राजस्थान की प्राकृतिक वनस्पति

राजस्थान की प्राकृतिक वनस्पति राजस्थान का भूगोल विषय का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो राज्य की जलवायु, स्थलाकृति तथा वर्षा की मात्रा के अनुसार विकसित हुई है। यहाँ शुष्क मरुस्थलीय क्षेत्रों से लेकर अर्ध-शुष्क तथा पर्वतीय क्षेत्रों तक विविध प्रकार की वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। राजस्थान की प्राकृतिक वनस्पति राज्य की पारिस्थितिकी, जैव-विविधता और मानव जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है।

उष्णकटिबंधीय कांटेदार/ज़ीरोफ़ाइट वन 

  • राजस्थान के क्षेत्रफल का 6%
  • 0-30 सेंटीमीटर वर्षा।
  • शुष्क मरुस्थलीय क्षेत्र-जैसलमेर, बाड़मेर (बालोतरा), बीकानेर जोधपुर (फलौदी)।
  • कांटेदार झाड़ियाँ, कैक्टस, बेर, खैर, एलोवेरा। 
  • मरुस्थलीकरण को रोकता है।

उष्णकटिबंधीय धोंक वन

  • राजस्थान के क्षेत्रफल का 58% भाग।
  • 30-60 सेमी बारिश
  • अर्ध-शुष्क क्षेत्रों
  • शेखावाटी, नागौर, लूनी बेसिन, सवाई माधोपुर, करौली।
  • खेजड़ी, रोहिड़ा, बबूल, बेर, केर, बबूल, ढोक 

उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती/मानसून

  • राजस्थान के क्षेत्रफल का 28% भाग।
  • 50-80 सेंटीमीटर वर्षा
  • अलवर, भरतपुर, करौली, धौलपुर, जयपुर, टोंक, दौसा, उदयपुर, सलूम्बर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, राजसमंद
  • साल, सागवान, आम, गुलाब की लकड़ी, चंदन, बांस, नीम
  • आर्थिक महत्व की लकड़ी की आपूर्ति की जाती है

उष्णकटिबंधीय सागवान वन

  • राजस्थान के क्षेत्रफल का 7%।
  • 75-110 सेमी वर्षा
  • बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, कोटा, बारां, झालावाड़
  • महुआ, गूलर, तेंदू, पलाश, आम, शीशम

उपोष्णकटिबंधीय सदाबहार वन

  • राजस्थान के क्षेत्रफल का 1%
  • लगभग 150 सेंटीमीटर वर्षा 
  • माउंट आबू, सिरोही 
  • जामुन, बांस, अंबारतारी (डिकलेप्टेरा अबुएन्सिस)
राजस्थान की प्राकृतिक वनस्पति
  • सेवण/लीलण (लेसियुरस सिंडिकस),पश्चिमी राजस्थान (जैसलमेर में अधिकतम), पौष्टिक घास, गोडावण का आश्रय स्थल
  • बुर  घास बीकानेर और चूरू, सुगंधित घास
  • मोचिया– चूरू, ताल छापर :- काला हिरण इसे खाता है।
  • खस घास – भरतपुर, सवाईमाधोपुर, टोंक, अजमेर 
  • सुगन्धित पदार्थ, सिरप बनाए जाते हैं
  • बांस (बंबूसा वल्गरिस) – बाँसवाड़ा, इसे हरा सोना भी कहा जाता है।
  • मोठा घास – मुख्य रूप से भरतपुर में पाई जाती है और पक्षियों द्वारा उपयोग की जाती है।
  • धामण घास – (सेन्क्रस सिलियारिस) – दुधारू पशुओं के लिए जैसलमेर में सर्वाधिक।
राजस्थान की प्राकृतिक वनस्पति

महत्वपूर्ण वन संपदा और घास

  • खेजड़ी 
    • वैज्ञानिक नाम प्रोसोपिस सिनेरिया (अधिकतम – पश्चिमी राजस्थान)
    • अन्य नाम – राज्य वृक्ष (1983)/राज्य का गौरव/शमी वृक्ष/राज्य का कल्पवृक्ष/जांटी 
  • नोट:- खेजड़ी की पूजा विजयदशमी/दशहरा के अवसर पर की जाती है।
  • रोहिङा 
    •  वैज्ञानिक नाम
    • टीकोमेला अंडुलेटा (अधिकतम – पश्चिमी राजस्थान)
    • अन्य नाम – राज्य फूल (1983)/मरुस्थल का सागौन।
  • महुआ
    • वैज्ञानिक नाम: मडुका लोंगिफोलिया (अधिकतम – डूंगरपुर)
    • इसे “जनजातियों का कल्पवृक्ष”कहा जाता है
    • महुआ के फूल का इस्तेमाल शराब बनाने में किया जाता है।
  • पलाश/ढाक/खकरा
    • वैज्ञानिक नाम – ब्यूटिया मोनोस्पर्मा(अधिकतम – राजसमंद)
    • इसे  ‘जंगल की ज्वाला’ नाम से भी जाना जाता है
  • डिक्लिप्टेरा अबू एनसिस/अम्बरतरी– यह एक औषधीय पौधा है जो दुनिया में केवल माउंट आबू में ही पाया जाता है।
  • ‭ खैर  -‬‭ (अधिकतम – उदयपुर, चित्तौडग़ढ़)‬
  • उदयपुर, चित्तौड़गढ़ में कथोड़ी जनजाति द्वारा इस पेड़ की छाल से “कत्था” तैयार किया जाता है।
  • शहतूत – (अधिकतम – उदयपुर)
  • इस पेड़ पर रेशम के कीड़े से रेशम का उत्पादन होता है। रेशम पालन की इस प्रक्रिया को रेशम उत्पादन कहते हैं।
  • तेंदू (अधिकतम प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़ एवं हाड़ौती)
    • इसके पत्तों का इस्तेमाल बीड़ी बनाने में किया जाता है।
    • इसके फलों को “टिमरू” कहा जाता है।
    • तेंदू के पेड़ का राष्ट्रीयकरण 1974 में किया गया था।
  • प्रकाशन :- भारतीय वन सर्वेक्षण (देहरादून) और राजस्थान वन विभाग (जयपुर) द्वारा 1987 से (प्रत्येक दो वर्ष में)
  • 18वीं रिपोर्ट 2023 में प्रकाशित हुई थी।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान के कुल क्षेत्रफल का लगभग 9.6% यानी 330,14 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वनों से आच्छादित है।
  • राज्य वन नीति, 18 फरवरी, 2010 – राज्य के भौगोलिक क्षेत्र के 20% हिस्से को लक्षित करती है
  • राज्य ईको टूरिज्म नीति (1 फरवरी – 4 फरवरी 2010) (2 फरवरी – 15 जुलाई 2021)
  • वन क्षेत्र के मामले में राजस्थान का भारत में 15वां स्थान है।
  • भारतीय राज्य वन रिपोर्ट 2023 के अनुसार, वनस्पति आवरण के संदर्भ में वन क्षेत्र लगभग 16,548.21 वर्ग किलोमीटर है, जो राजस्थान के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 4.84% है।
  • वृक्ष आवरण – वन विभाग के अनुसार – 1 हेक्टेयर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले वृक्षों का समूह, जिसका कैनोपी  घनत्व 10% से अधिक हो
  • अभिलेखित वन -9.64% (33014  वर्ग किमी)
  •  वृक्ष और वन आवरण– 8.0% (27389.33 वर्ग किमी) – 394.46 वर्ग किमी की वृद्धि
  • वन आवरण- 4.84% (16548.21 वर्ग किमी) – 83.80 वर्ग किमी की गिरावट
  • वृक्ष आवरण– 3.16% (10841.12 वर्ग किमी) – 478.26 वर्ग किमी की वृद्धि
राजस्थान की प्राकृतिक वनस्पति
वन क्षेत्रफल (वर्ग किमी में)भौगोलिक क्षेत्र का %
अति सघन वन (<70% छत्र  घनत्व)अलवर (सर्वाधिक)
0.07%
मध्यम सघन वन (40-70% छत्र घनत्व)उदयपुर 1.24%
खुले वन (10-40% छत्र घनत्व)उदयपुर 3.53%
कुल16548.21 4.84%
झाड़ियाँ (<10% छत्र घनत्व)4808.511.41%
तथ्यसबसे अधिक खुले वन  – उदयपुरकुल 21  जिलों में वन क्षेत्र में कमी आई है और 12  जिलों में वृद्धि हुई है।
सबसे ऊँची झाड़ियाँ – पाली
अधिकतम पाली, अलवर, जयपुर
न्यूनतम हनुमानगढ़, श्री- गंगानगर, चुरू

वानिकी पुरस्कार

अमृता देवी विश्नोई पुरस्कार – 1994 से प्रारंभ

  • उद्देश्य – वृक्षारोपण, वन संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण।
  • प्रथम पुरस्कार – गंगाराम बिश्नोई (पाली)
तीन श्रेणियाँ 
व्यक्तिगत (वन  संरक्षण )50,000 हजार ₹व्यक्तिगत (वन्य जीव संरक्षण)50,000 हजार  ₹संगठन 1 लाख

कैलाश सांखला पुरस्कार – (टाइगर मैन)

  • वन्यजीव संरक्षण के लिए
  • पुरस्कार  –  1st – 5 Lakh, 2nd – 3 Lakh, 3rd – 2 lakh

राजीव गांधी पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार

  • राज्य सरकार द्वारा 2012 में शुरू किया गया
  • उद्देश्य – पर्यावरण की रक्षा करना
  • यह पुरस्कार प्रत्येक वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस – 5 जून को दिया जाता है।
  • पुरस्कार राशि -1st – 5 Lakh, 2nd – 3 Lakh, 3rd – 2 lakh

इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्ष मित्र पुरस्कार

  • शुरुआत – 1986
  • पुरस्कार राशि – 2.5 लाख रु. (व्यक्तिगत/संगठनात्मक)
  • भारत के वन विभाग द्वारा दिया गया।

वन पालक पुरस्कार

  • वन विभाग के कर्मचारी/अधिकारी को

प्रमुख वानिकी कार्यक्रम

अरावली वृक्षारोपण परियोजना

  • शुरुआत – 1 अप्रैल, 1992 को एक जापानी सहयोग से 
  • उद्देश्य – अरावली क्षेत्र में जैव विविधता का संरक्षण करना।

सामाजिक वानिकी कार्यक्रम

  • प्रारंभ – 1985 – 86
  • उद्देश्य – पंचायत की भूमि, चारागाह भूमि और परती भूमि पर वृक्षारोपण।
  • वृक्षविहीन पहाड़ियों या सड़क किनारे वृक्षारोपण।

ऑपरेशन खेजड़ी कार्यक्रम

  • शुरुआत – 1991
  • उद्देश्य – राजस्थान में मरुस्थलीकरण को रोकना

रुख भायला कार्यक्रम

  • शुरुआत  – 1986, डूँगपुर से

मरुस्थल विकास कार्यक्रम

  • प्रारंभ – 1977-78 निधि अनुपात – केंद्र (75%) : राज्य (25%)

घर – घर औषधि परियोजना

  • प्रारंभ तिथि – 1 अगस्त 2021, राजस्थान वन विभाग द्वारा
  • वृक्ष वितरण 
  1. तुलसी 
  2. अश्वगंधा
  3. गिलोय
  4. कालमेघ

महत्वपूर्ण तथ्य

  • जापान की अंतरराष्ट्रीय निगम एजेंसी डीएक्स लैब फॉरेस्ट स्टैक के विकास में मदद कर रही है। प्रथम चरण में सिरोही, पाली और भीलवाड़ा में स्टैक प्रणाली विकसित की गई हैं।
  • वन और वृक्ष आवरण – 25.17% (82,357)वर्ग किमी) – 1445 वर्ग किमी की वृद्धि हुई।
  • वन क्षेत्र – 21.76% (7,15,343 वर्ग किमी) – 156 वर्ग किमी की वृद्धि
  • वृक्ष आवरण – 3.41% (1,12,014 वर्ग किमी) – 1289 वर्ग किमी की वृद्धि
  • मौजूदा आकलन में, देश के जंगलों में कुल कार्बन भंडार 7,285.5 मिलियन टन होने का अनुमान लगाया गया है (पिछले आकलन की तुलना में 81.5 मिलियन टन की वृद्धि)।
  • राजस्थान उन चार राज्यों में शामिल है जहां वन और वृक्ष आवरण में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई है।
  1. छत्तीसगढ़ (684 वर्ग किमी)
  2. उत्तर प्रदेश (559 वर्ग किमी)
  3. ओडिशा (559 वर्ग किमी)
  4. राजस्थान (394 वर्ग किमी.)

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

function getUTM(param) { const urlParams = new URLSearchParams(window.location.search); return urlParams.get(param); } document.addEventListener("DOMContentLoaded", function() { const utmParams = ["utm_source","utm_medium","utm_campaign","utm_term","utm_content"]; utmParams.forEach(function(param){ let value = getUTM(param); if(value){ let field = document.querySelector('input[name="'+param+'"]'); if(field){ field.value = value; } } }); });
error: Content is protected !!
×
New RAS course according to updated syllabus
Visit youtube channel now
Scroll to Top
Telegram WhatsApp Chat