विश्व के मैदान और रेगिस्तान: वितरण और प्रमुख क्षेत्र

विश्व के मैदान और रेगिस्तान: विश्व भूगोल के अंतर्गत मैदान और रेगिस्तान पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप हैं, जो मानव जीवन, जलवायु और संसाधनों को प्रभावित करते हैं। मैदान उपजाऊ और घनी आबादी वाले क्षेत्र होते हैं, जबकि रेगिस्तान शुष्क जलवायु और कम वर्षा वाले क्षेत्र होते हैं।

  • भू-पटल पर मैदान द्वितीयक श्रेणी के उच्चावचों में सर्वाधिक सरल तथा स्पष्ट होते हैं। 
  • समुद्र तल से मैदानों की ऊँचाई लगभग 200 मीटर होती है। 
  • मैदान धरातल के लगभग 55 प्रतिशत भाग पर फैले हुए हैं।
  • अपेक्षाकृत समतल, क्रमिक व मन्द ढाल तथा निम्न उच्चावच वाले धरातलीय भू-भाग को मैदान कहते हैं। 
  • समुद्रतल से ऊँचाई की दृष्टि से मैदान में काफी असमानता है, जैसे- हॉलैंड का पोल्डर्स मैदान समुद्रतल से भी नीचा है तो कश्मीर में झील मैदान 1700 मीटर की ऊँचाई पर है वहीं भारत का उत्तरी मैदान डेल्टा के निकट 1.8 मीटर से लेकर पंजाब में 200 मीटर तक ऊँचा है।
  • विश्व के अधिकतर मैदानों का निर्माण नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी से होता है। इसके अलावा कुछ मैदानों का निर्माण ज्वालामुखी, हिमानी तथा वायु के द्वारा भी होता है।

मैदानों का वर्गीकरण-

रचनात्मक या पटलविरूपणी मैदान (Constructive or diastrophic plain) – 

  • महाद्वीपीय निमग्न तट के उत्थान अथवा भूमि के नीचे धंसने के कारण बने मैदान रचनात्मक मैदान कहलाते  हैं। 
  • पटलविरूपणी क्रिया के अन्तर्गत महादेशजनक बलों द्वारा भू – भागों में उत्थान तथा अवतलन होता है। 
  • भू-संचलन के फलस्वरूप जब कोई स्थलखंड का सागर से निर्गमन होता है, तो संरचनात्मक मैदान का निर्माण होता है। जैसे-यू. एस. ए. का विशाल मैदान एवं रूस का रूसी प्लेटफार्म । निर्गमन के बाद इन मैदानों के विकास में जल एवं हिमानी के अपरदन तथा निक्षेपण का भी योगदान है।
  • सागरीय तट के पास स्थलमंडल के सागर तल से ऊपर उठने के फलस्वरूप, तटीय मैदान का निर्माण होता है। जैसे- संयुक्त राज्य अमेरिका का अटलांटिक तटीय मैदान।
  • सागरीय तट, यदि भू-संचलन के फलस्वरूप निमज्जित हो जाता है, तो वह निक्षेपण के फलस्वरूप मैदान में परिवर्तित हो जाता है। जैसे- भारत का कर्नाटक एवं पूर्वी तटीय मैदान ।

अपरदनात्मक मैदान (Erosional plain)– 

अपरदन की क्रिया द्वारा दीर्घकाल में पर्वत तथा पठार नदी, पवन, हिमानी तथा सागरीय लहरों जैसे कारकों द्वारा अपघटित होकर मैदानों का रूप ले लेते हैं।–

  1. नदी द्वारा निर्मित अपरदनात्मक मैदान – 
  • जब नदियाँ उच्च स्थल खंड (पठार, पहाड़ आदि) को अपरदन की क्रिया द्वारा काटती हैं तथा अपने आधार तल को प्राप्त कर लेती हैं। इस प्रकार निर्मित मैदान को ‘पेनीप्लेन’ या ‘समप्राय मैदान’ कहते हैं। 
  • समप्राय मैदान में प्रतिरोधी चट्टानें अपरदित नहीं होती तथा इन चट्टानों के भाग छोटे छोटे टीलों या छोटी पहाड़ियों के रूप में दृष्टिगत होते है जिन्हें मोनाड्नोक कहते है। पेरिस व लन्दन बेसिन इसी तरह के मैदान है 
  1. हिमानी द्वारा अपरदित मैदान- 
  • उच्च पर्वत शिखरों एवं उच्च आक्षांशों पर हिमावरण छाया रहता है। बर्फ के नीचे का धरातल रगड़ और घर्षण के द्वारा समतल होता रहता है।
  • हिमानी घर्षित मैदानों में चोटियाँ गोलाकार तथा घाटियाँ चौड़ी होती हैं। इसके द्वारा गड्‌ढों का निर्माण होता है। जिसमें जल भर जाने से, ये मैदान झील का रूप ले लेते हैं। कई जगह दलदली भाग पाए जाते हैं। 
  • कनाडा, स्वीडन, फिनलैंड में हिमानीकृत मैदान पाए जाते हैं।
  1. पवन द्वारा अपरदित मैदान- 
  • मरुस्थलीय भागों से चट्‌टानें यांत्रिक अपक्षय द्वारा विघटित तथा वियोजित हो जाती हैं। जिसके कारण ये चट्‌टानें ढीली पड़ जाती हैं। तीव्र वेग वाली पवनें इन ढीले कणों को दूसरे स्थान पर ले जाकर जमा कर देती हैं। यह क्रिया द्वारा पेडीप्लेन मैदानों का निर्माण होता हैं। जैसे – हमादा।
  1. चूनेदार मैदान या कार्स्ट मैदान- 
  • जिन क्षेत्रों में चूने की चट्‌टानें पाई जाती हैं वहाँ भूमिगत जल की क्रिया से ऊपरी तथा निचली सतह में अपरदन होता रहता है जिससे दीर्घकाल में अधिकांश भाग कटकर नीचे हो जाता है तथा एक निम्न मैदान  का निर्माण होता है। 
  • भारत में नैनीताल व अल्मोड़ा, युगोस्लाविया तथा फ्रांस के चुना प्रदेशो में इसके उदाहरण मिलते है।

निक्षेपात्मक मैदान (Depositional plain)- 

निक्षेप द्वारा निर्मित मैदान बड़े तथा छोटे होते हैं। अपरदन के विभिन्न कारकों द्वारा निक्षेपित मैदानों का निम्नलिखित भागों में विभक्त किया जा सकता हैं – 

  1. नदी द्वारा निक्षेपित मैदान- नदियाँ जब उच्चतम भाग से निक्षेपों को बहाकर निम्न भागों में लाती हैं तो सर्वाधिक विस्तृत मैदानों का निर्माण करती हैं।
  1. गिरिपद जलोढ़ मैदान (Piedmont alluvial plain) – नदी के निक्षेप द्वारा निर्मित मैदानों को ‘जलोढ़ मैदान’ कहते हैं। जब नदियाँ कंकड़, पत्थर, बालू को पर्वतों या पहाड़ों के पाद के पास जमा कर देती हैं तब वहाँ जलोढ़ पंख (Alluvial fan) का निर्माण होता है। कई जलोढ़ पंख मिलकर एक मैदान का निर्माण करते हैं। जिसे गिरिपद जलोढ़ मैदान कहते हैं।
  2. बाढ़ के मैदान- बाढ़ के समय नदी का जल जितनी दूर फैल कर, बारीक कणों का निक्षेपण करता है, वहाँ तक निर्मित मैदान को बाढ़ का मैदान कहा जाता है। बाढ़ के मैदान का निर्माण जलोढ़/काँप/कछारी मिट्‌टी द्वारा होता है जो कृषि के लिए अत्यधिक उपजाऊ होती है। कछारी मैदान को प्राय: निम्नलिखित भागों में विभक्त किया जाता है-
  1. खादर मैदान- जहाँ प्रतिवर्ष बाढ़ का जल पहुँच जाता है तथा नवीन काँप मृदा का निक्षेप होता रहता है, उस भाग को खादर मैदान कहा जाता है।
  2. बांगर मैदान- जहां बाढ़ का जल नहीं पहुंच पाता है, उन भागों को बांगर मैदान कहा जाता है। 
  3. नील, गंगा, सतलज, मिसीसीपी आदि नदियों द्वारा बने बाढ़ के मैदान खादर तथा बांगर मैदान का निर्माण करते हैं।
  4. डेल्टा का मैदान – जब नदियाँ सागरों या झीलों में गिरती हैं तब मुहाने के पास निक्षेपों का जमाव करती हैं जिसे ‘डेल्टा’ कहते हैं। डेल्टा प्राय: त्रिभुजाकार आकार के होते हैं। यह ग्रीक भाषा के अक्षर ∆ के रूप में दिखाई देता है। अत: इस मैदान को ‘डेल्टा’ कहते है।सिन्धु, मिसीसिपी, गंगा आदि नदियों के मुहाने पर बने मैदान डेल्टाई मैदान हैं।
  1. झीलकृत मैदान – झीलकृत मैदान का निर्माण दो रूपों में होता है। प्रथम रूप में जब नदियाँ, अवसादों का झील में निक्षेप करती रहती हैं। तब झीलों की गहराई कम हो जाती है तथा धीरे-धीरे निक्षेपों द्वारा झील भर जाती है और एक सपाट मैदान का निर्माण होता है। दूसरे रूप में पृथ्वी के अन्तर्जात बल के कारण पटलविरूपणी संचलन से झील का तल ऊपर उठ जाता है। जिससे उसका जल बह जाता है और एक मैदान का निर्माण होता है। झीलकृत मैदान का विस्तार उस झील विशेष के आकार पर निर्भर करता है। कनाडा, पश्चिम यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका में ऐसे अनेक मैदान हैं। हंगरी का मैदान 
  2. लावा मैदान – जब ज्वालामुखी उद्गार से निकले लावा का पतली चादर के रूप में निक्षेप होने से सपाट भाग का निर्माण होता है तो उसे लावा मैदान कहा जाता है। लावा निर्मित पठार के अपरदन से भी मैदान निर्माण होता है। आइसलैण्ड, अर्जेंटीना, संयुक्त राज्य अमेरिका आदि में लावा मैदान के उदाहरण मिलते हैं।
  3. पवन द्वारा निक्षेपित मैदान – पवन जब शुष्क क्षेत्रों में तेज गति से प्रवाहित होती है तो बालू या रेत उड़ाकर अन्य स्थानों पर जमा कर देती है इस तरह दो प्रकार के मैदान निर्मित होते हैं।
    1. मरुस्थलीय मैदान – मरुस्थलीय भागों में हवा बालू या रेत को अन्य स्थानों पर निक्षेपित कर मैदान का निर्माण करती हैं इसे रेगिस्तानी मैदान भी कहा जाता हैं। उदाहरण – भारत का थार मरुस्थल, अफ्रीका के सहारा मरुस्थल।
    2. लोयस मैदान – मरुस्थलीय भागों में चलने वाली आंधियाँ रेत के कणों को अधिक दूर ले जाकर अन्यत्र जमा कर देती हैं जिससे एक मैदान का निर्माण होता है इसे लोयस का मैदान कहते हैं। चीन के शेन्सी प्रान्त में निर्मित लोयस मैदान विश्व प्रसिद्ध है।
  4. हिमानी द्वारा निक्षेपित मैदान – हिमानी द्वारा मलबे के निक्षेप से मैदानों का निर्माण होता है जिन्हें हिमानीकृत मैदान कहा जाता है। इन मैदानों की सतह समतल नहीं होती तथा दलदली एवं ऊबड़-खाबड़ होते हैं। हिम रेखा के नीचे हिमानी द्वारा लाये गए कंकड़, पत्थर व बजरी जमा होने से मृतिका [टिल] मैदान तथा हिमानी के पिघले जल द्वारा बारीक मिटटी के निक्षेपण से अवक्षेप मैदान का निर्माण होता है

उत्तरी अमेरिका

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मैदान

अवस्थिति

विशेषताएँ

ग्रेट प्लेन्स (महान मैदान)

कनाडा (अल्बर्टा, सस्केचेवान और मैनिटोबा)मध्य संयुक्त राज्य अमेरिका (मोंटाना, नॉर्थ डकोटा, साउथ डकोटा, नेब्रास्का, कंसास, ओकलाहोमा और टेक्सास)

  • विशाल समतल घास भूमि क्षेत्र
  • प्रमुख गेहूँ उत्पादक क्षेत्र (उत्तरी अमेरिका का अन्नागार)
  • नदी निक्षेपण एवं अपरदन से निर्मित
  • अर्ध-शुष्क से उप-आर्द्र जलवायु

तटीय मैदान

पूर्वी एवं दक्षिण-पूर्वी अमेरिका, अटलांटिक महासागर एवं मेक्सिको की खाड़ी के किनारे

  • निचले उपजाऊ मैदान
  • कृषि एवं मानव बसावट के लिए महत्वपूर्ण
  • अनेक नदियाँ डेल्टा एवं मुहाने (नदमुख) बनाती हैं
  • आर्द्र जलवायु एवं घनी जनसंख्या

दक्षिण अमेरिका

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मैदान

अवस्थिति

विशेषताएँ

लानोस मैदान

वेनेजुएला एवं कोलंबिया

  • एंडीज पर्वत और गुयाना उच्च भूमि के बीच स्थित उष्णकटिबंधीय घासभूमि मैदान
  • ओरिनोको नदी द्वारा सिंचित

तटीय मैदान

पूर्वी ब्राज़ील

  • रियो डी जेनेरो, साओ पाउलो एवं रेसिफे जैसे प्रमुख नगर स्थित
  • गन्ना एवं कॉफी की खेती

एंट्रे रियोस मैदान

अर्जेंटीना एवं उरुग्वे

  • पराना और उरुग्वे नदियों के बीच स्थित

पम्पास मैदान

मध्य अर्जेंटीना, उरुग्वे के कुछ भाग एवं दक्षिणी ब्राज़ील

  • विश्व के सर्वाधिक उपजाऊ मैदानों में से एक

यूरोप

Major Plateaus of the World

मैदान

अवस्थिति

विशेषताएँ

केंद्रीय मैदान

आयरलैंड

  • शैनन नदी

केंद्रीय मैदान

ग्रेट ब्रिटेन

फ्रांस के मैदान

उत्तरी एवं पश्चिमी फ्रांस

  • पेरिस बेसिन एवं लोइरे घाटी

लोम्बार्डी मैदान

उत्तरी इटली

  • पो नदी

हंगरी मैदान

मध्य यूरोप (हंगरी तथा सर्बिया, रोमानिया, क्रोएशिया के कुछ भाग)

  • पैनोनियन मैदान के नाम से भी जाना जाता है
  • डेन्यूब एवं टिस्ज़ा नदियों द्वारा अपवाहित
  • “मध्य यूरोप का अन्नागार”

थ्रेसियन / वालाचियन मैदान

बुल्गारिया (थ्रेसियन) एवं दक्षिणी रोमानिया (वालाचियन)

  • डेन्यूब एवं मैरित्सा नदियों के साथ स्थित

उत्तर यूरोपीय मैदान

फ्रांस, बेल्जियम, नीदरलैंड, जर्मनी, डेनमार्क, पोलैंड एवं बेलारूस के कुछ भाग

अफ्रीका

विश्व के मैदान और रेगिस्तान

मैदान

अवस्थिति

विशेषताएँ

सेरेनगेटी मैदान

उत्तरी तंजानिया एवं दक्षिण-पश्चिमी केन्या

  • सेरेनगेटी राष्ट्रीय उद्यान (तंज़ानिया)मसाई मारा रिजर्व (केन्या)

बुशवेल्ड मैदान

उत्तरी दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण-पूर्वी बोत्सवाना, दक्षिणी ज़िम्बाब्वे

  • उच्च वेल्ड घास भूमि एवं कालाहारी मरुस्थल की सीमा के बीच स्थित

एशिया

Deserts

मैदान

अवस्थिति

विशेषताएँ

पश्चिमी साइबेरियाई मैदान

रूस

  • पश्चिम में यूराल पर्वत तथा पूर्व में येनिसे नदी के बीच स्थित

याना- इंडिगिरका का निम्न मैदान

उत्तर-पूर्वी साइबेरिया (रूस)

  • याना नदी एवं इंडिगिरका नदी के बीच स्थित
  • वेर्खोयांस्क पर्वतों के उत्तर में, आर्कटिक महासागर की ओर विस्तारित
  • टुंड्रा वनस्पति

मंचूरियन मैदान

उत्तर-पूर्वी चीन

  • ग्रेटर खिंगन पर्वत श्रेणी एवं चांगबाई पर्वत के बीच स्थित

चीन का महान मैदान

पूर्वी चीन

  • ह्वांगहो (पीली नदी) के निचले प्रवाह के साथ स्थित
  • चीनी सभ्यता की जन्मभूमि

तुरान मैदान

कज़ाखस्तान, तुर्कमेनिस्तान उज़्बेकिस्तान

  • कैस्पियन सागर एवं अरल सागर के बीच स्थित
  • अमू दरिया एवं सिर दरिया नदियों द्वारा निर्मित

मेसोपोटामिया मैदान

इराक, सीरिया का कुछ भाग, कुवैत

  • दजला और फरात नदियों के बीच स्थित“सभ्यता की पालना” के नाम से प्रसिद्ध
  • प्राचीन सुमेरियन, बेबीलोनियन एवं असीरियन सभ्यता केंद्र

सिंधु–गंगा मैदान

पंजाब (पाकिस्तान) से लेकर असम (भारत) तक गंगा और सिंधु नदी प्रणालियों के किनारे।

ऑस्ट्रेलिया

Major Mountains of the World

मैदान

अवस्थिति

विशेषताएँ

नल्लारबोर मैदान

ऑस्ट्रेलिया का दक्षिणी तटीय भाग

  • विश्व का सबसे बड़ा चूना-पत्थर (लाइमस्टोन) का मैदान
  • यह नाम लैटिन शब्द “नुलस आर्बोर” से लिया गया है, जिसका मतलब है “कोई पेड़ नहीं।”

मरे-डार्लिंग बेसिन / मैदान

दक्षिण-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया

  • मरे एवं डार्लिंग नदियों द्वारा निर्मित

ग्रेट आर्टेसियन बेसिन

क्वींसलैंड, न्यू साउथ वेल्स, दक्षिण ऑस्ट्रेलिया एवं उत्तरी क्षेत्र

  • विश्व के सबसे बड़े आर्टेसियन  भू-जल बेसिनों में से एक
  • मरुस्थल अत्यंत शुष्क क्षेत्र होते हैं, जहाँ वार्षिक वर्षा 25 सेमी से कम होती है।
  • ये मुख्यतः उपोष्ण उच्च दाब क्षेत्रों में स्थित होते हैं, जहाँ अवरोही वायु, तापीय प्रतिलोमन (थर्मल इनवर्ज़न) तथा स्थिर वायुमंडलीय दशाएं पाई जाती हैं।
  • महाद्वीपीय अवस्थिति या तट से दूरी भी इनकी उत्पत्ति का कारण है, क्योंकि आंतरिक भागों की ओर जाने पर वर्षा की मात्रा में कमी आती जाती है। 
  • महाद्वीपों के पश्चिमी तटों के साथ बहने वाली ठंडी महासागरीय धाराएं वाष्पीकरण और मेघ निर्माण को कम करती हैं, जिससे शुष्क परिस्थितियाँ उत्पन्न होती हैं।
  • विश्व के अधिकांश शुष्क एवं अर्ध-शुष्क मरुस्थल महाद्वीपों के पश्चिमी और मध्य भागों में पाए जाते हैं।
  • प्रमुख मरुस्थल हैं – सहारा, अरब, थार, लीबियाई, कालाहारी, अटाकामा, पश्चिमी ऑस्ट्रेलियाई, एरिज़ोना–कोलोराडो, गोबी, सिक्यांग, तकलामकान, काराकुम तथा किज़िल कुम।
  • उपोष्ण (गर्म) मरुस्थल 15°–30° अक्षांशों के बीच स्थित होते हैं, जहाँ उच्च तापमान, कम आर्द्रता और अत्यंत अल्प वर्षा पाई जाती है; उदाहरण – सहारा, थार, अटाकामा, ऑस्ट्रेलियाई मरुस्थल।
  • उच्च अक्षांश (शीत) मरुस्थल मध्य एवं उच्च अक्षांशों अथवा महाद्वीपों के आंतरिक भागों में पाए जाते हैं, जहाँ निम्न तापमान, लंबी शीत ऋतु तथा वर्षा मुख्यतः हिम (बर्फ) के रूप में होती है; उदाहरण – गोबी, तकलामकान, काराकुम, किज़िल कुम, सिक्यांग।
विश्व के अधिकांश मरुस्थलों का महाद्वीपों के पश्चिम में होने का कारण–
  • ये शुष्क स्थल खण्ड व्यापारिक हवाओं के प्रभाव क्षेत्र में फैले हैं। व्यापारिक हवाएँ पूर्व से पश्चिम को चलती है जो समुद्र से नमी ग्रहण कर महाद्वीपों के पूर्वी भागों पर ही वर्षा कर पाती है एवं पश्चिमी भागों तक जाते-जाते पूर्णत: शुष्क हो जाती हैं।
  • ये मरुस्थल उपोष्ण कटिबंधीय उच्च दबाव के क्षेत्रों में फैले हैं जहाँ से हवाएँ कम दबाव के केन्द्रों की ओर आकृष्ट होती है तथा प्रति व्यापारिक हवाएँ  नीचे उतरी है। अत: ऐसे क्षेत्रों में वाष्प भरी हवाएँ  कम आती है।
  • अधिकांश मरुस्थलों के चतुर्दिक या पार्श्वों में पर्वत श्रृंखलाएँ  हवाओं के अवरोध स्वरूप खड़ी है जो इन शुष्क क्षेत्रों को और भी वृष्टि छाया प्रदेशों में ला देती है। अत: समुद्र से चलकर आने वाली नमीयुक्त हवाएँ  इनके आंतरिक भागों में वर्षा नहीं कर पाती। जैसे आटाकामा मरुस्थल, एण्डीज से कालाहारी मरुस्थल कोकेसस धाराएं पर्वतों से, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया का मरुस्थल ग्रेट डीवाइडिंग रेंज से प्रभावित होता है।
  • इन मरुस्थलों के पश्चिमी भागों में ठंडी धराएं बहती है जो तटीय एवं इन से होकर गुजरने वाली हवाओं को शुष्क एवं नमी विहिन बना देती है, इसलिए महाद्वीपों के पश्चिमी भागों में वर्षा नहीं होती है। जैसे-कालाहारी के पश्चिम में वेनेजुएला ठंडी धारा पेटागोनिया के पश्चिम में हम्बोल्ट ठंडी धारा, सहारा के पश्चिम में कनारी एवं  पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पश्चिम में, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया ठंडी धारा आदि।
  • ये क्षेत्र शुष्क स्थलीय पवनों या ठंडे अक्षांशों से गर्म अक्षांशों की ओर चलने वाली हवाओं के प्रभाव में आ जाते हैं जो शुष्क प्रभाव डालती है एवं मरुस्थलीय अवस्थाएं पनपाती है।
  • जिन क्षेत्रों में वायुमण्डल निरन्तर रूप से कम तापक्रम प्राप्त करता है और परिणामस्वरूप अधिक वाष्प कण नहीं होते वहाँ भी शुष्कता उत्पन्न होती है जैसे टुंड्रा प्रदेश ‘शीत मरुस्थल‘ में देखी जाती है।
मरुस्थलों का महाद्वीपीय विन्यास –
  • भूपटल के करीब 30% भाग पर शुष्क एवं अर्द्धशुष्क दशाएँ पाई जाती है जिसमें शीत मरुस्थल सम्मिलित नहीं किए जाते।
  • ऑस्ट्रेलिया में 43% क्षेत्र, अफ्रीका में 40%, एशिया में 29% और नई दुनिया में 10% तक मरुस्थलीय दशाएँ पाई जाती हैं। 
  • सहारा मरुस्थल, संयुक्त राज्य अमेरिका के कुल क्षेत्रफल से बड़ा है। यूरोप में केवल कैस्पियन सागर के पास ही शुष्कता पाई जाती है।

मरुस्थलों के प्रकार –

1. चट्टानी मरुस्थल या हम्मादा –

  • ऐसे मरुस्थलों में नग्न चट्टानें विस्तृत रूप से फैली हुई दिखती है। कहीं-कहीं पर समूह में बालू एवं चट्टानीय टुकड़ों के ढेर भी देखे जाते हैं। ये क्षेत्र सहारा में हम्मादा के नाम से जाने जाते हैं।

2. पथरीले मरुस्थल या रेग

  • ऐसे मरुस्थलों में कोणीय कंकड़-पत्थर अनुप्रस्थ दिशा में दिखाई देते हैं तथा बालू बहुत कम देखने को मिलता है। अल्जीरिया में इन्हें ‘रेग‘ लीबिया एवं मिस्र में ‘सेरिर’ कहा जाता है।

3. बालुकामय मरुस्थल या इर्ग

  • ऐसे मरुस्थलों में बालू की प्रचुरता एवं चट्टानी सतह की अनुपस्थिती प्रधानत देखी जाती है। सामान्य जनमानस के दृष्टिकोण से ये ही वास्तविक मरुस्थल समझे जाते हैं।
  • सहारा में इन्हें अर्ग (Erg) तुर्किस्तान में कुम (Koum) कहते हैं। थार का मरुस्थल अधिकांशत इसी प्रकार का है।

4. पर्वतीय मरुस्थल –

  • इन मरुस्थलों में शीर्ष युक्त पहाड़ी चोटियाँ, तेज ढाल और गहरे कटे हुए बीहड़ (Ravines) पाए जाते हैं। सिन्नर्ड मरुस्थल की क्योटिक, मध्य सहारा की टिवेसी तकलामकान का उत्तरी छोर आदि इसी प्रकार के मरुस्थल है।

5. शीत मरुस्थल –

  • शुष्कता की व्यापकता एवं पानी की कमी के कारण पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुवों पर मानव का निवास अभी तक नहीं हो पाया। ये क्षेत्र वर्षा, वनस्पति आदि की कमी और तापक्रमीय अन्तर के कारण मरुस्थलों की श्रेणी में आते हैं, किन्तु गर्मी और ताप की अत्यधिक कमी के कारण ये सदैव बर्फ से ढके रहते हैं या ठंडे रहते है इसलिए इन्हें शीत मरुस्थलों का नाम दिया जाता है। 
  • अन्टार्कटिका, ग्रीनलैंड, बेफिनलैंड, लेपलैंड, आइसलैंड, अलास्का, उत्तरी कनाडा, नोवाया-जेमलिया और अन्य वे भाग जो 66.5 डिग्री अक्षांशों से ध्रुवों की ओर स्थित है। शीत मरुस्थलों के नाम से जाने जाते हैं।

उत्तरी अमेरिका

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मरुस्थल

अवस्थिति

विशेषताएँ

ग्रेट बेसिन मरुस्थल

पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका, मुख्यतः नेवादा; ऊटाह, ओरेगन एवं इडाहो के कुछ भाग

  • संयुक्त राज्य अमेरिका का सबसे बड़ा मरुस्थल
  • शीत मरुस्थल — सर्दियों में हिमपात होता है
  • सिएरा नेवादा पर्वतों की वर्षा-छाया में स्थित

मोजावे मरुस्थल

दक्षिण-पूर्वी कैलिफोर्निया, दक्षिणी नेवादा तथा एरिज़ोना एवं ऊटाह के कुछ भाग

  • “डेथ वैली का मरुस्थल” के नाम से प्रसिद्ध – उत्तरी अमेरिका का सबसे गर्म एवं निम्नतम क्षेत्र
  • सिएरा नेवादा एवं कोलोराडो पठार के बीच स्थित
  • जोशुआ वृक्ष एवं विरल जेरोफाइटिक वनस्पति

सोनोरन मरुस्थल

दक्षिण-पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका (एरिज़ोना, कैलिफोर्निया) एवं उत्तर-पश्चिमी मेक्सिको (सोनोरा, बाजा कैलिफोर्निया)

  • गर्म मरुस्थलसगुआरो कैक्टस

चिहुआहुआ मरुस्थल

उत्तरी मेक्सिको (चिहुआहुआ, कोहुइला  राज्य) एवं दक्षिण-पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका (टेक्सास, न्यू मेक्सिको)

  • क्षेत्रफल के आधार पर उत्तरी अमेरिका का सबसे बड़ा मरुस्थल
  • सिएरा माद्रे ओरिएंटल एवं ऑक्सिडेंटल पर्वत मालाओं के बीच स्थित
  • अर्ध-शुष्क गर्म मरुस्थल
  • घास एवं झाड़ियों की वनस्पति

दक्षिण अमेरिका

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मरुस्थल

अवस्थिति

विशेषताएँ

अटाकामा मरुस्थल

उत्तरी चिली

  • पूर्व में एंडीज पर्वत तथा पश्चिम में तटीय पर्वत श्रेणी के बीच स्थित
  • विश्व का सबसे शुष्क मरुस्थल

पैटागोनियन मरुस्थल (मोंटे मरुस्थल)

दक्षिणी अर्जेंटीना

  • एंडीज पर्वतों के पूर्व में (एंडीज की वर्षा-छाया क्षेत्र में)
  • कोलोराडो नदी एवं मैगलन जलडमरूमध्य के बीच स्थित
  • शीत मरुस्थल

सेचुरा मरुस्थल

पेरू का उत्तर-पश्चिमी तट

  • हम्बोल्ट (पेरू) समुद्री धारा से प्रभावित तटीय मरुस्थल

ला-गुआजिरा मरुस्थल

उत्तर-पूर्वी कोलंबिया एवं उत्तर-पश्चिमी वेनेजुएला

  • गर्म एवं शुष्क मरुस्थल
  • वाययू आदिवासी लोगों द्वारा बसा हुआ

अफ्रीका

Major Mountains of the World | विश्व के मैदान और रेगिस्तान

मरुस्थल

अवस्थिति

विशेषताएँ

सहारा मरुस्थल

उत्तरी अफ्रीका (अटलांटिक महासागर से लाल सागर तक; मोरक्को, अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, लीबिया, मिस्र, मॉरिटानिया, माली, नाइजर, चाड, सूडान सम्मिलित)

  • विश्व का सबसे बड़ा गर्म मरुस्थल 
  • रेतीले टीले (एर्ग) 
  • शैल युक्त पठार (हामादा)
  • अत्यधिक तापांतर 
  • अत्यंत कम वर्षा

लीबियाई मरुस्थल

सहारा का पूर्वी भाग (लीबिया एवं पश्चिमी मिस्र)

  • रेतीले टीले
  • सीवा, कुफ्रा, जालो आदि जैसे नखलिस्तान
  • अत्यंत शुष्क,
  • पृथ्वी के सर्वाधिक शुष्क क्षेत्रों में से एक

नूबियन मरुस्थल

पूर्वी सहारा (उत्तर-पूर्वी सूडान)

  • कठोर, शुष्क शैल युक्त एवं रेतीला क्षेत्र
  • नील नदी एवं लाल सागर के मध्य स्थित

पूर्वी मरुस्थल

नील नदी के पूर्व में स्थित

  • सहारा मरुस्थल का भाग

टेनेरे मरुस्थल

दक्षिण-मध्य सहारा (नाइजर एवं चाड)

  • रेतीला मरुस्थल
  • सहारा का भाग
  • गतिशील रेतीले टीले
  • तीव्र शुष्कता

तानेज़रोफ़्ट मरुस्थल

पश्चिमी-मध्य सहारा (अल्जीरिया, माली)

  • “आतंक की भूमि” के नाम से जाना जाता है
  • जलविहीन क्षेत्र बजरी के मैदान

दानाकिल मरुस्थल

इथियोपिया, इरिट्रिया, जिबूती (अफ़ार क्षेत्र)

  • कुछ स्थानों पर समुद्र तल से नीचे
  • पृथ्वी के सर्वाधिक गर्म क्षेत्रों में से एक
  • नमक के समतल मैदान
  • ज्वालामुखीय गतिविधि

ओगाडेन मरुस्थल

पूर्वी इथियोपिया (सोमालिलैंड–सोमालिया सीमा)

  • अर्ध-शुष्क मरुस्थल
  • अल्प वर्षा
  • पशुपालन अर्थव्यवस्था

चाल्बी मरुस्थल

उत्तरी केन्या

न्यारी मरुस्थल

दक्षिणी केन्या

लोम्पौल मरुस्थल

उत्तर-पश्चिमी सेनेगल (अटलांटिक तट के समीप)

  • छोटा तटीय मरुस्थल, रेतीले टीले

नामीब मरुस्थल

दक्षिण-पश्चिमी अफ्रीका (नामीबिया एवं अंगोला तट)

  • विश्व का सबसे प्राचीन मरुस्थल
  • तटीय कोहरा

कालाहारी मरुस्थल

बोत्सवाना, नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका

  • अर्ध-मरुस्थल
  • घास के मैदान
  • मौसमी नदियाँ

कारूमरुस्थल

दक्षिण अफ्रीका

  • समशीतोष्ण मरुस्थल
  • विरल (बहुत कम) वनस्पति
  • महत्वपूर्ण भेड़-पालन क्षेत्र

एशिया

Deserts | विश्व के मैदान और रेगिस्तान

मरुस्थल

अवस्थिति

विशेषताएँ

रुब-अल-खली मरुस्थल

अरब प्रायद्वीप का दक्षिणी भाग (सऊदी अरब, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, यमन)

  • विश्व का सबसे बड़ा सतत मरुस्थल
  • विशाल रेत के टीले
  • अत्यधिक शुष्क क्षेत्र

अन-नफूद मरुस्थल

उत्तरी सऊदी अरब

  • अर्धचंद्राकार बालू के टीले
  • रूब-अल-खली से जुड़ता है

बदायात अश-शामाल

उत्तरी सऊदी अरब एवं इराक

  • सीरियाई मरुस्थल का विस्तार

नेगेव मरुस्थल

दक्षिणी इजरायल

  • अर्ध-शुष्क मरुस्थल
  • चूना-पत्थर व बलुआ पत्थर से निर्मित

दश्त-ए-लूट 

दक्षिण-पूर्वी ईरान

  • पृथ्वी का सर्वाधिक गर्म स्थान माना जाता है
  • पथरीली व रेतीली सतह
  • पवन अपरदन से बने स्थलरूप (यारडांग)

दश्त-ए-कावीर

मध्य ईरान 

  • जारागोस  पर्वतमाला के उत्तर  में
  • लवणीय मरुस्थलीय बेसिन (नमक के मैदान)

काराकुम मरुस्थल

तुर्कमेनिस्तान

  • “काला बालू मरुस्थल”
  • कैस्पियन सागर और आमू दरिया नदी के बीच

किजिलकुम मरुस्थल

उज़्बेकिस्तान एवं कज़ाख़िस्तान

  • “लाल बालू मरुस्थल”आमू दरिया व सिर दरिया के बीच
  • विशाल बालू के टीले
  • महाद्वीपीय जलवायु

दश्त-ए-मार्गो

दक्षिण-पश्चिमी अफ़ग़ानिस्तान

  • “मृत्यु का मरुस्थल”अत्यधिक शुष्क, पथरीला मरुस्थल

रेगिस्तान (रेत का देश) मरुस्थल

दक्षिणी अफगानिस्तान

  • हेलमंद बेसिन और दश्त-ए-मार्गो के बीच प्राकृतिक अवरोध

दश्त-ए-खाश मरुस्थल

दक्षिण-पश्चिमी अफ़ग़ानिस्तान

  • पूर्व में रेगिस्तान मरुस्थल एवं दक्षिण-पश्चिम में दश्त-ए-मार्गो के बीच

चोलिस्तान / रोही मरुस्थल

दक्षिण-पूर्वी पाकिस्तान

  • थार मरुस्थल का विस्तार
  • रेत के टीले और शुष्क नदी तल
  • हाकड़ा नदी (प्राचीन सरस्वती) का क्षेत्र

थार मरुस्थल (महान भारतीय मरुस्थल)

भारत एवं पाकिस्तान

  • गर्म मरुस्थल
  • रेत के टीले, लू, अल्प वर्षा

तकला मकान मरुस्थल

चीन का शिनजियांग क्षेत्र (तारिम बेसिन)

  • “मृत्यु का सागर”तियान शान, पामीर व कुनलुन पर्वतमालाओं से घिरा
  • अत्यधिक शुष्कता व तापांतर

गोबी मरुस्थल

मंगोलिया एवं उत्तरी चीन

  • शीत मरुस्थल
  • पथरीली सतह
  • पाला व कभी-कभी हिमपात
  • डायनासोर जीवाश्मों के लिए प्रसिद्ध

ऑर्डोस / मु-उस मरुस्थल

चीन का उत्तरी शानक्सी प्रांत

  • गोबी मरुस्थल के दक्षिण में
  • ह्वांगहो नदी के महान मोड़ से घिरा
  • शीत मरुस्थल

टेंगर मरुस्थल

आंतरिक मंगोलिया (चीन)

  • शुष्क रेतीला मरुस्थल

बादैन जरान मरुस्थल

पश्चिमी आंतरिक मंगोलिया (चीन)

  • रेत बालू के टीले एवं मरुस्थलीय झीलें

ऑस्ट्रेलिया

Major Mountains of the World | विश्व के मैदान और रेगिस्तान

मरुस्थल

अवस्थिति

विशेषताएँ

ग्रेट विक्टोरिया मरुस्थल

पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया एवं दक्षिण ऑस्ट्रेलिया

  • ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा मरुस्थल
  • शुष्क जलवायु व विरल (बहुत कम) वनस्पति

ग्रेट सैंडी मरुस्थल

उत्तर-पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया

  • किम्बरली पठार एवं गिब्सन मरुस्थल के बीच स्थित
  • रुडाल नदी राष्ट्रीय उद्यान 

लिटिल सैंडी मरुस्थल

मध्य पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया (ग्रेट सैंडी के दक्षिण में)

  • ग्रेट सैंडी और गिब्सन मरुस्थलों के बीच स्थित संक्रमण क्षेत्र का मरुस्थल

गिब्सन मरुस्थल

मध्य पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया

  • ग्रेट सैंडी एवं ग्रेट विक्टोरिया मरुस्थलों के बीच
  • अन्वेषक अल्फ्रेड गिब्सन के नाम पर रखा गया

तनामी मरुस्थल

उत्तरी क्षेत्र एवं उत्तर-पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया

  • शुष्क, समतल एवं विरल जनसंख्या वाला मरुस्थल

सिम्पसन मरुस्थल

उत्तरी क्षेत्र, दक्षिण ऑस्ट्रेलिया एवं क्वींसलैंड

  • लम्बे समानांतर रेत के टीले (लगभग 200 किमी तक) के लिए प्रसिद्ध
  • आयर झील बेसिन का भाग

तिरारी मरुस्थल

मध्य दक्षिण ऑस्ट्रेलिया

  • स्टुअर्ट स्ट्रॉनी मरुस्थल एवं स्ट्रेज़लेकी मरुस्थलों से मिल जाता है

स्टुअर्ट स्ट्रॉनी मरुस्थल

उत्तर-पूर्वी दक्षिण ऑस्ट्रेलिया एवं दक्षिण-पश्चिमी क्वींसलैंड

  • पथरीला मरुस्थल
  • अत्यधिक शुष्क क्षेत्र

स्ट्रेज़लेकी मरुस्थल

क्वींसलैंड और न्यू साउथ वेल्स की सीमा से लगा दक्षिण ऑस्ट्रेलिया का उत्तर-पूर्वी भाग

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