राजस्थान: अवस्थिति, विस्तार तथा भौतिक विभाग: राजस्थान भूगोल के अंतर्गत राज्य की भौगोलिक स्थिति, क्षेत्रीय विस्तार तथा इसके प्रमुख भौतिक विभागों का अध्ययन किया जाता है। भारत के उत्तर-पश्चिम भाग में स्थित राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य है, जिसकी भौतिक संरचना में अरावली पर्वतमाला, थार मरुस्थल, पूर्वी मैदान और दक्षिण-पूर्वी पठारी क्षेत्र शामिल हैं। ये भौतिक विभाग राज्य की जलवायु, प्राकृतिक संसाधनों तथा मानव बसावट को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं।
राजस्थान का परिचय
- राजस्थान अपनी शानदार ऐतिहासिक परंपराओं के कारण भारतीय इतिहास में विशेष महत्व रखता है।
- राजस्थान विश्व की प्राचीन सभ्यताओं का केंद्र है। इनके प्रमाण यहाँ पाए गए अवशेषों जैसे – लूनी बेसिन में तिलवाड़ा (बाड़मेर), आहड़ (उदयपुर), गिलुण्ड (उदयपुर), कालीबंगा (हनुमानगढ़ ) और गणेश्वर टीला (सीकर) में पाये गए है |
- प्राचीन और मध्ययुग में विशेष पहचान होने के बावजूद, राज्य के लोगों ने प्रतिकूल और कठिन परिस्थितियों के अनुकूल ढलते हुए भी साहस और बुद्धिमत्ता का परिचय दिया है।
प्राचीन और मध्ययुगीन काल में जिलों के लिए प्रयुक्त विशिष्ट पहचान
| प्राचीन व मध्यकालीन नाम | वर्तमान में जिलों के नाम |
| योधैय | गंगानगर-हनुमानगढ़ |
| अहिच्छत्रपुर | नागौर |
| गुजरात्रा | जोधपुर-पाली |
| वल्ल/डूंगल/मांड | जैसलमेर |
| स्वर्णगिरी | जालौर |
| चंद्रावती | आबू |
| शिव/मेदपाट/मेवाड़ | उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद |
| वागड़ | डूंगरपुर , बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ |
| कुरु | अलवर |
| शूरसेन/ब्रजभूमि | भरतपुर , करौली , धौलपुर |
| ह्ये- ह्ये/हाड़ौती | बूंदी – कोटा, बारां, झालावाड़ |
| विराट/बैराठ | अलवर , जयपुर |
| जांगल | बीकानेर , जोधपुर |
| शाकंभरी | साँभर |
| ढूँढाड़ | जयपुर-टोंक |
| गिरवा | उदयपुर के आसपास का क्षेत्र |
| गोड़वाड़ | बाड़मेर , सिरोही , जालौर |
| शेखावाटी | सीकर ,चूरू ,झुंझुनू |
| ऊपरमाल | भीलवाड़ा एवं चित्तौड़गढ़ का पठारी क्षेत्र |
| कांठल | प्रतापगढ़ और आसपास का क्षेत्र |
| मेरवाड़ा | अजमेर, राजसमंद ,ब्यावर |
| मेवात | अलवर, खैरथल-तिजारा, डीग |
| मारवाड़ | जोधपुर |
| भोराट का पठारी क्षेत्र | उदयपुर के क्षेत्र गोगुंदा, राजसमंद और कुंभलगढ़ |
| मालवा | दक्षिण-पूर्वी पठारी क्षेत्र |
| साल्व क्षेत्र | अलवर के कुछ हिस्से |
| मालानी | बाड़मेर-जालौर क्षेत्र |

राजस्थान का नामकरण
- ऋग्वेद – ब्रह्मवर्त
- रामायण – मरुकांतर
- ‘राजस्थान’ शब्द का पहला लिखित उल्लेख 625 ईस्वी के बसंतगढ़ शिलालेख (सिरोही) में “राजस्थानदित्य ”के रूप में मिलता है।
- मुहनोत नैणसी कृत ‘नैणसी री ख्यात‘ (1665 ईस्वी), में ‘राजस्थान’ शब्द का सबसे पहला प्रमाण मिलता है। जिसे राजस्थान का पहला ऐतिहासिक ग्रंथ माना जाता है।
- 1731 ईस्वी में, वीरभान ने अपनी किताब ‘राजरूपक ’ में ‘राजस्थान’ शब्द का प्रयोग किया, हालांकि यह भौगोलिक क्षेत्र के लिए नहीं, बल्कि राजा के निवास स्थान के लिए है।
- सन् 1791 ईस्वी में जोधपुर के शासक महाराजा भीम सिंह ने जयपुर के सवाई प्रताप सिंह को संबोधित एक पत्र में ‘राजस्थाना ’ शब्द का प्रयोग किया था।
- सर्वप्रथम सन् 1800 ईस्वी में जॉर्ज थॉमस द्वारा ‘राजपुताना’ शब्द का प्रयोग किया गया था, जिसे बाद में विलियम फ्रैंकलिन ने 1805 में अपनी पुस्तक “जॉर्ज थॉमस के सैन्य संस्मरण” में इसका उल्लेख किया।
- कर्नल जेम्स टॉड प्रथम व्यक्ति थे, जिन्होंने 1829 में प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘राजस्थान का इतिहास और पुरातनता’,‘में इस भौगोलिक क्षेत्र के लिए आधिकारिक तौर पर ‘राजस्थान’ शब्द का प्रयोग किया ।
- राजस्थान’ शब्द को 26 जनवरी 1950 को संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुई इसके पश्च्यात 1 नवंबर 1956 को इसके वर्तमान क्षेत्रीय स्वरूप को अंतिम रूप दिया गया।
- ब्रिटिश काल में राजपूत रियासतों व ठिकानों के प्रभुत्व के कारण राजस्थान को राजपुताना के नाम से जाना जाता था।
- यहाँ प्रमुख रियासतें आमेर, मारवाड़, मेवाड़, कोटा, बूंदी, भरतपुर आदि थीं।
- स्वतंत्रता के बाद वर्तमान राजस्थान का अस्तित्व ‘राजपूताना’ 19 रियासतों, 3 ठिकानों व केंद्रीय रूप से प्रशासित अजमेर-मेरवाड़ा के विलय के पश्चयात आया है।

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गठन तिथि |
नवनिर्मित ज़िलें |
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7 अगस्त 2023 |
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जिला गठन से संबंधित तथ्य |
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15 अप्रैल, 1982 |
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10 अप्रैल, 1991 |
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12 जुलाई 1994 |
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19 जुलाई 1997 |
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26 जनवरी, 2008 |
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राजस्थान का भूवैज्ञानिक इतिहास
- अल्फ्रेड वेग्नर के अनुसार पैंजिया का विभाजन कार्बोनिफेरस काल में हुआ व इसके चारों ओर एक विशाल महासागर था, जिसे वेगेनर ने पेंथलैसा कहा
- पैंजिया के उत्तरी भाग को लॉरेशिया और दक्षिणी भाग को गोंडवानालैंड कहा जाता था।
- टेथिस सागर, एक भू-तुल्यकालिक क्षेत्र, इन दोनों भागों के बीच एक भूभाग मौजूद था।

- इस प्रकार अधिकांश राजस्थान का पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी भाग तथा पूर्वी मैदानी क्षेत्र टेथिस सागर का अवशेष है, जो समय के साथ हिमालय से प्रवाहित नदियों द्वारा जमा की गई जलोढ़ मिट्टी से भर गया था।
- राजस्थान की खारे पानी की झीलें जैसे सांभर, डीडवाना, पचपदरा, लूणकरणसर आदि टेथिस सागर के अवशेष है
- राजस्थान की अरावली पर्वतमाला और हाड़ौती पठार गोंडवानालैंड का हिस्सा हैं।
| राजस्थान का विस्तार | |
| दक्षिण से उत्तर की ओर(अक्षांशीय विस्तार) श्रेणी: 23°03’ N (बोरकुण्डा, बांसवाड़ा) से 30°12 ’N (कोणा गांव, श्री – गंगानगर) अवधि: 7°9’. दूरी: 826 किमी. | पश्चिम से पूर्व की ओर (देशांतरीय विस्तार)श्रेणी: 69°30’ पूर्व (कटरा गांव , जैसलमेर ) से 78°17’ E (सिलाना गांव , धौलपुर). अवधि: 8°47’. दूरी: 869 किमी. |
| कर्क रेखा (23°30’ उत्तरी अक्षांश) राज्य के दक्षिणी छोर बांसवाड़ा से व डूंगरपुर के कुछ क्षेत्रों को शामिल करते हुए गुज़रती है। | |
| राजस्थान के अक्षांशीय और देशांतरीय अंतराल क्रमशः 7°09’ और 8°47’ है | |

राजस्थान की स्थिति
- वैश्विक स्थान:
- राजस्थान अक्षांश के आधार पर उत्तरी गोलार्द्ध और देशांतर के अनुसार पूर्वी गोलार्ध में स्थित है
- भारत का संदर्भ:
- राजस्थान भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है
- राज्य क्षेत्रफल में, जर्मनी के बराबर, जापान से थोड़ा बड़ा, ग्रेट ब्रिटेन से डेढ़ गुना बड़ा, श्रीलंका से पांच गुना बड़ा व इज़राइल से सत्रह गुना बड़ा है
- पूर्व से पश्चिम की अधिकतम चौड़ाई 869 किलोमीटर व उत्तर से दक्षिण अधिकतम लंबाई 826 किलोमीटर है।
- राजस्थान की लंबाई और चौड़ाई के बीच की दूरी का अन्तर 43 किलोमीटर है।
- उपग्रह सर्वेक्षणों के अनुसार, गगराना (नागौर) राजस्थान का मध्य गांव है |
- धौलपुर (पूर्व) से जैसलमेर (पश्चिम) तक समय का अंतराल 35 मिनट और 8 सेकंड है।
राजस्थान का क्षेत्रफल

राजस्थान की आकृति
- टी.एच. हैंडली, के अनुसार राजस्थान का आकार समचतुर्भुज (पतंग के आकार का) के समान है
राजस्थान की सीमा
- राजस्थान की कुल भू-सीमा 5920 किमी, है जिसमें से 1070 किमी अंतरराष्ट्रीय व 4850 किमी अंतर्राष्ट्रीय सीमा है।
- राजस्थान और पाकिस्तान के बीच की अंतर्राष्ट्रीय सीमा की लंबाई 1070 किलोमीटर है , यह रेखा रेडक्लिफ लाइन के नाम से जानी जाती है। हिन्दुमलकोट (श्री -गंगानगर) इसका प्रारंभिक बिंदु, शाहगढ़ व बाखासर (बाड़मेर) इस सीमा का अंतिम बिंदु है।
- रेडक्लिफ लाइन की कुल लंबाई 3310 किमी है व यह भारत के तीन राज्यों (राजस्थान, गुजरात और पंजाब) और दो केंद्र शासित प्रदेशों (जम्मू कश्मीर और लद्दाख) से होकर गुज़रती है।
- राजस्थान के पांच जिले गंगानगर, बीकानेर (168 किमी), फलौदी, जैसलमेर (464 किमी) और बाड़मेर (उत्तर से दक्षिण की ओर) रेडक्लिफ रेखा पर स्थित हैं।

- पंजाब प्रांत के बहावलनगर, बहावलपुर, रहीमयार खानपुर जिले और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के घोटकी, सुक्कुर, खैरपुर, संघार, उमरकोट और थारपारकर जिले भारत-पाक सीमा पर स्थित हैं
- जैसलमेर की सबसे लंबी सीमा अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगती है।
- फालोदी की सीमा अंतरराष्ट्रीय सीमा से सबसे कम लगती है।
- गंगानगर वह जिला है जिसकी सबसे निकटतम सीमा अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगती है।
- बीकानेर अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सबसे दूर स्थित जिला है।
- श्री गंगानगर और बाड़मेर अंतरराज्यीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों सीमाएँ साझा करते हैं।
- अंतरराज्यीय सीमा – राजस्थान की अंतरराज्यीय सीमा 4850 किमी है
| राज्य | साझा सीमा | राजस्थान के सीमावर्ती जिले |
| पंजाब | 89 किमी | श्री गंगानगर , हनुमानगढ़ |
| हरियाणा | 1262 किमी | हनुमानगढ़ , चूरू , झुंझुनू ,सीकर , कोटपुतली – बहरोड़ , खैरथल – तिजारा , अलवर ,डीग |
| गुजरात | 1022 किमी | बांसवाड़ा , बाड़मेर , उदयपुर , सिरोही ,जालौर , डूंगरपुर |
| उत्तरप्रदेश | 877 किमी | डीग , भरतपुर , धौलपुर |
| मध्य प्रदेश | 1600 किमी | धौलपुर, सवाई माधोपुर,करौली, बांसवाड़ा, बारां, कोटा , झालावाड़ , भीलवाड़ा , चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ |
महत्वपूर्ण तथ्य
- राजस्थान के ऐसे 4 जिले है जो दो राज्यों के साथ सीमा बनाते हैं।
- हनुमानगढ़ – पंजाब व हरियाणा
- डीग – हरियाणा व उत्तर प्रदेश
- धौलपुर – उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश
- बांसवाड़ा – मध्य प्रदेश और गुजरात
- राजस्थान के दो जिले पंजाब राज्य से सीमा साझा करते हैं – श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़
- राजस्थान में सबसे लंबी अंतर्राज्यीय सीमा वाला जिला – झालावाड़ (520 किमी)
- राजस्थान में सबसे छोटी अंतर्राज्यीय सीमा वाला जिला – बाड़मेर (14 किमी)
- राजस्थान के कुल सीमावर्ती जिले (किसी भी सीमा सहित) – 28 जिले
- राजस्थान में अंतर्राज्यीय सीमा साझा करने वाले कुल जिले – 25 जिले
- राजस्थान में केवल अंतर्राज्यीय सीमा साझा करने वाले जिले – 23 जिले
- राजस्थान के आंतरिक (Inland) जिले – 13 जिले
- आंतरिक जिले हैं –
- जयपुर, दौसा, टोंक, बूंदी, अजमेर, ब्यावर, बालोतरा, पाली डीडवाना-कुचामन, नागौर, जोधपुर, राजसमंद और सलूंबर।
- राजस्थान का चित्तौड़गढ़ जिला एक राज्य के साथ दो बार खंडित सीमा बनाता है।
- राजस्थान का कोटा जिला एक राज्य के साथ दो बार सीमा बनाता है,लेकिन यह विखंडित सीमा नहीं बनता है।
- कोटा और चित्तौड़गढ़ राजस्थान के वे जिले हैं जो मध्य प्रदेश राज्य के साथ दो बार सीमा बनाते हैं
- भीलवाड़ा चित्तौड़ को दो भागों में विभाजित करता है।
- क्षेत्रफल की दृष्टि से जैसलमेर, बीकानेर, बाड़मेर और जोधपुर सबसे बड़े जिले हैं तथा धौलपुर, दौसा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ सबसे छोटे जिले हैं (पुराने आँकड़ों के अनुसार)।
संशोधित मानचित्र के अनुसार जिले व संभाग
| संभाग | शामिल जिले |
| जयपुर | जयपुर, कोटपुतली-बहरोड़, दौसा, अलवर, खैरथल-तिजारा, सीकर, झुंझुनू |
| भरतपुर | भरतपुर, डीग, धौलपुर, करौली, सवाई-माधोपुर |
| अजमेर | अजमेर, टोंक, ब्यावर, नागौर, डीडवाना-कुचामन, भीलवाड़ा |
| कोटा (सबसे छोटा + न्यूनतम जिले) | कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड़। |
| उदयपुर | उदयपुर, चित्तौड़गढ़, सलूंबर राजसमंद, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़। |
| जोधपुर (सबसे बड़ा)(अधिकतम जिले) | जोधपुर, फलौदी, जैसलमेर, बाड़मेर, बालोतरा, पाली, जालौर, सिरोही |
| बीकानेर | बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू |
| जिले | जिले | जिले |
| गंगानगर | सलूंबर | हनुमानगढ़ |
| बांसवाड़ा | डूंगरपुर | जयपुर |
| प्रतापगढ़ | भीलवाड़ा | अजमेर |
| डीग | बारां | बूंदी |
| झालावाड़ | कोटा | सवाई-माधोपुर |
| करौली | टोंक | खैरथल-तिजारा |
| धौलपुर | भरतपुर | अलवर |
| कोटपुतली-बहरोड़ | ब्यावर | चूरू |
| झुंझुनू | बीकानेर | सीकर |
| नागौर | डीडवाना -कुचामन | फलौदी |
| जोधपुर | जैसलमेर | बालोतरा |
| दौसा | बाड़मेर | चित्तौड़गढ़ |
| उदयपुर | राजसमंद |

