर प्रोटोटाइप एंड रिसर्च किकस्टार्ट) अनुदान:
      • स्टार्टअप्स/MSMEs के लिए ₹1.5 करोड़ तक।
      • iDEX प्राइम के तहत ₹10 करोड़ तक।
      • डिफेंस इंडिया स्टार्टअप चैलेंज (DISC) और ओपन चैलेंज (OC) के तहत परियोजनाओं के लिए।
    • डेफकनेक्ट (DefConnect) 2024 (मार्च 2024): iDEX द्वारा आयोजित।
      • ADITI (ऐसिंग डेवलपमेंट ऑफ इनोवेटिव टेक्नोलॉजीज विद iDEX) योजना: अत्याधुनिक, महत्वपूर्ण और रणनीतिक तकनीकों के विकास हेतु स्टार्टअप/MSME को ₹25 करोड़ तक का समर्थन।
      • डिफेंस इंडिया स्टार्टअप चैलेंज (DISC)।
INDUS-X शिखर सम्मेलन (भारत-अमेरिका रक्षा त्वरण पारिस्थितिकी तंत्र)
  • इसका तीसरा संस्करण सितंबर 2024 में कैलिफोर्निया में आयोजित किया गया, जो भारत-अमेरिका संयुक्त वक्तव्य का एक प्रमुख हिस्सा है।
प्रौद्योगिकी विकास कोष (TDF) योजना
  • शुभारंभ: DRDO द्वारा 2016 में (‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत)।
  • उद्देश्य: भारतीय उद्योगों (MSMEs और स्टार्ट-अप्स) को उन नवीन उत्पादों और दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना जो वर्तमान में भारतीय रक्षा उद्योग के पास उपलब्ध नहीं हैं।
सृजन (SRIJAN) पोर्टल
  • शुभारंभ: रक्षा मंत्रालय द्वारा अगस्त 2020 में लॉन्च किया गया एक स्वदेशीकरण पोर्टल
  • कार्य: यह रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs), आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) और सेवाओं के लिए एक ‘इंडस्ट्री इंटरफेस’ के रूप में कार्य करता है।
  • उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य आयात प्रतिस्थापन के लिए MSMEs और स्टार्ट-अप्स को विकास सहायता प्रदान करना है। यह निजी क्षेत्र को रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के स्वदेशीकरण प्रयासों में भागीदार बनाता है।
राष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र जागरूकता (NMDA) परियोजना
  • हितधारक: भारतीय नौसेना और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), बेंगलुरु।
  • उद्देश्य:
    • समुद्री और तटीय सुरक्षा को सुदृढ़ करना।
    • वास्तविक समय में निगरानी, विश्लेषण और सूचना साझाकरण को सक्षम बनाना।
  • कार्यान्वयन मोड: टर्नकी आधार (Turnkey Basis)।
  • प्रमुख बुनियादी ढांचा उन्नयन
    • NC3I नेटवर्क: मौजूदा ‘राष्ट्रीय कमान, नियंत्रण, संचार और खुफिया’ नेटवर्क को
      • एक उन्नत NMDA नेटवर्क में बदला जाएगा। 
      • बेहतर डेटा मिलान, विश्लेषण और सूचना साझा करने के लिए AI-सक्षम सॉफ्टवेयर का एकीकरण। 
    • IMAC (सूचना प्रबंधन और विश्लेषण केंद्र), गुरुग्राम
      • इसे एक ‘बहु-एजेंसी NMDA केंद्र’ के रूप में उन्नत किया जाएगा, जहाँ विभिन्न राष्ट्रीय एजेंसियों के प्रतिनिधि एक साथ कार्य करेंगे।
रक्षा मंत्रालय की डिजिटल पहल [रक्षा लेखा विभाग (DAD)]
  • SAMPURNA (सम्पूर्णा): रक्षा खरीद और भुगतान के लिए एक AI-संचालित, एंड-टू-एंड स्वचालन प्रणाली, जो पारदर्शिता और गतिशीलता को बढ़ाती है।
  • SPARSH (स्पर्श): यह डिजिटल प्लेटफॉर्म अब 32 लाख से अधिक पेंशनभोगियों को सेवा दे रहा है, जिसने पारदर्शिता के साथ पेंशन वितरण को पुनर्परिभाषित किया है।
  • SPARSH VAN (स्पर्श वैन): तमिलनाडु में शुरू किया गया एक ‘मोबाइल आउटरीच’ नवाचार, जो पूर्व सैनिकों के द्वार तक पेंशन सेवाएं पहुँचाता है।
  • e-Raksha Awaas (ई-रक्षा आवास): किराए के रूप में 500 करोड़ रुपये से अधिक की स्वचालित वसूली और 2,700 करोड़ रुपये से अधिक के किराया बिल तैयार करना।
  • रक्षा यात्रा प्रणाली (DTS) और AI-आधारित खरीद उपकरण: रक्षा क्षेत्र के लिए एक स्मार्ट, डेटा-केंद्रित वित्तीय नेटवर्क का निर्माण करना।
ऑपरेशन ओलिविया (Operation Olivia)
  • संचालनकर्ता: भारतीय तटरक्षक बल (ICG)।
  • अवधि: प्रतिवर्ष (नवंबर से मई)।
  • लक्ष्य: सामुदायिक जुड़ाव और NGO साझेदारी (MoUs के माध्यम से) द्वारा ओलिव रिडले कछुओं के लिए सुरक्षित प्रजनन/अंडा देने के स्थान सुनिश्चित करना।
  • प्रमुख क्षेत्र: गहिरमाथा बीच और ऋषिकुल्या नदी का मुहाना (ओडिशा)।
  • 2025 की मुख्य उपलब्धि: ऋषिकुल्या में 6.98 लाख कछुओं ने अंडे दिए (जो एक रिकॉर्ड संख्या है)।
भारतीय सेना में प्रौद्योगिकी समावेशन को बढ़ावा देने की पहल
  • सेना डिज़ाइन ब्यूरो (ADB): 
    • भूमिका: यह स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास (R&D) और अधिप्राप्ति के लिए एक सुविधा प्रदाता के रूप में कार्य करता है।
    • प्रमुख कार्यक्रम: इसके तहत ‘मेक प्रोजेक्ट्स’ और ‘सेना प्रौद्योगिकी बोर्ड’ का संचालन किया जाता है।
  • सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (Positive Indigenisation List) इसका उद्देश्य रक्षा आयात पर निर्भरता कम करना है। (अगले 5-10 वर्षों में लगभग ₹5 लाख करोड़)
  • बौद्धिक संपदा अधिकार (IPRs): वर्ष 2024 में 10 IPR फाइल किए गए, जिनमें से 3 स्वीकृत हो चुके हैं। प्रमुख नवाचार निम्नलिखित हैं:
    • पोर्टेबल मल्टी टारगेट डेटोनेशन डिवाइस: मेजर राजप्रसाद आर.एस. द्वारा विकसित।
    • हेक्साकॉप्टर RPAS: मेजर रेंगराजन द्वारा विकसित।
    • फुल बॉडी आर्मर सूट (कवच): लेफ्टिनेंट कर्नल अनूप मिश्रा द्वारा विकसित।
  • सेना कर्मियों द्वारा विकसित नवाचार
    • ‘एक्सप्लोडर’ (Xploder) UGV: यह एक ‘मानव रहित जमीनी वाहन’ (Unmanned Ground Vehicle) है, जिसका उपयोग IED (विस्फोटक) निपटान और कमरों के भीतर सैन्य हस्तक्षेप के लिए किया जाता है।
    • ‘अग्न्यास्त्र’ (Agniastra): यह एक मल्टी-टार्गेट पोर्टेबल डेटोनेशन डिवाइस (विस्फोटक उपकरण) है।
    • ‘विद्युत रक्षक’ (Vidyut Rakshak): यह IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) सक्षम एकीकृत जनरेटर निगरानी, सुरक्षा और नियंत्रण प्रणाली है। इसे वर्तमान में उत्तरी कमान में शामिल किया गया है।
महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment)
  • नेतृत्व और कमान:
    • कमान भूमिका: वर्तमान में 124 महिला अधिकारी (WOs) कमान भूमिकाओं में तैनात हैं।
    • स्थायी कमीशन: उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय (बबीता पुनिया बनाम भारत संघ वाद, 2020) के बाद 507 महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान किया गया है।
    • लेफ्टिनेंट जनरल साधना सक्सेना नायर: अगस्त 2024 में भारतीय सेना की पहली महिला महानिदेशक चिकित्सा सेवा (DGMS) बनीं।
  • व्यापक भूमिकाएँ:
    • नया प्रवेश: आर्टिलरी (तोपखाना) और प्रादेशिक सेना में महिलाओं की भर्ती शुरू की गई है।
    • समान अवसर: करियर पाठ्यक्रमों, कठिन तैनाती (Postings) और विदेशी प्रशिक्षण तक महिलाओं की समान पहुँच सुनिश्चित की गई है।
  • संयुक्त राष्ट्र शांति सेना (UN Peacekeeping):
    • भागीदारी: स्टाफ और सैन्य पर्यवेक्षक पदों पर 23% महिला अधिकारी तैनात हैं।
    • महिला संलग्नक दल (FETs): ये दल MONUSCO, UNISFA, UNDOF और UNMISS मिशनों में सक्रिय हैं; 2025 के मध्य तक UNIFIL में भी इनकी तैनाती प्रस्तावित है।
  • अंतर्राष्ट्रीय मान्यता:
    • मेजर राधिका सेन को वर्ष 2023 के लिए ‘यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर’ से सम्मानित किया गया।
  • सैन्य शिक्षा: शैक्षणिक सत्र 2024-25 से सैन्य स्कूलों की कक्षा XI में लड़कियों के प्रवेश की अनुमति दी गई है; अब तक 90 छात्राएं नामांकित हैं।
ऑपरेशन सद्भावना (Operation Sadbhavana)
  • उद्देश्य: यह भारतीय सेना द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में सद्भावना और विकास को बढ़ावा देने के लिए संचालित एक ‘सैन्य नागरिक कार्रवाई’ कार्यक्रम है।
  • प्रमुख क्षेत्र: शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण, खेल और राष्ट्रीय एकीकरण
  • बजट: प्रतिवर्ष ₹150 करोड़ का प्रावधान → इस परियोजना के 75% प्रोजेक्ट्स ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के तहत चिन्हित 100 गाँवों में संचालित किए जा रहे हैं।
  • हाल ही में जून 2025 में तीन रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को मिनीरत्न (श्रेणी-I) का दर्जा प्रदान किया गया है:
    • म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (MIL)
    • आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL)
    • इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड (IOL)
  • महारत्न दर्जा: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को अक्टूबर 2024 में ‘महारत्न’ का दर्जा दिया गया, जिससे यह 14वाँ केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (CPSE) बन गया।
  • नवरत्न दर्जा: मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) जून 2024 में 21वाँ नवरत्न PSU बना। यह सरकारी स्वामित्व वाले शिपयार्डों में इस उपलब्धि को पाने वाला पहला संस्थान है।

प्रमुख रक्षा उपकरण और नवाचार

  • वज्र (Vajra): DRDO द्वारा विकसित दंगा नियंत्रण वाहन
  • सबल और ओजस: ये 25 टन ‘बोलार्ड पुल’ (BP) क्षमता वाले टग (Tug) या छोटे सहायक जहाज हैं।
  • अरोवाना (Arowana): मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा विकसित मिजेट पनडुब्बी (अत्यंत छोटी पनडुब्बी) का प्रोटोटाइप।
  • क्वांटम टेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (QTRC): DRDO द्वारा दिल्ली में स्थापित क्वांटम तकनीक अनुसंधान केंद्र।
  • अभेद (ABHED) बुलेटप्रूफ जैकेट: DRDO और IIT दिल्ली द्वारा विकसित; यह हल्की है और Level-6 BIS सुरक्षा प्रदान करती है। इसे बोरॉन कार्बाइड और पॉलीमर से बनाया गया है।

चिकित्सा और वैज्ञानिक प्रगति

  • फेम्टो-लेसिक (Femto-LASIK) सुइट
    • उद्घाटन: DG AFMS और DGMS (सेना) द्वारा ‘आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल)’, दिल्ली कैंट में किया गया।
    • तकनीक: चश्मा हटाने के लिए उन्नत लेजर तकनीक
    • उपयोग: अपवर्तक दोषों (Refractive errors) और

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