राजस्थान का एकीकरण राजस्थान का इतिहास का एक महत्वपूर्ण विषय है, जिसमें स्वतंत्रता के बाद विभिन्न रियासतों का एकीकृत होकर एक सशक्त राज्य के रूप में गठन हुआ। 1948 से 1956 के बीच हुए चरणबद्ध एकीकरण ने प्रशासनिक स्थिरता, राजनीतिक एकता और क्षेत्रीय विकास की नींव रखी। इस प्रक्रिया ने आधुनिक राजस्थान के स्वरूप को आकार दिया।
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राजस्थान का एकीकरण
आज़ादी के समय राजस्थान की राजनीतिक स्थिति –
- 19 रियासतें (Princely States)
- 3 ठिकाने (Chiefships)
- 1 केंद्रशासित प्रदेश (Chief Commissionary) थे।
आज़ादी के समय राजस्थान की रियासतें (19 Princely States)
एकीकरण या आजादी के समय रियासतों के शासक
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रियासत 154217_dbd88e-3b> |
शासक 154217_9f0ed9-16> |
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आज़ादी के समय राजस्थान के ठिकाने (3 Chiefships)
- नीमराणा ठिकाना – अलवर रियासत से अलग किया गया
- कुशलगढ़ ठिकाना – बांसवाड़ा रियासत से अलग किया गया
- लावा ठिकाना – टोंक रियासत से अलग किया गया
आज़ादी के समय राजस्थान का केंद्रशासित प्रदेश –
- अजमेर–मेरवाड़ा (Ajmer–Merwara) – आज़ादी के समय राजस्थान में केवल 1 केंद्रशासित प्रदेश था
राजस्थान यूनियन (Rajasthan Union) की अवधारणा –
- मेवाड़ के महाराणा भूपाल सिंह राजस्थान, मालवा और सौराष्ट्र की रियासतों को मिलाकर “राजस्थान यूनियन (Rajasthan Union)” बनाना चाहते थे।
- इस उद्देश्य से उदयपुर में दो सम्मेलन आयोजित किए गए:
- उदयपुर सम्मेलन – 1946 ई.
- उदयपुर सम्मेलन – 1947 ई.
- के.एम. मुंशी (K.M. Munshi) महाराणा भूपाल सिंह के संवैधानिक सलाहकार थे।
- रियासती सचिवालय (Princely Secretariat) –
- 5 जुलाई 1947 ई. को रियासती सचिवालय की स्थापना की गई।
- अध्यक्ष – सरदार वल्लभभाई पटेल
- सचिव – वी. पी. मेनन
- 18 जुलाई 1947 ई. को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 (Indian Independence Act) पारित हुआ।
- इस अधिनियम की धारा 8 के अंतर्गत:-
- राजाओं व अंग्रेजों के बीच की गई सभी संधियाँ समाप्त कर दी गईं।
- रियासती सचिवालय की घोषणा:-
- जिन रियासतों की जनसंख्या 10 लाख से अधिक तथा
- वार्षिक आय 1 करोड़ से अधिक हो, वे रियासतें अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रख सकती हैं।
- राजस्थान में ऐसी 4 रियासतें थीं:-
- मेवाड़ रियासत – राजा: भूपाल सिंह
- जयपुर रियासत
- जोधपुर रियासत
- बीकानेर रियासत
विलय पत्र (Instrument of Accession)-
- 7 अगस्त 1947 ई. –
- बीकानेर के महाराजा सार्दुल सिंह ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए।
- बीकानेर राजस्थान की पहली रियासत थी, जिसने भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए।
- 14 अगस्त 1947 ई. –
- धौलपुर के महाराजा उदयभान सिंह ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए।
- धौलपुर राजस्थान की अंतिम रियासत थी जिसने विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए।
- बांसवाड़ा के महारावल चन्द्रवीर सिंह ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर करते समय कहा: “मैं अपने डेथ वारंट पर हस्ताक्षर कर रहा हूँ।”
राजस्थान का एकीकरण : एक नज़र में
| चरण | नामकरण | राजधानी | उद्घाटनकर्त्ता | प्रधानमंत्री | राजप्रमुख | क्षेत्र |
| प्रथम | मत्स्य संघ (17–18 मार्च 1948) | अलवर | एन. वी. गॉडगिल | शोभाराम कुमावत | उदयभान सिंह (धौलपुर) | अलवर, भरतपुर, करौली, धौलपुर |
| द्वितीय | पूर्व राजस्थान संघ (25 मार्च 1948) | कोटा | एन. वी. गॉडगिल | गोकुल लाल असावा | महाराव भीम सिंह (कोटा) | कोटा, बूंदी, टोंक, झालावाड़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, किशनगढ़, शाहपुरा |
| तृतीय | संयुक्त राजस्थान (18 अप्रैल 1948) | उदयपुर | जवाहरलाल नेहरू | माणिक्यलाल वर्मा | भूपाल सिंह (मेवाड़) | पूर्व राजस्थान संघ + उदयपुर |
| चतुर्थ | वृहद् राजस्थान (30 मार्च 1949) | जयपुर | वल्लभभाई पटेल | हीरालाल शास्त्री | सवाई मानसिंह-II | जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर |
| पंचम् | संयुक्त वृहद् राजस्थान (15 मई 1949) | जयपुर | — | हीरालाल शास्त्री | सवाई मानसिंह-II | वृहद् राजस्थान + मत्स्य संघ |
| षष्ठम् | राजस्थान (26 जनवरी 1950) | जयपुर | — | हीरालाल शास्त्री | सवाई मानसिंह-II | सिरोही (आबू छोड़कर) |
| सप्तम् | वर्तमान राजस्थान (1 नवम्बर 1956) | जयपुर | — | मोहनलाल सुखाड़िया | गुरुमुख निहाल सिंह | अजमेर, आबू-देलवाड़ा, सुनेल – ठप्पा |
राजस्थान एकीकरण : आयोग एवं समितियाँ
| क्रम | आयोग / समिति | गठन वर्ष | अध्यक्ष | उद्देश्य / कार्य |
| 1 | राजस्थान एकीकरण समिति | 1947 | वी. पी. मेनन | देशी रियासतों के विलय की योजना बनाना |
| 2 | मत्स्य संघ समिति | 1948 | एन. वी. गॉडगिल | मत्स्य संघ के गठन की प्रक्रिया |
| 3 | शंकर राव देव समिति | 1949 | शंकर राव देव | मत्स्य संघ का वृहद् राजस्थान में विलय |
| 4 | बी. आर. पटेल समिति | 1949 | बी. आर. पटेल | राजधानी निर्धारण (जयपुर) |
| 5 | सिरोही विलय समिति | 1949–50 | वल्लभभाई पटेल की देखरेख | सिरोही के विभाजन का निर्णय |
| 6 | राज्य पुनर्गठन आयोग | 1953 | फ़ज़ल अली | राज्यों का भाषाई पुनर्गठन |
| 7 | मुनि जिन विजय सूरी समिति | 1956 | मुनि जिन विजय सूरी | आबू–देलवाड़ा को राजस्थान में मिलाने हेतु |
| 8 | सत्यनारायण राव समिति | 1956 | सत्यनारायण राव | राजधानी व प्रशासनिक संतुलन |
| 9 | धर आयोग | 1948 | एस. के. धर | भाषायी आधार पर राज्य गठन |
| 10 | जे. वी. पी. समिति | 1949 | नेहरू–पटेल–पट्टाभि सीतारमैया | भाषायी राज्यों पर पुनर्विचार |
राजस्थान एकीकरण का प्रथम चरण
राजस्थान का नाम – मत्स्य संघ (Matsya Union)


- मत्स्य संघ में सम्मिलित रियासतें/ठिकाना –
- धौलपुर रियासत
- करौली रियासत
- अलवर रियासत
- भरतपुर रियासत
- नीमराणा ठिकाना
- संवैधानिक पद –
- राजप्रमुख – धौलपुर के राजा उदयभान सिंह
- उप राजप्रमुख – करौली के राजा गणेशपाल
- राजधानी – अलवर
- उद्घाटन – 18 मार्च 1948 ई.
- उद्घाटनकर्त्ता – एन. वी. गाडगिल
- स्थान – भरतपुर
- मंत्रिमंडल –
- प्रधानमंत्री – शोभाराम कुमावत (अलवर)
- उप प्रधानमंत्री – जुगल किशोर चतुर्वेदी
- अन्य मंत्री – गोपीलाल यादव, चिरंजी लाल शर्मा, डॉ. मंगल सिंह, मास्टर भोलानाथ
- जनसंख्या एवं आय –
- जनसंख्या – 18 लाख
- आय – 1.84 करोड़ रुपये
- अन्य तथ्य – अलवर व भरतपुर रियासतों पर भारत सरकार ने पहले ही नियंत्रण स्थापित कर लिया था।
राजस्थान एकीकरण का द्वितीय चरण
राजस्थान का नाम – पूर्व राजस्थान संघ (Rajasthan Union) –

- सम्मिलित रियासतें/ठिकाना –
- कोटा – हाड़ौती
- बूंदी – हाड़ौती (राजा – बहादुर सिंह)
- झालावाड़ – हाड़ौती
- डूंगरपुर – वागड़
- बांसवाड़ा – वागड़
- प्रतापगढ़ – वागड़
- टोंक – राजस्थान की एकमात्र मुस्लिम रियासत
- किशनगढ़
- शाहपुरा (राजा – सुदर्शन देव)
- कुशलगढ़ ठिकाना
- संवैधानिक पद –
- राजप्रमुख – कोटा के राजा भीम सिंह
- वरिष्ठ उप राजप्रमुख – बूंदी के राजा बहादुर सिंह
- कनिष्ठ उप राजप्रमुख – डूंगरपुर के राजा लक्ष्मण सिंह
- राजधानी – कोटा
- उद्घाटन –
- 25 मार्च 1948 ई.
- उद्घाटनकर्त्ता – एन. वी. गाडगिल
- स्थान – कोटा
- मंत्रिमंडल –
- प्रधानमंत्री – गोकुल लाल असावा(शाहपुरा)
- मंत्री नहीं बनाए गए, क्योंकि यह स्पष्ट हो गया था कि मेवाड़ भी इसमें शामिल होगा।
- जनसंख्या एवं आय –
- जनसंख्या – 23.5 लाख
- आय – 1.90 करोड़ रुपये
- अन्य तथ्य –
- एन. वी. गाडगिल का पूरा नाम – नरहरि विष्णु गाडगिल
- भारत सरकार शाहपुरा व किशनगढ़ को अजमेर–मेरवाड़ा में मिलाना चाहती थी, पर दोनों ने विरोध किया।
राजस्थान एकीकरण का तृतीय चरण
राजस्थान का नाम – संयुक्त राजस्थान (United States of Rajasthan)

- सम्मिलित इकाइयाँ –
- पूर्व राजस्थान संघ (9 रियासतें + 1 ठिकाना)
- मेवाड़ रियासत (राजधानी – उदयपुर)
- उद्घाटन – 18 अप्रैल 1948 ई.
- उद्घाटनकर्त्ता – पं. जवाहरलाल नेहरू
- स्थान – उदयपुर
- संवैधानिक पद –
- राजप्रमुख – महाराणा भूपाल सिंह (मेवाड़)
- वरिष्ठ उप राजप्रमुख – कोटा के राजा भीम सिंह
- कनिष्ठ उप राजप्रमुख –
- बूंदी के राजा बहादुर सिंह
- डूंगरपुर के राजा लक्ष्मण सिंह
- राजधानी – उदयपुर
- अधिवेशन व्यवस्था –
- प्रति वर्ष 3 अधिवेशन
- 2 – उदयपुर में
- 1 – कोटा में (कोटा के विकास के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।)
- प्रति वर्ष 3 अधिवेशन
- मंत्रिमंडल –
- प्रधानमंत्री – माणिक्य लाल वर्मा
- उप प्रधानमंत्री – गोकुल लाल असावा
- अन्य मंत्री – अभिन्न हरि, भोगीलाल पांड्या, बृजसुन्दर शर्मा, भूरेलाल बंया, प्रेमनारायण माथुर, मोहनलाल सुखाड़िया
- प्रिवी पर्स (महाराणा भूपाल सिंह की मांग – 20 लाख) –
- प्रिवी पर्स – 10 लाख
- राजप्रमुख वेतन – 5 लाख
- धार्मिक अनुदान – 5 लाख
- कुल – 20 लाख रुपये
- अन्य तथ्य – डॉ. राममनोहर लोहिया ने राजस्थान आंदोलन समिति बनाई।
राजस्थान एकीकरण का चतुर्थ चरण
राजस्थान का नाम – वृहद् राजस्थान (Greater Rajasthan)

- सम्मिलित रियासतें –
- संयुक्त राजस्थान
- जयपुर
- जोधपुर
- बीकानेर
- जैसलमेर
- उद्घाटन –
- 30 मार्च 1949 ई. (चैत्र शुक्ल एकम्, विक्रमी संवत् 2006)
- उद्घाटनकर्त्ता – सरदार वल्लभभाई पटेल
- स्थान – जयपुर
- 30 मार्च = राजस्थान दिवस
- संवैधानिक पद –
- महाराजप्रमुख – महाराणा भूपाल सिंह
- राजप्रमुख – सवाई मानसिंह-II
- वरिष्ठ उप राजप्रमुख –
- कोटा के राजा भीम सिंह
- जोधपुर के राजा हनवंत सिंह
- कनिष्ठ उप राजप्रमुख –
- बूंदी के राजा बहादुर सिंह
- डूंगरपुर के राजा लक्ष्मण सिंह
- प्रधानमंत्री – हीरालाल शास्त्री
- अन्य मंत्री – सिद्धराज ढढ्ढा, रघुवरदयाल गोयल, बृजसुन्दर शर्मा, प्रेमनारायण माथुर, वेदपाल त्यागी, राव राजा हनूवंत सिंह, नर सिंह कच्छावा, फूलचन्द बाफना
- राजधानी विवाद – बी. आर. पटेल समिति
- सदस्य:-
- बी. आर. पटेल – अध्यक्ष
- एच. सी. पुरी
- एच. पी. सिन्हा
- निर्णय:-
- राजधानी – जयपुर
- उच्च न्यायालय – जोधपुर
- सदस्य:-
- प्रिवी पर्स –
- जयपुर – 18 लाख
- जोधपुर – 17.50 लाख
- बीकानेर – 17 लाख
- अन्य तथ्य – 19 जुलाई 1948 – लावा ठिकाना जयपुर में मिला दिया गया।
राजस्थान एकीकरण का पंचम् चरण
राजस्थान का नाम – संयुक्त वृहद् राजस्थान

- सम्मिलित इकाइयाँ –
- वृहद् राजस्थान
- मत्स्य संघ
- मत्स्य संघ का विलय –
- शंकर राव देव समिति की सिफारिश पर।
- सदस्य:- शंकर राव देव (अध्यक्ष), प्रभुदयाल, आर. के. सिद्धावा
- 15 मई 1949 – मत्स्य संघ का विलय।
- शंकर राव देव समिति की सिफारिश पर।
- शोभाराम कुमावत को हीरालाल शास्त्री मंत्रिमंडल में शामिल किया गया।
राजस्थान एकीकरण का षष्ठम् चरण

- सिरोही रियासत का विभाजन
- आबू व देलवाड़ा सहित 89 गाँव बॉम्बे राज्य में।
- शेष सिरोही राजस्थान में मिला।
- गोकुलभाई भट्ट का गाँव हाथल राजस्थान में रहा।
- पटेल का कथन – “राजस्थान वालों को गोकुल भाई भट्ट चाहिए था, अतः वह हमने दे दिया।”
- 26 जनवरी 1950 –
- राजस्थान एकीकरण का छठा चरण पूर्ण।
- राज्य का नाम “राजस्थान”।
- हीरालाल शास्त्री – पहले मनोनीत मुख्यमंत्री।
- मनोनीत मुख्यमंत्री –
- हीरालाल शास्त्री – प्रथम
- नियुक्त –
- सी. एस. वेंकटाचारी (ICS) – द्वितीय
- जयनारायण व्यास – तृतीय
- निर्वाचित मुख्यमंत्री –
- टीकाराम पालीवाल – प्रथम
- जयनारायण व्यास – द्वितीय
- मोहनलाल सुखाड़िया – तृतीय
राजस्थान एकीकरण का सप्तम् चरण
- 1 नवम्बर 1956
- राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों के आधार पर—
- आबू व देलवाड़ा → राजस्थान
- अजमेर–मेरवाड़ा → राजस्थान
- सुनेल-टप्पा (म.प्र.) → राजस्थान
- सिरोंज → मध्य प्रदेश
- राजस्थान का एकीकरण पूर्ण।
- मुख्यमंत्री – मोहनलाल सुखाड़िया
- मुनि जिन विजय सूरी समिति –
- उद्देश्य – आबू-देलवाड़ा का विलय
- सदस्य:-
- मुनि जिन विजय सूरी – अध्यक्ष
- दशरथ शर्मा – सदस्य
- अजमेर–मेरवाड़ा –
- पहले केंद्रशासित प्रदेश।
- 30 सदस्यीय धारा सभा।
- मुख्यमंत्री – हरिभाऊ उपाध्याय (विलय के विरोधी)।
- अजमेर → राजस्थान का 26वाँ जिला।
- राजधानी विवाद –
- सत्यनारायण राव समिति –
- सदस्य: – सत्यनारायण राव (अध्यक्ष), वी. विश्वनाथन , बी. के.गुप्ता
- निर्णय –
- राजधानी – जयपुर
- राजस्व – अजमेर
- शिक्षा – बीकानेर
- कृषि – भरतपुर
- वन व सहकार – कोटा
- खनिज – उदयपुर
- सत्यनारायण राव समिति –
- 1 नवम्बर 2000 का तथ्य –
- मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ अलग होने पर
- राजस्थान भारत का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य बना।
- इससे पहले मध्य प्रदेश सबसे बड़ा था।
- अन्य महत्वपूर्ण संवैधानिक तथ्य –
- 7 वाँ संविधान संशोधन (1956) – राजप्रमुख पद समाप्त।
- राजस्थान के प्रथम राजप्रमुख – सवाई मानसिंह-II
- राजस्थान के अंतिम राजप्रमुख – सवाई मानसिंह-II
- 7 वाँ संविधान संशोधन (1956) – राजप्रमुख पद समाप्त।
- 26वाँ संविधान संशोधन (1971) – राजाओं के प्रिवी पर्स समाप्त।
