प्रतिरक्षीकरण और टीकाकरण जीवविज्ञान का एक महत्वपूर्ण विषय है, जो हमें रोगों से बचाने और शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाने में सहायक होता है। यह प्रक्रिया संक्रामक रोगों के नियंत्रण और रोकथाम में प्रभावी साधन के रूप में कार्य करती है।
विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्न
वर्ष | प्रश्न | अंक |
2018 | उपार्जित प्रतिरक्षा तथा उसके प्रकारों का संक्षिप्त विवरण दीजिए ? | 5M |
प्रतिरक्षीकरण
- प्रतिरक्षा शरीर की उस क्षमता को कहते हैं जिसके द्वारा यह हानिकारक सूक्ष्मजीवों (रोगजनकों), विषाक्त पदार्थों और अन्य बाहरी तत्वों से अपनी रक्षा करता है।
- इसमें कोशिकाओं, ऊतकों और अंगों की एक जटिल प्रणाली शामिल होती है जो खतरों का पता लगाकर उन्हें नष्ट करने के लिए साथ काम करती है।
प्रतिरक्षा के प्रकार:
सहज प्रतिरक्षा (Innate Immunity)
- परिभाषा: जन्मजात सुरक्षा प्रणाली जो तुरंत कार्य करती है और रोगजनकों के विरुद्ध सामान्य सुरक्षा प्रदान करती है।
- विशेषताएँ:
- अविशिष्ट: सभी रोगजनकों (जीवाणु, विषाणु आदि) के प्रति एक समान प्रतिक्रिया।
- त्वरित प्रतिक्रिया: संक्रमण होते ही सक्रिय हो जाती है, लेकिन इसमें दीर्घकालिक स्मृति नहीं होती।
- विस्तृत कार्यक्षेत्र: सामान्य खतरों के प्रति प्रतिक्रिया करती है, न कि विशिष्ट प्रतिजनों के प्रति
- सीमित अवधि: प्रतिक्रिया अल्पकालिक होती है।
- घटक:
- भौतिक अवरोध (Physical Barriers)
- त्वचा: रोगजनकों के प्रवेश को रोकने वाली यांत्रिक अवरोधक परत।
- श्लेष्मा झिल्लियाँ: श्वसन, पाचन और मूत्रजनन तंत्र में रोगजनकों को फंसाकर बाहर निकालती हैं।
- सिलिया: श्वसन मार्ग में फंसे सूक्ष्मजीवों को बाहर साफ करते हैं।
- आमाशयिक अम्ल: निगले गए रोगजनकों को नष्ट करता है।
- रासायनिक अवरोध
- लाइसोजाइम (लार, आँसू और पसीने में): जीवाणु कोशिका भित्ति को तोड़ते हैं।
- डिफेंसिन: सूक्ष्मजीव-रोधी पेप्टाइड्स जो रोगजनक झिल्लियों को क्षति पहुँचाते हैं।
- भौतिक अवरोध (Physical Barriers)
- कोशिकीय सुरक्षा
- भक्षकाणु (मैक्रोफेज, न्यूट्रोफिल): फैगोसाइटोसिस द्वारा रोगजनकों को निगलकर नष्ट करते हैं।
- प्राकृतिक हत्यारा (NK) कोशिकाएँ: विषाणु-संक्रमित या असामान्य कोशिकाओं का पता लगाकर एपोप्टोसिस द्वारा नष्ट करती हैं।
- प्रदाही प्रतिक्रिया (Inflammatory Response)
- उद्देश्य: चोट या संक्रमण के प्रति स्थानीकृत प्रतिक्रिया।
- प्रक्रिया: साइटोकाइन्स (जैसे इंटरल्यूकिन्स) का स्राव → प्रतिरक्षा कोशिकाओं को आकर्षित करना → रक्त प्रवाह में वृद्धि → लालिमा, उष्मा, सूजन।
- पूरक तंत्र (Complement System)
- प्लाज्मा प्रोटीन्स का समूह जो:
- सीधे रोगजनकों को नष्ट करता है।
- फैगोसाइटोसिस के लिए रोगजनकों को चिह्नित करता है।
- प्लाज्मा प्रोटीन्स का समूह जो:
अनुकूली प्रतिरक्षा/उपार्जित (Adaptive Immunity)
- परिभाषा: रोगजनक या उसके प्रतिजनों के संपर्क में आने के बाद विकसित होने वाली एक अत्यधिक विशिष्ट प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया। यह सक्रिय होने में धीमी होती है, लेकिन दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान करती है।
- विशेषताएँ:
- विशिष्टता: रोगजनकों पर विशिष्ट प्रतिजनों को पहचानती है और लक्षित करती है।
- स्मृति: प्रतिरक्षी स्मृति विकसित करती है जो बाद के संपर्कों में तेज और मजबूत प्रतिक्रिया सुनिश्चित करती है।
- विविध तंत्र: विभिन्न प्रकार के रोगजनकों के प्रति प्रतिक्रिया करने में सक्षम।
- विलंबित प्रारंभ: पहली बार संपर्क के बाद सक्रिय होने में कई दिन लगते हैं।
- B और T लिम्फोसाइट्स की भूमिका:
- B लिम्फोसाइट्स: विदेशी पदार्थों को पहचानकर उनसे जुड़ते हैं।
- T लिम्फोसाइट्स: प्रतिजनों को याद रखते हैं, पहचानते हैं और B लिम्फोसाइट्स को एंटीबॉडी उत्पादन में सहायता करते हैं।
- घटक:
- ह्यूमोरल प्रतिरक्षा (B कोशिकाएँ):
- B लिम्फोसाइट्स प्रतिपिंड (इम्यूनोग्लोब्युलिन) उत्पन्न करते हैं जिनमें दो हल्की और दो भारी श्रृंखलाएँ होती हैं।
- ये प्रतिपिंड रोगजनकों को निष्क्रिय करते हैं या भक्षण के लिए चिह्नित करते हैं।
- एंटीबॉडी प्रकार:
- IgG: दीर्घकालिक प्रतिरक्षा प्रदान करता है और अपरा को पार कर सकता है।
- IgA: श्लेष्मा स्रावों (लार, आँसू) में पाया जाता है।
- IgM: संक्रमण के दौरान उत्पादित होने वाला पहला प्रतिपिंड।
- IgE: एलर्जी प्रतिक्रियाओं में शामिल।
- IgD: B कोशिका सक्रियण में भूमिका निभाता है।
- कोशिका-मध्यस्थ प्रतिरक्षा (T कोशिकाएँ):
- सहायक T कोशिकाएँ (CD4+): B कोशिकाओं, मैक्रोफेज और अन्य T कोशिकाओं को सक्रिय करने के लिए साइटोकाइन्स स्रावित करती हैं।
- विषाणु-नाशक T कोशिकाएँ (CD8+): पेर्फोरिन और ग्रैन्जाइम्स मुक्त करके संक्रमित, ट्यूमर या विदेशी कोशिकाओं को सीधे नष्ट करती हैं।
- स्मृति B और T कोशिकाएँ:
- प्रतिरक्षी स्मृति: पहली बार रोगजनक के संपर्क में आने पर स्मृति कोशिकाएँ बनती हैं जो भविष्य में उसी रोगजनक के प्रति तेज और प्रबल प्रतिक्रिया करती हैं।
- कार्य: टीकों का आधार है जो प्रतिरक्षा प्रणाली को रोगजनकों को पहचानना सिखाते हैं।
- ह्यूमोरल प्रतिरक्षा (B कोशिकाएँ):
सहज प्रतिरक्षा और अनुकूली प्रतिरक्षा के बीच तुलना
विशेषता | सहज प्रतिरक्षा | अनुकूली प्रतिरक्षा |
विशिष्टता | अविशिष्ट (सभी रोगजनकों के प्रति समान प्रतिक्रिया) | प्रतिजन-विशिष्ट (विशेष रोगजनकों को लक्षित करती है) |
प्रतिक्रिया समय | त्वरित (मिनटों से घंटों में) | विलंबित (दिनों से सप्ताहों तक) |
स्मृति | स्मृति अभाव (पुनः संक्रमण पर पुनः प्रतिक्रिया) | दीर्घकालिक स्मृति (पुनः संक्रमण पर तीव्र प्रतिक्रिया) |
घटक | भौतिक/रासायनिक अवरोध, भक्षकाणु, NK कोशिकाएँ | B कोशिकाएँ, T कोशिकाएँ, एंटीबॉडी |
संरक्षण अवधि | अल्पकालिक | दीर्घकालिक संरक्षण |
बी-लिम्फोसाइट्स और टी-लिम्फोसाइट्स के बीच तुलना
पहलू | B-लिम्फोसाइट्स | T-लिम्फोसाइट्स |
उत्पत्ति एवं परिपक्वता | अस्थि मज्जा (Bone marrow) में उत्पन्न और परिपक्व होते हैं | अस्थि मज्जा में उत्पन्न (T-कोशिका अग्रदूत), थाइमस में परिपक्व होते हैं |
कार्य | विदेशी पदार्थों को पहचानकर उनसे जुड़ते हैं | प्रतिजनों को याद रखते हैं, पहचानते हैं और B-लिम्फोसाइट्स को एंटीबॉडी उत्पादन में सहायता करते हैं |
एंटीबॉडी | IgA, IgM, IgE आदि प्रतिपिंडों का उत्पादन करते हैं | एंटीबॉडी उत्पादन में B-लिम्फोसाइट्स की सहायता करते हैं |
प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया | ह्यूमोरल प्रतिरक्षा (रक्त में एंटीबॉडी की उपस्थिति के कारण) | कोशिका-मध्यस्थ प्रतिरक्षा (संक्रमित/असामान्य कोशिकाओं को सीधे नष्ट करते हैं) |
प्रकार | 2 प्रकार: प्लाज्मा कोशिकाएँ और स्मृति कोशिकाएँ | 3 प्रकार: सहायक (Helper), हत्यारे (Killer), और निरोधक (Suppressor) T-कोशिकाएँ |
अनुकूली प्रतिरक्षा के प्रकार
1. सक्रिय प्रतिरक्षा (Active Immunity)
- परिभाषा: जब प्रतिरक्षा प्रणाली किसी प्रतिजन के संपर्क में आने पर स्वयं एंटीबॉडी और स्मृति कोशिकाएँ उत्पन्न करती है।
- विशेषताएँ:
- दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान करती है (स्मृति कोशिकाओं के कारण)।
- विकसित होने में समय लेती है, परंतु स्थायी प्रतिरक्षा प्रदान करती है।
- कार्यविधि:
- रोगजनक के आक्रमण पर प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिजन की पहचान करती है।
- B और T कोशिकाओं को सक्रिय कर विशिष्ट एंटीबॉडी एवं विषाणु-नाशक प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न करती है।
- भविष्य के लिए स्मृति कोशिकाएँ निर्मित होती हैं।
- प्रकार:
- प्राकृतिक सक्रिय प्रतिरक्षा: संक्रमण से उबरने के बाद विकसित होती है (जैसे चिकनपॉक्स)।
- कृत्रिम सक्रिय प्रतिरक्षा: टीकाकरण द्वारा प्राप्त होती है (जैसे MMR वैक्सीन)।
2. निष्क्रिय प्रतिरक्षा (Passive Immunity):
- परिभाषा: किसी अन्य व्यक्ति से स्थानांतरित एंटीबॉडीज़ या प्रतिरक्षा कोशिकाएँ, जो प्राप्तकर्ता की प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित किए बिना तत्काल लेकिन अस्थायी सुरक्षा प्रदान करती हैं।
- विशेषताएँ:
- यह अस्थायी प्रतिरक्षा प्रदान करती है क्योंकि शरीर स्वयं एंटीबॉडीज़ उत्पन्न नहीं करता।
- यह स्मृति कोशिकाओं (memory cells) का निर्माण नहीं करती।
- कार्यविधि: एंटीबॉडीज़ प्राकृतिक रूप से (जैसे—मातृक एंटीबॉडीज़) या कृत्रिम रूप से (जैसे—इम्यून ग्लोब्युलिन इंजेक्शन) स्थानांतरित की जाती हैं।
- प्रकार:
- प्राकृतिक (Natural): मातृक एंटीबॉडीज़: माँ से भ्रूण या स्तनपान के माध्यम से एंटीबॉडीज़ का स्थानांतरण।
- कृत्रिम (Artificial):
- इम्यून ग्लोब्युलिन इंजेक्शन (Immune Globulin Injections): एंटीबॉडीज़ का इंजेक्शन (जैसे—रेबीज़ इम्यूनोग्लोब्युलिन)।
- विषनाशक एंटीबॉडीज़ (Antivenom): (जैसे—साँप के काटने के लिए)।
प्रतिरक्षा प्रणाली के घटक:
- श्वेत रक्त कोशिकाएँ (ल्यूकोसाइट्स): ये प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं में शामिल प्राथमिक कोशिकाएँ हैं।
- भक्षकाणु (फैगोसाइट्स): जैसे—मैक्रोफेज, न्यूट्रोफिल्स। ये कोशिकाएँ रोगजनकों को अंतर्ग्रहण (एंगल्फ) करके पचाती हैं।
- लिम्फोसाइट्स (Lymphocytes): जैसे—B कोशिकाएँ, T कोशिकाएँ। ये अनुकूली प्रतिरक्षा (एडेप्टिव इम्यूनिटी) में भाग लेती हैं।
- B कोशिकाएँ एंटीबॉडीज़ उत्पन्न करती हैं जो रोगजनकों को निष्क्रिय कर देती हैं।
- T कोशिकाएँ या तो अन्य प्रतिरक्षा कोशिकाओं की सहायता करती हैं या संक्रमित कोशिकाओं को सीधे नष्ट कर देती हैं।
- एंटीबॉडीज़: ये B कोशिकाओं द्वारा उत्पादित प्रोटीन होते हैं जो रोगजनकों को निष्क्रिय करते हैं।
- लसीका तंत्र (लिम्फैटिक सिस्टम): इसमें लिम्फ नोड्स, प्लीहा (स्प्लीन) और लसीका वाहिकाएँ शामिल हैं, जो फिल्टर के रूप में कार्य करते हैं और प्रतिरक्षा कोशिकाओं को रोगजनकों के साथ अंतःक्रिया करने के केंद्र प्रदान करते हैं।
- साइटोकाइन्स: ये संकेतन अणु (सिग्नलिंग मॉलिक्यूल्स) होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया का समन्वय करते हैं, प्रतिरक्षा कोशिकाओं को संक्रमण या चोट के स्थानों पर निर्देशित करते हैं।
प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया की कार्यविधि:
- पहचान (Recognition): प्रतिरक्षा प्रणाली विदेशी पदार्थों (एंटीजन्स) को खतरे के रूप में पहचानती है।
- सक्रियकरण (Activation):
- सहज प्रतिरक्षा : बाधाओं (बैरियर्स) और भक्षकाणुओं (फैगोसाइट्स) का उपयोग करके तत्काल प्रतिक्रिया होती है।
- अनुकूली प्रतिरक्षा: विशिष्ट प्रतिक्रिया के लिए B-कोशिकाओं और T-कोशिकाओं का सक्रियण होता है।
- निष्प्रभावीकरण/विनाश: रोगजनकों को निम्नलिखित तरीकों से निष्क्रिय या नष्ट किया जाता है:
- एंटीबॉडी-मध्यस्थ प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया/ह्यूमोरल इम्युनिटी (B कोशिकाएँ):
- बाह्यकोशिकीय (एक्स्ट्रासेल्युलर) रोगजनकों से लड़ती है।
- एंटीबॉडीज़ एंटीजन्स से बंधकर उन्हें विनाश के लिए चिह्नित करती हैं।
- कोशिका-मध्यस्थ प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (T कोशिकाएँ):
- अंतःकोशिकीय (इंट्रासेल्युलर) रोगजनकों (जैसे—वायरस) से लड़ती है।
- किलर T कोशिकाएँ संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट कर देती हैं।
- हेल्पर T कोशिकाएँ अन्य प्रतिरक्षा कोशिकाओं को सक्रिय करती हैं।
- भक्षकाणु (फैगोसाइट्स):
- रोगजनकों को अंतर्ग्रहण कर लेते हैं।
- एंटीबॉडी-मध्यस्थ प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया/ह्यूमोरल इम्युनिटी (B कोशिकाएँ):
- स्मृति निर्माण (Memory Formation): संक्रमण के बाद, स्मृति B-कोशिकाएँ और स्मृति T-कोशिकाएँ शरीर में बनी रहती हैं, जो रोगजनक के पुनः प्रवेश करने पर तीव्र प्रतिक्रिया सुनिश्चित करती हैं।
टीकाकरण और प्रतिरक्षण:
- प्रतिरक्षण (Immunization): प्रतिरक्षण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को विशिष्ट रोगजनकों (जैसे जीवाणु, विषाणु या अन्य सूक्ष्मजीवों) को पहचानने और उनसे लड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है। यह प्रक्रिया संक्रामक रोगों से सुरक्षा प्रदान करती है।
- प्रतिरक्षण दो प्रमुख तरीकों से किया जा सकता है: सक्रिय प्रतिरक्षण और निष्क्रिय प्रतिरक्षण।
प्रतिरक्षण: संक्षिप्त पुनरावृत्ति
1. सक्रिय प्रतिरक्षण (Active Immunization)
- परिभाषा: शरीर स्वयं एंटीबॉडीज व स्मृति कोशिकाएँ उत्पन्न करता है।
- कार्य प्रणाली:
- एंटीजन → B कोशिकाएँ एंटीबॉडीज निर्मित करती हैं → T कोशिकाएँ संक्रमित कोशिकाओं का विनाश करती हैं →भविष्य हेतु स्मृति कोशिकाएँ सृजित होती हैं
- उदाहरण:
- टीके (यथा – पोलियो, खसरा)
- प्राकृतिक संक्रमण (यथा – चिकनपॉक्स)
2. निष्क्रिय प्रतिरक्षण (Passive Immunization)
- परिभाषा: पूर्व-निर्मित एंटीबॉडीज प्राप्त कर अल्पकालिक सुरक्षा प्रदान की जाती है।
- कार्य प्रणाली:
- प्रतिरक्षित व्यक्ति से एंटीबॉडीज → तात्कालिक सुरक्षा
- स्मृति कोशिकाएँ उत्पन्न नहीं होतीं
- उदाहरण:
- मातृक एंटीबॉडीज (गर्भनाल के माध्यम से)
- एंटीबॉडी इंजेक्शन (यथा – रेबीज)
टीकाकरण
- यह एक प्रक्रिया है जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली को हानिकारक रोगजनकों (जैसे विषाणु या जीवाणु) को पहचानने और उनसे बचाव करने में सहायता के लिए टीका प्रशासित किया जाता है।
- एक टीके में सामान्यतः रोगजनक के घटक या कमजोर रूप (जैसे विषाणु, जीवाणु या उनके प्रोटीन) होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित करते हैं बिना बीमारी उत्पन्न किए। टीकाकरण एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य उपकरण है जिसका उपयोग संक्रामक रोगों की रोकथाम, रुग्णता एवं मृत्यु दर को कम करने और सामूहिक प्रतिरक्षा में योगदान देने के लिए किया जाता है।
टीके कैसे कार्य करते हैं:
टीके रोगजनकों (विषाणु, जीवाणु या विष) की उपस्थिति की नकल करके कार्य करते हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित तो करते हैं परंतु वास्तविक रोग उत्पन्न नहीं करते। टीकाकरण के दौरान, शरीर टीके में उपस्थित विदेशी पदार्थों (एंटीजन्स) को पहचानता है और एक प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है।
- एंटीजन का परिचय:
- टीके में एंटीजन्स (प्रोटीन/रोगजनक के अंश: विषाणु, जीवाणु या विष) होते हैं।
- प्रतिरक्षा प्रणाली की सक्रियता:
- एंटीजन प्रस्तुतीकरण: प्रतिरक्षा प्रणाली एंटीजन्स को विदेशी के रूप में पहचानती है।
- प्रतिरक्षा कोशिकाओं की सक्रियता → B कोशिकाएं व एंटीबॉडी उत्पादन
- T कोशिकाएं B कोशिकाओं को रोगजनक के विरुद्ध एंटीबॉडी उत्पन्न करने के लिए प्रेरित करती हैं।
- एंटीबॉडीज रोगजनक को निष्क्रिय करने में सहायता करती हैं।
- स्मृति निर्माण:
- स्मृति कोशिकाएं (B व T स्मृति कोशिकाएं) बनाई जाती हैं जो रोगजनक को “याद” रखती हैं।
- यदि भविष्य में संपर्क हो तो यह तीव्र प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया की अनुमति देता है।
- रोग के बिना प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया:
- टीके में उपस्थित रोगजनक कमजोर/निष्क्रिय होता है या उसका केवल एक अंश होता है, जो बीमारी तो रोकता है परंतु प्रतिरक्षा को उत्तेजित करता है।
- सामूहिक प्रतिरक्षा (हर्ड इम्युनिटी):
- जब जनसंख्या का एक महत्वपूर्ण भाग टीकाकृत हो जाता है, तो रोग का प्रसार धीमा हो जाता है क्योंकि संक्रमण के प्रति संवेदनशील व्यक्तियों की संख्या कम हो जाती है। यह उन लोगों की सुरक्षा करता है जिनका टीकाकरण नहीं हो सकता (जैसे शिशु, वृद्ध व्यक्ति या कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग)। इसे सामूहिक प्रतिरक्षा कहा जाता है, और यह विशेष रूप से गंभीर जटिलताओं वाले रोगों के लिए महत्वपूर्ण है।
सामान्य टीके, रोग और उनका प्रशासन
टीका | रोकथामित रोग | प्रशासन विधि (आयु, मार्ग) |
BCG टीका | क्षय रोग (टीबी) | जन्म के समय या जन्म के तुरंत बाद, अंतःत्वचीय इंजेक्शन |
DTP टीका | डिप्थीरिया, टिटनेस, पर्टुसिस (काली खांसी) | 3 खुराकें: 6, 10 और 14 सप्ताह की आयु में, अंतःपेशीय इंजेक्शन |
हेपेटाइटिस बी टीका | हेपेटाइटिस बी (गंभीर यकृत संक्रमण) | 3 खुराकें: पहली जन्म के समय, दूसरी 6 सप्ताह पर, तीसरी 6 महीने पर, अंतःपेशीय इंजेक्शन |
पोलियो (IPV) टीका | पोलियोमाइलाइटिस (पोलियो) | 3 खुराकें: 6, 10 और 14 सप्ताह पर, अंतःपेशीय या अंतःचर्मीय इंजेक्शन |
MMR टीका | मीजल्स, मम्प्स, रूबेला | पहली खुराक 9-12 महीने पर, दूसरी 4-6 वर्ष पर, अंतःचर्मीय इंजेक्शन |
हेपेटाइटिस ए टीका | हेपेटाइटिस ए | 2 खुराकें: पहली 1 वर्ष पर, दूसरी 6 महीने बाद, अंतःपेशीय इंजेक्शन |
वैरिसेला (चिकनपॉक्स) टीका | चिकनपॉक्स | पहली खुराक 12-15 महीने पर, दूसरी 4-6 वर्ष पर, अंतःचर्मीय इंजेक्शन |
इन्फ्लुएंजा टीका | इन्फ्लुएंजा (फ्लू) | वार्षिक टीकाकरण, 6 महीने से शुरू, अंतःपेशीय या नासिका मार्ग |
एचपीवी टीका | एचपीवी संक्रमण (सर्वाइकल कैंसर, जननांग मस्से) | 3 खुराकें: पहली 11-12 वर्ष पर, दूसरी 1-2 महीने बाद, तीसरी पहली खुराक के 6 महीने बाद, अंतःपेशीय इंजेक्शन |
न्यूमोकोकल टीका | न्यूमोकोकल रोग (निमोनिया, मेनिन्जाइटिस) | पहली खुराक 2 महीने पर, बूस्टर 12-15 महीने पर, अंतःपेशीय या अंतःचर्मीय इंजेक्शन |
मेनिन्जोकोकल टीका | मेनिन्जोकोकल रोग (मेनिन्जाइटिस) | पहली खुराक 11-12 वर्ष पर, बूस्टर 16 वर्ष पर, अंतःपेशीय इंजेक्शन |
रोटावायरस टीका | रोटावायरस संक्रमण (गंभीर दस्त) | 2-3 खुराकें: 6-8 सप्ताह से शुरू, मौखिक टीका |
कोविशील्ड और कोवैक्सिन | कोविड-19 | 2 खुराकें |
टीकों के प्रकार
- निष्क्रिय (मृत) टीके: इन टीकों में रोगजनकों को मार दिया जाता है या निष्क्रिय कर दिया जाता है ताकि वे रोग उत्पन्न न कर सकें।
- उदाहरण:
- पोलियो टीका (IPV)
- हेपेटाइटिस ए टीका
- रेबीज टीका
- उदाहरण:
- जीवित क्षीणित टीके: इन टीकों में जीवित रोगजनक होते हैं जिन्हें कमजोर कर दिया जाता है ताकि वे स्वस्थ व्यक्तियों में गंभीर रोग तो उत्पन्न न कर सकें, लेकिन मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्तेजित कर सकें।
- उदाहरण:
- खसरा, कण्ठमाला, रूबेला (MMR) टीका
- पीत ज्वर (Yellow fever) टीका
- चिकनपॉक्स (वैरिसेला) टीका
- उदाहरण:
- उप इकाई, पुनर्योगज या संयुग्मी टीके: इन टीकों में रोगजनक का केवल एक भाग (जैसे प्रोटीन या शर्करा) होता है, न कि संपूर्ण रोगजनक।
- उदाहरण:
- हेपेटाइटिस बी टीका
- मानव पेपिलोमा विषाणु (HPV) टीका
- हीमोफिलस इन्फ्लुएंजी टाइप बी (Hib) टीका
- उदाहरण:
- एनए या एमआरएनए टीके: ये नवीन टीके रोगजनक के आनुवंशिक पदार्थ (DNA या mRNA) का उपयोग करते हैं, जो कोशिकाओं को रोगजनक जैसा प्रोटीन बनाने का निर्देश देते हैं। प्रतिरक्षा प्रणाली इस प्रोटीन के प्रति एंटीबॉडी और स्मृति कोशिकाएँ उत्पन्न करके प्रतिक्रिया करती है।
- उदाहरण:
- कोविड-19 एमआरएनए टीके (फाइजर, मॉडर्ना)
- उदाहरण:
कोविशील्ड एवं कोवैक्सिन की तुलनात्मक विशेषताएँ
विशेषता | कोविशील्ड | कोवैक्सिन |
प्रकार | वायरल वेक्टर टीका (ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राज़ेनेका द्वारा विकसित) | निष्क्रिय विषाणु टीका |
निर्माता | सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) | भारत बायोटेक |
टेक्नोलॉजी | एडेनोवायरस वेक्टर का उपयोग | निष्क्रिय SARS-CoV-2 विषाणु का उपयोग |
खुराक | 2 खुराकें (4-12 सप्ताह का अंतराल) | 2 खुराकें (4 सप्ताह का अंतराल) |
प्रभावकारिता | ~70-90% (दोनों खुराकों के बाद) | ~81% (लक्षणयुक्त COVID-19 के विरुद्ध) |
बच्चों हेतु | केवल 18+ वर्ष के लिए | 18 वर्ष से कम आयु के लिए उपलब्ध |
पैरामीटर | कोरबेवैक्स | कोवोवैक्स |
प्रकार | पुनर्योगज प्रोटीन उपइकाई टीका | पुनर्योगज नैनोपार्टिकल टीका |
विकासकर्ता | बायोलॉजिकल ई | सीरम इंस्टीट्यूट (नोवावैक्स) |
लक्षित आयु समूह | 5-12 वर्ष | 12-17 वर्ष |
कार्यविधि | स्पाइक प्रोटीन इंजेक्शन → प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया | अनुकरणीय स्पाइक प्रोटीन → प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया |
विवरण | SARS-CoV-2 विषाणु के विशिष्ट भाग (स्पाइक प्रोटीन) युक्त | स्पाइक प्रोटीन की नकल कर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है |
भारत का प्रतिरक्षण कार्यक्रम
सार्वभौमिक प्रतिरक्षण कार्यक्रम (UIP – Universal Immunisation Programme)
- प्रारंभ: 1978 (विस्तारित प्रतिरक्षण कार्यक्रम/EPI के रूप में)
- संशोधित: 1985 (सार्वभौमिक प्रतिरक्षण कार्यक्रम/UIP)
- उद्देश्य: बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं में टीका-निवारणीय रोगों से होने वाली मृत्यु दर एवं रुग्णता की रोकथाम
मिशन इंद्रधनुष (MI)
- शुभारंभ: 2015 (प्रतिरक्षण कवरेज को 90% तक त्वरित करने के लिए)
- लक्ष्य समूह: 89 लाख से अधिक अटीकाकृत या आंशिक रूप से टीकाकृत बच्चे
- टीका-निवारणीय 12 रोग (VPDs): डिप्थीरिया, काली खांसी (पर्टुसिस), टिटनेस, पोलियो, क्षय रोग (टीबी), हेपेटाइटिस बी, मेनिन्जाइटिस, निमोनिया, जापानी इंसेफेलाइटिस (JE), रोटावायरस, न्यूमोकोकल संयुग्म टीका (PCV), खसरा-रूबेला (MR)
गहन मिशन इंद्रधनुष (IMI) – विस्तृत विवरण:
- IMI 1.0 (अक्टूबर 2017)
- फोकस क्षेत्र: शहरी क्षेत्र एवं चयनित जिले
- लक्ष्य: दिसंबर 2018 तक 90% प्रतिरक्षण कवरेज सुनिश्चित करना
- IMI 2.0 (2019-20)
- कार्यक्षेत्र: राष्ट्रव्यापी अभियान
- लक्षित जिले: 272
- लक्ष्य समयसीमा: 2022 तक 90% कवरेज
- IMI 3.0 (2021)
- कोविड-19 महामारी के दौरान छूटे हुए बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया, विशेष रूप से प्रवासन और दुर्गम क्षेत्रों में।
- IMI 4.0 (2022)
- 33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 416 जिलों में तीन चरणों के तहत टीकाकरण से वंचित और आंशिक रूप से टीकाकृत बच्चों और गर्भवती महिलाओं को लक्षित किया गया।
- IMI 5.0 (2023)
- मुख्य उद्देश्य: टीकाकरण कवरेज को बढ़ाना, खास तौर पर खसरा और रूबेला के टीके के लिए।
- प्रमुख विशेषताएँ:
- पहली बार 5 वर्ष तक की आयु के बच्चों को शामिल किया गया
- टीकाकरण चरण: 7-12 अगस्त, 11-16 सितंबर, 9-14 अक्टूबर 2023
- फोकस: 2023 तक खसरा और रूबेला उन्मूलन, U-WIN डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग।
भारतीय प्रतिरक्षण कार्यक्रम: प्रमुख उपलब्धियाँ
- विश्व का सबसे बड़ा प्रतिरक्षण कार्यक्रम
- वार्षिक टीकाकरण:
- 3 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाएं
- 2.6 करोड़ से अधिक बच्चे
- डिजिटल पहल: U-WIN प्लेटफॉर्म द्वारा वैक्सीन ट्रैकिंग
एकलक्लोनी प्रतिरक्षी (Monoclonal Antibodies – mAbs)
- परिभाषा: एकलक्लोनी प्रतिरक्षी (mAbs) प्रयोगशाला-निर्मित अणु हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली के प्रतिरक्षी के रूप में कार्य करने के लिए इंजीनियर किए गए हैं। ये हानिकारक कोशिकाओं (जैसे कैंसर कोशिकाओं या रोगजनकों) के विरुद्ध प्रतिरक्षा प्रणाली के हमले को पुनर्स्थापित, बढ़ावा या अनुकरण कर सकते हैं।
- एकल प्रतिरक्षा कोशिकाओं के क्लोन से व्युत्पन्न, ये प्रतिरक्षी समान होते हैं और विशिष्ट प्रतिजनों को लक्षित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
- एकलक्लोनी प्रतिरक्षी के नामों में शामिल हैं: -omab, -ximab, -zumab, -umab।
एकलक्लोनी प्रतिरक्षी के प्रकार
- म्यूरिन mAbs: पूरी तरह से चूहे की प्रतिरक्षी से व्युत्पन्न
उदाहरण: OKT3 (अंग प्रत्यारोपण अस्वीकृति में प्रयुक्त) - चिमेरिक mAbs: आंशिक रूप से चूहा और आंशिक रूप से मानव। उदाहरण: रिटक्सिमैब (नॉन-हॉजकिन लिंफोमा के लिए प्रयुक्त)
- मानवीकृत mAbs: अधिकांशतः मानव, केवल प्रतिजन-बंधन स्थल चूहे की प्रतिरक्षी से। उदाहरण: ट्रास्टुजुमैब (स्तन कैंसर के लिए प्रयुक्त)
- पूर्ण मानव mAbs: पूरी तरह से मानव प्रतिरक्षी, फेज डिस्प्ले या ट्रांसजेनिक चूहों का उपयोग करके उत्पादित। उदाहरण: एडालिमुमैब (रुमेटीयड अर्थराइटिस के लिए प्रयुक्त)
नैदानिक अनुप्रयोग (Clinical Applications)
- कैंसर उपचार: mAbs कैंसर कोशिकाओं को विशिष्ट रूप से लक्षित कर सकते हैं, वृद्धि संकेतों को अवरुद्ध करके या उन्हें प्रतिरक्षा विनाश के लिए चिह्नित करके।
- उदाहरण: ट्रास्टुजुमैब (हर्सेप्टिन) स्तन कैंसर में HER2 को लक्षित करता है।
- संक्रामक रोग: mAbs का उपयोग रोगजनकों को निष्क्रिय करके विषाणुजनित या जीवाणुजनित संक्रमणों के उपचार के लिए किया जा सकता है।
- उदाहरण: पैलिविजुमैब का उपयोग उच्च जोखिम वाले शिशुओं में श्वसन सिन्सिटियल वायरस (RSV) संक्रमण को रोकने के लिए किया जाता है।
- स्वप्रतिरक्षित रोग: mAbs प्रतिरक्षा प्रणाली के उन विशिष्ट घटकों को अवरुद्ध कर सकते हैं जो शरीर के अपने ऊतकों पर हमला करते हैं।
- उदाहरण: एडालिमुमैब (ह्यूमिरा) रुमेटीयड अर्थराइटिस, क्रोहन रोग और अन्य स्वप्रतिरक्षित विकारों के उपचार के लिए TNF-alpha को लक्षित करता है।
- प्रत्यारोपण: mAbs का उपयोग प्रत्यारोपित अंगों पर हमला करने वाली प्रतिरक्षा कोशिकाओं को लक्षित करके अंग अस्वीकृति को रोकने के लिए किया जा सकता है।
- उदाहरण: मुरोमोनाब-सीडी3 प्रत्यारोपण अस्वीकृति को रोकने के लिए टी-कोशिकाओं को लक्षित करता है।
मोनोक्लोनल एंटीबॉडी का उत्पादन और इंजीनियरिंग
मोनोक्लोनल एंटीबॉडी उत्पादन का विकास जैव प्रौद्योगिकी में प्रगति को दर्शाता है:
- हाइब्रिडोमा प्रौद्योगिकी।
- पुनः संयोजक डीएनए प्रौद्योगिकी
- फेज डिस्प्ले प्रौद्योगिकी
- ट्रांसजेनिक जानवर: जानवरों को स्वाभाविक रूप से मानव एंटीबॉडी का उत्पादन करने के लिए इंजीनियर किया जाता है।
FAQ (Previous year questions)
टीके का प्रकार
संरचना
क्रियातंत्र
उदाहरण
निष्क्रिय (मृत) टीका
मारे गए/निष्क्रिय किए गए रोगजनक
रोग उत्पन्न किए बिना प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को उत्तेजित करता है
पोलियो (IPV), हेपेटाइटिस A, रेबीज
जीवित क्षीणीकृत टीका
कमजोर किए गए जीवित रोगजनक
प्राकृतिक संक्रमण की नकल करता है; मजबूत, लंबे समय तक चलने वाली प्रतिरक्षा उत्पन्न करता है
MMR, वैरिसेला, येलो फीवर
सबयूनिट, रीकॉम्बिनेंट, संयुग्मित
रोगजनक के विशिष्ट भाग (प्रोटीन/शर्करा)
पूरे रोगजनक के बिना लक्षित प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रेरित करता है
हेपेटाइटिस B, HPV, Hib टीका
डीएनए या mRNA टीका
रोगजनक का आनुवंशिक पदार्थ (डीएनए या mRNA)
शरीर की कोशिकाओं को रोगजनक प्रोटीन बनाने का निर्देश देता है; प्रतिरक्षा को प्रेरित करता है
COVID-19 mRNA टीके (फाइजर, मॉडर्ना)
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