राजस्थान सूचना आयोग राजस्थान राजनीतिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण संवैधानिक निकाय है, जिसका गठन सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य शासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करते हुए नागरिकों को सूचना प्राप्त करने के अधिकार की रक्षा करना है। यह आयोग सूचना संबंधी अपीलों और शिकायतों का निस्तारण करता है तथा सुशासन को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
राजस्थान सूचना आयोग: संरचना व कार्य
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005
- आंदोलन: 1990 के दशक से अभियान शुरू। 6 अप्रैल, 1995 को ब्यावर (अजमेर) के चांग गेट से अरुणा रॉय (मजदूर किसान शक्ति संघ) द्वारा सफल आंदोलन।
- संसदीय यात्रा:
- 12 मई 2005 को संसद द्वारा पारित।
- 15 जून 2005 को राष्ट्रपति (डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम) की स्वीकृति।
- प्रभावी तिथियां:
- धारा 4(1), 5(1)(2), 12, 13, 15, 16, 24, 27 व 28 तुरंत लागू।
- शेष 12 अक्टूबर 2005 से देश भर में प्रभावी।
- उद्देश्य: नागरिकों को सरकारी जानकारी तक पहुँच सुनिश्चित करना और पारदर्शिता बढ़ाना।
- महत्व: प्रशासनिक सुधार आयोग ने इसे “प्रशासन के ताले की चाबी” माना।
- इसने शासकीय गोपनीयता अधिनियम 1923 को निष्प्रभावी कर दिया।सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 में कुल 6 अध्याय हैं।
- अध्याय 1 – प्रारंभिक
- अध्याय 2 – सूचना का अधिकार और लोक प्राधिकारियों की बाध्यताएं
- अध्याय3 – केन्द्रीय सूचना आयोग
- अध्याय 4 – राज्य सूचना आयोगअध्याय
- 5 – सूचना आयोगों की शक्तियां और कृत्य, अपील तथा शास्तियांअध्याय
- 6 – प्रकीर्ण
- इसके अलावा, अधिनियम में 2 अनुसूचियाँ (Schedules) भी शामिल हैं –
- मुख्य सूचना आयुक्त, सूचना आयुक्त, राज्य मुख्य सूचना आयुक्त, राज्य सूचना आयुक्त द्वारा ली जाने वाली शपथ या किए जाने वाले प्रतिज्ञान का प्ररूप
- केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित आसूचना और सुरक्षा संगठ
- नसूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act, 2005) में कुल 31 धाराएँ (Sections) हैं।
- धारा 1 – संक्षिप्त नाम, प्रारंभ और प्रयोज्यता
- धारा 2 – परिभाषाएँ
- धारा 3 – सूचना का अधिकार
- धारा 4 – लोक प्राधिकारियों की बाध्यताएं
- धारा 5 – लोक सूचना अधिकारियों का पदनाम
- धारा 6 – सूचना अभिप्राप्त करने के लिए अनुरोध-
- धारा 7 – अनुरोध का निपटारा
- धारा 8 – सूचना के प्रकट किए जाने से छूट
- धारा 9 – कतिपय मामलों में पहुंच के लिए अस्वीकृति के आधार
- धारा 10 – पृथक्करणीयता
- धारा 11 – पर व्यक्ति सूचना
- धारा 12 – केंद्रीय सूचना आयोग का गठन।
- धारा 13 – सूचना आयुक्तों की पदावधि और सेवा शर्तें।
- धारा 14 – सूचना आयुक्तों को पद से हटाने के प्रावधान।
- धारा 15 – राज्य सूचना आयोग का गठन
- धारा 16- पदावधि और सेवा की शर्तें
- धारा 17 – राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त का हटाया जाना
- धारा 18 – सूचना आयोगों की शक्तियां और कृत्य
- धारा 19 – अपील
- धारा 20 – शास्ति
- सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 2(f) के अनुसार सूचना का अर्थ है –
- ऐसे अभिलेख, दस्तावेज, परिपत्र-आदेश, रिपोर्ट, नमूने, आँकड़े, ज्ञापन, ई-मेल, मत, सलाह या यांत्रिक रूप में उपलब्ध सामग्री जिसकी जानकारी जन प्राधिकारी द्वारा विधिवत् रूप से दी जाती है।
सूचना का अधिकार (RTI)
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत सूचना का अधिकार (Right to Information – RTI) एक मूलभूत अधिकार के रूप में मान्यता प्राप्त है।
- महत्वपूर्ण न्यायिक मामले राज नारायण बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (1976) में, सुप्रीम कोर्ट ने पुष्टि की कि यह अधिकार अनुच्छेद 19 का हिस्सा है।
- न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में नागरिकों को यह जानने का अधिकार होना चाहिए कि उनकी सरकार कैसे काम करती है।इसी के परिणामस्वरूप सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 पारित किया गया, जिसने नागरिकों को इस मूलभूत अधिकार का प्रयोग करने के लिए एक प्रणाली (system) बनाई।
- RTI अधिनियम की विशेषताएँ और महत्व (Key Points):
- शासन में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाना
- नागरिकों को सशक्त बनाना
- जनभागीदारी को बढ़ावा देना 2nd ARC की सिफारिश – 2nd Administrative Reforms Commission की रिपोर्ट के अनुसार, “RTI अच्छे शासन के लिए मुख्य कुंजी (master key)” है।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 : उद्देशिका
- भारत के संविधान ने लोकतंत्रात्मक गणराज्य की स्थापना की है; और लोकतंत्र शिक्षित नागरिक वर्ग तथा ऐसी सूचना की पारदर्शिता की अपेक्षा करता है, जो उसके कार्यकरण तथा भ्रष्टाचार को रोकने के लिए भी और सरकारों तथा उनके परिकरणों को शासन के प्रति उत्तरदायी बनाने के लिए अनिवार्य है; और वास्तविक व्यवहार में सूचना कें प्रकटन से संभवतः अन्य लोक हितों, जिनके अंतर्गत सरकारों के दक्ष प्रचालन, सीमित राज्य वित्तीय संसाधनों के अधिकतम उपयोग और संवेदनशील सूचना की गोपनीयता को बनाए रखना भी है, के साथ विरोध हो सकता है; और लोकतंत्रात्मक आदर्श की प्रभुता को बनाए रखते हुए इन विरोधी हितों के बीच सामंजस्य बनाना आवश्यक है; अतः, अब यह समीचीन है कि ऐसे नागरिकों को, कतिपय सूचना देने के लिए, जो उसे पाने के इच्छुक हैं, उपबंध किया जाए ;
भारत गणराज्य के छप्पनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो।
सूचना का अधिकार (संशोधन) अधिनियम 2019
- सूचना का अधिकार (संशोधन) अधिनियम 2019 ने भारत में राज्य स्तर पर भी राज्य मुख्य सूचना आयुक्त (SCIC) और राज्य सूचना आयुक्तों (SICs) के कार्यकाल, वेतन और सेवा शर्तों में महत्त्वपूर्ण बदलाव किये हैं।
- राज्य सूचना आयोग के संबंध में परिवर्तन नीचे सूचीबद्ध हैं:
- पद का कार्यकाल –संशोधन ने केंद्र सरकार को राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्तों के लिए कार्यकाल निर्धारित करने का अधिकार दिया है
- पहले, उनका कार्यकाल 5 वर्ष के लिए निर्धारित था।
- वेतन और सेवा शर्तें – संशोधन ने केंद्र सरकार को राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त के वेतन, भत्ते एवं अन्य सेवा शर्तों को निर्धारित करने का अधिकार दिया है।
- पहले, राज्य मुख्य सूचना आयुक्त का वेतन, भत्ते और अन्य सेवा शर्तें मुख्य चुनाव आयुक्त के समान थीं और राज्य सूचना आयुक्त का वेतन राज्य के मुख्य सचिव के समान था। –
- वेतन में कटौती को हटाना- संशोधन ने पिछली सरकारी सेवा से प्राप्त पेंशन या सेवानिवृत्ति लाभों के कारण केंद्रीय सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्तों के वेतन में कटौती के प्रावधानों को हटा दिया।
- पद का कार्यकाल –संशोधन ने केंद्र सरकार को राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्तों के लिए कार्यकाल निर्धारित करने का अधिकार दिया है
राजस्थान राज्य सूचना आयोग
गठन एवं संरचना (धारा 15)
- राज्य सूचना आयोग का गठन सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 15 के तहत् किया गया।
- यह सांविधिक निकाय / वैधानिक निकाय / कानूनी निकाय है।
- गठन :- 13 अप्रैल 2006
- क्रियाशील :- राज्य के प्रथम मुख्य सूचना आयुक्त M.D. कौरानी की नियुक्ति 18 अप्रैल 2006 को की गयी तथा यह आयोग इसी दिन से क्रियाशील हुआ।
- मुख्यालय: जयपुर (वर्तमान में एच.सी.एम. रीपा परिसर में, नवीन भवन लोकार्पण 19 अप्रैल 2013)।
- कार्यालय इतिहास: योजना भवन (अक्टूबर 2006 तक) -> HCM RIPA (नवंबर 2006) -> वित्त भवन (अक्टूबर 2010) -> नवीन कार्यालय भवन (RIPA परिसर): लोकार्पण 19 अप्रैल 2013, संचालन 19 जून 2013।
- राज्य में पहली बार सूचना का अधिकार कानून वर्ष 2000 में लागू हुआ।
- नियमावली: ‘राजस्थान सूचना आयोग (प्रबंधन) विनियम 2007’ (लागू- 24 जुलाई 2007)।
- ध्येय वाक्य: “आविदानि जनेभ्यः”।
- संरचना: 1 राज्य मुख्य सूचना आयुक्त + अधिकतम 10 राज्य सूचना आयुक्त।
- नियुक्ति: राज्य मुख्य सूचना आयुक्त तथा अन्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा एक समिति की सिफारिश पर की जाती है। जिसमें निम्न सदस्य होते है-
- मुख्यमंत्री (अध्यक्ष)
- विपक्ष दल का नेता (विधानसभा)
- मुख्यमंत्री द्वारा एक मनोनीत कैबिनेट मंत्री
- नोट:
- अगर किसी दल को विपक्षी दल की मान्यता प्राप्त न हो तो सबसे बड़े दल का नेता समिति में शामिल किया जाता है।
- आयोग के अध्यक्ष व सदस्य संसद अथवा राज्य विधानमण्डल के सदस्य न हो।
- अध्यक्ष व सदस्यों का संबंध किसी राजनैतिक पार्टी से न हो व किसी लाभ के पद पर भी ना हो।
- योग्यता: विधि, विज्ञान, तकनीक, समाज सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता, जनसंपर्क या प्रशासन में व्यापक ज्ञान और अनुभव वाले प्रख्यात व्यक्ति।
- सक्षम प्राधिकारी: राज्यपाल, विधानसभा अध्यक्ष, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश।
- स्थानीय निकाय: पंचायतों में सचिव/VDO लोक सूचना अधिकारी और सरपंच/प्रधान अपीलीय प्राधिकारी हैं। नगर निकायों में EO/आयुक्त लोक सूचना अधिकारी और अध्यक्ष/महापौर अपीलीय प्राधिकारी हैं।
सेवा शर्तें एवं पदावधि (धारा 16)
कार्यकाल:
- राज्य मुख्य सूचना आयुक्त व अन्य सूचना आयुक्त का कार्यकाल
- मूलतः – 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु जो भी पहले हो निर्धारित किया गया।
- वर्तमान में – 3 वर्ष या 65 वर्ष की आयु जो भी पहले हो।
- नोट : 24 अक्टू. 2019 को केन्द्र सरकार द्वारा अध्यक्ष व सदस्यो का कार्यकाल स्वयं निर्धारित करने का फैसला लिया है।
पुनर्नियुक्ति
- मुख्य सूचना आयुक्त पुनर्नियुक्ति का पात्र नहीं होगा।
- अन्य सूचना आयुक्त की केवल मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर पुनर्नियुक्ति की जा सकती है। बशर्ते कि राज्य सूचना आयुक्त के रूप में उनका कार्यकाल सहित कुल कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक न हो। (वर्तमान में 03 वर्ष है।)
शपथ – धारा 16(3)
- मुख्य सूचना आयुक्त तथा अन्य सूचना आयुक्त को शपथ राज्यपाल द्वारा अथवा राज्यपाल द्वारा नामित व्यक्ति द्वारा दिलाई जाती है।
त्याग पत्र – धारा 16(4)
- अध्यक्ष व सदस्य राज्यपाल को सम्बोधित करते हुए त्याग पत्र देते है।
वेतन: धारा 16(5)
- RTI 2019 संशोधन अधिनियम: मुख्य सूचना आयुक्त तथा अन्य सूचना आयुक्त के वेतन भत्तो का निर्धारण केन्द्र सरकार द्वारा किया जायेगा। तथा कार्यकाल के दौरान अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जा सकता है।
- मुख्य सूचना आयुक्त 2.50 लाख
- अन्य सूचना आयुक्त 2.25 लाख
- नोट : पूर्व में मुख्य सूचना आयुक्त का वेतन राज्य निर्वाचन आयुक्त के और सूचना आयुक्त का मुख्य सचिव के बराबर था।
पद से हटाया जाना (धारा 17)
हटाने की प्रक्रिया
- राज्यपाल मुख्य सूचना आयुक्त व अन्य सूचना आयुक्त को सिद्ध कदाचार अथवा असमर्थता के आधार पर तभी हटा सकता है, जब उच्चतम न्यायालय की जांच प्रक्रिया में दोषी साबित हो ।
- Note:- इसके अतिरिक्त निम्न आधार पर भी राज्यपाल द्वारा उन्हें हटाया जा सकता है।
- यदि वह दिवालिया घोषित हो।
- यदि उन्हें नैतिक चरित्रता के किसी अपराध में दोषी करार दिया गया हो।
- यदि वे अपने कार्यकाल के दौरान लाभ के किसी अन्य पद पर कार्यरत हो।
- मानसिक व शारीरिक रूप से अपने कर्तव्यो का निर्वहन करने में असमर्थ हो।
सूचना प्राप्ति की प्रक्रिया एवं धाराएं
लोक सूचना अधिकारियों (PIO) का पदनाम – (धारा 5)
सूचना प्राप्ति की प्रक्रिया एवं शुल्क – (धारा 6, 7, 27, 28)
- आवेदन: लिखित या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम (हिंदी/अंग्रेजी/राजभाषा) में फीस के साथ।
- आवेदन शुल्क: ₹10 (नकद, डीडी, बैंकर्स चेक या भारतीय पोस्टल ऑर्डर)।
- सूचना शुल्क दरें:
- फोटो प्रति (A4, A3 आकार): ₹2 प्रति पृष्ठ।
- बड़े आकार का कागज: वास्तविक लागत।
- डिस्क या फ्लॉपी: ₹50 प्रति डिस्क।
- निरीक्षण: प्रथम घंटा निशुल्क, फिर प्रत्येक 15 मिनट हेतु ₹5।
समय सीमा (निपटारा) – (धारा 7)
- सामान्य सूचना: 30 दिन।
- सहायक लोक सूचना अधिकारी के माध्यम से: 35 दिन।
- जीवन या स्वतंत्रता: अनुरोध प्राप्त होने के 48 घंटे के भीतर।
सूचना के प्रकटीकरण से छूट – (धारा 8, 11)
- धारा 8: भारत की संप्रभुता, सुरक्षा, रणनीतिक हितों, विदेशी सरकार से प्राप्त विश्वास, न्यायालय की अवमानना, विशेषाधिकार भंग, मंत्रिमंडल के कागजात (विचार-विमर्श के दौरान), और व्यक्तिगत सूचना जिसका लोकहित से संबंध न हो।
- धारा 11 (तृतीय पक्ष): तृतीय पक्ष से संबंधित सूचना हेतु लोक सूचना अधिकारी 5 दिन में अनुरोध करेगा। तृतीय पक्ष को 10 दिन का समय दिया जाएगा। कुल निपटारा 40 दिन में होगा।
अपील एवं शास्ति – (धारा 19, 20)
अपील (धारा 19)
- प्रथम अपील: PIO के निर्णय के विरुद्ध 30 दिन के भीतर (ज्येष्ठ अधिकारी को)।
- द्वितीय अपील: प्रथम अपील के निर्णय के 90 दिन के भीतर ‘राज्य सूचना आयोग’ को।
शास्ति अधिरोपण (धारा 20)
- कारण: आवेदन न लेना, देरी करना, असद्भावनापूर्वक अस्वीकार करना, गलत/अपूर्ण/भ्रामक सूचना देना, या रिकॉर्ड नष्ट करना।
- जुर्माना: ₹250 प्रतिदिन (आवेदन प्राप्ति से सूचना देने तक)। अधिकतम राशि: ₹25,000।
आयोग के कार्य व शक्तियां
- राज्य सूचना आयोग को किसी ऐसे व्यक्ति से शिकायत प्राप्त करने और उसकी जांच करने का अधिकार होता है। जो जनसूचना अधिकारी (PIO) से जानकारी प्राप्त करने में असमर्थ रहा है।
- ऐसा कोई जनसूचना अधिकारी नियुक्त नहीं किया गया है। इस अधिनियम के तहत् सूचना या अपील के लिए अपीलीय अधिकारी ने उसका आवेदन स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।
- राज्य लोक सूचना अधिकारी द्वारा आवेदित सूचना देने से इनकार करने पर निर्धारित समयावधि में सूचना न देने पर, अतार्किक शुल्क मांगने पर अधूरी या भ्रामक सूचना देने पर नागरिक लोक सूचना अधिकारी के विरुद्ध परिवाद विरुद्ध परिवाद प्रस्तुत कर सकते है। जिन पर आयोग जांच करता है।
दीवानी न्यायालय की शक्तियाँ (धारा 18): जांच के दौरान आयोग को सिविल कोर्ट की शक्तियाँ प्राप्त हैं:
- किसी व्यक्ति को समन करना और उपस्थित होने के लिए विवश करना।
- मौखिक या लिखित साक्ष्य और दस्तावेज पेश करवाना।
- दस्तावेजों के निरीक्षण की अपेक्षा करना।
- शपथ पत्र पर साक्ष्य प्राप्त करना।
- किसी न्यायालय या कार्यालय से सार्वजनिक रिकॉर्ड की प्रतियां मंगाना।
अपीलीय शक्तियाँ (धारा 19):
- अधिनियम की धारा 19 (1) के अंतर्गत प्रथम अपील प्राधिकारी के द्वारा दिये गये निर्णय के विरुद्ध द्वितीय अपील सुनने का अधिकार धारा 19 (3) के अंतर्गत राजस्थान राज्य सूचना आयोग में निहित है।
- द्वितीय अपील निर्णय प्राप्ति के 90 दिन के भीतर की जा सकती है।
- RTI अधिनियम 2005 में उल्लेखित मामलो के संबंध में राज्य सूचना आयोग अंतिम अपीलीय प्राधिकरण है।
- RTI अधिनियम 2005 की धारा 19 (7) के तहत् सूचना आयोग का आदेश बाध्यकारी होता है।
वार्षिक रिपोर्ट (धारा 25)
- आयोग क्रियान्वयन के संबंध में वार्षिक रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को भेजता है।
- राज्य सरकार इस रिपोर्ट को राज्य विधानसभा के पटल पर रखवाती है।
शुल्क संरचना (राजस्थान सूचना का अधिकार नियम 2005)
(दिनांक 13 अक्टूबर 2005 को प्रकाशित)
- आवेदन फीस [धारा 6(1)]: ₹10 (नकद/DD/चेक/पोस्टल ऑर्डर)।
- सूचना प्रतिलिपि फीस [धारा 7(1)]:
- A-4, A-3 पृष्ठ: ₹2 प्रति पृष्ठ।
- बड़े आकार के कागज: वास्तविक लागत।
- सैंपल/मॉडल: वास्तविक लागत।
- निरीक्षण: प्रथम घंटा मुफ्त, उसके बाद प्रत्येक 15 मिनट हेतु ₹5।
- अतिरिक्त माध्यम [धारा 7(5)]
- डिस्क/फ्लॉपी: ₹50 प्रति डिस्क।
- मुद्रित प्रकाशन: नियत कीमत या फोटो प्रति हेतु ₹2 प्रति पृष्ठ।
स्थानीय स्वशासन में RTI ढाँचा
| स्तर | लोक सूचना अधिकारी (PIO) | अपीलीय प्राधिकारी |
| नगर पालिका/परिषद/निगम | अधिशासी अधिकारी/आयुक्त | अध्यक्ष/सभापति/महापौर |
| ग्राम पंचायत | सचिव (VDO) | सरपंच |
| पंचायत समिति | विकास अधिकारी (BDO) | प्रधान |
| जिला परिषद | मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) | जिला प्रमुख |
राजस्थान के मुख्य सूचना आयुक्त
| 1. | श्री एम.डी. कौरानी | सर्वाधिक कार्यकाल |
| 2. | श्री टी. श्रीनिवासन | |
| 3. | श्री सुरेश चौधरी (IPS) | |
| 4. | श्री डी.बी. गुप्ता | न्यूनतम कार्यकाल |
| 5. | श्री मोहन लाल लाठर | वर्तमान मुख्य सूचना आयुक्त (09/07/2024 से) |
कार्यवाहक मुख्य सूचना आयुक्त
| 1. | श्री सी.एम. मीणा |
| 2. | श्री आशुतोष शर्मा |
| 3. | श्री राजेंद्र प्रसाद बरवड़ |
राज्य के पूर्व सूचना आयुक्तों की सूची
| 1. | श्री टी. श्रीनिवासन | (बाद में मुख्य सूचना आयुक्त बने) |
| 2. | डॉ. पी.एल. अग्रवाल | – |
| 3. | श्री चंद्रमोहन मीणा | (कार्यवाहक मुख्य सूचना आयुक्त भी रहे) |
| 4. | श्री आशुतोष शर्मा | (कार्यवाहक मुख्य सूचना आयुक्त भी रहे) |
| 5. | श्री लक्ष्मण राठौड़ | – |
| 6. | श्री राजेंद्र प्रसाद बरवड़ | (कार्यवाहक मुख्य सूचना आयुक्त भी रहे) |
| 7. | श्री नारायण बारेठ | – |
| 8. | श्रीमती शीतल धनकड़ | प्रथम महिला सदस्य |
| 9. | श्री मोहन लाल लाठर | (वर्तमान में मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर) |
वर्तमान में कार्यरत सूचना आयुक्त
| 1. | श्री महेंद्र कुमार पारख | 09/07/2024 से |
| 2. | श्री सुरेश चंद गुप्ता | 09/07/2024 से |
| 3. | श्री टीका राम शर्मा | 09/07/2024 से |
| 4. | सुनील शर्मा | 10/12/2025 से |
