आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26: प्रमुख बिंदु, विश्लेषण एवं सारांश

आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26, भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो देश की आर्थिक स्थिति, चुनौतियों तथा भविष्य की नीतिगत दिशा को स्पष्ट करता है। यह सर्वेक्षण वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग द्वारा तैयार किया जाता है और केंद्रीय बजट का विश्लेषणात्मक आधार प्रदान करता है।

यह लेख आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 का अध्यायवार, सरल एवं परीक्षा-उपयोगी सार प्रस्तुत करता है, जो UPSC, RAS एवं अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है।

1. अर्थव्यवस्था की स्थिति : विकास-सीमा का विस्तार

  • भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
  • वित्त वर्ष 2026–27 में GDP वृद्धि दर 6.8%–7.2% अनुमानित।
  • विकास के प्रमुख कारक:
    • निजी उपभोग
    • सार्वजनिक पूंजीगत व्यय
    • संरचनात्मक सुधार

2. राजकोषीय घटनाक्रम : विश्वसनीय समेकन के माध्यम से स्थिरता को सुदृढ़ करना

  • राजकोषीय नीति आर्थिक स्थिरता का आधार बनी हुई है।
  • राजकोषीय घाटे में क्रमिक कमी।
  • प्रत्यक्ष करों से राजस्व में वृद्धि।
  • पूंजीगत व्यय पर विशेष बल।

3. मौद्रिक प्रबंधन एवं वित्तीय मध्यस्थता : विनियामक ढांचे को परिष्कृत करना

  • मौद्रिक नीति का प्रभावी संचरण।
  • बैंकिंग क्षेत्र मजबूत:
    • NPA ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर पर।
  • MSME क्षेत्र को बेहतर ऋण उपलब्धता।

4. विदेशी क्षेत्र : दीर्घकालिक लक्ष्यों की तैयारी

  • वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद व्यापार संतुलित।
  • सेवा निर्यात भारत की प्रमुख ताकत।
  • चालू खाता घाटा (CAD) नियंत्रण में।
  • डिजिटल निवेश में भारत अग्रणी।

5. मुद्रास्फीति : नियंत्रित एवं स्थिर

  • CPI श्रृंखला शुरू होने के बाद सबसे कम मुद्रास्फीति
  • अप्रैल–दिसंबर 2025 में औसत मुद्रास्फीति लगभग 1.7%
  • खाद्य कीमतों में गिरावट प्रमुख कारण।

6. कृषि एवं खाद्य प्रबंधन : उत्पादकता वृद्धि, आय सुरक्षा एवं खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना

  • कृषि वृद्धि में पशुपालन और मत्स्य पालन का योगदान।
  • फोकस क्षेत्र:
    • फसल विविधीकरण
    • मृदा स्वास्थ्य
    • किसान आय सुरक्षा

7. सेवाएँ : स्थिरता से नए आयामों की ओर

  • GDP में सबसे बड़ा योगदान।
  • शहरी रोजगार का मुख्य स्रोत।
  • IT, पर्यटन और व्यावसायिक सेवाओं में तेज़ वृद्धि।

8. उद्योग का अगला चरण : संरचनात्मक परिवर्तन एवं वैश्विक एकीकरण

  • विनिर्माण क्षेत्र में संरचनात्मक परिवर्तन।
  • मध्यम एवं उच्च तकनीक उद्योगों की हिस्सेदारी बढ़ी।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स, EV और फार्मा क्षेत्र मजबूत।

9. निवेश एवं अवसंरचना : कनेक्टिविटी, क्षमता तथा प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करना

  • सार्वजनिक एवं निजी निवेश में वृद्धि।
  • सड़क, रेलवे, बंदरगाह और ऊर्जा अवसंरचना का विस्तार।
  • डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार।

10. पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन : एक प्रत्यास्थ, प्रतिस्पर्धी एवं विकास-प्रेरित भारत का निर्माण

  • स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण पर जोर।
  • नवीकरणीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा एवं हरित वित्त को बढ़ावा।

11. शिक्षा एवं स्वास्थ्य : उपलब्धियाँ एवं भविष्य की रूपरेखा

  • नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के सकारात्मक परिणाम।
  • डिजिटल शिक्षा का विस्तार।
  • स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार।

12. रोज़गार एवं कौशल विकास : उन्नत कौशल की ओर

  • 4 श्रम संहिताओं का कार्यान्वयन।
  • महिला श्रम भागीदारी में वृद्धि।
  • उद्योग-आधारित कौशल प्रशिक्षण।

13. ग्रामीण विकास एवं सामाजिक प्रगति : भागीदारी से साझेदारी तक

  • अत्यधिक गरीबी में उल्लेखनीय कमी।
  • SVAMITVA और ई-ग्राम स्वराज जैसी योजनाएँ।
  • ग्रामीण बुनियादी सेवाओं में सुधार।

14. भारत में एआई अर्थव्यवस्था / पारिस्थितिकी तंत्र का विकास : आगे की दिशा

  • AI को उत्पादकता और समावेशन का साधन माना गया।
  • डेटा मूल्य सृजन और AI-कुशल कार्यबल पर जोर।

15. नागरिक-केंद्रित शहरीकरण : भारतीय शहरों की अगली चुनौती

  • इस अध्याय में टिकाऊ, समावेशी और नागरिक-केंद्रित शहरी विकास पर ज़ोर दिया गया है। आवास, परिवहन, शहरी सेवाएँ और जीवन गुणवत्ता सुधार को प्राथमिकता दी गई है।

निष्कर्ष

आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 भारत की अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति, सुधारों और भविष्य की दिशा को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करता है। प्रतियोगी परीक्षा के विद्यार्थियों के लिए यह दस्तावेज़ प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार—तीनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26

आधिकारिक आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 की PDF (हिंदी) डाउनलोड करें

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