राजस्थान में जनजातीय आंदोलन राजस्थान का इतिहास का एक महत्वपूर्ण विषय है, जिसके अंतर्गत जनजातीय शब्दावली, राजस्थान में जनजातीय आंदोलनों के प्रमुख कारण तथा मीणा आंदोलन (1924 ई.), भील आंदोलन / भगत आंदोलन, एकी आंदोलन / भोमट भील आंदोलन और सिरोही भील आंदोलन जैसे प्रमुख आंदोलनों का अध्ययन किया जाता है। इन आंदोलनों ने जनजातीय समाज में सामाजिक चेतना, संगठन एवं अधिकारों के प्रति जागरूकता को मजबूत किया।
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राजस्थान में जनजातीय आंदोलन
- राजस्थान में जनजातीय आंदोलन स्थानीय सामंतवाद और ब्रिटिश साम्राज्यवाद के गठजोड़ के विरुद्ध प्रतिक्रिया थी।
- प्रथम संगठित प्रतिरोध मेर, मीणा और भील जनजातियों से उभरा।
- ये आंदोलन सामाजिक-आर्थिक शोषण, परंपरागत अधिकारों के हनन और नई प्रशासनिक नीतियों के विरोध में थे।
- भील आंदोलन के प्रमुख कर्णधार – गोविन्द गुरु (गोविन्द गिरी) , सुरजी भगत , मोतीलाल तेजावत , भूरीलाल बया , भोगीलाल पांड्या , राजकुमार मानसिंह
जनजातीय शब्दावली:
- बोलाई – राजमार्ग सुरक्षा करने वाले भील।
- रखवाली – गाँवों की चौकीदारी।
- आधा बराड़ – पालो पर लगने वाला वार्षिक कर।
- जनजातीय जनसंख्या में राजस्थान का भारत में छठा स्थान।
राजस्थान में जनजातीय आंदोलनों के प्रमुख कारण
- नई प्रशासनिक व्यवस्था की गलतफहमी – नई ब्रिटिश व्यवस्था से अपरिचित जनजातियों का शोषण।
- वन अधिकारों का हनन – परंपरागत वन उपयोग समाप्त।
- भू-राजस्व की कठोर नीति – नकद कर, साहूकारों पर निर्भरता।
- पारंपरिक करों का उन्मूलन – बोलाई (राजमार्ग सुरक्षा) और रखवाली (चौकीदारी) कर समाप्त।
- सैन्यीकरण का बोझ –
- मेरवाड़ा बटालियन (1832, ब्यावर)
- मेवाड़ भील कोर (1841, खैरवाड़ा)
- पारंपरिक न्याय व्यवस्था में हस्तक्षेप – मौताणा प्रथा का उन्मूलन।
- सामाजिक प्रथाओं में हस्तक्षेप –
- 1853 ई. में मेवाड़ में डाकन प्रथा पर प्रतिबंध।
- आबकारी नीति – महुआ से शराब के उत्पादन व सेवन पर रोक।
- करों में वृद्धि – अफीम, तंबाकू, नमक पर उच्च कर।
- जबरन श्रम (बेगार) – बिना वेतन श्रम।
- 1881 की जनगणना – जबरन भर्ती व कर बढ़ाने की आशंका।
मीणा आंदोलन (1924 ई.)
- 1924 ई. – मीणा जनजाति को क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के तहत अपराधी घोषित किया गया।
- 1930 ई. – जयपुर रियासत में जरायम पेशा कानून लागू।
- 25 वर्ष तक के मीणा पुरुषों को प्रतिदिन थाने में हाजिरी अनिवार्य।
- 1933 ई. – जयपुर में मीणा क्षेत्रीय महासभा की स्थापना।
- मांग – जरायम पेशा कानून की समाप्ति।
- सुधार प्रयास –
- मीणा जाति सुधार समिति – 1944 ई., जयपुर।
- जैन मुनि मगन सागर –
- पुस्तक: मीन पुराण (नीम का थाना, सीकर)
- मीणा इतिहास व गौरव का प्रस्तुतीकरण।
- नीम का थाना सम्मेलन (1944) – सांस्कृतिक पुनर्जागरण।
- बागावास सम्मेलन –
- 28 अक्टूबर 1946, बागावास (जयपुर)
- 26,000 मीणा चौकीदारों का सामूहिक इस्तीफा
- इसे “मुक्ति दिवस” कहा गया।
- 1946 के बाद स्त्रियों व बच्चों को हाजिरी से छूट।
- अंतिम परिणाम –
- 1952 ई. – हीरालाल शास्त्री व टीकाराम पालीवाल के प्रयासों से जरायम पेशा अधिनियम पूर्णतः समाप्त।
- मीणाओं पर लगे सभी प्रतिबंध हटे।
भील आंदोलन / भगत आंदोलन
- क्षेत्र – मेवाड़ व वागड़
- जनजातियाँ – भील व गरासिया
- स्वरूप – धार्मिक-सामाजिक सुधार + राजनीतिक चेतना
- नेतृत्त्व –
- गोविन्द गुरु (गोविन्द गिरी)
- सुरजी भगत (सहायक)
गोविन्द गुरु –
- जन्म – 1858 ई., बेडूसा/बांसिया (डूंगरपुर), बंजारा परिवार।
- दयानंद सरस्वती व आर्य समाज से प्रभावित।
- कोटा-बूंदी अखाड़े के साधु राजगिरी के शिष्य।
- सम्प सभा / प्रेम सभा / दसनामी सम्प्रदाय – 1883 ई., सिरोही।
- उद्देश्य –
- नैतिक सुधार
- एकेश्वरवाद
- चोरी-शराब का त्याग
- पंचायती व्यवस्था
- प्रमुख अधिवेशन –
- 1903 ई. – प्रथम अधिवेशन, मानगढ़ पहाड़ी।
- 1910 ई. – सरकार के समक्ष 33 सूत्रीय मांग पत्र।
- उद्देश्य –
मानगढ़ हत्याकांड –
- 17 नवम्बर 1913, बाँसवाड़ा
- अंग्रेज अधिकारी मेजर बेरी द्वारा फायरिंग।
- 1500+ भील शहीद।
- उपनाम –
- राजस्थान/वागड़ का जलियांवाला बाग हत्या काण्ड
- राजस्थान का दूसरा जलियांवाला बाग हत्या काण्ड
- गोविन्द गुरु को अहमदाबाद जेल में डाल दिया गया।
- अंतिम जीवन – कम्बोई (गुजरात)।
- अहिंसा के समर्थक, सफेद झंडा – शांति का प्रतीक।
एकी आंदोलन / भोमट भील आंदोलन
- क्षेत्र – गोगुंदा, झाड़ोल, कोटड़ा (उदयपुर)।
- जनजातियाँ – भील व गरासिया।
- प्रभाव – बिजौलिया किसान आंदोलन।
- नेता – मोतीलाल तेजावत
- जन्म – 1886-87 ई., कोलयारी (उदयपुर), ओसवाल परिवार।
- उपनाम –
- बावजी
- आदिवासियों का मसीहा
- मेवाड़ का गांधी
- नारा – “ना हाकिम, ना हुकुम”।
- 1921 ई. – मातृकुंडिया (चित्तौड़) से आंदोलन प्रारंभ।
- 21 सूत्रीय मांगें – मेवाड़ की पुकार।
- नीमड़ा हत्याकांड –
- 6/7 मार्च 1922, नीमड़ा (विजयनगर)
- मेजर सटन के नेतृत्व में गोलीबारी।
- 1200+ भील शहीद।
- उपनाम – मेवाड़/राजस्थान का दूसरा जलियांवाला बाग।
- बाद की घटनाएँ –
- मोतीलाल तेजावत फरार।
- 1929 ई. – गांधीजी के कहने पर आत्मसमर्पण।
- 1936 ई. – इस शर्त पर रिहा कि आगे आंदोलन नहीं करेंगे।
- वनवासी संघ – 1936 ई. स्थापना।
सिरोही भील आंदोलन
- जनवरी 1922 – मोतीलाल तेजावत द्वारा भीलों-गरासियों को संगठित किया गया।
- कर न देने व प्रशासनिक कार्यों के बहिष्कार का आह्वान।
- हत्याकांड –
- सियावा (12 अप्रैल 1922) – 3 गरासिया मारे गए।
- भूला व बालोलिया (5-6 मई 1922) –
- 50 लोग मारे गए
- 150 घायल
- जांच – राजस्थान सेवा संघ ने जांच कर रिपोर्ट प्रकाशित की (तरुण राजस्थान समाचार)।
