आरएएस मुख्य परीक्षा 2026 पाठ्यक्रम

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आरएएस मुख्य परीक्षा 2026: परीक्षा योजना

प्रश्न पत्रपरीक्षा का विषयअधिकतम अंकअवधि
1सामान्य अध्ययन – I2003 घंटे
2सामान्य अध्ययन – II2003 घंटे
3सामान्य अध्ययन – III2003 घंटे
4सामान्य हिंदी और अंग्रेजी2003 घंटे
  • मुख्य परीक्षा में प्रवेश पाने वाले अभ्यर्थियों की संख्या परीक्षा के माध्यम से वर्ष में भरी जाने वाली कुल रिक्तियों की अनुमानित संख्या का 15 गुना होगी।
  • लिखित परीक्षा में निम्नलिखित चार पेपर शामिल होंगे जो वर्णनात्मक/विश्लेषणात्मक होंगे।
  • अभ्यर्थी को नीचे सूचीबद्ध सभी प्रश्नपत्र देने होंगे, जिनमें संक्षिप्त, मध्यम, दीर्घ उत्तरीय और वर्णनात्मक प्रकार के प्रश्नपत्र भी शामिल होंगे।
  • सामान्य हिंदी और सामान्य अंग्रेजी का स्तर सीनियर सेकेंडरी स्तर के समान होगा।
  • प्रत्येक पेपर के लिए 3 घंटे का समय दिया जाएगा।

आरएएस मुख्य परीक्षा 2026: पाठ्यक्रम

सामान्य ज्ञान एवं सामान्य अध्ययन पेपर – I

इकाई I – इतिहास

खंड A – राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परंपरा एवं धरोहर

  • प्रागैतिहासिक संस्कृति, विभिन्न ऐतिहासिक स्थल एवं उनका महत्व; राजस्थान के विभिन्न शासकों की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक उपलब्धियाँ (18वीं शताब्दी तक)
  • राजस्व एवं प्रशासनिक व्यवस्था एवं बदलता स्वरूप
  • 19वीं एवं 20वीं शताब्दी – 1857 का विद्रोह, कृषक एवं जनजातीय आंदोलन, राजनीतिक जागरण, जन आंदोलन एवं राजस्थान का एकीकरण
  • कला एवं संस्कृति – प्रदर्शन एवं ललित कला, हस्तशिल्प, स्थापत्य एवं स्मारक, लोक संगीत, लोक नृत्य, लोक कलाएँ एवं लोक आख्यान
  • मेले एवं त्यौहार
  • जनजातियाँ एवं उनकी परंपराएँ
  • विरासत – राजस्थान की प्रमुख ऐतिहासिक धरोहर एवं प्रमुख पर्यटन स्थल
  • राजस्थानी भाषा एवं प्रमुख साहित्यिक कृतियाँ
  • धार्मिक मान्यताएँ, संत एवं लोक देवी-देवता

खंड B – भारतीय इतिहास एवं संस्कृति

  • भारतीय धरोहर – सिंधु सभ्यता से लेकर ब्रिटिश काल तक भारत की ललित कलाएँ, प्रदर्शन कलाएँ, वास्तुकला एवं साहित्य
  • प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत के धार्मिक आंदोलन एवं दर्शन
  • ब्रिटिश नीतियाँ एवं उनका प्रभाव – देश का राजनीतिक, आर्थिक एवं प्रशासनिक एकीकरण
  • भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन – विभिन्न चरण एवं धाराएँ, प्रमुख योगदानकर्ता
  • 19वीं एवं 20वीं शताब्दी में सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन एवं बौद्धिक जागरण
  • स्वतंत्रोत्तर भारत – देशी रियासतों का विलय, राज्यों का भाषायी आधार पर पुनर्गठन, विज्ञान एवं तकनीक का विकास, महिला सशक्तिकरण एवं महिला सुधार आंदोलन

खंड C – आधुनिक विश्व का इतिहास (1991 ई. तक)

  • पुनर्जागरण एवं धर्म सुधार
  • अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम, फ्रांसीसी क्रांति, औद्योगिक क्रांति एवं रूसी क्रांति
  • जर्मनी में नाज़ीवाद एवं इटली में फासीवाद
  • विश्व युद्धों का प्रभाव
  • शीत युद्ध के दौरान विश्व
इकाई II – अर्थशास्त्र

खंड A – भारत की अर्थव्यवस्था

  1. आर्थिक संवृद्धि एवं विकास – अवधारणा एवं मापन; आय दृष्टिकोण, मानव विकास सूचकांक एवं अन्य संबंधित सूचकांक; जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरणीय क्षरण
  2. कृषि – उत्पादकता एवं प्रगति; भूमि सुधार; कृषि वित्त एवं विपणन; खाद्य सुरक्षा एवं खाद्य प्रसंस्करण; प्रमुख नीतिगत पहल
  3. औद्योगिक नीति एवं सुधार – वैश्वीकरण, उदारीकरण एवं निजीकरण; औद्योगिक वित्त; सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम – महत्व एवं नीतिगत पहल
  4. सेवा क्षेत्र एवं आधारभूत संरचना – ऊर्जा, परिवहन एवं संचार
  5. अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं भुगतान संतुलन; विदेशी सहायता एवं निवेश
  6. सार्वजनिक वित्त एवं संघीय बजट – आय एवं व्यय के स्रोत; बजट घाटा एवं सार्वजनिक ऋण; भारत की राजकोषीय नीति एवं सुधार; केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध एवं वित्त आयोग
  7. भारतीय रिज़र्व बैंक एवं मौद्रिक प्रबंधन; बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र के सुधार
  8. सामाजिक क्षेत्र – शिक्षा एवं स्वास्थ्य; गरीबी एवं बेरोज़गारी; रोजगार सृजन योजनाएँ; कमजोर एवं उपेक्षित वर्गों के कल्याण की योजनाएँ

खंड B – वैश्विक अर्थव्यवस्था

  • वैश्विक आर्थिक मुद्दे – विश्व व्यापार संगठन, विश्व बैंक एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की भूमिका

खंड C – राजस्थान की अर्थव्यवस्था

  1. राजस्थान के आर्थिक संवृद्धि संकेतक – राज्य घरेलू उत्पाद, प्रति व्यक्ति आय और समावेशी संवृद्धि। विकसित राजस्थान 2047, हरित संवृद्धि तथा पर्यावरणीय स्थिरता। सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में राजस्थान की स्थिति।
  2. राज्य बजट – राजकोषीय प्रबंधन और बजट घाटा।
  3. कृषि विकास – उत्पादन और उत्पादकता, जल संसाधन और सिंचाई, पशुपालन और सहायक गतिविधियाँ, कृषि विपणन, किसानों के कल्याण की सरकारी योजनाएँ।
  4. ग्रामीण विकास और ग्रामीण आधारभूत संरचना, पंचायती राज संस्थाएँ और राज्य वित्त आयोग।
  5. औद्योगिक विकास के लिए संस्थागत तंत्र, निवेश प्रोत्साहन नीति, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रमों (MSME) का महत्व और उनके विकास के लिए नीतिगत पहल, राज्य में पेट्रोलियम और तेल संसाधन।
  6. आधारभूत संरचना का विकास – ऊर्जा और परिवहन, सार्वजनिक व निजी सहभागिता परियोजनाएँ (PPP), बाहरी सहायता से वित्त पोषित राज्य परियोजनाएँ।
  7. मानव संसाधन विकास – स्वास्थ्य और शिक्षा, बेरोजगारी और गरीबी, रोजगार सृजन और गरीबी उन्मूलन योजनाएँ।
  8. सुशासन और सार्वजनिक सेवाओं को प्रभावी रूप से प्रदान करने के लिए डिजिटल रूपांतरण।
  9. अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / पिछड़ा वर्ग / अल्पसंख्यक / दिव्यांगजन / निराश्रित / महिलाओं / बच्चों और वृद्धजनों के कल्याण हेतु राज्य सरकार की प्रमुख योजनाएँ।
इकाई III – समाजशास्त्र, प्रबंधन, लेखांकन और लेखा परीक्षा

खण्ड–A : समाजशास्त्र

भारतीय समाज में समाजशास्त्रीय चिंतन :

  • जाति एवं वर्ग की अवधारणा, भारतीय समाज में जाति एवं वर्ग के बदलते आयाम।
  • समकालीन भारतीय समाज एवं संस्कृति में परिवर्तन – धर्मनिरपेक्षीकरण, शहरीकरण, आधुनिकीकरण और वैश्वीकरण।
  • भारतीय सामाजिक व्यवस्था से संबंधित अवधारणाएँ – कर्म का सिद्धांत, धर्म, पुरुषार्थ और आश्रम व्यवस्था।
  • वर्तमान भारतीय समाज में परिवार एवं विवाह, वृद्धजनों एवं दिव्यांगजनों से संबंधित मुद्दे, भारतीय समाज पर साइबर अपराध और सोशल मीडिया का प्रभाव।
  • भारतीय समाज के समक्ष चुनौतियाँ एवं मुद्दे – दहेज, तलाक, भ्रष्टाचार, गरीबी, वेश्यावृत्ति, बेरोजगारी और नशाखोरी।
  • भारतीय समाज के कमजोर वर्गों से संबंधित समस्याएँ (मुख्यतः राजस्थान के संदर्भ में) – महिलाएँ, सीमांत समूह, दलित, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति तथा उनके लिए कल्याणकारी योजनाएँ।

खण्ड–B : प्रबंधन

  • सामान्य प्रबंधन : प्रबंधकीय अवधारणा, प्रबंधकीय कौशल एवं स्तर, प्रबंधन के कार्य, एमबीओ (MBO), निर्णय प्रक्रिया – तकनीक व मॉडल।
  • संगठनात्मक व्यवहार : प्रकृति व क्षेत्र, अनुभूति, अभिप्रेरणा – संकल्पना एवं विचारधाराएँ, समूह गतिशीलता एवं दल निर्माण, संगठनात्मक जलवायु एवं संस्कृति।
  • विपणन प्रबंधन : अवधारणा एवं क्षेत्र, विपणन मिश्रण – उत्पाद, कीमत, संवर्धन, भौतिक वितरण, सेवा एवं डिजिटल विपणन।
  • मानव संसाधन प्रबंधन : संकल्पना एवं क्षेत्र, मानव संसाधन नियोजन, भर्ती, चयन, पदस्थापन एवं प्रशिक्षण, निष्पादन मूल्यांकन प्रणालियाँ, मानव संसाधन की आधुनिक प्रवृत्तियाँ।
  • रणनीति प्रबंधन :संकल्पना एवं क्षेत्र, व्यावसायिक वातावरण व SWOT विश्लेषण, रणनीति निर्माण एवं क्रियान्वयन, रणनीति नियंत्रण एवं मूल्यांकन।

खण्ड–C : लेखांकन एवं अंकेक्षण

  • लेखांकन का सैद्धान्तिक आधार : सामान्यतः मान्य लेखा सिद्धांत (GAAPs) एवं आधारभूत लेखांकन अवधारणाएँ।
  • लेखांकन मानक : लेखांकन मानकों का आधारभूत ज्ञान।
  • कंपनी के वित्तीय विवरण : वित्तीय विवरणों के विश्लेषण की तकनीकें, रोकड़ (कैश) प्रवाह विवरण, सामाजिक लेखांकन एवं उत्तरदायित्व लेखांकन का आधारभूत ज्ञान।
  • कम्प्यूटरीकृत लेखांकन : विशेषताएँ एवं सॉफ्टवेयर पैकेज।
  • वस्तु एवं सेवा कर (GST) का आधारभूत ज्ञान।
  • अंकेक्षण का अर्थ तथा उद्देश्य, अंकेक्षण कार्यक्रम, सामाजिक, निष्पादन एवं दक्षता अंकेक्षण का आधारभूत ज्ञान, सरकारी अंकेक्षण का प्रारंभिक ज्ञान।

सामान्य ज्ञान एवं सामान्य अध्ययन पेपर – II

इकाई I – प्रशासकीय नीतिशास्त्र
  • नीतिशास्त्र एवं मानवीय मूल्य महापुरुषों, समाज सुधारकों तथा प्रशासकों के जीवन से प्राप्त शिक्षा। परिवार, सामाजिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं का मानवीय मूल्यों को विकसित करने में योगदान।
  • नैतिक संप्रत्यय – ऋत एवं ऋण, कर्मवाद से प्रेरणा, कर्तव्य की अवधारणा, शुभ एवं सद्गुण की अवधारणा।
  • निजी एवं सार्वजनिक संबंधों में नीतिशास्त्र की भूमिका, सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और असंलग्नता का दार्शनिक आधार। आदर्श समाज – पारदर्शिता, मीडिया और नौकरशाही।
  • भगवद् गीता का नीतिशास्त्र एवं प्रशासन में इसकी भूमिका।
  • गांधी का नीतिशास्त्र।
  • भारतीय एवं विश्व के नैतिक चिंतकों और दार्शनिकों का योगदान।
  • प्रशासन में नैतिक चिंताएँ, द्वंद्व एवं चुनौतियाँ, प्रशासनिक निर्णय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता बनाम अंतर्विवेक।
  • नैतिक निर्णय–प्रक्रिया – सामाजिक न्याय, मानवीय चिंतन, शासन में जवाबदेही, उपकरणपरक बुद्धिमत्ता बनाम मूल्यपरक बुद्धिमत्ता।
  • उपर्युक्त विषयों पर आधारित तथ्यपरक केस अध्ययन।
इकाई II – सामान्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
  • दैनिक जीवन में रसायन विज्ञान; परमाणु संरचना; धातु, अधातु एवं उपधातु; धातुकर्म के सिद्धांत और विधियाँ; महत्वपूर्ण अयस्क और मिश्र धातुएँ; अम्ल, क्षार और लवण; pH और बफर की अवधारणा; महत्वपूर्ण औषधियाँ (संश्लेषित एवं प्राकृतिक); एंटीऑक्सीडेंट, परिरक्षक, कीटनाशी, पीड़कनाशी, कवकनाशी, शाकनाशी, उर्वरक, योजक और मधुरक; कार्बन एवं उसके यौगिक तथा उनके घरेलू एवं औद्योगिक अनुप्रयोग; ईंधन; ऑक्टेन रेटिंग; रेडियोधर्मिता – अवधारणाएँ और अनुप्रयोग; हरित रसायन एवं उसके अनुप्रयोग।
  • दैनिक जीवन में भौतिकी – गति, कार्य, शक्ति एवं ऊर्जा; गुरुत्वाकर्षण; प्रकाश एवं उसके गुण; ऊष्मा; स्थैतिक एवं धारा वैद्युतिकी; चुम्बकत्व और विद्युत–चुम्बकत्व; ध्वनि तथा विद्युत–चुम्बकीय तरंगें; चिकित्सीय निदान में भौतिकी के अनुप्रयोग; नाभिकीय विखंडन और संलयन; विकिरण सुरक्षा।
  • कोशिका; पादप भाग – उनके कार्य एवं उपयोग; पादप पोषण एवं वृद्धि नियामक (कृषि एवं बागवानी के विशेष संदर्भ में); पौधों में लैंगिक एवं अलैंगिक प्रजनन; मानव शरीर क्रिया विज्ञान की मूलभूत अवधारणाएँ – पाचन, श्वसन, परिसंचरण, उत्सर्जन, प्रजनन, तंत्रिका तंत्र; आहार एवं पोषण; प्रतिरक्षा; रोग; जन स्वास्थ्य हेतु पहल; लाभकारी एवं हानिकारक सूक्ष्मजीव; किण्वन तकनीक; जैव प्रौद्योगिकी एवं आनुवंशिक अभियांत्रिकी – बुनियादी अवधारणाएँ और उनके अनुप्रयोग; आनुवंशिक रूप से संशोधित जीव (GMO) के नैतिक, कानूनी और सामाजिक मुद्दे (ELSI); नवीन प्रगतियाँ – टीके, CRISPR, mRNA तकनीक, कृत्रिम अंग।
  • आधारभूत कंप्यूटर विज्ञान; नेटवर्किंग; एनालॉग और डिजिटल दूरसंचार; आवृत्ति स्पेक्ट्रम; मोबाइल टेलीफोनी; सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी में नवीन विकास – आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग; बिग डेटा; क्लाउड एवं एज कंप्यूटिंग; इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT); ब्लॉकचेन और डिजिटल करेंसी; वर्चुअल एवं ऑगमेंटेड रियलिटी; ओटीटी प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया।
  • भारतीय वैज्ञानिकों का योगदान; प्रमुख भारतीय वैज्ञानिक संस्थान; वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति – रोबोटिक्स, नैनो प्रौद्योगिकी, क्वांटम कंप्यूटिंग आदि; भारत और राजस्थान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का विकास; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित सरकारी नीतियाँ; डिजिटल इंडिया पहल; साइबर सुरक्षा एवं डेटा गोपनीयता।
  • अंतरिक्ष एवं रक्षा प्रौद्योगिकी भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम; उपग्रह एवं उनके अनुप्रयोग; विभिन्न प्रक्षेपण यान; सुदूर संवेदन (रिमोट सेंसिंग); रक्षा अनुसंधान एवं स्वदेशी प्रौद्योगिकियाँ; भारतीय मिसाइल कार्यक्रम; ड्रोन तकनीक; रासायनिक और जैविक हथियार।
इकाई III – पृथ्वी विज्ञान (भूगोल और भूविज्ञान)

खण्ड–A : विश्व

  • पृथ्वी की आंतरिक संरचना एवं भूवैज्ञानिक समय सारिणी।
  • प्रमुख भौतिक भू–आकृतियाँ – पर्वत, पठार, मैदान, मरुस्थल : प्रकार तथा वितरण।
  • भूकंप एवं ज्वालामुखी – प्रकार, वितरण एवं उनका प्रभाव।
  • जलवायु – सौर विकिरण, वायुमंडलीय परिसंचरण, आर्द्रता तथा वर्षण।
  • प्रमुख पर्यावरण संबंधी मुद्दे।

खण्ड–B : भारत

  • भारत का भौ–आकृतिक विभाजन।
  • अपवाह प्रतिरूप तथा प्रमुख नदियाँ।
  • जलवायु – मानसून, जलवायु विशेषताएँ, वर्षा का वितरण एवं जलवायु प्रदेश।
  • प्राकृतिक संसाधन – प्रकार एवं उपयोग; जल, प्राकृतिक वनस्पति, मृदा, खनिज तथा ऊर्जा संसाधन।
  • जनसंख्या – वृद्धि, वितरण, घनत्व, लिंगानुपात, साक्षरता, नगरीय एवं ग्रामीण जनसंख्या।

भाग C – राजस्थान

  • भौतिक विभाजन।
  • प्रमुख नदियाँ एवं झीलें।
  • जलवायु विशेषताएँ एवं उनका वर्गीकरण।
  • प्राकृतिक वनस्पति, वन्यजीव तथा जैव विविधता।
  • मृदा संसाधन।
  • कृषि – प्रमुख फसलें : उत्पादन व वितरण।
  • खनिज संसाधन – प्रकार, वितरण एवं उनका औद्योगिक उपयोग।
  • जनसांख्यिकी विशेषताएँ।
  • जनजातियाँ।
  • यूनेस्को की भू–पार्क एवं भू–धरोहर स्थल की संकल्पना : राजस्थान में संभावनाएँ।
  • पर्यटन।

सामान्य ज्ञान एवं सामान्य अध्ययन पेपर – III

इकाई I – भारतीय राज्य व्यवस्था, शासन, भारत एवं अंतर्राष्ट्रीय मामले और समसामयिक मामले।

भारतीय संविधान की उत्पत्ति, संरचना और प्रमुख सिद्धांत

  • संविधान सभा, प्रभाव स्रोत, दार्शनिक आधार, मौलिक अधिकार, राज्य के नीति–निर्देशक तत्व तथा मौलिक कर्तव्य।
  • आधारभूत संरचना सिद्धांत, संशोधन प्रक्रिया और प्रमुख संवैधानिक परिवर्तन।
  • नवीन संवैधानिक विकास एवं न्यायिक निर्णय, संवैधानिक नैतिकता और रूपांतरणकारी संवैधानिकता।

संस्थागत रूपरेखा एवं शासन तंत्र

  • राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद और संसद।
  • भारत में संघवाद की उभरती प्रवृत्तियाँ।
  • उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय, न्यायिक पुनर्विलोकन, न्यायिक सक्रियता, आभासी न्यायालय, ई-कोर्ट्स और ई-समिति।

भारतीय राजनीति की गतिशीलता

  • भारत के लोकतंत्र में दलीय प्रणाली के विकास द्वारा चिह्नित समकालीन बदलाव, उभरता क्षेत्रवाद और गठबंधन पुनर्संयोजन।
  • पहचान-आधारित राजनीति से मुद्दा-केंद्रित एवं समावेशी राजनीति की ओर परिवर्तन, साथ ही लैंगिक भागीदारी में वृद्धि तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सक्षम राजनीतिक लामबंदी के सामाजिक-राजनीतिक निहितार्थ।
  • मतदान व्यवहार, चुनाव सुधार और भारत की निर्वाचन प्रक्रिया की कार्यप्रणाली।
  • भारतीय राजनीति में विकसित समकालीन प्रतिमान।
  • आंतरिक सुरक्षा – खतरे, सुरक्षा बलों एवं एजेंसियों का अधिदेश और भूमिका तथा आंतरिक सुरक्षा प्रबंधन की चुनौतियाँ।

राजस्थान में राज्य राजनीति और शासन

  • राजनीतिक सहभागिता के प्रतिमान, नेतृत्व एवं मतदान व्यवहार।
  • राज्य में राजनीतिक दलों की भूमिका और गठबंधन की राजनीति।
  • पंचायती राज एवं नगरीय स्थानीय स्वशासन – संरचना, मुद्दे और चुनौतियाँ।
  • राजस्थान की राजनीति में नवीन आयाम और चुनौतियाँ।
  • राजस्थान में सार्वजनिक नीति का रूपांकन – संस्थाएँ, प्रक्रियाएँ, हितधारक और क्रियान्वयन संबंधी बाधाएँ।
  • प्रमुख ई-शासन पहल – उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ।

भारत और अंतर्राष्ट्रीय मामले

  • शीत युद्ध के बाद के परिवर्तन, अमेरिका का प्रभुत्व, बहुध्रुवीयता, वैश्विक राजनीतिक अर्थव्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद।
  • भारतीय विदेश नीति के निर्धारक तत्व एवं विशेषताएँ, प्रमुख वैश्विक शक्तियों एवं पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंध, प्रवासी भारतीय समुदाय और सांस्कृतिक कूटनीति।
  • क्षेत्रीय और वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका – UN, WTO, EU, ASEAN, BRICS, G20, QUAD, I2U2, AUKUS, DAKSHIN।
  • जलवायु एवं हरित कूटनीति में भारत का नेतृत्व – COP शिखर सम्मेलन, ISA, Mission LiFE।
  • भारत की विदेश नीति में समकालीन रणनीतिक पहल।

समसामयिक मामले एवं मुद्दे

  • महत्वपूर्ण समसामयिक घटनाएँ, मुद्दे और प्रमुख हस्तियाँ।
  • राजस्थान की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाएँ और सरकारी पहल।
  • पुरस्कार, प्रमुख साहित्यिक योगदान, तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) में महत्वपूर्ण प्रगति।
  • भारत और राजस्थान की खेल नीतियाँ, प्रमुख संस्थान, तथा महत्वपूर्ण खेल आयोजन और उपलब्धियाँ।
  • स्वास्थ्य, आरोग्यता और तनाव प्रबंधन में योग की भूमिका।

इकाई II – लोक प्रशासन की अवधारणाएँ मुद्दे एवं गत्यात्मकता 

लोक प्रशासन : विचारधाराएँ एवं सिद्धांत

  • लोक प्रशासन – अर्थ, प्रकृति, क्षेत्र एवं महत्व; लोक प्रशासन का एक अनुशासन के रूप में उद्भव; विकासशील एवं विकसित समाजों में इसकी भूमिका; नव लोक प्रशासन, नव लोक प्रबंधन, सुशासन तथा नई लोक सेवा।
  • विचारधाराएँ एवं उपागम – वैज्ञानिक प्रबंधन, मानव संबंध, व्यवहारवादी उपागम, संरचनात्मक–प्रकार्यात्मक उपागम तथा पारिस्थितिकी उपागम।
  • संगठन के सिद्धांत – पदसोपान, आदेश की एकता, नियंत्रण का क्षेत्र, प्रत्यायोजन, केंद्रीकरण एवं विकेंद्रीकरण, समन्वय, प्राधिकार एवं उत्तरदायित्व तथा जवाबदेही।
  • प्रशासनिक व्यवहार – नेतृत्व, संचार और मनोबल।

संघ सरकार एवं प्रशासनिक संस्थाएँ

  • प्रशासनिक संस्थाएँ – संघ लोक सेवा आयोग, भारत निर्वाचन आयोग, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, वित्त आयोग, लोकपाल, नीति आयोग।
  • कार्मिक प्रशासन – भर्ती, प्रशिक्षण, पदोन्नति, सिविल सेवाओं में तटस्थता एवं अनामता, आचरण संहिता।
  • प्रशासन के मुद्दे – संघ–राज्य संबंध, मंत्री–लोक सेवक संबंध, सामान्यज्ञ–विशेषज्ञ विवाद, प्रशासनिक सुधार, सामाजिक अंकेक्षण।
  • प्रशासन पर नियंत्रण – विधायी, कार्यकारी और न्यायिक नियंत्रण।

तुलनात्मक लोक प्रशासन

  • संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए), यूनाइटेड किंगडम (यूके), फ्रांस और चीन के प्रशासनिक तंत्र की विशेषताएँ।

राज्य एवं जिला प्रशासन

  • राज्य प्रशासन – राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद, राज्य सचिवालय, मुख्य सचिव, निदेशालयों की भूमिका, पुलिस प्रशासन, राजस्व मंडल, राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, लोकायुक्त।
  • जिला प्रशासन – जिलाधीश, कानून एवं व्यवस्था प्रशासन, राजस्व प्रशासन, विकास प्रशासन।
इकाई III – व्यवहार एवं विधि

खण्ड–A : व्यवहार

  • बुद्धि : संज्ञानात्मक बुद्धि, सामाजिक एवं भावनात्मक बुद्धि, सांस्कृतिक बुद्धि, प्रशंसात्मक बुद्धि तथा आध्यात्मिक बुद्धि; कार्यस्थल पर उनका महत्व और उनका समावेश (अंतःएकीकरण)।
  • नेतृत्व प्रोफाइल : सिद्धांत, प्रकार और शैलियाँ; कार्यस्थल पर उनकी चुनौतियाँ और प्रभावशीलता; भविष्य के नेता, उनके अवसर और चुनौतियाँ।
  • कार्यस्थल पर संचार : संचार के मॉडल और नेटवर्क तथा उनकी प्रभावशीलता; संचार की बाधाएँ और विकृतियाँ; इलेक्ट्रॉनिक तथा विनाशकारी संचार – साइबर स्लैकिंग, साइबर लोफिंग, मूनलाइटिंग आदि।
  • कार्यस्थल पर उत्कर्ष : गुण और शक्तियाँ, RAISEC मॉडल तथा व्यक्ति–अनुकूल–वातावरण।
  • कार्यस्थल पर बर्नआउट, तनाव और उससे निपटना : व्यावसायिक तनाव के स्रोत और उससे निपटने की शैलियाँ; व्यक्तित्व और तनाव; कार्यस्थल पर लैंगिक मुद्दे।

खण्ड–B : विधि

  • समकालीन विधिक मुद्दे (Legal Issues)
    • सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 – धारा 1 से 20
    • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 –धारा 1
    • धारा 2 (परिभाषाएँ) : संचार उपकरण, कंप्यूटर, कंप्यूटर तंत्र, कंप्यूटर साधन, कंप्यूटर प्रणाली, साइबर कैफे, साइबर सुरक्षा, डेटा, डिजिटल हस्ताक्षर, इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख, इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर, सूचना, निजी कुंजी, सार्वजनिक कुंजी।
    • धारा 65, 66, 66 (B–F), 67, 67 (A–C), 71 से 78
  • बौद्धिक संपदा अधिकार – संकल्पना, प्रकार और प्रयोजन
  • स्त्रियों एवं बालकों के विरुद्ध अपराध—
    • घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005: धाराएँ 1–29, 31
    • महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013: धाराएँ 1–9, 11–20
    • लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012: धाराएँ 1–15
  • माता–पिता एवं वरिष्ठ नागरिक का भरण–पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007: धाराएँ 1–25
  • राजस्थान में महत्वपूर्ण भूमि विधियाँ—
    • राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955:
      • धारा 1
      • धारा 5— परिभाषाएँ : कृषि वर्ष, कृषि, कृषक, सहायक कलेक्टर, बोर्ड, कलेक्टर, आयुक्त, फसल, गोचर, गोचर भूमि, होल्डिंग, इजारा या ठेका, सुधार, भूमि, स्वयं काश्त भूमि, भूमिधारी, भूमिहीन व्यक्ति, अधिवासित भूमि, चारागाह भूमि, रेंट, राजस्व, राजस्व अपीलीय प्राधिकारी, राजस्व न्यायालय, राजस्व अधिकारी, सायर, बन्दोबस्त, उपखण्ड अधिकारी, उप किरायेदार, तहसीलदार, किरायेदार, अतिक्रामी, नालबट
      • धाराएँ 14–17A, 31–37, 38–54A, 206–232, 239–242
    • राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, 1956
      • धारा–1
      • धारा–2
      • धारा–3— निर्वचन: भूमिलेख अधिकारी, नगरपालिका, नजूल भूमि, पंचायत सर्किल, राजस्व अपील प्राधिकारी, बन्दोबस्त प्राधिकारी, गांव।
      • धाराएँ– 4–36, 40A, 74–87, 106–137, 142–183
    • भारतीय न्याय संहिता, 2023
      • धारा–1
      • धारा–2 परिभाषाएँ: बालक, न्यायालय, दस्तावेज, लिंग, सद्भावपूर्वक, सरकार, न्यायाधीश, व्यक्ति, लोक, लोकसेवक, मूल्यवान प्रतिभूति
      • धाराएँ 189–191, 194–197, 270, 294–296
    • भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
      • धारा–1
      • धारा–2 परिभाषाएँ: श्रव्य दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधन, जमानत, जमानतीय एवं अजमानतीय अपराध, जमानत पत्र, बंध पत्र, आरोप, संज्ञेय अपराध, परिवाद, इलेक्ट्रॉनिक संसूचना, जाँच, अन्वेषण, असंज्ञेय अपराध, उपखण्ड, समन मामला, वारंट मामला।
      • धाराएँ 3 (2) (क), (ख), 14–17, 41–43, 126–129, 148, 149, 152, 163–167, 173, 174, 187, 194–196
  •  

सामान्य हिंदी और सामान्य अंग्रेजी

यूनिट I – सामान्य हिन्दी (कुल अंक 90)

सामान्य हिन्दी: कुल अंक 90, इस प्रश्न पत्र का उद्देश्य अभ्यर्थी की भाषा-विषयक क्षमता तथा उसके विचारों की सही, स्पष्ट एवं प्रभावपूर्ण अभिव्यक्ति की परख करना है।

भाग अ— (अंक 30)

  • उपसर्ग एवं प्रत्यय – शब्दों में से उपसर्ग एवं प्रत्यय पृथक करना
  • समश्रुत भिन्नार्थक शब्द का वाक्यों में प्रयोग द्वारा अर्थ स्पष्ट करना
  • शब्द शुद्धि
  • वाक्य शुद्धि
  • मुहावरे – मुहावरों का प्रयोग से अर्थ स्पष्ट
  • कहावत / लोकोक्ति प्रयोग से अर्थ स्पष्ट
  • पारिभाषिक शब्दावली – प्रशासन से संबंधित अंग्रेजी शब्दों के समानार्थ हिन्दी पारिभाषिक शब्द

भाग ब— (अंक 30)

  • संक्षेपीकरण – गद्यावतरण का लगभग एक-तिहाई शब्दों में संक्षेपीकरण (गद्यावतरण की शब्द सीमा लगभग 150 शब्द)
  • पल्लवन – किसी सूक्ति, काव्य पंक्ति, प्रसिद्ध कथन आदि का भाव विस्तार (शब्द सीमा–लगभग 100 शब्द)
  • अनुवाद – दिए हुए अंग्रेजी अनुच्छेद का हिन्दी में अनुवाद।(शब्द सीमा–लगभग 50 शब्द)

भाग स- (अंक 30)

  • पत्र-लेखन – सामान्य कार्यालयी पत्र, कार्यालय आदेश, अर्द्धशासकीय पत्र, अनुस्मारक, प्रतिवेदन (रिपोर्ट)
  • प्रारूप-लेखन – अधिसूचना, निविदा सूचना, परिपत्र, प्रेस विज्ञप्ति, कार्यालय ज्ञापन
इकाई II – सामान्य अंग्रेजी (कुल अंक 70)

Part A-Grammar & Usage (20 Marks) 

  • Preposition
  • The same word used as different part of speech
  • Phrasal Verbs & Idioms (application)
  • One Word Substitute (application)
  • Words often Confused or Misused (application)

Part B-Comprehension, Translation & Precis Writing (30 Marks)

  • Comprehension of an Unseen Passage (300 Words approximately)
  • 05 Questions based on the passage and Precis Writing (of the same passage) approximately 100 words.
  • Translation of five sentences from Hindi to English.

Part C-Composition & Letter Writing (20 Marks)

  • Elaboration of a given theme (Any 1 out of 3, approximately 150 words).
  • Writing: Official Letter/Demi-Official/ Official Memorandum/Report Writing (approximately 150 words).

प्रश्न पत्र के निबंध भाग में छः विषयगत क्षेत्र होंगे। अभ्यर्थियों को लगभग 600 शब्दों का एक निबंध हिन्दी अथवा अंग्रेजी भाषा में लिखना होगा। निबंध के विषय निम्नलिखित छः विषयों पर आधारित होंगे—

  1. भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत
  2. समाज, शासन और सार्वजनिक मामले
  3. विज्ञान, प्रौद्योगिकी, पर्यावरण और सतत विकास
  4. अर्थव्यवस्था, कृषि, उद्योग और वाणिज्य
  5. समसामयिक घटनाएं, आपदाएं और राष्ट्रीय विकास पहल
  6. राजस्थान के संदर्भ में पर्यटन, संस्कृति तथा समसामयिक मुद्दे

अभ्यर्थियों को इन विषयगत क्षेत्रों से संबंधित किसी एक विषय पर निबंध लेखन करना होगा। अभ्यर्थियों से अपेक्षित है कि वे निर्दिष्ट विषय से पूर्णतः संबंधित रहें, अपने विचारों को सुसंगत तरीके से व्यवस्थित करें और सटीकता और संक्षिप्तता के साथ प्रस्तुत करें। विचारों की स्पष्टता, संरचना की सुसंगतता और अभिव्यक्ति की प्रभावशीलता के आधार पर अंक प्रदान किए जाएंगे।

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