जैव विविधता एवं संरक्षण राजस्थान का भूगोल का एक महत्वपूर्ण विषय है, जिसमें वन्य जीव संरक्षण, स्व: स्थाने एवं बाह्य स्थाने संरक्षण के साथ-साथ राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों, रामसर स्थलों, बाघ परियोजनाओं और जैविक उद्यानों के माध्यम से जैव विविधता को सुरक्षित रखा जाता है।
राजस्थान में विभिन्न अभयारण्यों, मृग वनों, ओरण भूमि तथा राज्य जैव विविधता बोर्ड जैसी संस्थाओं की सहायता से पर्यावरण संतुलन एवं दुर्लभ प्रजातियों जैसे गोडावण के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
- जैव विविधता किसी क्षेत्र में जैविक संगठन के सभी स्तरों पर पाई जाने वाली संयुक्त विविधता है।
- अपनी विविध स्थलाकृति के कारण, राजस्थान समृद्ध जैव विविधता रखता है और वन्यजीवों के लिए विभिन्न प्रकार के आवास प्रदान करता है। असम के बाद, वन्यजीव विविधता के मामले में राजस्थान दूसरे स्थान पर है।
- ऐतिहासिक रूप से, राजस्थान को “शिकारियों का स्वर्ग” कहा जाता रहा है।
वन्य जीव संरक्षण
स्व: स्थाने संरक्षण
- जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में संरक्षित करना ही स्व: स्थाने संरक्षण कहलाता है। वर्तमान में राज्य में (प्रशासनिक रिपोर्ट -2024-25, वन विभाग)
- 3 राष्ट्रीय उद्यान
- 5 बाघ अभयारण्य
- 26 वन्यजीव अभयारण्य
- 40 संरक्षित क्षेत्र (कंज़र्वेशन रिज़र्व)
- 33 आखेट निषिद्ध क्षेत्र
बाह्य स्थाने संरक्षण
- जीवों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर संरक्षित करना बाह्य स्थाने संरक्षण कहलाता है।
- जंतुआलय (जयपुर, कोटा, बीकानेर)
- मृग वन (7): अशोक विहार- जयपुर; माचिया सफारी – जोधपुर आदि
- कैप्टिव प्रजनन केंद्र: जैसलमेर के सम में स्थित ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) संरक्षण प्रजनन केंद्र
- 4 जैविक उद्यान (जोधपुर, उदयपुर, कोटा, जयपुर )
राजस्थान के राष्ट्रीय उद्यान
रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान (1980)
- राजस्थान का पहला और सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान, सवाई माधोपुर जिले में बनास और चंबल नदी के किनारे 283 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।
- इसे वन्यजीव अभयारण्य (1955) और बाघ अभयारण्य (1973) के रूप में स्थापित किया गया था। इसे बाघों का घर भी कहा जाता है।
- पर्यटक आकर्षण – रणथंभौर किला, त्रिनेत्र गणेश मंदिर, जोगी महल और डॉग वैली
- प्रसिद्ध बाघिन का नाम “मछली (टी-16)” है।
- डॉ. कैलाश सांखला (टाइगर मैन) ने इसे राष्ट्रीय उद्यान के रूप में मान्यता दिलाने में सराहनीय कार्य किया है।
- राजस्थान में टाइगर प्रोजेक्ट्स के संस्थापक हैं।
- यह राष्ट्रीय उद्यान अरावली और विंध्य पर्वतमालाओं के बीच स्थित है।

केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य, 1981
- 1956 में वन्यजीव अभयारण्य के रूप मे स्थापित, 1981 में रामसर स्थल, 1985 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (एकमात्र प्राकृतिक धरोहर स्थल)
- इसे पक्षियों का स्वर्ग कहा जाता है
- पानी की कमी और प्रदूषण के कारण इसे मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड में शामिल किया गया है।
- भरतपुर जिले में बाणगंगा और गंभीर नदियों के किनारे स्थित सबसे छोटा राष्ट्रीय उद्यान 29 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।
- प्रमुख आकर्षण – अजगर और साइबेरियाई सारस।
- इस अभयारण्य में अजान बांध स्थित है।
- डॉ. सलीम अली (पक्षी विज्ञानी) – भारत के महान पक्षी विशेषज्ञ, जिनका इस राष्ट्रीय उद्यान से गहरा संबंध है

मुकुंदरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान, 2012
- मुकंदरा पहाड़ियाँ – 297 वर्ग किमी – कोटा व झालावाड़ में फैला हुआ हैं।
- राज्य की तीसरी बाघ परियोजना
- प्रमुख आकर्षण- गागरोन तोता, अबली मीणी महल (कोटा), गागरोन किला, रावठा स्थान। सागवान वनस्पति।

वन्यजीव अभयारण्य
राष्ट्रीय मरू उद्यान अभयारण्य 1980
- 3162 वर्ग किलोमीटर (सबसे बड़ा अभयारण्य), जैसलमेर और बाड़मेर में फैला हुआ है।
- शुष्क वनस्पति में सेवण-लीलन घास पाई जाती है।
- प्रमुख आकर्षण हैं – गोडावण पक्षी (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड), चिंकारा, रेगिस्तानी लोमड़ी, कांटेदार पूंछ वाली छिपकली, आकल वुड जीवाश्म पार्क जुरासिक काल (हाल ही में व्हेल के अवशेष भी पाए गए हैं)

कैलादेवी वन्यजीव अभयारण्य, 1983
- 677 वर्ग किमी (दूसरा सबसे बड़ा), करौली, सवाई माधोपुर में फैला हुआ
- धोक वन
कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य, 1971
- 611 वर्ग किलोमीटर (तीसरा सबसे बड़ा), उदयपुर, पाली और राजसमंद में फैला हुआ है।
- आकर्षण- भेड़िये, रणकपुर जैन मंदिर
- नोट:- इस अभयारण्य के चारों ओर 1 किलोमीटर के दायरे में एक नया संवेदनशील क्षेत्र स्थापित किया जाएगा।

सरिस्का अभयारण्य, 1955–
- अलवर
- राजस्थान की दूसरी बाघ परियोजना 1978
- आकर्षण – मोर और हरे कबूतर, भर्तृहरि मंदिर, नीलकंठ महादेव मंदिर, पांडुपोल मंदिर
सरिस्का ‘अ’ अभयारण्य
- अलवर
- सबसे छोटा और सबसे नया अभयारण्य
ताल छापर अभयारण्य , 1971
- चूरू
- प्रमुख आकर्षण – मोचिया घास, काला हिरण और कुरंजा (डेमोइसेल क्रेन)

जामवा रामगढ़ वन्यजीव अभयारण्य, 1982
- जयपुर
- प्रमुख आकर्षण- जमवा माता मंदिर, धोक वन
नाहरगढ़ वन्यजीव अभयारण्य, 1980
- जयपुर में स्थित यह एक जैविक उद्यान है (स्थानिक संरक्षण क्षेत्र)।
- आकर्षण – भालू संरक्षण केंद्र, दरियाई घोड़ा और सफेद बाघ, लायन सफारी
बाँध बारेठा वन्यजीव अभयारण्य, 1985
- भरतपुर , यहाँ से कुकुंदू नदी बहती है।
- यह एक दर्शनीय स्थल है जिसे “पक्षियों का घर” कहा जाता है। केवलादेव के पक्षी इस अभयारण्य में शरण लेते हैं।
रामसागर वन्यजीव अभयारण्य, 1955
- धौलपुर
वन विहार वन्यजीव अभयारण्य, 1955
- धौलपुर
- आकर्षण – हिरण व तेंदुए
केसर बाग वन्यजीव अभयारण्य, 1955
- धौलपुर
- दर्शनीय स्थल – काले हिरण और चीतल
सवाई मानसिंह वन्यजीव अभयारण्य, 1984
- सवाई माधोपुर
रामगढ़ विषधारी वन्य जीव अभयारण्य, 1982
- बूंदी, मेज नदी इससे होकर बहती है, कनक सागर/डूंगरी बाँध
- प्रमुख आकर्षण – अजगर, चंदन का पेड़ और हल्दी।

जवाहर सागर वन्यजीव अभयारण्य, 1975
- कोटा, बूंदी, चित्तौड़गढ़ तक फैला हुआ है
- आकर्षण – मगरमच्छ
सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य, 1979
- प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़ में फैला हुआ है और जाखम नदी (जाखम बांध), करमोई और नलेसर नदियाँ बहती हैं।
- आकर्षण – अत्यधिक जैव विविधता, चीतल, उड़ने वाली गिलहरी और चार सींग वाले मृग की जन्मभूमि कहलाती है।
- चौसिंगा और अडाहुला पैंगोलिन, सागवान के जंगल और औषधीय पौधे।

भैंसरोड़गढ़ वन्य जीव अभयारण्य, 1983
- चित्तौड़गढ़, चंबल और ब्राह्मणी नदियों के तट पर स्थित है।
- आकर्षण – घड़ियाल
बस्सी वन्यजीव अभयारण्य, 1988
- चित्तौड़गढ़
फुलवारी की नाल अभयारण्य,
- उदयपुर
- मानसी, वाकल, सोम नदियाँ बहती हैं।
जयसमंद वन्यजीव अभयारण्य, 1955
- सलूम्बर,
- जयसमंद झील (जिसे ढेबर झील के नाम से भी जाना जाता है) एशिया की दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम मीठे पानी की झील है।
- जलीय जीव – इसे “जलीय जीवों की बस्ती” के रूप में भी जाना जाता है।
सज्जनगढ़ वन्य जीव अभयारण्य, 1987
- उदयपुर
- प्रमुख आकर्षण – राजस्थान का दूसरा सबसे छोटा अभयारण्य और पहला जैविक पार्क (Biological park)

टॉडगढ़ रावली वन्यजीव अभयारण्य, 1983
- राजसमंद, पाली, ब्यावर में विस्तृत
- आकर्षण – तेंदुए, भालू
माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य, 2008
- सिरोही
- दर्शनीय स्थल- डिक्लीप्टेरा अबू एंसिस पौधा, यूब्लेफेरिस छिपकली, जंगली मुर्गी

शेरगढ़ वन्यजीव अभयारण्य, 1983
- बारां, परवन नदी।
- दर्शनीय स्थल – सांप, शेरगढ़ किला
दर्रा वन्यजीव अभयारण्य, 1955
- कोटा और झालावाड़ तक फैला हुआ है
- आकर्षण – गागरोनी तोता
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य, 1979
- राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के बीच फैला हुआ है।
- राजस्थान के पांच जिलों – धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, बूंदी और कोटा में फैला हुआ है।

अभयारण्य जो एक से अधिक जिलों में फैले हुए हैं।
- राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य – कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, धौलपुर, करौली (प्रसिद्ध – घड़ियाल)
- जवाहर सागर वन्यजीव अभयारण्य – बूंदी, कोटा, चित्तौड़गढ़
- कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य – उदयपुर, पाली, राजसमंद (रणकपुर जैन मंदिर)
- टॉडगढ़ रावली वन्यजीव अभ्यारण्य – राजसमंद, पाली, ब्यावर
- सीतामाता अभयारण्य चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, सलूम्बर (उड़ने वाली गिलहरी, जाखम बांध, सागवान – वनों का एकमात्र अभयारण्य)
- राष्ट्रीय मरू उद्यान – जैसलमेर, बाड़मेर
नदियों व उसके आसपास स्थित अभयारण्य
- राष्ट्रीय चंबल वन्यजीव अभयारण्य: चंबल नदी
- जवाहर सागर अभयारण्य: चंबल नदी
- शेरगढ़ अभयारण्य (बारां ) : परवन नदी
- बस्सी अभयारण्य (चित्तौड़गढ़) : ओराई व बामनी नदियों के संगम पर स्थित।
- भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़) बामनी और ब्राह्मणी नदियों का संगम
- फुलवारी की नाल: मानसी, वाकल और सोम नदी
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संरक्षित क्षेत्र |
ज़िले |
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झुँझूनू |
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सीकर |
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नागौर |
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बारां |
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बीकानेर |
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पाली |
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जालौर, सिरोही |
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जालौर |
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उदयपुर |
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टोंक |
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जोधपुर |
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फलौदी |
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कोटा |
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सिरोही |
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जयपुर |
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कोटपुतली-बहरोड़ |
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अजमेर |
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सीकर |
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जैसलमेर |
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जोधपुर |
राजस्थान में बाघ परियोजनाएँ
| बाघ परियोजनाएँ | बाघ | वर्ग किमी | |
| 1. | रणथम्भौर बाघ रिजर्व (1974) | सवाईमाधोपुर, करौली, बूंदी, टोंक | 1530.23 |
| 2. | सरिस्का बाघ रिजर्व (1978) | अलवर,जयपुर,कोटपुतली-बहरोड़ | 1213.34 |
| 3. | मुकुंदरा हिल्स बाघ रिजर्व (2013) | कोटा, बूंदी,झालावाड़, चित्तौड़गढ़ | 1135.787 |
| 4. | रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व(2021) | कोटा, बूंदी | 1501.89 |
| 5. | धौलपुर-करौली बाघ रिजर्व(2023) | धौलपुर-करौली | 599.6406 |
कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व
- कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व – सरकार की मंजूरी के बाद राजस्थान का छठा बाघ रिजर्व होगा ।
- प्रमुख घटनाक्रम:
- अगस्त 2023 में, एनटीसीए की मंजूरी के बाद, 10 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था। इसने पांच जिलों में फैले 1,397 वर्ग किलोमीटर के आरक्षित क्षेत्र का प्रस्ताव रखा, लेकिन प्रगति रुक गई है।
- स्थानीय निवासियों की विस्थापन और औपचारिक भूमि अधिकारों के अभाव संबंधी चिंताओं ने मुआवजे में बाधाएं उत्पन्न कर दी हैं।\
- विशेषज्ञों की रिपोर्ट (जो 30 अक्टूबर को प्रस्तुत की गई) में मुख्य क्षेत्र, बफर जोन और बाघों के महत्वपूर्ण आवास का विवरण दिया गया था, लेकिन अधिकारियों ने कुछ विवरणों के गायब होने पर चिंता व्यक्त की।
- रिजर्व के बीच से होकर गुजरने वाली सार्वजनिक सड़कों जैसी बुनियादी ढांचागत चुनौतियों का अभी तक समाधान नहीं किया गया है।
- भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) ने शिकार की उपलब्धता का आकलन किया, लेकिन पूरे अभयारण्य के लिए नियोजित अध्ययन अभी तक शुरू नहीं हुआ है।
- पारिस्थितिक महत्व:इस क्षेत्र में सबसे अधिक शाकाहारी जीव कुंभलगढ़ में पाए जाते हैं।2024 की वन्यजीव रिपोर्ट में 15,000 से अधिक जंगली जानवरों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है।
राजस्थान में रामसर स्थल
- केवलादेव (1981) – साइबेरियाई सारस
- सांभर (1990) – कुरंजा व फ़्लेमिंगो
- फलौदी का खीचन व उदयपुर का मेनार – इन्हें 2025 में रामसर स्थलों की सूची में शामिल किया गया है।
- 12 दिसंबर 2025 को अलवर स्थित सिलीसेढ़ झील को रामसर का दर्जा प्राप्त हुआ और यह देश का 96वां रामसर स्थल बन गया।
- वर्तमान मे राजस्थान कुल पांच रामसर स्थल स्थित है

राजस्थान के जैविक उद्यान
| जैविक उद्यान | स्थापना |
| सज्जनगढ़ जैविक उद्यान (उदयपुर) | 12 अप्रैल, 2015 |
| माचिया जैविक उद्यान (जोधपुर) | 20 जनवरी, 2016 |
| नाहरगढ़ जैविक उद्यान (जयपुर) | 4 जून, 2016 |
| अभेडा जैविक उद्यान(कोटा ) | दिसंबर 2021 |
राजस्थान में मृग वन
| दुर्ग | चित्तौड़गढ़ |
| सज्जनगढ़ | उदयपुर |
| माचिया सफारी | जोधपुर |
| संजय उद्यान | जयपुर |
| पुष्कर | अजमेर |
| अशोक विहार | जयपुर |
| अमृता देवी मृग वन | जोधपुर |
राजस्थान में आखेट निषिध क्षेत्र = 33
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नाम |
संबद्ध जिला |
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उदयपुर |
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जोधपुर |
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अजमेर |
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जालौर |
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बीकानेर |
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जयपुर |
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नागौर |
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अलवर |
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चित्तौड़गढ़ |
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चूरू |
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पाली |
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सवाई माधोपुर |
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बाड़मेर |
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जैसलमेर |
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बारां |
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टोंक |
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बूंदी |
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राजस्थान के जिलों के शुभंकर
| ज़िला | शुभंकर |
| बारां | मगरमच्छ |
| भीलवाड़ा | मोर |
| चूरू | काला हिरण |
| चित्तौड़गढ़ | चौसिंगा |
| बूंदी | सुर्खाब |
| बीकानेर | बटबड़ |
| भरतपुर | साइबेरियाई सारस |
| बाड़मेर | मरू लोमड़ी |
| अलवर | सांभर |
| बांसवाड़ा | जलपीपी |
| अजमेर | खडमौर पक्षी |
| झुँझूनू | काला तीतर |
| हनुमानगढ़ | छोटा किलकिला (किंगफिशर) |
| डूंगरपुर | जांघिल |
| धौलपुर | पंछीरा |
| दौसा | खरगोश |
| जैसलमेर | गोडावन |
| नागौर | राजहंस |
| कोटा | ऊदबिलाब |
| करौली | घड़ियाल |
| जोधपुर | कुरंजा पक्षी |
| झालावाड़ | गाग़रोनी तोता |
| जालोर | भालू |
| सवाई माधोपुर | बाघ |
| टोंक | हंस |
| राजसमंद | भेड़िया |
| प्रतापगढ़ | उड़न गिलहरी |
| पाली | तेंदुआ |
| सिरोही | जंगली मुर्गा |
| उदयपुर | बिज्जू |
| जयपुर | चीतल |
| श्री गंगानगर | चिंकारा इसे 1981 में राज्य पशु घोषित किया गया था।वैज्ञानिक नाम – “गज़ेला गजेला” |
| सीकर | शाहीन |
राजस्थान की प्रमुख वन्य जीव सफारी
लेपर्ड सफारी = 6
- झालाना लेपर्ड सफारी – जयपुर
- आमागढ़ लेपर्ड सफारी – जयपुर
- जवाई तेंदुआ अभयारण्य- पाली
- कुंभलगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य
- बीड पापड़ सफारी-जयपुर
- भैरव घाटी – अजमेर
लायन सफारी = 2
- नाहरगढ़ – जयपुर
- सज्जनगढ़ – उदयपुर
टाइगर सफारी = 5
- रणथम्भौर
- सरिस्का
- मुकुन्दरा हिल्स
- रामगढ़ विषधारी
- धौलपुर करौली
ओरण भूमि
- राजस्थान में ‘ओरण’ पवित्र वन क्षेत्र हैं, जिनकी पारंपरिक रूप से ग्रामीण समुदायों द्वारा संरक्षण और प्रबंधन किया जाता है। ये वन क्षेत्र एक गहरी सामाजिक-धार्मिक परंपरा के हिस्से के रूप में स्थानीय देवी-देवताओं को समर्पित हैं।
- राजस्थान में लगभग 25,000 ओरणस्थल हैं, जो सामूहिक रूप से रेगिस्तानी भूभाग में 6 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को कवर करते हैं।
- राजस्थान में ओरण को देवरा, मालवन, देवराई, राखत, बनी, देव घाट, मंदिर वन और बाग भी कहा जाता है।
- ओरण में बड़ी संख्या में खेजड़ी के पेड़ (प्रोसोपिस सिनेरिया), काले हिरण और नीलगाय भी पाए जाते हैं जो राजस्थान के बिश्नोई समुदाय के लिए भी पवित्र हैं।
संबंधित सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय
- 18 दिसंबर 2024 को दिए गए एक ऐतिहासिक फैसले में, सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को ओरण भूमि का विस्तृत मानचित्रण करने का निर्देश दिया।
- सुप्रीम कोर्ट ने राज्य को ‘ओरण’ को वन के रूप में वर्गीकृत करने के लिए केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) की 2005 की सिफारिशों को लागू करने का निर्देश दिया।
- हालांकि, राजस्थान वन नीति, 2023 ने ‘ओरण’ को सामान्य सामुदायिक भूमि के रूप में वर्गीकृत किया है, एक ऐसी स्थिति जिसे कानूनी संरक्षण के लिए अपर्याप्त माना जाता है, जिससे वे अतिक्रमण और पारिस्थितिक गिरावट के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं।
- जुलाई 2025 में राजस्थान सरकार ने जस्टिस जितेंद्र गोयल की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया।
गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड)
- आवास: 6 राज्य : आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान (पहले 11 राज्य)
- स्थिति: गंभीर रूप से संकटग्रस्त (IUCN) : जंगल में 150 से भी कम ग्रेट इंडियन बस्टर्ड बचे हैं।
- संरक्षण हेतु उपाय: ग्रेट इंडियन बस्टर्ड प्रोजेक्ट – 2013
- संरक्षित क्षेत्र राजस्थान में राष्ट्रीय मरू उद्यान
- कच्छ बस्टर्ड अभयारण्य, गुजरात
- जवाहरलाल नेहरू बस्टर्ड अभयारण्य, महाराष्ट्र
- आंध्र प्रदेश में स्थित रोलापाडु वन्यजीव अभयारण्य।
- जैसलमेर के सम में GIB संरक्षण प्रजनन परियोजना – 2019
- सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप: हालांकि, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि अदालत के उस आदेश का पालन करना संभव नहीं है जिसमें बिजली की लाइनों को भूमिगत करने को कहा गया है, जबकि वे गोडावनों के आवास क्षेत्र से होकर गुजरती हैं।
राजस्थान वानिकी एवं जैव विविधता विकास परियोजना- AFD
- वित्तपोषित: फ्रांसीसी विकास एजेंसी (AFD) द्वारा 2023-24 से 2030-31 तक आठ वर्षों के लिए शुरू की गई परियोजना।
- शामिल जिले: यह परियोजना राजस्थान के 13 जिलों – अलवर, बारां, भीलवाड़ा, भरतपुर, बूंदी, दौसा, धौलपुर, जयपुर, झालावाड़, करौली, कोटा, सवाई माधोपुर और टोंक में लागू की जा रही है।
- उद्देश्य: इसमें राज्य के पूर्वी क्षेत्र में जैव विविधता के संरक्षण और पर्णपाती वन संसाधनों को बढ़ाने के उद्देश्य से 800 गांवों में गतिविधियां शामिल हैं।
- आरएफबीडीपी का प्राथमिक लक्ष्य सामुदायिक सशक्तिकरण के माध्यम से जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने के लिए जैवविविधता का संरक्षण करना और वन संसाधनों को बढ़ाना है।
- यह जैव विविधता पर मानवीय गतिविधियों के प्रभावों को संबोधित करता है, टिकाऊ पारिस्थितिक तंत्र को बढ़ावा देता है और नवीन तरीकों और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित करता है।
राजस्थान राज्य जैव विविधता बोर्ड
- भारत सरकार द्वारा अधिसूचित जैव विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत राजस्थान राज्य जैव विविधता बोर्ड का गठन किया गया है। राजस्थान राज्य ने जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 63(1) के तहत राजस्थान जैव विविधता नियम, 2010 को अधिसूचित किया है।
