लोक देवता

राजस्थान के लोक देवता राज्य की लोक आस्था, परंपराओं और जनजीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। राजस्थानी कला व संस्कृति के अंतर्गत लोक देवताओं की पूजा-परंपरा सामाजिक एकता, लोकविश्वास और नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करती है। पाबूजी, तेजाजी, रामदेवजी और गोगाजी जैसे लोक देवता आज भी राजस्थान के ग्रामीण जीवन और लोकसंस्कृति में विशेष श्रद्धा के साथ पूजे जाते हैं।

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  • अलौकिक चमत्कारों से परिपूर्ण एवं वीरता से युक्त कार्य करने वाले महापुरुष, जनमानस में लोकदेवता के रूप में जाने गए
  • राजस्थान के पंचपीर (पाबूजी, हड़बूजी, रामदेवजी, मेहाजी, गोगाजी)

“पाबू₁ हड़बू₂ रामदे₃, मंगल्या मेहा₄।
पंच पीर पधारजियो, गोगाजी₅ जिहां॥”

पाबूजी राठौड़

  • जन्म 1239 ई. में चैत्र अमावस्या, कोलुमण्ड गाँव (फलोदी) 
  • पिता– धाँधल जी, माता– कमलादे
  • पत्नी- फूलमदे / सुप्यार दे (अमरकोट के राजा सूरजमल सोढ़ा की पुत्री)
  • घोड़ी – केसर कालमी (काले रंग की घोड़ी), देवल चारण नामक महिला ने दी, जो जायल (नागौर) के काछेला चारण की पत्नी थी
  • प्रतीक चिह्न – भाला लिए हुए अश्वारोही तथा बायीं ओर झुकी हुई पाग
  • अन्य नाम –  लक्ष्मण का अवतार, ऊँटों के देवता, गौरक्षक देवता एवं प्लेग रक्षक देवता, हाड-फाड के देवता
  • मारवाड़ में ऊँट लाने का श्रेय, राईका / रेबारी (ऊँटों की पालक जाति) या देवासी समाज के आराध्य देव
  • वीरगति – 1276 ई. में जोधपुर के देचू गाँव में देवल चारण की गायों को अपने बहनोई जींदराव खींची से छुड़ाते हुए
    • भाई बूड़ोजी भी वीरगति को प्राप्त
    • पत्नी इनकी पगड़ी (वस्त्र) के साथ सती हुई 
    • बाद में पाबूजी के भतीजे व बूड़ोजी के पुत्र रूपनाथ जी (झरड़ा जी) ने जींदराव खींची को मारकर अपने पिता व चाचा की मृत्यु का बदला लिया
  • पाबूजी के सहयोगी – हरमल, चाँदा व डामा (भील भाई) और सावंत जी राठौड़, सलखा जी सोलंकी
  • पाबूजी के पवाड़े – गाथा गीत, माठ वाद्य यंत्र के साथ 
  • पाबूजी की फड़ – सर्वाधिक लोकप्रिय फड़, रावण हत्था वाद्ययंत्र के साथ नायक जाति के भोपे द्वारा 
  • पाबू धणी री वाचना – थोरी जाति के लोगों द्वारा सारंगी के साथ पाबूजी का यशोगान
  • मेला
    • चैत्र अमावस्या, कोलुमण्ड गाँव (फलोदी)
    • कोलू के अलावा उदयपुर के आहड़ में प्रतिवर्ष
  • मेहर जाति के मुसलमान इन्हें पीर मानकर पूरा करते है
  • इन्होंने गुजरात के सात थोरी भाइयों की रक्षा की थी।
  • पाबूजी ने गुजरात के शासक मिर्जा खाँ एवं दूदा सूमरा को युद्ध में हराया था।
पुस्तकरचनाकार
पाबू प्रकाश (पाबूजी की जीवनी)आशिया मोड़जी
पाबूजी का दूहालघराज
पाबूजी रा सोरठेरामनाथ कविया
पाबूजी रा छन्दमेहाजी बीठू
पाबूजी री बातलक्ष्मी कुमारी चूंडावत

गोगाजी चौहान

  • जन्म – 946 ई. (वि.सं. 1003 में ददरेवा, चूरू 
  • पिता– जेवर जी चौहान, माता– बाछल दे
  • पत्नी– कोलुमण्ड (फलोदी) की राजकुमारी ‘केलम दे’ पुत्र – केसरिया कुंवर, पौत्र – सामंत चौहान
  • गुरु – गोरखनाथ, प्रतीक चिह्न – सर्प
  • सवारी – नीली घोड़ी, वाद्य यंत्र– डेरू, मादल
  • गोगा राखड़ी – राखी जो कि किसान वर्षा के बाद खेत जोतने से पहले हल एवं बैल को, 9 गांठों
  • ध्वजा – इनकी ध्वजा सबसे बड़ी ध्वजा मानी जाती है
  • छावली, पीर के सोल – भक्ति में गाए गए गीत
  • पूर्बिये – आंचलिक भाषा में भक्तों को 
  • अन्य नाम – जाहर पीर, नागों के देवता, नागराज का अवतार, विष्णु का अवतार, गोगा पीर, जीवित पीर, बांगड का राजा
    • जाहर पीर (साक्षात पीर) – मुस्लिम आक्रान्ता महमूद गजनवी के साथ भीषण युद्ध किया तब गजनवी द्वारा कहा गया 
  • वीरगति – मौसेरे भाइयों अर्जन-सुर्जन के विरुद्ध गायों की रक्षा करते हुए
  • सहयोगी – जवाहर पांड्या और भज्जू कोतवाल 
  • ग्रंथ –
    • गोगाजी का रसावला (कवि मेहा) और 
    • कायम रासो (जानकवि)
    • गोगाजी व महमूद गजनवी के संघर्ष का वर्णन
  • मुख्य मंदिर –
    • शीर्ष मेड़ी – जहाँ सिर गिरा (ददरेवा, चूरू)
    • धड़ मेड़ी – जहाँ शरीर गिरा (गोगामेड़ी, नोहर – हनुमानगढ़)
      • यह ‘मकबरा शैली’ में 
      • मुख्य द्वार पर बिस्मिल्लाह लिखा 
      • निर्माण फिरोजशाह तुगलक द्वारा 
      • वर्तमान स्वरूप – महाराजा गंगा सिंह बीकानेर
    • गोगाजी की ओल्डी – खिलेरियों की ढाणी (सांचौर)
  • मेला – प्रतिवर्ष गोगानवमी (भाद्रपद कृष्ण नवमी) गोगामेड़ी, हनुमानगढ़ गोगामेड़ी में
    • भाद्रपद मास में हिन्दू पुजारी 
    • अन्य मास में मुस्लिम पुजारी (चायल) पूजा करते हैं
  • गाँव – गाँव गोगो अर गाँव – गाँव खेजड़ी
    • खेजड़ी के वृक्ष के नीचे गोगाजी का निवास स्थान होने के कारण राजस्थानी कहावत
    • मूर्ति के रूप में एक पत्थर पर सर्प की आकृति अंकित 
  • सांकल नृत्य– भक्त लोहे की साँकलों के गुच्छे अपनी पीठ पर उठा-उठाकर मारते हैं जिसे छाया चढ़ना कहते हैं।
  • कायमखानी मुसलमान गोगाजी को अपना वंशज मानते हैं 

रामदेव जी

  • जन्म – 1352 ई., भाद्रपद शुक्ल द्वितीय, उंडूकाश्मीर गाँव (शिव-तहसील, बाड़मेर)
  • अन्य नाम – रामसा पीर (मुसलमान), रुणिचा रा धणी, पीरों के पीर (मक्का के पीरों को चमत्कार दिखाया), श्रीकृष्ण का अवतार (हिंदू)
  • पिता – अजमाल जी तंवर, माता – मैणादे
  • पत्नी – नेतलदे (अमरकोट के राजा दल्लेसिंह सोढ़ा की पुत्री), भाई – बीरमदेव (बलराम का अवतार), बहिनें – लाछाबाई, सुगनाबाई, धर्म बहन – डालीबाई मेघवाल 
  • गुरु – बालीनाथ (मन्दिर-मसूरिया, जोधपुर), शिष्य – हरजी भाटी, शिष्या – आईमाता
  • प्रमुख भक्त – हरजी भाटी, रतना राईका, लक्खी बंजारा
  • सवारी – लीला घोड़ा (काला + हरा) / रेवंत घोड़ा
  • देवरा – मंदिर, नेजा – रामदेवजी की पचरंगी व सफेद ध्वजा, प्रतीक चिह्न – पगल्या (पत्थर पर उत्कीर्ण पांव – क्योंकि मूर्तिपूजा के विरोधी थे)
  • जातरू – रामदेवजी के तीर्थ यात्री
  • रिखियां – रामदेवजी के मेघवाल भक्त
  • जम्मा – रामदेव जी का जागरण भाद्रपद द्वितीया व एकादशी को रात्रि 
  • पर्चा – रामदेवजी के चमत्कार
    • उन्होंने मक्का से पधारे पंचपीरों को पंचपीपली नामक स्थान पर भोजन कराते समय उनका कटोरा प्रस्तुत कर उन्हें चमत्कार दिखाया जिससे उन पीरों ने रामदेवजी को ‘पीरों का पीर’ कहा था
    • बाल्यावस्था में ही सातलमेर गाँव (पोकरण) के लोगों को भैरव नामक क्रूर व्यक्ति के आतंक से मुक्ति दिलाई
  • ब्यावले – भक्तों द्वारा गाये जाने वाले भजन
  • आंण – रामेदवजी के अनुयायी रामदेवजी की सौगंध को आंण कहते हैं
  • अन्य तथ्य – अर्जुन के वंशज माना जाता है, कपड़े का घोड़ा रामदेव जी का प्रिय, शुद्धि आंदोलन चलाया, पुजारी – तँवर राजपूत, नेतल रा भरतार (इनका एक लोकगीत), लोक गीत देवताओं में सबसे लम्बे, बाबे री बीज (भाद्रपद शुक्ल द्वितीया)
  • शिक्षाएँ –
    • तीर्थ यात्रा, मूर्ति पूजा, छूआ-छूत का विरोध किया
    • सामाजिक भेद-भाव को कम करना तथा हिन्दु-मस्लिम एकता स्थापित करने का प्रयास
    • अजपा जाप – गुरु के महत्व को स्वीकारते हुए सर्वश्रेष्ठ मार्ग बताया
  • समाधि
    • 1458 ई. में भाद्रपद शुक्ल एकादशी को, रूणिचा (जैसलमेर) में राम सरोवर की पाल पर
    • रुणिचा मंदिर का निर्माण –  महाराजा गंगासिंह बीकानेर
    • डाली बाई ने रामदेवजी के लिए नियत समाधि स्थल पर भाद्रपद शुक्ल दशमी (रामदेव जी से एक दिन पहले) समाधि ली
  • मेला
    • प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशी के मध्य रामदेवरा (जैसलमेर)
    • राजस्थान का साम्प्रदायिक सद्भाव का सबसे बड़ा मेला
  • कामड़िया पंथ –
    • स्थापना रामदेवजी द्वारा
    • प्रमुख केन्द्र – पादरला गाँव (पाली), पोकरण (जैसलमेर) एवं डीडवाना (नागौर)
    • तेरहताली नृत्य – कामड़िया जाति की महिला द्वारा 
  • फड़ – कामड़ जाति के भोपे रावण हत्था वाद्य यंत्र के साथ 
  • चौबीस बाणिया – रामदेवजी की प्रसिद्ध रचना, एकमात्र ऐसे लोक देवता जो कवि भी थे
  • अन्य पूजा स्थलमसूरिया (जोधपुर), बिराटियां (ब्यावर), बिठूजा (बालोतरा), रामदेवधामसूरताखेड़ा (चित्तौड़गढ़), हलदीना (अलवर), खुण्डियावास (डीडवाना-कुचामन, राजस्थान का मिनी रामदेवरा), छोटा रामदेवरा (जूनागढ़, गुजरात), रामदेवरा नवलगढ़ (झुंझुनू)

हड़बूजी

  • जन्म – 1391 ई. भाद्रपद कृष्ण षष्ठी को भुंडेल (नागौर) 
  • पिता – मेहाजी सांखला, माता– सौभाग्य (लादे कंवर भटियाणी), मौसेरे भाई – बाबा रामदेव जी
  • गुरु – बालीनाथ, पुजारी – साँखला राजपूत
  • ज्ञाता – शकुन शास्त्र (भविष्यवक्ता)
  • सवारी – सियार, सिया बैलगाड़ी
  • रामदेव जी की प्रेरणा से ही हड़बूजी शस्त्र त्याग कर बालिनाथ से दीक्षा लेकर जोगी बने
  • राव जोधा (जोधपुर)
    • मण्डोर जीतने का आशीर्वाद देते हुए एक कटार भेंट की 
    • मंडोर विजय पश्चात जोधा ने बैंगटी (फलोदी) की जागीर प्रदान की 
  • समाधि – 1458 ई. में (आश्विन कृष्ण तृत्तीय )
  • प्रमुख पूजा स्थल-
    • बैंगटी में हड़बूजी की गाड़ी (छकड़ा) की पूजा होती है। 
    • इस गाड़ी में हड़बूजी विकलांग गायों के लिए घास/चारा मांग कर लाते थे। (गौ सेवक देवता)
  • 1721 ई. में जोधपुर के शासक अजीत सिंह ने बैंगटी में मंदिर का निर्माण करवाया।

मेहाजी मांगलिया

  • जन्म – तापू गांव, कृष्ण जन्माष्टमी (भाद्रपद कृष्ण अष्टमी) 
  • गुहिल वंशीय मांगलिया राजपूत, मण्डोर शासक राव चूड़ा के समकालीन, कामडिया पंथ से दीक्षित 
  • पिता– केलूजी, माता– मायदे, पत्नी– हीरादे, सुहाग दे, धर्म बहन -पाना गुजरी (पुष्कर तीर्थ यात्रा के दौरान)
  • सवारी – किरड़ काबरा घोड़ा
  • वीरगति – जैसलमेर के राव राणंगदेव भाटी से पाना गुजरी की गायों की रक्षा करते हुए (रातड़िया मंगरा, बीकानेर) 
  • मेला – बापिणी,ओसियां (कृष्ण जन्माष्टमी को)
  • काव्य – वीर मेहा प्रकाश (जसदान बिठू) द्वारा  
  • मांगलिया मेहाजी – मांगलियों के ईष्ट देव होने के कारण 
  • लोक मान्यता – इनके भोपों के वंश में वृद्धि नहीं होती, गोद लेकर वंश आगे चलाते हैं।

तेजाजी

  • 5 पीरों में शामिल नहीं
  • जन्म – 1073 ई. में खड़नाल, नागौर (माघ शुक्ल चतुर्दशी)
  • पिता – ताहड़जी (नागवंशीय जाट), माता – रामकुंवरी, पत्नी – पेमलदे (पनेर के रामचन्द्र की पुत्री, सती हुई ), बहन – राजल, भोंगरी (मंदिर- खरनाल, नागौर)
  • सवारी – लीलण घोड़ी (सिणगारी)
  • पुजारी – घोड़ला, धौल्या गोत्र (धौलिया वीर)
  • अन्य नाम – काला और बाला के देवता, कृषि कार्यों के उपकारक देवता, गौरक्षक देवता, गायों का मुक्ति दाता, शिव का 11वाँ अवतार, सहरिया जाति का आराध्य देव
  • तेजा टेर – किसानों द्वारा खेतों में हल जोतते समय गाये तेजाजी के गीत 
  • मेला – श्रावण पूर्णिमा से भाद्रपद अमावस्या, परबतसर (कुचामन-डीडवाना), पशु मेला 
  • प्रतीक चिह्न – तेजाजी के हाथ में तलवार लिए अश्वारोही, जीभ पर सर्प दंशित पाषाण मूर्ति
  • प्रमुख पूजा स्थल – खरनाल (नागौर), सुरसुरा (अजमेर), सेंदरिया (अजमेर), मण्डवारिया (अजमेर), भांवता (अजमेर), परबतसर (कुचामन- डीडवाना), तेजा चौक (सबसे पुराना थान) ब्यावर, बासी दुगारी (बूँदी)
    • परबतसर – पहले मंदिर सुरसुरा में, महाराजा अभयसिंह के काल में परबतसर का हाकिम इनकी मूर्ति परबतसर ले आया तब से ही परबतसर प्रमुख पूजा स्थल 
    • मण्डवारिया – लाछा गुर्जरी की गायों को मेर के मीणाओं से छुड़ाया
    • सेन्दरिया – जीभ पर सांप (बालू नाग) ने काटा
    • सुरसरा – मृत्यु (23 अगस्त, 1103 ई. भाद्रपद शुक्ल दशमी, वि.सं. 1160)
  • डाक टिकट – 2010 भारतीय डाक विभाग (तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री: सचिन पायलट, अजमेर)
  • तेजा लिफ्ट नहर – इंदिरा गांधी नहर परियोजना की एक शाखा 
  • वीर तेजाजी फिल्म – रामराज नाहटा द्वारा 
  • लोक मान्यता – थान पर आने मात्र से ही सर्पदंश और कुत्ते के काटने का इलाज हो जाता है

देवनारायण जी

  • जन्म1243 ई. में गोठ दड़ावता आसींद, भीलवाड़ा (माघ शुक्ल षष्ठी)
  • वास्तविक नाम – उदयसिंह (जाति- बगड़ावत गुर्जर)
  • पिता – सवाईभोज, माता – सेढू देवी
  • पत्नी – पीपलदे (धार नरेश जयसिंह की पुत्री)
  • घोड़ा – लीलाधर/लीलागर
  • अन्य नाम – आयुर्वेद ज्ञाता, औषधी का देवता, विष्णु का अवतार, कमल अवतरित देवता, राज्य क्रान्ति के जनक
  • मेला – भाद्रपद शुक्ल सप्तमी
  • प्रमुख मंदिर
    • सवाईभोज का मंदिर –
      • खारी नदी के किनारे मालासेरी पहाड़ी, गोठ दड़ावता आसीन्द, भीलवाड़ा
      • मन्दिर में मूर्ति की बजाय ईंटों की पूजा नीम की पत्तियों से 
      • प्रसाद – छाछ राबड़ी
    • देवधाम मंदिर – मासी, बांडी खेराकुशी  जोधपुरिया, टोंक
    • देवडूंगरी मंदिर – चित्तौड़गढ़ (निर्माण – राणा सांगा)
    • देवमाली मंदिर – ब्यावर (देहान्त)
  • फड़
    • गुर्जर जाति के भोपे, जंतर वाद्य यंत्र 
    • सबसे प्राचीन, सबसे लम्बी फड़ (24 हाथ) तथा सर्वाधिक प्रसंगों वाली फड़
  • डाक टिकट – डाक विभाग द्वारा 1992 में ₹5 का, एकमात्र लोक देवता जिसकी फड़ पर टिकट जारी हुआ 
  • 2011 को संचार मंत्रालय द्वारा ₹5 टिकट जारी
  • 1111 वीं जयंती पर प्रधानमंत्री मोदी मालासेरी डूंगरी स्वयं आये
  • कथा: लक्ष्मी कुमारी चूंडावत—“बागड़ावत”

वीर कल्लाजी राठौड़

  • जन्म – 1544 ई. सामियाना, मेड़ता (नागौर) (विक्रम संवत् 1601, आश्विन शुक्ल अष्टमी) में दुर्गाष्टमी के दिन
  • दादा – राव अचलाजी (मेड़ता शासक राव दूदाजी के पुत्र) पिता – आससिंह, पत्नी – कृष्णा, बुआ – मीराबाई, चाचा – जयमल,
  • गुरु – भैरवनाथ
  • अन्य नाम – शेषनाग का अवतार, केहर, कल्याण  कमधज, बाल ब्रह्मचारी, योगी, विनाशक, चक्रवात युद्ध के धनी, भूत-प्रेत भगाने वाला देवता, दुल्हे के वेश में मरने वाला देवता
  • 4 हाथों एवं 2 सिरों (चतुर्भुज देवता) वाले लोक देवता – 
    • 1567-68 में अकबर द्वारा चित्तौड़ आक्रमण (चित्तौड़ का तीसरा साका), जयमल घायल हुए   
    • कल्लाजी ने जयमल को अपने कंधे पर बिठा लिया और दो तलवारे जयमल के हाथों में तथा दो तलवारे स्वयं लेकर युद्ध किया  
  • अन्य तथ्य –
    • रनेला (सलूम्बर) – इनकी सिद्ध पीठ 
    • आराध्य देवी – नागणेची माता
    • मीराबाई के भतीजे
    • हवेली – कल्ला जी का निवास स्थान 
    • मेवाड़ के उदयसिंह के समकालीन
    • चित्तौड़गढ़ किले (भैरवपोल के पास) में इनकी छतरी
    • सामलिया (डूंगरपुर) – कल्लाजी की काले पत्थर की मूर्ति, केसर तथा अफीम चढ़ाई जाती है
    • थान पर भूत-पिशाच ग्रस्त लोगों व रोगी पशुओं का इलाज
    • गुजरात के भाथी खत्री का संबंध कल्लाजी से है
  • डा. ज्योति पुंज ने कल्लाजी पर आधारित कंकु कंबध पुस्तक लिखी

मल्लीनाथ जी

  • जन्म – 1358 ई.’मारवाड़ के महेवा (बाड़मेर) 
  • पिता – राव तीड़ा जी/सलखा जी (मारवाड़ के राजा), माता – जाणीदे, पत्नी – रुपादे 
  • रुपादे भी लोकदेवी है, मंदिर तिलवाड़ा के समीप मालाजाल में स्थित 
  • गुरु – उगमसी भाटी, (1398 ई. में रूपादे की प्रेरणा से)
  • प्रमुख मंदिर –
    • तिलवाड़ा, बालोतरा (समाधि स्थल – लूणी नदी के तट पर)
    • डोडियाली गाँव, आहोर (जालौर)
  • निजामुद्दीन व फिरोजशाह तुगलक का आक्रमण
    • खिराज नहीं देने के कारण 1378 ई. में
    • मालवा के सूबेदार निजामुद्दीन व फिरोजशाह तुगलक की संयुक्त सेना की तेरह टुकड़ियों द्वारा हमला
    • मल्लिनाथ जी ने इन्हें हराया 
  • 1399 ई. में मारवाड़ में हरि कीर्तन का आयोजन किया।
  • कुंड़ा पंथ – मल्लिनाथ जी द्वारा स्थापना, एक वाममार्गी पंथ
  • मेला
    • मल्लीनाथ पशु मेला
    • चैत्र कृष्ण एकादशी से चैत्र शुक्ल एकादशी
    • सबसे पुराना पशु मेला 
  • मालाणी परगने का नाम, मलीर प्रिन्ट, मालाणी रेल एक्सप्रेस उन्ही के नाम पर

तल्लीनाथजी

  • जन्म – शेरगढ़ (जोधपुर), वास्तविक नाम – गांगदेव राठौड़ (शेरगढ़ के सामंत थे)
  • पिता – वीरमदेव, भाई – राव चूड़ा
  • गुरु – जालंधर नाथ 
  • अन्य नाम – ओरण के देवता, जालौर के प्रसिद्ध लोकदेवता, प्रकृति प्रेमी लोक देवता
  • ओरण – धार्मिक मान्यता के अनुसार पशुओं के चरने के लिए जो स्थान रिक्त छोड़ा जाता है और जिस पर खेती करना, पेड़-पौधे काटना वर्जित हो
  • प्रमुख पूजा स्थल – पाँचोटा गाँव, जालौर
    • यहाँ पंचमुखी पहाड़ी पर घोड़े पर सवार तल्लीनाथ जी की मूर्ति स्थापित है
  • एकमात्र लोक देवता जिन्होंने वृक्ष काटने पर रोक लगाई 
  • जहरीले जीव के काटने पर उपचार के लिए इनकी पूजा की जाती है

रूपनाथ जी (झरड़ाजी)

  • जन्म – कोलूमण्ड फलौदी 
  • पाबूजी के भतीजे एवं बूढ़ोजी राठौड़ के पुत्र 
  • इन्हें हिमाचल प्रदेश में बालकनाथ के रूप में पूजा जाता है।
  • इन्होंने जींदराव खींची को मारकर पाबूजी की मृत्यु का बदला लिया था।
  • प्रमुख पूजा स्थल-
    • कोलू मंड, फलौदी
    • सिंभूदड़ा, नोखा (बीकानेर)

वीर फत्ता जी

  • जन्म– साँठू गाँव (जालौर), गज्जारणी परिवार में 
  • मेला – प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल नवमी को 
  • जालौर के लोक देवता

झुंझार जी

  • जन्म – इमलोहा गाँव (सीकर)
  • मुख्य मंदिर – स्यालोदड़ा गाँव (सीकर)
    • गायों की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त 
    • पाँच स्तंभ का मंदिर, मंदिर में दूल्हा-दुल्हन एवं तीन भाइयों की मूर्तियों की पूजा की जाती है 
    • मेला – रामनवमी को
  • स्थान सामान्यत: खेजड़ी के पेड़ के नीचे

बिग्गाजी

  • जन्म – 1301 ई. रीडी गाँव (बीकानेर) में 
  • पिता – राव महेन्द्र, माता – सुल्तानी देवी
  • जाखड़ समाज (जाट) के कुल देवता 
  • इन्होंने मुस्लिम लूटेरों से गायों की रक्षा की थी। (1393 ई. राठाली जोहड़ी, बीकानेर)
  • मेला – 
    • प्रतिवर्ष 14 अक्टूबर 
    • बिग्गा गाँव (पुराना नाम गोमटिया) श्री डूंगरगढ़ बीकानेर

डूंगरजी -जवाहरजी

  • डूंग जी: बाथोट, जवाहर जी: पाथोड़ा
  • दोनों गाँवों के सामंत
  • प्रमुख मंदिर – बाठोठ-पाटोदा (सीकर)
  • सहयोगी – करणा मीणा, लोहट जाट, बालूजी नाई एवं सांखूजी लौहार
  • गरीबों के देवता – धनवानों व अंग्रेजों से धन लूटकर गरीबों में बांट देते (रॉबिन हुड से तुलना)
  • अंग्रेजों ने डूंग जी को आगरा जेल में बंद किया
  • जवाहर जी (भतीजा) ने कर्ण मीणा, सविता बाई एवं लोहट जाट के साथ आगरा जेल से मुक्त कराया 
  • इन्होंने अंग्रेजों की आगरा जेल एवं नसीराबाद छावनी(1847) लूटी 
  • शरण: महाराजा रतन सिंह (बीकानेर) एवं तख्त सिंह (जोधपुर)

हरिराम बाबा

  • जन्म -1602 ई. झोरड़ा (नागौर)
  • पिता– रामनारायण, माता– चंदणी, गुरु – भूरा
  • मेला – प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल पंचमी
  • मंदिर
    • झोरड़ा (नागौर)
    • मूर्ति की जगह सर्प की बांबी (सर्प रक्षक देवता) प्रतीक के रूप में इनके चरण कमल की पूजा

पनराज जी

  • जन्म – नगा गाँव (जैसलमेर)
  • तोतले बच्चों के लोक देवता 
  • प्राणोत्सर्ग – लूटेरों से काठौड़ी गाँव के ब्राह्मणों की गायें छुड़ाते
  • मेला
    • पनराजसर गाँव में प्रतिवर्ष 2 बार
    • भाद्रपद शुक्ल दशमी, माघ शुक्ल दशम – बिना छत का मंदिर

केसरिया कुंवरजी

  • प्रमुख स्थान- ब्रह्मसर, हनुमानगढ़ और ददरेवा, चूरु
  • लोकदेवता गोगाजी के पुत्र, सर्परक्षक देवता।
  • इनके भोपे सर्पदंश से पीड़ित व्यक्ति का उपचार करते हैं।
  • इनके थान पर सफेद रंग की ध्वजा फहराते हैं।

आलम जी

  • अन्य नाम – जैतमालोत राठौड़, घोड़ा रक्षक देवता 
  • मालाणी प्रदेश के राड़धरा क्षेत्र में लोकदेवता
  • प्रमुख मंदिर:
    • धोरीमन्ना, बाड़मेर
    • थान – ढांगी नाम रेतीले टीले पर 
    • मेला – भाद्रपद शुक्ल दूज

भूरिया बाबा(गौतमेश्वर)

  • इष्ट देव: मीणा समुदाय के
  • प्रमुख मंदिर:
    • पोसालिया गाँव (शिवगंज, सिरोही)
      • सूकड़ी नदी के दाहिने किनारे पर
    • अरनोद (प्रतापगढ़) 
      • आदिवासियों का पाप विमोचक तीर्थ, पापमुक्ति कुण्ड में स्नान कर पाप मुक्त
  • मेला – पोसालिया गाँव, अप्रैल-मई में, वर्दीधारी पुलिस वालों का प्रवेश वर्जित
  • मीणा समुदाय कभी भी इनकी झूठी कसम नहीं खाते

देव बाबा

  • प्रमुख मंदिर: नांगला जहाज, भरतपुर
  • अन्य नाम – ग्वालों के देवता, पशुपालकों के पालनहार, पशु चिकित्सक 
  • मेला: 2 बार, भाद्रपद शुक्ल पंचम एवं चैत्र शुक्ल पंचम 
  • पशुपालक समुदाय द्वारा पूजित
  • प्रसन्न करने हेतु: 7 ग्वालों को भोजन कराना

इलोजी

  • हिरण्यकश्यप की बहिन होलिका के होने वाले पति थे 
  • मारवाड़ क्षेत्र में’ ‘छेड़छाड़ के लोकदेवता’ नाम से पूजा 
  • महिलाएं अच्छे पति व पुरुष अच्छी पत्नी की प्राप्ति के लिए
  • इलोजी की बारात – होली पर, बाड़मेर

खेत्रपाल / क्षेत्रपाल

  • क्षेत्र या ग्राम रक्षक लोकदेवता या स्थान विशेष के देवता 
  • क्षेत्रपालों में भैरव जी, झुंझार जी, मामाजी प्रमुख है
  • भैरवजी सम्पूर्ण राजस्थान में पूजनीय क्षेत्रपाल है।
  • सोनाना के क्षेत्रपाल
    • मारवाड़ राज्य में सर्वाधिक प्रसिद्ध
    • जोधपुर राजघराने के मांगलिक अवसरों पर इनकी पूजा 
    • मेला – सारंगवास गाँव पाली, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से द्वितीया
  • क्षेत्रपाल के सर्वाधिक मंदिर डुंगरपूर जिलें में 
  • मारवाड़ में कहावत प्रचलित “आधे में देवी देवता तथा आधे में खेतला”
  • खेतला ग्राम रक्षक लोक देवता के रूप में प्रतिष्ठित है।

भोमिया जी

  • भूमि के रक्षक देवता
  • नाहर सिंह भोमिया – जयपुर नाहरगढ़ दुर्ग के समीप
  • सूरजमल जी भोमिया – दौसा दुर्ग के समीप

मामा देव / वर्षा के देवता

  • मंदिर नहीं; गाँव के बाहर तोरण / मेहराब की पूजा
  • प्रमुख मंदिर: स्यालोदड़ा, सीकर
  • बैल की बलि

लोक देवता के जन्म वर्ष –

  • गोगा जी – 946 ई.
  • तेजाजी – 1073 या 1074 ई.
  • देव नारायण जी – 1243 ई.
  • पाबूजी – 1239 ई:
  • रामदेव जी – 1352 ई.
  • मल्लिनाथ जी – 1358 ई.
  • मेहाजी 14 वीं सदी
  • हडबू जी – 1391 ई.
  • कल्ला जी राठौड़ – 1544 ई.
  • तल्लीनाथ जी – 1544 ई.

लोक देवताओं के वाहनों के नाम

  • गोगा जी – नीली घोड़ी / गोगा बप्पा
  • तेजाजी – लीलण / सिणगारी
  • पाबू जी – केसर कालमी
  • मेहाजी – किरड़ काबरा
  • रामदेवजी – नीला/लीला/रेवंत घोड़ा
  • देवनारायण जी – लीलागर घोड़ा
  • हडबू जी – सिया बैलगाड़ी/सियार

लोक देवताओं से जुडे साहित्य

रामदेव जी –

  • चौबीस वाणिया – रामदेव जी
  • रामदेव जी के ब्यावले – पूनमचंद
  • रामदेव जी चरित – ठा. रूदसिंह तोमर
  • श्री रामदेव प्रकाश – पुरोहित राम सिंह
  • श्री रामदेव जी री वेली – हरजी भाटी
  • रामसा पीर अवतार लीला ब्राह्मण गौरीदास

पाबूजी राठौड़ –

  • पाबू प्रकाश – आशिया मोडजी
  • पाबूजी रा सोरठा – रामनाथ कविया
  • पाबूजी रो छंद – बीठू मेहाजी
  • पाबूजी रा दूहा – लखराज
  • प्रणवीर पाबूजी – निर्मोही व्यास
  • पाबूजी रा रूपक – मोतीसर बगरासर
  • असली पाबू प्रकाश – बंशीधर शर्मा
  • पाबू जी री बात – लक्ष्मी कुमारी चुण्डावत
  • पाबू जी री फड़ – डॉ. महेन्द्र भानावत
  • पाबू जी री वेली – मुकंद सिंह

तेजाजी 

  • वीर तेजा – सूर्यराज व्यास 
  • जुंझार तेजा – लज्जाराम मेहता 

गोगाजी चौहान –

  • गोगा जी रा रसावला – कवि मेह [ बीठू मेहा]
  • गोगाजी चौहान री वीर गाथा चन्दूदान चारण
  • गोगा जी री पेड़ी आशानंद बारहठ

देवनारायण जी –

  • बगड़ावत लोक गाथा – – लक्ष्मी कुमारी चुण्डावत

मेहाजी –

  • ग्रंथ मेहाजी मांगलिया महेन्द्र सिंह छायण

कल्ला जी –

  • कंकु कंबध – डॉ. ज्योति पुंज

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