राजस्थान के राज्यपाल : इतिहास, सूची एवं महत्वपूर्ण तथ्य

राजस्थान के राज्यपाल : इतिहास, सूची एवं महत्वपूर्ण तथ्य विषय “राजस्थान राजनीतिक व्यवस्था” के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पद को दर्शाता है, जो राज्य में संघीय ढांचे का प्रतिनिधित्व करता है। राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है, जिसका पद भारतीय संविधान के अनुच्छेद 153 से 162 तक वर्णित है। राजस्थान में राज्यपाल पद का इतिहास राज्य के गठन (1949) से प्रारंभ होकर विभिन्न महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों एवं घटनाओं से जुड़ा रहा है।

  • 15 अगस्त 1947 को भारत की आजादी के बाद, इंडिया (प्रोविजनल कॉस्टिट्यूशन) ऑर्डर, 1947 के तहत 1935 के भारत शासन अधिनियम के इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन प्रावधान के अनुसार, राजपूताना की 19 रियासतों और 3 ठिकानों का एकीकरण हुआ।
  • यह एकीकरण 7 चरणों में संपन्न हुआ।
  • राजस्थान के एकीकरण के चतुर्थ चरण (वृहत् राजस्थान) के गठन के समय 30 मार्च 1949 को, जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह को राजप्रमुख नियुक्त किया गया।
  • वे राजस्थान के एकमात्र राजप्रमुख रहे। 26 जनवरी 1950 को, राजस्थान ‘B’ श्रेणी का राज्य बना। इस दौरान, राजप्रमुख का पद था।
  • राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों के आधार पर, 1 नवंबर 1956 को राजस्थान को राज्य की श्रेणी में शामिल किया गया।
  • 7वें संविधान संशोधन, 1956 के साथ, राजस्थान में राजप्रमुख का पद समाप्त कर दिया गया और राज्यपाल का पद सृजित हुआ।
  • श्री गुरुमुख निहाल सिंह को 25 अक्टूबर 1956 को राजस्थान का पहला राज्यपाल नियुक्त किया गया।
  • उन्होंने अपना पदभार 1 नवंबर 1956 को संभाला।

राजस्थान में चार बार राष्ट्रपति शासन

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क्रम

समयावधि

कारण

राज्यपाल

अन्य प्रमुख तथ्य

पहला 

(13 मार्च 1967 – 26 अप्रैल 1967) 44 दिन (सबसे कम)

विधानसभा चुनावों में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।

  • डॉ. सम्पूर्णानंद
  • सरदार हुकुम सिंह
  • विधानसभा निलंबित रही। 
  • डॉ. सम्पूर्णानंद का कार्यकाल समाप्त होने पर सरदार हुकुम सिंह ने कार्यभार संभाला। 
  • केंद्र ने सदानंद वामन और आर. प्रसाद को सलाहकार नियुक्त किया।
  • मोहनलाल सुखाडिया ने बहुमत साबित कर मुख्यमंत्री पद संभाला।

दूसरा 

(30 अप्रैल 1977 – 21 जून 1977)(53 दिन)

केंद्र में पहली गैर-कांग्रेस सरकार के आने के बाद हरिदेव जोशी की सरकार बर्खास्त।

  • वेदपाल त्यागी (अस्थायी)
  • रघुकुल तिलक
  • तत्कालीन राज्यपाल जोगेन्द्र सिंह ने 14 फरवरी 1977 को इस्तीफा दिया।
  • विधानसभा भंग कर दी गई।

तीसरा 

(17 फरवरी 1980 – 5 जून 1980)(110 दिन)

केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनने पर भैरोसिंह शेखावत की सरकार बर्खास्त।राज्य में पहली बार विधानसभा 5 वर्ष से पहले ही भंग कर दी गई।

  • रघुकुल तिलक
  • गोपालकृष्ण भनोत मुख्य सचिव थे।
  • विधानसभा भंग कर दी गई।

चौथा 

(15 दिसम्बर 1992 – 3 दिसम्बर 1993) 354 दिन (सबसे लंबा)

अयोध्या कांड के बाद राज्य सरकार की प्रतिबंधित संगठनों की गतिविधियों पर रोक लगाने में असफलता।समय पूर्व भंग होने वाली दूसरी विधानसभा

  • डॉ. एम. चेन्ना रेड्डी
  • धनिकलाल मंडल (कार्यवाहक)
  • बलिराम भगत
  • विधानसभा भंग कर दी गई। 
  • टी.वी. रमणन और गोविन्द मिश्रा मुख्य सचिव थे।

राजस्थान के राज्यपाल सूची
क्र. सं.राज्यपाल का नामकार्यकालतत्कालीन मुख्यमंत्री 
1राजप्रमुख सवाई श्री मानसिंह30.03.1949 – 31.10.1956टीकाराम पालीवाल (03-03-1952 से 31-10-1952)जयनारायण व्यास (01-11-1952 से 12-11-1954)मोहन लाल सुखाड़िया (13-11-1954 से 09-07-1971)
2सरदार श्री. गुरुमुख निहाल सिंह01.11.1956 – 15.04.1962मोहन लाल सुखाड़िया
3डॉ. सम्पूर्णानन्द16.04.1962 – 15.04.1967मोहन लाल सुखाड़िया
4सरदार श्री हुकुम सिंह16.04.1967 – 19.11.1970मोहन लाल सुखाड़िया
5न्यायमूर्ति जगत नारायण (कार्यवाहक )20.11.1970 – 23.12.1970मोहन लाल सुखाड़िया
6सरदार श्री हुकुम सिंह24.12.1970 – 30.06.1972मोहन लाल सुखाड़ियाबरकतुल्ला खाँ (09-07-1971 से 11-10-1973)
7सरदार श्री जोगिंदर सिंह01.07.1972 – 14.02.1977बरकतुल्ला खाँ हरदेव जोशी (11-10-1973 से 29-04-1977)
8न्यायमूर्ति श्री वेदपाल त्यागी (कार्यवाहक )15.02.1977 – 11.05.1977हरदेव जोशी
9श्री रघुकुल तिलक12.05.1977 – 08.08.1981भैंरोसिंह शेखावत (22-06-1977 से 16-02-1980)जगन्नाथ पहाड़िया (06-06-1980 से 13-07-1981)शिवचरण माथुर (14-07-1981 से 23-02-1985)
10न्यायमूर्ति श्री के.डी. शर्मा (कार्यवाहक )08.08.1981 – 05.03.1982शिवचरण माथुर
11एयर चीफ मार्शल ओपी मेहरा06.03.1982 – 04.01.1985शिवचरण माथुर
12न्यायमूर्ति पीके बनर्जी (कार्यवाहक )05.01.1985 – 31.01.1985शिवचरण माथुर
13एयर चीफ मार्शल ओपी मेहरा01.02.1985 – 03.11.1985शिवचरण माथुरहीरालाल देवपुरा (23-02-1985 से 10-03-1985)हरिदेव जोशी (10-03-1985 से 20-01-1988)
14न्यायमूर्ति डी.पी. गुप्ता (कार्यवाहक )04.11.1985 – 19.11.1985हरिदेव जोशी
15श्री वसंत राव पाटिल   20.11.1985 – 14.10.1987   हरिदेव जोशी
16न्यायमूर्ति जगदीश शरण वर्मा (कार्यवाहक )15.10.1987 – 19.02.1988हरिदेव जोशीशिवचरण माथुर (20-01-1988 से 04-12-1989)
17श्री सुखदेव प्रसाद20.02.1988 – 02.02.1989शिवचरण माथुर
18न्यायमूर्ति जगदीश शरण वर्मा (कार्यवाहक )03.02.1989 – 19.02.1989शिवचरण माथुर
19श्री सुखदेव प्रसाद20.02.1989 – 02.02.1990शिवचरण माधुरहरिदेव जोशी (04-12-1989 से 04-03-1990)
20न्यायमूर्ति श्री मिलाप चंद जैन (कार्यवाहक)03.02.1990 – 13.02.1990हरिदेव जोशी
21प्रोफेसर देवी प्रसाद चट्टोपाध्याय14.02.1990 – 25.08.1991भैरोसिंह शेखावत (04-03-1990 से 15-12-1992)
22डॉ. स्वरूप सिंह (कार्यवाहक )26.08.1991 – 04.02.1993भैरोसिंह शेखावत
23डॉ. एम. चेन्ना रेड्डी05.02.1993 – 30.05.1993
24श्री धनिकलाल मंडल (कार्यवाहक)31.05.1993 – 29.06.1993
25श्री बलिराम भगत30.06.1993 – 30.04.1998भैरोसिंह शेखावत
26श्री सरदार दरबारा सिंह  01.05.1998 – 23.05.1998भैरोसिंह शेखावत
27न्यायमूर्ति श्री एन.एल. टिबरेवाल (कार्यवाहक)24.05.1998 – 15.01.1999भैंरोसिंह शेखावतअशोक गहलोत (01-12-1998 से 08-12-2003)
28न्यायमूर्ति श्री अंशुमान सिंह16.01.1999 – 13.05.2003भैंरोसिंह शेखावत
29श्री निर्मल चंद्र जैन14.05.2003 – 22.09.2003भैंरोसिंह शेखावत
30श्री कैलाशपति मिश्र (कार्यवाहक)22.09.2003 – 13.01.2004भैंरोसिंह शेखावतवसुंधरा राजे सिंधिया (08-12-2003 से 13-12-2008)
31श्री मदन लाल खुराना14.01.2004 – 31.10.2004वसुंधरा राजे सिंधिया
32श्री टी.वी. राजेश्वर (कार्यवाहक)01.11.2004 – 07.11.2004वसुंधरा राजे सिंधिया
33श्रीमती प्रतिभा पाटिल08.11.2004 – 23.06.2007वसुंधरा राजे सिंधिया
34डॉ. एआर किदवई (कार्यवाहक)23.06.2007 – 05.09.2007वसुंधरा राजे सिंधिया
35श्री शीलेन्द्र कुमार सिंह06.09.2007 – 09.07.2009वसुंधरा राजे सिंधियाअशोक गहलोत (13-12-2008 से 13-12-2013)
36श्री रामेश्वर ठाकुर (कार्यवाहक)10.07.2009 – 22.07.2009अशोक गहलोत
37श्री शीलेन्द्र कुमार सिंह23.07.2009 – 01.12.2009अशोक गहलोत
38श्रीमती प्रभा राव (कार्यवाहक)03.12.2009 – 24.01.2010अशोक गहलोत
39श्रीमती प्रभा राव25.01.2010 – 26.04.2010अशोक गहलोत
40श्री शिवराज पाटिल (कार्यवाहक)28.04.2010 – 11.05.2012अशोक गहलोत
41श्रीमती मार्गरेट अल्वा12.05.2012 – 07.08.2014अशोक गहलोतवसुंधरा राजे सिंधिया (13-12-2013 से 17-12-2018)
42श्री राम नाईक (कार्यवाहक)08.08.2014 – 03.09.2014वसुंधरा राजे सिंधिया 
43श्री कल्याण सिंह04.09.2014 – 09.09.2019वसुंधरा राजे सिंधियाअशोक गहलोत (17-12-2018 से 09-09-2019)
44श्री कलराज मिश्र09.09.2019 – 30.07.2024अशोक गहलोत भजन लाल शर्मा (15 दिसंबर 2023 से लगातार)
45श्री हरिभाऊ किशनराव बागड़े 31.07.2024 – वर्तमानभजन लाल शर्मा

राजस्थान के राज्यपाल: महत्वपूर्ण व्यक्तित्व और योगदान

1. राजप्रमुख सवाई मान सिंह 

  • कार्यकाल:
    • 30 मार्च 1949 से 31 अक्टूबर 1956 तक
  • जयपुर के पूर्व महाराजा,राजप्रमुख पद को सातवें संविधान संशोधन द्वारा 1956 में समाप्त कर दिया गया) ।
  • प्रसिद्ध पोलो खिलाड़ी ।
  • चैम्बर ऑफ प्रिन्सेस व बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की कोर्ट के वंशानुगत सदस्य ।
  • इण्डियन पोलो एसोसिएशन के अध्यक्ष (1961)
  • मेयो कॉलेज अजमेर की जनरल काउंसिल के अध्यक्ष ।
  • जयपुर मेडिकल एसोसिएशन के संरक्षक ।
  • नोट : 7वें संविधान संशोधन, 1956 के साथ, राजस्थान में राजप्रमुख का पद समाप्त कर दिया गया और राज्यपाल का पद सृजित हुआ।

2. सरदार श्री गुरुमुख निहाल सिंह-  

  • कार्यकाल: 
    • 1 नवंबर, 1956 से 15 अप्रैल, 1962
  • 1 नवंबर 1956 को राज्यों के पुनर्गठन के बाद ‘राजप्रमुख’ पद समाप्त कर ‘राज्यपाल’ कर दिया गया। (7वें संविधान संशोधन, 1956)
  • श्री गुरुमुख निहाल सिंह को 25 अक्टूबर 1956 को राजस्थान का पहला राज्यपाल नियुक्त किया गया। उन्होंने अपना पदभार 1 नवंबर 1956 को संभाला।
  • इनका जन्म 14 मार्च, 1895 को अविभाजित पंजाब में हुआ।
  • राजस्थान के प्रथम राज्यपाल के रूप में 1 नवंबर 1956 को पदभार संभाला।
  • वर्ष 1952 के प्रथम आम चुनाव में, वे दिल्ली विधानसभा के सदस्य बने।
  • 7 मई 1952 को उन्हें दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में चुना गया।
  • 13 फरवरी 1955 से 31 अक्टूबर 1956 तक दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे, जब तक कि दिल्ली विधानसभा का अस्तित्व समाप्त नहीं हुआ।
  • इनके नाम राजस्थान विधानसभा में सर्वाधिक बार अभिभाषण देने का रिकॉर्ड है।
  • राजस्थान के राज्यपाल रहते हुए, उन्होंने 1957 और 1962 में दो विधानसभाओं में आरंभिक अभिभाषण दिया।
  • एक विशेष अवसर पर इनका राज्यपाल अभिभाषण विधानसभा के स्थान पर राजभवन में आयोजित किया गया था।
  • इनके कार्यकाल के समय 
  • मुख्यमंत्री-  मोहनलाल सुखाङिया 
  • विधानसभा अध्यक्ष-
    1. नरोत्तम लाल जोशी- 1952 – 57
    2. रामनिवास मिर्धा –  1957 – 62 तथा 1962 – 67 
  • शपथ – कैलाशनाथ वांचू 

3. डॉ. सम्पूर्णनन्द

  • कार्यकाल:
    • 16 अप्रैल 1962 से 15 अप्रैल 1967 तक
  • वर्ष 1918 से 1921 तक ये डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर के प्रधानाचार्य (प्राचार्य) रहे।
  • असहयोग आंदोलन में भाग लेने के कारण इन्होंने प्राचार्य पद से त्यागपत्र दे दिया और गिरफ्तार हुए।
  • इन्होंने सत्याग्रह आंदोलन में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया और वे साहित्य मनीषी के रूप में भी जाने गए।
  • गोविंद वल्लभ पंत के मुख्यमंत्रित्व काल में इन्होंने शिक्षा, गृह, वत्त और श्रम मंत्री के रूप में कार्य किया।
  • वर्ष 1954 में ये उत्तर प्रदेश के दूसरे मुख्यमंत्री बने और 1960 तक इस पद पर आसीन रहे।
  • हिंदी साहित्य में उत्कृष्ट योगदान हेतु इनकी कृति ‘समाजवाद’ को मंगला प्रसाद पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • वर्ष 1940 में ये अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन के सभापति निर्वाचित हुए।
  • इन्होंने ज्ञानमंडल संस्था में रहकर ‘अंतर्राष्ट्रीय विधान’ नामक पुस्तक लिखी और ‘मर्यादा’ पत्रिका के संपादन का भार संभाला।
  • ये हिंदी नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा प्रकाशित 18 भागों वाले ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ के मुख्य संपादक रहे।
  • इनके कार्यकाल में मार्च 1967 में चौथी विधानसभा चुनाव में अस्पष्ट बहुमत के कारण राजस्थान में पहली बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ।
  • जयपुर के सांगानेर में स्थित ‘खुली जेल’ (Open Jail) इन्हीं की देन मानी जाती है।

4. सरदार श्री हुकुम सिंह

  • कार्यकाल:
    • 16 अप्रैल 1967 से 19 नवंबर 1970 तक
    • 24 दिसम्बर 1970 से 30 जून 1972 तक
  • ये शिरोमणि अकाली दल के सदस्य थे और तीन वर्षों तक इसके अध्यक्ष भी रहे।
  • दिसंबर, 1947 से नवंबर, 1948 तक ये कपूरथला में राज्य उच्च न्यायालय के उत्तरवर्ती न्यायाधीश रहे।
  • ये संविधान सभा, अंतरिम संसद तथा प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय लोकसभा के सदस्य रहे।
  • इन्होंने द्वितीय लोकसभा के उपाध्यक्ष और तृतीय लोकसभा के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।
  • सन् 1959 में कैनबरा और सन् 1961 में लंदन में आयोजित संसदीय सम्मेलनों में हिस्सा लिया।
  • इन्होंने वर्ष 1962 में सोवियत संघ एवं 1963 में यू.एस.ए. में संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।
  • वर्ष 1965 में ये सोवियत संघ और यूगोस्लाविया में संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में गए।
  • ये दो वर्ष तक राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन की संचालन परिषद के चयनित सदस्य रहे।
  • राजस्थान के राज्यपाल रहते हुए इन्होंने 1967 और 1972 में दो अलग-अलग विधानसभाओं में आरंभिक अभिभाषण दिया।
  • इनके पहले और दूसरे कार्यकाल के बीच जस्टिस जगत नारायण सिंह (20 नवंबर, 1970 से 23 दिसंबर, 1970) राजस्थान के प्रथम कार्यवाहक राज्यपाल (क्रम 5) रहे।

7. सरदार श्री जोगिन्दर सिंह 

  • कार्यकाल:
    • 1 जुलाई 1972 से 14 फ़रवरी 1977 तक
  • ये वर्ष 1937 में केंद्रीय विधानसभा के लिए निर्वाचित सदस्य रहे।
  • ये भारतीय संविधान सभा, अंतरिम संसद, लोकसभा तथा राज्यसभा के सदस्य के रूप में भी सेवाएँ दे चुके थे।
  • वर्ष 1962 में इन्होंने ‘नेशनल राइफल एसोसिएशन‘ के मानद महासचिव (Honorary Secretary General) के रूप में कार्य किया।
  • ये कृषि आयोग के सदस्य रहे तथा राज्यसभा की गृह समिति के अध्यक्ष पद पर भी आसीन रहे।
  • राजस्थान का राज्यपाल नियुक्त होने से पूर्व, वर्ष 1971-72 में ये उड़ीसा के राज्यपाल रहे थे।
  • इनके कार्यकाल के दौरान राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी थे।

8. न्यायमूर्ति श्री वेदपाल त्यागी (प्रभारी)-

  • कार्यकाल:
    • 15 फ़रवरी 1977 से 11 मई 1977 तक (कार्यवाहक)
  • सन  1977 में राजस्थान में दूसरी बार राष्ट्रपति शासन लगा था।
  • राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति रहे ।

9. रघुकुल तिलक- 

  • कार्यकाल:
    • 12 मई 1977 से 8 अगस्त 1981 तक
  • ये खुरजा कॉलेज व काशी विद्यापीठ में व्याख्याता रहे तथा बाद में काशी विद्यापीठ के उपकुलपति बने।
  • 1928-32 तक UP विधानसभा में पुस्तकालय अध्यक्ष रहे; पद त्यागकर गोलमेज सम्मेलन के बाद गिरफ्तार हुए।
  • असहयोग आंदोलन (1932-35) और भारत छोड़ो आंदोलन (1942-44) के दौरान सक्रिय रहे और जेल गए।
  • 1939-46 तक UP विधानसभा के निर्वाचित सदस्य और 1944 में वहां संसदीय सचिव रहे।
  • राजनीतिक रूप से पहले कांग्रेस में थे, लेकिन बाद में समाजवादी दल में शामिल हो गए।
  • 1952-58 तक रेलवे सेवा चयन आयोग (उत्तर क्षेत्र) के अध्यक्ष पद पर कार्य किया।
  • वर्ष 1958-60 तक ये राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के सदस्य रहे।
  • 1961 के सर्वोदय आंदोलन में सक्रिय रहे तथा गांधी अध्ययन संस्थान (काशी) में प्रोफेसर व कोषाध्यक्ष रहे।
  • इनके कार्यकाल में 30 अप्रैल से 22 जून, 1977 तक राजस्थान में राष्ट्रपति शासन लागू रहा।
  • इन्होंने राज्यपाल रहते हुए 1977 और 1980 की दो विधानसभाओं में आरंभिक अभिभाषण दिए।
  • इनके समय मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत (प्रथम गैर-कांग्रेसी) और जगन्नाथ पहाड़िया रहे।
  • रघुकुल तिलक का निधन एक सड़क दुर्घटना में हुआ था।

11. एयर चीफ मार्शल ओ.पी. मेहरा (11& 13)

  • कार्यकाल:
    • 6 मार्च 1982 से 4 जनवरी 1985 तक
    • 1 फरवरी 1985 से 3 नवंबर 1985 तक
  • इन्होंने 1940 में भारतीय वायुसेना की जनरल ड्यूटी (पायलट) शाखा में सेवा शुरू की और बाद में चीफ ऑफ एयर स्टाफ बने।
  • सेवा के दौरान इन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक और 1977 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
  • इन्हें 1991 में राजीव रत्न पुरस्कार (राजीव गांधी खेल रत्न की तरह प्रतिष्ठित सम्मान) से नवाजा गया।
  • ये तीन वर्ष तक ‘इंस्टीट्यूट ऑफ आर्मामेंट टेक्नोलॉजी’ के डीन और ‘हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड’ (HAL) के अध्यक्ष रहे।
  • 1980-82 के दौरान ये जोधपुर स्थित प्राथमिक उड़ान प्रशिक्षण स्कूल के कमांडेंट भी रहे।
  • खेलों में गहरी रुचि के कारण ये भारतीय ओलंपिक संघ के पांचवें अध्यक्ष (1975-80) और एशियाई खेल महासंघ के अध्यक्ष रहे।
  • इन्होंने भारतीय हॉकी महासंघ के उपाध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएँ प्रदान कीं।
  • इनकी आत्मकथा – स्वीट एंड शोर ।
  • प्राथमिक उड़ान प्रशिक्षण स्कूल के कमांडेट (जोधपुर) – 1980 – 82) ।
  • इनके कार्यकाल के समय राजस्थान में सातवें विधानसभा में कुल 3 सीएम रहे
    1. जगन्नाथ पहाड़िया, 
    2. शिवचरण माथुर
    3. हीरालाल देवपुरा
  • शिवचरण माथुर तथा हीरालाल देवपुरा को शपथ ओपी मेहरा ने दिलाई ।
  • सातवें विधानसभा के अध्यक्ष पूनमचंद विश्नोई थे । 
  • पूनमचंद विश्नोई चौथी व पांचवीं विधानसभा में प्रोटेम स्पीकर; पांचवीं विधानसभा में उपाध्यक्ष तथा सातवें विधानसभा में अध्यक्ष बने ।

14. न्यायमूर्ति डी.पी. गुप्ता (कार्यवाहक)

  • कार्यकाल:
    • 4 नवंबर, 1985 से 19 नवंबर, 1985 तक
  • राज्यपाल का पदभार संभालने से पूर्व ये राजस्थान के लोकायुक्त (28 अगस्त, 1985 से 3 नवंबर, 1985 तक) के पद पर आसीन रहे।
  • इनके इस अल्पकालिक कार्यकाल के दौरान राजस्थान के मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी थे।
  • ये राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश भी रहे थे।

15. श्री वसंतराव पाटिल

  • श्री वसंतराव पाटिल का जन्म महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में हुआ था और इनका राजस्थान के राज्यपाल के रूप में कार्यकाल 15 अक्टूबर, 1987 से 19 फरवरी, 1988 तक रहा।
  • इन्होंने महात्मा गांधी के साथ सत्याग्रह आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया था।
  • राजनीतिक करियर में ये 1952 से 1985 तक पांच बार महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए।
  • ये मई 1978 से मार्च 1979 तक महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य और 1980 से 1982 तक लोकसभा सदस्य भी रहे।
  • इन्होंने दो बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया।
  • ये महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव के पद पर रहे।
  • इन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • सहकारिता क्षेत्र में ये महाराष्ट्र राज्य सहकारी चीनी मिल संघ, राष्ट्रीय सहकारी चीनी मिल संघ और महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष रहे।
  • इन्होंने महाराष्ट्र राज्य सहकारी फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड के अध्यक्ष के रूप में भी सेवाएँ दीं।
  • ये शिवाजी विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य के पद पर भी आसीन रहे।

16. & 18. जस्टिस जगदीश शरण वर्मा (कार्यवाहक)(16. &18)

  • कार्यकाल:
    • 3 फरवरी 1989 से 19 फरवरी 1989 तक
    • 3 फरवरी 1990 से 13 फरवरी 1990 तक
  • राजस्थान उच्च न्यायालय के प्रथम न्यायाधीश जिन्होंने कार्यवाहक राज्यपाल रहते हुए तात्कालिक मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर को शपथ दिलाई ।
  • भारत के 27वें मुख्य न्यायाधीश
  • राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ।
  • मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश व न्यायाधीश।
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष ।
  • 2012 के दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामलें के बाद आपराधिक कानून में संशोधन हेतु बनी समिति के अध्यक्ष (तीन सदस्यीय आयोग)
  • 2002 की गुजरात हिंसा में न्याय के लिए ‘मंच तैयार करने के लिए जाना जाता है ।
  • इनके उल्लेखनीय निर्णय – 1. एस आर बोम्मई बनाम भारत संघ, 2. विशाखा बनाम राजस्थान राज्य ।”

17. सुखदेव प्रसाद (17 & 19)

  • सुखदेव प्रसाद का जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में हुआ था और इनका राजस्थान के राज्यपाल के रूप में कार्यकाल 20 फरवरी, 1988 से 2 फरवरी, 1990 तक रहा।
  • इन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन सहित स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया था।
  • वर्ष 1952 में ये उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य चुने गए और उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे।
  • ये तीन बार राज्यसभा के सदस्य निर्वाचित हुए (1966, 1972 और 1982)।
  • इन्होंने अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण संबंधी संसदीय समिति के सदस्य व संयोजक के रूप में कार्य किया।
  • ये भारतीय खेल परिषद तथा अखिल भारतीय खेल परिषद के सदस्य के रूप में भी जुड़े रहे।
  • इनके कार्यकाल के दौरान राजस्थान में आठवीं विधानसभा सक्रिय थी।
  • इस अवधि के दौरान हरिदेव जोशी (दो बार) और शिवचरण माथुर (एक बार) ने मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया।
  • नोट- जस्टिस जगदीश शरण वर्मा- 3 फरवरी 1989 से 19 फरवरी 1989 (कार्यवाहक) (18)

20. श्री मिलाप चंद जैन (कार्यवाहक) –

  • कार्यकाल:
    • 3 फरवरी 1990 से 13 फरवरी 1990 तक
  • राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रहे ।
  • दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश ।
  • राजीव गाँधी की हत्या की जांच हेतु बनाये गए जैन आयोग के अध्यक्ष रहे ।
  • राजस्थान के लोकायुक्त रहे ।

21. प्रो. देवी प्रसाद चट्टोपाध्याय

  • कार्यकाल:
    • 14 फरवरी, 1990 से 25 अगस्त, 1991
  • इन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक अध्यापक और क्लर्क के रूप में की थी, जिसके बाद वे प्राध्यापक बने और विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के मंत्री व अध्यक्ष रहे।
  • ये वर्ष 1969 में पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए और जुलाई 1975 में पुनः राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए।
  • केंद्र सरकार में इन्होंने 1971 से 1973 तक स्वास्थ्य और परिवार नियोजन मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया।
  • 5 फरवरी, 1973 से 24 मार्च, 1977 तक ये केंद्रीय वाणिज्य मंत्री (Union Commerce Minister) के पद पर आसीन रहे।
  • ये भारत-चेकोस्लोवाकिया और भारत-युगोस्लाविया संयुक्त आयोगों के सह-अध्यक्ष रहे।
  • ये भारत-फ्रांस संयुक्त आयोग के प्रथम भारतीय सह-अध्यक्ष (First Indian Co-Chairman) बनने का गौरव रखते हैं।
  • इन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • ये ‘इंडियन काउंसिल ऑफ फिलोसॉफिकल रिसर्च’ (Indian Council of Philosophical Research) के संस्थापक और अध्यक्ष रहे।

22. स्वरूप सिंह (प्रभारी)

  • कार्यकाल:
    • 26 अगस्त 1991 से 4 फ़रवरी 1993 तक
  • पहले केरल और बाद में गुजरात के राज्यपाल (1990-1995)।
  • 1971-1974: दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति।
  • 1975-1978: संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य
  • 1978-1984: हरियाणा से लोकदल पार्टी के राज्यसभा सदस्य।

23. डॉ. एम चेन्ना रेड्डी 

  • कार्यकाल:
    • 5 फरवरी 1992 से 30 मई 1993 तक
  • ये आंध्र युवा जन समिति व छात्र कांग्रेस के संस्थापक रहे और इन्होंने तेलंगाना आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया।
  • डॉ. रेड्डी वर्ष 1950 में अंतरिम (अस्थायी) संसद के लिए मनोनीत किए गए और कांग्रेस संसदीय पार्टी के सचेतक (Whip) नियुक्त हुए।
  • प्रथम आम चुनाव में ये हैदराबाद विधानसभा के लिए चुने गए और हैदराबाद राज्य में कृषि, खाद्य, योजना व पुनर्वास मंत्री रहे।
  • इन्होंने आंध्र राज्य के साथ तेलंगाना के विलय का विरोध किया था और ये प्रसिद्ध ‘जेंटलमैन समझौते’ (1956) के चार हस्ताक्षरकर्ताओं में से एक थे।
  • वर्ष 1953 में रोम में आयोजित कृषि विशेषज्ञों के विश्व सम्मेलन में इन्होंने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।
  • वर्ष 1955 में भी रोम में ‘खाद्य एवं कृषि संस्था’ (FAO) के सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के उपनेता के रूप में भाग लिया।
  • मार्च, 1967 में इन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री बनाया गया; इसके अतिरिक्त ये लोक लेखा समिति के सदस्य और दो बार प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष रहे।
  • ये उत्तर प्रदेश, पंजाब और तमिलनाडु के राज्यपाल भी रहे (उत्तर प्रदेश के राज्यपाल पद से अक्टूबर 1977 में त्यागपत्र देकर पुनः सक्रिय राजनीति में लौटे थे)।
  • ये मार्च, 1978 में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और अक्टूबर, 1980 में इस पद से त्यागपत्र दे दिया।
  • ये राजस्थान के अंतिम राज्यपाल थे जिनके कार्यकाल के दौरान प्रदेश में चौथी बार राष्ट्रपति शासन (1992-1993) लगा था।

24. धनिक लाल मंडल (राज्यपाल हरियाणा, अतिरिक्त प्रभार) 

  • कार्यकाल:
    • 31 मई 1993 से 29 जून 1993 तक
  • राजस्थान में राष्ट्रपति शासन ।
  • लोकसभा सदस्य ।
  • शिरोमणि पुरस्कार से सम्मानित ।
  • सोशलिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के महासचिव ।
  • मोरारजी देसाई सरकार में केन्द्रीय गृह मंत्रालय में राज्यमंत्री रहे।

25. बलिराम भगत

  • कार्यकाल:
    • 30 जून 1993 से 30 अप्रैल 1998 तक
  • श्री बलीराम भगत का जन्म बिहार के पटना जिले के मेहंदीगंज नामक स्थान पर हुआ था और इनका राजस्थान के राज्यपाल के रूप में कार्यकाल 30 जून, 1993 से 30 अप्रैल, 1998 तक रहा।
  • इन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और इस दौरान दो भूमिगत साप्ताहिक पत्रों ‘क्विट इंडिया’ (Quit India) तथा ‘आवर स्ट्रगल’ (Our Struggle) का संपादन किया।
  • ये बिहार प्रदेश विद्यार्थी कांग्रेस के महासचिव रहे और वर्ष 1947 में इन्होंने पटना से हिंदी साप्ताहिक पत्र ‘राष्ट्रदूत’ का प्रकाशन शुरू किया।
  • ये 1950-52 में अंतरिम संसद के सदस्य रहे और इसके बाद लगातार प्रथम से पांचवीं लोकसभा तथा बाद में सातवीं और आठवीं लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए।
  • इन्होंने जनवरी 1976 से मार्च 1977 तक लोकसभा के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।
  • केंद्र सरकार में इन्होंने वित्त उपमंत्री, वित्त राज्यमंत्री, विदेश राज्यमंत्री, योजना मंत्री, रक्षा उत्पादन मंत्री, विदेश व्यापार व आपूर्ति मंत्री, इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री तथा केंद्रीय विदेश मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों को संभाला।
  • राजस्थान का राज्यपाल बनने से पूर्व ये हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल भी रहे थे।
  • इन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष’ (IMF) और ‘विश्व बैंक’ (World Bank) की वार्षिक बैठकों में वैकल्पिक गवर्नर (Alternate Governor) के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
  • इन्होंने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय राजनीतिक गतिविधियों में प्रमुख और सक्रिय भूमिका निभाई।

26. सरदार दरबारा सिंह 

  • कार्यकाल:
    • 1 मई 1998 से 23 मई 1998 तक
  • पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष रहे।
  • पंजाब के मुख्यमंत्री और लोकसभा सदस्य रहे।
  • राजस्थान के राज्यपाल रहते हुए जब वे पोकरण में भारत के परमाणु परीक्षण (शक्ति-98) के निरीक्षण हेतु गए थे, तब वहाँ अत्यधिक गर्मी और लू (Heat stroke) लगने के कारण उनकी मृत्यु हुई।

27. नवरंग लाल टिबरेवाला (कार्यवाहक)

  • कार्यकाल:
    • 24 मई 1998 से 15 जनवरी 1999 तक
  • झुंझुनू जिले से संबंध रखते थे।
  • राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक न्यायाधीश रहे।
  • राजस्थान बार काउंसिल के अध्यक्ष रहे।

28. न्यायमूर्ति अंशुमान सिंह

  • कार्यकाल: 
    • 16 जनवरी 1999 से 13 मई 2003 तक
  • इन्होंने 1957 में इलाहाबाद जिला न्यायालय से वकालत की शुरुआत की और बाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सरकारी वकील रहे।
  • वर्ष 1984 में इन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
  • सन् 1994 में ये वरिष्ठ न्यायाधीश के रूप में राजस्थान उच्च न्यायालय में स्थानांतरित हुए और यहाँ प्रशासनिक न्यायाधीश (Administrative Judge) के पद पर रहते हुए सेवानिवृत्त हुए।
  • इन्होंने राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और प्रशासनिक न्यायाधीश के रूप में भी अपनी सेवाएँ दीं।
  • वर्ष 1994 से 1997 के बीच इन्होंने कुल चार बार राजस्थान के कार्यवाहक राज्यपाल के रूप में पदभार ग्रहण किया था।
  • ये राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RSLA) के कार्यकारी अध्यक्ष के पद पर भी रहे।
  • राजस्थान का स्थायी राज्यपाल बनने से पूर्व, 17 अप्रैल, 1998 को इन्हें गुजरात का राज्यपाल नियुक्त किया गया था।
  • इनका निधन कोरोना की पहली लहर के दौरान हुआ था।

29. निर्मल चन्द्र जैन 

  • कार्यकाल:
    • 14 मई 2003 -22 सितम्बर 2003
  • लोकसभा सदस्य और मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता रहे।
  • 11वें वित्त आयोग के सदस्य रहे।
  • केंद्रीय वित्त आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं।
  • राजस्थान के दूसरे राज्यपाल जिनका 22 सितंबर 2003 को पद पर रहते हुए असामयिक निधन हुआ।
  • तत्कालीन मुख्यमंत्री: अशोक गहलोत

31. श्री मदन लाल खुराना 

  • कार्यकाल:
    • 14 जनवरी 2004 – 1 नवंबर 2004
  • ये भारतीय जनसंघ दिल्ली के महासचिव और महानगर परिषद दिल्ली के सदस्य रहे।
  • इन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दिल्ली के सचिव, अध्यक्ष और वर्ष 1999 में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया।
  • ये वर्ष 1993 से 1996 तक दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे और इन्हें “दिल्ली का शेर” भी कहा जाता था।
  • ये दिल्ली से नौवीं, दसवीं, बारहवीं और तेरहवीं लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए।
  • लोकसभा में ये सामान्य प्रयोजन समिति, संसदीय वेतन समिति, संसदीय कार्यमंत्रणा समिति तथा नगरीय एवं ग्रामीण विकास समिति के सदस्य रहे।
  • ये भारत सरकार में विदेश सचिव के पद पर भी रह चुके हैं।
  • राजस्थान का राज्यपाल बनने से पूर्व ये सिक्किम के राज्यपाल के पद पर भी कार्यरत रहे थे।
  • राज्यपाल के रूप में इन्होंने राजस्थान में “जनता दरबार” लगाने की शुरुआत की, जिसके कारण ये काफी सुर्खियों में रहे।
  • ये राजस्थान के पहले राज्यपाल थे जिन्होंने अपने पद से त्यागपत्र दिया था।
  • इनका नाम चर्चित ‘हवाला प्रकरण’ से भी संबंधित रहा है।
  • इनके कार्यकाल के दौरान राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत थे।

32. टी वी राजेश्वर (राज्यपाल – उत्तर प्रदेश अतिरिक्त प्रभार) 

  • कार्यकाल:
    • 01 नवम्बर 2004 से 07 नवम्बर, 2004 तक
  • भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी और इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व प्रमुख।
  • सिक्किम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और अरुणाचल प्रदेश के उपराज्यपाल रहे।
  • भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में सचिव रहे।
  • 2002 में पद्म विभूषण से सम्मानित।
  • सबसे कम समय तक राजस्थान के राज्यपाल रहे।

33. श्रीमती प्रतिभा पाटिल 

  • कार्यकाल:
    • 8 नवंबर 2004 – 21 जून 2007
  • ये राजस्थान की पहली महिला राज्यपाल होने का गौरव रखती हैं।
  • पद से इस्तीफा देने वाली दूसरी राज्यपाल।
  • ये वर्ष 1962 से 1985 तक महाराष्ट्र विधानसभा की सदस्य रहीं और इस दौरान महाराष्ट्र सरकार में उपमंत्री तथा समाज कल्याण व शिक्षा मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।
  • ये सन् 1979 से 1980 तक महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष की नेता के पद पर भी रहीं।
  • ये 18 नवंबर, 1986 से 5 नवंबर, 1988 तक राज्यसभा (9 वीं) की उपसभापति के पद पर आसीन रहीं।
  • इन्होंने 10वीं लोकसभा की सदस्य के रूप में सेवाएँ दीं और लोकसभा की गृह समिति की सभापति (अध्यक्षा) रहीं।
  • इन्होंने जलगांव जिले में सहकारिता के माध्यम से महिला कॉपरेटिव बैंक की स्थापना की और महाराष्ट्र में शुगर फैक्ट्री की चीफ प्रमोटर व अध्यक्ष भी रहीं।
  • इन्होंने बंबई (मुंबई) में कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास (Working Women’s Hostel) की स्थापना की।
  • इन्होंने नैरोबी में आयोजित समाज कल्याण की अंतर्राष्ट्रीय परिषद में भारतीय प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया।
  • इन्हें मैक्सिको के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार “ऑर्डर ऑफ एज्टेक ईगल” से सम्मानित किया गया।
  • ये राजस्थान की दूसरी राज्यपाल थीं जिन्होंने अपने पद से त्यागपत्र दिया (राष्ट्रपति चुनाव लड़ने हेतु)।
  • ये वर्ष 2007 से 2012 तक भारत की पहली महिला राष्ट्रपति रहीं।
  • इनके राज्यपाल कार्यकाल के दौरान राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत थे।

34. A आर किदवई (राज्यपाल – हरियाणा, अतिरिक्त प्रभार)

  • कार्यकाल:
    • 23 जून 2007 से 05 सितम्बर, 2007 
  • भारतीय रसायनज्ञ और राजनीतिज्ञ थे।
  • हरियाणा, बिहार, राजस्थान और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे।
  • 1974-1977 तक संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष रहे।
  • अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलाधिपति रहे।
  • चयन बोर्ड ऑफ साइंटिस्ट्स पूल के अध्यक्ष रहे।
  • राज्यसभा सदस्य रहे।
  • जम्मू एवं कश्मीर बैंक के निदेशक रहे।

35. श्री शैलेन्द्र कुमार सिंह (35 & 37)

  • कार्यकाल:
    • 06 सितम्बर 2007 से 09 जुलाई 2009 तक
    • 23 जुलाई, 2009 से 1 दिसंबर, 2009
  • इन्होंने अपने राजनयिक करियर की शुरुआत तेहरान में ‘थर्ड सेक्रेटरी’ के रूप में की और वहीं से फारसी भाषा का अध्ययन किया।
  • ये न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) में ‘परमानेंट मिशन ऑफ इंडिया’ के सदस्य रहे और संयुक्त राष्ट्र के ग्रुप-77 के अध्यक्ष भी रहे।
  • इन्होंने जॉर्डन, लेबनान, साइप्रस, अफगानिस्तान, ऑस्ट्रिया और पाकिस्तान जैसे महत्वपूर्ण देशों में भारत के राजदूत के रूप में सेवाएँ दीं।
  • वर्ष 1989 में इन्होंने भारत सरकार के विदेश सचिव (Foreign Secretary) के प्रतिष्ठित पद पर कार्य किया।
  • ये भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय में निदेशक तथा अतिरिक्त विदेश सचिव व सचिव के पदों पर भी रहे।
  • ये दिल्ली में स्थित ‘यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिलवेनिया इंस्टीट्यूट फॉर दी एडवांस स्टडी ऑफ इंडिया’ के महासचिव रहे।
  • इन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), दिल्ली के विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में भी अपना योगदान दिया।
  • राजस्थान का राज्यपाल बनने से पूर्व, ये दिसंबर 2004 से 2007 तक अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल के पद पर आसीन रहे।
  • 1 दिसंबर, 2009 को राजस्थान के राज्यपाल पद पर रहते हुए इनका निधन हो गया।

38. श्रीमती प्रभा राव 

  • कार्यकाल:
    • कार्यवाहक राज्यपाल: 3 दिसम्बर, 2009 से 24 जनवरी, 2010।
    • राज्यपाल पदभार: 25 जनवरी, 2010 से 26 अप्रैल, 2010 (निधन तक)।
  • राजस्थान की दूसरी महिला राज्यपाल।
  • ये वर्ष 1972 में पहली बार महाराष्ट्र विधानसभा की सदस्य बनीं और कुल छह बार विधायक निर्वाचित हुईं।
  • इन्होंने महाराष्ट्र सरकार में शिक्षा, खेल एवं युवा मामले, पर्यटन, सहकारिता, राजस्व तथा सांस्कृतिक मामलात जैसे विभागों में राज्यमंत्री व कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया।
  • सन् 1979 में ये महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष की नेता के पद पर आसीन रहीं।
  • ये 13वीं लोकसभा में सांसद निर्वाचित हुईं और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की उपाध्यक्ष भी रहीं।
  • इन्होंने महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष, भूमि विकास बैंक महाराष्ट्र के अध्यक्ष तथा राज्य सहकारी बैंक के निदेशक के रूप में सेवाएँ दीं।
  • ये हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल थीं और इसी दौरान इनके पास राजस्थान के राज्यपाल पद का अतिरिक्त प्रभार रहा।
  • 25 जनवरी, 2010 को इन्होंने राजस्थान के स्थायी राज्यपाल के रूप में पदभार ग्रहण किया।
  • ये राजस्थान की कार्यवाहक व स्थायी राज्यपाल दोनों रूपों में राज्यपाल रही।
  • 26 अप्रैल, 2010 को राजस्थान के राज्यपाल पद पर रहते हुए इनका असामयिक निधन हो गया।

40. शिवराज पाटिल (राज्यपाल – पंजाब, अतिरिक्त प्रभार)

  • कार्यकाल:
    • 28 अप्रैल 2010 से 11 मई 2012 तक
  • भारत के विदेश मंत्री रहे।
  • भारत के गृहमंत्री रहते हुए मुम्बई में आतंकवादी हमला हुआ।
  • CSIR के उपाध्यक्ष रहे।
  • लोक सभा अध्यक्ष रहते हुए सर्वश्रेष्ठ संसद सदस्य पुरस्कार की शुरुआत की (1992)।
  • केंद्रीय सरकार में रक्षामंत्री रहे।
  • राज्यसभा सांसद रहे।
  • केन्द्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक रहे।
  • कार्यवाहक राज्यपाल के रूप में अधिकतम कार्यकाल।

41. श्रीमती मार्गरेट अल्वा 

  • कार्यकाल:
    • 12 मई 2012 से 07 अगस्त 2014 तक
  • ये उत्तराखण्ड की पहली महिला राज्यपाल रही हैं और इसके अतिरिक्त इन्होंने गुजरात तथा गोवा के राज्यपाल के रूप में भी कार्य किया।
  • ये वर्ष 1974 से निरंतर चार बार राज्यसभा की सदस्य रहीं और 1999 में लोकसभा के लिए निर्वाचित हुईं।
  • इन्होंने राज्यसभा की उपसभापति के रूप में भी अपनी सेवाएँ प्रदान कीं।
  • स्थानीय निकायों में महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण हेतु 84वें संविधान संशोधन प्रस्ताव के लिए बनी संयुक्त चयन समिति की सदस्य रहीं।
  • वर्ष 1999 से 2004 तक ये महिला सशक्तिकरण की संसदीय समिति की सभापति (अध्यक्ष) रहीं।
  • इन्हीं के प्रयासों से सार्क (SAARC) देशों ने वर्ष 1987 को ‘बालिका वर्ष’ घोषित किया था।
  • वर्ष 1986 में यूनिसेफ द्वारा दक्षिण एशिया के बच्चों पर हुई प्रथम कॉन्फ्रेंस तथा महिला विकास पर हुई सार्क देशों की मंत्री स्तरीय बैठक की सभापति निर्वाचित हुईं।
  • वर्ष 1986 में शांति के लिए विश्व महिला सांसदों के प्रतिनिधिमंडल की अध्यक्ष रहीं और ऐतिहासिक ‘रीगन-गोर्बाचोव समिट’ की वाशिंगटन बैठक के प्रतिनिधिमंडल की सदस्य रहीं।
  • दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में महिलाओं पर होने वाली हिंसा के विरुद्ध बैठक में इन्हें ESCAPE का अध्यक्ष चुना गया।
  • इन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN) में महिलाओं की स्थिति पर बने आयोग की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया और 1976 में संयुक्त राष्ट्र की साधारण सभा में राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल की सदस्य रहीं।
  • वर्ष 1997 में ये अंतर्राष्ट्रीय विकास समिति (रोम) की संचालन परिषद कार्यकारिणी में तीन वर्ष के लिए निर्वाचित सदस्य रहीं।
  • वर्ष 1997 में ही कैमरून के राष्ट्रीय चुनावों में ये ‘कॉमनवेल्थ’ (राष्ट्रमंडल) के पर्यवेक्षक दल का हिस्सा रहीं।
  • ये बाल श्रम की राष्ट्रीय समिति तथा ‘नेशनल चिल्ड्रन बोर्ड’ की उपसभापति के पद पर भी आसीन रहीं।
  • इन्हें मर्सी रवि अवॉर्ड से सम्मानित किया गया और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने रंगभेद के खिलाफ लड़ाई में समर्थन हेतु इन्हें राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया।

42. श्री राम नाइक (उत्तर प्रदेश राज्यपाल, अतिरिक्त प्रभार)

  • कार्यकाल:
    • 08 अगस्त 2014 से 03 सितम्बर 2014 तक
  • भारत सरकार में ऑयल एवं नेचुरल गैस मंत्री रहे।
  • केंद्रीय सरकार में रेलमंत्री भी रहे।
  • लोकसभा सदस्य रहे।
  • उत्तरप्रदेश राज्य के राज्यपाल भी रहे।

43. श्री कल्याण सिंह 

  • कार्यकाल:
    • 04 सितम्बर 2014 से 09 सितम्बर 2019 तक
  • इन्होंने राजस्थान के राज्यपाल के रूप में अपना 5 वर्ष का पूर्ण कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया।
  • ये वर्ष 1991 और 1997 में दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे।
  • दिसंबर 1992 में प्रसिद्ध बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना के समय ये उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर आसीन थे।
  • इनका राजनीतिक करियर अत्यंत प्रभावी रहा; ये 1967 से 2002 तक उत्तर प्रदेश की 11 विधानसभाओं में से 10 बार विधायक निर्वाचित हुए (केवल 1980 के चुनाव को छोड़कर)।
  • ये वर्ष 2004 और 2009 में लोकसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए और संसद में अपनी सेवाएँ दीं।
  • राजस्थान के राज्यपाल रहते हुए इन्हें हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंपा गया था।
  • इन्हें भारत सरकार द्वारा मरणोपरांत पद्म विभूषण (2022) से सम्मानित किया गया।
  • इनका निधन अगस्त 2021 में हुआ था।

44. श्री कलराज मिश्र 

  • कार्यकाल:
    • 9 सितंबर 2019 – 30 जुलाई 2024
  • 9 सितंबर 2019 को व्यक्तिगत रूप से राजस्थान के 22वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली।
  • जुलाई 2019 से सितम्बर 2019 तक हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल।
  • 16वीं लोकसभा के सदस्य और 2014-2017 तक केंद्रीय MSME कैबिनेट मंत्री।
  • तीन बार राज्यसभा सदस्य (1978-84, 2001-12)।
  • उत्तराखंड राज्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका।
  • संविधान की प्रस्तावना और मूल कर्तव्यों का अभिभाषण से पहले पाठन की परम्परा शुरू की।
  • प्रकाशित पुस्तकें:
    • न्यायिक जवाबदेही (Judicial Accountability)
    • हिन्दुत्व एक जीवन शैली
    • भारत में उद्यमिता
    • संविधान, संस्कृति और राष्ट्र
  • बायोग्राफी: “निमित्तमात्र हूँ मैं” (लेखक: डॉ. डी. के. टंकेत और गोविंदराम जायसवाल)।
  • कलराज मिश्र के कार्यकाल में राजभवन में किए गए नवाचार:
  • संविधान पार्क: महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद और महाराणा प्रताप की प्रतिमाएँ स्थापित।
  • अजोला: राजभवन स्थित गऊशाला में गायों के लिए बायो फर्टिलाइजर का उपयोग।
  • इन्फॉर्मास (INFORMAS) पोर्टल: राज्यपाल सचिवालय के विभिन्न अनुभागों से रिपोर्ट ऑनलाइन प्राप्त करने के लिए।
  • सुगम (SUGAM) एप्प: राज्य के सभी वित्त पोषित विश्वविद्यालयों से रिपोर्ट ऑनलाइन प्राप्त करने के लिए।
  • वाइस चांसलर्स लीव एप्प: राज्य वित्त पोषित विश्वविद्यालयों के कुलपतियों द्वारा अवकाश के ऑनलाइन आवेदन और निस्तारण हेतु।
  • ई-टिकिटिंग प्रबंधन प्रणाली: राजभवन में आईटी संबंधित कार्यों और आइटम्स की मांग एवं सूचना ऑनलाइन दर्ज करने के लिए।

45. श्री हरिभाऊ किशनराव बागड़े  (वर्तमान में)

Governor of Rajasthan | राजस्थान के राज्यपाल
  • कार्यकाल:
    • 31 जुलाई 2024 से वर्तमान तक
  • कृषक परिवार में जन्मे और प्रारंभ से ही जनसेवा के प्रति समर्पित रहे।
  • कृषि और डेयरी क्षेत्रों के विकास के लिए निरंतर कार्य किया।
  • छत्रपती, संभाजीनगर (1985, 1990, 1995, 1999) और फुलंब्री, औरंगाबाद (2014, 2019) निर्वाचन क्षेत्रों से विधायक चुने गए।
  • 2 नवंबर 2014 को महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चुने गए।
  • महाराष्ट्र में दो बार मंत्री के रूप में कार्य किया।

राजस्थान के राज्यपाल के संदर्भ में महत्वपूर्ण तथ्य

  • राजस्थान के प्रथम राज्यपाल: गुरूमुख निहाल सिंह।
  • भारत के प्रथम महिला राज्यपाल: सरोजनी नायडू (उत्तर प्रदेश)।
  • सरोजनी नायडू की जयंती (13 फरवरी) को राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।
  • राजस्थान की प्रथम महिला राज्यपाल: प्रतिभा पाटिल।
  • प्रतिभा पाटिल एकमात्र ऐसी राज्यपाल हैं जो बाद में भारत की राष्ट्रपति बनीं।
  • राज्यपाल पद पर अब तक तीन महिलाएँ: 
    1. श्रीमती प्रतिभा पाटिल
    2. श्रीमती प्रभा राव
    3. श्रीमती मार्गरेट आल्वा।
  • राजस्थान के राज्यपाल जिनका निधन पद पर रहते हुए हुआ: 
    1. दरबारा सिंह (1998)
    2. निर्मलचंद जैन (2003)
    3. शैलेन्द्र कुमार सिंह (2009)
    4. श्रीमती प्रभा राव (2010)।
  • 1975 के आपातकाल के समय:
    1. मुख्यमंत्री: हरिदेव जोशी।
    2. राज्यपाल: सरदार जोगिन्दर सिंह।
  • राजस्थान के प्रथम राज्यपाल जिन्होंने पद से त्यागपत्र दिया: 
    1. मदन लाल खुराना (2004)
    2. दूसरा राज्यपाल: प्रतिभा पाटिल (2007)।
  • पद से इस्तीफा देने वाले राज्यपाल
    1. मदन लाल खुराना
    2. श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल
    3. जोगिन्द्र सिंह
    4. बसन्त राव पाटिल
    5. देवीसिंह चट्टोपाध्याय
  • राजस्थान के प्रथम राज्यपाल जिन्हें बर्खास्त किया गया: 
    1. रघुकुल तिलक।
  • राजस्थान के सर्वाधिक कार्यकाल वाले राज्यपाल: गुरूमुख निहाल सिंह (1 नवम्बर 1956 से 15 अप्रैल 1962)।
  • राजस्थान के न्यूनतम कार्यकाल वाले राज्यपाल: टी. वी. राजेश्वर (1 नवम्बर 2004 से 7 नवम्बर 2004)।
  • राजस्थान के प्रथम कार्यवाहक राज्यपाल: जस्टिस जगतनारायण।
  • अतिरिक्त प्रभार वाले राजस्थान के राज्यपाल
    1. स्वरूप सिंह (गुजरात)
    2. धनिक लाल मंडल (हरियाणा)
    3. कैलाशपति मिश्र (गुजरात)
    4. टीवी राजेश्वर (उतरप्रदेश) (न्यूनतम कार्यकाल)
    5. सी.आर.किदवई (हरियाणा)
    6. रामेश्वर ठाकुर (मध्यप्रदेश)
    7. प्रभा राव (हिमाचल प्रदेश)
    8. शिवराज पाटिल (पंजाब) (सर्वाधिक कार्यकाल)
    9. राम नाईक (उत्तर प्रदेश)
  • राजस्थान हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जो राजस्थान के कार्यवाहक राज्यपाल रहे –
    1. जगत नारायण 
    2. वेद पाल त्यागी
    3. के डी शर्मा
    4. डी.पी.गुप्ता
    5. पी.के. बनर्जी
    6. जगदीश शरण वर्मा
  • राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जो राजस्थान के कार्यवाहक राज्यपाल भी रहे:
    1. मिलाप चंद जैन (कार्यवाहक न्यूनतम कार्यकाल)
    2. नवरंग लाल टिबरेवाल (कार्यवाहक सर्वाधिक कार्यकाल)
  • नोट:- शैलेंद्र कुमार, प्रभा राव व मागरिट अल्वा ये तीनों राजस्थान के कार्यवाहक राज्यपाल रहे लेकिन राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नहीं रहे
  • राजस्थान के वे कार्यवाहक राज्यपाल जिन्होंने मुख्यमंत्री को शपथ दिलाई : 
    1. न्यायमूर्ति जगदीश शरण वर्मा: ये राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे और इन्होंने कार्यवाहक राज्यपाल के रूप में 20 जनवरी, 1988 को शिवचरण माथुर को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई थी।
    2. न्यायमूर्ति नवरंग लाल टिबरेवाल: ये राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश थे और इन्होंने कार्यवाहक राज्यपाल की भूमिका निभाते हुए 1 दिसंबर, 1998 को श्री अशोक गहलोत को उनके प्रथम कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई थी।
  • राजस्थान के वह राख्यपाल जिन्हें अन्य राज्यों का अतिरिक्त प्रभार मिला।
    1. माग्रेट अल्बा – गुजरात
    2. कल्याण सिंह – हिमाचल प्रदेश
  • राज्यपाल जो संसद के दोनों सदनों के सदस्य रहे: 
    1. कलराज मिश्र
    2. सरदार जोगिन्दर सिंह
    3. मार्गरेट आल्वा
    4. प्रतिभा पाटिल।
  • राज्यपाल जो लोकसभा अध्यक्ष भी रहे: 
    1. बलिराम भगत
    2. शिवराज पाटिल
    3. सरदार हुकुम सिंह।
  • राजस्थान के राज्यपाल जो संविधान सभा के सदस्य रहे :-  
    • 1. हुकुमसिंह
    • 2. जोगिन्दर सिंह
  • राज्यपाल जो राज्यसभा की उपसभापति भी रही: प्रतिभा पाटिल।
  • राज्यपाल जो विधानसभा में स्पीकर रहे: 
    1. श्री गुरूमुख निहाल सिंह
    2. श्री दरबारा सिंह
    3. श्री धनिक लाल मंडल।
  • विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री जो राजस्थाम के राज्यपाल रहे: 
    1. गुरूमुख निहाल सिंह — दिल्ली (दूसरे मुख्यमंत्री)
    2. डॉ. संपूर्णानंद — उत्तर प्रदेश (दूसरे मुख्यमंत्री)
    3. मदन लाल खुराना — दिल्ली
    4. वसंतराव पाटिल — महाराष्ट्र (दो बार मुख्यमंत्री)
    5. एम. चेन्ना रेड्डी — आंध्र प्रदेश
    6. दरबारा सिंह — पंजाब
    7. कल्याण सिंह — उत्तर प्रदेश
  • राजस्थान के ऐसे राज्यपाल जिन्होंने लगातार 5 वर्ष या उससे अधिक का कार्यकाल पूरा किया, उनका विवरण अवरोही क्रम (अधिक से कम) में इस प्रकार है:
    1. गुरुमुख निहाल सिंह
    2. सरदार हुकुम सिंह
    3. डॉ. संपूर्णानंद
    4. कल्याण सिंह
    5. कलराज मिश्र
  • दो विधानसभाओं में आरंभिक अभिभाषण देने वाले राज्यपाल:
    1. गुरुमुख निहाल सिंह
    2. हुकुम सिंह
    3. रघुकुल तिलक
  • एकमात्र कार्यवाहक राज्यपाल जिन्होंने विधानसभा में आरंभिक अभिभाषण दिया- एन. एल. टिबरेवाल (1999 में)
  • राजस्थान के ऐसे एकमात्र राज्यपाल थे जिन्होंने किसी अन्य राज्य के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभाला – कल्याण सिंह 
  • उन्होंने 28 जनवरी 2015 से 12 अगस्त 2015 तक हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभाला।
  • राजस्थान और उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने प्रोटोकॉल में बदलाव किया।
  • 2014 के बाद से राज्यपाल के लिए “His Excellency” (महामहिम) शब्द का उपयोग नहीं किया जाता, इसके बजाय “Honourable” (माननीय) या “श्री/श्रीमती/सुश्री” का उपयोग होता है।
  • राज्यपाल का प्रधान सचिव भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का अधिकारी होता है।
गवर्नर रिलीफ फंड
  • कोष का गठन: 14 मार्च 1973 
  • फंड का उद्देश्य: अकाल और अभावग्रस्त क्षेत्रों में सहायताप्राकृतिक आपदाओं, जैसे अग्निकांड, बाढ़, दुर्घटनाओं में सहायतामहामारी, अतिवृष्टि, टिड्डी, ओलावृष्टि और फसल नुकसान के लिए सहायताराज्यपाल के निर्णय अनुसार तात्कालिक सहायता
  • फण्ड की आय  के स्त्रोत किसी भी व्यक्ति /संस्था एवं निकाय से प्राप्त आर्थिक सहायता,कोष में संग्रहित पूँजी के बैंकों /निगमों में विनियोजन पर ब्याज,कोई भी अन्य वैधानिक योगदान।आयकर लाभ:गवर्नर रिलीफ फंड के अंतर्गत प्राप्त दान राशि पर आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80 जी के तहत 50% की छूट मिलती है।
जनजाति सलाहकार समिति
  • यह समिति राष्ट्रपति के निर्देश पर राज्यपाल द्वारा गठित की जाती है।
  • समिति में अधिकतम 20 सदस्य होते हैं।
  • सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, जिसमें ¾ सदस्य जनजाति से होते हैं।
  • अनुसूचित जनजाति से संबंधित प्रतिवेदन राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को सौंपा जाता है।
अनुच्छेद 356 और राष्ट्रपति शासन का उपयोग
  • भारत में अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है जब राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल हो जाता है।
  • इसका उपयोग समय-समय पर केंद्र सरकारों द्वारा राज्य सरकारों को बर्खास्त करने के लिए किया गया है।कांग्रेस ने 100 से अधिक बार अनुच्छेद 356 का उपयोग किया।इनमें से 91 बार गैर-कांग्रेसी सरकारों को बर्खास्त किया गया।अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल (6 साल) में सिर्फ 4 बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया।मोरारजी देसाई की जनता पार्टी सरकार ने 16 बार अनुच्छेद 356 का उपयोग किया।
  • 30 अप्रैल 1977 को, मोरारजी देसाई ने एक साथ 8 राज्यों की कांग्रेस सरकारों को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाया:उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान।
  • जनता पार्टी के 3 साल के शासन में, मोरारजी देसाई ने 12 बार और चरण सिंह (6 महीने के प्रधानमंत्री कार्यकाल में) ने 4 बार राष्ट्रपति शासन का उपयोग किया।
  • आपातकाल के बाद (1980) इंदिरा गांधी ने फिर से कांग्रेस की सरकार बनाने के लिए अनुच्छेद 356 का उपयोग किया।
  • आजादी के बाद सबसे पहले पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगाया गया।20 जून 1951 से 17 अप्रैल 1952 तक यह शासन चला, जो कांग्रेस में फूट के कारण लागू हुआ था।
  • अनुच्छेद 356 का उपयोग अक्सर राजनीतिक अस्थिरता के कारण किया गया, विशेष रूप से विपक्षी सरकारों को हटाने के लिए।
  • कांग्रेस सरकार ने इसका सबसे अधिक उपयोग किया, जबकि अन्य सरकारों ने भी अवसर आने पर इसका सहारा लिया।पिछले कई दशकों में राज्यपाल ने केन्द्र के अभिकर्त्ता की भूमिका अधिक निभाई है ऐसा विशेषज्ञों का मानना है। 

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