74वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 भारतीय संविधान में नगरीय स्थानीय स्वशासन को सुदृढ़ बनाने हेतु एक महत्वपूर्ण कदम था, जिसका अध्ययन “राजस्थान राजनीतिक व्यवस्था” विषय के अंतर्गत किया जाता है। इसके माध्यम से नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया तथा उनकी संरचना, शक्तियाँ और कार्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया। यह संशोधन शहरी लोकतंत्र को सशक्त बनाने और विकेन्द्रीकरण की प्रक्रिया को मजबूत करने में सहायक सिद्ध हुआ।
74वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992
भारत में शहरी स्थानीय स्वशासन का विकास
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
| वर्ष | घटना |
| 29 सितंबर 1687 | भारत में प्रथम नगर निगम मद्रास में स्थापित किया गया। |
| 1793 चार्टर एक्ट | चार्टर एक्ट के माध्यम से बंबई, मद्रास और कोलकाता में नगर निगम स्थापित किए गए। |
| 1864 | राजस्थान में प्रथम नगरपालिका माउंट आबू में स्थापित की गई। |
| 1866 में अजमेर, 1867 ब्यावर (प्रथम निर्वाचित) तथा 1868 में जयपुर में नगर पालिका का गठन हुआ। | |
| 1919 | भारत शासन अधिनियम के तहत शहरी निकायों का प्रस्ताव पारित किया गया। |
| 1935 | शहरी स्थानीय स्वशासन को राज्य सूची का विषय बनाया गया, जो वर्तमान में भी लागू है। |
स्वतंत्रता के बाद शहरी स्थानीय स्वशासन में सुधार
| संविधान संशोधन | वर्ष | महत्वपूर्ण घटनाएँ |
| 65वाँ संशोधन | 1989 | राजीव गांधी सरकार द्वारा शहरी स्थानीय स्वशासन को संवैधानिक दर्जा देने का प्रयास, लेकिन लोकसभा से पारित होने के बाद राज्यसभा में पारित नहीं हो सका। |
| 74वाँ संविधान संशोधन | 1992 | प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव द्वारा शहरी स्थानीय स्वशासन को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया। |
| लोकसभा एवं राज्यसभा में पारित | दिसंबर 1992 | संविधान संशोधन को मंजूरी मिली। |
| राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षर | 20 अप्रैल 1993 | विधेयक को संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुई। |
| देशभर में प्रभावी | 1 जून 1993 | शहरी स्थानीय स्वशासन पूरे भारत में लागू हुआ। |
| राजस्थान में लागू | 1 अगस्त 1994 | राजस्थान में शहरी स्थानीय स्वशासन प्रभावी हुआ। |
भारत में 8 प्रकार की शहरी स्वशासन प्रणाली पाई जाती है।
- नगर निगम (Municipal Corporation)
- नगर परिषद / नगरपालिका (Municipal Council)
- अधिसूचित क्षेत्र समिति (Notified Area Committee)
- नगरीय क्षेत्र समिति (Town Area Committee)
- छावनी मंडल (Cantonment Board)
- टाउनशिप (Township)
- बंदरगाह न्यास (Port Trust)
- विशेष / एकल उद्देश्य अभिकरण (Special Purpose Agency)
स्थानीय नगरीय स्वशासन से संबंधित प्रावधान
- शहरी स्थानीय शासन राज्य सूची का विषय है।
- भाग- 9(क)
- अनुच्छेद 243 P – 243 ZG (18 अनुच्छेद )
- अनुसूची – 12 वीं
- कुल विषय – 18
नगरीय स्वशासन से संबंधित अनुच्छेद
| क्र.सं. | अनुच्छेद | विषय-वस्तु |
| 1 | 243 P | परिभाषा |
| 2 | 243 Q | नगरपालिकाओं का गठन |
| 3 | 243 R | नगर निकायों की संरचना |
| 4 | 243 S | वार्ड समितियों का गठन व संरचना |
| 5 | 243 T | स्थानों का आरक्षण |
| 6 | 243 U | नगरपालिका की अवधि |
| 7 | 243 V | सदस्यता के लिए आयोग्यता |
| 8 | 243 W | नगर निकायों की शक्तियां और दायित्व |
| 9 | 243 X | कर लगाने व कोष एकत्र करने की शक्तियां |
| 10 | 243 Y | वित्त आयोग का गठन |
| 11 | 243 Z | नगरपालिकाओं के लेखा का अंकेक्षण |
| 12 | 243 ZA | नगरपालिकाओं का चुनाव |
| 13 | 243 ZB | संघ शासित प्रदेशों में लागू |
| 14 | 243 ZC | कतिपय क्षेत्रों में इस भाग का लागू नहीं होना |
| 15 | 243 ZD | जिला योजना के लिए समिति |
| 16 | 243 ZE | महानगर योजना के लिए समिति |
| 17 | 243 ZF | नगरपालिकाएं तथा विद्यमान कानूनों का जारी रहना |
| 18 | 243 ZG | चुनावी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप पर रोक |
12वीं अनुसूची में शामिल 18 विषय
| क्र.सं. | विषय |
| 1 | नगरीय योजना। |
| 2 | भूमि उपयोग का विनियमन और भवनों का निर्माण। |
| 3 | आर्थिक व सामाजिक विकास योजना। |
| 4 | सड़कें और पुल। |
| 5 | घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक प्रयोजनों के लिये जल आपूर्ति। |
| 6 | लोक स्वास्थ्य, स्वच्छता, सफाई और कूड़ा करकट प्रबंधन। |
| 7 | अग्निशमन सेवाएँ। |
| 8 | नगरीय वानिकी, पर्यावरण का संरक्षण और पारिस्थितिक आयामों की अभिवृद्धि । |
| 9 | समाज के दुर्बल वर्ग, जिनके अंतर्गत दिव्यांग और मानसिक रूप से मंद व्यक्ति भी हैं, के हितों की रक्षा। |
| 10 | झुग्गी बस्ती सुधार और प्रोन्नयन। |
| 11 | नगरीय निर्धनता उन्मूलन। |
| 12 | नगरीय सुख-सुविधाओं और अन्य सुविधाओं, जैसे- पार्क, उद्यान, खेल के मैदान आदि की व्यवस्था। |
| 13 | सांस्कृतिक, शैक्षणिक और सौंदर्यपरक आयामों की अभिवृद्धि। |
| 14 | शव गाड़ना और कब्रिस्तान, शवदाह और श्मशान तथा विद्युत शवदाह गृह। |
| 15 | कांजी हाऊस पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण। |
| 16 | जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण। |
| 17 | सार्वजनिक सुख सुविधाएँ, जिसके अंतर्गत सड़कों पर प्रकाश, पार्किंग स्थल, बस स्टॉप और जन सुविधाएँ भी हैं। |
| 18 | वधशालाओं और चर्मशोधनशालाओं का विनियमन। |
74वें संशोधन का प्रमुख प्रावधान
अनु. 243(P) : परिभाषा
- नगर का दर्जा पाने के लिए क्षेत्र में घनी आबादी होनी चाहिए, आर्थिक संसाधन पर्याप्त होने चाहिए, और जनमत नगर गठित करने के पक्ष में होना चाहिए।
अनु. 243(Q) : नगरपालिकाओं का गठन
- ग्राम पंचायत को नगरपालिका में बदलने के लिए राज्यपाल अधिसूचना जारी करता है, जबकि नगर परिषद को नगर निगम में परिवर्तित करने के लिए राज्य विधानमंडल की स्वीकृति आवश्यक होती है।
- इसमें तीन प्रकार के नगरीय निकाय हैं – (नगरपालिकाओं के तीन स्तर नहीं होते है।)
- नगर पंचायत – किसी भी नाम से उन क्षेत्रों में जो ग्रामीण से शहरी में परिवर्तित हो रहे हैं।
- नगरपालिका परिषद् – छोटे शहरों हेतु ।
- नगर निगम – बड़े शहरों हेतु।
- नगर निकायों की संरचना
- प्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धति तथा प्रादेशिक निर्वाचन यानि वार्ड के आधार पर।
- नगर निकायों में चुनाव लड़ने के लिए आयु 21 वर्ष।
- कार्यकाल – 5 वर्ष, भंग होने की स्थिति में 6 महीने में चुनाव आवश्यक।
अनु. 243(R) : नगर निकायों की संरचना.
- राजस्थान में त्रिस्तरीय शहरी स्वशासन प्रणाली अपनाई गई है।
- निम्न स्तर – नगरपालिका
- मध्य स्तर – नगर परिषद
- उच्च स्तर – नगर निगम
अनु. 243(S) : वार्ड समितियों का गठन व संरचना
- नगरीय निकायों में वार्डों की संख्या राज्य सरकार द्वारा निर्धारित की जाती है।
- न्यूनतम जनसंख्या 3 लाख होने पर वार्ड समिति का गठन किया जाता है।
अनु. 243 (T) : स्थानों का आरक्षण
- SC, S.T. को जनसंख्या के अनुपात में तथा 1/3 स्थान महिलाओं हेतु आरक्षित । ओ.बी.सी. आरक्षण, राज्य सरकार की इच्छा पर आधारित।
- नोट: अरुणाचल प्रदेश में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण का उल्लेख नहीं किया गया है।)
अनु. 243(U) : नगरपालिका की अवधि
नगरपालिकाओं का कार्यकाल :
- (अ) इसकी 5 वर्ष की अवधि समाप्त होने से पूर्व या,
- (ब) विद्यटत होने की दशा में इसे विघटन होने की तिथि से 6 महीने की अवधि तक। किंतु, जहां इस अवधि (जिसके लिए भंग नगरपालिका को कार्य करते रहना है) छह महीने से कम हो, उस अवधि के लिए नई नगरपालिका के लिए किसी चुनाव की आवश्यकता नहीं होगी। फिर भी, किसी नगरपालिका के कार्यकाल की समाप्ति के पूर्व गठित नगरपालिका उस शेष अवधि के लिए बना रहेगा जिस अवधि के लिए भंग की गयी नगरपालिका भंग नहीं किए जाने पर बना रहता। दूसरे शब्दों में, समयपूर्व भंग के पश्चात पुनः गठित नगरपालिका पांच वर्ष की पूर्ण अवधि तक के लिए नहीं बना रहेगा।
- महापौर, सभापति एवं अध्यक्ष का चुनाव सीधे जनता द्धारा जनता द्धारा चुने गये महापौर, सभापति एवं अध्यक्ष को तीन – चौथाई बहुमत से ही हटाया जा सकता है।
- नगरपालिका अध्यक्ष, नगर परिषद् सभापति तथा नगर निगम के महापौर के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता।
- नगर निगम में उपमहापौर का निर्वाचन अप्रत्यक्ष प्रणाली (निर्वाचित सदस्यों द्वारा)द्वारा होता है।
- वर्ष में बोर्ड की कम-से-कम दो बैठकें बुलाना अनिवार्य होगा। दो बैठकों के मध्य कम-से-कम 60 दिन का अन्तराल होगा।
अनु. 243(V) : सदस्यता के लिए आयोग्यता
- स्थानीय नागरिक होना आवश्यक।
- न्यूनतम आयु 21 वर्ष पूर्ण होनी चाहिए।
अनु. 243 (W) : नगर निकायों की शक्तियां और दायित्व
अनु. 243 (X) : कर लगाने व कोष एकत्र करने की शक्तियां
अनु. 243 (Y) : वित्त आयोग का गठन
- पंचायतों वाला ही
अनु. 243(Z) : नगरपालिकाओं के लेखा का अंकेक्षण
अनु. 243(ZA) : नगरपालिकाओं का चुनाव
- पंचायती राज संस्थाओं के लिए गठित निर्वाचन आयोग ही इनके चुनाव करवायेगा।
अनु. 243(ZB) : संघ शासित प्रदेशों में लागू
अनु. 243 (ZC) : कतिपय क्षेत्रों में इस भाग का लागू नहीं होना
अनु. 243 (ZD) : जिला योजना के लिए समिति
- पंचायतों व नगर निकायों द्वारा बनाई गयी योजनाओं की समीक्षा हेतु व समेकन हेतु जिला योजना समिति का प्रावधान है | इसकी संरचना का अधिकार राज्य विधानमण्डल को है। इसमें 80 प्रतिशत सदस्य पंचायतों व नगरीय निकायों के निर्वाचित सदस्यों द्वारा स्वयं में से निर्वाचित किये जायेंगे।
- राजस्थान में जिला आयोजना प्रकोष्ठ समिति का गठन 3 अप्रैल 1991 को किया गया।
- राजस्थान में जिला नियोजन समिति (DPC) का अध्यक्ष जिलाधीश होता था लेकिन 2004 से जिला प्रमुख इसका अध्यक्ष तथा जिलाधीश इसका पदेन सदस्य होता है।
- जिला आयोजना समिति का गठन
- कुल सदस्य – 25
- निर्वाचित सदस्य – 20 (पंचायतीराज और नगरीय निकायों से)
- पदेन सदस्य जिला – कलेक्टर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी
- मनोनीत सदस्य – 2
अनु. 243(ZE) : महानगर योजना के लिए समिति
- प्रत्येक महानगर क्षेत्र में सम्पूर्ण महानगर क्षेत्र के विकास योजना के प्रारूप को तैयार करने के लिए एक महानगर योजना समिति का गठन किया जायेगा। राज्य विधानमण्डल समिति की संरचना, निर्वाचन, कार्य व अन्य
- संस्थाओं का समितियों में प्रतिनिधित्व के सम्बन्ध में उपबंध कर सकेगा।
- महानगरीय योजना समिति में 2/3 सदस्य महानगर क्षेत्र में नगरपालिकाओं के सदस्य और पंचायतों के अध्यक्षों में से उनके द्वारा निर्वाचित किये जायेंगे।
अनु. 243(ZF) : नगरपालिकाएं तथा विद्यमान कानूनों का जारी रहना
अनु. 243(ZG) : चुनावी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप पर रोक
राजस्थान में नगरपालिकाओं से संबंधित महत्वपूर्ण अधिनियम
- राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 1951
- राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 1959
- राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 1994
- राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009
- राजस्थान नगरपालिका संशोधन विधेयक, 2021
नगरपालिका से संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधान
1. राइट टू रिकॉल (Right to Recall)
- राजस्थान में 22 मार्च 2011 को Right to Recall का प्रावधान लागू किया गया, जिसके तहत जनता अपने निर्वाचित नगर निकाय प्रमुख को उनके कार्यकाल के दौरान भी हटा सकती है।
- दिसंबर 2012 में राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश पर मांगरोल (बारां) नगरपालिका के अध्यक्ष अशोक जैन के खिलाफ Right to Recall का प्रयोग किया गया।
- मतदान के पश्चात् जनमत उनके पक्ष में आया, अतः उन्हें पद से नहीं हटाया गया।
2. नगर निगमों का पुनर्गठन
- अक्टूबर 2019 में राजस्थान सरकार द्वारा जयपुर, जोधपुर और कोटा में दो-दो नगर निगमों के गठन की घोषणा की गई।
3. नगर सुधार न्यास (Urban Improvement Trust – UIT)
- राजस्थान के 13 शहरों में नगर सुधार न्यास (UIT) कार्यरत हैं।
- इनका मुख्य कार्य शहरों का व्यवस्थित विकास, भूमि प्रबंधन, वृक्षारोपण, सफाई, पार्क निर्माण एवं सौंदर्यीकरण करना है।
विशेष शहरी प्रशासनिक निकाय
1. छावनी बोर्ड (Cantonment Board)
- छावनी क्षेत्रों में प्रशासनिक व्यवस्था के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा 1924 में अधिनियमित किया गया।
- इसका अध्यक्ष सेना का अधिकारी होता है।
- सदस्य निर्वाचित अथवा मनोनीत किए जा सकते हैं।
2. अधिसूचित क्षेत्र (Notified Area)
- वह क्षेत्र जो न तो नगरपालिका क्षेत्र में आता है और न ही नगर सुधार न्यास के अंतर्गत।
- ऐसे क्षेत्रों को जिला कलेक्टर द्वारा अधिसूचित कर विशेष अधिसूचित समितियों का गठन किया जाता है।
3. पोर्ट ट्रस्ट (Port Trust)
- बंदरगाहों एवं हवाई अड्डों के क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास हेतु पोर्ट ट्रस्ट का गठन किया जाता है।
- यह संबंधित क्षेत्र के सुनियोजित विकास का कार्य करता है।
4. टाउनशिप / टाउन एरिया (Township/Town Area)
- दो शहरों के बीच स्थित विकसित क्षेत्र, जहां शहरी सुविधाएं विकसित की गई हों।
- इसे Town Area घोषित किया जाता है, लेकिन यह किसी भी नगर पालिका के अधीन नहीं होता।
राजस्थान में नगर निकायों की संरचना
| नगरपालिका प्रकार | नगरपालिका | नगर परिषद | नगर निगम |
| स्तर | निम्न स्तर | मध्यम स्तर | उच्च स्तर |
| संख्या | 252 | 34 | 10 |
| जनसंख्या सीमा | 20,000 से 1 लाख तक | 1 लाख से 5 लाख तक | 5 लाख से 1 करोड़ तक |
| राजनीतिक अध्यक्ष | अध्यक्ष/चेयरमैन | सभापति | महापौर/मेयर |
| अध्यक्ष / सदस्य का चुनाव | सदस्य – प्रत्यक्षअध्यक्ष – अप्रत्यक्ष | सदस्य – प्रत्यक्षअध्यक्ष – अप्रत्यक्ष | सदस्य – प्रत्यक्षअध्यक्ष – अप्रत्यक्ष |
| प्रशासनिक अधिकारी | अधिशाषी अधिकारी | आयुक्त | मुख्य कार्यकारी अधिकारी |
| न्यूनतम आयु | 21 वर्ष | 21 वर्ष | 21 वर्ष |
| कार्यकाल | 5 वर्ष | 5 वर्ष | 5 वर्ष |
| न्यूनतम वार्ड | 13 | 13 | 13 |
| सरकार द्वारा मनोनीत | 6 | 8 | 12 |
| गणपूर्ति | 1/3 | 1/3 | 1/3 |
| त्यागपत्र देने का अधिकारी | अध्यक्ष → अधिशाषी अधिकारी, पार्षद एवं उपाध्यक्ष → अध्यक्ष | सभापति → आयुक्त, पार्षद एवं उपसभापति → सभापति | महापौर → मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पार्षद एवं उपमहापौर → महापौर |
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
- सदस्यों का चुनाव – 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के मतदाताओं द्वारा वार्ड स्तर पर प्रत्यक्ष मतदान के माध्यम से होता है।
- न्यूनतम सदस्य संख्या – 13 सदस्य अनिवार्य रूप से होने चाहिए, जबकि अधिकतम संख्या राज्य सरकार द्वारा निर्धारित की जाती है।
- योग्यता – न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए और मतदाता सूची में नाम पंजीकृत होना आवश्यक है।
- अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का निर्वाचन
- 2009 संशोधन: राज्य सरकार ने प्रावधान किया कि नगरपालिका अध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा होगा, जबकि उपाध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से पार्षदों द्वारा किया जाएगा।
- 2014 संशोधन (15 जुलाई): इसमें पुनः संशोधन कर अध्यक्ष का चुनाव भी पार्षदों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किए जाने का प्रावधान किया गया।
- आरक्षण व्यवस्था
- संविधान संशोधन के तहत सभी पदों पर सभी वर्गों में से 13 स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए।
- 2009 में राजस्थान सरकार द्वारा महिलाओं के लिए आरक्षण 50% कर दिया गया, जो 2010 के चुनावों में लागू हुआ।
- वर्तमान स्थिति: यह आरक्षण प्रक्रिया उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
- अनुसूचित जाति (SC) व जनजाति (ST): उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाता है।
- पिछड़े वर्ग (OBC): इनके लिए भी आरक्षण का प्रावधान है।
- अविश्वास प्रस्ताव
- अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कुल सदस्य संख्या के 1/3 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है।
- 3/4 बहुमत से पारित होने पर संबंधित पद रिक्त हो जाता है।
- चुनाव की प्रक्रिया:
- पद रिक्त होने की तिथि से मध्य माह के भीतर नए चुनाव कराए जाने अनिवार्य हैं।
- यह निर्वाचन शेष कार्यकाल की अवधि के लिए होगा।
- अविश्वास प्रस्ताव पर प्रतिबंध:
- सरकार गठन के पहले दो वर्ष तथा अंतिम एक वर्ष के दौरान अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।
- शहरी निकायों के आय के प्रमुख साधन
- राज्य सरकार से प्राप्त अनुदान एवं ऋण।
- विभिन्न कर, शुल्क एवं जुर्माने से प्राप्त आय।
- नगर निकायों की संपत्तियों से प्राप्त आय।
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