क्रिप्टोकरेंसी

क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल या वर्चुअल मुद्रा है, जो क्रिप्टोग्राफी तकनीक के माध्यम से सुरक्षित रहती है। प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में यह एक महत्वपूर्ण नवाचार है, जो पारंपरिक मुद्रा व्यवस्था को चुनौती दे रहा है। इसमें लेनदेन ब्लॉकचेन नामक तकनीक पर आधारित होते हैं, जो इसे पारदर्शी और सुरक्षित बनाते हैं।

परिभाषा : क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल या आभासी मुद्रा है जो सुरक्षा के लिए क्रिप्टोग्राफिक तकनीकों का उपयोग करती है। पारंपरिक मुद्राओं (जैसे, सरकारी द्वारा जारी फिएट मनी) के विपरीत, क्रिप्टोकरेंसी विकेंद्रीकृत नेटवर्क पर कार्य करती है और ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करती है।

क्रिप्टोकरेंसी के लोकप्रिय उदाहरण

  • Bitcoin (BTC): पहली क्रिप्टोकरेंसी, जिसे 2008 में पेश किया गया।
  • Ethereum (ETH): स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट क्षमताओं के लिए प्रसिद्ध।
  • Ripple (XRP): सीमा-पार भुगतान (Cross-border payments) को सरल बनाने पर केंद्रित।

क्रिप्टोकरेंसी की मुख्य विशेषताएँ

विशेषताविवरण
विकेंद्रीकरणविकेंद्रीकृत नेटवर्क पर कार्य करती है, आमतौर पर ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करती है, और किसी केंद्रीय प्राधिकरण पर निर्भर नहीं होती।
गोपनीयता और पहचानलेन-देन में उपयोगकर्ताओं को एक स्तर तक गोपनीयता प्रदान की जाती है; उपयोगकर्ताओं की पहचान वॉलेट एड्रेस से होती है।
पारदर्शिताब्लॉकचेन सभी लेनदेन को सार्वजनिक रूप से रिकॉर्ड करता है, जिससे पारदर्शिता और अपरिवर्तनीयता सुनिश्चित होती है।
सुरक्षाक्रिप्टोग्राफिक तरीकों से लेनदेन सुरक्षित होते हैं, जिससे इन्हें छेड़छाड़ और धोखाधड़ी के प्रति प्रतिरोधी बनाया जाता है।
वैश्विक उपलब्धतामुद्रा विनिमय प्रतिबंधों के बिना क्रिप्टोकरेंसी का विश्व स्तर पर उपयोग और व्यापार किया जा सकता है।
अपरिवर्तनीय लेनदेनएक बार लेन-देन पूरा हो जाने के बाद, इसे रद्द या बदला नहीं जा सकता, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
सीमित आपूर्ति अधिकांश क्रिप्टोकरेंसी (जैसे, Bitcoin) की एक निश्चित आपूर्ति होती है, जिससे दुर्लभता और मूल्य स्थिरता सुनिश्चित होती है।
पीयर-टू-पीयर लेनदेनबैंकों जैसे बिचौलियों के बिना उपयोगकर्ताओं के बीच मूल्य का सीधा आदान-प्रदान।
तेज़ लेनदेन लेन-देन, विशेष रूप से सीमा-पार लेन-देन, पारंपरिक बैंकिंग की तुलना में तेजी से संपन्न होते हैं।
कम लेनदेन लागतविशेष रूप से सीमा-पार हस्तांतरण के लिए, पारंपरिक वित्तीय प्रणालियों की तुलना में न्यूनतम शुल्क।
प्रोग्राम करने योग्यकई क्रिप्टोकरेंसी (जैसे Ethereum) स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स का समर्थन करती हैं, जो स्वचालित और सुरक्षित लेनदेन सुनिश्चित करती हैं।
डिजिटल स्वामित्वउपयोगकर्ता निजी कुंजियों (Private Keys) के माध्यम से अपनी क्रिप्टोकरेंसी पर पूरा नियंत्रण रखते हैं, जिससे वास्तविक स्वामित्व सुनिश्चित होता है।
अंतर्निहित मूल्य का अभावक्रिप्टोकरेंसी में कोई अंतर्निहित मूल्य नहीं होता और ये भौतिक संपत्तियों द्वारा समर्थित नहीं होती; यह केवल बाज़ार के विश्वास और मांग पर निर्भर करती है।.

क्रिप्टोकरेंसी का इतिहास और विकास

  • 1980s-1990s: शुरुआती विचार
    • क्रिप्टोग्राफ़िक प्रगति: क्रिप्टोग्राफ़िक प्रोटोकॉल (उदा. के लिए, RSA) के विकास ने सुरक्षित डिजिटल लेनदेन की नींव रखी।
    • DigiCash (1989): डेविड चॉम ने एनोनिमस डिजिटल मुद्रा की अवधारणा प्रस्तुत की, लेकिन इसे व्यापक स्वीकृति नहीं मिली।
  • 1998 – निक स्जाबो ने Bit Gold का विचार प्रस्तुत किया।
  • 2008: बिटकॉइन श्वेतपत्र
    • सतोशी नाकामोटो ने “Bitcoin: A Peer-to-Peer Electronic Cash System” शीर्षक से बिटकॉइन श्वेतपत्र प्रकाशित किया।
    • यह पहली विकेंद्रीकृत क्रिप्टोकरेंसी थी, जिसमें ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग किया गया।.
  • 2009: बिटकॉइन लॉन्च:
    • Genesis Block: 3 जनवरी, 2009 को पहला बिटकॉइन ब्लॉक खनन किया गया।
    • पहला लेनदेन: सतोशी नाकामोटो ने 10 BTC हैल फिनी को भेजे।
  • 2015: एथेरियम और स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स का परिचय:
    • एथेरियम: एथेरियम को विटालिक ब्यूटिरिन द्वारा पेश किया गया था, जो स्मार्ट अनुबंध और विकेंद्रीकृत अनुप्रयोगों (डीएपी) को सक्षम बनाता है।
    • डिजिटल मुद्रा से परे क्रिप्टोकरेंसी के उपयोग को व्यापक बनाया।
  • 2017: क्रिप्टो बूम: बिटकॉइन की कीमत $20,000 तक पहुँची।
  • 2020 – वर्तमान: संस्थागत स्वीकृति:
    • कंपनियाँ जैसे Tesla, PayPal, Visa ने क्रिप्टोकरेंसी भुगतान को एकीकृत किया।
    • भारत और चीन सहित कई सरकारें CBDCs पर काम कर रही हैं
  • 2023+ : Web 3.0 का एकीकरण
    • विकेंद्रीकृत वित्त (DeFi): पारंपरिक वित्तीय प्रणालियों का विकेंद्रीकरण।
    • नॉन-फंजिबल टोकन (NFTs): डिजिटल संपत्तियों की अद्वितीयता और स्वामित्व।
    • मेटावर्स एप्लिकेशन: वर्चुअल दुनिया में क्रिप्टो भुगतान और लेनदेन।

क्रिप्टोकरेन्सी कैसे काम करती है

मुख्य प्रौद्योगिकी: ब्लॉकचेन
  • परिभाषा : ब्लॉकचेन एक विकेन्द्रीकृत, वितरित खाता बही (Ledger) है जो कई कंप्यूटरों पर सभी क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन को रिकॉर्ड करता है।
मुख्य घटक
  • ब्लॉकचेन : एक वितरित लेज़र जो नेटवर्क के कंप्यूटरों पर सभी लेन-देन को रिकॉर्ड करता है।
  • संरचना
    • ब्लॉक्स: डेटा की इकाइयाँ, जिनमें लेन-देन के रिकॉर्ड होते हैं।
    • चेन: ब्लॉकों को एक के बाद एक जोड़कर चेन बनाई जाती है।
    • नोड्स: नेटवर्क में मौजूद कंप्यूटर, जो ब्लॉकचेन डेटा को संग्रहीत और सत्यापित करते हैं।
    • इम्यूटेबल लेज़र : ब्लॉकचेन में डेटा एक बार जोड़ने के बाद बदला नहीं जा सकता, जिससे पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
  • क्रिप्टोग्राफी : हैशिंग और डिजिटल सिग्नेचर जैसी तकनीकों के माध्यम से सुरक्षित लेन-देन और उपयोगकर्ता की अनामिता सुनिश्चित करता है।
    • पब्लिक की : धन प्राप्त करने के लिए एक अद्वितीय पता (खाता संख्या जैसा)।
    • प्राइवेट की : लेन-देन तक पहुंचने और उसे अधिकृत करने के लिए एक गुप्त कोड (पासवर्ड जैसा)
  • वॉलेट्स : डिजिटल उपकरण (सॉफ़्टवेयर या हार्डवेयर) जो क्रिप्टोकरेंसी भेजने, प्राप्त करने और प्रबंधित करने के लिए सार्वजनिक और निजी कुंजी संग्रहीत करते हैं।
  • माइनिंग : लेन-देन सत्यापन
    • माइनिंग क्या है?  : लेन-देन को सत्यापित करने और ब्लॉकचेन में जोड़ने की प्रक्रिया, जिसमें जटिल क्रिप्टोग्राफिक पहेलियों को हल करना शामिल है।
    • उद्देश्य :
      • लेन-देन को सत्यापित करना।
      • डबल-स्पेंडिंग को रोकना।
      • माइनर्स को नई क्रिप्टोकरेन्सी (जैसे, बिटकॉइन) से पुरस्कृत करना।
    • प्रूफ-ऑफ-वर्क  (PoW): एक सामान्य माइनिंग विधि, जिसके लिए कम्प्यूटेशनल शक्ति की आवश्यकता होती है।
लेन-देन कैसे काम करता है
  • आरंभ : एक उपयोगकर्ता अपनी प्राइवेट की का उपयोग करके क्रिप्टोकरेन्सी को दूसरे उपयोगकर्ता की पब्लिक की पर भेजता है।
  • प्रसारण : लेन-देन नेटवर्क को भेजा जाता है।
  • सत्यापन : माइनर्स या सत्यापनकर्ता लेन-देन की प्रामाणिकता को सत्यापित करते हैं।
  • ब्लॉक में शामिल करना :सत्यापित लेन-देन को एक ब्लॉक में जोड़ा जाता है।
  • ब्लॉकचेन अपडेट : एक बार लेन-देन ब्लॉकचेन में रिकॉर्ड हो जाने के बाद, यह अमिट और अपरिवर्तनीय होता है।
सहमति तंत्र
  • प्रूफ ऑफ वर्क  (PoW): खनिक (Miners) जटिल गणितीय समस्याओं को हल करके लेन-देन को सत्यापित करते हैं। उपयोग: बिटकॉइन।
  • प्रूफ ऑफ स्टेक  (PoS): सत्यापनकर्ता (Validators) का चयन इस आधार पर किया जाता है कि उनके पास कितने सिक्के हैं। उदाहरण: एथेरियम 2.0 (Ethereum 2.0) में उपयोग किया जाता है।
  • अन्य तंत्र : डेलीगेटेड प्रूफ ऑफ स्टेक (DPoS), प्रूफ ऑफ अथॉरिटी (PoA), etc.
विकेंद्रीकरण 
  • कोई भी एकल इकाई नेटवर्क को नियंत्रित नहीं करती।
  • लेन-देन को कई नोड्स द्वारा सत्यापित किया जाता है, जिससे पारदर्शिता और विश्वास सुनिश्चित होता है।
Crypto Currency

लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी

A. बिटकॉइन (BTC)

  • 2008 में “सातोशी नाकामोतो” द्वारा प्रस्तुत किया गया।
  • पहली क्रिप्टोकरेंसी और सबसे व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त।
  • उद्देश्य :पीयर-टू-पीयर डिजिटल कैश सिस्टम।
  • मुख्य विशेषताएँ :
    • सीमित आपूर्ति: केवल 21 मिलियन बिटकॉइन।
    • प्रूफ ऑफ वर्क (PoW): लेनदेन सत्यापन के लिए प्रूफ-ऑफ-वर्क खनन का उपयोग करता है।

B. एथेरियम (ETH)

  • 2015 में विटालिक ब्यूटेरिन द्वारा शुरू किया गया।
  • यह केवल क्रिप्टोकरेंसी नहीं है, विकेंद्रीकृत एप्लिकेशन (डीएपी) बनाने के लिए एक प्लेटफॉर्म है।
  • विशिष्ट विशेषताएँ:
    • स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स: स्व-कार्यात्मक कॉन्ट्रैक्ट्स जिनमें पूर्वनिर्धारित नियम कोड में लिखे जाते हैं।  
    • विकेंद्रीकृत एप्लिकेशन (dApps): एप्लिकेशन जो एथेरियम के विकेंद्रीकृत नेटवर्क पर चलती हैं।  
    • प्रोग्रामेबल ब्लॉकचेन: डेवलपर्स को टोकन, NFTs और जटिल वित्तीय उपकरण बनाने की अनुमति देता है।
  • Ether (ETH): The Cryptocurrency
    • एथेरियम नेटवर्क की मूल क्रिप्टोकरेंसी।
  • उपयोग :
    • विकेंद्रीकृत वित्त (DeFi), NFTs, गेमिंग और मेटावर्स, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, और टोकन निर्माण।
  • Ethereum 2.0 PoW से PoS में बदलाव: सितंबर 2022 में एथेरियम ने PoW से PoS (Proof of Stake) में संक्रमण किया।
    • PoS के लाभ:
      • ऊर्जा खपत में 99% की कमी।
      • बेहतर स्केलेबिलिटी, सुरक्षा और स्थिरता
    • शार्डिंग : ब्लॉकचेन को छोटे भागों (शार्ड्स) में विभाजित करके लेनदेन की गति बढ़ाने और लागत घटाने के लिए भविष्य का उन्नयन।

C. Altcoins

  • परिभाषा : बिटकॉइन को छोड़कर अन्य सभी क्रिप्टोकरेंसी।
  • उदाहरण : लाइटकॉइन (Litecoin – LTC), रिपल (Ripple – XRP)।

D. स्थिर मुद्राएँ(Stable Coins) 

  • परिभाषा : ऐसी क्रिप्टोकरेंसी जो अस्थिरता को कम करने के लिए अपनी वैल्यू को फिएट मुद्रा या सोने जैसी स्थिर परिसंपत्तियों से जोड़ती हैं।
  • उदाहरण :
    • Tether (USDT): अमेरिकी डॉलर से जुड़ा।
    • Dai (DAI): विकेंद्रीकृत स्थिर मुद्रा, USD से जुड़ी।

E. केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC)

  • परिभाषा : केंद्रीय बैंकों द्वारा जारी और विनियमित डिजिटल मुद्रा, जो क्रिप्टोकरेंसी का वैकल्पिक समाधान है।
  • उदाहरण : 2022 में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने डिजिटल रुपये (e₹) को पायलट प्रोजेक्ट के तहत लॉन्च किया।
  • उद्देश्य : ब्लॉकचेन के लाभों को सरकारी नियंत्रण के साथ जोड़ना।

नॉन-फंजिबल टोकन (NFTs)

NFTs क्या हैं?
  • नॉन-फंजिबल टोकन (NFTs) एक प्रकार की डिजिटल संपत्ति है जो ब्लॉकचेन पर किसी अद्वितीय वस्तु या सामग्री के स्वामित्व या प्रामाणिकता के प्रमाण का प्रतिनिधित्व करती है।
  • क्रिप्टोकरेंसी (जैसे बिटकॉइन या एथेरियम) के विपरीत, जो फंजीबल (विनिमेय) होती हैं, प्रत्येक NFT अद्वितीय या एकल होती है, जिससे यह नॉन-फंजीबल बन जाती है।
NFTs की मुख्य विशेषताएँ:
  • अद्वितीयता : प्रत्येक NFT विशिष्ट होता है और आमतौर पर किसी विशेष डिजिटल या भौतिक सामग्री (जैसे कला, संगीत, वीडियो, कलेक्टिबल्स, या ट्वीट) से जुड़ा होता है।
  • अखंडता : उन्हें संपूर्ण इकाइयों के रूप में खरीदा, बेचा और स्वामित्व दिया जाता है।
  • स्वामित्व और प्रामाणिकता : स्वामित्व ब्लॉकचेन पर रिकॉर्ड किया जाता है, जो संपत्ति की प्रामाणिकता और स्वामित्व इतिहास को सुनिश्चित करता है।
NFTs कैसे काम करते हैं?
  • NFTs को ब्लॉकचेन पर रिकॉर्ड करके डिजिटल फाइलों (जैसे छवियाँ, वीडियो, संगीत) को NFTs में बदलने की प्रक्रिया को मिंटिंग कहते हैं।
  • अधिकांश NFTs एथेरियम ब्लॉकचेन पर मिंट किए जाते हैं।
  • अन्य ब्लॉकचेन: Binance Smart Chain, Solana, Flow।
  • स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स: स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स NFTs की बिक्री, स्थानांतरण, और स्वामित्व को नियंत्रित करते हैं। इनमें अतिरिक्त फीचर्स, जैसे पुनर्विक्रय पर कलाकार को रॉयल्टी का प्रावधान, भी शामिल हो सकते हैं।
NFTs के लाभ:
  • रचनाकारों को सशक्त बनाना: कलाकारों, संगीतकारों और डेवलपर्स को बिचौलियों के बिना सीधे अपनी कृतियों का मुद्रीकरण करने में मदद करता है।
  • स्वामित्व और प्रामाणिकता : ब्लॉकचेन स्वामित्व और संपत्ति के इतिहास को सुरक्षित और पारदर्शी बनाता है।
  • रॉयल्टी : कलाकार को उनकी कृति के पुनर्विक्रय पर रॉयल्टी प्राप्त होती है।
 NFTs की चुनौतियाँ और आलोचनाएँ:
  • पर्यावरणीय प्रभाव
  • बाज़ार सट्टा
  • कॉपीराइट समस्याएँ :कलाकारों की सहमति के बिना उनकी कृतियों को टोकनाइज किया गया है, जिससे कॉपीराइट उल्लंघन के मामले सामने आते हैं।
  • धोखाधड़ी और घोटाले : नकली NFT लिस्टिंग और चोरी की गई कृतियाँ, जिससे खरीदार और कलाकार दोनों को नुकसान हो सकता है।

अनुप्रयोग

अनुप्रयोगविवरणउदाहरण

वित्त और बैंकिंग
डिजिटल भुगतान: क्रिप्टोकरेंसी तेज़, सुरक्षित, और कम लागत वाले सीमा-पार भुगतान को सक्षम बनाती है।Bitcoin (BTC), Litecoin (LTC)
प्रेषण  :लोगों को बिना उच्च शुल्क और देरी के सीमा-पार पैसा भेजने में सक्षम बनाती है, खासकर कम बैंकिंग सुविधाओं वाले क्षेत्रों में।Ripple (XRP), Stellar (XLM)
विकेंद्रीकृत वित्त  (DeFi): क्रिप्टोकरेंसी-आधारित वित्तीय सेवाएं, जैसे – पारंपरिक बैंकों या बिचौलियों के बिना उधार देना, उधार लेना और व्यापार करना।Uniswap (UNI), Aave (AAVE), Compound (COMP)
वैकल्पिक निवेश परिसंपत्ति:Bitcoin और Ethereum जैसी क्रिप्टोकरेंसी को अब दीर्घकालिक निवेश विकल्प के रूप में देखा जाता है।कई निवेशक मुद्रास्फीति या पारंपरिक बाजार की अस्थिरता से बचाव के लिए क्रिप्टो खरीदते हैं।ZebPay और CoinDCX जैसे प्लेटफार्मों पर ट्रेडिंग।
स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्सस्वचालित अनुबंध जो कोड में सीधे लिखे गए नियमों के साथ स्वयं निष्पादित होते हैं।Ethereum (ETH), Cardano (ADA)
नॉन-फंजिबल टोकन (NFTs)डिजिटल संपत्तियां जो अद्वितीय वस्तुओं (कला, संगीत, कलेक्टिबल्स) के स्वामित्व का प्रतिनिधित्व करती हैं।Ethereum (ETH), Flow (FLOW)
क्राउडफंडिंग और ICOsक्रिप्टोकरेंसी नई परियोजनाओं या स्टार्टअप्स के लिए फंड जुटाने के लिए प्रारंभिक कॉइन पेशकश (ICO) और टोकन बिक्री को सक्षम बनाती है।Ethereum (ETH), Binance Coin (BNB)
गेमिंग और वर्चुअल वस्तुएंक्रिप्टोकरेंसी का उपयोग आभासी दुनिया या गेम में इन-गेम आइटम, स्किन और संपत्ति खरीदने के लिए किया जाता है।Enjin Coin (ENJ), Decentraland (MANA)
सप्लाई चेन प्रबंधनपारदर्शिता और ट्रैकिंग:  ब्लॉकचेन उत्पादन से लेकर डिलीवरी तक वस्तुओं की ट्रेसबिलिटी (Traceability) सुनिश्चित करता है।जालसाजी विरोधी (Anti-Counterfeiting):क्रिप्टोकरेंसी ब्लॉकचेन सिस्टम का समर्थन करती हैं, जो उत्पादों की प्रामाणिकता को सत्यापित करते हैं।उदाहरण : Walmart ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करके खाद्य आपूर्ति को ट्रैक करता है।VeChain (VET), Waltonchain (WTC)
पारदर्शिता और ट्रैकिंगप्राइवेसी कॉइन्स एनोनिमस लेनदेन की पेशकश करते हैं, उपयोगकर्ताओं की वित्तीय गोपनीयता की रक्षा करते हैं।Monero (XMR), Zcash (ZEC)
शासनविकेंद्रीकृत परियोजनाओं के भीतर निर्णयों और प्रोटोकॉल उन्नयन पर मतदान के लिए क्रिप्टोकरेंसी टोकन का उपयोग।Uniswap (UNI), MakerDAO (MKR)
रियल एस्टेटसंपत्ति लेनदेन को सक्षम करना, रियल एस्टेट संपत्तियों को टोकनाइज़ करना और सीमा-पार स्थानांतरण को सरल बनाना।Propy (PRO), RealT
डिजिटल पहचानब्लॉकचेन-आधारित पहचान प्रबंधन: उपयोगकर्ताओं को व्यक्तिगत डेटा का सुरक्षित, विकेंद्रीकृत नियंत्रण प्रदान करता है।SelfKey (KEY), Civic (CVC)

सामाजिक क्षेत्रों में ब्लॉकचेन का उपयोग

1. महत्वपूर्ण नागरिक जानकारी का प्रबंधन:
  • ब्लॉकचेन का उपयोग भूमि रिकॉर्ड, जनगणना डेटा, जन्म/मृत्यु रिकॉर्ड, व्यापार लाइसेंस, आपराधिक रिकॉर्ड, आईपी रजिस्टर और मतदाता सूची जैसे महत्वपूर्ण डेटा को प्रबंधित करने के लिए किया जा सकता है।
  • लाभ : जालसाजी-प्रूफ, सुरक्षित और पारदर्शी सार्वजनिक लेजर बनाता है।
2. भ्रष्टाचार से लड़ाई
  • ब्लॉकचेन सरकारी लेन-देन को पंजीकृत करने में मदद करता है, जिससे सभी लेन-देन का पारदर्शी और विश्वसनीय इतिहास बनता है।
  • लाभ :ऑडिटिंग को बढ़ावा देता है, भ्रष्टाचार को कम करता है, सार्वजनिक खरीद को पारदर्शी बनाता है।
3. लालफीताशाही को खत्म करना
  • सरकारी डेटाबेस में अक्सर इंटरऑपरेबिलिटी की कमी होती है, जिससे डेटा की पुनरावृत्ति, ओवरलैप और देरी होती है।
  • लाभ : ब्लॉकचेन पुनरावृत्ति को समाप्त करता है, एजेंसियों के बीच डेटा साझाकरण को सुगम बनाता है और प्रशासनिक अवरोधों को कम करता है।
4. पहचान और भूमि अधिकार
  • ब्लॉकचेन व्यक्तिगत पहचानकर्ताओं जैसे जन्म प्रमाण पत्र और विश्वविद्यालय की डिग्री को सुरक्षित रूप से संग्रहीत कर सकता है।
  • लाभ : उपयोगकर्ताओं को गोपनीयता बनाए रखते हुए अपने डेटा को नियंत्रित करने और इसे विश्व स्तर पर साझा करने में सक्षम बनाता है।
  • उदाहरण : दुबई, एस्टोनिया, जॉर्जिया और स्वीडन जैसे देश संपत्ति अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए ब्लॉकचेन का उपयोग कर रहे हैं।
5. कृषि
  • ब्लॉकचेन पारदर्शिता को बढ़ाता है, जिससे खाद्य धोखाधड़ी और संदूषण को कम किया जा सकता है।
  • लाभ : किसानों और वितरकों को शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करता है। संचालन में दक्षता और विश्वास को बढ़ाता है।
6. स्वास्थ्य
  • ब्लॉकचेन डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड और फार्मास्युटिकल आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में सुधार करता है।
  • लाभ : विकेंद्रीकृत, सुरक्षित और कुशल हेल्थकेयर डेटा प्रबंधन समाधान प्रदान करता है।
  • उदाहरण: नकली दवाओं को रोकने के लिए दवा आपूर्ति श्रृंखलाओं में ब्लॉकचेन का उपयोग।
7. शासन और लोकतंत्र
  • डिजिटल पहचान प्रबंधन: ब्लॉकचेन-आधारित आईडी डेटा गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
  • क्रिप्टोकरेंसी जालसाजी-प्रूफ, ब्लॉकचेन-आधारित मतदान प्लेटफ़ॉर्म को सक्षम बनाती हैं। 
  • उदाहरण: एस्टोनिया का ई-रेसिडेंसी प्रोग्राम ब्लॉकचेन तकनीक को शामिल करता है।
8. पर्यावरण संरक्षण
  • सप्लाई चेन प्रबंधन में ब्लॉकचेन उत्पादों को उनकी उत्पत्ति से अंतिम उपयोगकर्ता तक ट्रैक करता है।
  • लाभ: जैविक और फेयर ट्रेड उत्पादों की प्रामाणिकता को सत्यापित करना और स्थिरता का समर्थन करना।
9.  परोपकार और सहायता
  • उपयोग: ब्लॉकचेन दान के वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है, जिससे दुरुपयोग में कमी आती है।
  • लाभ: गैर-लाभकारी संस्थानों में विश्वास बढ़ाना और धन को सही लाभार्थियों तक पहुंचाना।
10. क्राउडफंडिंग
  • उपयोग: ब्लॉकचेन-समर्थित क्राउडफंडिंग अभियान क्रिप्टोकरेंसी (जैसे, बिटकॉइन) स्वीकार करते हैं।
  • लाभ: नए प्रोजेक्ट्स के लिए निवेश सुरक्षित करना, दान और प्रोजेक्ट प्रगति का पारदर्शी ट्रैकिंग।

क्रिप्टोकरेंसी की चुनौतियाँ

चुनौतीविवरण
अस्थिरताक्रिप्टोकरेंसी के मूल्य में उतार-चढ़ाव अधिक होता है, जिससे ये निवेश और दैनिक लेन-देन के लिए जोखिमपूर्ण बन जाती हैं।
उदाहरण: बिटकॉइन की कीमत 2017 में लगभग $20,000 तक बढ़ी, लेकिन 2018 में यह $4,000 से भी नीचे गिर गई।
स्केलेबिलिटीकई ब्लॉकचेन नेटवर्कों को तेजी से और प्रभावी रूप से बड़ी संख्या में लेन-देन को प्रोसेस करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
उदाहरण: बिटकॉइन का ब्लॉकचेन केवल 7 लेन-देन प्रति सेकंड प्रोसेस कर सकता है, जबकि पारंपरिक भुगतान प्रणाली जैसे Visa हजारों लेन-देन संभाल सकती है।
उपभोक्ता संरक्षण की कमीक्रिप्टोकरेंसी ज्यादातर अनियमित होने के कारण धोखाधड़ी, गलतियों या नुकसान के खिलाफ उपभोक्ताओं के लिए कोई सुरक्षा नहीं है।
पोंज़ी स्कीम और पंप-एंड-डंप स्कीम्स: क्रिप्टोकरेंसी के क्षेत्र में कई धोखाधड़ी वाले प्रोजेक्ट्स उभरे हैं, जो निवेशकों को गुमराह करते हैं।
नए निवेशकों से धन इकट्ठा करके पुराने निवेशकों को भुगतान किया जाता है, जब तक कि योजना असफल न हो जाए।
यदि कोई उपयोगकर्ता अपनी निजी कुंजी खो देता है या धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है, तो सहायता प्रदान करने के लिए कोई केंद्रीय प्राधिकरण नहीं है।
उदाहरण: विकेंद्रीकृत वित्त (डीएफआई) परियोजनाओं में रग पुल, जहां डेवलपर्स एक योजना बनाते हैं और फिर निवेशकों के धन के साथ गायब हो जाते हैं, जो कि एक आम मुद्दा है।
नियामक अनिश्चिततासरकारें और नियामक अभी भी क्रिप्टोकरेंसी के लिए रूपरेखा विकसित कर रहे हैं, जिससे अनिश्चितता बनी हुई है। 
उदाहरण : चीन ने क्रिप्टो ट्रेडिंग और माइनिंग पर प्रतिबंध लगाया है, जबकि एल साल्वाडोर ने बिटकॉइन को कानूनी मुद्रा के रूप में अपनाया है।
सुरक्षा जोखिममजबूत एन्क्रिप्शन के बावजूद, क्रिप्टोकरेंसी हैकिंग, चोरी और धोखाधड़ी के लिए असुरक्षित हैं।
उदाहरण: 2018 में Coincheck एक्सचेंज से $500 मिलियन की हैकिंग।
स्वीकृति की कमी हालांकि स्वीकृति बढ़ रही है, लेकिन दैनिक उपयोग के लिए क्रिप्टोकरेंसी की स्वीकृति अब भी सीमित है।कुछ कंपनियाँ जैसे Tesla और PayPal क्रिप्टो स्वीकार करती हैं, लेकिन अधिकांश व्यवसाय पारंपरिक भुगतान स्वीकार करते हैं।
पर्यावरणीय प्रभावविशेष रूप से बिटकॉइन माइनिंग, ऊर्जा-गहन PoW प्रक्रिया के कारण बड़ी मात्रा में बिजली की खपत करता है।कुछ क्रिप्टोकरेंसी अधिक स्थायी विकल्पों की खोज कर रही हैं, जैसे प्रूफ-ऑफ-स्टेक (Proof-of-Stake – PoS), जो कम ऊर्जा की खपत करता है।
उदाहरण: बिटकॉइन माइनिंग की बिजली खपत अर्जेंटीना जैसे छोटे देशों के बराबर है।
अपरिवर्तनीय लेन-देनब्लॉकचेन पर एक बार लेन-देन पूरा हो जाने के बाद, इसे रद्द या बदला नहीं जा सकता, जिससे गलतियों या धोखाधड़ी में समस्या होती है।
अनामिता और आपराधिक उपयोगक्रिप्टोकरेंसी की अनामिता अवैध गतिविधियों के लिए उपयोग की जा सकती है, जिससे कानून प्रवर्तन के लिए चुनौतियाँ बढ़ती हैं।
उदाहरण: सिल्क रोड डार्कनेट मार्केटप्लेस पर बिटकॉइन का उपयोग अवैध दवाओं और हथियारों की खरीद के लिए किया गया।
जटिलताक्रिप्टोकरेंसी के वॉलेट, प्राइवेट कीज़ और ब्लॉकचेन तकनीक को समझना नए उपयोगकर्ताओं के लिए कठिन हो सकता है।
उदाहरण: वॉलेट एक्सेस खोने पर बिना बैकअप की, फंड स्थायी रूप से खो सकते हैं।
पारंपरिक प्रणालियों के साथ एकीकरणक्रिप्टोकरेंसी पारंपरिक वित्तीय प्रणालियों के साथ एकीकरण में चुनौतियों का सामना करती हैं, जिससे उनकी उपयोगिता सीमित हो जाती है।
बाजार हेरफेरक्रिप्टोकरेंसी की अपेक्षाकृत अनियमित प्रकृति के कारण, “व्हेल” या बड़े खिलाड़ियों के माध्यम से बाजार में हेरफेर एक चिंता का विषय है।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी

भारत में क्रिप्टो विनियमन (Regulation) क्यों महत्वपूर्ण है?
  1. आर्थिक अपराधों से सुरक्षा →मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्तपोषण से लड़ने के लिए।
  2. वित्तीय स्थिरता:→ अनियमित क्रिप्टो बाजारों से प्रणालीगत जोखिम को रोकने के लिए
  3. नवाचार और विकास  → स्पष्ट नियम वैध व्यवसायों और निवेश को आकर्षित करते हैं।
भारत में क्रिप्टो-करेंसी का  विनियमन 
  • क्रिप्टोकरेंसी की कानूनी स्थिति :
    • भारत में क्रिप्टो-करेंसी वैधानिक मुद्रा (Legal Tender) नहीं है, लेकिन व्यापार और निवेश के लिए अनुमति है।
    • कराधान : क्रिप्टो लाभ पर 30% कर और एक सीमा से ज्यादा लेन-देन पर 1% टीडीएस (TDS) लगता है।
  • प्रमुख नियामक निकाय:
    • RBI: क्रिप्टोकरेंसी को लेकर चेतावनियाँ जारी करता है और विकेंद्रीकृत क्रिप्टो का आलोचक है।
    • SEBI: वर्तमान में सलाहकारी भूमिका। यदि प्रतिभूतियों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, तो क्रिप्टो को विनियमित करेगा। 
    • वित्त मंत्रालय : क्रिप्टोकरेंसी पर कराधान और मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अवैध गतिविधियों पर नज़र रखता है।
  • RBI का नजरिया :
    • 2018: क्रिप्टो लेन-देन पर बैन लगाया गया।
    • 2020: सुप्रीम कोर्ट ने इस बैन को हटा दिया।
    • चिंताएँ : वित्तीय जोखिम, बाज़ार में अस्थिरता और रुपये की साख को नुकसान।
  • डिजिटल करेंसी बिल  2021:
    • निजी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव।
    • ब्लॉकचेन तकनीक को अन्य क्षेत्रों में उपयोग करने का समर्थन।
    • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के तहत एक डिजिटल करेंसी (CBDC) विकसित करने पर जोर।

वर्चुअल डिजिटल एसेट्स

  • वर्चुअल डिजिटल एसेट किसी भी प्रकार की जानकारी, कोड, नंबर, या टोकन को संदर्भित करता है (जो भारतीय मुद्रा या विदेशी मुद्रा नहीं है), जिसे क्रिप्टोग्राफिक तरीकों या अन्य माध्यमों से बनाया गया हो और इसे किसी भी नाम से बुलाया जा सकता है।
  • उदाहरण
    • क्रिप्टोकरेंसी (जैसे बिटकॉइन)
    • नॉन-फंजिबल टोकन (NFTs)

वर्चुअल डिजिटल एसेट्स से जुड़े लेन-देन PMLA के तहत आते हैं, जिससे अवैध गतिविधियों और धनशोधन पर निगरानी रखी जाती है।Extra : वित्त विधेयक 2022 में VDA (वर्चुअल डिजिटल एसेट्स) का प्रस्ताव किया गया, ताकि VDAs से संबंधित कराधान और कर की रोकथाम (Withholding of tax) की व्यवस्था की जा सके। 1 अप्रैल 2022 से प्रभावी, VDAs के हस्तांतरण से होने वाली किसी भी आय पर 30% (सहयोग और उपकर सहित) दर से कर लगाया जाएगा।

वैश्विक तुलना 

  • अमेरिका :
    • क्रिप्टोकरेंसी को SEC (Securities and Exchange Commission), CFTC (Commodity Futures Trading Commission) और FinCEN जैसे विकेंद्रीकृत नियामकीय निकायों द्वारा नियंत्रित किया जाता है
    •  पूंजीगत लाभ कर के साथ संपत्ति के रूप में कर लगाया जाता है।
  • यूरोपीय संघ :
    •  एकसमान नियमन के लिए मार्केट्स इन क्रिप्टो-एसेट्स (MiCA) विनियमन विकसित किए गए हैं। 
    • विभिन्न देशों में क्रिप्टो पर कराधान के तरीके अलग-अलग हैं।
  • जापान :
    • क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी मुद्रा के रूप में मान्यता दी गई है, जो कि वित्तीय सेवा एजेंसी (FSA) द्वारा विनियमित होती है। 
    • लाभों पर प्रगतिशील कराधान (15%-55%) लागू होता है।

भारत में प्रमुख क्रिप्टो एक्सचेंज

  • WazirX: भारत में सबसे बड़े और सबसे लोकप्रिय एक्सचेंजों में से एक। बिटकॉइन, एथेरियम, रिपल आदि जैसी प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी में ट्रेडिंग की पेशकश करता है।
  • अन्य एक्सचेंज जैसे CoinDCX, CoinSwitch Kuber, ZebPay, Unocoin, Bitbns, और Koine भी सक्रिय हैं।

भारतीय क्रिप्टो स्टार्टअप्स एवम् नवाचार  

  • पॉलीगॉन (पहले मेटिक नेटवर्क): एक ब्लॉकचेन स्केलिंग समाधान जिसका उद्देश्य एथेरियम लेन-देन को सस्ता और तेज़ बनाना है।
  • CoinDCX: एक प्रमुख क्रिप्टो एक्सचेंज है, जो क्रिप्टो खरीदने, बेचने और ट्रेडिंग की सुविधा देता है।
  • इंस्टामोजो (Instamojo): शुरू में एक भुगतान गेटवे था, अब ब्लॉकचेन समाधानों में विस्तार कर रहा है।
  • Unocoin, Cashaa

सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC)

CBDC क्या है?
  • CBDC किसी देश की फिएट करेंसी का डिजिटल रूप है, जिसे देश के केंद्रीय बैंक द्वारा जारी और नियंत्रित किया जाता है।
  • क्रिप्टोकरेंसी (जैसे बिटकॉइन) के विपरीत, CBDC राज्य द्वारा समर्थित, सुरक्षित और केंद्रीय बैंक द्वारा शासित होती है।
प्रमुख विकास :
  • मई 2020: चीन के पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (PBC) ने डिजिटल युआन (Yuan/Renminbi) जारी करने के लिए ट्रायल शुरू किया, जिससे वैश्विक स्तर पर CBDC में रुचि बढ़ी।
  • दिसंबर 2021: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सुझाव दिया कि भारत को अपने माइक्रोइकोनॉमिक नीति पर डायनेमिक प्रभाव के कारण बुनियादी CBDC मॉडल से शुरुआत करनी चाहिए।
CBDC के प्रकार:
  1. होलसेल CBDC: वित्तीय संस्थानों के बीच लेनदेन के लिए उपयोग।
  2. रिटेल CBDC: आम जनता के लिए उपलब्ध, यह भौतिक मुद्रा जैसा होता है लेकिन डिजिटल रूप में।

लाभ:

  • लागत में बचत : भौतिक मुद्रा की प्रिंटिंग लागत और परिवहन की बचत।
  • नकली मुद्रा में कमी : डिजिटल मुद्रा नकली नोटों के जोखिम को समाप्त करती है।
  • ट्रेसिबिलिटी: लेन-देन को ट्रैक करती है, धोखाधड़ी और कर चोरी को घटाती है।
    • उदाहरण: कर चोरी के लिए ऑटो-अलर्ट्स।
  • क्रिप्टो पर नियंत्रण : आतंकवाद वित्तपोषण और अवैध गतिविधियों के जोखिम को घटाता है।
  • तेज़ भुगतान: लाभार्थियों को तत्काल पैसे का हस्तांतरण (जैसे, पेंशन, सब्सिडी)।
  • प्रोग्रामेबल मुद्रा: खर्च को स्वचालित रूप से नियंत्रित करती है (जैसे, छात्र ऋण ब्याज दर समायोजन)।
  • स्वास्थ्य सुरक्षा : भौतिक मुद्रा के उपयोग में कमी के कारण वायरस फैलने का खतरा कम।

चुनौतियाँ :

  • डिजिटल विभाजन : ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट या डिजिटल साक्षरता की कमी।
  • साइबर सुरक्षा जोखिम :  साइबर हमलों या प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील।

FAQ (Previous year questions)

  • डिजिटल रुपया, जिसे e₹ के नाम से भी जाना जाता है, भारत की आधिकारिक सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) है, जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा शुरू किया गया है। 
  • यह भौतिक मुद्रा का डिजिटल रूप है।
  • e₹ उपयोगकर्ता के डिजिटल वॉलेट में संग्रहीत होता है और इसका उपयोग पैसा प्राप्त / भेजने या भुगतान करने के लिए किया जा सकता है।

तुलनात्मक विशेषताएँ:

विशेषताडिजिटल रुपयाUPI
प्रकृति₹ का डिजिटल रूप (CBDC)भुगतान का माध्यम (लेन-देन मंच)
जारीकर्ता / संचालकRBINPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया)
रूपात्मक स्वरूपमुद्रा-जैसा (टोकन-आधारित)बैंक ट्रांसफर के लिए इंटरफ़ेस
कानूनी वैधताहाँनहीं – यह कानूनी मुद्रा के हस्तांतरण की सुविधा देता है
लेन-देन का प्रकारवॉलेट-जैसा (मूल्य संचय का माध्यम)बैंक से बैंक धन हस्तांतरण

क्रिप्टोकरेंसी डिजिटल या आभासी मुद्रा का एक रूप है, जो सुरक्षा के लिए क्रिप्टोग्राफिक तकनीकों का उपयोग करती है।

पारंपरिक मुद्राओं (फिएट करेंसी), जिन्हें सरकारें जारी करती हैं, के विपरीत, क्रिप्टोकरेंसी विकेन्द्रीकृत नेटवर्क (डिस्ट्रीब्यूटेड लेज़र) पर कार्य करती है और ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करती है। उदाहरण: बिटकॉइन, लाइटकॉइन, रिपल।

क्रिप्टोकरेंसी = डिस्ट्रीब्यूटेड लेज़र + ब्लॉकचेन

 क्रिप्टोकरेंसी के लाभ

  • विकेंद्रीकरण : अधिकांश क्रिप्टोकरेंसी विकेंद्रीकृत नेटवर्क पर कार्य करती हैं, जिससे बैंकों और सरकारों पर निर्भरता कम होती है।
  • पारदर्शिता : ब्लॉकचेन में सभी लेनदेन सार्वजनिक रूप से दर्ज होते हैं, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और धोखाधड़ी की संभावना कम हो जाती है।
  • वैश्विक उपलब्धता : बिना मुद्रा विनिमय की बाधाओं के क्रिप्टोकरेंसी को दुनिया में कहीं भी उपयोग और व्यापार किया जा सकता है।
  • तेज और सुरक्षित डिजिटल भुगतान : क्रिप्टोकरेंसी बिचौलियों (intermediaries) के बिना तेज, सुरक्षित और कम लागत वाले अंतरराष्ट्रीय भुगतान को सक्षम बनाती है।
  • वित्तीय समावेशन : यह उन लोगों को बैंकिंग सेवाएं प्रदान कर सकती है जिनकी पहुंच पारंपरिक बैंकों तक नहीं है, विशेष रूप से विकासशील देशों में। उदाहरण: ई-रूपी (e-RUPI)

 क्रिप्टोकरेंसी के नुकसान

  • मूल्य अस्थिरता : क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव हो सकता है, जिससे वित्तीय नुकसान हो सकता है। उदाहरण: 2017 में बिटकॉइन की कीमत लगभग $20,000 तक पहुंच गई, लेकिन 2018 में यह $4,000 से नीचे गिर गई।
  • विनियामकीय अनिश्चितता : कई सरकारें अभी भी क्रिप्टोकरेंसी को विनियमित करने के तरीकों पर विचार कर रही हैं, जिससे कानूनी जोखिम बढ़ जाता है। उदाहरण: चीन ने क्रिप्टो ट्रेडिंग और माइनिंग पर प्रतिबंध लगा दिया है, जबकि अल सल्वाडोर ने बिटकॉइन को कानूनी मुद्रा के रूप में स्वीकार किया है। भारत में, आरबीआई और सरकार के बीच इसके विनियमन को लेकर संशय की स्थिति हैं।
  • गोपनीयता और अपराधों में उपयोग : क्रिप्टोकरेंसी की गुमनामी (अनॉनिमिटी) के कारण इसे अवैध गतिविधियों जैसे कि मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद वित्तपोषण और साइबर अपराधों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • पारंपरिक बैंकिंग और व्यष्टि अर्थव्यवस्था के लिए खतरा : यदि क्रिप्टोकरेंसी व्यापक रूप से अपनाई जाती है, तो यह पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली, राजकोषीय नीतियों (कर चोरी एवम् अपवंचना)  और मौद्रिक नीतियों को बाधित कर सकती है।
  • पर्यावरणीय चुनौतियाँ : प्रूफ-ऑफ-वर्क (PoW) आधारित क्रिप्टोकरेंसी, जैसे कि बिटकॉइन, को माइनिंग के लिए अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
‘डिजीटलरूपी (e ₹) क्‍या है? यह UPI कैसे भिन्न है?  (अंक – 2 M, 2024)

डिजिटल रुपया, जिसे e₹ के नाम से भी जाना जाता है, भारत की आधिकारिक सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) है, जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा शुरू किया गया है। 
यह भौतिक मुद्रा का डिजिटल रूप है।
e₹ उपयोगकर्ता के डिजिटल वॉलेट में संग्रहीत होता है और इसका उपयोग पैसा प्राप्त / भेजने या भुगतान करने के लिए किया जा सकता है।
तुलनात्मक विशेषताएँ:
विशेषता
डिजिटल रुपया
UPI
प्रकृति
₹ का डिजिटल रूप (CBDC)
भुगतान का माध्यम (लेन-देन मंच)
जारीकर्ता / संचालक
RBI
NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया)
रूपात्मक स्वरूप
मुद्रा-जैसा (टोकन-आधारित)
बैंक ट्रांसफर के लिए इंटरफ़ेस
कानूनी वैधता
हाँ
नहीं – यह कानूनी मुद्रा के हस्तांतरण की सुविधा देता है
लेन-देन का प्रकार
वॉलेट-जैसा (मूल्य संचय का माध्यम)
बैंक से बैंक धन हस्तांतरण

क्रिप्टोकरेंसी क्या है? इसके फायदे और नुकसान क्या हैं? (अंक – 5 M, 2021)

क्रिप्टोकरेंसी डिजिटल या आभासी मुद्रा का एक रूप है, जो सुरक्षा के लिए क्रिप्टोग्राफिक तकनीकों का उपयोग करती है।
पारंपरिक मुद्राओं (फिएट करेंसी), जिन्हें सरकारें जारी करती हैं, के विपरीत, क्रिप्टोकरेंसी विकेन्द्रीकृत नेटवर्क (डिस्ट्रीब्यूटेड लेज़र) पर कार्य करती है और ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करती है। उदाहरण: बिटकॉइन, लाइटकॉइन, रिपल।
क्रिप्टोकरेंसी = डिस्ट्रीब्यूटेड लेज़र + ब्लॉकचेन
 क्रिप्टोकरेंसी के लाभ
विकेंद्रीकरण : अधिकांश क्रिप्टोकरेंसी विकेंद्रीकृत नेटवर्क पर कार्य करती हैं, जिससे बैंकों और सरकारों पर निर्भरता कम होती है।
पारदर्शिता : ब्लॉकचेन में सभी लेनदेन सार्वजनिक रूप से दर्ज होते हैं, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और धोखाधड़ी की संभावना कम हो जाती है।
वैश्विक उपलब्धता : बिना मुद्रा विनिमय की बाधाओं केक्रिप्टोकरेंसी को दुनिया में कहीं भी उपयोग और व्यापार किया जा सकता है।
तेज और सुरक्षित डिजिटल भुगतान : क्रिप्टोकरेंसी बिचौलियों (intermediaries) के बिना तेज, सुरक्षित और कम लागत वाले अंतरराष्ट्रीय भुगतान को सक्षम बनाती है।
वित्तीय समावेशन : यह उन लोगों को बैंकिंग सेवाएं प्रदान कर सकती है जिनकी पहुंच पारंपरिक बैंकों तक नहीं है, विशेष रूप से विकासशील देशों में। उदाहरण: ई-रूपी (e-RUPI)
 क्रिप्टोकरेंसी के नुकसान
मूल्य अस्थिरता : क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव हो सकता है, जिससे वित्तीय नुकसान हो सकता है। उदाहरण: 2017 में बिटकॉइन की कीमत लगभग $20,000 तक पहुंच गई, लेकिन 2018 में यह $4,000 से नीचे गिर गई।
विनियामकीय अनिश्चितता : कई सरकारें अभी भी क्रिप्टोकरेंसी को विनियमित करने के तरीकों पर विचार कर रही हैं, जिससे कानूनी जोखिम बढ़ जाता है। उदाहरण: चीन ने क्रिप्टो ट्रेडिंग और माइनिंग पर प्रतिबंध लगा दिया है, जबकि अल सल्वाडोर ने बिटकॉइन को कानूनी मुद्रा के रूप में स्वीकार किया है। भारत में, आरबीआई और सरकार के बीच इसके विनियमन को लेकर संशय की स्थिति हैं।
गोपनीयता और अपराधों में उपयोग : क्रिप्टोकरेंसी की गुमनामी (अनॉनिमिटी) के कारण इसे अवैध गतिविधियों जैसे कि मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद वित्तपोषण और साइबर अपराधों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
पारंपरिक बैंकिंग और व्यष्टि अर्थव्यवस्था के लिए खतरा : यदि क्रिप्टोकरेंसी व्यापक रूप से अपनाई जाती है, तो यह पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली, राजकोषीय नीतियों (कर चोरी एवम् अपवंचना)  और मौद्रिक नीतियों को बाधित कर सकती है।
पर्यावरणीय चुनौतियाँ : प्रूफ-ऑफ-वर्क (PoW) आधारित क्रिप्टोकरेंसी, जैसे कि बिटकॉइन, को माइनिंग के लिए अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

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